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हमारा मित्र लुथर!

OUR FRIEND LUTHER!

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजीलस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की शाम, 31 अक्तुबर, 2010
को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, October 31, 2010

“जैसा लिखा है, विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा” (रोमियो 1:17)।


कुछ लोग शायद मुझसे सवाल करें कि मैं क्युं मार्टीन लुथर पर बात कर रहा हूँ। सबसे पहले मैं ये स्पष्ट और सरलता से कहता हूँ कि मै बेप्टीस्ट हूँ, लुथरन नहीं। कलीसिया के प्रकार के संदर्भ में मै बेप्टीस्ट हूँ, लुथरन नहीं। बप्तीसमा के संदर्भ में मैं बेप्टीस्ट हूँ, लूथरन नहीं। प्रभु के भोजन कें संदर्भ में मै बेप्टीस्ट हूँ, लुथरन नहीं। इस्त्राएल और यहूदी लोगो के संदर्भ में मै बेप्टीस्ट हूँ, लुथरन नहीं। ये महत्वूर्ण मुद्दा है और उस हर एक के संदर्भ में मै लुथर से असहमत हूँ, और बेप्टीस्ट के साथ खडा रहता हूँ। फिर भी मै गहराई से लुथर की सिर्फ मसीह पर विश्वास द्वारा धर्मी ठहरने की स्पष्ट बाइबल की पढाई का सम्मान करता हूँ। मै आधुनिक लुथरन के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ। मै स्वयं लुथर के बारे में बात कर रहा हूँ। वो अपने जमाने के बडे मसीही थे।

लुथर इतिहास मे एक अच्छे मनुष्य की भाँति खडा रहता है, अपने समय का मनुष्य, कभी कभी असभ्य और स्वेच्छाचारी। उसने सारी बाते स्पष्टता से नहीं देखी। उसने रोमी केथलीक शिक्षा ‘‘बदली का ब्रम्हज्ञान'' को मानना चालू रखा, की कलीसिया पूरी तरह से इस्त्राएल के बदले है। केथलिक शिक्षा उसे ले गई, जीवन के पीछले भाग में, यहूदीयो के विरूद्ध कथन करने को। परंतु रीर्चड वुर्मब्रान्ड, परिवर्तित यहूदी, ने उसे माफ किया, ये मानते हुए की वो अपने समय का जीव था, जैसे आज हम है। बाद का इतिहास बतायेगा की आज हमारे पास बहुत सी कमीयाँ है - खास करके मन को शापित करनेवाली ‘‘निर्णायक्ता'' की कमीयों के संदर्भ में।

फिर भी कुछ ‘‘अंधे दोषो'' के बावजुद भी लुथर के पास खास भेटे थी। र्स्पजन ने उनकी प्रशंसा करके और बार बार उनके विश्वास द्वारा मुक्ति का कथन किया (देखिये र्स्पजन के दो धार्मिक प्रवचन लुथर पर, ध मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, भाग ग्ग्प्ग्, पृ. पृष्ठ 613-636)। र्स्पजनने कहाँ, ‘‘हमारे बडे सुधारक की मुख्य गवाही थी पापीयो का धर्मी ठहरना यीशु मसीह में विश्वास द्वारा, और सिर्फ उनके द्वारा ही'' (पइपक, पृष्ठ 727)। बहुत बार लुथर ने आध्यात्म विद्या संबंधी सवालो के मन को देखा और अपने विचार दर्शाये बडी ही असलियत और जोश के साथ।

मुक्ति की सारी शिक्षा में धर्मी ठहरना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। धर्मी ठहरने के बिना मनुष्य नर्क की ज्वाला में फेंका जाता है! एक व्यक्ति जो क्लीसिया पर सच्चा हो, बप्तीसमा पर सच्चा हो, प्रभु को भोजन पर सच्चा हो, इस्त्राएल पर सच्चा हो - और फिर भी नर्क में जाता है, क्योंकि वो धर्मी नहीं ठहरता। दूसरे हाथ पर, लुथर के जैसा मनुष्य, चाहे गलत हो उस और दूसरे मुद्दो पर, बचाया जा सकता है अगर उसने धर्मी ठहरने का अनुभव किया हो। इसलिये र्स्पजन कहते है धर्मी ठहरने को, ‘‘सुधार का मुकुट आभूषण'', क्योंकि धर्मी ठहरना सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा है, जिसके बिना कोई भी बचाया नहीं जा सकता! सब मुद्दो में से सबसे ज्यादा शोचनीय इस मुद्दे पर लुथर सुधारक के साथ खडा रहता हूँ। मैं लुथर के साथ खडा रहता हूँ सिर्फ यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरने पर! यह लुथर का मुख्य विषय था - और इस पर मैं उसके साथ पूरी तरह से सहमत हूँ!

