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पीलातुस और प्रोक्यूला

PILATE AND PROCULA
(Hindi)

डॉ आर एल हायमर्स जूनि.
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लॉस ऐंजीलिस के बैपटिस्ट टैबरनेकल में २८ फरवरी‚ २०१० रविवार
संध्या में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, February 28, 2010

‘‘जब वह न्याय की गद्दी पर बैठा हुआ था तो उस की पत्नी ने उसे कहला भेजा कि तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना; क्योंकि मैं ने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुख उठाया है।" (मत्ती २७:१९)


प्रकट तौर पर‚ यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट एवं न्यूजवीक दोनों कहते हैं कि बाइबल‚ मसीह के क्रूस पर चढ़ाने का आदेश देने वाले रोमी सम्राट पोंतियस पीलातुस के विषय में गलत बताती है। न्यूजवीक का कहना था,

पीलातुस कोई ऐसा व्यक्तित्व नहीं था जिसे (मेल) गिब्सन (दि पैशन ऑफ क्राईस्ट फिल्म में) दर्शाते हैं। फिलो ऐलग्ज़ैन्ड्रीया के अनुसार गर्वनर ‘‘कठोर, हठी और क्रूर व्यक्तित्व का था" और बिना मुकदमा चलाए उपद्रवियों को प्राण दंड दिया करता था (न्यूजवीक‚ फरवरी १६‚ पेज ४८)

न्यूजवीक का यह भी कहना है कि चारों सुसमाचार के लेखक रोमन गर्वनर का अनुचित चित्रण करते हैं ताकि ‘‘क्रिश्चियनिटी को आकर्षक बना कर जितना संभव हो सके उतना अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सके" (उक्त संदर्भित)।

यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट के अनुसार‚

पोंतियुस पीलातुस‚ गिब्सन के (या गॉस्पल के) कुछ दयालू (मानवीय) रूप वाले चित्रण से‚ जो महापुरोहित द्वारा यीशु को सूली पर चढ़ाने पर जोर दिए जाने से उलझन में था‚ कहीं दूर था बल्कि वह तो जैसे प्रथम शताब्दी का इतिहासकार जोसेफस जोड़ता है कि एक कुख्यात किस्म का निष्ठुर गर्वनर था जो उग्र विद्रोहियों को भी झट से सूली पर चढ़ा देता था यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट‚ मार्च ८‚ पेज ४२)

बाइबल पर विश्वास करने वाले मसीहियों के रूप में हमने सीखा है कि टाईम‚ न्यूजवीक ‚ यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट और से सेक्यूलर मीडिया पर विश्वास न करें विशेषकर तब जब वे क्रिश्चियनिटी पर उनकी टिप्पणी देते हैं। उदाहरण के लिए न्यूजवीक ने फिलों का उद्धरण दिया है ताकि चारों गॉस्पल में दर्ज यीशु के ऊपर पीलातुस की कार्यवाही पर संशय पैदा करे। यीशु और पीलातुस के बीच जो घटा, फिलो उसका चश्मदीद गवाह भी नहीं था। फिलो ऐलग्ज़ैन्ड्रीया‚ मिस्र में जो यरूशलेम से सैकड़ों मील दूर था, पैदा हुआ और वहीं जीवन बिताया था। उसने तो कभी पीलातुस अथवा यीशु को देखा भी नहीं था! उसने जो भी लिखा, दूसरों से प्राप्त जानकारी अनुसार लिखा। इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका कहता था, ‘‘फिलो ने अपना सारा जीवन ऐलेक्जेंड्रिया में ही बिता दिया।" (इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका‚ १९४६‚ वॉल्यूम १७‚ पेज ७५७)

यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट इतिहासकार जोसेफस के ग्रंथ से लेकर दोहराते हैं। जोसेफस तो ३७ ए॰डी॰ तक पैदा भी नहीं हुआ था‚ अर्थात यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के चार साल बाद तक। (इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका‚ १९४६‚ वॉल्यूम १३‚ पेज १५३)। फिलो मिस्र में रहता था। वह कभी यरूशलेम नहीं गया। जोसेफस अभी तक पैदा ही नहीं हुआ था। शिष्यों की आंखों देखी गवाही जो चार सुसमाचारों में मिलती है‚ उसके सामने इन दोनों लोगों की कही गयी बात का उद्धरण देना बेईमानी है। मत्ती क्रूस की घटना के समय उपस्थित था। मरकुस उपस्थित था। उसने देखा था कि क्या हुआ था। यूहन्ना उपस्थित था। उसने देखा था कि क्या हुआ था। पतरस की आंखों देखी सुनकर लूका ने गॉस्पल में लिखा। ये लोग वास्तव में वहां उपस्थित थे। वे चश्मदीद गवाह थे। फिलो सैकड़ों मील दूर अफ्रीका में रह रहा था और जोसेफस तो अभी पैदा भी नहीं हुआ था!

यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट शिष्यों की आंखों देखी गवाही को झुठलाते हुए, एक ऐसे इन्सान की रिपोर्ट का पक्ष ले रहे हैं जो अभी पैदा भी नहीं हुआ था और दूसरा ऐसा व्यक्ति जो सैकड़ों मील दूर उत्तरी अफ्रीका में रहता था! मुझे इन अखबारों की रिपोर्टिंग पक्षपातपूर्ण लगती है! पर हमने देखा है कि सेक्यूलर मीडिया भी — क्रिश्चियनिटी से भेदभाव रखता है। वे दूसरे किसी बड़े धर्म के साथ ऐसा नहीं करते हैं परंतु क्रिश्चियनिटी और बाइबल को तो कोई भी मौका मिलने पर कड़ी चोट करने से नहीं चूकते हैं। हम जानते हैं कि वे ऐसा ही करेंगे। जैसे डेविड लिंबॉग ने कहा था‚

क्या आप ने ध्यान दिया है कि क्रिसमस और ईस्टर के अवसर पर देश की प्रमुख पत्रिकाओं में क्रिश्चियनिटी की छवि धूमिल करने वाली कहानियों की बाढ़ आ जाती है। स्तंभकार डॉन फैडर ने यह पाया था कि १९९६ के पवित्र सप्ताह में न्यूजवीक और यू एस न्यूज और वर्ल्ड रिपोर्ट दोनों ने क्रिश्चियनिटी की छवि को धक्का पहुंचाने वाली कहानियों को मुख्य पेज पर छापा था। (डेविड लिंबॉंग‚ पर्सीक्यूशन: हाउ लिबरल्स आर वेजिंग वॉर अगेंस्ट क्रिश्चियनिटी‚ रेगनरी पब्लिशिंग‚ २००३‚ पेज २७१)

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कई रूढ़िवादी लेखकों ने पाया कि उदारवादी खबरों के ऑफिस मसीहत के प्रति डाह से भरे हुए होते हैं।

नया नियम पोंतियुस पीलातुस पर लीपा पोती नहीं करता है। हमें फिलो या जोसेफस की आवश्यकता नहीं है यह बताने के लिए कि वह एक निष्ठुर रोमन गर्वनर था। लूका १३:१‚२ वर्णन करता है कि पीलातुस ने गलील में कई यहूदियों को मरवा डाला था। दि इलस्ट्रैटड डिक्शनरी ऑफ बाइबल हमें बताती है कि

पीलातुस कभी भी यहूदियों के मध्य लोकप्रिय नहीं था। वह उनकी धार्मिक धारणाओं के प्रति संवेदना रहित था और अपनी नीतियों को जारी रखने में हठी था। जब यहूदी उसके शासन के प्रति क्रुद्ध हो विद्रोह करते थे‚ वह पीछे हट जाता था‚ यह उसकी दुर्बलता को दर्शाता था। पीलातुस एक उसूलहीन सफल व्यक्ति का एक अच्छा उदाहरण है जो अपने खुद के स्वार्थी लक्ष्यों के कारण उचित की भी बलि चढ़ा देगा। यद्यपि उसने यीशु की निरपराधता को पहचाना और उन्हें बचाए रखने व छोड़ने का अधिकार भी था‚ किंतु अपने कार्यकाल में व्यक्तिगत असफलता के दाग से बचने के लिए उन्होंने भीड़ की मांगों को मान लिया (हबर्ट लॉकेयर‚ सीनियर‚ एडीटर‚ दि इलस्ट्रैटड डिक्शनरी ऑफ बाइबल‚ थॉमस नेल्सन‚ १९८६‚ पेज ८४२)

