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मसीह के दुःख

THE SUFFERINGS OF CHRIST

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

केलिर्फोनिया के मोन्रोपिया के कालवरी रोड बेप्टीस्ट कलीसिया में प्रभु के दिन की सुबह,
26 दिसंबर, 2010 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन.
A sermon preached at Calvary Road Baptist Church, Monrovia, California
Lord’s Day Morning, December 26, 2010

‘‘इसी उध्धार के विषय में उन भविष्यवेताओं ने बहुत खोजबीन और जाँच-पडताल की जिन्होंने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्यवाणी की थी : उन्होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उनमें थ और पहले ही से मसीह के दुःखो की और उसके बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था'' (1 पतरस 1:10-11)।


प्रेरितो पतरस हमें कहते है कि पुराने नियमावली के भविष्यवेता मसीह की आत्मा द्वारा लिखे गये थे। ये बाइबल के बहुत से कथनों में से एक है यह घोषित करते है की पुरानी नियमावली प्रभु की प्रेरणा से दी गई थी। भविष्यवेताने लिखा था कि कुछ वस्तुएँ जो वे स्वयं भी नहीं समझ सकते। उन्होंने उसका अर्थ एकाग्रचित से ढूँढा। यशायाह 53 और भजनसंहिता 22, और बहुत सारे पुराने नियमावली के पवित्रशास्त्र, भविष्यवाणी में कहते है ‘‘मसीह के दुःख'' (1 पतरस 1:11)।

अब मैं चाहता हूँ कि आप 11 वे अध्याय के अंत के नजदीक में दीये हुअे चार शब्दों को ध्यान से देखे, ‘‘मसीह के दुःख'', ‘‘टा इयश क्राइस्टोन पथमेटा'', ‘‘मसीह का पथमेटा''। ग्रीक शब्द का अर्थ है ‘‘पीड़ा'' या ‘‘दुःख''। ये बहुवचन है - एक से ज्यादा पीड़ा, एक से ज्यादा दुःख। ‘‘मसीह का दुःख''।

प्रेरितो पतरस कह रहे थे दुःख जो मसीहने अनुभव किये उनके जुनुन में, उनके जीवन के अंत में पृथ्वी पर। वे बहुत से दुःखो से गुजरे हमें हमारे पापो से बचाने।

।. पहला, गतसमनी के बगीचे में उनका दुःख।

उनके क्रूस पर चढने की अगली रात से उनका दुःखो की शुरूआत हो गयी। जब आखरी भोज समाप्त हुआ तब लगभग मध्यरात्रि हो गई थी। यीशु चेलो को घर से बाहर ले गये। वे गहरे अंधेरे से गुजरे। उन्होंने किद्रोन का नाला पसार किया और जैतुन के पहाड की ओर उपर चलने लगे और गतसमनी के बगीचे के गहरे अंधेरे में प्रवेश किया। यीशु ने चेलो से कहॉ, ‘‘यहीं बैठे रहना, जब तक मैं वहाँ जाकर प्रार्थना करूँ'' (मती 26:36)। वे पतरस, याकूब और यूहन्ना को बगीचे के अंदर लेकर गये। फिर वे उन तीनो को वहाँ छोडकर थोडा और आगे गये, जैतुन के वृक्ष के नीचे, जहाँ उन्होंने अकेले ही प्रभु से प्रार्थना की।

अब ‘‘मसीह का दुःख'' (1 पतरस 1:11) शुरू हुआ। ध्यान दिजिये अब तक किसी भी मनुष्य का हाथ उन्हे छुआँ नहीं था। ध्यान दिजिये, उनका दुःख तब शुरू हुआ जब वे अंधेरे में, जैतुन के वृक्ष की डालियों के नीचे वहाँ गतसमनी में अकेले थे। वहाँ, बगीचे में, सारी मनुष्य जाति के पापों का बोझ उन पर लादा गया था, जो वे सहेंगे ‘‘उनके अपने शरीर पर'' क्रुस पर सुबह में (1 पतरस 2:24)। फिर यीशु ने कहा,

