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जुदास के झुकाव का झुकाव

THE FALSE REPENTANCE OF JUDAS

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजीलस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की सुबह,
3 अप्रैल 2011 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, April 3, 2011

‘‘जब उसके पकडवानेवाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया और वे तीस चाँदी के सिक्के प्रधान याजकों और पुरनियों के पास फेर लाया'' (मती 27:3)।


मती 27 शुरू होता है प्रातःकाल, गतसमनी के बगीचे में यीशु के पकडे जाने के बाद, उनको महायाजक और बडी सभा के सामने लाने से पहले, उनके विरूध झूठी गवाही प्रमाणित करने के बाद, उनको चहरे पर मारने और हँसी उडाने के बाद, और पतरस द्वारा उनका अस्वीकार करने के बाद।

‘‘जब भोर हुई तो सब प्रधान याजकों और लोगों के पुरनियों ने यीशु को मार डालने की सम्मति की : उन्होंने उसे बांधा, और ले जाकर पिलातुस हाकिम के हाथ में सौंप दिया'' (मती 27:1-2)।

जैसे उन्होंने यीशु को महायाजक के महल से ले जाना शुरू किया, यहूदा अंदर आया। यहूदा वहाँ यीशु के करीब खडा रहा। परंतु यहूदा यीशु की ओर नहीं फिरा और माफी के लिये पूछा नहीं। अगर वो यीशु की ओर फिरा होता, इन पीछले घंटो में भी, तो वह माफ किया जा सकता था। यीशु के बाजु के क्रूस पर का चोर उसके मरने के कुछ समय पहले माफ किया गया था। यहूदा महायाजक और पुरनियों की ओर क्यों फिरा यीशु के ओर माफी के लिये फिरने के बजाय? मैं मानता हूँ कि वहाँ पर दो कारण है।

I. पहला, यहूदा अक्षम्य पाप कर चूका था।

यीषु ने कहा,

‘‘मनुष्य का सब प्रकार का पाप और निन्दा क्षमा की जाएगी : परंतु पवित्र आत्मा की निन्दा क्षमा न की जाएगी। जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहेगा, उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा : परंतु जो कोई पवित्र आत्मा के विरोध में कुछ कहेगा, उसका अपराध न तो इस लोक में और न परलोक में क्षमा किया जाएगा''(मती 12:31-32)।

अपनी उस पदो की समालोचना पर, डो. जोन आर. राईस ने कहा कि लगता है यहूदाने ‘‘अक्षम्य पाप किया था'', कि, वो पुनः प्रमाणितता के लिये दिया जा चूका था। डो. राईस ने कहा,

अक्षम्य पाप मसीह का निश्चिंत पूरा और अंतिम अस्वीकार है ... कि ये अपमान करता है और पवित्र आत्मा को सदा के लिये खींचकर ले जाता है। फिर (पवित्र आत्मा) और मन को नहीं हिलाता, अपरधभाव नहीं लाता या मुक्ति के लिये इच्छा खडी करता ... एक जिसने (अक्षम्य पाप किया था) वह उदास है जब से पवित्र आत्मा उससे खींच ली गई है। पूरा सच्चा फिराव प्रभु की ओर जरूर पवित्र आत्मा के मन पर काम द्वारा किया होगा। अगर (पवित्र आत्मा) आपको खींच लेती है, प्रभु के पास और कोई नहीं है जिसके साथ वो जुडे और पापी को बचाये (जोन. आर. राईस, डी.डी., अ वर्स बाय वर्स कोमेन्ट्री ओन ध गोसपल एकोरडींग टु मेथ्यु, स्वोर्ड अॉफ ध लोर्ड प्रकाशन, 1980 की प्रत, पृष्ठ 183; मती 12:31-32 पर समालोचना)।

डो. राईस के गीत का दूसरा अंतरा, ‘‘अगर आप ज्यादा ठहरोगे,'' तो यहूदा की ओर सीधे भेजे जाओगे!

