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यीषु के पुनरूत्थान के तीन सबूत

THREE PROOFS OF CHRIST’S RESURRECTION

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बेप्टीस टबरनेकल मे प्रभु के दिन की सुबह,
अप्रैल 18, 2010 को दिया गया धार्मिक प्रवचन.
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, April 18, 2010

“राजा भी जिसके सामने मैं निडर होकर बोल रहा हूँ, ये बातें जानते हैः और मुझे विष्वास है कि इन बातों में से कोई उससे छिपी नहीं; क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।


प्रेरितो लुका के 26 वे पाठ में पौलुस के परिवर्तन का सबूत तीसरी बार लिखा गया है। लूका का यह तीन बार देने का कारण समझना बहुत आसान है। यीषु की मृत्यु और पुनरूत्थान के अलावा कोई घटना ख्रिस्ती धर्म के इतिहास में प्रेरितो पौलुस के परिवर्तन के अलावा ज्यादा महत्वपूर्ण नही है।

पौलुस की धरपकड हुई क्योंकि उन्होने प्रवचन दिया,

“...यीषु के नाम, जो मर गया था, और उसको पौलुस जीवित बताता था विवाद करते थे” (प्रेरितों 25:19)

और पौलुस खडा हुआ, उसके जंजीरसे बंधे हुअे हाथों के साथ, राजा अग्रीपा के सामने। अग्रीपा खुद यहूदी थे। इसलिये पौलुसने बचाव किया जो उसने यीषु के पुनरूत्थान के बारे में पूराने नियमावली की भविश्यवाणी के आधार पर प्रवचन दिया था। पौलुस ने अपने आपके बचाव मे ये भी कहाँ की राजा अग्रीपा पहलेसे यीषु के क्रुस पर चढाने और उनके पुनरूत्थान के बारे में जानते थे। क्रुस पर चढाना और पुनरूत्थान लगभग तीस साल पहले हुआ था। हर यहूदी ये जानता था, राजा अग्रीपा को मीला कर। इसलिये पौलुसने कहाँ,

“...राजा भी जिसके सामने मैं निडर होकर बोल रहा हूँ, ये बातें जानते हैः और मुझे विष्वास है कि इन बातों में से कोई उससे छिपी नहीं; क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

“यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई।े” ये दिन का सामान्य ग्रीक भाव था। डॉ. गेबेलीयन की टीप्पणी कहती है,”

पेलेस्टीन मे यीषु की सेवा अच्छी तरह जानी जाती थी, और अग्रीपाने इसके बारें में सूना होगा। यीषु की मृत्यु और पुनरूत्थान अच्छी तरह प्रमाणित था, और ख्रिस्ती सुसमाचार अब तीन दषकोसे प्रमाणित हुआ है। राजा को इसकी जानकारी जरूर थी, “क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (घ अेक्सपोझीटर की बाइबल टीप्पणी, फ्रेंक ई. गेबेलीयन, डी.डी., जनरल एडीटर, झोन्डरवान प्रकाषन घर, 1981, भाग 9, पृश्ठ.554; प्ररितो 26:25-27 पर टीप्पणी)।

बहुत लोग आज ये सोचते है की यीषु का पुनरूत्थान कोई अधूरी धुंधली घटना है जो कुछ नादान मछवारो को ही मालूम है। परन्तु सच्चाईसे कुछ दूर नहीं होता है! यीषु का पुनरूत्थान ईझरायल के हर यहूदी को मालूम था, और इसके बारे में पूरे रोमी जगत में करीब तीस साल से बाते हो रही थी! यीषु का पुनरूत्थान कोई राझ नही रखा था!

