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मार्टीन लुथर और षैतान

MARTIN LUTHER AND THE DEVIL

डो.आर.एम. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेेकल मे सुधारक रविवार की षाम, 30 अक्टूबर, 2011 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, October 30, 2011

“सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी षैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8)।

(बडे बेपटीस्ट प्रचारक, सी.एच. स्पर्जन द्वारा लुथर के जिवन का वर्णन के लिए इस धार्मिक प्रवचन के अंत तक जाईये)।


इस पाठ के लिये, मार्टीन लुथर (1483-1546) ने कहा, “दुश्ट आत्मा सोती नही, कपटी और नीच है... वो भूखे षेर की तरह जाती है और इस प्रकार गर्जना करती है जैसे वो सबको फाड़ खाए” (मार्टीन लुथर, टीएच.डी., पतरस और यहूदा पर संभाशण, क्रेगल क्लासिक्स, 1990 मे फिर से छपां हुआ, पृश्ठ. 218;1 पतरस 5:8 पर समालोचना)।

डो. लेन्सकी ने कहा, “इस समय पर, नीरो के अधीन, द्रोह की डरावनी गर्जना गरीब, पीड़ित मसीही द्वारा सुनी गयी थी। 64 (ए.डी.) के वर्श के अक्टूबर मे तूफान आया। पतरस स्वंम (षहीद) बन गया ... सदा षैतान (इस प्रकार) चिल्लाता नहीं ...” (आर.सी.एच. लेन्सकी, टीएच.डी., सेंट पतरस, सेंट युहन्ना, और सेंट यहूदा के पत्र, अगसबर्ग प्रकाषन घर, 1966, पृश्ठ. 225)।

षैतान पहली तिन सदियों के दौरांन चिल्लाया, जब हजारो मसीही अरेना के पुराने रोम मे सिंहो के द्वारा फाडे़ गये। निसंदेहः इसके बारे मे सोच रहा था जब, उसने कहा,

“सचते हो, और जागते रहो; क्योंकि तम्‍ुहारा विरोधी षैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़़ खाए” (1 पतरस 5:8)।

षैतान लुथर के दिन मे तहकीकात, प्रचण्ड अग्नि, और चीन में सांस्कृतिक सुधार और आज विष्व के बहुत से मुसलमान विप्लव के दौरान उस प्रकार चिल्लाया था।

परन्तु षैतान यहाँ पष्चिम के विष्व मे नहीं “चिल्लाता”। यहाँ वो ज्यादा चतुर पध्धति इस्तेमाल करता है लोगो को “फाड़ खाने” के लिए। यहाँ वो अनात्मवाद (प्रकृति विरूद्ध का निशेध) इस्तेमाल करता है हमे निद्राधीन करने के लिये, और हमे उसकी मौजुदगी से अनजान करने। परन्तु षैतान छिप कर बहुत ही कार्यरत है अमरिका और पष्चिम मे। यहाँ पर उसके अनदेखे प्रकार से काम करने के बावजूद, उसका लक्ष्य वही है, “खोज मे रहता कि किस को फाड़ खाए”। मसीह ने कहा षैतान “आरम्भ से हत्यारा था” (यूहन्ना 8:44)। एक षैतान का नाम है “अबदोन” (प्रकाषितवाक्य 9:11)। “अबदोन” का अर्थ है “नाष करनेवाला।” चाहे खुल्लेआम या छिपकर, षैतान का लक्ष्य है इंसानी आत्मा को “नाष”, “कत्ल करना”, “खत्म करना”।

षैतान अपने गुप्त काम मे इतना सफल है कि हमारे ज्यादातर बेप्टीस्ट याजक अमरिका मे षायद ही कभी भी षैतान या राक्षसो पर पूरे धार्मिक प्रवचन दे सके। कितने अंधे है बहुत से प्रचारक षैतानी कार्य की हकीकत से उनकी अपनी कलीसिया मे भी।

