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आदर्श कलीसिया

THE MODEL CHURCH

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

केलिफोर्निया के, सान डीयागो के मेट्रो बेप्टीस्ट कलीसिया, में प्रभु के दिन की सुबह,
23 जनवरी 2011 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at Metro Baptist Church, San Diego, California
Lord’s Day Morning, January 23, 2011

‘‘पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है : अनुग्रह और शान्ति तुम्हें मिलती रहे'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:1)।


प्रेरितों पौलुसने ये पत्र लिखा था थिस्सलुनीका के स्थानीय कलीसिया को। बहुतों ने इसे ‘‘आदर्श कलीसिया'' कहाँ है। प्रेरितों पौलुस ने कहाँ, ‘‘थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम'' (1 थिस्सलुनीकियो 1:1)। ‘‘कलीसिया'' के लीये ग्रीक शब्द अनुवाद किया है वो है ‘‘इक्केलेसिया''। ये प्रमाण देता है ‘‘निश्चिंत लोगो का निश्चित जुथ किसी खास भौगोलिक स्थान में,” जो संसार के बाहर से बुलाये जाते थे और स्थानीय संप्रदाय में रचा हुआ (जीम जेन्ट, स्थानीय कलीसिया, स्मार्यना प्रकाशन, 1994,पृष्ठ. 129)।

जीम जेन्ट यह कथन देते है उनकी किताब आदर्श कलीसिया में :

प्रेरितों ने कलीसिया बनाए और उन्होंने कुछ भी ओर नहीं बनाया ... हर वो जगह जहाँ उन्होंने परिश्रम किया वहाँ उन्होंने परिवर्तित की स्थानीय सभा रची ... नयी नियमावली में स्थानीय कलीसिया के अलावा कोई भी और संस्था नहीं दिखती ... (पइपक., पृष्ठ. 84)।

परमेश्वर के साथ ध्यान के बाद यह कलीसिया कुछ नहीं है ... पहले के मसीहीयों को, स्थानीय कलीसिया पवित्रता से प्रबंध की हुई इकाई जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य और सिर्फ ऐसी इकाई को चुनते है! (पइपक., पृपृष्ठ. 83-84)।

नयी नियमावली में ‘‘कलीसिया'' शब्द का 1000 बार उपयोग किया गया है। करीबन हर द्रष्टांत में, ये शब्द संदर्भ करता है मसीहीयों की स्थानीय सभा में। पत्रो में से बहुत से, जैसे पहला थिस्सलुनीकियों, इन स्थानीय कलीसिया को लिखे गये थे।

प्रेरितों लोगो को मसीह तक ले गये और फिर इस परिवर्तित लोगो को स्थानीय कलीसिया में रचित किया। ‘‘प्रेरितो ने कलीसिया की रचना की, और इसके अलावा उन्होंने कुछ नहीं बनाया'' (पइपक., पृष्ठ. 84)। 1 थिस्सलुनीकियों 2:1-20 कहता है कि प्रेरितो पौलुसने थिस्सलुनीका के शहर में स्थानीय कलीसिया रचा। ये स्थानीय कलीसिया ‘‘अनुकरण'' या ‘‘नकल'' करते थे (स्कोफिल्ड सेन्टर नोट एम) यहुदिया में स्थानीय कलीसिया का द्रष्टांत, 1 थिस्सलुनीकियों 2:14 के मुताबिक।

पौलुस इस स्थानीय कलीसिया से बहुत प्रेम करते थे। ध्यान दिजीये दूसरे पाठ के पद 19-20 में उन्होंने क्या कहाँ है इस संप्रदाय के बारे में।

‘‘भला हमारी आशा या आनंद या बडाई का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे? हमारी बडाई और आनंद तुम ही हो'' (1 थिस्सलुनीकियों 2:19-20)।