“क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

डॉ. लोन्सकीने कहाँ,

यीषु के बारे में जो कुछ भी कहा गया था वो विष्व के हर जगह काम आया, और सन्हेड्रीन और (रोमी प्रधान) पिलातुस भी इसमे सामिल थे, और यीषु राश्ट्रीय व्यक्ति थे, जिसकी प्रसिध्धिने आसपास की जगह को भी भर दिया था। “कोने मे नहीं”... कोई छोटा अधूरा मामला नही था जिसके बारे में काई कुछ ना जान सके, परन्तु घटना जो इतनी भव्य और जरूरी है, इसलिये जनता और दूर पहोचने वाले, वो (राजा) अग्रीपाने अपना सारा राजकिय ध्यान इस पर देकर उपकार किया (आर.सी.एच.लेन्सकी, डी.डी., प्ररितो के प्रेरित कामो का अनुदान, अगसबर्ग प्रकाषन घर, 1961 प्रत, पृश्ठ. 1053;प्रेरितों 26:26 पर टीप्पणी)।

“क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

यीषु के दूष्मनोके पास तीन दषक थे ये साबित करने की वह मृत्यु से नही उठे। और फिर भी वे निश्फल हुअे। कोई बात नहीं चाहे कितनी भी उन्होने कोषिश की, दुष्मन ये साबित करने मे निश्फल हुअे की यीषु अपने क्रुस पर चढाने के बाद मृत ही रहे थे। जब तक पौलुसने राजा अग्रीपा से बात की, हजारो यहूदी और हजारो अन्य जातियों के लोग, घोशणा कर रहे थे, “यीषु मृत्यु से उठे थे।”

यीषु का पुनरूत्थान ख्रिस्ती धर्म की नींव है। अगर यीषु का षरीर कब्रसे न उठा होता, तो ख्रिस्ती धर्म के विष्वास के लिये काई आधार नही है। प्ररितो पौलुस ने खुद कहा,

“यदि मसीह नहीं जी उठा तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है, और तुम्हारा विष्वास भी (व्यर्थ) है” (1 कुरिन्थयों 15:14)।

कोई ताजुब नही है की यीषु के दुष्मनोने बहुत कोषिश की उनके पुनरूत्थान को गलत साबित करने के लीये! और फिर भी वे सारे निश्फल हुअे। मैं ग्रेग लाऊरी के साथ बहुत विशयो पर सहमत नहीं हूँ, परन्तु यीषु के पुनरूत्थान के बारे मे मै उनसे सहमत हूूँ। ग्रेग लाऊरीने यीषु के दूष्मनो के निश्फल होने के तीन कारण दिये-यीषु मसीह के मृत्यु से पुनरूत्थान के तीन सबूत (ग्रेग लाऊरी, पुनरूत्थान क्युं? टायनडेल हाऊस प्रकाषन, 2004, पृश्ठ 13-24)। मै उसे सविस्तार बताने जा रहा हूूँ।

“क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

I.   पहला, खाली कब्र।

यीषु के पुनरूत्थान का पहला सबूत है खाली कब्र। यीषु की कब्र उनके मृत्यू के तीन दिन बाद खाली थी वह हकीकत एक बडा सबूत है उनके पुनरूत्थान का। चार सुसमाचार के सभी लेखक इस बात से सहमत है कि यीषु कब्र उनके मृत्यु के तीन दिन बाद खाली थी। और भी कई गवाहने खाली कब्र की हकीकत को जांचा था।

यीषु के पुनरूत्थान के विरूध्द सबसे पुरानी टीका वो है कि किसीने यीषु की कब्र से उनकी लाष को चुराया था। प्रधान याजक

“...सिपाहीयो को बहुत चाँदी देकर कहाँ यह कहना कि रात को जब हम सो रहे थे... तो उसके चेले आकर, उसे चुरा ले गये और यदि यह बात हाकिम के कान तक पहुचेगी तो हम उसे समझा लेंगे और तुम्हें जोखिम से बचा लेंगे अतः उन्होंने रूपये लेकर, जैसा सिखाए गए थे, पैसा ही किया यह बात आज तक चहूदियों में प्रचलित है” (मती 25:12-15)।