अमरिका के लोग कैसे आध्यात्मिक मूर्ख बन गये है। हमने हमारे सार्वजनिक षाला ;च्नइसपब ैबीववसद्ध मे धन्यवाद देना, नाताल और इस्टर मनाना बंद करने के लिये संमति दे दी है। फिर भी ज्यादातर हर वर्ग सजाया जाता है षैतान और दानव और डायन और कंकाल और मुँह के किनारे से बहते हुए लहू के साथ पिषाच, बच्चो को पूजा ;भ्‍ंससवूममदद्ध मे टकटकी लगाकर देखने के लिये। बाइबल कहता है, “वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए” (रोमियो 1:22), और सेक्सपीयर ने कहा, “कितने मूर्ख है ये विनाषी।”

यह हमे फिर से मार्टीन लुथर के पास लाता है। वो कयी बार अपराधी बनाया गया था 20 वीं सदी में ज्यादा द्रढ षैतान और पिषाच के उदार - प्रभावित “विद्धान” से। आधुनिक परिवर्तन विरोधी लुथर मे माननेवालो की तरह एवाल्ड.एम.प्लास भी कुछ अंष तक लुथर के दुश्टात्मा के विषिश्ट उच्चारण पर टीकाकार था। प्लास ने कहा, “लुथरने सामान्य स्तर पे बहुत सी मूढविष्वास, वास्तविक्ता से ज्यादा बाँटे है, कोई षक नहीं कि उसने कयी बार कारण बताया है स्वाभाविक कारणो के अंधेरे की षक्ति के कार्य के।” परन्तु, फिर, प्लास अपने आपको बचाता है यह कहते हुए कि, “षक्य है षैतान ज्यादा कार्यषील (लुथर के समय में) था, आमतौर पर होता है उससे ज्यादा, क्योंकि उसने जाना था कितना निहाई था” (एवाल्ड. एम. प्लास, लुथर क्या कहता है, ;ीँज स्नजीमत ैंलेद्ध, कोर्न्कोडीया प्रकाषन घर, 1994 की प्रत, पृपृश्ठ. 391-392)।

डेवीड.एल.लार्सन भी लुथर के षैतान और दानव पर के दबाव को छोटा करता था यह कहने के द्वारा, “लुथर सच्चा मध्यकालीन था... लुथर ने सारी मानवता अत्यंत गंभीर विरोध में बंद ‘प्रभु और दुश्टात्मा के बीच देखी थी जब आखरी दण्ड जलदी से सामने आया’” (डेवीड. एम. लार्सन, एम. डीव., डी.डी.डी, ध कम्पनी ओफ ध प्रीचर्स, क्रेगल प्रकाषन 1998, पृश्ठ. 153)।

डो. लार्सन ने निःसंदेह सिखा लुथर से गलतीयाँ खोजने उसके विशय पर उदार फूलर थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला मे, एक नयी सुसमाचार पाठषाला मे जहाँ लार्सनने उसकी मास्टर की पदवी प्राप्त की। मैंने जाना कि फूलर मे विद्यार्थी जल्दी से टीकाकार होने को सिखते है हमारे विष्वास के भूतपूर्व अलौकिक षैतान के। इसी तरह से मुझे दो उदार धार्मिक पाठषाला मे सिखाया गया था जहाँ से मैने स्नातकता प्राप्त की थी। परन्तु मैंने इस प्रभाव का अस्वीकार किया और लार्सनने नहीं किया! लार्सनने कहा, “लुथर सच्चा मध्यकालीन था... लुथरने सारी मानवता अत्यंत गंभीर विरोध मे बंद ‘प्रभु और दुश्टात्मा के बीच देखी थी जब आखरी दण्ड जल्दी से सामने आया।’” इसमे गलत क्या था? क्या उसे “मध्यकालीन” बनाता है? वृध्धावस्था मे लुथर ने कहीं कुछ मध्यकालीन बातें यहूदीयो के बारे मे, और दूसरे मुददो पर, जिसका मैंने मजबूती से अस्वीकार किया। परन्तु लुथर गलत नहीं थे सोचने के लिये कि मानवजाति “प्रभु और दुश्टात्मा के बीच अत्यंत गंभीर विरोध मे बंद”! वो एकदम सच्चे थे उस पर-क्योंकि यही है जो बाइबल सिखाता है!

“सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी षैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8)।

लुथरने षैतान और दानव के बारे मे जो भी कहा वह ज्यादातर बाइबल मे सें ही था।

I. पहला, लुथर सच थे जब उन्होने षैतान और दानव के बारे मे बोला।

लुथरने कहा,

(षैतान कहा से आते है?) यह निष्चित हकीकत हैः र्स्वंगदूत गिरा और षैतान अंधकार के दूत मे फिर गया रोषनी के दूत से....

बाइबल कहता है कि लुथर सच्चा था,

“हे भोर के चमकनेवाले तारे, तू कैसे आकाष से गिर पड़ा है, तू जो जाति जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है! तू मन मे कहता तो था, मै स्वर्ग पर चढूँगा, मैं अपने सिंहासन को ईष्वर के तारागण से अधिक ऊँचा करूँगाः और उत्तर दिषा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूँगा, मैं मेघों से भी ऊँचे ऊँचे स्थानो के ऊपर चढूँगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊँगा। परन्तु तू अधोलोक मे उस गड़हे की तह तक उतारा जाएगा” (यषायाह 14:12-15)।

लुथरने कहा

     वहाँ पर अच्छे और दुश्ट दूत है (परन्तु) प्रभु ने सब को अच्छा ही बनाया था। उस कारण से ये आवष्यकता का अनुकरण करता है कि दुश्ट दूत गिरा और सच्चाई पर स्थिर खडे नही रहा ... यह बहुत संभव है कि वे अभिमान से गिरे, क्योंकि वे तिरस्कृत है ... प्रभु का पुत्र, और चाहते अपने आपको उन से ऊँचा उठाने (प्लास, पइपकण्, पृश्ठ. 391)।

बाइबल कहता है कि लुथर सच्चा था। दोनो, बाइबल और लुथर कहते है जो यहेजकेल 28:13-17 हमे कहता है,

“तू परमेष्वर की अदन नामक बारी मे था; तेरे पास आभूशण, माणिक, पद्यराग, हीरा, फीरोज़ा, सुलैमानी मणि, यषब, नीलमणि, मरकद, और लाल सब भाँति के मणि और सोने के पहिरावे थे; तेरे डफ और बाँसुलियाँ तुझी मे बनाई गई थी, जिस दिन तू सिरजा गया था, उस दिन वे भी तैयार की गई थीं। तू छानेवाला अभिशिक्त करूब था, मैंने तूझे ऐसा ढहराया कि तू परमेष्वर के पवित्र पर्वत पर रहता था; तू आग सरीखे चमकनेवाले मणियों के बीच चलता फिरता था। जिस दिन तू सिरज गया, और जिस दिन तक तुझ में कुटिलता न पाई गई, उस समय तक तू अपनी सारी चालचलन मे निर्दोश रहा। परन्तु लेन-देन की बहुतायत के कारण तू उपद्रव से भरकर पापी हो गया; इसी से मैने तुझे अपवित्र जानकर परमेष्वर के पर्वत पर से उतारा, और हे छानेवाले करूब मैंने तुझे आग सरीखे चमकनेवाले मणियों के बीच से नश्ट किया है। सुन्दरता के कारण तेरा मन फूल उठा था, और वैभव के कारण तेरी बुद्धि बिगड़ गई थी। मैंने तुझे भूमि पर पटक दिया, और राजाओं के सामने तुझे रखा कि वे तुझको देखें” (यहेजकेल 28:13-17)।

और गिरे हुए दूत के विशय में जो षैतान बन गये, यहूदा का पत्र कहता है,

“जिन स्वर्गदूतों ने अपने पद को स्थिर न रखा वरन् अपने निज निवास को छोड़ दिया, उसने उनको भी उस भीशण दिन के न्याय के लिये अन्धकार मे, जो सदा काल के लिये है, बन्धनो मे रखा है” (यहूदा 6)।

इनमे से कुछ गिरे हुए स्वर्गदूत अधोलोक मे बांधे गये है। परन्तु उनमे से ज्यादातर दानव है जिनका सामना हम आज विश्व मे करते है। लुुथर ने कहा, “और चाहे ये विश्व शैतानो से भर जाए।” “शैतान” पुराना शब्द है “दानव” के लिये। इसे गाइये!

