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गतसमनी में मसीह की पीड़ा

CHRIST’S AGONY IN GETHSEMANE

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की षाम, 18 मार्च 2012
को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, March 18, 2012

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।


पीछले रविवार की रात को मैंने ''यी’ाु के आ¡सू'' इसे पढ़ने के लिये यहा¡ क्लिक करेंsa पर प्रचार किया था। उस धार्मिक प्रवचन का आखरी मुद्दा था, ‘‘यीषु गतसमनी की वाटिका में रोये’’। मैंने कहा, ‘‘गतसमनी की वाटिका में, उन्हें क्रूस पर कील से ठोकने से पहले, यीषु अकेले तड़पे और प्रार्थना की। वहाँ गतसमनी के अंधेरे में उद्धारक ने प्रभु से प्रार्थना करने में अपनी आत्मा बाहर उण्डेल दी। इब्रानियों 5:7 के अनुसार उन्होंने प्रार्थना की ‘‘ऊँचे षब्द से पुकार - पुकारकर और आँसू बहा - बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई’’ (इब्रानियों 5:7)। उन्हें क्या डर था? मैं मानता हूँ कि यीषु को डर था की वे वहाँ वाटिका में मर जायेंगे, हमारे पापो को क्रूस पर चुकाने के लिये जा सके उससे पहले।’’

मैंने डो. जोन आर. राईस का कथन दिया जिसने कहा, ‘‘यीषु ने प्रार्थना की थी कि उस रात मृत्यु का कटोरा उनके पास से टल जाये ताकि वे दूसरे दिन क्रूस पर मरने के लिये जी सके।’’ मैंने ब्रम्हज्ञानी डो. जे. ओलीवर बसवेल का कथन दिया जिन्होंने कहा था कि यीषु ने ‘‘वाटिका में मृत्यु से छुटकारा पाने के लिये प्रार्थना की थी, ताकि षायद वे अपना मकसद क्रूस पर परिपूर्ण कर सके।’’ मैंने डो. जे. वेरनोन मेकगी का भी कथन दिया जिन्होंने कहा, ‘‘मेरे मित्र, वे सुने गये थे; वे गतसमनी की वाटिका में नहीं मरे।’’ मैंने यह भी कहा कि यीषु बड़ी पीड़ा में थे जैसे ही हमारे पाप प्रभु द्वारा उन पर लादे गये थे।

किसी ने वो धार्मिक प्रवचन पढ़ा था, उन्होंने मुझसे पूछा यीषु को क्रूस पर जाने कि आवष्यकता क्यों हुई। वे हमारे पापो के लिये वहाँ वाटिका में क्यों नहीं मर सके? मैंने उसे जवाब दिया यह कहते हुए कि ये मुमकिन नहीं था। बाइबल कहता है,

‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार यीषु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया’’ (1 कुरिन्थियों 15:3)।

मसीह को मरना ही था ‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार’’ - काटा तास ग्राफस (kata Tas graphas) अगर वे गतसमनी की वाटिका में मर गये होते तो वे पुरानी नियमावली पवित्रषास्त्र में भविश्यवाणी की गई है वैसे उद्धारक नहीं होते। वे पाखण्डी होते, बिना भविश्यवाणी किये हुए उद्धारक! उन्हें मरना ही था kata Tas graphas, ‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार।’’ ‘‘पवित्रषास्त्र’’ संदर्भ करता है पुरानी नियमावली को, क्योंकि नयी नियमावली अभी तक नहीं लिखी गयी थी। यीषु के गतसमनी में प्रवेष करने से कुछ ही समय पहले उन्होंने कहा, ‘‘यह जो लिखा है, वह अपराधियों के साथ गिना गया, उसका मुझ में पूरा होना अवष्य है’’ (लूका 22:37)। उन्होंने यषायाह 53:12 को कथन किया, कहते हुए कि उन्हें वो पद परिपूर्ण करना ही चाहिए दो चोरों के बीच क्रूस पर चढाने के द्वारा। अगर वे गतसमनी में मर जाते तो वे यषायाह 53:12 को परिपूर्ण नहीं करते वे kata tas graphas काटा तास ग्राफस नहीं मरे होते, ‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार’’ वे यषायह द्वारा भविश्यवाणी किये हुए उद्धारक नहीं होते।