तो‚ क्यों‚ पोंतियुस पीलातुस यीशु को सूली पर चढ़ाने के खिलाफ था? मैं सोचता हूं इसके पीछे तीन मुख्य कारण थेः राजनीतिक हालात‚ उसकी पत्नी की चेतावनी‚ उसका अपना कमजोर दृष्टिकोण। पीलातुस सावधान था कि केवल एक सप्ताह पहिले बड़ी भीड़ ने यीशु का यरूशलेम में स्वागत किया था। वे नारे लगा रहे थे,

‘‘और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी‚ पुकार पुकार कर कहती थी‚ कि दाऊद की सन्तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है‚ आकाश में होशाना। जब उस ने यरूशलेम में प्रवेश किया‚ तो सारे नगर में हलचल मच गई; और लोग कहने लगे‚ यह कौन है? लोगों ने कहा‚ यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है" (मत्ती २१:९—११)

इस घटना ने गर्वनर को सजग रखा था। वह पहिले से ही यीशु के विषय में विचार कर रहा था।

उसके पश्चात यीशु ने मंदिर से व्यापारियों को बाहर कर दिया।

‘‘यीशु ने परमेश्वर के मन्दिर में जाकर‚ उन सब को‚ जो मन्दिर में लेन देन कर रहे थे‚ निकाल दिया; और सर्राफों के पीढ़े और कबूतरों के बेचने वालों की चौकियां उलट दीं। और उन से कहा‚ लिखा है‚ कि मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा; परन्तु तुम उसे डाकुओं की खोह बनाते हो। और अन्धे और लंगड़े‚ मन्दिर में उसके पास लाए और उस ने उन्हें चंगा किया" (मत्ती २१:१२—१४)

पीलातुस इन सारी बातों को भी जानता था।

यरूशलेम में विजयी प्रवेश‚ मंदिर में व्यापार बंद करवाना और रोगग्रस्त लोगों को अलौकिक रूप से ठीक करना — गर्वनर के रूप में‚ पीलातुस ने इन सारी बातों को सुन रखा था। तब वे यीशु को पीलातुस के पास लाए। उसने यीशु से प्रश्न किया‚

‘‘परन्तु उस ने उस को एक बात का भी उत्तर नहीं दिया यहां तक कि हाकिम को बड़ा आश्चर्य हुआ" (मत्ती २७:१४)

दूसरा‚ उसकी पत्नी ने उसे एक संदेश पहुंचाया था। आइए‚ अपने स्थानों पर खड़े होकर मत्ती २७:१९ का वह भाग समवेत स्वरों में पढ़ते हैं‚

‘‘जब वह न्याय की गद्दी पर बैठा हुआ था तो उस की पत्नी ने उसे कहला भेजा कि तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना; क्योंकि मैं ने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुख उठाया है" (मत्ती २७:१९)

अब आप बैठ सकते हैं।

एक पुरानी प्रथा के अनुसार उसकी पत्नी यहूदी बन गयी थी। पीलातुस स्वयं भी किसी प्रकार से आधुनिक मनुष्य नहीं था। रोमी आस्था के अधीन वह अनेक देवताओं आत्माओं में विश्वास रखता था — दोनों प्रकार की आत्माएं‚ बुरी व अच्छी‚ दुष्टात्माओं और स्वप्नों की बातों पर यकीन रखने वाला था। धर्मशास्त्र के अनुसार‚ ऐसा प्रतीत होता है कि पीलातुस अपनी पत्नी के बहुत नजदीक था। उसका नाम क्लॉडिया प्रोक्यूला था। उसने पीलातुस को तब संदेश भेजा जब वह एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के लिए अपने न्याय आसन पर बैठा था‚ यह दर्शाता है कि उन दोनों के मध्य भावात्मक नजदीकियां थीं।

तो फसह के पर्व के समय आप के समक्ष इस आश्चर्यजनक गतिविधि का दृश्य है। संपूर्ण लोगों द्वारा उंचे स्वरों में मसीह की सराहना की जा रही थी और उनके साथ मसीह का विजयी प्रवेश आप ने देखा। मैं सोचता हूं कि मेल गिब्सन सही थे जब उन्होंने पीलातुस से यह पुछवाया, ‘‘क्या यह वही भविष्यवक्ता नहीं था जिसके नगर प्रवेश पर तुमने स्वागत किया था? क्या तुम अपने इस पागलपन को मुझे समझा सकते हो?" (तुलना न्यूजवीक‚ फरवरी १६‚ २००४‚ पेज ४९) ऐसा पूछना सही भी लगता है। बहुत संभावना है कि पीलातुस के विचार बिल्कुल ऐसे ही रहे होंगे?

