Print Sermon

इन संदेशों की पांडुलिपियां प्रति माह २२१ देशों के १,५००,००० कंम्प्यूटर्स पर इस वेबसाइट पते पर www.sermonsfortheworld.com जाती हैं। सैकड़ों लोग इन्हें यू टयूब विडियो पर देखते हैं। किंतु वे जल्द ही यू टयूब छोड़ देते हैं क्योंकि विडियों संदेश हमारी वेबसाईट पर पर पहुंचाता है। यू टयूब लोगों को हमारी वेबसाईट पर पहुंचाता है। प्रति माह ये संदेश ३७ भाषाओं में अनुवादित होकर १२०,००० प्रति माह हजारों लोगों के कंप्यूटर्स पर पहुंचते हैं। उपलब्ध रहते हैं। पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। आप यहां क्लिक करके अपना मासिक दान हमें दे सकते हैं ताकि संपूर्ण संसार जिसमें मुस्लिम व हिंदु भी सम्मिलित है उनके मध्य सुसमाचार फैलाने के महान कार्य में सहायता मिल सके।

जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net .




यीशु के पुत्रत्व का सबूत!

THE PROOF OF CHRIST’S SONSHIP!

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल मे प्रभु के दिन की सुबह,
मई 16, 2010 को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, May 16, 2010

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने के कारण, सामर्थ्य के साथ परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।


ख्रिस्ती साहित्य के डो. वीलबर एम. स्मीथ के गहरे ज्ञान के लिये मैं उनकी बहुत प्रसंशा करता हूँ, और उनकी फुलर धार्मिक पाठशाला को 1963 मे छोडने की इमानदारी को, जैसे वो बाइबल की आंतरिक्ता से मूडे और उदार दल के सिध्धांत को अपनाना शुरू किया (हेरोल्ड लिन्डसेल को देखिये, पीएच. डी., ध बेटल फोर ध बाइबल, 1978 की प्रत, पृ. पृष्ठ. 110-112)। डो. स्मीथ ने रोमियो 1:4 के बारे मे समजनेवाला प्रश्न पूछा, “मुझे ताज्जुब है की क्यो हमारे श्रेष्ठ प्रवक्ताओने कभी भी प्रवचन नहीं दीया, या कम से कम कभी धार्मिक प्रवचन प्रकाशित भी नहीं किया इस वि�वासपात्र - भरोसेवाले पाठ पर?” (वीलबर एम. स्मीथ, डी. डी., धेरफोर स्टेन्ड, कीटस प्रकाशन, 1981 प्रत, पृष्ठ. 583)। मुझे लगता है की इसका कारण शायद वो हकीकत में है जो यहाँ पर पीछले 125 सालों में यीशु के पुनरूत्थान पर बहुत कम प्रवचन हुअे है, खासकर के “निर्णायक्ता” के खडे होने से। सी. जी. फिनेय के समय से, धार्मिक प्रवचन ज्यादातर मनुष्य और मनुष्य क्या करता है को अपर्ण किये गये है। इन दिनो में, प्रवक्ता ध्यान देते है की चाहे प्रभुकी बाते पीछे रह जाये। उसके बदले, वे मनुष्य के काम पर प्रकाश डालतें है। इसलिये ख्रिस्ती धर्म प्रचार के सुसमाचार आज बडे पैमाने पे मनुष्य जाति के विज्ञान के बारे मे हे, बजाय प्रभु के विषय के बारे में, ख्रिस्ती धर्म के विज्ञान के बजाय मनुष्य जाति के उद्भव और समाज के बारे में, यीशु के विषय के बजाय मानसशास्त्र, यीशु - केन्द्रित के बदले मनुष्य - केन्द्रित बन गया है।

