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गतसमनी में मसीह की प्रार्थना

CHRIST’S PRAYER IN GETHSEMANE

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की सुबह,
17 अप्रैल, 2011 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, April 17, 2011

“यीषु ने अपनी देह, में रहने के दिनों में ऊँचे षब्द से पुकार-पुकारकर और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” (इब्रानियों 5:7)।


यह आष्चर्यजनक है जो बहुत सी समालोचना करती है इस पद के साथ। वास्तव में वे सब कहते है कि ये संदर्भ करता है गतसमनी में मसीह की प्रार्थना को। परन्तु उनमें से बहुत से लोग सोचते है कि वे परमेष्वर से प्रार्थना कर रहे थे उन्हे दूसरे दिन क्रूस पर की मृत्यु से बचाने। डो. लेन्सकी सूचि बनाकर और जवाब देते है इन में से कुछ व्याकुल और विरूध्ध सिध्धांतो को, अनुमान करते हुए कि इब्रानियों 5:7 से उत्पन्न (आर.सी.एच. लेन्सकी, पीएच.डी., ध इन्टरप्रीटेषन ओफ ध एपीस्टल टु ध हीब्रुस एन्ड ध एपीस्टल ओफ जेम्स, अगसबर्ग प्रकाषन घर, 1966 की प्रत, पृश्ठ. 162-165;इब्रानियों 5:7 पर टीप्पणी)।

चलिये पाठ को परखते है एक के बाद एक वाक्यो के द्वारा, क्योंकि ये प्रकट करता है बडा परिमाण गतसमनी के बगीचे में मसीह की अकेली प्रार्थना के बारे में, उनके क्रूस पर चढाने से अगली रात को।

“यीषु ने अपनी देह, में रहने के दिनों में ऊँचे षब्द से पुकार-पुकारकर और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” (इब्रानियों 5:7)।

I. पहला, पाठ कहता है मसीह के “अपनी देह में रहने के दिनो” की।

यह वाक्य हमें बताता है कि पाठ कोई भी चीज जो यीषु को उनके अवतार घारण करने से पहले की अवस्था, उनके स्वर्ग से नीचे आने से पहले जो हुई उसका संदर्भ नही करता। ये यह भी बताता है कि यह पाठ मसीह के फिर से स्वर्ग में उद्गम के बाद के अनुभव को संदर्भ नही करता। पाठ रोषनी डालता है उस समय पर जब यीषु ने प्रार्थना की “मजबूती से पुकार कर” उनके “अपनी देह में रहने के दिनो” में।

नयी नियमावली हमें कहती है तीन प्रसंग जब यीषु रोअे। एक, लाजर की कब्र पर। बाइबल कहता है, “यीषु रोया” (यूहन्ना 11:35)। दूसरी बार वे रोये यरूषलेम पर,

“जब वह निकट आया तो नगर को देखकर उस पर रोया” (लूका 19:41)।

डो. जे. वेरनोन मेकगी ने कहा, “तीसरी बार वे रोये थे गतसमनी के बगीचे में” (जे. वेरनोन मेकगी, पीएच.डी., थ्रु ध बाइबल, थोमस नेल्सन प्रकाषन, 1983, भाग V, पुश्ठ.540; इब्रानियों 5:7 पर टीप्पणी)। ये स्पश्ट है कि हमारा पाठ उनके लाजर की कब्र पर रोने या, यरूषलेम के षहर में जो आसूँ बहाये थे उसको संदर्भ नहीं करता। वो पाठ के संदर्भ को संक्षिप्त करता है गतसमनी के बगीचे में उनके दुःख के समय तक को, उनके क्रूस पर चढने से अगली रात पर।

“षोक का मनुश्य” क्या नाम है
   प्रभु का पुत्र जो आये उनके लिये
नश्ट हुए पापीयों को पुनःप्राप्त करने!
   हल्लिलुय्याह! कितना अद्भूत उद्धारक!
(“हल्लिलुय्याह! कितना अद्भूत उद्धारक!”
   फिलिप. पी. ब्लीस द्वारा, 1838-1876)।

