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दुःख, भारीपन और गहरा शोक

GRIEF, HEAVINESS AND DEEP SORROW

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

केलिर्फोनिया के मोन्रोविया के काल्वरी रोड बप्तीस कलिसिया में शनिवार शाम, 1 जनवरी, 2011 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at Calvary Road Baptist Church, Monrovia, California
Saturday Evening, January 1, 2011

‘‘क्योंकि परमेश्वर भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उध्धार है और फिर उससे पछताना नहीं पडता : परंतु सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।


इस प्रकरण में दो तरह के शोक दिखते है, परमेश्वर-भक्ति का शोक और सांसारिक शोक। ग्रीक शब्द जो यहाँ अनुवाद किया है जैसे ‘‘शोक'' वो है ‘‘लूपे''। इसका अर्थ है ‘‘दुःख, भारीपन और गहरा शोक''। यहाँ है दो तरह के शोक।

।. पहला, सांसारिक शोक।

‘‘सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है''। डो. जोन गील (1697-1771) ने कहा की ये सांसारिक शोक वो शोक है जो ‘‘संसार के मनुष्य के लिये सामान्य है, जैसे क्रैन, फिरौन, यहूदा और दूसरो के लिये; ये सांसारिक सिद्धांतोसे उठता है ... ये ज्यादातर सांसारिक वस्तुओं के नुकसान के संदर्भ के अलावा कुछ नहीं होता, सांसारिक आनंद में नाराजगी के लिये ... आनंद” (जोन गील, डी.डी., एन एक्सपोझीसन अॉफ ध न्यु टेस्टामेन्ट, ध बेप्टीस्ट स्टानर्डड बेरर, 1989 में फिर से छपां हुआ, भाग ॥, पृष्ठ 804; 2 कुरिन्थियों 7:10 पर टिप्पणी)। ये पवित्र प्रभु के विरूद्ध पापो का शोक नहीं है। ये स्वार्थ का शोक है। ये आता है आपके अपनेआप को माफ करने से, पाप के शोक से नहीं। ये क्रैन का शोक है, जिसने कहाँ,

‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है'' (उत्पति 4:13)।

क्रैन ने प्रभु कि अवज्ञा की जानबूझकर गलत चढावा देकर। जब वो अस्वीकार किया गया, क्या क्रैन को परमेश्वर-भक्ति का शोक हुआ? नहीं उसे नहीं हुआ! वो प्रभु पे गुस्सा हो गया। जब उसने अपने भाई एबल की हत्या की, क्या उसे प्रभु-भक्ति का शोक हुआ? कोई सोचेगा उसे दुःख, भारीपन और गहरा शोक हुआ होगा, वो भयानक पाप करने का। परंतु उसे नहीं हुआ! वो सिर्फ अपने आप के लिये दुःखी था, उसके पापो के लिये नहीं। उसने परमेश्वर से कहा,

‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है'' (उत्पति 4:13)।

उस मनुष्य के स्वार्थीपन को देखिये! ‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है''। ध्यान दिजिये दो व्यक्तिगत सर्वनाम पर, ‘‘मेरा” और ‘‘मैं''। वो अपने आपके लिये दुःखी था - परंतु वे अपने पापो के लिये दुःखी नहीं थे। भयानक! धृणास्पद!

अब भी आप में से कुछ उससे बहेतर नहीं हो। आप में से कुछ की आखो में हर सभा में आँसु होते है। परंतु आसुँ आपने किये हुए पापो के शोक के लिये नहीं है। ‘‘अभागा मै,'' आपका स्वःकेन्द्रित मन कहता है,

‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है'' (उत्पति 4:13)।

आपको विचार नहीं उस शोक का जो आपके पापो से दूसरो को हुआ है। आपको विचार नहीं है, शोक, तड़प और दुःख जो आपने अपने माता - पिता और अपने मित्रो को दीये है, कोई शोक नहीं, कुछ भी दुःख और तड़प के लिये की मसीह आपको आपके पापो से बचाने के लिये सहे। कोई नहीं! कोई भी नहीं! आप सिर्फ अपने आपके लिये दुःखी हो, और आपको कुछ भी दुःख नहीं है उन पापो का जो आपने पवित्र परमेश्वर और उनके पुत्र के विरूद्ध किये है।

‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है'' (उत्पति 4:13)।

जो व्यक्ति अपने अंर्तभाग में स्वार्थी रहता है, क्रैन की तरह, कभी भी परिवर्तित नहीं हो सकता है, क्योंकि ‘‘सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियो 7:10)। आप ‘‘अपराधों और पापों के कारण मरे हुए'' (इफिसियों 2:1) रहेंगे अब, और आखिरकार आपकी आत्मा अधोलोक में जा गीरेगी, जहाँ आप निरंतर पूरी अनंतता के दुःख मेहसूस करेंगे अपने आपके लिये और आपके पापो के लिये नहीं। ध्यान दिजिये! वो धनवान मनुष्य अधोलोक में दुःखी रहेगा, उसके पापो के लिये नहीं, परंतु अपने आपके लिये। वो अपने पापो के लिये नहीं रोया। नहीं! नहीं!