परन्तु ये दलील बहुत से लोगो को मान्य नहीं सामान्य ज्ञान आपको बतायेगा की चेलोने उनकी लाष नही चुराई और दिखावा किया की उनका पुनरूत्थान हुआ है। तीन दिन पहले जब यीषु को पकडकर क्रुस पर चढ़ाया गया तब उनके अपनी जान बचाने वहाँ से भाग गये थे। ये नामुमकीन है की ये डरपोक लोगो को यीषु की लाष चुराने की हिंमत हो - और फिर हिंमत से प्रवचन दे के वे मृत्यु से उठे थे - अपने प्राणो के जोखम पर! ना, ये अेकदम बेमतलब की दलील है! हकीकत इस से जरा भी मेल नही खाती। चेले अपने कमरे के दरवाजे बंद करके छुपे हुए थे, “यहुदीयो से डर के मारे” (यूहन्ना 20:19)। वे अचंबे मे थे। वे नही मान रहे थे की वे फिर से उठेगे। किसी भी यीषु के माननेवालो मे ये हिंमत नही थी की वे षक्तिषाली रोमी साम्राज्य को चुनौती ये और यीषु की लाष चुराये। ये मानसिक हकिकत है जिसे अनदेखा नही कर सकते।

सिर्फ अेक आषंका, की जिसने यीषु की लाष चुराई वो थे उनके दुष्मन। ये बात से परेषानी ये थी की यीषु के दुष्मनो के पास कब्र से लाष चुराने के लिये कोई कारण नही था। प्रधान याजको और दूसरे धार्मिक नेताओने यीषु को मृत्यु दी क्योंकि उन्होने उनके धार्मिक रिवाज और जीवन जीने की रीत को धमकी दी थी। इन लोगो को आखरी बात ये ही चाहिये थी की लोग सोचे के यीषु फिर से जिवीत थे। इसीलिये धार्मिक नेता पुनरूत्थान के सारे सबूत मिटाने लंबे रास्ते गये। मती का सुसमाचार हमे कहता है की वे रोमी प्रधान, पोन्टीयस पिलातुस के पास गये,

“हे महाराज, हमे स्मरण है कि उस भरमानेवाले ने जब वह जीवित था, कहा था, मैं तीन दिन बाद जी उठूँगा। अतः आज्ञा दे कि तीसरे दिन तक कब्र की रखवाली की जाए, ऐसा न हो कि उसके चेलो आकर उसे चुरा ले जाएँ, और लोगों से कहने लगे, वह मरे हुओ मे से जी उठा है; तब पिछला धोखा पहले से भी बूरा होगा”
     (मती 27:63-64)।

पिलातुसने उनसे पहरूओ को ले जाओ और “अपनी समज के अनुसार रखवाली” करने को कहाँ - पहरूओ को कब्र के पास रखो और षक्य उतनी षक्ति से सुरक्षित करो (मती 27:65)। विस्मयजनक, यह लगता है की ये प्रधान यजक और धार्मिक नेताओंको यीषु के पुनरूत्थान पर उनके अपने चेलो से ज्यादा आत्मविष्वास था।

सच्चाई ये है की धार्मिक नेताओने यीषु के लाष को चोरी से बचाने के लिये बहुत मजदूत सावधानी ली थी। उन्हे यीषु के मृत्यु से उठने के वचन को जुडा साबित करना था। धार्मिक नेताओने यीषु के मृत्यु से उठने की सारी कहानियां और बातो को बंद करने की पुरी कोषिश की। लाष को चुराने का काम उनके दुष्मनो का षायद आखरी काम होता। परन्तु अगर उन्होने लाष चुराई होती, वे निसंदेह ही सामने लाये जाते जब चेलोने उनके पुनरूत्थान पर प्रवचन देना षुरू किया। परन्तु यीषु के दुष्मनोने कभी लाष पेष ही नहीं की। क्यों? क्योंकि उनके पास पेष करने के लिये लाष थी ही नही! कब्र खाली थी! यीषु मृत्यु से जी उठे थे!

“यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)

खाली कब्र यीषु के मृत्युसे पुनरूत्थान का पहला सबूत था, परन्तु और भी सबूत है!

