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आत्मा के कार्य का मुरझाना

THE WITHERING WORK OF THE SPIRIT

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बेप्टीस टबरनेफल मे प्रभु की सुबह, मार्च 14, 2010
को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, March 14, 2010

“बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर। और उसने कहा, मैं क्या प्रचार करूँ? सब प्राणी घास है, और उनकी षोभा मैदान के फूल के समान हैः जब यहोवा की साँस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता हैः निसंदेह प्रजा घास है। ाास तो सुख जाती, और फूल मुर्झा जाता हैः परन्तु हमारे परमेष्वर का वचन सदैव अटल रहेगा” (यषायाह 40:6-8)।


“बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर।” ये क्या आवाज थी जिसने भविश्यवक्ता से बाते की? ये “यहोवा का मुख” था, पांचवे पदमे बोला गया था। प्रभु की आवाज यषायाह से बोली और कहा, “प्रचार कर।” डॉ. गीलने बताया, “यह आवाज यहोवा की भविश्यवक्ता को या किसी और को और हर सुसमाचार सेवक, उनको भविश्यवाणी और प्रवचन देने का आदेष देते है (जोन गील, डी.डी., पुराने नियमावली का 6 भागो मे प्रदर्षन] घ बेप्तीस स्टान्डर्ड बरेर, 1989 मे फिर से छापा गया, भाग 5, पृश्ठ. 222)।

तब यषायाहने कहा, “मै क्या प्रचार करूँ?” यही तो सवाल प्रवक्ताके दिमाग मे आता है जब वे हर रविवार के धार्मिक प्रवचन देने की तैयारी करते है- “मे क्या प्रचार करूँ?” “प्रचार कर” के लिये इब्रानियो षब्द है क्वारा। ये “बहार बुलाने” की तरकीब है, “प्रस्ताव रखना और (सामने-सामने मिलना) जो भी व्यक्ति को मिले” (स्ट्रोंग # 7121)। ये वही इब्रानियो षब्द है जो यषायाह 58:1 में वापरा गया है,

“गला खोलकर पुकार, कुछ न रख छोड़, नरसिंगे का सा ऊँचा षब्द कर; मेरी प्रजा को उसका अपराध अर्थात याकूब के घराने को उसका पाप जता दे” (यषायाह 58:1)।

हर सुसमाचार प्रचार के प्रवक्ता को उनका प्रवचन कुछ रीत और तरीके से देने का आदेष दिया गया था। सहसा, ये रीत और तरीका हमारे दिनों मे उपयोग नही होता था। परन्तु ये रीत और तरीका यषायाह और पुराने नियमावली के सब भविश्यवक्ताओ का था। ये रीत और तरीका बप्तिस यूहन्ना, यीषु के पहले यीषु के बारे मे बोलनेवाले का था। बप्तिसने फिर से इस पद को यषायाह मे बताया जब उसने कहा, “मै एक प्रचार करनेवाले की आवाज हूॅ” (यूहन्ना 1:23)। बप्तिस यूहन्ना प्रभु की आवाज थे, और ये प्रभु ही थे जो उसके द्वारा प्रचार करते थे, जैसे प्रभुने भविश्यवक्ता यषायाह के द्वारा किया, जिसके बारेमें यूहन्नाने प्रस्तुत किया,

“(यूहन्ना) कहा, मै जंगलमे एक पुकारनेवाले का षब्द हूँ... जैसे यषायह भविश्यवक्ताने कहा है” (यूहन्ना 1:23)।

यूहन्ना 1:23 में “प्रचार करना” का ग्रीक अनुवाद षब्द था बोआओ। इस का अर्थ है “हालु; जैसे (वह है) चिल्लाकर... प्रचार करे” (स्ट्रॉन्ग, # 994)। इसलिये, इब्रानियो षब्द प्रचार करे से, हम सिखते है “गला खेलकर पुकार” (यषायाह 58:1)। इस का अर्थ है की प्रवक्ता को जोर से प्रभु की आवाज के जैसे बोलना चाहिये। ग्रीक षब्द आगे कहता है, प्रवक्ता को जोरसे प्रचार करने के लिये जैसे “हालू” “चिल्लाकर और प्रचार करो” उन पापीयोको जो इस दूनिया जंगलमे खो गये है!