उसके पश्चात मंदिर में चल रहे व्यापार को मसीह ने बंद करवाया। तब आप उसकी पत्नी को यीशु के विषय में चेतावनी देते हुए — मुकदमे के दौरान संदेश भेजते देखते हैं। संदेश की अलौकिक झलक ने उस समय के अंधविश्वासी रोमी को परेशानी में डाल दिया होगा।

तीसरी बात‚ पीलातुस की स्थिति उस समय कमजोर गर्वनर की चल रही थी। धर्मसर्मथक ली स्टाबेल का कहना है कि उन्हें

     याद है कि     कैसे कुछ आलोचक‚ गॉस्पल में रोमन गर्वनर के विषय में किए गए वर्णन के कारण गॉस्पल की आलोचना करते हैं। जहां नया नियम में उसे ढुलमुल प्रकार का इंसान बताया गया है और जो यहूदी भीड़ के दवाब में झुकते हुए यीशु को प्राणदंड देने के लिए तैयार हो जाता है वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक लेख उसे हठीला और अपनी बात पर अड़े रहने वाला व्यक्ति बताते हैं।
     (किंतु डॉ एडविन यामुची‚ एक प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता और बाइबल लेखक ने बताया कि पॉल मेयर ने अपनी पुस्तक पोंतियुस पायलेट १९६८ में) ‘‘..........सुस्पष्ट करते हुए बताया (पीलातुस का) संरक्षक या आश्रयदाता सेजानुस था और सेजानुस ३१ ए.डी. में सत्ता में शक्तिविहीन हो गया था। क्योंकि वह सम्राट के विरूद्ध षडयंत्र रच रहा था.....इस के कारण पीलातुस की स्थिति भी ३३ ए.डी. में बहुत कमजोर हो गयी थी..... जिस समय यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया था। तो यह निश्चित समझा जा सकता है कि पीलातुस सजा देने के लिए अनिच्छुक रहा होगा.....इसका तात्पर्य है कि बाइबल का वर्णन सही....है" (ली स्ट्राबेल‚ दि केस फॉर क्राईस्ट‚ जोंडरवेन‚ १९९८‚ पेज ८५)

इन तीन कारणों के अलावा मैं नहीं सोचता कि कोई और ऐसी विशेष बात रही होगी जिसके कारण पीलातुस यीशु को क्रूस पर चढ़ाने के लिए अनिच्छुक था। पीलातुस के पूर्व— आधुनिक दिमाग ने निसंदेह यीशु की किसी प्रकार की अलौकिक सामर्थ को देखा होगा। बाइबल कहती है वह ‘‘बड़े अचंभे में पड़ गया" (विस्मित रह गया) कि उसके प्रश्नों के बहुत थोड़े उत्तर यीशु ने दिए। और इसीलिए वह हिचकिचा भी रहा था। उसने अपनी पत्नी के विचित्र स्वप्न के बारे में भी सोचा। उसने यीशु को यह कहते हुए सुना था‚

‘‘कि यदि तुझे ऊपर से न दिया जाता‚ तो तेरा मुझ पर कुछ अधिकार न होता...." (यूहन्ना १९:११)

पता नहीं क्यों उसके अंधविश्वासी‚ मूर्तिपूजक हृदय में पीलातुस यह जान रहा था कि वह परमेश्वर की — अलौकिक सत्ता का सामना कर रहा है । उसकी पत्नी के शब्द उसके दिमाग में गूंज रहे थे‚

‘‘तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना क्योंकि मैं ने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुख उठाया है" (मत्ती २७:१९)