यह मध्यरात्रि; और दूसरो के अपराध
   षोक का मनुश्य लहू में रोता है;
फिर भी वो जो पीडा में भी झूका
   उनके प्रभु के द्वारा हराये नहीं गये।
(“यह मध्यरात्रि; और जैतून के किनारे पर”
विलियम. बी. टपान द्वारा, 1794-1849)।

“यीषु ने अपनी देह, में रहने के दिनों में ऊँचे षब्द से पुकार-पुकारकर और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” (इब्रानियों 5:7)।

II. दूसरा, पाठ हमें कहता है मसीह ने प्रभु से प्रार्थना की जो गतसमनी में उसको मृत्यु से बचा सकता था।

मती 26:36-38 को ध्यान से सुनिये।

“तब यीषु अपने चेलों के साथ गतसमनी नामक एक स्थान में आया, और अपने चेलों से कहने लगा, यही बैठे रहना, जब तक मैं वहाँ जाकर प्रार्थना करूँ। वह पतरस और जब्दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। तब उसने उनसे कहा, मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है” (मती 26:36-38)।

डो. जोन मेकआर्थर के पास इब्रानियों 5:7 के बारे में कहने को कुछ अच्छी चीजे है, परन्तु वे गलत होते है उनके पद के आखरी कथन में, जब वे कहते है, “यीषु ने मृत्यु में रहने से बचाने को कहा, (वो कि) द्रश्टांत के तौर पर पुनरूत्थान देना” (जोन मेकआर्थर, डी.डी., ध मेकआर्थर स्टडी बाइबल, वर्ड बाइबल्स, 1997, पृश्ठ. 1904; इब्रानियों 5:7 पर टीप्पणी)।

यीषु “मृत्यु में रहने से बचाने” पुनरूत्थान द्वारा, के लिये प्रार्थना नही कर रहे थे! नही, मती 26:38 स्पश्टता से हमें कहता है कि यीषु “बहुत उदास था, यहाँ तक कि उनका प्राण निकला जा रहा था”- मृत्यु के मुददे पर-वहाँ गतसमनी के बगीचे में यीषु मरने वाले ही थे! वे प्रार्थना कर रहे थे वहाँ गतसमनी में मृत्यु से बचाने! लूका का सुसमाचार हमे कहता है, “उसका पसीना मानो लहू की बडी बडी बूँदो के समान भूमि पर गिर रहा था” (लूका 22:44)। यीषु तडप की इतनी भयानक स्थिति में थे कि वे लहू का पसीना बहा रहे थे, उन्हे क्रूस पर चढाने की अगली रात को। जोसेफ हार्टने कहा,

प्रभु के पुत्र की तडप देखिये,
पीड़ा, विलाप, लहू का पसीना!
दिव्य अनुग्रह की असिमित गहंराई!
यीषु, आपका कैसा प्रेम था!
    (“आपकी अनजानी तडप” जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1765;
     “इस मध्यरात्री, और जैतून के किनारे पर” की तर्ज पर)।

“तब उसने उनसे कहा, मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है। तुम यहीं ठहरो और मेरे साथ जागते रहो। फिर वह थोडा और आगे बढकर मुहँ के बल गिरा, और यह प्रार्थना की, हे मेरे पिता, यदि हो सके तो यह कटोरा मुझ से टल जाए। तौ भी जैसा मै चाहता हुँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो” (मती 26:38 - 39)।

इस प्रार्थना का सामान्य भाशांतर ये है कि मसीह प्रभु से कह रहे थे उन्हे क्रूस पर जाने से बचाने को। परन्तु मैं निष्चिंतरूप से कह सकता हूँ कि ये वो नही है जो बाइबल सिखाता है। डो. जे. वेरनोन मेकगी, अमरिका के सबसे मषहूर बाइबल षिक्षक, ने कहा,

यह कहना की हमारे प्रभु कोषिश कर रहे थे क्रूस पर जाने को टालने की...यह सच नही है। उनकी कृपाद्रश्टि में उन्होने स्वयं पर रखे गये पापो की घृणा और भयानक कपकपी महसूस की (जे. वेरनोन मेकगी, टीएच.डी., थ्रु ध बाइबल, 1983, थोमस नेल्सन प्रकाषक, भाग IV., पृश्ठ. 141; मती 26:36-39 पर टीप्पणी)।