‘‘मेरा जी बहुत उदास है, यहाँ तक कि मेरा प्राण निकला जा रहा है ... हे मेरे पिता, यदि हो सके तो, यह कटोरा मुझ से टल जाए'' (मती 26:38, 39)।

इस प्रार्थना का सामान्य अर्थ है कि यीशु को क्रूस पर ले जाने को कहाँ गया था। परंतु मैं देखता हूँ कि किसी भी पवित्रशास्त्र में यह दर्शाया नहीं गया। मैं मानता हूँ कि डो. जोन. आर. राइस और डो. जे. ओलीवर बुशवेल ने सही अर्थ दिया था। दोनो धर्मप्रचारक डो. राइस और ब्रहज्ञानी डो. बुशवेल ने कहाँ की मसीह की प्रार्थना ‘‘यह कटोरा मुझ से टल जाए,'' का अर्थ है मृत्यु का ‘‘कटोरा'' पापो के बोझ के दुःख से - वहाँ गतसमनी में।

यीशु ने स्वयं को ऐसे आघात की स्थिती में पाया कि वे लगभग मरनेवाले थे वहाँ बगीचे में। डो. बुशवेलने कहाँ की यीशु ने प्रार्थना कि ‘‘बगीचे में मृत्यु से छुटकारे के लिये, ताकि वे शायद अपना मकसद वहाँ क्रूस पर पूरा कर सके'' (जे. ओलिवर बुशवेल, पीएच.डी. अ सीस्टमेटीक थीयोलोजी अॉफ ध क्रीस्टीयन रीलीजन, झोन्डरवन, 1971, भाग ॥।, पृश्ठ. 62)। डो. राइस ने वास्तव मेें वो ही बात कही, ‘‘यीशु ने प्रार्थना की, ताकि उस रात मृत्यु का कटोरा उनके पास आने से टल जाये ताकि वे दूसरे दिन क्रूस पर मृत्यु पाने के लिये जिवित रहे'' (जोन आर. राइस, डी.डी., लिट.डी., मती के अनुसार का सुसमाचार, स्वोर्ड अॉफ ध लोर्ड प्रकाशन, 1980, पृष्ठ. 441)। ‘‘उनके शरीर की अद्भूत शक्ति के बिना, मसीह उस रात बगीचे में निश्चींत ही मर गये होते'' (राईस, पइपकण्, पृश्ठ. 442)। आपके पापों के बोजने उन्हे वहाँ गतसमनी में मार ही दिया होता।

‘‘वह अत्यंत संकट में व्याकुल होकर और भी हार्दिक वेदना से प्रार्थना करने लगा; और उसका पसीना मानो लहू की बडी बडी बूँदो के समान भूमि पर गिर रहा था'' (लूका 22:44)।

उस रात यीशु ने बहुत भयानक अनुभव किया जब आपके पापो को उनके शरीर पर लादा गया था। उनकी पीडा इतनी दबायी गई थी कि लहू वाले पसीने की बडी बडी बूँदे उनकी चमडी के हर एक छिद्र से बहने लगी। भविष्यवेता यशायाह ने कहाँ

‘‘निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया, और हमारे ही दुःखो को उठा लिया'' (यशायाह 53:4)।

‘‘यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।'' (यशायाह 53:6)।

कितने जल्दी हम यूहन्ना 3:16 को पढते है,

‘‘क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया ...'' (यूहन्ना 3:16)।

गतसमनी की पीडा, और दुःख, और आतंक से गुजरने के लियें! हम कितना कम सोचते है वो पीडाकारी वेदना जिससे उस रात यीशु गुजरे हमारे पाप को उठाते हुए! जोसेफ हार्टने कहा,

‘‘देखो प्रभु के दुःखी पुत्र को,
   कम्प, कराहना, लहू का पसीना!
इश्वरीय प्रेम की अनंत गहराई!
   यीशु, क्या आपका प्रेम था!
(‘‘आपका अनजाना दुःख'' जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712 - 1738;
      ‘‘घीस मीडनाईट, अेन्ड ओन ओलीवस ब्रो'' की तर्ज पर)।

