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यीशु मसीह स्वयं

JESUS CHRIST HIMSELF

डो. आर. एल. हायमर्स, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

केलिर्फोनीया के मोनरोवीया के
कालवरी रोड बप्तीस कलीसिया में
गुरूवार, अगस्त 5, 2010 की शाम को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at Calvary Road Baptist Church, Monrovia, California
Thursday Evening, August 5, 2010

“यीशु मसीह स्वयंं” (इफिसियों 2:20)।


इस धार्मिक प्रवचन का विषय है यीशु मसीह स्वयं। मसीह विश्वास में यीशु मसीह स्वयं जैसा अद्भूत ओर कुछ भी नहीं है। वहाँ यीशु मसीह जैसा कभी नहीं था और ना कभी कोई होगा। वे इंसानी इतिहास में अेकदम अलग है। यीशु मसीह स्वयं इंसान के रूप में प्रभु है। यीशु मसीह स्वयं स्वर्ग से नीचे आये और इंसानो के बीच जीये। यीशु मसीह स्वयं तडपे, खून बहाया और हमारे पापो के लिये मरे। यीशु मसीह स्वयं हमारे पापों को न्याय देने के लिये मृत्यु से शारिरिक रूपसे उठे। यीशु मसीह स्वयं प्रभु के दाहिने हाथ पर उठे हमारी प्रार्थना में प्रभु के साथ मध्यस्थी होने। और यीशु मसीह स्वयं फिर से पृथ्वी पर आये अपना राज्य स्थापित करने हजार वर्ष के लिये। वो यीशु मसीह स्वयं है! खडे रहीये और वो समूहगान गाइये!

सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये,
   सिर्फ यीशु, मुझे उसके सिवा किसीने नहीं बचाया,
फिर मेरा गीत हमेंशा रहेगा -
   यीशु! सिर्फ यीशु!
(“ सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये” डो. ओसवाल्ड जे.
स्मीथ, द्वारा 1889-1986)।

आप बैठ सकते हो।

यीशु मसीह स्वयं यह विषय इतना गहरा, इतना विशाल, और इतना महत्वपूर्ण है की हम कभी भी एक धार्मिक प्रवचन में इसे समझा नहीं सकते। हम आज रात यीशु मसीह स्वयं के बारे में कुछ मुदो को ही छू सकते है।

I. पहला, यीशु मसीह स्वयं इंसानी जाति द्वारा तिरस्कृत और अस्वीकृत हुअे है।

सुसमाचार प्रचारक भविष्यवक्ता यशायाह ने ये स्पष्ट किया, जब उन्होने कहाँ,

“वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यो का त्यागा हूआ था; वह दुःखी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उससे मुख फेर लेते थे; वह तुच्छ जाना गया, और हम ने उसका मूल्य न जाना” (यशायाह 53:3)।

डो. टोरेयने कहाँ, “यीशु मसीह में विश्वास (होने) में निष्फलता वो दुर्भाग्य नहीं है, पाप है, पीडा-कारक पाप, भयंकर पाप, दुष्ट पाप है” (आर. ए. टोरेय. डी.डी. मसीह के लिए कैसे काम करें, फ्लेमींग एच. रेवेल कंपनी, एन.डी., पृष्ठ.431)। भविष्यक्ता यशयाह यीशु के तुच्छ जाने और अस्वीकृत होने के पाप को बताते है, अंदरूती भष्ट्रता जो आपको आपका चहेरा यीशु के सामने लाने से छूपाने के लिये कारणभूत है। सबसे बड़ा सबूत की आप पूरी तरह दुष्ट हो की आप यीशु मसीह स्वयं के बारे में बहुत कम सोचते हो। आप आग की झील में अनंत सजा के योग्य हो के आप जानबूझकर और आदत से अपना चहेरा उनसे छूपाते हो।

आप अपनी अजागृत अवस्था में आप यीशु मसीह स्वयं को तुच्छ जानते हो। आपकी अपनी पूरी दृश्टता की अवस्थामें आप यीषु मसीह स्वयं का मूल्य नहीं जानते हो। जबतक आप अपने अंतरमन में छेदित नहीं होते हो, जबतक आप अपने पापो की भयानकता और भयंकर अनंत सजा को महेसूस नहीं करते, आप यीशु मसीह स्वयं को तुच्छ जानना और अस्वीकार करना जारी रखते हो।

