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प्रयत्न करने के फायदे

THE BENEFIT OF STRIVING

डो. आर. एल हायमर्स, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल मे प्रभु के दिन की षाम
मई 30, 2010 को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, May 30, 2010

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करोः क्योंकि, मैं तुम से कहता हूॅ, कि बहुत से प्रवेष करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे” (लूका 13:24)।


सारे ख्रिस्ती अगुओं को मालूम है कि अमरिका और युरोप के कलीसिया में गंभीरता से कमी हो रही है। इसके लिये मषहूर उपाय है “प्रगतिषील” होना - गाने की सभा को “नवीनतम” बनाना, बाइबल के नये अनुवाद लाना, वहॉ के उपदेषक अपना पद छोड़े और लोग कलीसिया मे ऐसे आये जैसे वे समुद्र तट की मेजवानी के लिये तैयार होते हो। ये सारा किया जाता है क्योकि वे सोचते है कि “आधुनिक” आदमी इक्कीसवे सदीमें बदल गया है, और उन्हे आकर्शित करने के लिये जरूर “प्रगतिषील” होता है और उस मे ख्रिस्ती बनाना है।

अब, हकिकत में, इस तरह की दलीले हास्यास्पद है। डों लोयड-जोनेसने कहॉ की यह गंभीरता पूर्ण गलती है क्योंकि, आदमी जरा भी बदला नही है। जो बदलाव के बारेमे आदमी बड़ाई करता है वह सिर्फ बाहरी है। आदमी के खुद मे कोई बदलाव नहीं है, परन्तु उनके काम करने के तरीके, उनके वातावरण... आदमी आदमी के जैसे कभी नहीं बदलता। वो हमेषा की तरह विरोधाभाषी व्यक्ति रहता है जैसे वो हमेशा गिरता था (डी.मार्टीन लोयड-जोनेसे, एम.डी., ट्रुथ अनचेन्जड अनचेन्जींग, जेम्स क्लार्क प्रकाषक, 1951, पी.पृश्ठ. 110, 112)।

इसलिये, जब हम इस विशय पर आते है, लूका 13:24, हमे ये नहीं सोचना चाहिये की यह व्यक्ति हमसे कुछ अलग थ। उनके बाहरी हालत कुछ अलग थे, परन्तु वे खुद हमारे जैसे ही थे- “वो ही विरोधाभाशी व्यक्ति (जो लोग हमेषा से थे) गिरावट के समय से” जैसे डो लायड-जोनेस ने बनाया। और वैसे ही जैसे आज रात आप में से कुछ लोग, उन्होने कीतने अच्छे सुसमाचार प्रवचन सुने होंगे। जैसे मैंने पीछले रविवार की रात बताया था। उन्होने बहुतसे अवसर पर बप्तीस युहन्ना और यीषु खुद के प्रवचन सुने थ। वे सच्चाई से यीषु को कहे सकते है, “तू ने हमारे बाजारों मे उपदेष किया” (लूका 13:26)। और फिर भी वे वहॉ थे, इतने सारे श्रेश्ठ प्रवचन के बाद भी बिना बचाये। आखिरकार, मुक्ति वही है जिसके बारे में यीषु बात करते है! एक आदमी ने उनसे पूछा, “क्या वहॉ कुछ लोग है जो बचाये गये है?” और वे उस आदमी की ओर से मूडे और सारी भीड़ को कहॉ,

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करोः क्योंकि, मैं तुम से कहता हूॅ, कि बहुत से प्रवेष करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे” (लूका 13:24)।

इसलिये, मैं इसे लेता हूॅ, की आदमी का स्वभाव कभी भी बदला नहीं है, और सुसमाचार कभी भीबदला नही था, और यीषु खुद कभी बदलें नहीं थे-की ये सारे षब्द आप में से उन लोगो की तरफ इषारा करते है जो आज यहॉ है जिन्होने सुसमाचार प्रवचन बार बार सुना है बिना बचाये हुअे। इसके बारे मे गलती मत करो। पवित्र वाक्या के इस पद द्वारा, यीषु आपसे बात करते है!