आइए और अधिक ध्यान से देखते हैं कि पीलातुस की पत्नी ने उसे क्या संदेश भेजा था।

१॰ पहिली बात‚ ये पाप के विरूद्ध चेतावनी थी।

यह एक ईश्वरकृत स्वप्न था। पुराने नियम में यहोवा परमेश्वर अक्सर स्वप्नों के माध्यम से कहा करते थे। परमेश्वर ने फिरौन को सपने में कहा था। परमेश्वर ने नबूकदनेस्सर राजा से सपने के माध्यम से बात की। परमेश्वर ने युसुफ से सपने में बातें कर उसे राजा हैरोदस से बचने के लिए बालक यीशु को संग लेकर मिस्र निकल जाने के लिए कहा। प्रोक्यूला को जो स्वप्न आया था उसे देखते समय वह मानसिक पीड़ा भी भोग रही थी। उसने कहा‚ ‘‘मैं ने आज स्वप्न में उसके कारण.........बहुत दुख उठाया है" (मत्ती २७:१९) अंग्रेजी में ‘‘सफरिंग" शब्द यूनानी भाषा के शब्द ‘‘पैस्को" का अनुवाद है। जिसे प्रेरितों के कार्य पुस्तक के अध्याय १:३ में ‘‘पैशन" के रूप में अनुवादित किया गया है‚ जो मसीह के पीड़ा भोगने अथवा दुख उठाने से संबंधित है। पीलातुस की पत्नी प्रोक्यूला ने स्वप्न में शायद मसीह का दिल दहलानेवाला दुख उठाना देखा होगा। वह अपने पति के कुछ भयानक भविष्य का संकेत भी देख रही हो।

निश्चित तौर पर उसका स्वप्न पाप के विरूद्ध चेतावनी थी। इस स्वप्न ने पीलातुस की अंतरात्मा से बातचीत की। प्रोक्यूला ने उससे कहा कि यीशु ‘‘एक ईमानदार मनुष्य" है‚ एक धर्मी पुरूष है। पीलातुस का अंतकरण अपनी पत्नी की कही बात से सहमत था। उसने लोगों के सामने इस मामले से अलग होते हुए पानी से हाथ धोए‚ और यीशु को ‘‘इस धर्मी पुरूष" कहा‚ उसके दिल में अपनी पत्नी के मसीह के संबंध में कहे गये शब्द गूंज रहे थे (मत्ती २७:२४) एक ओर वह अपनी पत्नी के शब्दों से प्रभावित हुआ‚ दूसरी ओर वह हिचकिचा भी रहा था। एक ओर उसकी अंतरात्मा उसे खींच रही थी‚ दूसरी ओर भीड़ का डर उस पर हावी हो रहा था।

तब भीड़ चिल्लाने लगी‚

‘‘यदि तू इस को छोड़ देगा तो तेरी भक्ति कैसर की ओर नहीं‚ जो कोई अपने आप को राजा बनाता है वह कैसर का साम्हना करता है" (यूहन्ना १९:१२)

उनकी इस धमकी ने उसे बाध्य कर दिया। डॉ रायरी यहां लिखते हैं‚

वह नहीं चाहता था कि उसकी दूसरी शिकायत भी रोम पहुंचे कि उसने यहूदियों के रीति रिवाज को धक्का पहुंचाया है अथवा वह एक स्थिति नहीं संभाल सका — पहिले भी उसके उपर (सम्राट) तिबेरियस के सामने आरोप लग चुके थे (चार्ल्स सी॰ रायरी‚ पीएचडी‚ दि रायरी स्टडी बाइबल‚ मरकुस १५:१ पर व्याख्या)।

वे....यहूदी अधिकारी‚ अब यीशु के विरूद्ध राजनीतिक आरोप पर उतर आए जिसमें एक राज्य के गर्वनर (जैसे पीलातुस) के लिए एक असरदायक धमकी भी दी हुयी थी‚ जो सम्राट (तिबेरियस) की मर्जी पर कार्य करता था। यहूदियों ने पहिले भी दूसरे मामलों में पीलातुस की कार्यप्रणाली की शिकायत रोम को की थी जहां वह उनकी प्रथाओं को लेकर असंवेदनशील था (उक्त संदर्भित‚ यूहन्ना १९:१२ पर व्याख्या)

और इस तरह मनुष्य के भय से प्रोक्यूला की चेतावनी को अनदेखा करते हुए‚ अपनी खुद की अंतरात्मा के विरूद्ध जाकर उसने पाप किया। बाइबल कहती है‚

‘‘मनुष्य का भय खाना फन्दा हो जाता है" (नीतिवचन २९:२५)