‘‘उसने पुकार कर कहा, हे पिता अब्राहम, मुझ पर दया करके ... क्योंकि मैं इस ज्वाला में तडप रहा हूँ'' (लूका 16:24)।

‘‘मुझे।” ‘‘मैं''। अंत में स्वकेंन्द्रित! क्रैन की तरह, वो ऐसा मनुष्य था जिसे कभी भी अपने पापो के लिये शोक मेहसुस नहीं हुआ। अधोलोक में भी उसने सिर्फ अपने आप पर ही दया मेहसूस की। उसे अपने स्वयं के लिये ही शोक हुआ। उसे कभी भी अपने पापो के लिये शोक मेहसूस नहीं हुआ। ‘‘सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' - दूसरी मृत्यु, अधोलोक की ज्वाला में। अधोलोक में मनुष्य को कभी भी मुक्ति नहीं मिल सकती। ये सदा ही बचाये जाने के लिये देर ही होती है। हमेंशा और सर्वदा आप पुकारते रहेंगे स्व-केंद्रित क्रैन के साथ,

‘‘मेरा दण्ड सहने से बाहर है''।

हमेशा और सर्वदा आप उस धनवान व्यकित के साथ पुकारेंगे,

‘‘मुझ पर दया कर ... क्योंकि मैं इस ज्वाला में तडप रहा हूँ।''

परंतु दया नहीं फैलेगी क्योंकि आपने अपना जीवन जीया, और अपनी मौत मरे, सदा अपने पाप जो आपने पवित्र परमेश्वर के विरूद्ध किये उसे अपने मनमें अपराध माने बिना। ‘‘सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है''।

मैंने रात के बाद रात में इन सभाओं में देखा है। एक चीनी विद्यार्थी रातो की रातो रोता है। परंतु वो अपने बहुत से पापों के लिये नहीं रोता। वो रोता है क्योंकि वो ये पता नहीं कर पाता की मसीह के पास कैसे आये। मैं अभागा! मैं अभागा! “मैं इसका चित्रण नहीं कर सकता हूँ,'' वो उसके मनमें रोता है। क्या स्वयं पर दया! यह ‘‘सांसारिक शोक (जो) मृत्यु उत्पन्न करता है''। अगर मनुष्य पवित्र परमेश्वर के विरूद्ध के पापो को मान लेता है, उसे मसीह के पास स्वयं प्रभु द्वारा ले जाया जाता।

एक युवा लडकी हर रात रोती हुई आती है। परंतु वो अपने पापो पर नहीं रोती। वो इसलिये रोती है क्योंकि वो मेहसूस करती है अपने माता-पिता से प्रभाव। वो चाहती है कि वे उसे अकेला छोड दे ताकि वो जैसे रहना चाहे रह सके, अपरिवर्तित अवस्था में। उसे अपने पापो के लिये शोक नहीं है। उसे सिर्फ अपने लिये दुःख है, दुःख ये है कि उसके माता-पिता उसे कलिसिया में आने को मजबूर करते है।

एक औरत हर रात रोती है। परंतु वो सिर्फ भावनाओं के आँसू है। वो है, स्वभाव से, बहुत भावनात्मक। इसलिये वो रोती है। परंतु वो आँसू अपराधभाव के नहीं है। वो आँसू छोटे बालक के आँसू के समान आँसू से ज्यादा कुछ नहीं है। मेरी माँ उसे ‘‘मगरमच्छ के आँसू'' कहती है, आँसू जो बालक की भावना से आते है, जो ‘‘सांसारिक शोक (जो) मृत्यु उत्पन्न करता है'' उससे ज्यादा कुछ भी नहीं है।

हमने दूसरो को देखा है जो रोते है अधोलोक में जाने के डर से। आश्चर्य जैसा लगता है यह शायद, ये भी आता है ‘‘सांसारिक शोक (जो) मृत्यु उत्पन्न करता है''। अधोलोक का डर अलग है पापो के शोक से। यह भी स्वकेंद्रित है, ‘‘मैं अधोलोक में नहीं जाना चाहता'' ये स्वार्थी शोक है! ये वो शोक नहीं है जो प्रभु को कहता है,

