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अविनाषी किताब

THE INDESTRUCTIBLE BOOK
(Hindi)

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की षाम, 4 नोव्हेबंर, 2012 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, November 4, 2012


‘‘फिर योषिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य को चौथे बरस में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझे से योषिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्त्राएल और यहूदा और सब जातियों के विशय में कहे है, सब को उस मे ंलिखा। क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं, उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ’’ (यिर्मयाह 36:1-3)।

यहूदा के राश्ट्र ने परमेष्वर के सामने पाप किए। ये समय था बड़े पाप, स्वधर्म त्याग और द्रोह का। हम उस प्रकार के समय में जी रहे है आज रात। परन्तु व्याकुलता के बीच हमारे पास है ये पवित्रषास्त्र का अध्याय, यिर्मयाह पाठ छत्तीस।

मैंने ये अध्याय बार बार पढ़ा जब मैं बाइबल - अस्वीकार मे हाजरी दे रहा था सधर्न बेप्टीस्ट धार्मिक पाठषाला में 1970 के प्रारंभ में। प्राध्यापक सब सुबह को बाइबल पर हमला करेंगे पढने के कक्ष में। परन्तु जब मैं अपने कक्ष में वापस गया मुझे यह अध्याय बार बार पढ़ने पर बहुत षान्ति मिली हर रात पढने के समय पर। ये बाइबल में महान् अध्याय है। ये हमें कहता है बाइबल कहाँ से आया। ये हमें कहता है क्यों नीच आदमी ने बाइबल से नफरत की, और उन्होंने इसे नश्ट करने कैसे प्रयत्न किए। परन्तु ये हमें यह भी बताता है प्रभु बाइबल को कैसे बचाते है, और जो अस्वीकार करते है उनको दृश्ट करते है।

सामान्यतौर पर मैं बाइबल के पूरे पाठ से प्रचार नहीं करता, परंतु हमें आज रात ये करना आवष्यक है क्योंकि ये अध्याय इतना बहुमूल्य है, और स्वधर्म के इस समय में इतना आवष्यक है जिसमें आज हम जी रहे है। फिर मेरे साथ आओ, जैसे हम ये पाठ पढते है, जो हमें स्पश्टता से दिखाता है कि बाइबल हमारे परमेष्वर का अविनाषी वचन है! पाठ कम से कम चार प्रष्नो का जवाब देता है।

1. पहला, बाइबल कहाँ से आया।

उत्तर दिया है यिर्मयाह 36:1-2 में। उन पदों को देखिये।

‘‘फिर योषिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य को चौथे बरस में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझे से योषिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्त्राएल और यहूदा और सब जातियों के विशय में कहे है, सब को उस में लिखा।’’
(यिर्मयाह 36:1-2)।

ये वचन यिर्मयाह के पास परमेष्वर से आये है, ‘‘लिख ... मैं तुझ से बात करने लगा उस समय से।’’ यह वर्णन है बाइबल की प्रेरणा के। प्रेरितो पौलुसने कहा,

‘‘और बचपन से पवित्रषास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विष्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिये बुद्धिमान बना सकता है। सम्पूर्ण पवित्रषास्त्र परमेष्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेष, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की षिक्षा के लिये लाभदायक है’’ (2 तीमुथियुस 3:15-16)।

यहाँ प्रेरितो हमसे कहता है कि सम्पूर्ण ‘‘पवित्रषास्त्र’’ दिया गया है परमेष्वर की प्रेरणा द्वारा। ‘‘प्रेरणा’’ के लिये ग्रीक षब्द अनुवाद किया गया है वो है ‘‘थीयोप्न्युस्टोस’’ (Theopneustos)। इसका अर्थ है ‘‘परमेष्वर ने साँस ली’’। उसका अर्थ है कि स्वयं पवित्रषास्त्र प्रभु की साँसो द्वारा बाहर आया है। पौलुसने तीमुथियुस से कहा कि उनका स्वयं का लिखना प्रभु की साँसो द्वारा बाहर आया था। लिखना आदमी से नहीं आया, और फिर प्रभु ने उस साँसो से बहुत षब्द निकाले और आदमी ने उसे लिखा।