और चाहे ये विश्व, शैतान से भरा,
   हमे नाश करने के लिये डराने चाहिए,
हम डरेंगे नहीं, क्योंकि प्रभु हमारे साथ होगे,
   उनकी सच्चाई हम में विजयी होगी।
(“शक्तिशाली किला हमारे प्रभु है” मार्टीन लुथर द्वारा, अंतरा तीसरा)।

II. दूसरा, लुथर सच्चे थे जब उन्होने कहा कि शैतान लेखक है उदासी और निराशा का।

लुथर ने कहा,

     सारी उदासी शैतानो से है, क्योंकि वह मृत्यु का देवता है। इसलिये उदासी हमारे प्रभु के साथ के संबध मं,े निश्चिंत शैतान का ही कार्य है (प्लास, पइपकण्, पृष्ठ. 398)।

     सुधारक सदा ही शैतान को कहते है उदासी की आत्मा; शैतान को नफरत है रोशनी, जीवन और हँसी से; क्योंकि वो आत्मा है अंधेरे और निराशा की, और उसे आदमी को अंधेरे और निराशा मे खींचकर ले जाना पसंद है, पापीयों के किस्से को आशाहीन पेश करते हुए (लुथर पर संभाषण, प्लास, पइपकण्, पृपृष्ठ. 397-398)।

लुथरने कहा,

“(षैतान) ढकेलते है, भयानक विचार हमारे मन मे; प्रभु का तिरस्कार, ईष्वर-निन्दा, और निराषा। वहाँ पर ‘जलते हुए तीर’ इफिसियो 6:16 है” (प्लास, पइपकण्, पृपृष्ठ. 399)।

यह सच्ची चीजे है जो हकीकत मे आज हो रही है, लोगो के साथ जिन्हे हम व्यक्तिगतरूप से जानते है। हमारे एक छोटे याजक ने एक युवा आदमी से पूछताछ कक्ष मे बात की। युवा आदमीने कहा, “प्रभु मुझ से प्रेम नही करते। यीषु मुझे प्रेम नही करते।” जैसे लुथर ने कहा, यह स्पश्ट विचार है जो षैतान से आते है, “ईष्वर-निन्दा और निराषा।” फिर छोटे याजक ने उसके लिये पढ़ा, बाइबल से,

“क्योंकि परमेष्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विष्वास करे वह नश्ट न हो, परन्तुं अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16)।

जब छोटे याजकने उससे पूछा क्या वो उस पद पर विष्वास करता है, उसने जवाब देने से इन्कार किया। दानवने खुदने उसे जवाब देने से रोका! षैतान कोषिश करता है हमें बाइबल सुनने से दूर रखने; और जब हम सुनते है तो उसके स्वीकार करने से रोकने। लुथर ने कहा, “षैतान के सारे छल अभ्यास किये गये है हमे विष्व से (प्रभु से) दूर करने की कोषिश मे” (प्लास, पइपकण्, पृपृष्ठ. 396)।

एक युवा औरतने इसी छोटे याजक से कहा, “मुझे माफ नही किया गया है, और मुझे पता नही क्यों।” उसे षायद पता नही क्यों, परन्तु मुझे है। वह माफ नही की गयी क्योंकि वो सदा विष्वास करती है उसके मनमें षैतान द्वारा रखे गये विचारो को बाइबल के वचनो पर विष्वास का अस्वीकार करती है, “जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूगाँ” (यूहन्ना 6:37)। लुथरने कहा कि षैतान “आपके मनमें भयानक विचार डालता है, (विचार) निराषा के।” उसने कहा “षैतान के सारे छल अभ्यास किये गये है हमे विष्व से (प्रभु से) दूर करने की कोषिश मे”।

III. तीसरा, लुथर सच थे जब उन्होने बताया कि उदासी और निराषा पापो के अपराध भाव के समान नहीं है।

लुथर ने कहा कि उदासी और निराषा षैतान से आते है। परन्तु उन्होने सिखाया कि पापो का अपराधभाव परमेष्वर से आता है। बाइबल वही भेद बताते है,

