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और याकूब आप अकेला रह गया!

AND JACOB WAS LEFT ALONE!

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि.द्वारा by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्‍तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की सुबह, सीतंबर 19, 2010
को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Morning, September 19, 2010

“और याकूब आप अकेला रह गया; तब कोई पुरूष आकर पौ फटने तक उससे मल्‍लयुध्‍ध करता रहा” (उत्‍पति 32:24)।


याकूब ज्‍यादातर आज के युवा लोगों के जैसा था। उसके पास खाने को सबकुछ था। उसके पास अच्‍छे कपडे थे। उसके पास कहे जानेवाले “मित्र” भी थे। उसके पास लगता था की सबकुछ है। परन्‍तु अेक रात उससे ये सब ले लिया गया और वो अकेला रह गया।

क्‍या ये आज आपकी बड़ी समस्‍या नहीं है? क्‍या आप कई बार अकेला महेसूूस नहीं करते - खासतौर पे जब आप खुशहाल लोगों की भीड़ में होते हो? क्‍या आप महेसूस नहीं करते की कुछ बूरे और न समजानेवाले तरीके से उनसे दूर कर दीये गये हो। जे. डी. सेलीन्‍गर (1919-2010) ने लघु कथा और उपन्‍यास लिखे, जैसे केचर इन घ रेय। बहुत से युवा लोगो ने वो उपन्‍यास महाविद्यालय और उच्‍च शाला में पढ़ा। और वो हंमेषा उनके मनके तार को छुता है, क्‍योकिं सेलीन्‍गर वो लिखता है जो ये युवा लोग महेसुस करते है - एक पीडाद्वायक अंदरूनी अकेलापन जो कोई भी व्‍यस्‍क पूरी तरह समजते नहीं है, और कोई भी उनको इससे बाहर आने मे मदद नहीं कर सकते। चीनी कलीसिया के मेरे दीर्घकाल के याजक इस घटना को “युवानो का अकेलापन” कहते है। जे.डी. सेलीन्गर उसके अपने युवा के मनफिराव और अकेलेपन से इतने त्रस्‍त हो गये की उन्‍होने ये किताबें लिखना अेकदम से बन्‍द कर दिया। चालीस सालो तक वे सन्‍यासी की तरह अकेले-समाज के सब लागों से दूर रहे। उन्‍होने चालीस सालो तक जनता में कोई देखाव नहीं किया या समाचारपत्र में कोई मुलाकात नहीं दी, फिर भी वे अभी भी बीसवी सदी के एक श्रेश्‍ठ, सबसे ज्‍यादा परीज्ञानी लेखक मान जाते है। क्‍यों? क्‍यो उन्‍होने बाहरी दुनिया के साथ सारे व्‍यवहार तोड दिये और एक सच्‍चे सन्‍यांसी बन गये? ये इसलिये की उन्‍होने अकेलेपन से बाहर आने की आषा छोड़ दी थी!

आज इस सुबह मैं आपको चार विचार दूँगा अकेलेपन के अहेसास के जो आप मे से बहुत से लोगोने अनुभव किया है। महेरबानी करके बहुत घ्‍यान से सुनीये, युवा लोग, क्‍योंकि जो मैं कहनेवाला हूँ अकेलेपन के विशय में अगले कुछ समयमे, वो षायद आपके पूरे जीवन की दिषा और चरित्र बदल दें।

I. पहला, अकेलापन जो आप महेसूस करते हो वो हमारे समय में युवा लोगो में सामान्‍य है।

और लोस एंजलिस के समान बडे षहर से ज्‍यादा कोई भी जगह नही है युवा लोगो के अकेलेपन के लिये। लेखक हरर्बट प्रोकनोवने कहाँ,“षहर एक बडा है जहाँ लोग साथ में निर्जन है।” यह सच है, अमरीकी षहर इस घरती के अकेलेपनके जगहो में से ही है! अक्षरषः लाखो युवा लोगो हमारे जैसे षहर में अकेले है। आपके बारे में क्‍या है? क्‍या आप कभी भी महेसूस करते हो की हकीकत में किसीको भी आपकी परवाह नहीं है- किसीको आपसे सहानूभूति नही है?