“विश्वास से धर्मी जन जीवित रहता है” (रोमियो 1:17)।

लुथर को यह विषय कैसे समजा? र्स्पजन, बडे बेप्टीस्ट याजक सारे समय के, हमें लुथर के परिवर्तन के बारे में कहते है,

मैं तथ्य निकालकर और द्रष्टांत देकर स्पष्ट करूंगा ये पढाई लुथर के जीवन के कुछ किस्से बताकर। बडे सुधारक पर सुसमाचार धीरे - धीरे हल्के से तोडा। यह आश्रम था कि, पूराने बाइबल के पन्ने पलटना खंभे को जंजीर बांधने समान था, वे इस पद्य पर आये - ‘‘धर्मी को उनके विश्वास द्वारा रहना चाहिये''। ये र्स्वगीय कथन उनके दिमाग को छू गया : परंतु वे शायद ही उसका अर्थ समझ सके। कैसे भी, वे, धार्मिक व्यवसाय और वैराग्य की आदत से शांति नहीं पा सके। ज्यादा बेहतर नहीं जानते हुए, वे तपस्या में इतना खो गये और परिश्रम का इतना संचय किया की कभी कभी वे थकावट की वजह से बेहोश हो जाते थे। उन्होंने अपने आपको मृत्यु के द्वार पर खडा कर दिया। उन्हें रोम की सफर करनी ही चाहिये, क्योंकि रोम मे ताजा कलीसिया रोज होता है, और आप शायद पापो की माफी और हर तरह के आर्शिवाद पा सको इस पवित्र तीर्थस्थान पर। उसने (रोम) पवित्रता के षहर में प्रवेश करने का ख्वाब देखा था; परंतु उसे पता चला की ये तो बार बार कपटी लोगो के साथ रहने और अधर्म की कोठरी में जाने के समान है। उसकी भयानकता के लिये उसने सुना लोगो को कहते हुए की अगर नर्क होता तो रोम उसके उपर बांधा गया होता, क्योंकि ये सबसे नजदीकी रास्ता था इसके लिये जो संसार मे खोजा जा सकता था; परंतु अभी भी वे उनके पोप (रोम के बडे याजक) में विश्वास करते थे और वे उनकी तपस्या के साथ गये, शांति की खोज में, परंतु कुछ नहीं मिला। एक दिन वे अपने घूटनो पर चलकर सान्कटा स्केला (‘‘पवित्र सीढीया'') चढ रहे थे जो अभी तक रोम में है। मैं आश्चर्यचकित खडा था। इन सीढीयो के नीचे यह देखते हुए की बेचारे दीन जीव उपर जाकर नीचे आते थे अपने घुटनो के बल यह मानते हुए की ये वो सीढीयाँ है जिससे हमारे प्रभु नीचे आये थे जब उन्होंने पिलातुस का घर छोडा था, और कुछ कहाँ जाता है कि (मसीह के) लहू की बूदों से अंकित हुई है; ये गरीब मन इसे बहुत भक्तिपूर्वक चूमते है। ठीक है, लुथर ये सीढीया सरक सरक कर उपर चढ रहे थे जब वो ही विषय जो उन्हें मीले थे पहले आश्रम में, ऐसे सुनाई पडता था जैसे बीजली की ताली उनके कानो में, ‘‘विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा''। वे अपनी उदासीनता से उठे, और सीढी से नीचे गये फिर से कभी वहाँ नहीं चढने। उस समय प्रभु ने अंधश्रद्धा से मुक्ति देने के लिये प्रभाव डाला और उसने देखा की याजक द्वारा नहीं, ना पुरोहीती छल, ना तपस्या से, नाही किसी भी चीज द्वारा जो वे कर सकते थे, जो उसे जीने के लिये, परंतु वे उनके (मसीह के) विश्वास द्वारा ही जीने चाहिये। हमारा इस (शाम) का विषय (केथलिक) साधु को स्वतंत्रता पर स्थापित किया, और उनकी आत्मा को स्थापित किया ज्वाला पर।