वे जोर से चिल्लाकर प्रवचन करने की रीत भविश्यवक्ता द्वारे उपयोग की गई थी, जिसने प्रभु का संदेषा प्रचार किया, जैसे यषायाह और बप्तिस यूहन्ना ने किया, उनको “बाहर बुलाने” के लिये, मिलना “(सामना करना)” के सुननेवाले प्रभु के वचन के साथ जिसके मन को प्रभुने खोला है। परन्तु जैसे मैने कहॉ की प्रवचन देनेका यह तरीका हमारे दिनो में प्रचलित नही था। अब वहा प्रवचन देने की रीत और पध्दति को बाइबल के सिध्धांत का ठीक से माना नही जाता, इसलिये हमे भविश्यवाणीसे कहा गया,

“वचन का प्रचार कर... क्योंकि ऐसा समय आएगा जब लोग खरा उपदेष न सह सकेंगे; पर कानो की खुजली के कारण, अपनी अभिलाशाओं के अनुसार अपने लिये बहुत से उपदेषक बटोर लेंगे” (2 तीमुथियुस 4:2-3)।

मैं बाइबल मे दिये अटल भविश्यवाणी के पद के बारे मे सोच नही सकता जो बहुत आधुनिक धार्मिक प्रवचन को अच्छी तरह बता सके। हमारे दिनो मे हमेषा “सिखाना” होता है, परन्तु “प्रवचन करना” बहुत कम - “सिखाना” बीना तात्कालिकता और अगन क्योंकि आधुनिक धार्मिक प्रवचन के पास ऐसा दृश्टांत नहीं है जिसने यषायाह से कहा, “गला खोलकर पुकार, कुछ न रख छोड़,” नाही कोई ऐसा आधुनिक धार्मिक प्रवचन का जरीया जो प्रभु की आवाज जिसने यषायाह से कहा, “प्रचार कर;” नाही ये प्रभु की आवाज जो यीषु के द्वारा कहती है यूहन्ना के सातवे पाठ मे, जब यहोवाने “पुकार के कहां... मंदिर मे” (यूहन्ना 7:28); नाही ये यही पाठ में यीषु के जैसे, जब वो “खडा हुआ और पुकार कर बोला” (यूहन्ना 7:37)। नाही यह पतरस के प्रवचन देने का तरीका है, पिन्तेकुस के दिन पर, जिसने पुकारा और उसके सुननेवालो को “प्रस्ताव करे (सामने सामने बोलना),” प्रभु ने जो वचन दिये थे उसे चिल्लाकर बताना, जैसे हमे प्रेरितो 2:14 मे कहा गया है,

“पतरस, उन ग्यारह के साथ खड़ा हुआ, ऊंचे षब्दोसे कहने लगा, और उनसे कहाँ ...” (प्रेरितो 2:14)।

डॉ गीलने कहाँ, ‘और ऊंचे षब्दो मे कहने लगा', ताकि दो षायद बहुत से लोगो द्वारा सुना जाये... आत्मा की धुन और उत्साह, और मन की दृढता को प्रदर्षित करने; आत्मा के साथ ऊँचेसे सामर्थ्य पाने, वह भयरहित था मनुश्योसे” (जॉन गील, डी.डी., नये नियमावली का प्रदर्षन, घ बप्तीस स्टान्डर्ड बरेर, 1989 मे फिरसे छापा गया, भाग II, पृश्ठ. 153-154 प्रेरितो 2:14 पर टीप्पणी)। इसलिये, मुझे फिरसे कहना चाहिये, आज के अपने कई तख्तो पर प्रभु के मूल सिध्दांत की आज्ञा भंग प्रवचन करने की ष्‍ौली और तरीको में!