सारे धार्मिक प्रवचन सिवाय एक, जो प्रेरितो की किताब में दर्ज किया गया था, पुनरूत्थान को केन्द्र मे रख कर। प्रेरितो यीशु के पुनरूत्थान के विषय के बिना प्रवचन नहीं दे सकते थे! वे जो भी प्रवचन देते थे ये उसके सुसमाचार के हदय मे होता था। आज, कैसे भी, अगर यीशु का जिर्क किया जाता है, उसे इस्टर के रविवार की सुबह पर डाल दिया जाता है। फिर भी, याजक कभी कभी उसके सिध्धांतो पर प्रवचन करते है।

उनकी किताब में, क्राइस्टलेस क्रिस्टानीटी, डो. मायकल हार्टन बताते है की इस्टर का प्रवचन कितने सारे रूठिवादी कलासिया मे ज्यादातर “यीशु अपनी बाधाओं से कैसे पार आये और इसलिये हम (वो बताते हुए) सुसमाचार प्रवचन ऐसे (मुफ्त) है जैसे आज झटपट मनोविज्ञान, राजनिति या उपदेश के बारे में बात करते है बजाय सुसमाचार के” (मायकल हार्टन, पीएच. डी., क्राइस्टलेस क्रिस्टानीटी : ध अल्टरनेटीव गोसपल ओफ ध अमेरिकन चर्च, बेकर बुक्स, 2008, पृ. 30)। आश्चार्य से, डो. आर. ए. टोरेय, जिसकी मैं प्रशंसा करता हूँ, उनकी मशहूर किताब यीशु के लिये कैसे काम करें (फलेमींग एच. रीवेल, एन. डी.)। डो. टोरेयने प्रवचनकारों के लिये 156 पन्नो की धार्मिक प्रवचन की रूपरेखा दी है, परन्तु उनमेंसे एक भी रूपरेखा पूरी तरह यीशु के पुनरूत्थान को समर्पित नहीं की गई है! जरूर आज हालात बहुत खराब है!

आज के आधुनिक गीतसंग्रह के तपास से मुझे पता चला की सिर्फ करीब 10 त्रीत है यीशु के पुनरूत्थान पर। उन सबमें से एक बीसवीं सदी के पहले लिखा गया था। दो अठारवी सदी में लिखे गये थे, तीन उन्नीसवी सदी में, एक सोलहवी सदी में, एक सत्तरवी सदी में, एक पंदरवी सदी में, और दो आठवी सदी में! 20वी सदी में पुनरूत्थान पर पोल राडर द्वारा लिखा गया “फिर से जिवीत” हकीकत मे एक ही अच्छा गीत है, परन्तु मेरी जानकारी मे ये कोई भी गीतसंग्रह मे नही दिख रहा है। आप मुझे पी. ओ. बोक्स 15308, लोस एंजलिस सीए 90015 पर लिख सकते हो और पोल राडर के गीत के शब्द और संगीत की तर्ज के लिये पूछ सकते है। फिर से, मुझे लगता है की पुनरूत्थान पर आधुनिक गीनों की कमी ये दिखाते है की सारे जरूरी विषय लंबे समय से अनदेखा किये गये थे, फिनेय के दिनो से। यीशु है,

“पवित्रता की आत्मा के भाव से मरे हुओं में से जी उठने... परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

परन्तु मुश्किलसे कोई इस पर प्रवचन करता है, और हम ज्यादातर इसके बारें मे नहीं गाते! कोई भी ताजुब्ब नहीं है की पश्चिमी विश्व के कलीसिया सुख रहे है और मुर्झा रहे है! मृत्यु से उठे यीशु पर बिना विश्वास के यहाँ पर पुनःजन्म की कोई आशा नहीं है, और ना ही कोई जिवीत संदेश - आधे से ज्यादा सुसमाचार भूले गये है - हमारे प्रवचन से अधिकतम निकाल दिये गये है! प्रभु हमारी मदद करें!