आप रूके और ठहरे अभी भी उद्धारक का अस्वीकार करते हुए,
   उनकी सारी चेतावनी इतनी धैर्यवान, उनकी सारी विनंती इतनी नम्र;
इस तरह आपने निषेध फल खाया, आपने शैतान के वचन को माना,
   इस तरह आपका मन कठोर बन गया; पाप ने आपके दिमाग में अंधेरा किया।
फिर कितना दुःखद सामना न्याय का, आप फिर से बुलाये जाओगे बिना दया के
   कि आप रूके और ठहरे आत्मा के जाने तक; कितनी बदनामी और मातम,
अगर जब मृत्यु आपको आशाहीन पाती है,
   आप रूके और ठहरे और बहुत देर तक विलंब किया!
(‘‘अगर आप ज्यादा ठहरोगे'', डो. जोन आर. राईस द्वारा, 1895 - 1980)।

यहूदा ‘‘आत्मा के जाने तक ठहरा''। उसने अक्षम्य पाप किया। उस सुबह वो यीशु की ओर नहीं फिरा क्योंकि उसके लिये बहुत देर हो चुकी थी बचाये जाने के लिये! बहुत देर! सदा के लिये बहुत देर!

वहाँ पर लकीर है जो खींची गई है
   प्रभु का अस्वीकार करने के द्वारा ,
जहाँ पर उनकी आत्मा का बुलावा खो गया है
   और आप जल्दी करो उत्साह से पागल भीड के साथ
क्या आपने गिना, क्या आपने किमत गिनी?
   क्या आपने किमत गिनी, अगर आपकी आत्मा खो जाती है,
अगर आप पूरा संसार पाओ अपने लिये?
   अभी भी शायद ये कि लकीर आपने पार की है,
क्या आपने गिना, क्या आपने किमत गिनी?
    (‘‘क्या आपने किमत गिनी?'' ए. जे. होडझ द्वारा, 1923)।

मैं आपसे विनती करता हुँ, पवित्र आत्मा आपसे दूर चली जाये तब तक मत रूकिये! जब वो आपके पाप के लिये स्वीकार करता है - मसीह के पास आइये। शायद आपको और कोई मौका न मिले। मैं आपसे याचना करता हूँ, मैं आपसे विनती करता हूँ, मसीह के पास आइये इससे पहले कि सदा के लिये देर हो जाये!

II. दूसरा, यहूदा का ‘‘पछतावा'' सिर्फ ‘‘सांसारिक शोक'' था।

पाठ कहता है,

‘‘जब उसके पकडवानेवाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया... '' (मती 27:3)।

यहाँ ‘‘पछतावा'' शब्द ग्रीक शब्द ‘‘मेटामेलोमाय'' से अनुवाद किया गया है जिसका अर्थ है ‘‘पछताना'' (स्ट्रोन्ग), ‘‘शोक महसूस करना'' (र्ज्योज रीकर बेरी)। परंतु ‘‘मेटामेलोमाय'' मुक्ति तक नहीं ले जाता। ये सिर्फ ‘‘पछतावा'' है, पवित्र आत्मा द्वारा पाप का अपराधभाव नहीं है। ये पाप करते हुए पकडे जाने के शोक के अलावा कुछ नहीं है। इस प्रकार का शोक और पछतावा सिर्फ गहरी उदासी, निराशा, स्वयं पर दया, और आशाहिनता तक ले जाता है। प्रेरितो पौलुसने कहा,

‘‘परमेश्वर भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उद्धार है : और फिर उससे पछताना नहीं पडता। परंतु सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

परमेश्वर भक्ति का शोक सच्चा पश्चाताप उत्पन्न करता है, जो मसीह में मुक्ति तक ले जाता है। शब्द जो अनुवाद किया गया है ‘‘पश्चाताप'' 2 कुरिन्थियों 7:10 में वह मती 27:3 के शब्द से अलग है, जहां यहूदा ‘‘स्वयं पछताया'' था। 2 कुरिन्थियों 7:10 में ग्रीक शब्द ‘‘मेटानोया'' का प्रकार है - जिसका अर्थ ‘‘मन का बदलना'' है (वाइन)। मेरे भूतपूर्व चीनी याजक डो. तीमोथी लीन (1911 - 2009), जो इब्रानियो और ग्रीक के विद्वान थे, बार - बार कहा, ‘‘ये नयी ‘बुद्धि' है, नया दिमाग।” ये किसी के भी मन का और दिमाग का पूरा बदलाव है जो सिर्फ परमेश्वर उत्पन्न कर सकते है। डो. ज्योर्ज रीकर बेरी (1865 - 1945) ने कहा कि ‘‘मेटानोया'' महान शब्द है (फिर सिर्फ मेटामेलोमाय), पूरे पश्चाताप के लिये नियमित अभिव्यक्ति'' (ग्रीक इंग्लीश न्यू टेस्टामेन्ट लेक्सीकन)। पुरीटीयन लेखक रीचर्ड बाक्सटेर (1615 - 1691) ने इसे ‘‘लगाव का बदलाव'' कहा।