‘‘मसीह के दुःख'' (1 पतरस 1:11)।

मैं बार-बार सोचता हूँ कि पहला दुःख सबसे बडा था, वहाँ गतसमनी में। किसी भी मनुष्य का हाथ अभी तक उनको छुआँ नहीं था। ये तब था जब प्रभु द्वारा हमारे पाप उन पर लादे गये कि उनका दिमाग लगभग फट गया, और लहू मूक्तता से उनकी चमड़ी के छिद्रो से बहने लगा! विलीयम विलीयमसने कहा,

मनुष्य के अपराध का अत्यंत बडा बोझ
   तारणहार पर लादा गया था;
दुःख के साथ, जैसे कपडो के साथ, वे
   क्योंकि पापीयो को पहनाया गया था,
क्योंकि पापीयों को पहनाया गया था।
(‘‘अन्तकाल की पीडा में प्रेम'' विलीयम विलीयमस द्वारा, 1759;
      ‘‘मेजेस्टीक स्वीटनेस सीटस एन्थोरन्ड'' की तर्ज पर)।

‘‘मसीह के दुःख'' (1 पतरस 1:11)।

पहला, गतसमनी के बगीचे में उनका दुःख।

॥. दूसरा, उनका अपमान का दुःख।

‘‘मसीह के दुःख'' सिर्फ शुरूआत थी। वहाँ पर और बहुत आने बाकी थे। पहेरेदार मशाल के साथ गतसमनी के बगीचे में आये। उन्होंने यीशु को झुठे आरोप में पकडा। वे उन्हें घसीट कर बडे याजक के पास ले गये।

‘‘तब उन्होंने उसके मुँह पर थूका और उसे घूँसे मारे; दूसरों ने थप्पड मार के कहा, हे मसीह, हम से भविष्यवाणी करके कह कि किसने तुझे मारा?'' (मती 26:67-68)।

‘‘तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मूँह ढाँकने और उसे घूँसे मारने, और उससे कहने लगे, भविष्यवाणी कर : और प्यादों ने उसे पकडकर थप्पड मारे'' (मरकुस 14:65)।

जोसेफ हार्टने कहा

‘‘देखिये कितने धैर्य से यीशु खडे है!
   इस गंदी जगह में अपमानित किये हुए।
पापीयों ने सर्वशक्तिमान के हाथ बांध दिये है,
   और उनके रचयीता के मुँह में थूँके।
(‘‘उनका जुनून'' जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712-1768;
   ‘‘धीस मीडनाईट, अेन्ड ओन ओलिव्य ब्रो'' की तर्ज पर)।

‘‘सैनिक उसे किले के भीतर के आँगन में ले गये, जो प्रीटोरियुम कहलाता है; और सारी पलटन को बुला लाए। तब उन्होंने उसे बैंजनी वस्त्र पहिनाया, और काँटो का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा, और यह कहकर उसे नमस्कार करने लगे, हे, यहूदियों के राजा, नमस्कार! वे उसके सिर पर सरकण्डे मारते, और उस पर थूकते, और घुटने टेककर उसे प्रणाम करते रहे'' (मरकुस 15:16-19)।

यीशुने कहा, भविष्यवेता यशायाह द्वारा,

‘‘मैंने मारनेवालो को अपनी पीठ और गलमोछ नोचनेवालो की और अपनी गाल किए; अपमानित होने और उनके थूकने से मैं ने मुँह न छिपाया।'' (यशायाह 50:6)।

भविष्यवेता मीका ने कहाँ,

‘‘वे इस्त्राएल के न्यायी के गाल पर सोंटा मारेंगे'' (मीका 5:1)।

‘‘तब हकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जाकर, सारी पलटन उसके चारों ओर इकट्ठी की। और उसके कपडे उतारकर, उसे लाल रंग का बागा पहिनाया। और काँटो का मुकुट गूँथकर उसके सिर पर रखा और उसके दाहिने हाथ में सरकण्डा दिया : और उसके आगे घूटने टेककर, उसे ठड्डो में उडाने लगे और कहा, हे, यहूदियों के राजा! नमस्कार और उस पर थूका और वही सरकण्डा लेकर उसके सिर पर मारने लगे'' (मती 27:27-30)।