प्रेरितो पौलुस ने इस स्थानीय कलीसिया को प्रेम किया और इससे बढाई की थी।

वहाँ पर चार कारण है की प्ररितो इस स्थानीय कलीसिया को प्रेम करते थे।


1- ये कलीसिया निश्चित सदस्यता के साथ थे।

2- ये कार्यशील कलीसिया था।

3- ये परिवर्तित कलीसिया था।

4- ये सुसमाचार प्रचार करनेवाला कलीसिया था।

।. पहला, ये कलीसिया निश्चित सदस्यता के साथ थे।

प्रेरितो पौलुस इन लोगो को जानते थे। अगर आप 1 थिस्सलुनीकियों का पहला पाठ पढते हो तो आप देखेंगे की पौलुस उनके बारे में सब जानते थे। वे सिर्फ कुछ सभामें आकर और फिर कही नही गये। वो कुछ निश्चिंत लोगो का जूथ था जो कलीसिया की तरह एक दूसरे से जूडे थे। आज दक्षिणी केलिर्फोनिया में बहुत से लोग ज्यादा उदार कलीसिया द्वारा प्रभावित हुए है, जो कईबार कलीसिया की सदस्यता का महत्व कम कर देते है। परंतु ये अनसूना था उन प्रेरितों के दिनों में। नयी नियमावली के समय में मसीही अपने आप ही सच्चा मान लिया की वे स्थानीय कलीसिया के सदस्य थे। ध्यान दिजीये 1 थिस्सलुनीकियों 1:1 पर,

‘‘पौलुस और सिलवानुस और तीमुथियुस, की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम ... अनुग्रह और शांति तुम्हें मिलती रहे'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:1)।

ये पद स्पष्टता से बताता है की कलीसिया इमारत नहीं है। पहले के कलीसिया के पास इमारत नहीं थी। वे लोगो के घरो में मिले। प्रेरितो ‘‘कलीसिया'' से बात करते है और फिर वे कहते है, ‘‘अनुग्रह और शांति तुम्हें मिलती रहे''। ये यह स्पष्ट करता है की थिस्सलुनीका के शहर में कलीसिया उन लोगो से बनाया गया था जो आपस में जुडे और उस संप्रदाय के सदस्य थे, जैसे की प्रेरितो इफिसियों में कहते है, ‘‘हम आपस में एक दूसरे के अंग है'' (इफिसियो 4:25)। फिर से प्रेरितो ने कलीसिया की सदस्यता के बारे में बोलते है रोमियों की किताब में। इन पदो में वो स्थानीय कलीसिया को ‘‘देह'' कहते है। वो कहता है,

‘‘क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग है, और सब अंगो का एक ही सा काम नहीं; वैसा ही हम जो बहुत है, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग है'' (रोमियों 12:4-5)।

फिर, रोमियों के अंत में, प्रेरितो बहुत से कलीसिया सदस्य को नाम देते है,

‘‘उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उनके घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को, जो मसीह के लिये आसिया का पहला फल है, नमस्कार। मरियम, को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटुम्बी है और मेरे साथ कैद हुए थे और प्रेरितों में नामी है, और मुझ से पहले मसीही हुए थे, नमस्कार। अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्कार। उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्तखुस को नमस्कार। अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्कार। अरिस्तुबुलुस के घराने को नमस्कार। मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्कार। नरकिस्सुस के घराने के जो लोग प्रभु में है, उनको नमस्कार। त्रूफेना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती है, नमस्कार। प्रिय पिरसिस को, जिसने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। रूफुस को जो प्रभु मे चुना हुआ है और उसकी माता को, जो मेरी भी माता है, दोनो को नमस्कार। असुंक्रितुस और फिलगोन और हिर्मेस और पत्रुबास और हिर्मास और उनके साथ के भाइयों को नमस्कार। फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उसकी बहिन और उलम्पास और उनके साथ के सब पवित्र लोगो को नमस्कार। (रोमियों 16:5-15)।

ये यह स्पष्ट करता हे कि लोग कलीसिया में जुडते है। वे कलीसिया के सदस्य थे। उनके नाम कलीसिया के नामावली में थे।

II. दूसरा, ये कार्यशील कलीसिया था।

मेहरबानी करके 1 थिस्सलुनीकियों को देखीये, पाठ पहला, पद तीसरा। चलिये खडे रहते है और इस पद को जोर से पढे।

‘‘अपने परमेश्वर और पिता के सामने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते है'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:3)।

आप बैठ सकते हो। तीन शब्दों पर ध्यान दिजीये : ‘‘विश्वास का काम'', ‘‘प्रेम का परिश्रम'' और ‘‘आशा का धैर्य''। इस स्थानीय कलीसिया में लोग मजदूर थे। वे कलीसिया में थे, प्रभु का काम करते थे। हर हफते कई बार। वे गंभीर मसीही थे, और उन्होंने अपना कार्य इस स्थानीय कलीसिया में और द्वारा किया।

डो. फ्रेन्क. इ., गेइबेलीयन इस पद के लिये कहते है,

पौलुस और उनके सहायक जो याद रखते है थिस्सलुनीकियों के बारे में उसका सार तीन शब्दों के साथ जोड दिया गया है : ‘‘कार्य'', ‘‘परिश्रम'', और ‘‘सहनशिलता'' ... हकीकत में, जहाँ कहीं भी सच्चा विश्वास हाजिर होता है, वो काम करता है (फ्रेन्क. इ., गेइबेलीयन, ध एक्सपोझीशनस बाइबल कोमेन्ट्री, झोन्डरवन, 1978, भाग 11, पृष्ठ. 241)।