यषायाह का 53वां पाठ मसीह के क्रूस पर चढाने की पुरानी नियमावली में दी हुई पूरी भविश्यवाणी देता है। हकीकत में वो अध्याय यषायाह 52:13 से षुरू होता है और 15 वे पद तक जाता है अंग्रेजी बाइबल में। वो मसीह को क्रूस पर चढाने के संदर्भ में एक के बाद एक भविश्यवाणी देते है। उस में से बहुत कम भविश्यवाणी परिपूर्ण होती अगर यीषु गतसमनी में मर जाते। यषायाह 50:6 जिस में उनके उत्पात (scourging), षर्म और थूँकने के बारे में कहा, वो परिपूर्ण नहीं हुआ होता। भजनसंहिता 22:16, जिसने हाथ और पैरो के बंधने के बारे में भविश्यवाणी की थी, वो परिपूर्ण नहीं होती, ना ही जकर्याह 12:10, ‘‘वे मुझे ताकेंगे अर्थात् जिसे उन्होंने बेघा है।’’ भजनसंहिता 22 भी एक के बाद एक भविश्यवाणी देता है वो भी पूर्ण नहीं होती अगर यीषु गतसमनी में मरते। और पूरानी नियमावल में बहुत से और पवित्रषास्त्र के वचन भी पुरे हुए बिना रहते अगर यीषु वाटिका में मर जाते। कोई आष्चर्य नहीं की यीषु ने गतसमनी में प्रार्थना की, ‘‘ऊँचे षब्द से पुकार - पुकारकर और आँसू बहा - बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उनकी सुनी गई’’ (इब्रानियों 5:7) उन्हें डर था कि वे वहाँ वाटिका में मर जाएँगे, और दूसरे दिन क्रूस पर नहीं जा सकेंगे। उन्हें मरना ही था काटा तास ग्राफस, ‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार’’। मसीह ने पुरानी नियमावली की भविश्यवाणी में किये गये छोटे से छोटे वर्णन को भी पूर्ण किया जब वे क्रूस पर चढ़ाए गए थे। अगर वे गतसमनी में मर जाते तो इस में से कोई भी भविश्यवाणी पूर्ण नहीं होती - और मसीह पाखण्डी बनते और पवित्रषास्त्र में पहले कहे गये मनुश्यजाति के उद्धारक नहीं बनते। मसीह ‘‘पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार हमारे पापों के लिये मरे’’ (1 कुरिन्थियों 15:3) नहीं होते। कोई आष्चर्य नहीं कि उन्होंने गतसमनी में प्रार्थना की, ‘‘हे पिता, यदि तू चाहे तो इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले’’ (लूका 22:42)।

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

‘‘पीड़ा’’ (agony) के लिये ग्रीक षब्द अनुवाद किया गया था वो है ‘‘अगोनिया’’ (agonia)। ये बात करता है ‘‘कठोर भावनात्मक परिश्रम और वेदना’’ की (Vine) यीषु ने वहाँ अंधेरे में बहुत तड़प, यातना और षरीर मोड़नेवाली पीडा का अनुभव किया। चलिये आज रात उनकी गतसमनी में पीड़ा के बारे में कुछ मिनट तक सोचे।