आज संध्या यहां ऐसे लोग भी होंगे जो मसीह के बारे में सोच रहे होंगे। पीलातुस के समान ही‚ आप को भी मसीह के विषय में चेताया गया होगा। आप को भी कहा गया होगा कि पाप से मुंह मोड़ लीजिए और मसीह पर विश्वास कीजिए। क्या आप ऐसा करेंगे? आप के सामने ऐसी कड़ी परीक्षा भी आएगी कि इस मामले में आप ‘‘अपने हाथ धोकर" अलग हो जाएंगे और यीशु से दूर चले जाएंगे‚ जैसे पीलातुस ने किया। लोग आप को समझाएंगे कि ‘‘उन्मादी" न बनो। वे आप को मसीह से दूर ले जाने का प्रयास करेंगे। आप कौन सी राह चुनेंगे? क्या आप मसीह के पास आएंगे और उद्धार पाएंगे? या जो मसीह के विरूद्ध खड़े लोग हैं उनके द्वारा आप खींच लिए जाएंगे? आप को भी पीलातुस के समान विकल्प दिया हुआ है। पीलातुस की पत्नी ने उसे चेतावनी दी थी‚ किंतु वह उस पर अमल करने से हिचकिचाता रहा — बहुत लंबे समय तक!

२॰ दूसरी बात‚ यह एक चेतावनी थी जिसे अस्वीकृत कर दिया गया।

इसे समझने में गलती न करें। पीलातुस ने अपनी पत्नी की चेतावनी को ठुकरा दिया। उसकी ईश्वरीय सलाह मानने के बजाय भीड़ की बात मानी। जॉन ट्रेप कहते हैं कि‚ ‘‘क्या ये भीरूता (कायरपन) और लोकप्रियता नहीं थी जिसने पीलातुस को गुमराह किया‚ उसका मुंह बांध दिया कि वह अलग अलग बातें कहने वाली भीड़ के दवाब में आ गया?" (जॉन ट्रेप‚ ए कमेंटरी ऑन दि ओल्ड एंड न्यू टेस्टामेंट‚ ट्रैन्सकी पब्लिकेशंस‚ पुर्नमुद्रण‚ वॉल्यूम ५ पेज २७१)

क्यों उसने अपनी पत्नी की नहीं सुनी? क्योंकि इसके पीछे उसका अपना स्वार्थ और कायरपन था। वह डर गया कि अगर पत्नी की बात मान ली तो गर्वनर के पद को खो बैठेगा।

क्या आप भी डरते हैं कि मसीह के उपर विश्वास करने से आप कुछ खो बैठेंगे? यीशु का यह कथन गॉस्पल में चार स्थान पर दर्ज है‚

‘‘क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे‚ वह उसे खोएगा" (मत्ती १६:२५; मरकुस ८:३५; लूका ९:२४; लूका १७:३३)

अपनी बाइबल में से मत्ती १६:२५—२६ को निकाल लीजिए। आइए खड़े होकर इन दो पदों को उंचे स्वरों में पढ़ते हैं। यीशु ने कहा था‚

‘‘क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे‚ वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा‚ वह उसे पाएगा। यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा?" (मत्ती १६:२५—२६)

अब आप बैठ सकते हैं।

यीशु का कहना था अगर तुम अपने जीवन को जैसा वह है‚ वैसे ही बचाए रखना चाहोगे‚ तो जीवन खो बैठोगे। आप को पूरा संसार पाकर लेकिन अपनी आत्मा को खोकर क्या लाभ होगा? पीलातुस ने गलत विकल्प चुना। गर्वनर के रूप में उसने अपना पद — और तीन साल संभाल लिया —लेकिन अपनी आत्मा की हानि कर ली।

जोसेफस सामरियों के संग एक खूनी मुठभेड़ का जिक्र करता है‚ उन्होंने पीलातुस के बडे़ अधिकारी‚ विटेलियस‚ सीरिया के गर्वनर से शिकायत दर्ज की थी। विटेलियस ने पीलातुस को हटा दिया था और रोम में सम्राट के सामने प्रस्तुत होने और अपने व्यवहार का स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया........यूसेबियस के अनुसार उसे गॉल (फ्रांस) निर्वासित कर दिया गया........जहां उसने अंत में आत्महत्या कर ली (इलेस्ट्रेड वीकली ऑफ दि बाइबल‚ उक्त संदर्भित) ।