यीषु ने ये स्पश्ट किया जब उन्होंने कहा, ‘‘मनुश्य केवल रोटी ही से नहीं, परंतु हर एक वचन से जो परमेष्वर के मुख से निकलता है, जीवित रहेगा (मती 4:4)। पवित्रषास्त्र का हर एक षब्द ‘‘परमेष्वर के मुख से निकलता है’’। फिर, 2 पतरस 1:21 में हमने पढ़ा कि पवित्रषास्त्र की भविश्यवाणी ‘‘कोई भी भविश्यवाणी मनुश्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे तब जाकर परमेष्वर की ओर से बोलते थे’’ षब्द अनुवाद किया गया है ‘‘मुव्ड’’ (चलाना) वो ग्रीक में है ‘‘फेरो’’ (Phero)। इसका अर्थ है ‘‘साथ में लेना’’ (Carry along)। इसलिये, प्रभु के पवित्र आदमी पवित्र आत्मा द्वारा ले जाये गये जैसे प्रभु ने उनको षब्द दिये लिखने के लिये। प्रभुने भविश्यवक्ता के साथ उनके मन लिये ताकि षब्द जो उन्होंने लिखे थे वो सीधे परमेष्वर से दिये गये थे। सी.एच. स्पर्जन ने कहा,

      यह भाग (पवित्रषास्त्र का) जीवित परमेष्वर की लिखावट है ः हर अक्षर लिखा गया था सर्वषक्तिमान की उँगलियों द्वारा; हर षब्द निकला था सदा रहनेवाले होठो से; हर वाक्य लिखाया गया था पवित्र आत्मा द्वारा। यद्यपि, वो मूसा नियुक्त किया गया था उनका इतिहास लिखने उसकी तीक्ष्ण कलम द्वारा, प्रभु ने उस कलम को मार्गदर्षन दिया (और इसलिये ये बाइबल मे ंहर किताब के साथ है)। यह परमेष्वर की आवाज है, आदमी की नहीं; षब्द प्रभु के षब्द है ... यह बाइबल प्रभु की बाइबल है, और जब मैं इसे देखता हूँ मुझे लगता है उसके ऊपर से आवाज बज रहा हो कहते हुए, ‘‘मैं परमेष्वर की किताब हूँ ः आदमी, मुझे पढ़ो। मैं परमेष्वर की लिखावट हूँ; मेरे पृश्ठ खोलो, क्योंकि मैं प्रभु की कलम द्वारा लिखी गई हूँ; इसे पढ़ो, क्योंकि वे मेरे लेखक है’’ (सी.एच. स्पर्जन, ‘‘ए कोफर ओफ ज्वेलस अबाउट ध बाइबल,’’ पृपृश्ठ 45-46)।

प्रभु यीषु मसीह निरन्तर बाइबल के बारे में बोले है प्रभु के निपुण और अनंत वचन के समान। उन्होंने कहा, ‘‘आकाष और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरी बातें कभी न टलेंगी’’ (मती 24:35)। उन्होंने कहा, ‘‘पवित्रषास्त्र की बात असत्य नहीं हो सकती’’ (यहून्ना 10:35)। उन्होंने कहा, ‘‘जो कोई इस व्यभिचारी और पापी जाति के बीच मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा, मनुश्य का पुत्र भी जब वह पवित्र दूतों के साथ अपने पिता की महिमा सहित ...’’ (मरकुस 8:38)।