आज से सही है काम करना और धैर्य से परिश्रम करना स्थानीय कलीसिया में? हकीकत में ये है! चीन में ज्यादातर प्रभु के सारे श्रेष्ठ काम किये जाते है स्थानीय कलीसिया के धैर्यवान काम के द्वारा। वे ‘‘घर के कलीसिया'' कहे जाते है। चीन में उनके पास मसीही रेडियो कार्यक्रम या मसीही टीवी कार्यक्रम नही होते। उनके पास अतिरिक्त कलीसिया की संस्था और नियोग संस्था नहीं हैं वास्तव में चीन में सारे काम उस ‘‘घर कलीसिया'' द्वारा होते है। और कितना अदभूत काम वे करते है उस स्थानीय कलीसिया द्वारा। जब आप सूनेंगे वे क्या करते है उसके बारे में, ये प्रेरितो की किताब पढने की तरह लगता है! क्यों? क्योंकि, पहले प्रेरितो की किताब के पहले मसीहीयों की तरह, मसीही का चीन में काम लगभग पूरा स्थानीय कलीसिया द्वारा होता है, ‘‘घर कलीसिया'' द्वारा। आप पढ सकते हो कि प्रभु क्या करते है स्थानीय कलीसिया द्वारा चीन में डेविड ऐकमन की किताब में, बीजींग में यीशु (रेग्नेरी प्रकाशन, प्दबण्ए 2003। ये मंगाया जा सकता है ध वोइस अॉफ ध मार्टीयर की वेबसाइट ूूूण्चमतेबबनजपवदण्बवउ से।) ढध्चझ ढच बसेंेत्रष्चंतंऋपदकमदजष्झये अनुमान लगाया जाता है कि अब चीन में करीबन 1000 लोगो का परिवर्तन ईसा मसीह के मत में हर घंटे में हो रहा है, 24000 हर दिन, 9 मीलीयन हर साल। वहाँ पर लगभग 130 मीलीयन या ज्यादा मसीही है चीन में। अगले बीस सालो में, ये अनुमान लगाया जाता है कि करीबन 30 फिसदी लोग चीन में मसीही होंगे। और ये काम किया जाता है स्थानीय कलीसिया द्वारा करीब करीब अकेले हाथों से।

चलिये थिस्सलुनीका के स्थानीय कलीसिया के द्रष्टांत का अनुकरण करते है, जिसने ‘‘परमेश्वर की उन कलीसियाओं की ... यहूदिया में'' (1 थिस्सलुनीकियों 2:14) के द्रष्टांत का अनुकरण किया है। चलिये लोगो के प्रजासताक चीन के स्थानीय कलीसिया के द्रष्टांत का अनुकरण करते है! चलिये स्थानीय कलीसिया में और द्वारा काम करें!

III. तीसरा, ये परिवर्तित कलीसिया था।

1 थिस्सलुनीकियों 1:4-6 को देखिये। चलिये इस तीन पदो को जोर से पढते है।

‘‘है भाईयों, परमेश्वर के प्रिय लोगों, हम जानते है कि तुम चुने हुए हो। क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल शब्द मात्र ही में वरन् सामर्थ्य और पवित्र आत्मा में, और बडे निश्चय के साथ पहुँचा है; जैसा तुम जानते हो कि हम तुम्हारे लिये तुम्हारे बीच में कैसे बन गए थे। तुम बडे क्लेश में, पवित्र आत्मा के आनंद के साथ?, वचन को मानकर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:4-6)।

प्रेरितों पौलुसने इन्हें ‘‘भाइ'' कहा क्योंकि उन्होंने उसे सुसमाचार प्रवचन करते हुए सूना था ओर फिर वे परिवर्तित थे। उन्होंने मसीह पर विश्वास किया और फिर पौलुस और उनके साथी के द्रष्टांत का अनुकरण किया। जिस पल से वे परिवर्तित हुए थे, उन्हें पीडा दी गई थी अविश्वासी मूर्तिपूजक द्वारा उनके शहर में। और फिर भी उन्हें बडा आनंद मिला, पवित्रआत्मा द्वारा उन्हें दिया गया था।

अब पद नौ पढते है।

‘‘क्योंकि वे आप ही हमारे विषय में बताते है कि तुम्हारे पास हमारा आना कैसा हुआ; और तुम कैसे मूरतों से परमेश्वर की ओर फिर ताकि जीवते और सच्चे परमेश्वर की सेवा करो'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:9)।

