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“मेरा मन - मसीह का घर”
डो. रोर्बट बोयड मन्जर की समालोचना

A CRITIQUE OF DR. ROBERT BOYD MUNGER’S
“MY HEART – CHRIST’S HOME”

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि.द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.s

लोस एंंजीलस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की
शाम, 15 अगस्त, 2010 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, August 15, 2010

“विश्वास के कर्ता और सिध्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें, जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस का दुःख सहा और परमेश्वर के सिंहासन की दाहिनी ओर जा बैठा” (इब्रानियो 12:2)।


सामान्य रूप से फ्रेकलीन ग्रेहाम अपना धार्मिक प्रवचन ये कहते हुअे पूरा करते है की, “मसीह से आपके मनमें आने को कहीये”। ये विचार कहाँ से आता है? जोन फलेवेल (1628-1691) ने प्रकाशितवाक्य 3ः20 पर धार्मिक प्रवचन की श्रृखंला लिखी, परन्तु यीशु को “पूछने” या “करने” का विचार “आपके मन में आओ” लगता है गीत “यीशु को आपके मनमे आने दीजीये” से लीया एन. मोरीस (1862-1929) द्वारा दीये हुअे गाने से प्रसिध्धि पाने के लिये। वैसे भी, यह डो. रोर्बट बेयड मन्जर का पर्चा था “मेरा मन - मसीह का घर” (ये पढ़ने के लिये यहाँ क्लीक किजिये) जिसने ये विचार को बहुत मशहूर कर दिया 20 वी सदी के पीछले भाग में। उस छोटी पत्रिका में, डो. मन्जर ने कहाँ, “एक शाम मैने यीशु मसीह को मेरे मनमें आमंत्रित किया। कीतना अद्भूत प्रवेश किया उन्होने! यह प्रदर्शन नहीं था, भावनात्मक चीज, परन्तु एकदम सच्चा-वे मेरे मनके अंधेरे मे आये और प्रकाशित कीया।”

डो. मन्जर (1910-2001) ने सुसमाचार का शिक्षण फूलर आध्यात्म शिक्षण की धार्मिक पाठशाला में बहुत सालों तक दिया, 1969 से उनकी मृत्यु तक, और उनका संदेश “मेरा मन - मसीह का घर” बहुत प्रचलित हुआ, जब तक ये विचार “यीशु मसीह को (आपके) मनमें आने को आमंत्रित किजिये” वो मुक्ति पाने की तरकीब का एक हिस्सा बन गया जो अब नये सुसमाचार प्रचारक में बहुत जानामाना है। लेकीन फिर भी, डो. मन्जर के विषय के मुख्य संदेश, इफिसियो 3:17 को पापीयो से कुछ लेना देना नहीं है “यीशु मसीह को (उनके) मनमें आमंत्रित करने के लीये”।

इफिसियो को लिखा हुआ पत्र खोये हुअे पापीयो को नहीं लिखा गया था। वो लिखा था “उस विश्वासी लोगो के नाम जो इफिसुस में है” (इफिसियो 1:1)। इसलिये, इफिसियो 3:17, जैसे डो. आर. सी. एच. लेन्सकीने निरीक्षण किया, “मसीह का हमारे मनमें पहला प्रवेश नहीं है, परन्तु आगे भी मनमें रहना ताकि ताकत से हम आत्मा (पद 6) द्वारा पास के...यीशु आत्मा द्वारा आते है” (आर. सी. एच. लेन्सकी, डी.डी., सेंट पोल की इफिसियो के पत्र की व्याख्या, अगसबर्ग प्रकाशन घर, 1961 का भाग, पृष्ठ 494; इफिसियो 3:17 पर टीप्पणी)।

दूसरा पद जो डो. मन्जरने इस्तेमाल किया वो था यूहन्ना 14:23,

“यदि कोई मुझ से प्रेम रखेगा तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उससे प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएँगे और उसके साथ वास करेंगे” (यूहन्ना 14:23)।

परन्तु ये पवित्र आत्मा के कामो को भी बताता है जैसे इफिसियो 3:17 करता है। यीशुने चेलों से कहाँ,