वहाँ उनके लिये सोने या चांदी का ताज नहीं था,
   वहाँ उनके लिये मुकुट नहीं था पकडने को;
परंतु लहूने उनके ललाट को सजाया और
   गर्वित किया इसके दाग जो उन्होंने सहा,
और उन्होंने ताज पहना जो पापीयों ने उन्हें दिया।
   विषम क्रूस उनका ताज बन गया,
उनका साम्राज्य सिर्फ मन में ही था;
   उन्होनें उनका प्रेम लाल रंग से लिखा,
और अपने सिर पर काँटो का ताज पहना।
(‘‘काँटो का ताज'' इरा.एफ. स्टेनफील द्वारा, 1914 - 1993)।

‘‘इस पर पिलातुस ने यीशु को कोडे लगवाए'' (यूहन्ना 19:1)।

यीशु ने कहा, भविष्यवेता यशायाह द्वारा,

‘‘मैंने मारनेवालो को अपनी पीठ दी'' (यशायाह 50:6)।

उन्होंने उनकी पीठ को तोडने के लीये मारा। ये भयानक था। बहुत से लोग इस तरह के मार के जुल्म से मर गये। आप उनकी पसलीयाँ देख सकते थे। उन्होेंने उनकी पीठ को हड्डी दीखने तक काटा।

काँटो से उनका सिर जख्मी औद छेदित हुआ,
   हर अंग से लहू की धारा बहेने लगी; उनकी पीठ भारी भालों से छील गई,
   परंतु नूकिले भालो से उनका हृदय फट गया।
(‘‘उनका जुनून'' जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712-1768;
       ‘‘घीस मीडनाईट, अेन्ड ओन ओलीवस ब्रो'' की तर्ज पर)।

‘‘मसीह के दुःख'' (1 पतरस 1:11)।

पहला, गतसमनी में उनका दुःख। दूसरा, उनके अपमान का दुःख।

III. तीसरा, क्रूस पर उनका दुःख।

गतसमनी के बगीचे में लहू की बडी बडी बुँदो के समान पसीना बहने के बाद, यीशु को मुँह पर मारा गया। फिर उन्होंने उनकी पीठ फट कर चीथंरा होने तक नूकीले भालों से मारा। फिर नूकीले काटों का ताज उनके सिर पर दबाया गया, जिसके कारण लहू उनकी आखों में जाने लगा।

वे अधमरे हो चूके थे जब वे उन्हें, क्रूस पर चढाने की जगह में ले गये,

‘‘और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो खोपडी का स्थान कहलाता था ... वहाँ उन्हें क्रूस पर चढाया गया'' (यूहन्ना 19:17-18)।

उन्होंने लंबे सलीयें उनके हाथ और पैरो को बीचे से लकडे के क्रूस में घूसाये। उन्होंने क्रूस को उठाया और यीशु पीडा और दुःख में उस पर लटक गये। जोसेफ हार्टने कहा,

शापित लकडे पर कील अरक्षित किया,
   धरती और उपर स्वर्ग के सामने खूल्ला किया,
जख्म और खून का तमाशा,
   जख्मी प्रेम का दुःखद प्रदर्शन।

सुनो! कैसे उनकी खोफनाक पुकार डराती है
   असरग्रस्त स्वर्गदूत, जब उन्होंने देखा;
उनके मित्रोने उन्हें रात में त्यागा,
   और अब उनके प्रभुने भी उनको त्यागा!
(‘‘उनका जुनून'' जोसेफ हार्ट द्वारा, 1712-1768;
     ‘‘घीस मीडनाईट, अेन्ड ओन ओलीवस ब्रो'' की तर्ज पर)।

‘‘और ... यीशुने बडे शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी? अर्थात, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड दिया?'' (मती 27:46)।

ये हमारा दिमाग नाँप नहीं सकता। लुथरने कहाँ यह मनुष्य को शब्दों से नहीं समझाया जा सकता था। एक तरह से हम पूरी तरह से समझ नहीं सकते, पिता पुत्र की तरफ से फिर गये और यीशु मरे हमारे पापो की किंमत चूकाने, अकेले!