“क्योंकि परमेष्वर-भक्ति का षोक ऐसा पष्चाताप उत्पन्न करता जिसका परिणाम उद्धार है... परन्तु सांसारिक षोक मृत्यु उत्पन्न करता है” (2 कुरिन्थियो 7:10)।

लुथर पापो के अपराधभाव के लिये बोलते है जो परिवर्तन से पहले आता है। उन्होने कहा,

     यह आवष्यक है, अगर आप परिवर्तित होते हो, कि आप डरे हुए हो, कि आपके पास भयभीत अंतःमन है। फिर, यह अवस्था बनने के बाद, आपको आष्वासन जरूर पकडना चाहिये जो आपके किसी भी काम से नहीं आता परन्तु, वो आता है प्रभु के काम से। वे अपने पुत्र यीषु मसीह को संसार मे भेजते है भयभीत पापीयो को प्रभु की दया दिखाने। इस प्रकार, परिवर्तन लाया जाता है; दूसरे तरीके गलत है (प्लास, पइपकण्, पृष्ठ. 343)।

लुथरने कहा,

     न्याय करने से हमारा अर्थ है कि हम पापो से, मृत्यु और षैतान से छुटकारा पाए और जीवन की अनंतता के हिस्सेदार बनाये, अपने आप नहीं परन्तु मदद द्वारा, सिर्फ उत्पन्न हुए प्रभु के पुत्र, यीषु मसीह द्वारा (प्लास, पइपकण्, पृष्ठ. 343)।

लुथरने कहा,

     न्याय के लिये कुछ ज्यादा आवष्यकता नही है, यीषु मसीह को सुनने और उनमे विष्वास करने से... (प्लास, पइपकण्, पृष्ठ. 707)।

इस मुददो पर बाइबल संबधी विरोधी और उच्च कोटि के बेपटीस्ट श्रेश्ठ सुधारक, लुथर के साथ सहमत है। प्रेरितो पौलुस स्वयंने कहा, “प्रभु यीषु मसीह पर विष्वास कर, तो तू और तेरा धराना उद्धार पाएगा” (प्रेरितो 16:31)। कुछ ज्यादा की आवष्यकता नही है! हम बचाये गये सिर्फ मसीह मे विष्वास के द्वारा ही! महेरबानी करके अपने गीत के पर्चे के गीत क्रमांक तीन पर फिरो। इसे गाइये!

षक्तिषाली किला है हमारे प्रभु,
   दुर्गीकरण कभी भी निश्फल नही होगा
वे हमारे संहायक है, बीच में मृत्यु की बाढ़ प्रचलित है।
   क्योंकि अभी भी हमारे प्राचीन षत्रु
हमारे विलाप का काम करते है;
   उसका काम और षक्ति महान है,
और क्रुर निरस्कार के साथ सज्जित
   उसकी धरती पर समान नहीं है।

हम अपनी स्वंय की ताकत मे विष्वास करते है
   हमारा परिश्रम खो जाएगा,
हमारी ओर सही व्यक्ति नही होगा,
   प्रभु के स्वंय की पसंद का आदमी।
पूछीये षायद कौन होगा वह?
   उनका नाम प्रभु सबोथ ;ैंइवजीद्ध;
युगो से युगो तक वही, और वे युध्ध जीतने ही चाहिये।

और चाहे ये विष्व षैतान से भरा,
   हमें नाष करने के लिये डराने चाहिये।
हम डरेंगे नही क्योंकि प्रभु हमारे साथ होंगे,
   उनकी सच्चाई हम मे विजयी होगी।
अंधेरे का राजकुमार भयानक है -
   हम उनके लिये काँपते नही;
उनका क्रोध हम द्रढ रख सकते है,
   क्योंकि लो! उनका दण्ड निष्चिंत है,
हमारा छोटासा षब्द उनको गिरा सकता है।