ध्यान दिजीयें, यिर्मयाह 36:2 में, कि प्रभु ने भविश्यवक्ता से कहा ‘‘वो सब लिखा जब मैं तुझ से बातें करने लगा’’। इसलिये यहाँ, और सम्पूर्ण बाइबल में, हमें कहा गया था कि यह ‘‘षब्द’’ प्रभु की प्रेरणा द्वारा दिये गये थे। ये विचार नहीं थे, या कहानियाँ नहीं थी, जो प्रभु की प्रेरणा द्वारा दी गई थी। नहीं, ये पवित्र ‘‘षब्द’’ थे जो ‘‘प्रभु ने साँस’’ ली थी, प्रभु के मुँह के द्वारा दी गई थी। यिर्मयाह 30:2 में, हम पढ़ते है कि परमेष्वर ने यिर्मयाह से कहा, ‘‘जो वचन मैंने तुझ से कहे हैं उन सभों को पुस्तक में लिख ले।’’

इसलिये, हम हमारे हाथों में बाइबल पकड़ते है, अंग्रेजी में अनुवाद की हुई। हम निष्चित हो सकते है, सेकड़ो पवित्रषास्त्रों से, कि मूल हीब्रु और ग्रीक षब्द थे ‘‘ब्रेथेड आऊट’’ (साँस बाहर निकाली) प्रभु द्वारा और इंसानी लेखको ने लिखा वो ही हीब्रु और ग्रीक षब्द जो उन्होंने परमेष्वर से प्राप्त किये थे। ध्यान दीजिये कि बारूक ने पद 18 में कहा, ‘‘वह (यिर्मयाह) ये सब वचन अपने मुख से मुझे सुनाता गया और मैं इन्हें पुस्तक में स्याही से लिखता गया’’। प्रभु ने यिर्मयाह को वचन दिये। उन्होंने अपने मुँह से वो सुनाये। और बारूक ने उन्हें लिखा। इस प्रकार हमें हमारा प्रभु की साँसो से निकला हुआ बाइबल मिला!

डो. बी. बी. मेककीन्नी ने उनके एक गीत में कहा,

मैं जानता हूँ बाइबल प्रभु से भेजी गई थी
   पुरानी, और नयी भी;
उत्तेजित और पवित्र, जीवित वचन,
   मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है,
मैं जानता हूँ, मैं जानता हूँ,
   मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है,
पूरे राह में दिव्यता से उत्तेजित,
   मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है,
(‘‘मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है’’ डो. बी. बी. मेककीन्नी द्वारा,
     1886-1952)।

2. दूसरा, बाइबल तिरस्कृत क्यों होती है।

यहाँ गलती नहीं करना। बाइबल आज हजारो अनगिनत द्वारा तिरस्कृत की गई है - सिर्फ वैसे जैसे ये बहुतों द्वारा तिरस्कृत की गयी थी। ऐसा क्यों? पद दो को फिर से देखो,

‘‘एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझ से योषिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात् जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्त्राएल और यहूदा और सब जातियों के विशय में कहे है, सब को उसमे लिख’’ (यिर्मयाह 36:2)।

आखरी थोड़े षब्दों पर ध्यान दीजिये, ‘‘जितने वचन मैंने तुझ से योषिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात् जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्त्राएल और यहूदा और सब जातियों ...’’ इसीलिये लोग बाइबल से नफरत करते है! ये उनके विरूद्ध में बात करता है! आदमीयों ने बाइबल से तिरस्कार किया क्योंकि ये उनसे कहता है कि वे पापी है। कोई और किताब जो कभी भी लिखी गई हो वो आदमी को अपराधी ठहराती है और आदमीयों के अंतःकरण को चुभती है जितना की बाइबल करता है।

नास्तिक बाइबल से नफरत करते है क्योंकि यह उनको मूर्ख्र कहता है - ‘‘मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेष्वर है ही नहीं’’ (भजनसंहिता 14:1)।

मूर्ति पूजक बौद्धधर्म के लोग बाइबल से नफरत करते है क्योंकि ये कहता है मूर्तिपूजा करनेवाले ‘‘मूर्ख बन गए’’ (रोमियो 1:22)।