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करोः क्योंकि, मैं तुम से कहता हूॅ, कि बहुत से प्रवेष करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे” (लूका 13:24)।

वो विशय मुझे आपसे यह महत्वपूर्ण प्रष्न पूछने के लिये प्रेरित करता है-क्या आप अभी भी प्रयत्न करते हो, या आपने छोड़ दिया? क्या आप अभी भी यीषु तक पहुचने के लीये मेहनत कर रहे हो, या आप सिर्फ समय पसार कर रहे हो, कलीसिया मे बैठ कर, की आप के कभी भी बचाये जाने के विचार के बिना? मैं जरूर आषा रखता हूॅ की ये सच नहीं है! मैं आशा रखता हुँ और प्रार्थना करता हूॅ की आप यीषु के आदेष को मानोगे,

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

“प्रयत्न” के लिये ग्रीक षब्द अनुवाद किया गया है वो है “अगोनाईस्थ”। इस का अर्थ है “मन से परिश्रम”, “लडाई” भी। हम इस तरह रख सकते है, “मन से परिश्रम, लडाई भी, अंदर प्रवेष करने के लिये” यीषु के पास, जो खुद “सकेत द्वार” है। इस का अर्थ है अंदर प्रवेष करके उन तक पहुँचने की हर मेहनत करें, अंदर यीषु तक पहुँचने के लिये परिश्रम।

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

मैं इसे तीन तरीके से बताता हूःॅ पहला, आपके किस के विरूध्द परिश्रम करना जरूरी है; दूसरा, शायद आपको परिश्रम करना क्यो छोड़ना पडे; और तीसरा, परिश्रम करना आपको यीषु तक जाने के लिये प्रवेष करने कैसे तैयार करता है।

I. पहला, आपको किसके विरूध्द परिश्रम करना जरूरी है।

इस परिश्रम का नकारात्मक पहलुं है। स्पश्ट है की “प्रयत्न” करने की कोई जरूरत ही नहीं है अगर आपको प्रयत्न करने के लिये सामने कोई चीज ही न हो! अगर आप किसी चीज के विरूध्द प्रयत्न या लड़ाई नही करते हो तो लडाई या प्रयत्न करने की कोई जरूरत ही नहीं है!

ये कोई सामान्य परिश्रम नहीं है। ये एक अनदेखी लडाई है, प्रयत्न जो आपके दिल और दिमाग की गहराई मे उभरता है। आधुनिक प्रवचन मे परिवर्तन के इस पहलु पर बहुत ही कम प्रभाव डाला गया है। ये अंदरूनी परिश्रम है।

ये परिश्रम खुद ष्‍ौतान के साथ का है। क्या आप ष्‍ौतान के बारे मे भूल गये हो? क्या आप सोचते हो की वो चूपचाप आकर बाजु में खडा होकर आपको बिना लडाई कीये यीषु के पास जाने के लिये प्रवेष करने देगा? लूका 9:42 पर स्पर्जनने दो धार्मिक प्रवचन दीये,

“और वह आ ही रहा था, की दृश्टात्मा ने उसे पटककर मरोड़ा” (लूका 9:42)।

कुछ भी बदला नहीं है। जैसे मैंने कहाँ, पहले, आप बाइबल के समय के लोगो से कुछ अलग नहीं हो। दृश्टात्मा ने इस युवा आदमी को पटककर नीचे फेंककर मरोड़ा, उसे यीषु तक आने से रोकने के लिये स्पर्जनने कहॉ,

(दृश्टात्माने) आती हुई आत्मा को नीचे पटककर क्यो मरोड दिया? ... क्योंकि उसे वो छोड़ना पसंद नहीं था... उसकी इच्छा थी आपके नीचे पटकने की ... आपको यीषु के पास आते हुये रोकने की, और अपनी जाल मे फंसा ने के लिये, जहाँ वो षायद आपको पूरी तरह से नश्ट कर सके (सी. एच. स्पर्जन, “घ कोमेरस कोनफिलक्ट वीथ ष्‍ोतान,” घ न्यू पार्क स्ट्रट पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1981 मे फिर से छपां हुआ, भाग II, पुश्ठ.373)।

ष्‍ौतान आपकी आत्मा का बडा षत्रु है। वो है

“... आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न माननेवालों में कार्य करता है” (इफिसियों 2:2)।

ये वो है जो

“... अविष्वासीयो के लिये, जिन की बुध्दि इस संसार मे इष्वरने अंध कर दी है” ( 2 कुरिन्थियो 4:4)।