मैंने पता किया है की वहाँ तीसरे विश्व मे ज्यादा सही तरीके से खास तौर पर महत्व दिया गया है मृत्यु से उठे यीशु को जैसे हम युरोप और अमरिका में देते है उससे धर्म बढ रहा है परन्तु यहाँ बंधा हुआ है!

मैं इ-मेल द्वारा युवा आदमी से संपर्क कर रहा था उसकी बीसवी में जो तीसरे विश्व के देश से आता है। वो बाते करते है “बहुत ज्यादा जुल्म मेरे बचपन में (मुझे पाने की कोशिष) मे ख्रिस्ती धर्म पर विश्वास को छोडने के लिये करते थे। मैं मदद के लिये रोया, परन्तु कोई नहीं आया, और मैंने बहुत (ख्रिस्ती) बरबाद होते हुए देखे...बच्चे सताये जाते (थे) और भारत के, म्यानमार, के आश्र्रम मे रखे जाते थे, बारबार बिजली के झटके देते थे यीशु को छोडने के लिये...मैं उनमे से एक बच्चा हुँ। ” जब मैंने वो पढा मैं रोया। हमे एसे बच्चे और छोटे युवान यहाँ अमरिका मे, या पश्चिम मे सामान्य तौर से कहाँ मिल सकते है? ये युवा आदमीने कहाँ की वो और दूसरे बच्चे पुनरूत्थान हुअे यीशु से मीले। जब उन्होने मृत्यु से उठे यीशु का अनुभव किया उन्हे पता चला की वे प्रभु के पुत्र थे। फिर कितना भी जुल्म, बीजली के झटके के साथ या मार कुछ भी उन्हे यीशु को छोडने के लिये नहीं मना सके। वे जानते थे की वो जिवीत थे - मृत्यु से उठे हुअे। उससे वे सच्चे ख्रिस्ती बने! और यही है जो प्रेरितो पौलुसने हमारे पाठमें कहा है। यीशु है,

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने...परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

“घोषणा करने” का ग्रीक शब्द अनुवाद किया है जिसका मतलब है “विशेष”, “फर्क दिखाना” (स्ट्रोन्ग रु 3724)। यीशु विशेष थे, अलग थे, जैसे प्रभु के पुत्र उनके मृत्यु से पुनरूत्थान द्वारा। 1599 की जिनीवा बाइबल कहती है “दिखाया और स्पष्ट किया गया” (रोमियो 1:4 टीप्पणी रु 1)। यीशु “दिखाये और स्पष्ट किये गये” प्रभु के पुत्र थे उन्के मृत्यु से पुनरूत्थान द्वारा,

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने...परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

।. पहला, यीशु प्रभु के पुत्र होने की घोषणा कैसे की थी।

ये उनके शिक्षण द्वारा पहले नही था। उन्होने कई अच्छी चीजें सीखाई थी माउन्ट धार्मिक प्रवचन को मीलाकर। परन्तु उनका सिर्फ सिखाना साबित नही करता की वे प्रभु के पुत्र थे। नाही उनके चमत्कार, ना तीन लोगो को मृत्यु से उठाना भी नही। पुराने नियमवाली के समय में भविष्यवेता एलिय्याह ने एक लडके को मृत्यु से उठाया था और वो प्रभु का पुत्र नहीं था (1 राजाओं 17:17-24)। अेलीसा ने एक बच्ची को मृत्यु से उठाया था (2 राजाओं 4:32-37) परन्तु अेलीसा प्रभु का पुत्र नहीं था। मोझेस ने बहुत सारे चमत्कार किये, लाल समन्दर के भाग अलग किये, परन्तु वो प्रभु का पुत्र नहीं था। एक मात्र निशानी जो यीशु के प्रभु का पुत्र होने की घोषणा करते है वो है अपने खुद के देह का पुनरूत्थान। यीशुने खुदने कहाँ की उनका पुनरूत्थान एक निशानी थी जो उन्होने सारे शैतानी युग को दी,