‘‘मेरा पाप निरंतर मेरी दृष्टि में रहता है। मैंने केवल तेरे ही, विरूद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है'' (भजनसंहिता 51:3-4)।

ये डर का शोक है, ना कि पवित्र परमेश्वर के विरूद्ध के पापो के दुःख को शोक।

‘‘क्योंकि परमेश्वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है, जिसका परिणाम उध्धार है और फिर उससे पछताना नहीं पडताः परंतु सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

II. दूसरा, परमेश्वर-भक्ति का शोक जो मुक्ति के लिये पश्चाताप पैदा करता है।

मेथ्यु हेन्रीने कहा, ‘‘सच्चे पश्चाताप का पूर्वगामी (अग्रवर्ती) है प्रभु-भक्ति का शोक। ये स्वयं पश्चाताप नहीं है, परंतु ये पश्चाताप की अच्छी पूर्व तैयारी है, और कुछ हद तक ये पश्चाताप पैदा करने का कारण है ... ये प्रभु-भक्ति का शोक (है), परमेश्वर भक्ति का शोक ... जो मुक्ति में खत्म होगा; परंतु सांसारिक शोक मृत्यु पायेगा ... दमन और प्रभु-भक्ति शोक पहले जरूरी है (मुक्ति को)'' (मेथ्यु हेन्री का पूर्ण बाइबल पर संभाषण, हेन्ड्रीकषन प्रकाशक, 1991 की प्रत, भाग 6, पृष्ठ 505; 2 करिन्थियों 7:10 पर टिप्पणी)। इयान एच. मुरेयने कहा, ‘‘कोई भी परिवर्तित नहीं होता बिना जाने की उसे जरूरत है। पुनःजीव सामान्यतः तब आता है जब हर एक व्यक्ति अपराधभाव के नीचे हो'' (इयान.एच.मुरेय., ध ओल्ड इवान्जलीकलीझम, ध बेनर अॉफ ट्रुथ ट्रस्ट, 2005 की प्रत, पृष्ठ 22)।

क्या आप सच्ची तरह परिवर्तित हो सकते हो अपने पापो के लिये शोक मेहसूस किये बिना? क्या आप सच्चे मसीही बन सकते हो बिना पाप मेहसूस किये ‘‘दुःख, भारीपन और गहरा शोक'' पवित्र प्रभु की नजरों में? वो देखिये, ‘‘उस नगर की, एक पापिनी स्त्री'' (लूका 7:37)। उसे देखिये जब वो यीशु के करीब आती है, ‘‘उसके पीछे खडी होकर रोती हुई'' (लूका 7:38)। क्या यीशु ने उसकी निन्दा की अपने पापो पर रोने के लिये? उन्होंने नहीं की! उन्होंने उस रोते हुए पापीयों से कहा, ‘‘तेरे पाप क्षमा हुए'' (लूका 7:48)। डो. मार्टीन लोयड - जोनेस ने कहा, ‘‘क्या मनुष्य अपने आपको शापित पापी की तरह बिना भावना के देख सकता है? क्या मनुष्य गुजरती हुई व्यवस्था को सूने और कुछ मेहसूस न करे ऐसा हो सकता है? या विपरीत, क्या मनुष्य हकीकत में सोचता है प्रभु का प्रेम यीशु मसीह में और कुछ भावना मेहसूस नहीं करे? सारी परिस्थिति (की आप कोई भी भावना मेहसूस नहीं करे) पूरी तरह से हास्यास्पद है'' (डी. मार्टीन लोयड-जोनेस, एम.डी., प्रीचींग एन्ड प्रीचर्स, झोन्डरवान पब्लीसींग हाऊस, 1981 की प्रत, पृष्ठ 95)।

जब पाप का शोक कोई भी व्यक्ति को आता है तो वो तीव्रता से व्याकुल हो जाएगा। उसका मन प्रभु को पुकारेगा, ‘‘मैंने केवल तेरे ही विरूद्ध पाप किया'' (भजनसंहिता 51:4)। उसका मन पुकारेगा, ‘‘मै नष्ट हुआ् क्योंकि मैं अशुद्ध होंठवाला मनुष्य हूँ'' (यशायाह 6:5)। उसका मन पुकारेगा, ‘‘तूने हमारे अधर्म के कामों को अपने सम्मुख और हमारे छिपे हुए पापों को अपने मुख की ज्योति में रखा है'' (भजनसंहिता 90:8)। वो मेहसूस करेगा जो यिर्मयाह ने प्रार्थना की, ‘‘कि हमारी आँखो से आँसू बह चलें और हमारी पलकें जल बहाए'' (यिर्मयाह 9:18)। वो पौलुस के साथ पुकारेगा, ‘‘मैं कैसा अभागा मनुष्य हूँ! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुडाएगा?'' (रोमियों 7:24)।