आपके मातापिता या तो तलाकषुदा है या ज्‍यादातर समय एक-दूसरे से लडते रहते है। दूसरो के मातापिता है जो इतने व्‍यस्‍त है की वे घर इतने थके हूअे आते है की सीधे पलंग पर टेलीवीझन देखने बैठ जाते है। उनके पास आपको सूनने के लिये षक्‍ति नही बची होती है। क्‍या ये सच नहीं है? आपके माता-पिता हकीकत में आपको समज नहीं पाते है, क्‍या वे? वे हकीकत में आपकी तकलीफो को नहीं सूनते, क्‍या वे? वे आपको अकेलेपन से बाहर आने मे मदद नहीं कर सकते- और ये आप जानते हो! आपको ये मेरे कहने से पहले से पता था-क्‍या आपको नहीं था?

आपके कहे जाने वाले “मित्र” भी आपकी कुछ ज्‍यादा मदद नही करते, क्‍या वे? आप अपने अंदरूनी उत्‍पात और डर के बारे में उनसे कहने से डरते हो। आप उनसे कहने से डरते हो जो चीज हकीकत में आपको परेषान करती है की वे सोचेंगे की आप कमनसीब हो और आप उनकी मित्रता खो देेंगे। इसलीये आप हकीकत में अपने मित्रो पर भी भरोसा नहीं कर सकते क्‍या आप कर सकते हो- मेरा मतलब है आप के अंदरूनी चीजो के बारे में-और आपके अकेले हो जाने के डर से। आप हकीकत मे उस सबके बारे मेे बात नहीं करते हो-क्‍या आप?

आप कहाँ मूडोगे? युवा लोग ज्‍यादातर भजनसंहिता के लेखक के समान महेसूस करते है, जिसने कहाँ हैः

“मैं पड़ा पडा जागता रहता हुँ, और गौर के समान हो गया हूँ, जो छत के ऊपर अकेला बैठता है” (भजनसंहिता 102:7)।

युवा लोग अकसर घर की छत पर बैठे अकेले पंछी की तरह महेसूस करते है! कोई ताजुब नहीं की जे. डी. सेलीन्‍गर वैरागी, अलग हुअे, अकेले और कमनसीब बन गये! कोई ताजुब नहीं इतने सारे युवा लोंंग अकेले और असंतुंश्‍ठ है अपने जीवन से! वे दूनिया में सच्‍ची मित्रता के बगैर नहीं जी सकते। वे दुनिया में न खत्‍म होने वाले अकेलेपन में नही जी सकते!

इसलिये बहुत से युवा लोग ठंडी घुमनेवाली जगह पर टहलते रहते है। उनके पास करने को ओर कुछ नहीं होता-सिवा “बाहर भटकने के”। वहाँ पर रोषनी है। लोग यहाँ वहाँ घूमते रहते है। इससे थोडी मदद हो जाती है, परन्‍तु ज्‍यादा नही! भीड़ में अकेले! भयानक! नोबल इनाम जीतने वाले नोबलीस्‍ट अरनेस्‍ट हेमींन्‍गवे (1899-1961) ने इसके बारे मे छोटी कहानी मे लिखा, जीसका षीर्शक है “अ क्‍लीन वेल-लाइटेड प्‍लेस”। ये उस आदमी के बारे मे था जो अच्‍छी रोषनीवाली बैठक पर बैठते थे हर रात, क्‍योंकि वे अकेलेपन से डरते थे जो अगर वे धर जाये तो उन्‍हें महुसूस करना पडेगा।

इसी तरह याकूबने महेसूस किया होगा उस रात!

“और याकूब आप अकेला रह गया; तब कोई पुरूश आकर पौ फटने तक उससे मल्‍लयुध्‍ध करता रहा” (उत्‍पति 32:24)।

वे अकेले थे। फिर कोई झाड़ीयों से आया और उसे खींचकर ले गया। वहाँ पर उसे मदद करनेवाला कोई भी नहीं था। याकुब रात भर इस पुरूशसे लडता रहा, जो अंधेरेमे झाड़ीयो से कूदकर बाहर आया था और उसे जमीन पर फेंक दीया! अेकदम अकेले रहना बहुत भयानक था, और फिर इस तरह के हमलों का सामना!

क्‍या आपने समाचारपत्र में पढ़ा वो दो तरूण लडकींया जो पकडी गई और बलात्‍कार किया गया, और कीसी तरह बच गई? क्‍या आपने समाचारपत्र में पढ़ा उस युवा लडकी के बारे में जिसका उताह मे अपहरण हुआ था? हा, उताह में! यहाँ पर अपराध बहुत कम होते है, परन्‍तु युवा लोग पकडे जाते है, और बलात्‍कार कीये जाते है और अपहरण कीये जाते है भयप्रद दर से। और वहाँ कोई नही है उनको मदद करने के लिये। वे सब अकेले है। याकूबने ये पता लगाया! ये आज के युवालोगो के लीये डरावना और बाहरी दुनिया मे अकेलापन है।

एक युवा व्‍यक्‍तिने मुझसे कहाँ, “मुझे पता नही है क्‍या करूं। मुझे पता नहीं है कहां जाऊँ। मेरे पास कोई सच्‍चा मित्र नहीं है जिस पर मैं भरोसा कर सकुं।” क्‍या आपने कभी ऐसा महेसूस किया है?