“परन्तु उसने उन्हे उत्तर दिया, इस युग के बुरे और व्याभीचारी लोग चिन्ह ढुँढते हैं; परन्तु योना भविष्यवेता के चिन्ह को छोड कोई और चिन्ह उनको न दिया जायेगा : योना तीन रात दिन जल - जन्तु के पेट मे रहा : वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात दिन पृथ्वी के भीतर रहेगा” (मती 12:39-40)।

यीशु को मृत्यु दि गई क्योंकि उन्होंने बडे याजक को कहाँ था की वो प्रभु का पुत्र था (मती 26:63-66)। जैसे उन्हे क्रूस पर लटकाया गया प्रधान याजक ने उनकी हँसी उडाई, कहते हुअे,

“उसने परमेश्वर पर भरोसा रखा है; यदि वह इस को चाहता है, तो अब इसे छुडा ले ः क्योंकि इसने कहा था, मैं परमेश्वर का पुत्र हूँ” (मती 27:43)।

परन्तु प्रभु ने अपनी मंजुरी दिखाई यीशु को अपना पुत्र बताने उनको मृत्यु से उठा के। यीशु थे,

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने...परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

परमेश्वरने तीसरे दिन उन्हे मृत्यु से उठाकर उनको अपना पुत्र होने की घोषणा की!

॥. दूसरा, यीशु के प्रभु के पुत्र होने की घोषणा क्यों की गई थी।

डो. चार्ल्स होडझ (1797-1878), प्रिन्सेस थीयोलोजिकल धार्मिक पाठशाला के नये नियमावली के लंबे अरसे के प्राध्यापकने, कहाँ,

sजब तक यीशु मृत्यु से नहीं उठे थे तब तक उनके प्रभु के पुत्र होने के सबूत अधूरे थे, या प्रेरितों को उनकी पूर्णता का महत्व पता नहीं था... ये तो पुनरूत्थान द्वारा उन्होने साबित किया प्रभु के पुत्र होने का... (बहुत से) गद्य (पवित्र वाक्या के) में यीशु के पुनरूत्थान को आखरी सबूत माना जाता है उस सच्चाई का जोे यीशुने सिखाई है, और उनके सारे दावों की पुष्टता का... जैसे यीशु ने सरेआम घोषणा की थी खुद के प्रभु के पुत्र होने की, उनका मृत्यु से उठना उनके घोषणा की सच्चाई पर प्रभु की महोर थी। उन्होने मृत्यु की ताकत में भी चालु रखा, प्रभु वहाँ पर उनके पुत्र होने के दावे को (नकारते); परन्तु जैसे ही वे मृत्यु से उठे, उन्होने सरेआम उनको सच्चाई को माना, कहते हुअे, तुम मेरे बेटे, इस दिन मेंने ये घोषणा की (चार्ल्स होडझ, पीएच. डी., रोमियो पर संभाषण, घ बेनर ओफ ट्रुथ ट्रस्ट, 1997 प्रत, पीपी. 20-21; रोमियो 1:4 पर टिप्पणी)।

इसलिये, यीशु का प्रभु के पुत्र होनेका सबूत उनके पुनरूत्थान द्वारा दिया गया, और बाकी जो भी उन्होंने सिखाया उसे तपासकर देखा।

डो. विलबर स्मीथने कहाँ की यीशु का पुनरूत्थान विश्वास दिलाता है

...सच्चाई का, यीशु की सारी बातचीत का अवलंबन। (जब वे उठे थे) फिर से कब से (जैसे उन्होने भविष्यवाणी की थी वैसे ही वे उठे) और ये भविष्यवाणी सच हुई, फिर मुझे हमेशा लगने लगा की और जो भी अपने प्रभु ने जब भी कहाँ है वह जरूर सच होना चाहिये... जब हमारे परमेश्वर ने कहाँ की जो कोई भी उनमे विश्वास रखेगा उसे हमेशा अनन्त जीवन मिलेगा, और जो उनमे विश्वास रखने से मना करेगा वो हमेशा का लिये अपराधी ठहरेगा, उन्होने सच कहाँ था... हम कभी भी यीशु का पुनरूत्थान स्वीकार नही कर सकते और उनके मुहसे बोली हुई उनकी सच्चाई पर शक करते है (स्मीथ, धेरफोर स्टेन्ड, पइपक., पी. पृष्पु 418-419)।