“और मैं पिता से विनती करुँगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे : अर्थात् सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। मैं तुम्हे अनाथ नहीं छोडूंगा मैं तुम्हारे पास आता हूँ। और थोडी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे देखेगा, इसलिये की मैं जिवीत हूँ, तुम भी जिवीत रहोगे उस दिन तुम जानोगे कि मैं अपने पिता में हूँ, और तुम मुझ में और मैं तुम में” (यूहन्ना 14:16-20)।

यह पवित्र आत्मा के संदर्भ के कार्य में है जो प्रभु पितामह और प्रभु पुत्र “उसके पास आएँगे और उनके साथ (उनका) वास करेंगे” (यूहन्ना 14:23)। यह प्रभु की पवित्र आत्मा है जो “आप में होनी चाहिये”। 1 पतरस 1:11 और रोमियो 8:9, में पवित्र आत्मा को कहा गया है “मसीह की आत्मा”, जहाँ प्रभु की आत्मा और मसीह की आत्मा दोनो का साथ में इस्तेमाल हुआ है और जहाँ प्रेरितो कहते है,

“यदि किसी में मसीह का आत्मा नही तो वह उसका जन नही” (रोमियो 8:9)।

डो. हेन्री एम. मोरीसने कहाँ,

उस पर ध्यान दिजिये, इस अेक पद में, पवित्र आत्मा को “प्रभु की आत्मा”, और “मसीह की आत्मा” दोनो कहाँ गया है। दोनो शब्द एक जैसे ही है : इसलिये मसीह प्रभु है, और इसलिये पवित्र आत्मा भी (हेन्री एम. मोरीस, पीएच.डी., बचानेवाले की बाइबल की पढ़ाई, वर्ल्ड प्रकाशन, 1995 की प्रत, पृष्ठ. 1239; रोमियो 8:9 पर टीप्पणी)।

इसलिये, मैं मान चूका हूँ की ये “मसीह की आत्मा है, इंसान यीशु मसीह नही, जो हमारे विश्वास से हमारे मनमें रहते है (इफिसियों 3:17)। ये “प्रभु की आत्मा” है “मसीह की आत्मा” (रोमियो 8:9) भी, जो “उसके पास (इंसान) आएँगे और उनके साथ (उनका) वास करेंगे” (यूहन्ना 14:23), नहीं की

“मसीह यीशु जो मनुष्य है” (1 तीमुथियुस 2:5)।

त्रिदेव के पहले दो व्यक्ति परिवर्तन के समय किसीके मनमे नहीं आये। नही, ये “प्रभु की आत्मा” है, “मसीह की आत्मा” भी। पवित्र आत्मा, त्रिदेव का तीसरा व्यक्ति, आपके मनमे आता है परिवर्तन के समय।

अब, प्रकाशितवाक्य 3:20 के बारे में क्या?

“देख, मैं द्वार पर खडा हूआ खटखटाता हूँ : यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करुँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

ध्यान दिजीये के “मन” शब्द पूरे पद में कहीं भी नही दिखता है! नही पद कहता है की “मसीह यीशु जो मनुष्य है”, जो पितामह के दाहिने हाथों पर बैठते है, अंदर आते है! ये “मसीह की आत्मा” है जो अंदर आती है! और भी, और ये बहुत महत्वपूर्ण है, खोया हुआ पापी अपनी मरजी से मसीह के पास नही खुलता, और प्रार्थना के शब्द कहने से तो कभी भी नही! डो. लेन्सकीने कहाँ,

द्वार के खुलने के बारे में तत्वज्ञानी गलतफहमी करते है जो सोचते है की पापी अपनी मरजी से द्वार खोल सकते है, अपनी खुद की कुदरती ताकत (या प्रार्थना!) द्वारा। वो ये नहीं देखते है की मरजी मर्यादा है इसलिये, द्वार खोलने के लिये शायद संभव न हो...सच्चाई ये है की (मसीह) द्वार तक आते है, वहाँ खडे रहते है, खटखटाते है और अपनी आवाज में बुलाते है। इस में द्वार खोलने की जो ताकत है उसे चलाता है...प्रभु का प्यार और अनुग्रह की ताकत उसके वचनो में और वचने द्वारा है...मनमें पहुचती है और आगे बढ़ती है खोलने और स्वीकार करने के लिये। यह चित्र है जो वहाँ पेश किया गया है (आर. सी. एच. लेन्सकी, डी.डी., सेंट जोन की प्रकाशितवाक्य की व्यवस्था, अगसबर्ग प्रकाशन घर, 1963 की प्रत, पृपृष्ठ. 162-163; प्रकाशितवाक्य 3:20 पर टीप्पणी)।