ये है

“... तब ष्‍ौतान आकर उनके मनमे से वचन उठा ले जाता है कि कहीं ऐसा न हो कि वे विष्वास करके उध्धार पायें” (लूका 8:12)।

इसलिये, मैं आज रात आपसे कहता हूँ, की आपको “सकेत द्वार से प्रवेष करने का प्रयत्न करना चाहिये”, क्योकि दृश्टांत्मा वो सब कुछ करेगा आपको यीषु के पास आते हुए रोकने लिये जो वो कर सकता है! वो आप में से कुछ लोगो से कहेगा की बहुत देरी हो चूकी है- तब जब की आप के लिये बहुत देरी नहीं हुई होती है। वो आप मेंसे कुछ लोगो से कहेगा की यह सच्चाई नहीं है- की वहॉ पर सच्चे परिवर्तन जैसी कोई चीज ही नही है। वो आपके दिल में हर तरह के प्रष्न और षक डालेगा आपको यीषु के पास आने से रोकने के लीये। स्पर्जनने कहाँ, “बहुत बार जब आत्मा यीषु के पास आती है, ष्‍ौतान प्रबलता से बूरे विचार डालता है... वो दिमाग मे गंदे विचार डालता है” (स्पर्जन, ibid., पृश्ठ. 372)।

स्पर्जनने जब ये धार्मिक प्रवचन दिया था तब वे सिर्फ बाईस वर्श के थे, “कोमेर का ष्‍ौतान के साथ मतभेद”। उन्हे स्पश्टतासे याद है की कैसे ष्‍ौतानने उनके दिमाग मे ष्‍ौतानी विचार भर दिये थे उनके परिवर्तित होने के कुछ समय पहले। सात साल पहले, पंद्रह साल की उम्र में, उसने कहाँ, “... अेकदम से देखते हुए ये लगता था की नर्क की बाढ़ का द्वार खुल गया है... दस हजार ष्‍ौतानी आत्माए मेरे दिमाग मे उत्सव मना रही थी... चीजे जो मैने कभी सुनी नहीं थी या सोची नहीं थी वह प्रचन्डता से मेरे दिमाग मे आ गई, और मैं मुष्किल से उनकी असर का सामना कर पाया... परन्तु अगर आप डरते हो की ये हजारो विचार आपके अपने है, आप षायद कहोंगे, ‘मैं यीषु के पास जाऊंगा, और अगर ये गंदी बाते मेरे दिमाग मे है... मैं जानता हुँ की ये सारे पापों और गंदकी माफ कर दी जायेगी (उनके द्वारा)'” (स्पर्जन, ibid., पृश्ठ. 372-373)। आपको ष्‍ौतानी विचारो के विरूध्द परिश्रम करके यीषु तक जाने के लिये प्रवेष करना चाहिये!

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

परन्तु वहॉ पर और भी दुष्मन है परिश्रम के विरूध्द। आपको अपने विशयी दिमाग के दुष्मनों के विरूध्द परिश्रम करना चाहिये,

“क्योंकि षरीर पर मन लगाना तो परमेष्वर से बैर रखना है” (रोमियों 8:7)।

जब तक आप मेहसूस करना षुरू नहीं करते की, गिरावट के कारण, आपका प्रभु के साथ का सारा संबंध गलत है, आप समज नहीं सकोगे की आपका सबसे बडा दुष्मन आपखुद हो। आपका खुद का मन गलत है। पाप “कार्य की प्राथमिकता” नहीं है, इयान एच. मुरेयने कहॉ, “पापी होना पापोंसे बड़ी समस्या है। ‘षरीर पर मन लगाना तो परमेष्वर से बैर रखना है'... जब तक व्यक्ति को सच्चाई मालूम पडती है, अपने खुद के बारे मे तब तक वो सुसमाचार के निकट सच्चे आत्मा से कभी नहीं आ सकता। खुद की जानकारी के बिना वो षायद संषोधन करे, चर्चा करे और दलीले करे परन्तु इससे उसका अच्छा कभी नहीं हो सकता” (इयान एच. मुरेय, लोयड-जोनेसः कृपा का संदेष वाहक, घ बेनर ओफ ट्रुथ ट्रस्ट, 2008, पृश्ठ.74)।