हमारे कलीसियामें हम हमेशा देखते है। जब हम आपको पूछताछ कक्ष में सूनते है, धार्मिक प्रवचन के बाद, हम आपको बहूत सी चीजो के बारे में बोलते हुअे सूनते है। आप बाइबल के पदों के बारे में बोलते हो। आप आप इस चीज या वो चीजो के बारे में “प्रत्यक्ष होने” के बारे में बोलते हो। आप हमे बताते हो की आपने क्या महेसूस किया और आपने क्या किया। आप से कहते हुअे बात खत्म करते हो की, “फिर मैं यीशु के पास आया।” उसके बाद हम आपसे थोडा ओर बताने के लिये कहते है। “यीशु के पास आने के बारे हमे थोडा ओर बताइये”, हम कहते है। फिर आप गिर पडते हो। आप के पास यीशु मसीह स्वयं के बारे में कहने को कुछ भी नहीं होता!

श्रेष्ठ स्पर्जनने कहाँ, “वहाँ पर मनुष्यों में यीशु मसीह स्वयं को सुसमाचार के बाहर रखने की नीच प्रवृति है” (सी.एच. र्स्पजन, विकेट द्वार के आसपास, पीलग्रीम प्रकाशन, 1992 में फिर से छपा हुआ, पृष्ठ.28)।

मुक्ति के उपाय की जानकारी आपको बचा नहीं सकती! बाइबलके बारे में ज्यादा पढ़ना आपको बचा नहीं सकता! ज्यादा धार्मिक प्रवचन सूनना आपको बचा नहीं सकता! आपके पापों के बारे में दुःख महेसूस करना भी आपको बचा नहीं सकता! आपको कुछ भी मदद नहीं कर सकता जब तक आप उन्हे तुच्छ जानना और अस्वीकृत करना बंद नहीं करते - जब तक आप अपना चहेरा उनसे छिपाना बंद नहीं करते - जब तक आप यीशु मसीह स्वयं के पास खींच कर नहीं ले जाये जाते! खडे रहीये और ये फिर से गाइये!

सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये,
   सिर्फ यीशु, मुझे उसके सिवा किसीने नहीं बचाया,
फिर मेरा गीत हमेंशा रहेगा -
   यीशु! सिर्फ यीशु!

आप बैठ सकते हो।

II. दूसरा, यीशु मसीह स्वयं पूरे बाइबल का केन्द्र का विषय है।

क्या हमारा आपसे यह कहना अनूचित होगा की यीशु मसीह स्वयं आपके विचारो के केन्द्र में होने ही चाहीये ? नहीं, ये अनुचित नहीं है। क्यो, इसके बारे में सोचीये, यीशु मसीह स्वयं पूरी बाइबल का श्रेष्ठ विषय है - उत्पति से प्रकाशितवाक्य तक! मृत्यु से उठने के बाद यीशु दो चेलो से मिले जो इम्माउस की ओर चल रहे थे। उन्होेने जो उनसे कहाँ वो आप सबको भी लागू होता है,

“तब उसने उनसे कहा, हे निर्बुध्धियों, और भविष्यवक्ताओं की सब बातो पर विश्वास करने में मन्दमतियोः क्या अवश्य न था कि मसीह ये दुःख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे? तब उसने मूसा से और सब भविष्यवक्ताओ से आरम्भ करके सारे पवित्रशास्त्र में से अपने विषय में लिखी बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया” (लूका 24:25-27)।

मूसा की पाँच किताबो में से, और बाकी की सारी बाइबल में, यीशु ने उन्हे समजाया था, “सारे पवित्रशास्त्र में से अपने विषय में लिखी बातो का अर्थ।” सरलता क्या हो सकती है? पुरे बायबलका मुख्य विषय है यीशु मसीह स्वयं! जब यीशु मसीह स्वयं बाइबल का मुख्य विषय है, क्या ये आपके लिये उचित नहीं है की आप यीशु मसीह स्वयं को आपके विचार और आपके जीवन का मुख्य विषय बना ले? मैं आप से कहता हूँ, आज रात यीशु मसीह सवयं के बारे में गहराई से सोचे! ये गाइये!

सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये,
   सिर्फ यीशु, मुझे उसके सिवा किसीने नहीं बचाया,
फिर मेरा गीत हमेंशा रहेगा -
   यीशु! सिर्फ यीशु!