II.  दूसरा, चष्मदीद गवाह का वृतांत।

जब यीषु क्रुस पर चढाये गये थे, उनके चेले निराष हुए थे। उनका विष्वास तूट चूका था। उन्हें उनके फिर से जिंदा होने की आषा ही नही थी। फिर यीषु आये,

“और उनके बीच में खडा होकर, उनसे कहा, तुम्हे शांति मिले” (यूहन्ना 20:19)।

चेलोने उन्हे बार बार जिवीत देखा।

“उसने दुःख उठाने के बाद बहुत पक्के प्रमाणोंसे अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हे दिखाई देता रहा” (प्रेरितों 1:3)।

प्ररितो पौलुस ने कहाँ जी उठे यीषु थे,

“कैफा (पतरस)” को, तब बारहो को दिखाई दियाः फिर वह पाँच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया... फिर वह, याकूब को दिखाई दिया; तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया। सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया” । (1 कुरिन्थियो 15:5-8)।

डॉ. जोन आर. राईसने कहा,

ध्यान से सोचिये ये कितना न रूकनेवाला गवाह थे जो करीबन सेकडों लोगो का जिन्होने यीषु को पुनरूत्थान के बाद देखा था, उनमेंसे किसीने चालीस दिनो समय मे बार बार देखा ! (प्रेरितों 1:3)। बाइबल के कायदे से “दो या तीन गवाह के मुख मे।” यहा सेकडो गवाह थे। कुछ व्यक्तियोने एक या दो गवाह की घोशणा पर जबरजस्त विरोध का मरणप्राय प्रयास किया।

निर्णयात्मक पंच के सामने खास मामले को सुलझाने के लिये सिर्फ बारह लोगो की मौखिक संमति चाहिये। यह करीबन सेकडो लोगोने चष्मदीद गवाही दी की यीषु मृत्यु से जी उठे थे। कोई एक आदमी भी दिखा नही जो कहे की उन्होने तीसरे दिन के बाद उनकी लाष देखी, नाही कोई विरोध कोई भी प्रमाण में।

उन गवाहो की - चष्मदीद गवाहोंकी घोशणा, गवाह जिन्होने तारणहार को संभाला था, उन्हे छुआ था, किल के निषान उनके हाथ और पैरो मे मेहसूस किये थे, उन्हे खाते हुए देखा, चालीस दिनो तक उनके साथ रहे-वो घोशणा एक मजबूत प्रमाण था किसी और प्रमाण जो अमरिका की सर्वोच्च अदालत या दुनिया की किसी भी ओर अदालत कोई मामले के लिये चाहिये... ये प्रमाण इतना पक्का न रूकने वाला था की सिर्फ वो ही लोग जो विष्वास नही करते और प्रमाण देखते नही वो ही इससे मना करते है। कोई ताजुब्ब नही की बाइबल ये घोशणा करते है की यीषु “उसने दुःख उठाने के बाद बहुत से पक्के प्रमाणें से अपने आपको जीवित दिखाया,” प्रेरितों 1:3 (जोन आर. राईस, डी.डी., यीषु मसीह का पुनरूत्थान, स्वार्ड ओफ घ लोर्ड प्रकाषक, 1953, पृ. पृश्ठ 49-50)।

“क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

खाली कब्र, और सेकडो चष्मदीद गवाह, यीषु के मृत्यु से पुनरूत्थान के पक्के सबूत है। परन्तु कई और भी है।

III.  तीसरा, प्रेरितो की षहीदी।

अगर पुनरूत्थान जुठ था तो हर प्रेरितोने क्यो इतनी तडप से गुजरकर भी उसकी प्रषंसा की? प्रेरितोने सिर्फ यीषु के पुनरूत्थान पर प्रवचन देना चालु नही कीया, मना करने की बदले मरे भी ! जैसे हम कलीसिया का इतिहास पढते है हमे पता चलता है के हर एक प्रेरितो (यूहन्ना के अपवाद के साथ - जिसको यातना देकर देषनिकाल दिया था) बहुत भयानक मृत्यु मरे क्योंकि उन्होने प्रवचन दिया था की यीषु मृत्यु से फिर जी उठे है। डो. डी. जेम्स केनेडीने कहा,