“देख, मैं द्वार पर खडा हुआ खटखटाता हू : यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करुँगा और वह मेरे साथ” (प्रकाशितवाक्य 3:20)।

यीषु आपके अंतरमनके द्वार को खटखटाते है उस धार्मिक प्रवचन से जो आप सूनते हो प्रभु के वचनो द्वारा। यह प्राथमिक तरीका है उनके खटखटाने का, कायदे और सुसमसचार के प्रवचन द्वारा। जब आपका अंतर मन “छेदित” होता है प्रवचन द्वारा और आप कह उठते हो “हम (मै) क्या करूॅ?” (पे्ररितो 2:37) फिर आप षायद “मसीह की आत्मा” को पाने के लिये आप खोलते हो-जो आपको इंसानी यीषु मसीह के पास ले जाते है, स्वर्ग में प्रभु के दाहिने हाथ मे बैठे हुअे।

हमे नये नियमावलीमे 15 बार कहॉ गया हे की प्रभु यीषु मसीह स्वर्ग में प्रभु के दाहिने हाथ में बैठे है। यहाँ पर उनमे से कुछ संदर्भ दिये गये है,

“परन्तु यह व्यक्ति, तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढाकर परमेष्वर के दाहिने जा बैठा” (इब्रानियो 10:12)।

“प्रभु यीषु उनसे बाते करने के बाद स्वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेष्वर की दाहिनी ओर बैठ गया” (मरकुस 16:19)।

“इसी यीषु को परमेष्वर ने जिलाया, जिसके हम सब गवाह है। इस प्रकार परमेष्वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्च पद पाकर, और पिता से वह पवित्र आत्मा प्राप्त करके जिसकी प्रतिज्ञा की गइ थी, उसने यह उंडेल दिया है, जो तुम देखते और सुनते हों क्योकि दाउद तो स्वर्ग पर नहीं चढाःपरन्तु वह आप कहता है, प्रभु ने मेरे प्रभु से कहॉ, मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पाँवो तले की चौकी न कर दूूँ” (प्रेरितो 2:32-35)।

“कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह ही है जो मर गया वरन् मुर्दो में से जी भी उठा, और है, और परमेष्वर के दाहिने और है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है” (रोमियो 8:34)।

“और उसकी सामर्थ्य हम में जो विष्वास करते है, कितनी महान् है, उसकी षक्ति के प्रभाव के उस कार्य के अनुसार, जो उसने मसीह में किया कि उसको मेरे हुओ में से जिलाकर, स्वर्गीय स्थानो में अपनी दाहिनी ओर बीठाया” (इफिसियो 1:19-20)।

“जब तुम मसीह के साथ जिलाये गए तो स्वर्गीय वस्तुओ के खोज में रहो, जहॉ मसीह विद्यमान है और परमेष्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्वर्गीय वस्तुओ पर ध्यान लगाओ” (कुलुस्सियो 3:1-2)।

और अपनी खुलती किताब

“विष्वास के कर्ता और सिध्ध करनेवाले यीषु की और ताकते रहे; जिसने उस आनन्द के लिये उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस का दुःख सहा, ओर परमेष्वर के सिंहासन की दाहिनी और जा बैठा” (इब्रानियो 12:2)।

वहाँ पर और आठ पद है जो हमें यहीं चीज केे बारे मे कहते है-मृत्यु से जिलाये मसीह, उनकी पुनरूत्थानवाले मांस और हड्डी का देह-जो उपर स्वर्ग में प्रभु के दाहिने हाथ पर बैठे है! वे नीचे नही आते और “हमारे मनके छोटे से छेद मेसे पसार होते है” जैसे एक बच्चीने कहा। वो डो. मन्जर की किताब की षिक्षा से व्याकुल थी! नहीं! नहीं! इंसानी यीषु मसीह-पितामह के दाहिने हाथ पर, नीचे नहीं आते और “हमारे मनके छोटे से छेद मे से पसार होते है!” असंगत बात! आपको प्रभु के वचनो के प्रवचन को सूनना ही चाहिये, और अपने मन और जींदगी के पापो के अपराघ भाव के द्रढ विष्वास में आना चाहिये। आपकी आत्मा प्रभु की आत्मा द्वारा खुलनी चाहीये । प्रभु की आत्मा द्वारा आप यीषु मसीह तक ले जाने चाहीये। आपको अपने पापो का प्रायष्चित करना चाहीये उनके क्रूस पर की मृत्यु द्वारा! आपको अपने पापो से षुध्ध करना चाहिये उनके बहुमूल्य लहू द्वारा! यह सच्ची मुक्ति और सच्चे परिवर्तन का रास्ता है!