वो षब्द संसार की सारी षक्ति के ऊँपर,
   उनको कोई धन्यवाद नही - द्रढ;
आत्मा और भेट हमारे है,
   उनके द्वारा जो हमारे पास मे है।
चाहे सामान और कृपा जाये, यह मृत्युभरा जीवन भी;
    षरीर षायद वो मार दे;
प्रभु का सच अभी भी द्रढ है,
   उनका साम्राज्य सदा के लिये।
(“षक्तिषाली किला हमारे प्रभु है” मार्टीन लुथर द्वारा, 1483-1546;
   फ्रेडरीक एच. हेडझ, 1805-1890 द्वारा अनुवाद किया हुआ।)

लुथर के जीवन का स्पर्जन का वर्णन

{“विष्वास से धर्मीजन जीवित रहेगा” (रोमियो 1:17)।}

मैं संग्रह कर सकूंगा और समझा सकूंगा यह पढ़ाई, लुथर के जीवन की कुछ घटनाएँ वर्णन करने के द्वारा। बडे सुधारक के सुसमाचार पर रोषनी धीरे धीरे गिर रही थी। यह आश्रम मे था कि पुरानी बाइबल मे फिरते हुए, जो जंजीर द्वारा खंभे से बंधी हुई थी, वो इस भाग तक आया-“विष्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा”। यह स्वर्गीय वाक्य उनके मनमे बस गया; परन्तु वो मुष्किल से उसके अर्थ समझ सका। वह नही कर सका, कैसे भी उनके धार्मिक व्यवसाय और वैराग्य की आदत से षान्ति अनुभव हुई। ज्यादा अच्छा नही जानते हुए, वो प्रायष्चित मे इतने द्रढ रहे, और वैराग्य इतना कठिन था, कि कभी कभी वे थकावट की वजह से बेषुध्ध हो जाते थे। उसने अपने आपको मृत्यु के द्वार पर लाया। उसे रोम का सफर करना ही चाहिये, क्योंकि रोम मे वहाँ पर हर दिन के लिये ताजा कलीसिया है; और आप जरूर से पापो की माफी और धन्यवाद जीत सकेगे इस पवित्र स्थान मे। उसने (रोम) पवित्रता के षहर मे प्रवेष करने का स्वप्न देखा; परन्तु उसने वह सदा साथ रहनेवाले पाखण्डी और दुराचार की कोठरी की तरह पाया। इस भयानकता के लिये उसने आदमीयों को कहते हुए सुना कि अगर वहाँ अधोलोक है तो रोम उसकी सबसे ऊँची चोटी पर बना है, क्योंकि यह संसार मे प्राप्त कर सकने वाले सबसे करीब प्रवेष के समान है; परन्तु फिर भी उसने उनके पोप ;च्वचमद्ध मे विष्वास किया और वह गया अपने प्रायष्चित के साथ; आराम खोजते हुए; परन्तु कुछ भी नही मिला ... (बाद मे) प्रभु ने उसे अंधश्रध्धा से पूरी तरह मुक्त बनाया, और उसने देखा कि याजको द्वारा ना ही वैराग्य, ना ही किसी भी चीज द्वारा जो वो कर सकता है, वह जी रहा था, परन्तु वो जीना चाहिये (मसीह मे) विष्वास के द्वारा। हमारा पाठ आज (सुबह) का (केथलिक) स्वतंत्रता मे सन्यासी बनाया, और उनकी आत्मा को आग पर लगाया।

{“विष्वास से धर्मीजन जीवित रहेगा” (रोमियो 1:17)।}

आखिरकार जब लुथर समझे कि उसने सिर्फ मसीह के पाठ को ही विष्वाय किया था। उसने उनकी माता को लिखा, “मैने मेरे स्वंय को फिर से जन्मा हुआ पाया है और खुल्ले द्वार से र्स्वग मे जा रहा हूँ।” स्पर्जन ने कहा,