‘‘विश्वास से धर्मी जन जिवीत रहेगा।'' (रोमियो 1:17)

जल्द ही उसने विश्वास किया फिर उसने मानना शुरू किया व्यवहारिक रहने के तात्पर्य। (याजक) टेटझेल नामक, पूरी जर्मनी में जाते थे इतने सारे नगद पैसो के लिये पापो की क्षमा बेचने। कोई बात नहीं की आपका क्या अपराध है, जैसे ही आपके पैसे (जमा) पेटी के तलको छूते है आपके पाप चले जायेंगे। लूथर ने इसके बारे में सूना, दरिद्रता उठी, और चिल्लाये, ‘‘मैं उसके कान के परदो में छेद कर दूंगा'', जो उन्होंने जरूर किया, और कुछ ओर लोगो के कानो के परदे पर भी। उनका क्लीसिया के द्वार पर कील ठोकना जरूर ही रास्ता था संतोष के संगीत को शांत करने का। लूथर ने पापो की माफी की घोषणा की मसीह में विश्वास बिना पैसे और बिना दाम द्वारा, और रोम के बडे याजक के संतोष जल्द ही उपहास का उद्देश्य। लुथर उनके विश्वास द्वारा जीवित रहा, और इसलिये वे जो शायद स्थिर हो जाते, अपनी प्रार्थना में इतने जोर से जैसे सिंह दहाडता है वैसे भूलो को स्थापित किया। जो विश्वास उनमें भर गया था जीवन में मजबूती के साथ और उसने दुश्मनो के साथ युद्ध में प्रवेश कर दीया। थोडी देर बाद उन्होंने उसे अगसर्बग के सामने बुलाया, और वे अगसबर्ग के पास गये, उनके मित्र ने वहाँ न जाने की सलाह देने के बावजुद भी। उन्होंने उसे बुलाया,एक पाखंडी की तरह, जवाब देने के लिये उनके खुद के लिये (इम्पीरीयल कॉउन्सील) कीडो के भोजन के समय, और सबने उसको दूर रहने को कहा, क्योंकि वो जरूर से जलाया (खुंटे पर) जायेगा; परंतु उसने मेहसूस किया की ये जरूरी है की प्रमाण लाया जाये, और इसलिये वे चार पहियेवाले वाहन में गये एक गांव से दूसरे गांव और एक शहर से दूसरे शहर, प्रचार करते हुए जैसे वे गये, दीन लोग बाहर आने लगे उस व्यक्ति से हाथ मिलाने जो मसीह के लीये खडा है और अपने जीवन के साहस पर सुसमाचार देने। आप याद रखिये कैसे वे अगस्त सभा (कीडो पर) के आगे खडे थे और उसे पता था की जहाँ तक मनुष्य की ताकत जा सकती है की उनका बचाव उनके जीवन की किंमत होगी फिर भी वे करेंगे शायद, (खूंटे पर जलाये) जायेंगे जैसे जोन हस्स, फिर भी उसने अपने प्रभु परमेश्वर के लिये व्यक्ति की तरह (कार्य किया)। उस दिन जर्मन के डायेट (कोर्ट) में लुथर ने जो काम किया उसके लिये दस हजार बार दस हजार माता के बच्चो ने उनके नाम का गुणगान किया और उनके प्रभु परमेश्वर को उनके नामका ज्यादा गुणगान किया (सी.एच. र्स्पजन, ‘‘टबरनेकल में लुथर पर धार्मिक प्रवचन,'' ध मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाशन, 1973 में फिर से छपा हुआ, भाग ग्ग्प्ग्, 622 - 623)।

‘‘विश्वास से धर्मी जन जीवित रहता है'' (रोमियो 1:17)।

मेरा लुथर से पहला सामना बेप्टीस्ट कलीसिया में हुआ, बहुत साल पहले, 1950 के आरंभ में। एक रविवार की रात उन्होंने उसके बारे में �वेत श्याम चलचित्र दिखाया। वो भूतकाल का अन्जान व्यक्ति लगता था, जिसके पास मेरे पसंद का बोलने के लायक कुछ भी नहीं था। चलचित्र बहुत विनोदहीन और लंबा लगता था और मुझे आश्चर्य हुआ की क्यु मेरे याजक डो. वोल्टर ए. पेग्ग, ने ये बताने की परवाह भी की। मुझे ये सामिल करना चाहिये की आज उस श्रेष्ठ चलचित्र के बारे में मेरा मंतव्य अलग है! अब मुझे वो देखना अच्छा लगता है! उनके चलचित्र को देखने के लिये यहाँ पर क्लिक करें।