1. पहला, उनकी पीडा वर्णन की गयी थी।

यीषु ने अपने चेलो के साथ फसट का खाना खाया। वहाँ उन्होंने पहले प्रभु के साथ उनकी मेजबानी की। यहूदा ने जूथ को छोड़ा और मुख्य याजक के पास गया, उनको धोखा देने। जो बाकी थे उन्होंने भक्तिगीत गाया और फिर ब्रुक केदरोन (Brook Kedron) की ओर बाहर गये जैतुन के पहाड़ पर, गतसमनी वाटिका के अंधेरे में। वाटिका के किनारे पर यीषु ने आठ चेलो को छोड़ दिया यह कहते हुए कि, ‘‘यहाँ बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूँ’’ (मरकुस 14:32)। फिर उन्होंने पतरस, याकूब और यूहन्ना को उनके साथ वाटिका में अंदर लिया जहाँ वो बहुत ही अधीर और व्याकुल होने लगा; और उनसे कहा, मेरा मन बहुत उदास है, यहाँ तक कि मैं मरने पर हूँ; तुम यहाँ ठहरो, और जागते रहो’’ (मरकुस 14:33-34)। जोसेफ हार्टने कहा,

बहुत दुःख उन्होंने सहे,
   बहुत पीड़ाकारी प्रलोभन मिले,
धैर्यवान, और दर्द को अभ्यस्तः
   परन्तु सबसे पीडाकारी परीक्षा अभी भी
उन पर स्थिर करनी थी,
   अन्धकारमय, और उदास गतसमनी
उन पर स्थिर करनी थी
   अन्ध्कारमय और उदास गतसमनी!
(‘‘बहुत दुःख उन्होंने सहे’’ जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768,
     ‘‘आओ, तुम पापीयों’’ की तर्ज पर)।

मती कहता है कि वो ‘‘उदास और व्याकुल होने लगा’’ (मती 26:37)। ग्रीक षब्द जो अनुवाद किया ‘‘व्याकुल’’ ‘‘very heavy’’ को संदर्भ करते हुए, गोडवीन कहते है कि वहाँ पर विघ्न या व्याकुलता थी यीषु की पीड़ा में, जब से षब्द का अर्थ है ‘‘लोगों से जुदाई - लोग व्याकुलता में, मानवजाति से अलग किए गए थे।’’ कैसा विचार! यीषु व्याकुलता की हद तक ले जाए गए थे, करीबन पागल होने की सीमा तक, उनकी पीड़ा की तीव्रता द्वारा। मती उद्धारक को कहते हुए कथन करते है, ‘‘मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है’’ (मती 26:38)। ग्रीक षब्द अनुवाद किया गया है ‘‘बहुत उदास’’ (exceeding sorrowful) ‘‘हर तरफ दुःखी, तीव्रता से व्याकुल’’ (स्ट्रोन्ग), षोक में कुचला हुआ। ‘‘वो सिर और कानों से उदासी में लीन था और साँस लेने की जगह भी नहीं थी’’, गोडवीन ने कहा। रेइनेकर ने कहा वे ‘‘उदासी से घिरे हुए, पीड़ा में कुचले हुए’’ थे। यीषु गहरी उदासी और व्याकुलता में डूबे हुए थे। मरकुस हमें कहता है कि वे ‘‘बहुत ही अधीर और व्याकुल होने लगे थे’’ मरकुस (14:33)। ‘‘बहुत अधीर’’ (sore amazed) के लिये ग्रीक षब्द अनुवाद किया गया है जिसका अर्थ है ‘‘पूर्ण रूप से चक्ति’’ (स्ट्रोन्ग), ‘‘काँपनेवाली भयानकता की पकड़ में’’ (रेइनेकर) ‘‘बहुत ज्यादा व्याकुल, फेंके गये ... आतंक, पूर्ण रूप से भयभीत, डराया हुआ, भयानकता से मारा हुआ’’ (व्युएस्ट) (Wuest)। जोसेफ हार्टने कहा,

आओ, तुम सारे प्रभु के चुने हुए संत,
   जो षुद्ध करनेवाले लहू को बहुत महसूस करते है
विवेकता में अब मेरे साथ जुड़ जाओ,
   उदास गतसमनी को गाने के लिये।