‘‘क्योंकि परमेश्वर भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उद्धार है और फिर उससे पछताना नहीं पडता। परंतु सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

परमेश्वर भक्ति का शोक पवित्र आत्मा द्वारा उत्पन्न होता है, जो फिर पश्चाताप उत्पन्न करता है, नया मन, जो मसीह में मुक्ति तक ले जाता है।

यहूदा ने झुठे पश्चाताप का अनुभव किया जो है पकडे जाने की माफी महसूस करने का। ‘‘जब उसने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है, वो पछताया।” मैं सोचता हूँ कि किंग जेम्स बाइबल इसका ज्ञान देते। वो “स्वयं पछताया” प्रभु ने इसे उत्पन्न नहीं किया था। वो पूरी तरह से मानवीय शोक था, “परमेश्वर भक्ति (जो) पश्चाताप उत्पन्न करती है” वो नहीं। ये “परमेश्वर भक्ति का शोक” नहीं था जो सच्चा मन का फिराव उत्पन्न करता है - सिर्फ स्वयं पर दया! सिर्फ ‘‘सांसारिक शोक (जो उत्पन्न करता है) मृत्यु।” इसलिये वह ‘‘चला गया और जाकर अपने आप को फांसी दी'' (मती 27:5)

मैं मानता हूँ कि केन और एसाव यहूदा की तरह (या उसके अनुरूप) है, जिसको मसीह ने कहा, ‘‘विनाश का पुत्र'' (यूहन्ना 17:12)। यहूदा की तरह, जो मानवीय तरीके से मसीह के मृत्यु के जिम्मेदार है, ‘‘कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढकर उसे घात किया'' (उत्पति 4:8)। केन पर स्कोफिल्ड टीप्पणी कहती है ‘‘केन ... सिर्फ धरती के मनुश्य के तरह है ... पाप के किसी भी पूरे ज्ञान, या प्रायश्चित की जरूरत से निराश्रित'' (ध स्कोफिल्ड स्टडी बाइबल; उत्पति 4:1 पर टीप्पणी)। केन को कभी भी ‘‘परमेश्वर भक्ति का शोक'' और ‘‘मुक्ति के लिये पश्चाताप'' नहीं था। उसने सिर्फ स्वयं के लिये माफी महसूस की। केन ने कहा, ‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है'' (उत्पति 4:13)। स्वयं पर दया! बस यही उसने महसूस किया। उसने सिर्फ ‘‘सांसारिक शोक' महसूस किया। ये पकडे जाने के शोक के अलावा कुछ नहीं था। ये स्वयं को दया तक ले गया, और इससे ज्यादा कुछ भी नहीं! इसने केन को आशाहीन स्थिति में छोड दिया।

एसाव भी यहूदा की तरह (या अनुरूप) था। एसावने अपने पहिलौठे के हक्क बेचे एक कटोरा दाल के लिये जैसे यहूदा को मसीह को मारने के लिये चांदी के तीस सिक्के मिले। स्कोफिल्ड की टीप्पणी कहती है, ‘‘एसाव सिर्फ एक धरती के मनुष्य की तरह खडा रहता है'' (ibid., उत्पति 25:25 पर टिप्पणी)। बाद में, जब एसाव ने जाना कि उसने आशीर्वाद (भाग्य) खो दिया है, ‘‘वह अत्यंत ऊँचे और दुःख भरे स्वर से चिल्लाकर अपने पिता से कहा, हे मेरे पिता मुझको भी आशीर्वाद दे'' (उत्पति 27:38)। एसाव, केन और यहूदा की तरह, ‘‘सांसारिक - शोक'' से भरा हुआ था। उसे कभी भी ‘‘परमेश्वर भक्ति का शोक (जो) मुक्ति के लिये पश्चाताप उत्पन्न करता है''। उसे यहूदा की तरह सिर्फ स्वयं पर दया और पश्चाताप महसूस हुआ। और भी, यहूदा की तरह, एसाव ने कहा, ‘‘मैं अपने भाई याकूब को घात करूँगा'' (उत्पति 27:41)। इब्रानियों कि किताब एसाव को कहती है “व्यभिचारी जन ... जिसने एक बार के भोजन के बदले अपने पहिलौठे होने का पद बेच डाला। तुम जानते हो कि बाद में जब उसने आशिष पानी चाही तो अयोग्य गिना गया और आँसू बहा - बहाकर खोजने पर भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला'' (इब्रानियों 12:16-17)। उसे कभी भी सच्चा ‘‘पश्चाताप, उसके अच्छी तरह आंसू के साथ देखने के बाद भी नहीं मिला।