लुथर से मेरा दूसरा सामना बाद में हुआ, मेरे परिवर्तित होने के बाद। मैने जोन वेस्ली के परिवर्तन के अनुभव को पढा, जिस में वेस्ली ने कहाँ -

एर्ल्डसगेट स्ट्रीट की सोसायटी में शाम मैं न चाहते हुए भी गया, जहाँ एक व्यक्ति रोमियों को पत्र में लुथर की प्रस्तावना पढ रहा था। लगभग नौ बजने के पंद्रह मिनट पहले, जब वो वर्णन कर रहा था मनमें बदलाव के प्रभु के कार्य का मसीह में विश्वास के द्वारा। मैंने मेरे मनमें अजीब सी गरमाहट मेहसूस की। मैंने मेहसूस किया की मैं मसीह में विश्वास करता हूँ, सिर्फ अकेले मसीह में मुक्ति के लीये; और निश्चिंचता मुझे दी गई थी, की उसने मेरे पापो को ले लिया है, मेरे भी, और पाप और मृत्यु की व्यवस्था से मुझे बचा लिया (जोन वेस्ली, द वर्क ओफ जोन वेस्ली, तीसरी प्रत, बेकर बुक्स हाऊस, 1979 में फिर से छपा, भाग 1, पृष्ठ 103)।

इसने मुझ पर प्रभाव डाला, क्योंकि मुझे पता था कि वेस्ली पहली श्रेष्ठ जागृतता के दौरान दो सबसे ज्यादा प्रभावशाली प्रवक्ताओं में से एक थे। वेस्ली परिवर्तित हुए थे लुथर के मसीह में विश्वास द्वारा धर्मी ठहरने के शब्दों को सुनकर।

और भी बाद में, मैंने सीखा की जोन बुनयान, हमारे बेप्टीस्ट परदादा, ने लुथर को पढा था जब वे इतने विशेष रूप से परिवर्तित हुए थे, ‘‘मार्टीन लुथर की लिखावट उसकी पवित्रशास्त्र की पढाई को बढाने के साथ'' (पीलग्रीमस प्रोगे्रस, थेमस नेल्सन, 1999 में फिर से छपा हुआ, प्रकाशक की प्रस्तावना, पुष्ठ गपप) बुनयान पूरे समय का सबसे ज्यादा पढे जानेवाला बेप्टीस्ट लेखक बन गये।

जोन वेस्ली, सिद्धांतवादी लुथर के वचन सुनके परिवर्तित हुए थे। जोन बुनयान, बेप्टीस्ट, अपने परिवर्ततन के प्रयत्न में मददरूप हुए थे जो लुथरने लिखा था वो पढने से। मैने सोचा की लुथर को पढना आखिरकार अच्छा और श्रेष्ठ परिमाण है। मैंने ये देखा की रोमियों की किताब लुथर के संदेश के हार्द में था। लुथरने कहाँ,

यह पत्र हकीकत में नये नियमावली और शुद्ध सुसमाचार का मुख्य भाग है, और न सिर्फ हर मसीही के लिये ही फायदेमंद है हर एक शब्द जानना, मन से, परंतु इसके साथ हर दिन अपने आप को व्यस्त कर दो, मन की रोज की रोटी की तरह। यह पढना कभी भी ज्यादा या दबानेवाला नहीं होगा, जितना ज्यादा इससे संयुक्त हो जायेगे उतना ही वो बहुमूल्य होगा, और ज्यादा अच्छा लगने लगेगा (मार्टीन लुथर, ‘‘प्रीफेस टु ध एपीस्टल टु ध रोमनस,'' मार्टीन लुथर के काम, बेकर बुक्स हाऊस, 1982 में फिर से छपा हुआ, भाग टप्, पृष्ठ 447)।