डो. जे. ओलीवर बुसवेल, मषहूर बम्हज्ञानी ने कहा,

बहुत ज्यादा पसीना निकलना जैसे की लूका ने बताया है आघात की स्थिति का द्रष्य जिसमे सहनकरनेवाली षक्ति होने या मृत्यु के भी निकटतम भय मे हो ... हमारे प्रभु यीषु मसीह, स्वय को बहुत ज्यादा आघात की इस षारीरिक परिस्थिति में पाते है, बगीचे मे मृत्यु को टालने के लिये प्रार्थना की, षायद वो क्रूस पर अपना मकसद पूरा कर सके (दूसरे दिन) (जे ओलीवर बुसवेल, पीएच. डी., ए सीस्टमेटीक थीयोलोजी ओफ ध क्रीस्टीयन रीलीजन, झोन्डरवान प्रकाषन घर, 1962, भाग III., पृश्ठ. 62,)।

“वह पतरस और जब्दी के दोनो पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। तब उसने उनसे कहा, मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है...” (मती 26:37 - 38)।

वो दो पद बहुत ध्यान से पढ़ने के बाद, डो. जोन. आर. राइसने डो. जे. वरेनोन मेकगी और डो. जे. ओलीवर बुसने हमे जो दिया, उसे विस्तृत किया। डो. राईस ने कहा,

      अगर आप पद 37 और 38 (मती 26 का) पर ध्यान नहीं देते हो, तो गतसमनी की प्रार्थना का अर्थ खो जायेगा। यीषु उदास और भारी थे और उनकी आत्मा “मरने तक उदास” थी, वो कि (वे) हकीकत मे दुःख मे मर रहे थे ... यीषु बगीचे मे मरनेवाले ही थे पद 39 और 42 मे जो कटोरे का वर्णन किया गया था जो कटोरा मृत्यु का था, मृत्यु उस रात गतसमनी के बगीचे में। ये स्पश्ट किया गया है खासतौर पर इब्रानियों 5:7 मे, जहाँ हमें कहां गया था कि यीषु ने “ऊँचे षब्द से पुकार - पुकारकर और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसके मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई”। मसीह गतसमनी के बगीचे में मरने ही वाले थे; यीषुने प्रार्थनाएँ की ताकि उस रात मृत्यु का कटोरा उनसे टल जाये ताकि वो दूसरे दिन क्रूस पर मरने के लिये जीवित रहे। पवित्र षास्त्र कहता है कि “वो सुना गया था”! प्रभु ने उसकी प्रार्थना का जवाब दिया...अगर यीषु गतसमनी के बगीचे मे मर गये होते, तो हमारे पाप बचानेवाला सुसमाचार नहीं होता क्योंकि सुसमाचार है “की पवित्रषास्त्र के वचन के अनुसार मसीह हमारे पापो के लिये मरे” (Kata tas graphas), 1 कुरिन्थियों 15:3। कोई साधारण मृत्यु नहीं करती; मसीह की मृत्यु पवित्रषास्त्र के अनुसार ही होगी...यीषु के दाढी खींची गई होगी (यषायाह 50:6)। वे बहुत से कोडों से मारे गये होगें (यषायाह 53:5)...वे चोरों के बीच क्रूस पर मरने ही चाहिये (यषायाह 53:12; जकयाह 12:10; जकर्याह 13:6)। उन्होने उनके हाथ और उनके पैरो में छेद किये होंगे (भजनसंहिता 22:6) ...(उनकी) पुकार (क्रूस पर से) भी “मेरे प्रभु, मेरे प्रभु, तूने मुझे क्यों छोड दिया?”...वो पवित्रषास्त्र में कहा गया था (भजन- संहिता 22:1) में। प्रधान याजक और दूसरे लोगो का हंसी उडाना (जब वे क्रूस पर थे) (भजनसंहिता 22:7-8) में जो कहा गया था वो पत्र परिपूर्ण होना ही चाहियें। (सिपाही) उनके पहिरावे पर चीठ्ठी डालने ही चाहिये (भजन संहिता 22:18)।
      अगर यीषु अक्षरषः नही मरते है “पवित्रषास्त्र के अनुसार”, तो वे हमारे उद्धारक नहीं होते। प्रभु आभार, उनकी गतसमनी के बगीचे की प्रार्थना का जवाब दिया! मृत्यु का कटोरा...उस रात उनसे टल गया (ताकि वे जा सके) क्रूस पर ताकि हम बचाये जा सके...लूका 22:43 हमें कहता है “वहाँ स्वर्ग से स्वर्गदूत प्रत्यक्ष हुआ, उन्हे सार्मथ्य देता हुआ।” बिना इस अद्भूत सार्मथ्य उनके देह का, मसीह उस रात बगीचे में जरूर ही मर जाते (जोन. आर. राईस, डी.डी., ध गोसपल अर्कोडींग टू मेथ्यु, र्स्वोड ओफ ध लोर्ड प्रकाषन, 1980 की प्रत, पृपृश्ठ. 441 - 442; मती 26:36 - 46 पर टीप्पणी)।