हमें ये ध्यान मे लेने से नहीं चूकना चाहिये की ये आधुनिक सेवकोने (खास कर अमरिका और युरोप) यह हकीकत को अनदेखा किया है कि वहॉ “पुकारना” बाहर और “मीलना (सामना करना)” का भान होना चाहिये सुनने वालो को यह संदेष के साथ “बोलने वाले की आवाज” हकीकत मे प्रभु की है, बाइबल के प्रवचन से। “बोलने वाली आवाजने कहाँ, प्रचार कर।” यही तरीका है सच्चे सुसमाचार प्रवचन का! इससे छोटा कुछ इस्तेमाल नही हों सकता प्रभरु को मृत मन और मंद दिमाग को चलाने के लिये! उससे कुछ कम ये नही कर सकता! कोई ताजुब नही है की पष्चिमी विष्व में हमारे दिनोमे बहुत कम सच्चे परिवर्तन होते थे! ब्राायन एच. अेडवर्डने कहाँ, “प्रेरणात्मक प्रवचन करने मे ये ताकत और अधिकार है जो परमेष्वर के वचन को दिल और दिमाग पर हथोडे जैसे ठोक देता है। यही है जो आज के हमारे अधिकतम प्रवचन में गैरहाजिर है। जो लोग प्रेरणात्मक तरीकेसे प्रवचन देते है वे हमेषा निर्भय और उतावले होते है” (ब्रायन एच. अेडवर्ड, रीवाइवल! प्रभु के साथ जुडे हुए लोग, सुसमाचार प्रचार छापखाना, 1997 अध्याय, पृश्ठ. 103)।

फिर यषायह ने पूछा, “मैं क्या प्रचार करूँ?” जैसे मैने कहा, की ये प्रवक्ता की मुष्किल स्थिति है चुनाव करने की जैसे वे अपनी रविवार के धार्मिक प्रवचन की तैयारी करते हैः “क्या प्रचार करू?” एक युवा आदमीने याजको की प्रषिक्षण महाविद्यालय के प्राध्यापक को सुना जिन्होने कहा छ महीने के धार्मिक प्रवचन की तैयारी पहले ही करनी चाहिये। जो आदमी ऐसा करता है मै उसके प्रयोजनसे पूरी तरह नफरत करता हूूँ! जो व्यक्तिी वो करता है वो कभी सच्चा, प्रभु का दिया हुआ धार्मिक प्रवचन नही पा सकता है! ये संभव नही है! स्पर्जन, सभी बप्तीस प्रवक्ताओमे सबसे श्रेश्ठ, ने कभी वो नही किया। उसने हर हफ्ते आदेष देने के लीये यहोवा की प्रतीक्षा की। इस लिये प्रवक्ताओको प्रभुसे उनके धार्मिक प्रवचन के लिये पूछना चाहिये, और उन्हे ये देने के लिये प्रभु को प्रतीक्षा करनी चाहिये!

“मै क्या प्रचार करूँ?” डॉ लोयड जोनेसने कहा,

आदेष क्या है? वो है “जो मेरे पास है” (प्ररितो 3:6), ये वहाँ तक सिमित है। ये ही है जो मुझे मिला... मुझे ये मिला, ये मेरे हस्तगत किया गया। मैं अपने विचार और तुक्के नही लाता... मुझे जो दिया जाता है मै वही आगे पहोचाता हूँ। मुझे ये दिया गया और मैने ये उनको दिया। मै वाहन हूँ, मैं पथ हूँ, मै एक यंत्र हूँ, मै एक दूत हूँ (डी. मार्टीन लोयड-जोनेस, एम.डी., प्रवचन देना और प्रवक्ता, झोन्डेरवान प्रकाषन घर, 1971, पृश्ठ. 61)।

मेरे लंबे-अरसे के कलीसिया के अधिकारी, षिक्षक और सलाहकार डॉ टीमोथी लीनने कहाँ,

कलीसिया के अधिकारीयो की सारी जिम्मेदारी मे से, सबसे मुष्किल और सबसे जरूरी काम है जानना, निसंदेह, आदेष जो प्रभु चाहते है वो अपने हर यहोवा के दिन मे प्रवचन मे दे (टीमोथी लीन, पी.एच.डी, कलीसिया की प्रगति का राज, एफसीबीसी, 1992, पृश्ठ. 23)।