मैं क्यु सोचता हूँ कि आज लुथर महत्वपूर्ण है? सरल है क्योंकि वो हमें रोमियों की किताब की तरफ फिर से ले जाता है, और इतनी स्पष्टता से बताते है कि रोमियों ‘‘हकीकत में नये नियमावली और शुद्ध सुसमाचार का मुख्य अंश है''। वोही है जो हमे इस ‘‘निर्णायक्ता'' के बुरे दिनों में फिर से सुनना चाहिये। किसी भी ओर चीज से ज्यादा, हमें रोमियों की किताब की तरफ वापस जाना चाहिये। लुथर के दिनों के केथलिक भूल गये है रोमियों के संदेश के हार्द को। हमारे दिनो के ‘‘निर्णायको'' ने भी यही किया। इसलिये ‘‘निर्णायकता'', कितने ही तरीको में, केथलीकता को साद्रश्य करता है। परंतु ये रोमियों की किताब में है कि मसीह के सुसमाचार का शुद्ध प्रकाश अंधेरे में प्रवेश करता है।

‘‘जैसे लिखा है, विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा'' (रोमियों 1:17)।

महेरबानी करके खडे रहे और रोमियों 3:20-26 को जोर से पढीये।

‘‘इसलिये व्यवस्था के कामो से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा : इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। परंतु अब व्यवस्था से अलग परमेश्वर की वह धार्मिकता प्रगट हुई है जिसकी गवाही व्यवस्था और भविष्यवक्ता देते है; अर्थात् परमेश्वर की वह धार्मिकता जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से : सब विश्वास करनेवालो के लिये है : क्योंकि कुछ भेद नहीं, इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है परंतु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वार जो मसीह यीशु में है; सेंत-मेंत धर्मी ठहराए जाते है उसे परमेश्वर ने उसके लहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित ठहराया जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहले किए गए और जिन पर परमेश्वर ने अपने सहनशीलता के कारण ध्यान नहीं दिया। उनके विषय में वह अपनी धार्मिकता प्रगट करे, वरन् इसी समय उसकी धार्मिकता प्रगट हो कि जिससे वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे उसका भी धर्मी ठहरानेवाला हो'' (रोमियों 3:20-26)।

आप बैठ सकते हो। अब इस अध्याय के कुछ पदो की टीप्पणी लीजिये। अध्याय 20 शोचनीय है। ये कहता है,

‘‘इसलिये व्यवस्था के कामो से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगाः इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है'' (रोमियों 3:20)।

लुथरने कहाँ कि आपको यह नहीं सोचना है कि व्यवस्था सिखाती है कि क्या करना और क्या नहीं करना है। इसी तरह मनुष्य व्यवस्था के काम करते है ‘‘मनुष्य के कायदे अच्छे कामो से परीपूर्ण है, अगर आपका मन उनसे सहमत नहीं है फिर भी। परंतु परमेश्वर आपके मन की गहराई में क्या है उससे न्याय करते है, और अच्छे कामो से संतुष्ठ नहीं होते, परंतु शायद अपराधी ठहरानेवाला काम जो अगर किया गया हो फिर मनके गहराई में, जैसे केवल छल और झुठ। इसलिये सारे मनुष्य जुठे कहे गये है, भजनसंहिता 116:11 में, क्योंकि कोई भी नहीं रखता या रख सकता है, प्रभु की व्यवस्था अपने मनकी गहराई से, क्योंकि हर व्यक्ति ना पसंद करता है कि जो अच्छा है और आनंद पाता है जो बुरा है उसमे। अगर, फिर वहाँ पर चाहनेवाला आनंद नहीं है जो अच्छा है उसमें, फिर आपके अंतरमन को कुछ अच्छा करना नहीं है। ये प्रभु की व्यवस्था को ना पसंद करता है और उसके विरूद्ध द्रोह करता है। फिर उसमे जरूर पाप है, और प्रभु का क्रोध और सजा मिलने के योग्य ही है, फिर भी अगर, बाहर की तरफ, आप बहुत से अच्छे काम करते दिखते हो। आप हकीकत में प्रभु की व्यवस्था के द्वारा अपराधी ठहरते हो, क्योंकि आपका अंतरमन आपकी पूरी ताकत से उनकी व्यवस्था के विरूद्ध द्रोह करता है।''

परंतु प्रभु की व्यवस्था आपको न्याय देने या, आपको बचाने नहीं है। रोमियों 3:20 फिर से पढीये, जोर से।

‘‘इसलिये व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है'' (रोमियों 3:20)।

आप जितना भी मुमकीन हो उतने अच्छे बनने का प्रयत्न कर सकते हो। परंतु परमेश्वर आपको बाहर से नहीं देखते है। वे आपके मन को देखते है। और वहाँ वे देखते है जहरीले साँप और जहरीली मकड़ीयाँ और ज्यादा द्रोह और पाप।