जैसे ही उसने यह विष्वास करना षुरू किया उसने इसमे कार्यरत होने के ज्ञान मे रहना षुरू किया। टेटझेल ;ज्‍ंज्रमसद्ध नाम के, (याजक), पूरी जर्मनी मे जा रहे थे पापो की माफी नगद पैसो के लिये बेचते हुए। कोई बात नही कि आपका अपराध क्या है, जैसे ही आपके पैसे (जमा) सन्दूक के नीचे के तल को छू लेते थे आपके पाप चले जाते है। लुथरने यह सुना, कुपित हो उठा, और चिल्लाया, “मैं सन्दूक मे छेद कर दूँगा”, जो उसने द्रढ निर्णय से किया, और कुछ और सन्दूको मे भी। उसका कलीसिया के द्वार पर किल ठोकने का काम करना निष्चितरूप से संतोशकारक संगीत को षान्त करने का तरीका था। लुथर ने घोशणा की पापो की माफी मसीह मे विष्वास के द्वारा बिना पैसे, बिना मूल्य। और पोप का संतोश जल्द ही उपहास की चीज बन गया। लुथर उनके विष्वास के द्वारा जिया, और इसीलिये षायद वो चुप होगा, भूल को दोशी स्थापित किया तीव्रता से, जैसे सिंह अपने षिकार पर गर्जता है। विष्वास जो उसमे भरा था उसने उसको उत्सुक जीवन मे भर दिया, और वह षत्रु के साथ लड़ाई में लीन हो गया। थोड़ी देर बाद वे उसे अगसबर्ग के सामने बुलाते है, और वह अगसबर्ग के पास गया, उसके मित्रो के द्वारा मना करने के बावजूद भी। उन्होने उसे पाखण्डी की तरह बुलाया, अपने लिये जवाब देने वोर्मस ;ॅवतउेद्ध के डायेट ;क्पमजद्ध (इम्पीरीयल काउन्सील) में, और सबने (उसे कहा) दूर रहने के लिये, क्योंकि वह निश्चिंतरूप से जलाया जायेगा (खूँटे पर); परन्तु उसे यह आवश्यकता महसूस हुई की गवाही लानी ही चाहिये, और इसलिये वह वाहन मे एक गाँव से दूसरे गाँव और एक शहर से दूसरे शहर गया, प्रचार करते हुए, जैसे ही वो वहाँ गया, गरीब लोग बाहर आने लगे, उस आदमी से हाथ मिलाने जो मसीह के लिये खडा है और अपने जीवन के खतरे से सुुुसमाचार दे रहा है। आप याद कीजिये कैसे वह अगस्त सभा के (वोर्मस मे) सामने खडा था, और उसे जानकारी भी थी फिर भी जहाँ तक आदमी का सार्मथ्य गया कि उसका बचाव उसके जीवन की किंमत पर होगा, क्योंकि शायद वो, (खूँटे पर जलाया जाए) जोन हस्स ;श्रवीद भ्नेेद्ध की तरह, फिर भी उसने (काम किया) यहोवा, अपने प्रभु के लिये। उस दिन जर्मन डायेट (अदालत) में लुथरने काम किया, जिसके लिये दस हजार बार दस हजार माता के बच्चोने उसका नाम भाग्यवान किया, और उससे भी ज्यादा भाग्यवान किया यहोवा, उसके प्रभु का नाम (सी.एच. र्स्पजन, “टबरनेकल मे लुथर का धार्मिक प्रवचन,” ध मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1973 मे फिर से छपां हुआ, भाग ग्ग्प्ग्, पृपृश्ठ. 622-623)।

“विष्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा” (रोमियों 1:17)।

लुथर के साथ मेरा पहला सामना हुआ था बेपटीस्ट कलीसिया मे, बहुत पहले, 1950 की षुरूआत मे। एक रविवार रात को उन्होने श्वेत-धवल चलचित्र दिखाया उनके बारे मे। वह भूतकाल से ही अजनबी व्यक्ति लगते थे, जिसके पास मेरे पंसद का कुछ भी नही था। चलचित्र लंबा और अप्रिय लग रहा था; और मुझे आष्चर्य था कि क्यों मेरे, याजक, डो. वोल्टर. ए. पेग्गने, यह बताने के लिये महेनत भी की। मुझे यह कहना चाहिये कि आज इस श्रेश्ठ चलचित्र के लिये मेरा मंतव्य पूरी तरह से भिन्न है। मुझे अब यह चलचित्र देखना अच्छा लगता है। यहाँ क्लिक करे चलचित्र के द्रष्य देखने के लिये।