वहाँ पर जीवन के प्रभु प्रकाषित हुए थे
   और विलाप किया हुआ, और कराहता
और प्रार्थना करता और सुना हुआ
   अवतरीत प्रभु सह सके वो सब सहा
पूरी ताकत के साथ, किसी को व्यय न करते हुए
   (‘‘गतसमनी, जैतुन प्रेस!’’ जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768;
     ‘‘यह मध्यरात्रि और जैतुन की डाली’’ की तर्ज पर)।

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

1- दूसरा, उनकी पीड़ा का कारण।

वहाँ वाटिका में मसीह के दुःख का कारण क्या था? मैं सोचता था कि उनकी पीडा षैतान के हमले के द्वारा आयी थी। परंतु मुझे अब षक है यही किस्सा था। गतसमनी में उनकी पीड़ा के वर्णन में कहीं भी दुश्टात्मा (षैतान) का जिक्र नहीं किया गया है। उनकी सेवा की षुरूआत में ही वे दुश्टात्मा द्वारा प्रलोभित किये गये थे। जंगल में तीन बार ‘‘परखनेवाला उनके पास आया’’ (मती 4:3)। परन्तु हमने कभी भी नहीं पढ़ा कि यीषु ‘‘बहुत अधीर और बहुत व्याकुल’’ थे प्रलोभन के समय के दौरान। वहाँ पर किसी भी ऐसी चीज का वर्णन नहीं था गतसमनी में उनके लहूभरे पसीने के समान। जंगल में उनके प्रलोभन के दौरान यीषु दुश्टात्मा से विजयी हुए तुलनात्मक आसानी से प्रभु के वचन कथन करने के द्वारा। परन्तु गतसमनी में उनकी पीड़ा इतनी ज्यादा थी कि वो उन्हें मृत्यु के किनारे ले आयी। डो. मेकगी ने कहा, ‘‘जब उन्होंने वाटिका में प्रार्थना की, ‘‘इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले’’ (लूका 22:42), ‘‘कटोरा’’ मृत्यु था। उन्हेें गतसमनी की वाटिका में मरना नहीं था’’ (जे. वेरनोन मेकगी, टीएच.डी. थ्रु ध बाइबल, थोमस नेल्सन प्रकाषक, भाग 5, पृश्ठ 540; इब्रानियों 5:7 पर टीप्पणी)।

मुझे ऐसा लगता है कि गतसमनी में कड़वी पीड़ा प्रभु पितामह से आयी थी। मैं मानता हूँ कि वाटिका में,

‘‘प्रभुने ... हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया’’
       (यषायाह 53:6)।

स्पर्जनने कहा कि गतसमनी में प्रभु पितामह ‘‘जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया’’ (2 कुरिन्थियों 5:21)। ‘‘वे अब ... षाप सहन करने जो पापीयों पर उधार था, क्योंकि पापीयों की जगह में खड़े थे और पापीयों के बदले तड़पने ही चाहिये ... वे अब जान चुके, हकीकत में पहली बार, पाप उठाना क्या होता है ... क्योंकि वो सारा उन पर डाला गया था’’ (सी. एच. स्पर्जन, ‘‘गतसमनी में पीड़ा’’ The Agony in Gethsemane), ध मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1971, भाग XX, पृश्ठ 593)।

वहाँ पर दो बकरीयाँ थी प्रायष्चित के दिन ऐरोन के पास। वाटिका मे मसीह दूसरी बकरी द्वारा चित्रित होते है, दूसरी बकरी ने बड़ी पीड़ा का अनुभव किया था जब वो पाप के बलिदान के लिये दी गयी थी। डर और दर्द जो इस प्राणीने महसूस किया वो मसीह की पीड़ा का छोटा सा चित्र था। वाटिका में यीषु की पीड़ा मूल आदर्ष है, परिपूर्णता।

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

भविश्यवक्ता यषायाह ने कहा,

‘‘तौ भी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब वह अपना प्राण दोश बलि करे...’’ (यषायाह 53:10)।

निष्चितरूप से यह गतसमनी की वाटिका में ही षुरू हुआ था!