II. परन्‍तु, दूसरा अकेलापन जो आप महेसूस करते हो वो इस स्‍थानीय कलीसिया में दूर किया जा सकता है।

इसलिये परमेष्‍वरने आपको ये कलीसीया दीया! परमेष्‍वर इस तरह के स्‍थानीय कलीसिया दुनिया में देते है ताकि लोग खुषी और मिलन दानो साथ मे पा सके-और अकेले नहीं! हमारे कलीसिया आपके अकेलेपन का उपाय करने के लिये है! इसलिये हम बारबार कहतें है, “अकेले क्‍यों रहें? घर आइये-अपने कलीसिया में!”

“और याकूब आप अकेले रह गये...” (उत्‍पति 32:24)।

स्‍थानीय कलीसिया की तरह आपका अकेेलापन ओर कुछ भी दूर नहीं कर सकता! परन्‍तु आपको इस स्‍थानीय कलीसिया में आना जरूरी है और हंमेषा रहनेवाले मित्र यहॉ बनाइये। पहले के मसीही खुष थे क्‍योंकि कलीसिया उनका दूसरा घर था।

“और वे प्रतिदिन एक मन होकर मंदिर में इकठ्ठे होते थे, और घर-घर रोटी तोड़ते हुए, आनंद और मनकी सिधाई से भोजन (उनका खाना) किया करते थे, और परमेष्‍वर की स्‍तुति करते थे; और सब लोग उनसे प्रसन्‍न थे। और जो उध्‍धार पाते थे, उनको प्रभु प्रतिदिन उनमें मिला देता था” (प्रेरितो 2:46-47)।

ज्‍यादातर समय कलीसिया में रहने से वे आनंद और खुषी से भर गये। रोमी दुनिया अंधेरी और जुल्‍मी थी, और अकेली। परन्‍तु मुर्तिपूजन अेकदम से कलीसिया में डाला गया क्‍योंकि उनको स्‍थानीय कलीसियामे उश्‍मा और आनंद और हंमेषा रहेनेवाली मित्रता मिली। वे जब भी दरवाजा खूलता था तब कलीसियामे होते थे! उनका द्रश्‍टांत देखीये और आप अकेले नहीं रहोगे! मेरे चीनी याजक, डो.लीन, कहते थे,“कलीसिया को अपना दूसरा घर बनाओ।” अगले रविवार फिर से यहाँ आइये! आपके कलीसिया के समागम मे आइये! ये आपके अकेलेपन को दूर करेगा। परन्‍तु आप कलीसिया में सिर्फ “झाँक” नहीं सकते कभी कभी। आपको आपका अकेलापन दूर करने के लिये हर रविवार यहाँ आने का वादा करना होगा, खासतौर पे आनेवाली “छुट्टीयों” के दिनो में ।

हमारे पास हर गुरूवार की रात, हर षनिवार की रात, और रविवार को पूरा दिन कुछ न कुछ न कुछ कार्यक्रम होते है! अगर आप हर हफते कलीसिया आना षुरू करेंगे, आप नहीं रहोंगे!

III. तीसरे स्‍थान पर, अकेलापन जो आप महेसूस करते हो उसका उपाय गहराई से होना चाहिये, लंबे अरसे तक रहनेवाला।

मैं बेईमान हो जाऊँगा अगर मैं आपसे न कहुँ की आपको गहरा अनुभव होना चाहिये अगर अकेलेपन का उपाय लंबे अरसे तक रहनेवाला हो। ये बहुत अच्‍छा हो कलीसिया में मित्रो का होना, परन्‍तु ये सिर्फ षुरूआत है। अगर आपका मतलब सिर्फ मित्र बनाना है, तो आप परिवर्तित नहीं होंगे, और एक दिन परमेष्‍वर से, और दूसरे सारे लोगो से दूर कर दीये जाओगे, नर्कमे। और सारी सृश्‍टि में नर्क के जैसी अकेली जगह ओर कोई नहीं है!

अगर आप सिर्फ नये मित्रो के लिये देखते हो तो, आप अभी या बाद मे छोड़ दिये जाओगे और पापो की दुनियामे चले जाओगे। या आप आखिरकार मर जाओगे -और फिर बुरे अकेलेपन का अनुभव करोगे-आग की झील मे!