उस स्थानीय कलीसियामें मसीही मूर्तियों से प्रभु की और फिरे। वे सच्ची तरह से परिवर्तित थे। प्रभु का सच्चा काम स्थानीय कलीसिया द्वारा वो सिर्फ उन लोगो से किया जा सकता है जो पापो से मसीह की और फिरे हो। ‘‘धैय'' (ट.3) और पीडा की सहनशीलता (ट.6) जो उन्होंने दिखायी वो सिर्फ सच्चे परिवर्तन का परिणाम ही हो सकता है।

निश्चींत किजीये की आप परिवर्तित हो। निश्चींत किजीये की आप पूरी तरह यीशु मसीह की ओर फिर गये हो। फिर से पद एक पर ध्यान दिजीये। लोग जो इस स्थानीय कलीसिया के सदस्य थे वे ‘‘प्रभु पितामह में और प्रभु यीशु मसीह में ''। आपको मसीह के पास आना ही चाहिये! आपको ‘‘मसीह में'' होना ही चाहिये। वो ही एक रास्ता है बचाये जाने का। यीशु ने कहाँ,

‘‘बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता'' (यूहन्ना 14:6)।

मसीह के पास आइये। वे क्रुस पर आपके पापो के लिये मरे। उन्होंने अपना लहू छिडका आपके पापो को धोने। वे शारिरिक रूप से मृत्यु से उठे। वे स्वर्ग में प्रभु पितामह के दाहिने हाथ पर है। ‘‘प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उध्धार पाएगा'' (प्रेरितों 16:31)।

IV. चौथा, ये सुसमाचार प्रचार का कलीसिया था।

1 थिस्सलुनीकियों 1:8 को देखिये। चलिये ये पद जोर से पढते है।

‘‘क्योंकि तुम्हारे यहाँ से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:8)

उनका विश्वास बज उठा! हर जगह वे गये, ‘‘प्रभु का वचन सुनाया गया''। वे मुक्ति के लिये उत्सुक थे। उन्होंने हर एक को कहाँ, उन्होंने हर एक को कहा, उन्होंने मसीह के बारे में बात की थी! “याद रखिये, ये कलीसिया एक साल से भी कम उम्र का था जब पौलुस ने ये पत्र लिखा था। यह छोटा सा, सतायेजानेवाला कलीसिया था। तो भी, उनका विश्वास हर जगह जानामाना बन गया।” (ध एपलाइड न्यु टेस्टामेन्ट कामेन्ट्री, कींग्झवे प्रकाशन, 1997, पृष्ठ. 828)।

अगर वे सुसमाचार धर्मोपदेश उत्साह से फैला सकते तो, हम भी कर सकते है! अगर चीनी घर कलीसिया, मसीही सुसमाचार प्रचार फैला सकता है, तो हम भी कर सकते है! चलिये ये हमारे लिये भी कहाँ जाये की ‘‘तुम्हारे यहाँ से प्रभु का वचन सुनाया गया''। सुसमाचार फैलाये! खोये हुए रिश्तेदारो और मित्रो को कलीसिया में ले आईये। खोये हुए सहपाठी और साथी काम करनेवालो को भी कलीसिया में ले आईये!

‘‘सडको पर और बाड़ो की ओर जा और लोगों को विवश करके ले आ, ताकि मेरा घर भर जाए'' (लूका 14:23)।

यही तो तरीका है मसीह की आज्ञा मानने का और उनकी श्रेष्ठ आज्ञा परिपूर्ण कीजीये।

(संदेश का अंत)
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रूपरेखा

आदर्श कलीसिया

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘पौलुस और सिलवानुस आर तीमुथियुस की ओर से थिस्सलुनीकियों की कलीसिया के नाम, जो परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह में है : अनुग्रह और शान्ति तुम्हें मिलती रहे'' (1 थिस्सलुनीकियों 1:1)।

।. पहला, ये कलीसिया निश्चींत सदस्यता के साथ थे,
इफिसियों 4:25; रोमियों 12:4-5; 16:5-15।

II. दूसरा, ये कार्यशील कलीसिया था, 1 थिस्सलुनीकियों 1:3; 2:14।

III. तीसरा, ये परिवर्तित कलीसिया था, 1 थिस्सलुनीकियों 1:4-6,9;
यूहन्ना 14:6; प्रेरितों 16:31।

IV. चौथा, ये सुसमाचार प्रचार का कलीसिया था,
1 थिस्सलुनीकियों 1:8; लूका 14:23।