ये मध्यरात्रि; और दूसरो के गुन्हा के लिये,
   दुःख का आदमी लहू में रोता है;
तौभी वे जिसने वेदना में भी घुटने टेके
   वो उनके प्रभु द्वारा त्यागा नहीं गया।
(‘‘ये मध्यरात्रि, और जैतुन की डाल पर’’
     वीलीयम बी. टपान द्वारा, 1794 - 1849)।

‘‘ये मध्यरात्रि; और दूसरों के गुन्हा के लिये, दूःख का आदमी लहू में रोता है।’’ डो. जोन गीलने कहा, ‘‘अब वह चोट खाया हुआ है और उनके पिता द्वारा पष्चाताप में डाला गया, उनका षोक अब षुरू हुआ, क्योंकि वो यहाँ खत्म नहीं हुआ, परन्तु क्रूस पर ... वे ‘‘बहुत भारी’’ होना षुरू हुए उनके लोगों के पाप के वजन और दिव्य क्रोध के ज्ञान से, जिसकी वजह से वे इतने दबे हुए और व्याकुल थे कि ... वे मूर्छित होने, डूबने, और मरने को तैयार थे ... वे लाये गये थे, जैसे यह था, मृत्यु की समाधि तक; ना उनका षोक उनको छोड़ता था ... जब तक उनकी आत्मा और षरीर दोनो एक दूसरे से जुदा न किये जाये’’ क्रूस पर (जोन गील, डी.डी, एन एक्सपोझीषन अॉफ ध न्यू टेस्टामेन्ट, ध बेप्टीस्ट स्टान्डर्ड बेरर, 1989 में फिर से छपा हुआ, भाग 1, पृश्ठ 334)।

यह गतसमनी में था कि ‘‘यहोवा ने ... हम सभों को अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया’’ (यषायाह 53:6) जोसेफ हार्टने कहा,

वहाँ (प्रभु के पुत्र ने) मेरे सारे गुन्हा सहे,
   यह अनुग्रह के द्वारा माना जा सकता है
परन्तु भयानकता जो उन्होंने महसूस की
   वो विचार करना ही बहुत बड़ा था।
कोई भी आपके बीच से बेध नहीं सकता
   दुःख भरा, अंधेरा गतसमनी!
कोई भी आपके बीच से बेध नहीं सकता
   दुःख भरा, अंधेरा गतसमनी!
(‘‘बहुत दुःख उन्होंने सहे’’ जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768,
     ‘‘आओ, तुम पापीयों’’ की तर्ज पर)।

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

प्रभु के पुत्र को तडपते देखो,
   कम्पन, विलाप, लहू भरा पसीना!
दिव्य (अनुग्रह) की सीमारहित गहराई,
   यीषु, कैसा आपका प्रेम!
(‘‘आपकी अनजानी तडप’’ जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768;
     ‘‘ये मध्यरात्रि, और जैतुन की डाल पर’’ की तर्ज पर)।

‘‘यहोवाने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया’’ (यषायाह 53:6)।

मसीह ने हमारे पाप स्वयं पर लिये गतसमनी की वाटिका में, और उन्होंने हमारे पाप सहे ‘‘अपनी देह में’’ क्रूस पर, जहाँ वे दूसरे दिन मर गये। हमारे पापने उनको कूचला जब तक उनका लहू पसीने के समान नहीं बहा!

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

हाँ, उन्होंने हमारे पाप उनके देह पर क्रूस तक ढोये।

‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया’’ (1 पतरस 2:24)।

गतसमनी की वाटिका में जाओ और देखो यीषु ने आपके और मेरे लिये क्या किया है। हम हमारे पापो के लिये अधोलोक जाते। परन्तु यीषु ने वो पाप अपने स्वयं पर ले लिये, और वाटिका में और क्रूस पर जीवित अधोलोक से गुजरे, हमारे अन्याय को पूरी तरह चुकाने।

हर मसीही को बार बार विचार करना ही चाहिये गतसमनी और क्रूस पर। गतसमनी और क्रूस अविभेद्य (inseparable) है। ‘‘हम उद्धार पानेवालों के लिये (क्रूस) परमेष्वर की सामर्थ्य है’’ (1 कुरिन्थियों 1:18)। हम मसीह के गतसमनी और क्रूस के काम के द्वारा प्रभु के लिये जीने को नियुक्त किये गये है! हमें मसीह के लिये जीने के लिये उत्तेजित किया गया है उनकी पीड़ा के बारे में सोचने के द्वारा!