मैं चश्मदीद गवाह हुँ प्रभु के भेजे हुए दो उध्धार का। मैं कह सकता हूँ कि जो मैंने देखा था वो विलीयम गीबसन द्वारा वर्णन किया गया था दक्षिणी आर्यलेन्ड में 1859 के अलस्टर उध्धार के संदर्भ में। गीबसन ने कहा,

‘‘मनुष्य ने मेहसूस किया जैसे प्रभु ने उन पर साँस खीचीं। वे पहले श्रध्धायुक्त भय और डर से असरकारक हुए - फिर वे अश्रु में नहाये - फिर अनकहे प्रेम से भर गये'' (पेन्टेकोस्ट टुडे? ध बाइब्लीकल बेसीस फोर अन्डर स्टेन्डींग रीवाइवल में इयान.एच.मुरेय द्वारा कथन किया हुआ, ध बेनर अॉफ ट्रुथ ट्रस्ट, 1998, पृष्ठ. 22)।

ठीक ठीक यही है जो मैंने देखा। मैंने लोगो को देखा जो उनके पापो के अपराध में इतने आ गये थे की ‘‘वे आँसुओं में नहाये थे''। यही है जो चीन के प्रजास्ताक लोगो में बडे उध्धार में होता हैं। मैंने चीन में उध्धार के विडियों देखे है। वे वहाँ है, चीनी लोगो की भारी भीड इतनी गहराई से उनके पापो के अपराध में आये है की वे ‘‘आसूँओ में नहाये''। यह पिन्ताकुस्तीयन नहीं है। ये वो कहीं जानेवाली ‘‘पूजा'' नहीं है। ये प्रभु का कार्य है पापीयों को पापो का गहरा अपराधभाव देना। चीन का उध्धार के आँसू, पापो के दुःख, भारीपन और गहरे शोक के आँसू है!

‘‘क्योंकि परमेश्वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उध्धार है ...'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

मैं कहता हूँ कि आपको ‘‘परमेश्वर-भक्ति'' को मेहसूस करने की जरूरत है। मैं कहता हूँ कि आपके मन को जरूरत है प्रभु द्वारा भेजे गये आपके पापो के अपराधभाव में पीगलने की। मैं कहता हूँ कि यहाँ कुछ लोग है जिसके मन को जरूरत है ‘‘छेदने की'' जैसे वे वहाँ पिन्तेकुस्त में, जब प्रोढ लोग, ‘‘के हृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, हे भाइयो हम क्या करें?'' (प्रेरितो 2:37)। सूखे, मरे हुए ‘‘सेवक'' शायद इसे ‘‘धार्मिक हठ'' कहे अगर आप आँसू बहाते हो पवित्र प्रभु के विरूद्ध पापो के लिये। परंतु बाइबल इसे कहता है, ‘‘परमेश्वर-भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है (जो) जिसका परणिाम उध्धार है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

‘‘टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है : हे परमेश्वर , तू टूटे और पिसे हुए, मन को तुच्छ नहीं जानता'' (भजनसंहिता 51:17)।

ओह, आप शायद प्रभु की आत्मा द्वारा तूट सकते हो! ओह, वे शायद आपको तूटा हुआ शोर्कात मन दे! ओह, शायद पश्चाताप के आँसू बहे आपकी आँखों से जब आप ‘‘परमेश्वर-भक्ति का शोक'' मेहसूस करो प्रभु की व्यवस्था तोडने और उनकी नजरो में पापी बनने के लिये।

आप बिना हिले वहाँ बैठे, ये सोचते हुए की आप मसीही बनना सीख सकते हो अपने मन से। परंतु बाइबल कहता है, ‘‘धार्मिकता के लिये मन से विश्वास किया जाता है'' (रोमियों 10:10)। आपका ‘‘मन'' टूटना ही चाहिये। आपका ‘‘मन'' रोना ही चाहिये। शायद आपकी आँखे हकीकत में न रोये, परंतु आपके मन को आपके पापो के लिये शोक मेहसूस करना जरूरी है।

ये सारे लंबे समय से आप पवित्र प्रभु के विरूद्ध में पाप करते आये हो। इन सारे लंबे सालो में आपने यीशु का अस्वीकार करने के लिये आँसू बहाने के से मना कर दिया, जो ‘‘वह हमारे ही (आपके) अपराधो के कारण घायल किया गया, वह (जो) हमारे अधर्म के हुकामो का कारण (आपके) कुचला गया'' (यशायाह 53:5)। वे क्रूस पर मरे आपके पापो को चूकाने। उन्होंने उनका पवित्र लहु बहाया आपको पापो से शुद्ध करने। ये जुल्म और तडप से गुजरे आपके अनंत आत्मा को अंतहीन दण्ड से बचाने। क्या आप शोक मेहसूस नही कर सकते उनके प्रेम के लिये जो उन्होंने आपको दिखाया है?