डो. मनजर की किताब के संदर्भ में मेरी दूसरी टीका यह है की उसमें सुसमसचार बहुत कम है। सुसमसचार में एक ही संकेत है, “ध होल क्लोसेट” षिर्शक वाले विभाग के आखरी वाक्य में। डो. मन्जर ने कहॉ,

कोइॅ बात नही की भूतकाल मे कौन सा पाप या दर्द था, यीषु तैयार है माफ करने के लिये, सुधारने और पूर्ण बनाने के लिये।

परन्तु डो. मन्जर ने ये नही कहॉ की पाप क्या है। उन्होने आदमीयो के भ्रष्टाचार, प्रभु के विरूध्ध अंदरुनी द्रोह के लिये एक षब्द भी नहीं कहॉ, बाहरी पापो के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया। फिर, और भी, उन्होने हमसे यह भी नही कहा की यीषु किस तरह “माफ करेंगे, सुधारेंगे और पूर्ण बनायेंगे।” उन्होने यीषु की क्रूस पर की मृत्यु पापीयों के बदले थी उसका भी जिक्र नहीं किया। उसने पापीयो के बदले उनके पापो का दण्ड चूकाने के लिये भयानक तडपसे यीषु गुजरे उसका भी कोई जिक्र नहीं किया। उसने एक शब्द भी नहीं कहाँ मसीह के पापीयो के बदले खुद के प्रायष्चित के बारे में,

“परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामो के कारण कुचला गया; हमारी ही षान्ति के लिये उस पर ताडना पडी, कि उसके कोडे खाने से हम लोग चंगे हो गये। हम तो सब के सब भेडो के समान भटक गए थे; हम मे से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” (यषायाह 53:5-6)।

और भी, डो. मन्जर ने “मसीह के बहुमूल्य लहू” (1 पतरस 1:19) के बारे में भी कुछ नही कहॉ। उसने कभी नही कहॉ, “बिना लहू बहाए पापों की क्षमा नही” (इब्रानियो 9:22)।

क्या यह पूरी तरह से “निर्णायकता” है? यह सागर सी गहराई के अलावा क्या है? ये मनुश्य के “मसीह को अपने मनमे आमंत्रित” करके अपने आपको बचाने के अलावा क्या है? ये मसीह की निर्धारित मृत्यु और उनका पापो के लिये लहू के बलिदान द्वारा मुक्ति नहीं है! ये अनुग्रह द्वारा मुक्ति नही है! ये स्वतः मुक्ति है! पापी अपनी प्रार्थना द्वारा अपने आपको बचाता है! पापी अपने आपको बचाता है “उसे आमंत्रित” करके अंदर आने को। इससे दूर रहीये! इस तरह की घरती के मुखवटे की गवाँर निर्णायकता से दूर रहीये! कोई बात नहीं की दूसरे क्या कहते या करते है,

“मैं सुसमाचार से नहीं लजाता। इसलिये की वह हर एक विष्वास करनेवरले के लिये...” (रोमियो 1:16)।

“पूछना” जरूरी नही है। “आमंत्रित” करना भी मदद नही करेगा। लूथर और बुनयान और वेस्ली और र्स्पजन सब बचाये गये कोई भी प्रार्थना किये बिना-और स्पश्ट है की उन मे से कीसीने भी यीषु को उनके मनमे आने को नहीं कहाँ! उन्होने सुसमाचार प्रवचन सूना और वे यीषु के पास आये। कीसी तरह की कोई भी प्रार्थना जरूरी नहीं थी। वे सिर्फ यीषु के पास आये और यीषुने सारा बचाव किया! षायद आपके जीवन में भी यह सच हो। आमेन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहेले डो. क्रेेगटन एल चान द्वारा पढा गया पवित्रवाक्या : मरकुस 16:14-19।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन कीनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
“ओ प्रभु, मैं कीतना द्रुष्ट हुँ” (जोन न्यूटन द्वारा, 1725-1807)।