आप मुडकर धुम जाओगे, “भाक्ति का भेश धरेंगे” (2 तिमुथुयुस 3:5) जब तक आप खुद मेहसूस करोगे की आपका अपना मन अंदर से पापो से भरा हुआ है। आप सिर्फ प्रष्न पुछ सकते है, नीकोडेमस की तरह। यीषु ने कहॉ, “तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवष्य है” (यूहन्ना 3:7) नीकोडेमस कुछ कह सकता था वो था, “ये बाते कैसे हो सकती है?” (यूहन्ना 3:9)। “मैं फिर से जन्म कैसे ले सकता हूॅ?” “मैं यीषु के पास कैसे आ सकता हूँ,”-ये सारे प्रष्न बताते है कि आप अभी तक अपनी खुद की जानकारी की दलीलों मे विष्वास करते हो। “मैं इस दलीलो को बाहर नीकाल सकता हूँ, अगर मुझे और थोडी जानकारी हो तो मैं जान सकता हुॅ की उन तक कैसे आ सकते है”। कोई भी व्यक्ति इस तरह बरसो तक चल सकता है, मुडकर और घुमकर, कभी भी परिवर्तित हुए बिना। जैसे इयान मुरेय ने कहाँ है, “वो षायद संशोधन करे, चर्चा और दलीले करे परन्तु ये सब उसके लिये कुछ अच्छा नही करेंगे”। बजाय चर्चा और दलीले करने के, आपको जरूर

“प्रवेश करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

आप खुद के गर्व के सामने परिश्रम करे, आपकी खुद की तीव्र अनिच्छा यीशु को देने की। अपने आपके कयामती पापी की तरह देखाने के लिये परिश्रम, जिसका मन यीशु पर विश्वास करने को, इच्छीत नहीं है, जिसका गर्व समजना चाहता है जो पापी मनुष्य नहीं समज सकता, जिसका पूरा ध्यान सिर्फ “ज्यादा सिखने” में है - बजाय उसके की वो खुद देखे वो क्या है - प्रभु का दुश्मन। क्या आपने कभी भी आपका यीशु के प्रति क्या रवैया है उस प्रश्न का सामना किया है? क्या आप मानते हो की आप उनके सामने बागी हो? क्या आप अपने आप में मानते हो की आप महेसूस करते हो की आप उनके करने से ज्यादा जानते हो? अगर नहीं, आप सच्चा परिवर्तन कभी अनुभव नहीं कर सकते। “अंदर प्रवेश करने का प्रयत्न करो”। अपने दिल और दिमाग के विरूध्ध परिश्रम करो, जब तक आप सच्चाई और इमानदारी से कहे सको, पुराने गीतो के शब्दों मे,

मैं अपने आपको, और मुझे जो भी मालूम है छोड़ता हूँ, अब मुझे धोइये, और मैं बर्फ से भी ज्यादा सफेद हो जाऊँ। (“बर्फ से सफेद” जेम्स निक्लसन द्वारा, 1828-1896)।

“सकेत दार से प्रवेश करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

II. दुसरा, शायद आपको परिश्रम करना क्यो छोड़ना पड़े।

मैं जानता हुँ की ये शायद कुछ लोगो के कान खरोचे, परन्तु सीधी सरल हकीकत अभी भी पवित्र वाक्या के पन्नो पर है। आप शायद यीशु के पास जाने का प्रयत्न करना छोड़ दे क्योेंकि आप “परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार चूने गए” (1 पतरस 1:2) नहीं हो। कौन ये कहने की हिंमत कर सकता है की चुनाव पवित्र वाक्या में नहीं सिखाया गया? चाहे हम समजे या नहीं, ये वहाँ है, बाइबल के पन्नो पर, आपके मुंह को ताकते हुए “चुने हुओं को मिला, और शेष लोग कठोर किए गए” (रोमियो 11:7)।

ये सच है की आप “परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार चूने गए” नहीं हो फिर, जरूर, आप “सकेत द्वार से प्रवेश करने का यत्न” नहीं करोगे। अगर वह आपका किस्सा है, आप बैठोगे और एक के बाद एक धार्मिक प्रवचन सुनोगे विचारों की गहराई के बिना, आपके आत्मा की परवा कीये बिना, अनन्तता के विचारो के बिना, मन मे आक्रोश के बिना, जब तक “घर का स्वामी उठकर, द्वार बन्द कर चूका हो” (लूका 13:25)।