वे जो वकालत करते है, सजातीय संगठन बाइबल का तिरस्कार करते है क्योंकि ये कहता है, ‘‘इसलिये ... परमेष्वर ने भी उन्हें उनके निकम्मे मन पर छोड़ दिया’’ (रोमियो 1:26,28)।

गर्भपात की वकालत बाइबल से नफरत करते है क्योंकि ये कहता है, ‘‘तू खून न करना’’ (निर्गमन 20:13)।

विस्तार करनेवाले बाइबल से नफरत करते है क्योंकि यह कहता है, ‘‘परमेष्वर ने सृश्टि की’’ (उत्पति 1:1; 1:24; 1:27; इत्यादि..)।

द्रोही पापी बाइबल से नफरत करते है क्योंकि ये उनके पापो पर रोषनी डालता है।

‘‘और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुश्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे। क्योंकि जो कोई बुराई करता है, और ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, एसा न हो कि उसके कामों पर दोश लगाया जाए’’
(यहून्ना 3:19-20)।

3. तीसरा, उपद्रवी (द्रोही) पापी बाइबल के साथ क्या करते है?

लिपटे हुए कागज के टूकडे (scroll), जिस पर प्रभु के वचन लिखे गये थे यिर्मयाह के मुख से निकले थे, पढ़े गये थे दृश्ट राजा, यहोयाकीम (Jehoiakim) को। पद 22 को देखो।

‘‘राजा षीतकाल के भवन में बैठा हुआ था, क्योंकि नौवाँ महीना था और उसके सामने अँगीठी जल रही थी। जब यहूदी तीन चार पृश्ठ पढ़ चुका, तब राजा ने उसे चाकू से काटा और जो आग अँगीठी में थी उसमें फेंक दिया; इस प्रकार अँगीठी की आग में पूरी पुस्तक जलकर भस्म हो गई। परन्तु न कोई डरा और न किसीने अपने कपड़े फाड़े, अर्थात् न तो राजा ने और न उसके कर्मचारियों में से किसी ने ऐसा किया, जिन्होंने वे सब वचन सुने थे’’ (यिर्मयाह 36:22-24)।

दुश्ट द्रोही राजाने प्रभु के वचन जला दिये एक पृश्ठ एक समय पर! और क्या नया है? अवष्य हकीकत नहीं कि पापियों ने बाइबल का तिरस्कार किया! उन्होेंने सदा इसकी नफरत की है। अदन की वाटिका में, षैतान ने कपट से हव्वा को कहा, ‘‘क्या सच है कि परमेष्वर ने कहा?’’ (उत्पति 3:1)। फिर षैतान ने सीधेही बाइबल का विरोध किया जब उसने हव्वा से झूठ कहा और कहा, ‘‘तुम निष्चय न मरोगे’’ अगर आप परमेष्वर के वचन की अवज्ञा करते हो (उत्पति 3:4)। और सदा षैतान दृश्ट पापी लोगो को बाइबल पर हमला घृणा करने को कहता है।

लोग कई बार कहते है कि वे बाइबल का अस्वीकार करते है क्योंकि वे ज्यादा विचाररषील, या ज्यादा षिक्षित है। परन्तु उन्होंने ही अपने आपको धोखा दिया है। सही कारण उनका बाइबल अस्वीकार है क्योंकि वे परमेष्वर के षत्रु है। प्रेरितो पौलुसने कहा,

‘‘षरीर पर मन लगाना तो परमेष्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेष्वर की व्यवस्था के अधीन है न हो सकता है’’
(रोमियों 8:7)।

विशयी, अपरिवर्तित मन बाइबल के तिरस्कार करनेवालों को ज्यादा द्रोह और ज्यादा पवित्रषास्त्र के विरूद्ध ले जाता है। राजा (Zedekiah) यिर्मयाह से अधिक बुद्धिमान् नहीं था। और वो अवष्य ही ज्यादा षिक्षित नहीं था! नहीं, उसने बाइबल नहीं जलायी क्योंकि वो बुद्धिषाली और षिक्षित था! उसने बाइबल जलायी क्योंकि उसका दुश्ट, विशयी मन ‘‘परमेष्वर के विरूद्ध’’ था।