अगर यीषु क्रूस पर चढने से पहले गतसमनी के बगीचे मे मर गये होते तो हम हमारे पापो से बचाये नही जाते।

“यीषु अपनी देह में रहने के दिनों में ऊँचे षब्द से पुकार - पुकारकर और आँसू बहा-बहाकर उससे जो उसको मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” (इब्रानियों 5:7)।

III. तीसरा, पाठ हमे कहता है की प्रभुने मसीह को जवाब दिया।

यीषु “भक्ति के कारण सुने गये” (इब्रानियों 5:7)। थे। मैं सोचता हुँ इसका अर्थ है कि उन्हे प्रभु भक्ति का डर था, उन्हे डर था प्रभु की आज्ञा न मानने का, उनके क्रुस पर जाने से पहले मरने का द्वारा। बाइबल कहता है की यीषु “उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था उसका क्रुस पर दुःख सहन करने से पहले” (इब्रानीयों 12:2)। यीषु अचानक नही मरे। नहीं, वे जानबुझकर और अपनी इच्छा से क्रूस पर गये हमारे पापो को पुरी तरह चूकाने।

क्या, फिर, उनकी भारी यातना और तडप का कारण था “मेरा प्राण निकला जा रहा है” वहाँ गतसमनी के बगीचे में (मती 26:38) ? वे वहाँ क्यों “उदास” और “बहूत भारी” थे? वे क्यों “व्याकुल बेचैन” (मरकुस 14:33) थे? क्यों “पीडा में” (लूका 22:44) थे? क्यों उन्होने पसीना “लहू की बडी बडी बूंदो के समान” बहाया गतसमनी में (लूका 22:44)?

में मानता हूँ कि यह गतसमनी का बगीचा था उस रात जो प्रभुने उसके लोगों के पाप, यीषु पर डाले, प्रभु का मेम्ना। बाइबल कहता है “यहोवा ने हम सभो के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” (यषायाह 53:6)। मैं मानता हूँ यह गतसमनी में हुआ। आपके पाप “उनके देह पर” लादे गये थे उस रात, और वे उसे क्रूस तक ले गये, आपके पापो को चूकाने दूसरी सुबह। यहाँ यीषु है, “जिसने आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ गया” - क्रूस पर (1 पतरस 2:24)। उन्हे भयंकर पीडा में, लहू भरा पसीना बहाते देखीये वहाँ गतसमनी में, जब प्रभु ने “हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया”। देखिये उन्हे गतसमनी से क्रूस पर आपके पापो को उठाकर जाते हुए “उनकी अपनी देह में वहाँ क्रूस पर”। क्या आप ऐसे श्रेश्ठ उध्धारक का अस्वीकार करेंगे? या आप उनके पास आयेंगे, जो तडपे और मरे आपकी जगह, ताकि आप माफ किये जाओ और बचाये जाओ पाप की सजा से?