यही हमारे पास है यषायाह चालीस, पद छः “बोलनेवाली आवाजने कहाँ, प्रचार कर। और उसने कहाँ, मै क्या प्रचार करूँ?” इसी तरह कलीसिया के अधिकारी को ये पाकर और अपना धार्मिक प्रवचन देना है। ये पाठ षायद तीन मुख्य मुदे बांटा जाता है।

I.   पहला, हमें जींदगी की संक्षिप्तता पर प्रचार करना चाहिये।

“बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर। और उसने कहाँ, मै क्या प्रचार करूँ? सब प्राणी घास है, और उनकी षोभा मैदान के फूल के समान है” (यषायाह 40:6)।

“सब प्राणी घास है, और सारी षोभा (सारा प्यार और भव्यता) इसलिये फूल के मैदान समान है।” ये एक जरूरी चीज है प्रवचन देने के लिये! हमें आपको ये कहना चाहिये की आप घास जैसे हो, या फूलोंके जैसे जो बारिष मे बहारो के समय मैदानमे उगते है। जल्दी ही उनकी जींदगी चली जाती है। ये कितना जल्दी होता है! ये लगता है कि हमारी जवानी हमेषा रहेंगी, परन्तु वो जल्द ही चली जाती है। मैं अपने जीवन मे मुड़ के देखता हूँ, सात दषको मे एक साल कम, और ऐसा लगता है की ये सात महिनोमे पसार हो गये! और ये हो आपके साथ भी होगा। गर्मीयोका सूरज उपर चढता है। घास कथ्थई हो जाती है। फूल सूख कर मर जाते है। जीवन सफर, अस्थायी, क्षणिक, छोटी और कम जीनेवाली है। प्रेरितो याकूब यषायाह मे इस भाग को देखते है एक को अपनी जीवन कारकीदी और वैवाहिक चीजो के पीछे भागने की मूर्खता बताने।

“परन्तु धनवान ... नीची दषाः क्योंकि वह घास के फूल की तरह जामा रहेगा। क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है, और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उसकी षोभा जाती रहती हैः इसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल मे मिल जाएगा” (याकूब 1:10-11)।

बहुत कम लोगों को हमेंषा ये ज्ञान होता है। वे पहोचते है और इस दुनिया में आगे बढने के लिये अपनाते है बीना ये जाने के क्या हकीकत मे लगता है- ये आप के सोचनेसे पहले खत्म हो जायेगा। सी.टी. स्टड (1860 - 1931) कुछ धनवान लोगोमेंसे एक थे उनके दिनोमे जिन्होने वो देखा। उसे बडा भविश्य अपने वारसे मे मिला, परन्तु उसने ये सब दे दिया और खुद ख्रिस्ती धर्म की प्रषिक्षण षाला मे चले गये - पहले चीन और फिर आफ्रिका। और ये सी.टी. स्टड थे जिन्होने कहाँ,

सिर्फ एक जिंदगी,
    “बुनाई जल्द ही भूतकाल बन जायेगी;
सिर्फ यीषु के लिये जो करेंगे
   वही रहेगा।

मैं कैसे आषा रखु की हर युवा व्यक्ति सी.टी. स्टडके बारेमें पढेंगे, और उनकी जींदगी के जैसे जीये! और क्यो नही, जब “सब प्राणी घास है, और सारी षोभ फूलो के मैदान जैसा?” आह, अगर आप सिर्फ इसका सत्य ही देखोगे!

सिर्फ एक जिंदगी,
    “बुनाई जल्द ही भूतकाल बन जायेगी;
सिर्फ यीषु के लिये जो करेंगे
   वही रहेगा।

जल्द ही आप ये धरती से चले जायेंगे और आपकी आत्मा प्रभुके सामने अदालत में खडी होंगी। आप अपनी आत्मा के अलावा कुछ नहीं ले जाओगे। परन्तु आप वह नही रख पाओगे अगर आप परिवर्तित नही हो! सीधे सरल संभव षब्दोमे, यीषुने कहाँ,

“यदि काई नये सिरे से न जन्मे, तो वह परमेष्वर का राज्य देख नहीं सकता” (यूहन्ना 3:3)।