मैं आशा रखता हूँ कि आप केन, एसाव और यहूदा की तरह नहीं हो। मैं प्रार्थना करता हू कि आप पाप के गहरे अपराधभाव में आइये प्रभु की आत्मा द्वारा। मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप केन की तरह नहीं बनोगे “सिर्फ धरती का मनुष्य ... पाप के किसी भी पर्याप्त ज्ञान से निराश्रय, या प्रायश्चित की जरूरत।'' मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप एसाव की तरह, व्यभिचारी जन नहीं बनोगे। मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप अपनी आत्मा को सांसारिक चीजों के लिये नहीं फेकेंगे। मैं कैसे प्रार्थना करूँ ताकि आप यहूदा की तरह न बनो, जिसने मसीह को धोखा दिया सिर्फ चांदी के तीस सिक्कों के लिये! मसीह ने कहा,

‘‘यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा?'' (मसकुस 8:36)।

ओह, संसार से, और उसके पापो से, और झुठे खजानो से दूर आओ! पापो से दूर आओ, और मसीह के पास आओ। जब प्रभु की आत्मा आपको बुलाती है, और आप का मन बोझ और पाप का भार महसूस करता है, यीशु के पास आओ और उनके लहू द्वारा पाप धो कर शुद्ध हो जाओ! यीशु के पास आओ सदा के लिये देर होने से पहले!

फिर कितना दुःखद सामना न्याय का,
   आप फिर से बुलाये जाओगे बिना दया के
कि आप रूके और ठहरे आत्मा के जाने तक;
   कितनी बदनामी और मातम अगर जब
मृत्यु आपको आशाहिन पाती है,
   आप रूके और ठहरे और बहुत देर तक विलंत किया!
(‘‘अगर आप ज्यादा ठहरोगे'', डो. जोन. आर. राईस द्वारा, 1895 - 1980)

एक युवा आदमी ने हाल ही में मेरे साथी डो. केगन से कहा, ‘‘इस रफतार से मैं कभी भी मसीही नहीं बन सकूंगा।” कितना सच है! आपकी पूरी शिक्षा और प्रार्थना और अच्छे काम आपको मदद नहीं कर सकते जब तक आप पाप के पूरे अपराधभाव में नहीं आते और यीशु की तरफ नहीं फिरते। जैसे एक औरत ने कहा, ‘‘मैं पूरी तरह से अपने आपसे त्रस्त हो चूकी हूँ”। वह कि “परमेश्वर - भक्ति” का (वह) शोक पश्चाताप उत्पन्न करता है। उसके पापो के साथ ‘‘त्रस्त'' होने, महसूस करने के तुरंत बाद वो औरत मसीह तक ले जायी गई और परिवर्तित हुई। प्रभु की आत्मा आपको भी ‘‘पूरी तरह त्रस्त'' करे आपके स्वयं के साथ ताकि आपका ‘‘मुँह बंद किया जाए और सारा संसार (आप) परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरो'' (रोमियों 3:19)। प्रभु की आत्मा आपको यीशु के साथ मिलाये मुक्ति के लिये उनके लहू द्वारा पापों से। आमीन

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन् एल. चान द्वारा पढा हुआ पवित्रशास्त्र : मती 27:1-5।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘अगर आप ज्यादा ठहरोगे'' (डो. जोन आर. राइस द्वारा, 1895 - 1980)।


रूपरेखा

जुदास के झुकाव का झुकाव

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘जब उसके पकडवानेवाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया और वे तीस चाँदी के सिक्के प्रधान याजकों और पुरनियों के पास फेर लाया'' (मती 27:3)।

(मती 27:1-2)

I.  पहला, यहूदा अक्षम्य पाप कर चूका था, मती 12:31-32।

II. दूसरा, यहूदा का ‘‘पछतावा'' सिर्फ ‘‘सांसारिक शोक'' था,
2 कुरिन्थियों 7:10; मती 27:5; यूहन्ना 17:12; उत्पति 4:8; 13; उत्पति 27:34,41; इब्रानियों 12:16-17; मरकुस 8:36, रोमियों 3:19।