प्रभु के पुत्र की तडप देखिये,
पीडा, विलाप, लहू का पसीना!
दिव्य अनुग्रह की असिमित गहराई!
यीषु, आपका कैसा प्रेम था!
(“आपकी अनजानी तडप” जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712-1768;
    “इस मध्यरात्रि, और जैतून के किनारे पर” की तर्ज पर)।

महेरबानी करके खडे रहीये और आपके गीत के पर्चे का 7वां गीत गाइये।

बहुत दुःख उन्होने सहन किये, बहुत पीडा देनेवाले प्रलोभन मिले,
धैर्य और पीडा की जानकारीः परन्तु फिर भी दुःख भरा अनुभव
आप में स्थिर किया हुआ था, अंधकारमय, उदास गतसमनी!
आप में स्थिर किया हुआ था, अंधकारमय, उदास गतसमनी!

आखरी भयानक रात को साथ आये; लोहे के दण्डे से सामना करके
खडे रहे, और जमा की हुई षक्ति से, कुचले हुए प्रभु के निर्दोश मेम्ने।
देखो, मेरी आत्मा, देखो उद्धारक, गतसमनी में दण्डवत् खडा हुआ!
देखो, मेरी आत्मा, देखो उद्धारक, गतसमनी मे दण्डवत् खडा हुआ!

वहाँ मेरे प्रभुने मेरे सारे अधर्म सहे; यह अनुग्रह द्वारा माना जा सकता है;
परन्तु भयानकता जो उन्होने महसूस की, वो बहुत बडी है ध्यान में लाने से।
कोई भी छेद नही सकता तुझको, उदास, अंधकारमय गतसमनी!
कोई भी छेद नही सकता तुझको, उदास, अंधकारमय गतसमनी!

पवित्र प्रभु के विरूध्ध पाप; उनकी धर्मी व्यवस्था के विरूध्ध पाप;
उनके प्रेम के लहू के विरूध्ध पाप; उनके नाम और कारण के विरूध्ध पाप;
सागर के जितना बडा पाप- मुझे छिपाओ; ओ गतसमनी!
सागर के जितना बडा पाप- मुझे छिपाओ; ओ गतसमनी!

यहाँ मेरा दावा है, और यहाँ अकेले; कोई और ज्यादा उद्धारक की जरूरत नही;
मेरे पास धार्मिकता के कोई काम नही; नही, एक भी अच्छा काम नही प्रार्थना करने कोः
मेरे लिये क्षण की भी आषा नही, सिर्फ गतसमनी में!
मेरे लिये क्षण की भी आषा नही, सिर्फ गतसमनी में!
    (“बहुत दुःख उन्होने सहन किये” जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712-1768;
      “आओ, तुम पापीयो” की तर्ज पर)।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल चान द्वारा पढ़ा हुआ पवित्र षास्त्रः मती 26:36-39।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीकिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
“गतसमनी, जैतून का दबाव!” (जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1768)।


रूपरेखा

गतसमनी मे मसीह की प्रार्थना

डो. आर. एल. हाचर्मस, जुनि. द्वारा

“यीषु ने अपनी देह, में रहनें के दिनों में ऊँचे षब्द से पुकार - पुकारकर और आँसू बहा - बहाकर उससे जो उसकी मृत्यु से बचा सकता था, प्रार्थनाएँ और विनती की, और भक्ति के कारण उसकी सुनी गई” (इब्रानियों 5:7)।

I.   पहला, पाठ कहता है मसीह के “अपनी देह में रहने के दिनो” की यूहन्ना 11:35; लुका 19:41।

II.  दूसरा, पाठ हमें कहता है मसीह ने प्रभु से प्रार्थना की, जो गतसमनी में उसको मृत्यु से बचा सकता था, मती 26:36-39; लूका 22:44; 1 कुरिन्थियों 15:3; यषायाह 50:6; 53:5, 12; जकर्याह 12:10; 13:6; भजनसंहित्ता 22:16, 1, 7-8, 18; लूका 22:43।

III. तीसरा, पाठ हमे कहता है की प्रथने मसीह को जवाब दिया, इब्रानियों 12:2; मती 26:38; मरकुस 14:33; लूका 22:44; यषायाह 53:6; 1पतरस 2:24।