आपके लिये यह जरूरी है कि आप फिर से जन्म ले। नही ंतो आप अपनी आत्मा को खो देंगे-हंमेषा के लिये, और लंबे अरसे के लिये। “परन्तु” कोई कहते है, “यहाँ बहुत जरूरी चीजे है जो मुझे करनी ही चाहिये।” जैसे एक लडकीने बताया, “जींदगी बुलाती थी”। आप के लिये मुझे यीषु के दो उत्तम सवाल प्रस्तुत करने चाहियेः

“यदि मनुश्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? मनुश्य अपने प्राण के बदले क्या देगा?” (मरकुस 8:36-37)।

“सब प्राणी घास है, और उनकी षोभा मैदान के फूल के समान है” (यषायाह 40:6)।

इसलिये हमे प्रचार करना चाहिये और सदा जींदगी की संक्षिप्तता पर प्रवचन करना चाहिये!

II.    दूसरा, प्रभु की आत्मा के कार्य के मुरझाने पर हमें प्रचार करना चाहिये।

महेरबानी करके सातवा पद जोरसे पढीये।

“जब यहोवा की साँस उस पर चलती है तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; निःसंदेह प्रजा घास है” (यषायाह 40:7)।

डॉ गीलने कहॉ,

परिवर्तन के समय यहोवा को आत्मा की सांस मनुश्य की सारी षोभा पर फैलती है... और इसी कारण लोगो का अच्छापन मुरझाता (है); प्रभु की आत्मा प्रदर्षित करती है (उनको) की उनकी पवित्रता सच्ची पवित्रता नही है; की सिर्फ उनकी मनकी सच्चाई दिखती है... लोगोके आगे; और उनका धर्म और अच्छाई सिर्फ एक तरीका (है); और उनका अच्छा काम न्याय और बचाव के लिये कम (है), और (उनको) स्वर्ग मे लाओ; जिस पर वे खो जायेंगे और (उनके) सम्मान मे (खुद) मर जायेंगे, कौन (जब वे परिवर्तित है) उनको गिनेगा परन्तु नुकसान और कीचड़ (गील, ibid., पृश्ठ. 223)।

इसीको स्पर्जन कहते है “आत्मा के कामका मुरझााना” (सी.एच.स्पर्जन, (घ मेट्रोपोलीटन टबरनेफल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1971 मे फिर से छापा गया, भाग XVII, पृश्ठ. 373-384)। जैसे उनके सूत्रधार डॉ.गीलने किया, स्पज्रनने कहा की यषायाह 40:7 बताते है पवित्र आत्मा का आपको मुरझाना, ताकि आपकी आत्मा सूख जाये और उसकी मजबूरी, पाप और निराषा देखे बीना तारणहार के।

“जब यहोवा की साँस उस पर चलती हैः तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता हैः निःसन्देह प्रजा घास है” (यषायाह 40:7)।

स्पर्जनने कहा,

प्रभु की आत्मा, पवनके जैसी, आपके आत्माके मैदानसे जरूर गुजरनी चाहिये, और (कारण आपकी) सुंदरता सुखनेवाले फूलो के जैसे दिखती है। उसे (आप) पापो की सच्चाई माननी ही चाहिये... ताकि (आप) देख सको (आपके) गीरता हुआ स्वभाव खुद ही भ्रश्टाचार है (स्पर्जन, ibid., पृश्ठ. 375)।

यही है पवित्र आत्मा का मुरझाता हुआ काम! ये प्रभु की आत्मा का वो काम है, जो आपकी जूठी आषाओं को सूखा देता है, आपको मुत्युकी भयानक सच्चाई दिखाते है और आषाके अपने स्वभावका भ्रश्टाचार, आपके दिमागसे सारी आषायें सूखा देता है, और आपको ये दिखाते है की आपकी सच्ची आषा सिर्फ यीषुमे ही है, आपका रक्तसे लथपथ प्रतिनिधि।