‘‘इसलिये कि मसीहने ... पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमे परमेश्वर के पास पहुँचाए ...'' (1 पतरस 3:18)

‘‘परंतु यह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया : हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पडी, कि उसके कोड़े खाने से हम लोग चंगे हो जाएँ'' (यशायाह 53:5)।

यह विभिन्न प्रायश्चित की भव्य शिक्षा है - मसीह क्रूस पर मरते है मनुष्य के पापों को चूकाने। वे मरे आपकी जगह, आपके पापो का दण्ड चूकाने! बाइबल कहता है,

‘‘पवित्रशास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया'' (1 कुरिन्थियोे 15:3)।

‘‘दुःखो का मनुष्य'', क्या नाम है
   प्रभु के पुत्र के लिये जो आये
नष्ट पापीयों को पुनःप्राप्त करने!
   हल्लिलू्ययाह! क्या तारणहार है!

शर्म और कठोर नफरत सहते हुए,
   मेरी जगह अपराधी वे खडे रहे;
मेरी माफी उनके लहू से अंकित की;
   हल्लिलू्ययाह! क्या तारणहार है!

उन्हें उपर उठाया गया मरने के लिये
    ‘‘ये खत्म हुआ है'' उनकी पूकार थी;
अब स्वर्ग में ऊँचे ऊठे हुअे;
   हल्लिलू्ययाह! क्या तारणहार है!
(“हल्लिलू्ययाह, क्या तारणहार है”फिलिप. पी. ब्लीस द्वारा, 1838 - 1876)।

क्या आपको आपके अपराध और आपके पापों के दण्ड से बचाया जाना है? फिर आपको यीशु के पास सरल विश्वास में आना ही चाहिये। उनके पास आइये जो अब स्वर्ग में प्रभु के दाहिने हाथ पर हैं। मैं वकालत करता हूँ आपके साथ मेरे पूरे मन और आत्मा से, यीशु के पास आइये सरल विश्वास में। बाकी सब उस पर। उनका विश्वास किजिये। वे आपके हर एक पापों को शुद्ध करेंगे। वे आपको साफ चरित्र देंगे। वे आपके मन को सदा के लिये बचायेंगे, और फिर पूरी अनन्तता के लिये - अंतबिना का संसार। आप! हा, आप! आप बचाये जा सकते हो आपके अपराध और आपके पापो के दण्ड से ‘‘मसीह के दूःख'' (1 पतरस 1:11) द्वारा। यीशु के पास आइये। आपके पापो को शुद्ध करेंगे और आपकी आत्मा को बचायेंगे। आमीन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. हायर्मस द्वारा पढा हुआ पवित्रशास्त्र : यशायाह 53:1-6।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘काँटो का ताज'' (इरा. एफ. स्टेनफिल द्वारा, 1914-1993) /
‘‘पीडा में प्रेम'' (विलीयम विलीयमस द्वारा, 1759)।


रूपरेखा

मसीह के दुःख

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘इसी उध्धार के विषय में उन भविष्यवेताओं ने बहुत खोजबीन और जाँच - पडताल की जिन्होंने उस अनुग्रह के विषय में जो तुम पर होने को था, भविष्यवाणी की थी : उन्होंने इस बात की खोज की कि मसीह का आत्मा जो उनमें था, और पहले ही से मसीह के दुःखो की और उसके बाद होनेवाली महिमा की गवाही देता था, वह कौन से और कैसे समय की ओर संकेत करता था'' (1 पतरस 1:10-11)।

I.     पहला, गतसमनी के बगीचे में उनका दुःख, मती 26:36;
1 पतरस 2:24; मती 26:38, 39; लूका 22:44; यशायाह 53:4, 6;
यूहन्ना 3:16।

II.    दूसरा, उनका अपमान का दुःख, मती 26:67-68; मरकुस 14:65;
मरकुस 15:16-19; यशायाह 50:6; मीका 5:1; मती 27:27-30; यूहन्ना 19:1।

III. तीसरा, क्रूस पर उनका दुःख, यूहन्ना 19:17-18; मती 27:46;
1 पतरस 3:18; यशायाह 53:5; 1 कुरिन्थियों 15:3।