‘‘इसलिये व्यवस्था के कामो से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा ...'' (रोमियों 3:20)।

आप जीतना ज्यादा बचाये जाने के लिये व्यवस्था को मानेगे, उतने ही आप बुरे बनंगे। यह सच था लुथर के परिवर्तन के अनुभव में, और वेस्ली में भी, और बुनयान के परिवर्तन में, जैसे उन्होंने उदद्डंता से प्रयास किया, ‘‘अच्छे बनने'' के द्वारा धर्मी ठहरने का। परंतु व्सवस्था इससे बहुत ही आगे जाती है। ये आपके मन को टटोलता है भयानक हकीकत देखने की आपके मन और दिमाग में पवित्र प्रभु के विरूद्ध पाप है। रोमियों 3:20 के आखरी शब्दों पर ध्यान दीजीये,

“इसलिये की व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है” (रोमियों 3:20)

प्रभु की दयालु आत्मा आनी ही चाहिये और आपको आपके अदंरूनी पापो के बोझ से लादनी चाहिये, जो तैयार ही है आपको नीचे नर्क की ज्वाला में खींचकर ले जाने के लिये।

“इसलिये की व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है” (रोमियों 3:20)।

परंतु प्रभुने मन जो इस अपराध के आतंक से बचके भागने की कोशिष करता है उसके लिये उपाय दिया है। जितना ज्यादा वे पापो से बाहर आने का प्रयत्न करते है, उतने ही वे पापो की गहराई में खींचे जाते है। क्या आपकी यह अवस्था नहीं है? आप जीतनी कठीनता से कोशिष करते है पापी नहीं बनने की, ज्यादा ही बूरे पापी आप अंदर से बनते हो - पापो के लिये मसीह के अदभूत उपाय को दूर धकेलते हुए, और अपने जीवन को ‘‘पुनः समर्पित'' करके ‘‘आगे बढने'' ‘‘पापीयों की प्रार्थना'' करके, मुक्ति के बारे में और पढ के और बहुत से दूसरे व्यवस्था के कार्य करके अपने खुद की अच्छाईया स्थापित करने की कोशिष करते हो। परंतु कुछ भी जो आप कहते हो या करते हो वो प्रभु के साथ आपको शांति नहीं दे सकता है, किसे पता है आपका मन हकीकत में कितने पापो से भरा है।

अध्याय 24 को छोड दीजिये। यहाँ जगह है जहाँ आपको अपराधी पाप भरे मन को जरूर आना चाहिये शुद्ध होने, धर्मी ठहरने और शांति पाने के लिये। फिर से पढीये, जोरसे, अध्याय 24-25, अभ्यास 25 का अंत इन शब्दों के साथ ‘‘उसके लहू में विश्वास के द्वारा''।

‘‘उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा (धर्मी और स्पष्ट बनाया) जो यीशु में है, सेंत - मेंत धर्मी ठहराए जाते है। उसे परमेश्वर ने उसके लहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहले किये गये और जिन पर परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता के कारण ध्यान नहीं दिया। उनके (प्रभु के क्रोध से बचाव) विषय में वह अपनी धार्मिकता प्रगट करे'' (रोमियों 3:24-25)।

व्यवस्था आपके लिये जो नहीं कर सकती, अनुग्रह आपके लिये ‘‘विश्वास में'' मसीह का लहू कर सकता है। सिर्फ मसीह के लहू में आप अपने पापो से मुक्ति और प्रभु के क्रोध से शांति पा सकते हो।

अब अध्याय 26 का आखरी आधा भाग जोर से पढीये; ‘‘की वे शायद धर्मी ठहरानेवाले हो'' शब्दों से शुरू करते हुए। प्रभु एक ही है जो आपको न्याय देता है और आपको उनकी नजर में पूरी तरह शुद्ध करते है यीशु मसीह स्वयं में विश्वास के द्वारा।

‘‘वरन् इसी समय उसकी धार्मिकता प्रगट हो कि जिससे वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे (क्योंकि उन्हें मसीह की पीडा और मृत्यु पापो को चूकाने चाहिये) उसका भी धर्मी ठहरानेवाला हो'' (रोमियों 3:26)।

मसीह की क्रूस पर निर्धारित मृत्यु में, आपके पापो को चूकाया जा सकता ह,ै और आपका ज्ञात प्रमाण पापो से शुद्ध किया जायेगा, क्योंकि