मैंने सुना है षराबी और नषीली दवा के व्यसनी बाइबल के विरूद्ध एक समान दलील का इस्तेमाल करते है कि गोल्डन गेश्ट बेपटीस्ट सिद्धांतवादी धार्मिक पाठषाला में अविष्वासु प्राध्यापक इस्तेमाल होते थे जब मैं वहाँ 1970 के वर्शो में पढ़ता था। क्यों वे कहे जाने वाले ‘‘सिखे हुए’’ प्राध्यापक वो ही समान दालील का इस्तेमाल करते है बाइबल के सामने जो नषीली दवा के व्यसनी और विशयी व्यभिचारी इस्तेमाल करते है? जवाब सरल है। वे अपरिवर्तित थे। वे सिर्फ ‘‘स्वाभाविक आदमी’’ थे क्योंकि उन्होंने कभी भी नये जन्म का अनुभव नहीं किया! बाइबल कहता है,

‘‘परन्तु षारीरिक मनुश्य परमेष्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उसकी दृश्टि में मूर्खता की बातें है, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उनकी जाँच आत्मिक रीति से होती है’’ (1 कुरिन्थियों 2:14)।

जब तक पापी परिवर्तित नहीं होता, वो स्वाभाविकरूप से बाइबल के सामने द्रोही रहेगा, और इस पर हमला करेगा, जैसे वो दुश्ट राजाने किया, जिसने यिर्मयाह के दिनों में बाइबल को ज्वाला में डाला था। वे जो हमला करते है और बाइबल की टीका वो सदा बिना बचाये आदमी है, कुछ षैतान के वष के अधीन (इफिसियों 2:2)। डो. मेककीन्नी ने कहा

चाहे षत्रु साहसी आत्मा के साथ इन्कार करे
   संदेष पुराना है, फिर भी नया लगता है,
इसकी सच्चाई हर समय
   मधुर है जब ये कहा जाता है
मैं जानता हूँ, मैं जानता हूँ,
   मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है,
पूरे राह में दिव्यता से उत्तेजित,
   मैं जानता हूँ बाइबल विषवासु है,

4. चौथा, कैसे प्रभु उनके वचन संभालते है।

दुश्ट राजा (Jehoiakim) यहोयाकीम ने छोटा चाकू उठाया और प्रभु के वचन के पृश्ठ काट दिये। फिर उसने बाइबल के पृश्टो को अंगीठी में जलती आग में फेंका। ‘‘परन्तु न कोई डरा ... न तो राजा ने और न उसके कर्मचारियों में से किसी ने ऐसा किया, जिन्होंने वे सब वचन सुने थे’’ (यिर्मयाह 36:24)। दुश्टो के लिये हमें कहा गया है, ‘‘उनकी आँखो के सामने परमेष्वर का भय नहीं’’ (रोमियों 3:18)। पापी को सिर्फ अपराधभाव के अधीन ला सकते है, और डरा सकते है प्रभु की आत्मा द्वारा। आदमीयों को कभी भी आनेवाले न्याय का डर नहीं होगा जब तक प्रभु उनका अंधा मन न खोले!

अब सिर्फ यिर्मयाह के किताब की प्रत - उसका हर एक षब्द जलाया था! क्या वो बाइबल के इस हिस्से का अंत था? नहीं, वो नहीं था! पद 27 देखिये।

‘‘जब राजा ने उन वचनों की पुस्तक को जो बारूक ने यिर्मयाह के मुख से सुन सुनकर लिखी थी, जला दिया, तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा ः फिर एक और पुस्तक लेकर उस में यहूदा के राजा यहोयाकीम की जलाई हुई पहली पुस्तक के सब वचन लिख दे’’ (यिर्मयाह 36:27-28)।