जब प्रभु कोरिया में शक्तिशाली रास्ते से चले, धर्म प्रचारक ने एक सभा में प्रमाणित किया : ‘‘जैसे जैसे प्रार्थना जारी रही, भारीपन ओर शोक की आत्मा पापो के लिये प्रेक्षको में से नीचे आयी। एक तरफ किसीने रोना शुरू किया, और एक पल में सारे प्रेक्षक रो रहे थें मनुष्य के बाद मनुष्य ... तूटेंगे और रोयेंगे और फिर अपने आपको धरती पर गिरा दिया और अपनी मुठ्ठी से धरती पर मुक्के मारने लगे, (पापो के) अपराध की पूरी पीडा में। मेरा खुद का खाना बनानेवाला ... इसके बीच में तूट गया और मेरे कक्ष के सामने पुकारने लगा : याजक, मुझे कहीये, क्या मेरे लिये कोई आशा है, क्या में माफी पा सकता हूँ? और फिर उसने अपने आपको, धरती पर गिराया और रोया और रोया, और करीबन पीडा में चिल्लाया'' (ब्रेन. एच. एडवर्डस, रीवाइवल : अ पीपल सेच्युरेटेड वीथ गोड, इवान्जलीकल प्रेस, 2008, प्रत, पृष्ठ. 115)।

पहले चीनी बेप्टीस्ट कलीसिया में मैंने देखा की युवा चीनी लोग जो अपने जीवन में कभी भी, कलीसिया नहीं गये थे वे रो रहे थे और विलाप कर रहे थे पापो के अपराध भाव में, अपने पापो का स्वीकार करते हुए ओर प्रभु के सामने घंटो तक, और रातो तक रोते हुअे। जब बप्तीस कलीसिया में दूसरी सभा में अपराधभाव आया, मैंने देखा की युवा लोग जो गाते हुए थक गये थे, उनकी आँखों से बहते हुए आँसू से तूट चूके थे - पापो के अपराधभाव में। मैंने देखा एक बुर्जुग व्यक्ति, जो सालो तक कलीसिया का सदस्य था, कलीसिया के कक्ष में अपने हाथो और घुटनो के बल रेंगते, चिल्लाते, ‘‘मैं खो गया! मैं खो गया! मैं खो गया!'' जो कईबार होता है प्रभु के भेजे उध्धार के समय में,

‘‘टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है : हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।'' (भजनसंहिता 51:17)।

‘‘क्योंकि परमेश्वर-भक्ति का शोक एसा पश्चाताप उत्पन्न करता है, जिसका परिणाम उध्धार है ...'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

आप मसीह के पास तब तक नहीं आयेंगे जब तक आपका मन तूटता नहीं है। आप तारणहार का विश्वास नहीं करेंगे जब तक आप अपने पापो का दुःख और भारी शोक मेहसूस नहीं करते। सिर्फ जब आप अपने लिये यीशु की जरूरत मेहसूस करोगे तब आप उनके पास आयेंगे और बचाये जाओगे। आमीन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढा हुआ पवित्रशास्त्र : भजनसंहिता 51 : 1-9।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘सर्च मी, ओ गोड'' (भजनसंहिता 139 : 23-24)।


रूपरेखा

दुःख, भारीपन और गहरा शोक

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘क्योंकि परमेश्वर भक्ति का शोक ऐसा पश्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उध्धार है और फिर उससे पछताना नहीं पडता : परंतु सांसारिक शोक मृत्यु उत्पन्न करता है'' (2 कुरिन्थियों 7:10)।

।. पहला, सांसारिक शोक, उत्पति 4:13, इफिसियों 2:1; लूका 16:24; भजनसंहिता 51:3-4।

॥. दूसरा, परमेश्वर-भक्ति का शोक जो मुक्ति के लिये पश्चाताप पैदा करता है, लूका 7:37,38,48; भजनसंहिता 51:4; यशायाह 6:5; भजनसंहिता 90:8; यिर्मयाह 9:18; रोमियों 7:24; प्रेरितो 2:37; भजनसंहिता 51:17; रोमियों 10:10; यशायाह 53:5।