क्रूस के करीब, ओ प्रभु के मेम्ने,
   इसका द्रष्य मेरे सामने लाते है;
मुझे रोज रोज चलने में सहाय करा,
   मेरे ऊपर, इसकी परछाँइयों के साथ।
क्रूस में, क्रूस में,
   मेरी महिमा सदा रहे,
जब तक मेरी उन्मत् आत्मा को मिले
    विश्राम नदी के पार।
(‘‘क्रूस के करीब’’ फेन्नी जे. क्रोस्बाय द्वारा, 1820 - 1915)।

और आप को, जो अभी तक बचाये नहीं गये हो मैं कहता हूँ, आप कैसे देख सकते हो उनको यातना और लहू में लुढकते हुए, वहाँ गतसमनी के अंधकार में, आपके लिये तड़पते हुए और अभी भी उनसे दूर फिरे हुए? वे आपके पापों के लिये तड़पते है! आप उनका निशेध, और उनके प्रेम का अस्वीकार कैसे कर सकते हो?

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

प्रभु के पुत्र को तड़पते देखो,
   कम्पन, विलाप, लहू भरा पसीना!
दिव्य (अनुग्रह) की सीमारहित गहराई,
   यीषु, कैसा आपका प्रेम!

यीषु ने गतसमनी में आपके पापो को स्वयं अपने पर लिये क्योंकि वे आपसे प्रेम करते है!

पवित्र प्रभु के विरूद्ध पाप;
   पाप उनकी धार्मिक व्यवस्था के विरूद्ध;
पाप उनके प्रेम, उनके लहू के विरूद्ध;
   पाप उनके नाम और कारण के विरूद्ध;
पाप सागर की तरह बहुत बड़ा है -
   मुझे छुपाओ, ओ गतसमनी!
पाप सागर की तरह बहुत बड़ा है -
   मुझे छुपाओ, ओ गतसमनी!
(‘‘बहुत दुःख उन्होंने सहे’’ जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768;
     ‘‘आओ, तुम पापीयों’’ की तर्ज पर)।

क्या आज रात आप उनका भरोसा करोगे? क्या आप उनके पास आयेंगे जो आपसे सदा रहनेवाले प्रेम से प्रेम करते है? तड़पते उद्धारक पर विष्वास करो! उन पर अभी भरोसा करो! आपके पाप उनके द्वारा माफ किये जायेंगे; और आप अनंत जीवन पाओगे!

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रशास्त्र :
मरकुस 14:32-41।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘ये मध्यरात्रि और जैतुन की डाल पर’’ (वीलीयम बी. टपान द्वारा, 1794 - 1849)।


रूपरेखा

गतसमनी में मसीह की पीडा

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘और वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा : और उसका पसीना मानो लहू की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था’’ (लूका 22:44)।

(इब्रानियों 5:7; 1 कुरिन्थियों 15:3; लूका 22:37; यषायाह 53:12; यषायाह 50:6; भजनसंहिता 22:16; जकर्याह 12:10; लूका 22:42)

1. पहला,   उनकी पीडा वर्णन की गयी थी, मरकुस 14:32, 33-34;
   मती 26:37-38।

2. दूसरा,   उनकी पीडा का कारण, मती 8:3; यषायाह 53:6; 2 कुरिन्थियों 5:21; यषायाह 53:10; 1 पतरस 2:24; 1 कुरिन्थियों 1:18।