पीलातुस ने प्रभु यहोवा की चेतावनी जो उसकी पत्नी के माध्यम से दी गयी थी‚ उसको अस्वीकार कर दिया। पीलातुस का सब कुछ खो गया — उसकी आत्मा समेत। हम उसे केवल क्यों याद रखते हैं क्योकि उसने यीशु‚ जो मसीह कहलाते हैं‚ उन पर मुकदमा चलाया था! पीलातुस की पत्नी ने उसे सावधान किया था —पर उसने उसकी चेतावनी को नहीं माना।

३॰ तीसरी बात, ये ऐसी चेतावनी थी जिसके अत्यधिक तीव्र परिणाम सामने आए।

नैतिकतावादी व्याख्याकार जॉन ट्रेप‚ थियोफायलेक्ट का उद्धरण देते हैं जिसने कहा था‚ ‘‘ओपस प्रोविडेंशी देय; नॉन उट सॉल्वेरटूर क्रिस्टस‚ सेड उट सर्वेरटूर अक्सोरयो‚" — ‘‘परमेश्वर पिता का यह ईश्वरीय कार्य था जो मसीह को बचाने के लिये नहीं अपितु उसके पति को बचाने के लिये था" (जॉन ट्रेप‚ ए कमेंटरी ऑन दि ओल्ड एंड न्यू टेस्टामेंट‚ ट्रैन्सकी पब्लिकेशंस‚ १९९७ पुर्नमुद्रण‚ वॉल्यूम ५‚ पेज २७१)। थियोफायलेक्ट‚ बारहवीं शताब्दी का यूनानी बाइबल का प्रवीण और जागरूक व्याख्याकार था। उसका कहना था कि प्रोक्यूला का स्वप्न मसीह को बचाने के लिए नहीं अपितु उसके पति को बचाने के लिए था। ‘‘तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना" (मत्ती २७:१९) । प्रभु यहोवा ने उस स्वप्न के जरिये उसके पति की मदद करनी चाही, किंतु उसने पत्नी की चेतावनी को ठुकरा दिया। कृपया प्रेरितों के कार्य १३:२८—३१ को निकाल लीजिए। आइए, अपने स्थान पर खड़े होते हैं और इन चारों पदों को जोर से पढ़ते हैं।

‘‘उन्होंने मार डालने के योग्य कोई दोष उस में ने पाया‚ तौभी पीलातुस से बिनती की‚ कि वह मार डाला जाए। और जब उन्होंने उसके विषय में लिखी हुई सब बातें पूरी की‚ तो उसे (क्रूस) पर से उतार कर कब्र में रखा। परन्तु परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया। और वह उन्हें जो उसके साथ गलील से यरूशलेम आए थे‚ बहुत दिनों तक दिखाई देता रहा; लोगों के साम्हने अब वे भी उसके गवाह हैं" (प्रेरितों के कार्य १३:२८—३१)

यीशु जीवित हैं। वह मरकर जीवित हुए हैं। पीलातुस मर चुका है। वह अपनी पत्नी की ईश्वरीय चेतावनी को सुनने में विफल रहा। उसने अपनी आत्मा सदा के लिए खो दी — सदा के लिए के लिए नर्क के हवाले हो गयी।

स्पर्जन ने कहा था कि अंतिम न्याय के दिन प्रोक्यूला खड़े होकर‚ अपने पति पीलातुस को दोषी ठहरायेगी। स्पर्जन के विचारों में मत्ती १२:४२ रहा होगा‚

‘‘दक्खिन की रानी न्याय के दिन इस युग के लोगों के साथ उठकर उन्हें दोषी ठहराएगी......." (मत्ती १२:४२)