III. तीसरा, यीशु मसीह स्वयं सुसमाचार का हृदय, निष्कार्ष, केन्द्रिय तत्व है।

यहाँ फिरसे यहाँ भविष्यवक्ता यशयाह यीशु मसीह स्वयं के लिये सुसमाचार के हृदय के जैसे बोले,

“हम तो सब के सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” (यशयाह 53:6)।

“यहोवा ने हम सभो के अर्धम का बोझ उसी पर लाद दिया।” निर्धारित, प्रायश्चितपूर्ण मसीह के मृत्यु, आपकी जगह, आपकी जगह प्रभु के गुस्से की कींमत चूकाते हुअे और तडपते हुअे - वो है सुसमाचार का हृदय! यह यीषु मसीह स्वयं है जो गतसमनीके अंधेरे मे आपके पापो को अपने खुद के उपर लेते है। यह यीषु मसीह स्वयं है वह बगीचे मे, जिसने कहॉ

“मेरा मन बहुत उदास है यहाँ तक कि मैं मरने पर हुँ” (मरकुस 14:34)।

यह यीषु मसीह स्वयं है जो,

“हार्दिेक वेदना से... पसीना... मानो लहु की बड़ी बड़ी बूंदो के समान भूमि पर गिर रहा था। (लूका 22:44)।

यह यीषु मसीह स्वयं है जो गतसमनीके बगीचे मे पकडे गये थे। यह यीषु मसीह स्वयं है जो खींचकर महासभा मे लाये गये, चहेरे पर मारे गये मज़ाक उडाया और लज्जित किया गया। उन्होने यीषु मसीह स्वयं के चहेरे पर थूंका! उन्होने यीषु मसीह स्वयं के चहेरे से दाढ़ी के बाल खींचे। यह यीषु मसीह स्वयं थे जिसे पुन्तियस पिलातुस के सामने लाया गया, रोमी चाबूक से पीठ पर मारा गया, कांटो का ताज पहनाया गया, यीषु मसीह स्वयं के पवित्र चहेरे पर उनके कपाल से लहू टपकने लगा, चहेरा पहचान न सके उतना मारा गया,

“उसका रूप... मनुश्य का सा न जान पड़ता था, और उसकी सुन्दरता भी आदमियो की सी न रह गई थी” (यषायाह 52:14)।

“और उसके कोडे़ खाने से हम लोग चंगे हो गये” (यषायाह 53:5)।

यह यीषु मसीह स्वयं है जिसे पिलातुस की अदालत से, उनके क्रुस के साथ क्रुस पर चढने की जगह पर धसीट कर ले जाया गया। यह यीषु मसीह स्वयं थे जिन्हे क्रूस के लकडे पर कील से ठोका गया था! यह यीषु मसीह स्वयं थे जीसने न सिर्फ हाथ और पांव के आरपार कील के ठोकने का दर्द सहा-परन्तु बहुत दर्द मे तडपे जब प्रभुने “हम सभो के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया” (यषायाह 53:6)। यीषु मसीह स्वयं “हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुअे क्रूस पर चढ़ गया” (1 पतरस 2:24)। डो. वोट्सने कहाँ,

देखिये, उनके सिर, उनके हाथो, उनके पैरो से,
   दुःख और प्रेम मिश्रित होकर नीचे बह रहा हैः
क्या कभी भी ऐसा प्रेेम और दुःख मिले,
   या कांटो भरा इतना मूल्यवान ताज?
(“जब मैने अद्भूत क्रूस को निहारा” आइझेक वोट्स द्वारा,
डी.डी., 1674-1748)।

इसे गाईये! अब हमारा समुह गान गाईये!

सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये,
   सिर्फ यीशु, मुझे उसके सिवा किसीने नहीं बचाया,
फिर मेरा गीत हमेंशा रहेगा -
   यीशु! सिर्फ यीशु!

आप बैठ सकते है।

IV. चौथा, यीषु मसीह स्वयं ही सिर्फ अनंत आनंद का मूलकारण है।

उन्होने यीषु की लाष को क्रुस से नीचे उतारी और बंद कब्र में दफना दिया। परन्तु तीसरे दिन, वे मृत्यु से षारिरीक रूप से उठे! फिर वे चेलो के पास आये और कहाँ, “तुम्हे षांति मिले” (यूहन्ना 20:19)।

“और यह कहकर, उसने अपना हाथ और अपना पंजर उनके दिखाये। तब चेले प्रभु को देखकर आनंदित हुए” (यूहन्ना 20:20)।

“तब चेले प्रभु को देखकर आनंदित हुए” (यूहन्ना 20:20)। यीषु मसीह स्वयं मे उन्हे आनंद दिया “जब उन्होने प्रभु को देखा”। जबतक आप यीषु मसीह स्वयं को नहीं जानते, आप कभी भी गहरी षांति और प्रभु के आनंद को नहीं जान सकते!