यीशु ने अपने चेलो से कहाँ,

“फिर, उसने बारहों को साथ ले जाकर उनसे कहाँ, देखो, हम यरूशलेम को जाते है, और जितनी बाते मनुष्य के पुत्र के लिये भविष्यवक्ताओं के द्वारा लिखी गई है वे सब पूरी होंगी। क्योंकि वह अन्य जातियो के हाथ में सौंपा जाएगा, और वे उसे ठठ्ठों मे उड़ाएगें और उसका अपमान करेंगे और उस पर थुंकेगे : और उसे कोड़े मारेंगे और घात करेगेे : और वह तीसरे दिन जी उडेगा” (लूका 18:31-33)।

यीशु ने लूका 18:31-33 में जो भी भविष्यवाणी की थी वो सारी सच हुई। उनकी हंसी उडाई, कोडो से मारा गया, उन पर थूका गया, नोंचा गया और क्रूस पर मृत्यु दि गई। परन्तु उनके क्रूस पर चढ़ाने के तीन दिन बाद वे मृत्यु से उठे। यीशु की अपने खुद के बारे मे भविष्यवाणी का सच होना ये विश्वास दिलाता है उन्हे की हर बातो की सच्चाई का जो उन्होने कही थी, इसलिये वे थे

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने...परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

क्योंकि वे मृत्यु से उठे, वैसे ही जैसे के उन्होंने कहाँ था, हम जरूर मान सकते है उनका ये कहना सच था जब उन्होंने कहाँ,

“जब तक तुम न फिरो... तुम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे” (मती 18:3)।

हमे ये शब्द बहुत गंभीरता से लेने चाहिये क्योंकि वो पुनरूत्थान पाये हुअे प्रभु के पुत्र के मुहँ से आये है। क्या आप परिवर्तित हो? क्या आप जरूर कहे सकते हो की आप परिवर्तित हो? प्रभु के पुत्र कहते है की आप “स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं पा सकते” अगर आप परिवर्तित नहीं हो। ओह, आपको आपके परिवर्तन के बारें में कितनी गंभीरता से सोचना है! कितने जतन से आपको ये देखना है की आप परिवर्तित हो!

मृत्यु से उठे प्रभु के पुत्र ये भी कहाँ,

“मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ : बिना मेरे द्वारा, कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6)।

उन्होने जो भी कहाँ है उसे आप कितनी गंभीरता से सुनते हो! आप कितने उत्सुक हो उसके पास आने के लिये और बचाये जाने के लिये! आप कितने परवाह हो अपने दिमाग से अंधश्रध्धा और जूठी धार्मिक मान्यता ओ को नीकालके,े और सिर्फ यीशु पर आधार रखनेे के लिये - इसलिये उन्होने कहाँ “कोई मनुष्य पिता के पास नही जा सकता, सिवाय मेरे द्वारा।”

फिर से, मृत्यु से उठे प्रभु के पुत्र ने कहाँ,

“जो कोई मेरे पास आएगा उसे मैं कभी न निकालूँगा” (यूहन्ना 7:37)।

ओह, आप कैसे “अंदर प्रवेश पाने का प्रयत्न” कर सकते हो उनके पास जाने के लिये! (लूका 13:24)। आप कितने परवाह और विचारशील हो सकते हो यीशु के पास आने के लिये। याद रखीये की उन्होने कहाँ है,

“सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दषे हुए लोगो, मेरे पास आओ ः मैं तुम्हे विश्राम दूंगा”(मती 11:28)।

हम प्रार्थना करते है की आप पुनःजिवीत प्रभु के पुत्र को सुनेगें। हम प्रार्थना करते है की आप सीधेे उनके पास आओगेे, ताकि आप अपने पापो से शुध्ध हो सके उनके लहू से जो उन्होने क्रुस पर बहाया था - और उनके पुनःजिवीत जीवन द्वारा बचाये जा सको। उन्हे सुनीये! वो जो कहते है उसे मानीये! सीधे उनके पास आओ और बचाये जाओ वैसे ही जैसे उन्होने आपको करने का कहाँ - क्योंकि वे है

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने...परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

(संदेश का अंत)
आप डॉ0हिमर्स के संदेश प्रत्येक सप्ताह इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं क्लिक करें
www.realconversion.com अथवा www.rlhsermons.com
क्लिक करें ‘‘हस्तलिखित संदेश पर।

आप डॉ0हिमर्स को अंग्रेजी में ई-मेल भी भेज सकते हैं - rlhymersjr@sbcglobal.net
अथवा आप उन्हें इस पते पर पत्र डाल सकते हैं पी. ओ.बॉक्स 15308,लॉस ऐंजेल्स,केलीफोर्निया 90015
या उन्हें दूरभाष कर सकते हैं (818)352-0452

ये संदेश कॉपी राईट नहीं है। आप उन्हें िबना डॉ0हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते
 हैं। यद्यपि, डॉ0हिमर्स के समस्त वीडियो संदेश कॉपीराइट हैं एवं केवल अनुमति लेकर
ही उपयोग में लाये जा सकते हैं।

धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढ़ा गया पवित्र वाक्या : लूका 18:31-34।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गया हुआ गीत :
“उठाओ, उठाओ अपनी आवाजें अभी” (जोन एम. नीले द्वारा, 1818-1866)।

(संदेश का अंत)
आप डॉ0हिमर्स के संदेश प्रत्येक सप्ताह इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं क्लिक करें
www.realconversion.com अथवा www.rlhsermons.com
क्लिक करें ‘‘हस्तलिखित संदेश पर।

आप डॉ0हिमर्स को अंग्रेजी में ई-मेल भी भेज सकते हैं - rlhymersjr@sbcglobal.net
अथवा आप उन्हें इस पते पर पत्र डाल सकते हैं पी. ओ.बॉक्स 15308,लॉस ऐंजेल्स,केलीफोर्निया 90015
या उन्हें दूरभाष कर सकते हैं (818)352-0452

ये संदेश कॉपी राईट नहीं है। आप उन्हें िबना डॉ0हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते
 हैं। यद्यपि, डॉ0हिमर्स के समस्त वीडियो संदेश कॉपीराइट हैं एवं केवल अनुमति लेकर
ही उपयोग में लाये जा सकते हैं।

धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढ़ा गया पवित्र वाक्या : लूका 18:31-34।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गया हुआ गीत :
“उठाओ, उठाओ अपनी आवाजें अभी” (जोन एम. नीले द्वारा, 1818-1866)।


रूपरेखा

यीशु के पुत्रत्व का सबूत!

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

“पवित्रता की आत्मा के भाव से, मरे हुओं में से जी उठने के कारण, सामर्थ्य के साथ परमेश्वर का पुत्र ठहरा है” (रोमियो 1:4)।

।. पहला, यीशु के पुत्र होने की घोषणा कैसे की थी, 1 राजाओं 17:17-24;
2 राजाओं 4:32-37; मती 12:39-40; 26:63-66; 27:43।

॥. दूसरा, यीशु के पुत्र होने की घोषणा क्यो की थी, लूका 18:31-33;
मती 18:3; यूहन्ना 14:6; 6:37; लूका 13:24; मती 11:28।