अब पद 32 को देखो।

‘‘तब यिर्मयाह ने दूसरी पुस्तक लेकर निरिय्याह के पुत्र बारूक लेखक को दी, और जो पुस्तक यहूदा के राजा यहोयाकीम ने आग में जला दी थी ...’’ (यिर्मयाह 36:32)।

बाइबल ही सिर्फ किताब है जो कभी भी नश्ट न हो सकती है! क्यों? क्योंकि बाइबल अविनाषी है। प्रेरितो पौलुसने कहा, ‘‘प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है’’ (1 पतरस 1:25)। भविश्यवक्ता यषायाह ने कहा, ‘‘घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेष्वर का वचन सदैव अटल रहेगा’’ (यषायाह 40:8)। और भजन करनेवालों ने कहा, ‘‘हे यहोवा, तेरा वचन आकाष में सदा तक स्थिर रहेता है’’ (भजनसंहिता 119:89)। डो. जोन आर. राइसने कहा वो पद (भजनसंहिता 119:89 में) ‘‘अवष्य सिखाता है पवित्रषास्त्र के अनन्त प्रभाव, ठहरे हुए और संभाले हुए स्वर्ग में’’ (जोन आर. राइस, डी.डी., अवर गोड - ब्रीर्दड बुक - ध बाइबल, (हमारे परमेष्वर की साँस ली हुई किताब - बाइबल), स्वोर्ड अॉफ ध लोर्ड प्रकाषक, 1969 की प्रत, पृश्ठ 358)।

आप निष्चित हो सकते हो कि सुसमाचार सत्य है क्योंकि बाइबल ऐसा कहता है! और ‘‘प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है’’ (1 पतरस 1:25)। मसीह यीषु स्वर्ग से नीचे आये, आपके पाप उन पर लिये, और क्रूस पर मरने गये - आपके अपराध, और आपके पापो का दण्ड चुकाने। और मसीह ‘‘गाड़ा गया ... पवित्रषास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा’’ (1 कुरिन्थियों 15:4)। आपके पापों से फिरो और मसीह पर भरोसा करो। वे आपको पाप से, अधोलोक से, और कब्र से बचाएँगे। आमीन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले डो. क्रेगटन् एल. चान द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रषास्त्र ः भजनसंहिता 119:9-18।
धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत ः
      ‘‘मैं जानता हूँ कि बाइबल विष्वासु है’’ (डो. बी. बी. मेककीन्नी द्वारा, 1886-1952)।


रूपरेखा

अविनाषी किताब

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘फिर योषिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य को चौथे बरस में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुँचा, एक पुस्तक लेकर जितने वचन मैंने तुझे से योषिय्याह के दिनों से लेकर अर्थात जब मैं तुझ से बातें करने लगा उस समय से आज के दिन तक इस्त्राएल और यहूदा और सब जातियों के विशय में कहे है, सब को उस मे ंलिखा। क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं, उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ’’ (यिर्मयाह 36:1-3)।

1.   पहला, बाइबल कहाँ से आया, यिर्मयाह 36:1-2; 2 तीमुथियुस 3:15-16; मती 4:4; 2 पतरस 1:21; मती 24:35; यूहन्ना 10:35; मरकुस 8:38; यिर्मयाह 30:2; 36:18।

2.   दूसरा, बाइबल तिरस्कृत क्यों होती है, यर्मयाह 36:2; भजनसंहिता 14:1; रोमियो 1:22, 26, 28; निर्गमन 20:13; उत्पति 1:1, 24, 27;
यूहन्ना 3:19-20।

3.   तीसरा, उपद्रवी (द्रोही) पापी बाइबल के साथ क्या करते है? यिर्मयाह 36:22-24; उत्पति 3:1;4; रोमियों 8:7; 1 कुरिन्थियों 2:14;
इफिसियों 2:2।

4.   चौथा, कैसे प्रभु उनके वचन संभालते है, यिर्मयाह 36:24; रोमियों 3:18; यिर्मयाह 36:27-28, 32; 1 पतरस 1:25, यषायाह 40:8;
भजनसंहिता 119:89।