ओह, आजरात मै आपसे कहूँगा-मुझे वो पल अच्छी तरह याद है जब मैंने यीषु मसीह स्वयं मे विष्वास किया। कितना पवित्र अनुभव! मेरी आत्माने यीषु को देखा और उपर उठाये हुअे, पितामह के दाहिने हाथ पर! में उनकी ओर दौडा। या, षायद, ऐसा लगता है की वे मेरी ओर दौडे। मैं उनके अमूल्य लहू से षुघ्ध किया गया था! मैं प्रभु केे पुत्र द्वारा जिवीत किया गया था! वो समूहगान गाइये!

सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये,
   सिर्फ यीशु, मुझे उसके सिवा किसीने नहीं बचाया,
फिर मेरा गीत हमेंशा रहेगा -
   यीशु! सिर्फ यीशु!

आप बैठ सकते हो।

ओह, पापींयो, दूसरे दिन के लिये मत रूकिये! दूसरे धंटे के लिये मत रूकिये! दूसरे पल के लिये मत रूकिये! यीषु मसीह स्वयं के पास आइये! अपनी साक्षी के बाहर उन्हें मत छोड़ीये। र्स्पजनने जो कहॉ वो कबूल मत किजीये की “अतिदुःखी नीच प्रवृति... मसीह स्वयं को अपने सुसमाचार के बाहर रखने की।” नही! नही! अभी यीषु मसीह स्वयं के पास आइये। जो मैं गाता हूँ उसके षब्द ध्यान से सुनीये।

मैं जैसा हुं, बिना किसी दलीलके,
   परंतु वोे आपका लहू मेरे लिये बहा था,
और आप मुझे आपके पास आने को प्रेरित करें,
   ओ प्रभु के मेम्ने, मैं आ रहा हूँ! मैं आ रहा हुँ!
(“मे जैसा हूँ” चारलोटे एलीओट द्वारा, 1789-1871)।

वो षब्द नरमी से गाइये।

मैं जैसा हुं, बिना किसी दलीलके,
   परंतु वोे आपका लहू मेरे लिये बहा था,
और आप मुझे आपके पास आने को प्रेरित करें,
   ओ प्रभु के मेम्ने, मैं आ रहा हूँ! मैं आ रहा हुँ!

क्या आजरात आप यीशु मसीह स्वयं के पास आअेगे ? वो आपके पापोंको माफ करेंगे। वे आपको शांति देंगे प्रभु और अनंत जीवन के साथ। क्या आप यीशु मसीह स्वयं के पास आओगे? मैं प्रार्थना कैसे करूँ ताकि आप आये। यीशु के नाम में, आमेन!

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले याजक द्वारा पढ़ा हुआ पवित्र वाक्या : यशायाह 53:3-6।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जमिन कीनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
“यीशु, सिर्फ यीशु” (डो. जोन आर. राइस द्वारा, 1895-1980)/
“सिर्फ यीशु, मुझे देखने दिजिये” (डो. ओसवाल जे. स्मीथ द्वारा, 1889-1986)।


रूपरेखा

यीशु मसीह स्वयं

डो. आर. एल. हायमर्स, जुनि. द्वारा

“यीशु मसीह स्वयंं” (इफिसियों 2:20)।

I. पहला, यीशु मसीह स्वयं इंसानी जाति द्वारा तिरस्कृत और अस्वीकृत
हुअे है, यशायाह 53:3।

II. दूसरा, यीशु मसीह स्वयं पूरे बाइबल का केन्द्र का विषय है,
लूका 24:25-27।

III. तीसरा, यीशु मसीह स्वयं सुसमाचार का ह्यदय, निष्कर्ष, केन्द्रिय तत्व
है, यशायाह 53:6; मरकुस 14:34; लूका 22:44;
यशायाह 52:14; 53:5; 1 पतरस 2:28।

IV. चौथा, यीशु मसीह स्वयं ही सिर्फ अनंत आनंद का मूलकारण है,
यूहन्ना 20:19,20।