लुथर के साथ मेरा दूसरा सामना बहुत देर बाद आया, मेरे परिवर्तित होने के बाद। मैंने जोन वेस्ली के परिवर्तन के अनुभव के विशय मे पढ़ा। जिसमे वेस्लीने कहा,

षाम को मैं बहुत नाराजगी से अल्डेरस स्ट्रीट में समुदाय में गया, जहाँ एक व्यक्ति लुथर की रोमियो के पत्र की पस्तावना पढ़ रहा था। करीबन नौ बजने से पंद्रह मिनट पहल जब वो बदलाव का वर्णन कर रहा था जो प्रभु मनमे, मसीह मे विष्वास के द्वारा काम करते है, मैने महसूस किया कि मेरा मन अन्जान रीत से गर्म है। मैंने महसूस किया कि मैंने मसीह मे विष्वास किया है, मसीह एक ही है मुक्ति के लिये; और मुझे निष्चिंतता दी गयी थी, की उन्होने मेरे पाप ले लिये है, मेरे भी, और मुझे पाप और मृत्यु की व्यवस्था से बचाया है। (जोन वेस्ली, तीसरी प्रत, बेकर बुक हाऊस, 1979 में फिर से छपां हुआ, भाग प्, पृश्ठ. 103)।

इसने मुझ पर प्रभाव डाला, क्योंकि मुझे था कि वेस्ली पहली बडी जागृतता के दौरान एक सबसे षक्तिषाली, प्रभावषाली प्रवक्ता रहे थे। वेस्ली परिवर्तित हुआ था जब वह सुन रहा था लुथर के वचन मसीह मे विष्वास के द्वारा न्याय पर।

और बाद मे, मैंने सिखा की हमारे बेपटीस्ट परदादा जोन बुनयान ने भी लुथर को पढ़ा था जब वो बहुत विषेशरूप से परिवर्तित हुआ था, “उनकी पवित्रषास्त्र की पढ़ाई को मार्टीन लुथर की सिखाई के साथ विस्तृत करते हुए” (पीलग्रीमस प्रोगे्रस, थोमस नेल्सन, 1999 मे फिर से छपां हुआ, प्रकाषक की प्रस्तावना, पृश्ठ. गपप)। बुनयान सबसे ज्यादा पढे़ हुए सारे समय के बेपटीस्ट लेखक बन गये!

जोन वेस्ली, नियमानुसार चलनेवाले, परिवर्तित हुए थे, लुथर के वचन सुनकर। जोन बुनयान, बेपटीस्ट, उनके परिवर्तन के प्रयत्न में सहाय किये गये थे जो लुथर ने लिखा था उसे पढ़ने के द्वारा। मैंने सोचा कि वहाँ पर लुथर को पढ़ने मे बहुत ही अच्छाई का सौदा है।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रशास्त्र : यषायाह 14:12-15।
धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
“मसीह, तूने उनको देखा?” (क्रेट का ऐन्ड्रु, 660-732; जोन एम. नील 1818-1866 द्वारा अनुवाद किया हुआ;

“ओनवर्ड, क्रीस्ट्रीयन सोल्झर्स” की तर्ज पर)।


रूपरेखा

मार्टीन लुथर और षैतान

डो.आर.एम. हायर्मस, जुनि. द्वारा

“सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी षैतान गर्जनेवाले सिंह के समान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8)।

(यूहन्ना 8:44; प्रकाषितवाक्य 9:11; रोमियों 1:22)

पहला, लुथर सच थे जब उन्होने षैतान और दानव के बारे मे बोला, यषायाह 14:12-15; यहेजकेल 28:13-17; यहूदा 6।

दूसरा, लुथर सच्चे थे जब उन्होने कहा कि शैतान लेखक है उदासी और निराशा का, यहून्ना 3:16; 6:37।

तीसरा, लुथर सच थे जब उन्होने बताया कि उदासी और निराषा पापो के अपराध भाव के समान नहीं है, 2 कुरिन्थियों 7:10; प्रेरितो 16:31।