इसलिये, अकेलेपन का स्‍थायीरूप से उपाय करने, आपको गहराई तक जाना होगा और आपको आपके अंदर देखना होगा।

“और याकूब आप अकेला रह गया; तब कोई पुरूश आकर पौ फटने तक उससे मल्‍लयुध्‍ध करता रहा” (उत्‍पति 32:24)।

याकूब की अकेली रातभर की मल्‍लयुध्‍ध संकेत करती है गहरी आत्‍मा का अंदस्‍नी परिश्रम यीषु मसीह को ढुढंने के लिये। आप देखिये, वो आदमी जिस के साथ याकूब ने मल्‍लयुध्‍ध किया वे यीषु मसीह स्‍वंय थे-अवतरण के पूर्व के मसीह! अवतरण के पहेले के मसीह ने कहॉ,

“तुम मुझे ढूँढोगे, और पाओगे भी; क्‍योंकि तुम अपने सम्‍पूर्ण मन से मेरे पास आआगे” (यिर्मयाह 29:13)।

फिर से यीषु ने कहाँ,

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्‍न करो” (लूका 13:24)।

सिर्फ जब आप मसीह मे प्रवेष पाने का प्रयत्‍न करते हो तो आप परिवर्तन का अनुभव कर सकते हो, और ढुंढते हो

“अपने प्रभु यीषु के द्वारा परमेष्‍वर का साथ” (रोमियो 5:1)।

आप पापो द्वारा प्रभु से दूर कीये गये हो। इसलिये प्रभु आपके लिये सच्‍चे नहीं है। सिर्फ अंदरूनी परिवर्तन से आप ढुंढ सकते हो “अपने प्रभु यीषु मसीह के द्वारा परमेष्‍वर का साथ” (रोमियो 5:1)।

IV. और फिर, चौथे स्‍थानपर, परिवर्तन का अकेलापन आपको बचाने के लिये जरूरी है।

“परिवर्तन का अकेलापन” से मेरा क्‍या मतलब है? मेरा मतलब है की कोई भी आपके लिये अनुभव नहीं कर सकता। आपको इस अंदरूनी अनुभव से अकेले ही गुजरना होगा। प्रेरितो पौलुसने कहाःँ

“सोनेवाले जाग, और मुर्दो मे से जी उठ, तो मसीह की ज्‍योत तुझ पर चमकेगी”(इफिसियो 5:14)।

आप अपने जीवन में अंतरःमन की कोई भी पीडा के बिना ही जीते हो। फिर पवित्र आत्‍मा आपको जागृत करना षुरू करती है। आप अपने पापो के बारे मे सोचना षुरू करते हो। आप परमेष्‍वर और दण्‍ड के बारे मे सोचना षुरू करते हो। वो है प्रभु की आत्‍मा का आपको जागृत करना।

“और याकूब आप अकेला रह गया; तब कोई पुरूश आकर पौ फटने तक उससे मल्‍लयुध्‍ध करता रहा” (उत्‍पति 32:24)।

वो “आदमी” प्रभु यीषु मसीह का अवतार लेने के पहले का स्‍वरूप था। ज्‍यादातर लोगो को अकेलापन, मुष्‍किल परिश्रम होता है मसीह के साथ जब वे सच्‍ची तरह परिवर्तन होते है। आप अपने पापो से और अपने खराब स्‍वभाव से अंदर से वाकेफ हो गये होंगे। आप अंदर से जान गये होंगे आनेवाले दण्‍ड के बारेमे। आपको यीषु के पास आना ही चाहीये, प्रभु के पुत्र, और उनपर वियवास किजीये। सिर्फ तभी ही आप सच्‍चे परिवर्तन का अनुभव करेंगे, वो हंमेषा के लीये रहेगा, और पूरी अनंतता के लिये। सिर्फ तभी ही आपके आत्‍मा की प्रभु से दूरियां और वर्तमान अकेलेपन का उपाय हो सकता है।

आप देखिये, अकेलेपन का उपाय वो सिर्फ एक अप्रधान रचना है। मुख्‍य चीज जो यीशु मसीह करते है वो है पापो की माफी। जब आप परिर्वतन के समयके परिश्रम और संकट से गुजरते हो, अप्रधान रचना की तरह, जैसे माफी के साथ और कुछ भी आता है, आपको भी मिलता है जिसको मैं कहता हुँ “वर्तमान अकेलापन” का उपाय। अगस्‍तीयनने कहाँ, “हमारे मन बेचैन होते है जब तक वे उनमे चैन न ढुंढ पाते है।”