‘‘परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे, तभी मसीह हमारे लिये मरा, अतः जब कि हम अब उसके लहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा परमेश्वर के क्रोध से क्यो न बचेंगे। क्योंकि बैरी होने की दशा में उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ तो फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएँगे।'' (रोमियों 5:8-10)।

यीशु मसीह ने आप हर एक के पापो को क्रूस पर चूकाया।

फिर आपके लिये करने को क्या बचा है। इसका जवाब पद 26 के दूसरे आधे भाग में दिया गया है,

‘‘कि वह (प्रभु) आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे उसका भी धर्मी ठहरानेवाला हो” (रोमियों 3:26)।

यीशु में विश्वास रखना। ये पूरा जवाब है खोये हुए व्यक्ति के परिश्रम का, बेहतर जीवन जीने के प्रयत्न में ‘‘व्यवस्था'' रख के और अलग अलग ‘‘निर्णय'' करने के द्वारा। आपके अच्छे कामो और ‘‘निर्णय'' को बाहर फेंक दो और कलीसिया में दूसरों से अच्छे होने की ष्‍ोखी को बाहर फेंक दो। आप इस तरह बचाये नहीं जा सकते।

‘‘(प्रभु है) यीशु पर विश्वास करे उसका भी धर्मी ठहरानेवाला है'' (रोमियों 3:26)।

मसीह के लहू में विश्वास रखीये, आपके लिये एक बार क्रूस पर छीडका गया, अब वहाँ स्वर्ग में ले जाया गया, जहाँ वो सर्वदा ताजा है, सारे पापो को शुद्ध करने को सक्षम। उस लहु में विश्वास रखीये, मसीह के लहू में भी।

यीशु मसीह स्वयं पर विश्वास रखे। उन्हें क्रूस पर लटकता हुआ देखिये आपके पापो को चूकाते हुए। उन्हें मृत्यु से जिलाते हुए देखीये उनके पवित्र लहू को स्वर्ग में प्रभु के सामने भेट करते हुए! ‘‘उनके लहू में विश्वास'' रखीये। (प्रभु) न्यायाधीश और उध्धारक है उनका ‘‘जिसने यीशु में विश्वास किया'' (रोमियों 3:26)। यीशु के लहू में विश्वास रखीये!

यह सिर्फ यीशु के बारे में हकीकत को मानने से ज्यादा हैं यह उनके साथ आत्मीय मिलन हैं! इसका यह मतलब है कि आप आओ और विश्वास करो, यीशु मसीह स्वयं में! ‘‘यीशु में विश्वास करें''। सीधे उनके पास आइये! सिर्फ यही रास्ता है न्याय पाने का और पापो से षुध्ध होने का। यह मसीहा का सदा रहनेवाला सुसमाचार है! मसीह के लहू का भरोसा करें! उन पर विश्वास करें! उनके पास आइये। जब आप ये करते हो, आप परिवर्तित हो जाएंगे, और तात्कालिक बचाये जाओगे!

वो लुथर का केंद्र का संदेश है - और यह एकदम सच्चा संदेश है। सुनीये लुथर और रोमियों की किताब क्या कहती है। मसीह के लहू के द्वारा धर्मी ठहरने पर। मसीह पर विश्वास करे। अपने आपको मसीह पर डाल दो। वे आपको बचायेगे जैसे उन्होंने लुथर और वेस्ली और बुनयान को किया। और शायद मुक्ति आपके पास आये; और आपको आनंद और शांति से भर दे यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा।

यीशु के पास आइये। फिर आप आपके सारे पापो से शुद्ध हो जायेंगे। फिर आप प्रभु की नजरो में धर्मी बन जायेंगे। फिर आप सच्चे मसीही बनेंगे और मसीह का लहू, और मसीह में विश्वास, आपके जीवनभर आपके साथ रहेगा - जब तक आप सेलेस्टीयल शहर में प्रवेश पाते हो (पीलग्रीम के प्रोग्रेस से) यीशु को देखिये, और अपने हाथो से हमारे मित्र लुथर को पकडीये। आमेन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन् एल. चान द्वारा पढा हुआ पवित्र शास्त्र : रोमियो 3:20-26।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘मेरे सारे पाप के लिये'' (नोरमन क्लेटन, 1943 द्वारा)।