जब पवित्र आत्मा आपकी आत्मा को “मुरझाती है”, आप देखेगे की आपकी वो कही गई “अच्छाई” वे गंदे चीथरे के अलावा कुछ नही है। आप देखोगे की आप जो धार्मिक चीजे करते हो वह सिर्फ दिखावा है; कि आप जो भी “अच्छी” चीजे करते है उसमे कोई भी आपको पवित्र प्रभु की नजरमे न्याय नही दिला सकता है; की आपने अब तक ऐसा कुछ नही किया है जो प्रभुके सामने मान्य हो; क्योंकि आपकी मान्यता बाइबल के षब्दों के साथ दिमागी करार के अलावा कुछ नही है; कि यह सबमें कुछभी आपको परमेष्वर की नज़रमें न्याय दिला सके; आपने जो कुछ किया है, और करते हुए थक गये हो, आपको प्रभु के गुस्से के दिन न्याय की अगनसे बचा नही सकते!

जब आप पवित्र आत्माके मुरझानेवाले कार्यसे गुजरोगे तब आपको ये सब कुछ स्पश्ट होगा। एक लड़कीने कहाँ, “मै अपने आपसे इतनी निराषा महसूस करती हूँ।” इसके कुछ समय बाद वो परिवर्तित थी। दूसरी लडकीने कहाँ, “मै अपने आपसे नाखुष हूँ।” वह कहीं की न रही। डॉ. केगन और मैंने उसे समझाया की उसे “नाखुष” होने से ज्यादा कुछ सेहसूस करना चाहिये। जैसे वो लडकी जो परिवर्तित हुई, उसे “निराषा” मेहसूस करनी चाहिये। जब तक वो मेहसूस करती है, अंदर बहुत भीतरसे, की वह पूरी तरह अपने आपसे निराष है, वह मुरझाना अनुभव नही कर सकेगी और आंतरिक बेचैनी जो सच्चे परिवर्तित लोगोमे बहुत सामान्य है।

“मुरझाना” षब्द बहुत खास है। आपको जानना चाहिये इसका मतलब क्या है अगर आप को समझाना है कि क्या होने की षुरूआत हो रही है आपमेंसे कुछ लोगोको। यषायाह 40:7 मे “मुरझाना” षब्द, अनुवाद किया है वो षब्द इब्रानियो षब्दसे आता है जिसका मतलब है, “षरमिंदा होना... सूख जाना (पानी के जैसे) या मुरझाना (पौंधे के जैसे) ... षरमिंदा हो... गलत साबित हो... सूख जाओ” (स्ट्रोन्ग को कोन्करडन्स # 3001)।

“जब यहोवा की साँस उस पर चलती हैः तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता हैः निःसंदेह प्रजा घास है” (यषायाह 40:7)।

ये आपके मनमे हुआ होगा। प्रभु की आत्मा को आपकी जुठी आषाओंको और आपका अपने आप पर के विष्वास को मुरझाना ही चाहिये। प्रभु की आत्मा आपके आत्मविष्वास को रुक्ष करके, जलाके, सुखाना चाहिये, जब तक आपका हृदय बिना पानी के सूखे हुए फूलो की तरह - जब तक आप अपने विद्रोही स्वभावसे “पराजीत”, उलझे हुए, लज्जित और “षरमिंदा” हो। जैसे उस लडकीने परिवर्तित होने के कुछ क्षण पहलेही कहा, “मै अपने आपमें इतना निराष महसूस करती हूँ।” वोही पवित्र आत्मा का मुरझाने का काम है, ये नही है कि वो अपने आपसे “नाखूष” थी, परन्तु ये की वह अपने आपसे “निराष” थी। यही होता है सच्ची जागृतता मे, सच्चे आत्म विष्वासमे।

“जब यहोवा की साँस उस पर... तब घास सूख जाती है, और फूल मूर्झा जाता है” (यषायाह 40:7)।

इयान एच. मुरेचने कहाँ,

अच्छे बुरे की पहचान पहले आनी जरूरी है, ‘हर एक मुँह बँद किया जाए, और सारा संसार परमेष्वर के दन्ड के योग्य ठहरे' (रोमियो 3:19)। यह सच है, डॉ.जे.एच. थोर्नवेल के सारांष को मानना चाहिये, ‘प्रवचन देनेका सबसे सफल तरीका वो है जो पापोके विष्वास और मूल सिध्दांत लक्ष करें' (इयान एच.मुरेय, पुरानी सुसमाचार प्रचार पध्दतिः पुरानी सच्चाई नयी जागृतता के लिये, घ बेनर ओफ ट्रुथ ट्रस्ट, 2005, पृश्ठ. 7)।