ये अतिआवष्यक खास हकिकत है। मनोषास्त्र के इतिहास मे ये कभी नही जाना था की व्यक्ति जो जानता था की जो उन्हे मालूम है वह जूठ है फिर भी अपनी जान देने तैयार है। मुझे ताजुब्ब होता था के परमेष्वरने सारे प्ररितो और सारे पहलेके ख्रिस्तीयो को तडपसे गुजरने दिया, कितना भयानक, न मान सकनेवाली यातना... हमारे पास विष्वास है, मजबूत व्यक्ति, तडप और इन गवाहों की मृत्यु, जिसमे ज्यादातर लोगोने अपने लहू की मोहर लगाकर घोशणा की... पौलुस लीटलने कहा,
    “इंसान जिसे सच्चाई मानता है उसके लिये मरता भी है... वे नही, कैसे भी, जो जानते थे की जुठ है उसके लीये मरे” (डी. जेम्स केनेडी, पीएच.डी., मैं क्युं मानु, थोमस नेल्सन प्रकाषक, 2005 प्रत, पृ.47)।

ये लोग मरे क्योंकि उन्होने कहा की वे यीषु की मृत्यु से लेकर पुनरूत्थान के गवाह हैः

पतरस-जिसे बूरी तरह नोंच कर क्रुस पर उल्टा टांग दिया।
 अन्द्रियास- x जैसे क्रुस पर चढाया गया।
   याकूब, जब्दी का बेटा-सिर काटा गया।
     यूहन्ना- उबलते तेल की कढाई में डाल कर फिर पतमोस के टापु पर भेजा गया।
       फिलिप्पुस- नौच कर क्रूस पर चढाया गया।
         बरतुल्मै- जिंदा (चमडी) उधेडकर क्रुस पर चढाया गया।
           मती-सिर काटा गया।
             याकूब, प्रभु का भाई - मंदिर के षिखर से फेंका
               गया और फिर मरने तक मारते रहे।
                तदै-तीर से निषाना बना कर मारा।
                  मरकूस-मृत्यू आने तक घसीटा गया
                    पौलुस-सिर काटा गया।
                      लुका-जौतुन के पेड पर लटका दिया गया।
                        थोमा-भालो के बीच से दौडाकर,
                          और भट्ठी की आग मे डालदिया।

( घ न्यु कोन्फररंस बुक ओफ मार्टीयर, ब्रीज-लोगोस प्रकाषक, 1997, पृ.पृ.5-10; ग्रेग लाऊरी, पुनरूत्थान क्यू? टायनडेल हाउस प्रकाषक, 2004, पृपृ19-20)।

ये लोग भयानक तडपसे गुजरे, और भयानक मृत्यु पायी, क्योंकि उन्होने कहा था की यीषु मृत्यु से जी उठे थे। लोग जो देखा नही है उसके लिये नही मरते है! इन लोगोने यीषु को कब्रसे उठने के बाद देखा था! इसी लिये यातना और खुद मृत्यु उनको ये घोशणा करने से नही रोक सकी की, “यीषु अपनी मृत्युसे जी उठे है!”

पतरस उनका सिर काटा वहा किनारेेपर,
सागरके पास उनके साथ रवाया;
यीषु कहते थे, जबानसे एक बार मृत,
“पतरस, क्या तुम मुझे प्रेम करते हो?”
वो जो मृत थे वे फिर से जीवित है!
वो जो मृत थे वे फिर से जीवित है!
तुटा हुआ मजबूत, बर्फीला मृत्यु की मजबूत पकड-
वो जो मृत थे वे फिर से जिवीत है!
(“फिर से जीवित” पौलुस राडर द्वारा, 1878-1938)।

ये लोग न मानने वाले कायरोंसे भयरहित षहीदमें बदल गये- क्योंकि उन्होने यीषु को कब्र से उठने के बाद देखा!