“और द्वार बन्द किया गया। इसके बाद वे दूसरी कुँवारीयाँ भी आकर कहने लगी, हे स्वामी, हे स्वामी, हमारे लिये द्वार खोल दे। परन्तु उसने उत्तर दिया और कहाँ, मैं तुम से सच कहता हूँ, मैं तुम्हे नहीं जानता” (मती 25:10-12)।

“सकेत दार से प्रवेश करने का यत्न करोः क्योंकि, मैं तुम से कहता हूँ, कि बहुत से प्रवेश करना चाहेगे, और न कर सकेंगे” (लूका 13:24)।

द्वार बन्द होने के पहले, और आप कयामत तक “झील में मिलेगा जो आग और गन्धक से जलती रहती हैः यह दूसरी मृत्यु है” (प्रकाशितवाक्य 21:8)। अभी “अंदर प्रवेश करने का” परिश्रम करें, उसके पहले की बहुत देरी हो जाये!

“सकेत दार से प्रवेश करने का यत्न करो” (लूका 13:24)।

III. तीसरा, परिश्रम करना आपको यीशु तक जाने के लिये प्रवेश करने कैसे तैयार करता है।

पुरिटन थोमस हुकर को सविस्तार बताते हुए, “अगर आप प्रयत्न करना जारी रखोगे तो आप बचाये जाओगे।” यीशु ने कहा “स्वर्ग के राज्य मे बलपूर्वक प्रवेश होता रहा है, और बलवान उसे छीन लेते है” (मती 11: 12)। “सिर्फ बलपूर्वक कीया हुआ प्रयत्न प्रवेश कर पाता है” (ध स्कोफिल्ड स्टडी बाइबल; मती 11:12 पर टीप्पणी)। जैसे थोमस हुकर ने बताया, “अगर आप प्रयत्न करना चालु रखोगे तो आप बचाये जाओगे।” दुसरी बाजु पर अगर आप प्रयत्न करना चालु नही रखोगे, आप बचाये नहीं जाओगे!

डो. जोन एस. वोलड्रीप ने मुजे पीछले हफते कुछ कहाँ था जा मैंने पहले कभी नही सोचा था। उन्होने कहॉ, “आपका प्रयत्न करना जरूर निष्फल होना चाहिये! फायदा निष्फलता में है।” उनका ये कहने का अर्थ क्या था? ये एक गहरा मुदा है, और कई दिनो तक सोचने वाला फायदा निष्फलता में है।” आप देखीये, जब आप अपने दिल और दिमाग से प्रयत्न करते है - और निष्फल होते है - ये शायद आपको लायेगा, आखिरकार, आपके अपने अंत तक। तब आप शायद योना के साथ कहेंगे,

“जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया” (योना 2:7)।

जब आपकी आत्मा प्रयत्न करने के भार से थककर मूर्छित होती है तब आप शायद जानोगे की यीशु हमेशा सच थे, जब उन्होने वो अद्भुत शब्द कहे जिसे आपने अभी तक अनसून किया है,

“सब परिश्रम करनेवाले और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ; मैं तुम्हे विश्राम दूँगा” (मती 11: 28)।

(संदेश का अंत)
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ार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा की गई प्रार्थना।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गया हुआ गीतः
“माफ न करने वाला पाप” (लेखक अनजान;
“ओ सेट यु ओपन अनटु मी” की तर्ज पर)।


रूपरेखा

प्रयत्न करने के फायदे

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

“सकेत द्वार से प्रवेष करने का यत्न करोः क्योंकि, मैं तुम से कहता हूॅ, कि बहुत से प्रवेष करना चाहेंगे, और न कर सकेंगे” (लूका 13:24)।

(लूका 13:26)

।. पहला, आपको किसके विरूध्ध परिश्रम करना जरूरी है, लूका 9:42; इफिसियो 2:2; 2 कुरिन्थियो 4:4; लूका 8:12; रोमियो 8:7; 2 तिमुथियुस 3:5; युहन्ना 3:7,9।

॥. दुसरा, शायद आपको परिश्रम करना क्यो छोड़ना पडे, 1 पतरस 1:2;
रोमियो 11:7; लूका 13:25; मती 25:10-12; प्रकाशितवाक्य 21:8।

॥।. तीसरा, परिश्रम करना आपको यीशु तक जाने के लिये प्रवेश करने कैसे तैयार करता है, मती 11:12; योना 2:7; मती 11:28।