“मैं क्या प्रचार करूँ?” “मैं क्या प्रवचन करूँ?” मुझे जींदगी की संक्षिप्तता पर प्रवचन करना चाहिये। मुझे प्रभु की आत्मा के मुरझानेवाले काम पर प्रवचन करना चाहिये। वो काम सुसमाचार प्रचारक का है! वह काम प्रवक्ता का है! परन्तु वहाँ पर एक और मुदा है, जीसमें बहुत ही कम छुं सकता हूँ।

III.    तीसरा, हमे यीषु के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए।

खडे रहे और जोर से पढीये अपनी किताब, यषायाह 40:8 का आखरी पद।

“घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता हैः परन्तु हमारे परमेष्वर का वचन सदैव अटल रहेगा” यषायाह 40:8)।

आप बैठ सकते हो।

प्रेरितो पतरसने वो पद से प्रस्तुत किया। उन्होने कहा,

“परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है। और यही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था” (1 पतरस 1:25)।

अन्नत, नित्य प्रभु का वचन, दिव्यतासे प्रभावित पवित्र वाक्या, मुरझाये हुअे पापी को बताओ, सुसमाचार द्वारा - अपने यहोवा यीषु मसीहको। यीषु आपके पापों का दंड चूकाने के लिये मरे। आपको जीवन देने के लिये वे मृत्युसे उठे। उनका रक्त आपके सारे पापो को धो सकता है!

जब आप अपने आपसे निराष होते हो, तब हमें आपको तारणहार बताना जरूरी है! षायद तब आप परिवर्तित हो सकते हो। तब आप षायद उनकी बाहोंको पकडकर और आपके पापोसे दूर उनके पास ले जा सकते है। जब वो होता है, यीषु आपसे कहेंगे,

“मैं उन्हे अन्नत जीवन देता हूँ; वे कभी नश्ट न होंगी” (यूहन्ना 10:28)।

यीषु की ओर मुड़ीये! आप उनके द्वारा हमेषा के लिये और सारी अन्नतता के लिये बचा लिये जाओगे, अंतरहित विष्व। आमेन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डॉ. क्रेगटन एल.चान द्वारा पढा गया पवित्र वाक्याः 1 पतरस 1:18-25।
धार्मिक प्रवचन के पहले डॉ. बेन्जामिन कीनकेड ग्रिफिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
“आओ, पवित्र आत्मा, स्वर्गके परिन्दे (डॉ. ईसाफ वोटस द्वारा, 1674-1748;
“ओ सेट थी ओपन अन टु मी” के राग पर)।


रूपरेखा

आत्मा के कार्य का मुरझाना

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि द्वारा

“बोलनेवाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर। और उसने कहा, मैं क्या प्रचार करूँ? सब प्राणी घास है, और उनकी षोभा मैदान के फूल के समान हैः जब यहोवा की साँस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता हैः निसंदेह प्रजा घास है। घास तो सुख जाती, और फूल मुर्झा जाता हैः परन्तु हमारे परमेष्वर का वचन सदैव अटल रहेगा” (यषायाह 40:6-8)

(यषायाह 40:5; 58:1; यूहन्ना 1:23; 2तिमुथियुस 4:2-3; यूहन्ना 7:28, 37;
प्रेरितो 2:14; 3:6)

I.    पहला, हमें जींदगी की संक्षिप्तता पर प्रचार करना चाहिये, यषायाह 40:6; याकूब 1:10-11; यूहनना 3:3; मरकुस 8:36-37।

II.   दूसरा, प्रभु की आत्मा के कार्य के मुरझाने पर हमें प्रचार करना चाहिये, यषायाह 40:7; रोमियों 3:19।

III.  तीसरा, हमे यीषु के सुसमाचार का प्रचार करना चाहिए, यषायाह 40:8; 1 पतरस 1:25, यूहन्ना 10:28।