स्पर्जन का कथन था‚

     अगर मैं उस महान अंतिम दिवस के बारे में सोचूं तो यह मात्र मेरी कल्पना नहीं होगी कि जब यीशु अपने न्याय आसन पर बैठे होंगे और पीलातुस वहां अपने सांसारिक जीवन में किए गए कार्य के न्याय के लिए खड़ा होगा और उसकी पत्नी उसके विरूद्ध साक्षी देने को तत्पर होगी कि उसे दंड मिले। मैं सोच सकता हूं कि अंतिम दिन में ऐसे बहुत से दृश्य होंगे‚ जिसमें वे लोग जो हमसे बहुत प्रेम करते थे‚ वहीं हमारे विरूद्ध सर्वाधिक कष्टदायक प्रमाण लाएंगे‚ अगर हम अपनी पापी दशा में ही पड़े रहेंगे तो। मुझे याद है कि कैसे जब मैं एक बालक था‚ मेरी मां ने उद्धार का रास्ता अपने बच्चों को समझाते हुए हमें कहा‚ ‘‘अगर तुम मसीह का इंकार करते और नष्ट हो जाते हो‚ तब मैं तुम्हारे पक्ष में विनती नहीं करूंगी और न कहूंगी कि तुम अनजान थे। परंतु मैं तो तुम्हारे दंड दिये जाने पर आमीन कहूंगी।" मैं अपनी मां की यह बात नहीं सह सका। क्या मुझे दंड दिए जाने पर मेरी मां ‘‘आमीन" कहेगी? और इसीलिए पीलातुस की पत्नी भी उसके विरूद्ध क्यों न उठ खड़ी होगी? जब सभी को सच बोलना आवश्यक होगा तब वह कैसे झुठला सकेगा कि उसकी पत्नी ने बड़ी नम्रता और ईमानदारी से अपने पति को समझाया था तौभी उसने मसीहा को शत्रुओं के हाथों दे दिया?
     अरे‚ मेरे अधर्मी श्रोताओं‚ मेरी आत्मा तुम्हारे लिए शोकित होती है। तुम मुंह मोड़ लो‚ मुंह मोड़ लो‚ क्यों नष्ट होना चाहते हो तुम? क्यों मसीहा के विरूद्ध पाप करना चाहते हो? यहोवा की कृपा से दिए उद्धार को तुम अस्वीकृत नहीं कर सकते हो‚ बल्कि मसीह की ओर मुड़कर उनके द्वारा शाश्वत छुटकारा पा सकते हो। जो कोई उन पर विश्वास करेगा‚ वह अनंत जीवन पायेगा। (सी एच स्पर्जन‚ ‘‘दि ड्रीम ऑफ पायलेट वाईफ" दि मेट्रोपॉलिटन टेबरनेकल पुल्पिट पिलग्रिम पब्लिकेशंस‚ १९७३ पुर्नमुद्रण‚ वॉल्यूम २८‚ पेज १३२)

यीशु पीलातुस के समक्ष हॉल में खड़े हैं —
   मित्रविहीन‚ त्यागे हुए‚ सबसे धोखा खाए हुएः
कान लगाकर सुनना! एकाएक बुलाहट से क्या अर्थ निकलेगा!
   आप यीशु के साथ क्या करेंगे?
आप यीशु को क्या प्रतिक्रिया देंगे?
   तटस्थ आप रह नहीं सकते;
किसी दिन तो आप का हृदय आप से पूछेगा
   ‘‘यीशु मेरे साथ अंत में कैसा बर्ताव करेंगे?"
(‘‘आप यीशु के साथ क्या करेंगे?" एल्बर्ट बी सिंपसन‚ १८४३—१९१९)


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र का पद पढ़ा गयाः मत्ती २७:१५—२४
संदेश के पूर्व एकल गान की प्रस्तुतिः
‘‘आप यीशु के साथ क्या करेंगे?" (एल्बर्ट बी सिंपसन‚ १८४३—१९१९)


रूपरेखा

पीलातुस और प्रोक्यूला

PILATE AND PROCULA

डॉ आर एल हायमर्स जूनि.
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

‘‘जब वह न्याय की गद्दी पर बैठा हुआ था तो उस की पत्नी ने उसे कहला भेजा कि तू उस धर्मी के मामले में हाथ न डालना; क्योंकि मैं ने आज स्वप्न में उसके कारण बहुत दुख उठाया है।" (मत्ती २७:१९)

(मत्ती २१:९—११‚ १२—१४; २७:१४; यूह॰ १९:११)

१॰ पहिली बात‚ ये पाप के विरूद्ध चेतावनी थी‚ यूह॰ १९:१२; मत्ती
२७:२४; नीतिवचन २९:२५

२॰ दूसरी बात‚ यह एक चेतावनी थी जिसे अस्वीकृत कर दिया गया‚
मत्ती १६:२५—२६; मरकुस ८:३५; लूका ९:२४; १७:३३

३॰ तीसरी बात, ये ऐसी चेतावनी थी जिसके अत्यधिक तीव्र परिणाम
सामने आए‚ प्रेरितों के कार्य १३:२८—३१; मत्ती १२:४२