थोमाने उनका सिर काटा कक्ष के अंदर,
उन्हे उनके गुरू और परमेष्वरने बुलाया,
उनकी ऊंगलिया आगे छिद्रोमें डाली
जो कील और तलवारो से बने थे।
वो जो मृत थे वे फिर से जिवीत है!
वो जो मृत थे वे फिर से जिवीत है!
तुटे हुअे मजबूत, बर्फीली मृत्यु की मजबूत पकड
वो जो मृत थे वे फिर से जिवीत है! (पौलुस राडर, ibid)।

पौलुस राडर द्वारा दिया गया भजन मै अपने कलीसियामे गाने के लिये कैसे सीखु! अगर आप मुझे लिखते हो और इसके लिये वीनंती करोगे तो मैं तुम्हे संगीत भेजुंगा। मुझे लिखने के लिये लिखीये डो.आर.एल.हायमर्स, जुनि., पोस्ट बोक्स नंबर 15308, लोस एंजलिस, सीए 90015- और पौलुस राडर का गाना “फिरसे जीवित” के संगीत के लिये वीनंती किजीये।

हम यीषु के पुनरूत्थान के और भी प्रमाण जमा कर सकते है, परन्तु ये आपको मना नहीं सकता। कुछ लोग जिन्होने यीषु को उनकी मृत्यु के बाद उठते देखा उन्हे अभीतक “षंका” है (मती 28:17)। आपको यीषु के पास विष्वास से आना चाहिये। अगले मानवीय यीषु ने कहा,

“तुम मुझे ढूंढोगे, और पाओगे, भी क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे” (यिमयाह 29:13)।

“क्योंकि धार्मिकता के लिये मन से विष्वास किया जाता है” (रोमियो 10:10)।

मैने जी उठे हुअे यीषु को 10:30 बजे सुबह में मेहसूस किया, सप्तंबर 28, 1961 को बाओला महाव़िद्यालय (अब विष्वविद्यालय) के सभागृह में डो. चार्ल्स जे. वुडब्रीज के प्रवचन सुनने के बाद वे जिन्होने 1957 मे फूलर थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला छोडी, आरंभ के उदार दलके सिध्दांत के कारण (देखिये हेरोल्उ लिन्डसेल, पीएच.डी, घ बेटल फोर घ बाइबल, झोन्डरवान प्रकाषन घर, 1978 प्रत, पृ.111)। और आप जी उठे यीषु को भी जान सकते हो-अगर आपको उनके बारे मे पूरा जानना है तो “सकेत द्वार से प्रवेष करने का दल यत्न करो” (लूका 3:24)। जब आप यीषु के पास आते हो तो आपके पाप उनके लहू से चूका दिये जाते है और षुध्द कीये जाते है-और आप उनके मृत्यु से पुनरूत्थान से फिर से जन्म लेते हो। ये मेरी प्रार्थना है की आप जल्द ही यीषु के पास आयेंगे! आमेन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डो. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढ़ा गया पवित्र वाक्या : यूहन्ना 20:24-31
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जानिन कीनकेड ग्रीफिथ व्दारा गाया हुआ गीतः
“फिर से जीवित” (पौलुस राडर द्वारा, 1878-1938)।


रूपरेखा

यीषु के पुनरूत्थान के तीन सबूत

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि द्वारा

“राजा भी जिसके सामने मैं निडर होकर बोल रहा हूँ ः ये बातें जानते हैः और मुझे विष्वास है कि इन बातों में से कोई उससे छिपी नहीं; क्योंकि यह घटना किसी कोने मे नहीं हुई” (प्रेरितों 26:26)।

(प्रेरितों 25:19; 1 कुरिन्थियो 15:14)

I.    पहला, खाली कब्र, मती 28:12-15; यूहन्ना 20:19;
मती 27:63-64, 65, 66।

II.   दुसरा, चष्मदीद गवाह का वृतांत, यूहन्ना 20:19, प्रेरितो 1:3,
1 कुरिन्थियो 15:5-8।

III.  तीसरा, प्रेरितो की षहीदी, मती 28:17; यिर्मयाह 29:13; रोमियो 10:10; लूका 13:24।