स्‍थानीय कलीसिया में आइये। यह पहला कदम है अकेलेपन से बाहर आने का। हर रविवार यहाँ रहीये। अगर आप कभी कभी ही आयेंगे तो आप यहाँ सच्‍चे मित्र नहीं बना सकेंगे। आपको हर रविवार यहाँ आना ही है। और फिर धार्मिक प्रवचन सुनीये और बाद में उसके बारे में सोचीये। सोचीये यीशु के आपकी जगह मरने के बारे में, आपके पापो की किमंत चूकाने, क्रूस पर। फिर मसीह के पास आइये। वे उपर स्‍वर्ग में जिवीत है, प्रभु के दाहिने हाथ पर। यीशु के पास विश्‍वास से आइये और आपको आपके पापो से बचायेंगे और आपका अकेलापन और प्रभु से दूरियाँ दूर करेंगे। आमेन।

महेरबानी करके खडे रहीये और अपने गीत के पर्चे का सांतवा गीत गाइये।

यीशु के घर आइये, मेज बिछ़ा हुआ है;
रात्रि भोजन के लिये धर आइये और चलीये रोटी को तोडते है।
यीषु हमारे साथ है, इसलिये चलीये ये कहते है,
रात्रि भोजन के लिये धर आइये और चलीये रोटी को तोडते है।
कलीसिया के घर आइये और खाइये, और मिलन की मिठाई के लिये मिलीये;
ये एक षानदार मेजबानी होगी, जब हम खाने बैठेंगे!

मिलन की मिठाई और आपके मित्र यहाँ होंगे;
हम मेज पर बैठेंगे, हमारे मन आनंद से भर जायेंगे।
यीषु हमारे साथ है, इसलिये चलीये ये कहते है,
रात्री भोजन के लिये घर आइये और चलीये रोटी को तोडते है!
कलीसिया के घर आइये और खाइये, और मिलन की मिठाई के लिये मिलीये;
ये एक षानदार मेजबानी होगी, जब हम खाने बैठेंगे!

बडे षहर के लोग परवाह करते नहीं दिखते;
उनके पास देने के लीये बहुत कम होता है और बांटने के लिये प्‍यार नही।
परन्‍तु यीषु के घर आइये और आप जान जाओगे,
वहाँ मेज पर खाना है और बांटने के लिये मित्रता!
कलीसिया के घर आइये और खाइये, और मिलन की मिठाई के लिये मिलीये;
ये एक षानदार मेजबानी होगी, जब हम खाने बैठेंगे!

यीषु के घर आइये, मेज बिछ़ा हुआ है;
रात्री भोजन के लिये घर आइये और आपको भोजन खिलाया जायेगा।
आपके मित्र प्रतीक्षा करेंगे, इसलीये चलीये ये कहते है,
रात्री भोजन के लिये घर आइये और चलीये रोटी को तोडते है!
कलीसिया के घर आइये और खाइये, और मिलन की मिठाई के लिये मिलीये;
ये एक षानदार मेजबानी होगी, जब हम खाने बैठेंगे!
(“रात्री भोजन के लिये घर आइये” डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा;
       “परींदे के पंखो पर” की तर्ज पर)।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल.चान द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रषास्‍त्रः उत्‍पति 32:22-25।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्‍जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
“रात्रि भोजन के लिये घर आइये” (डो.आर. एल. हायर्मस. जुनि. द्वारा)।


रूपरेखा

और याकुब आप अकेला रह गया!

डो. आर. एल. हायर्मस. जुनि. द्वारा

“और याकुब आप अकेला रह गया; तब कोई पुरूश आकर पौ फटने तक उससे मल्‍लयुध्‍ध करता रहा” (उत्‍पति 32:24)।

I.    पहला, अकेलापन जो आप महेसुस करते हो वो हमारे समय मे युवा लोगों मे सामान्‍य है, भजनसंहिता 102:7।

II.   दूसरा, अकेलापन जो आप महेसूस करते हो वो इस स्‍थानीय कलीसिया मै दूर किया जा सकता है, प्रेरितो 2:46-47।

III.  तिसरा, अकेलापन जो आप महेसूस करते हो उसका उपाय गहराई से होना चाहिया, लंबे अरसे तक रहनेवाला, यिर्मयाह 29:13; लूका 13:24; रोमियो 5:1।

IV.  चौथा परिवर्तन का अकेलापन आपको बचाने के लिये जरूरी है,
इफिसियो 5:14।