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कुरेनी का षमौन

SIMON OF CYRENE

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बेप्टीस टबरनेफल मे प्रभु की सुबह, फरवरी 21, 2010
को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, February 21, 2010

“सिकन्दर और रूफुस का पिता षमौन, एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उन्होनें उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रुस उठा ले चले।” (मरकुस 15:21)


यूहन्ना हमे कहते है कि यीषु “वह अपना क्रुस उठाये हुए उस स्थान तक बाहर गया” (यूहन्ना 19:17) पिलातुस के आंगन से क्रुस पर चढाने की जगह की ओर। ये बताने के लिये हम यूहन्ना के कर्जदार है। दूसरे तीन सुसमाचार कहते है की कुरेनी के षमौन ने क्रुस उठाया, परन्तु यूहन्ना कहते है की षुरूआत मे यीषु क्रुस उठाकर बाहर तक गये।

अब तक यीषु बहुत अषक्त हो चूके थे। वे पूरी रात जगे हुए थे। उन्होने एक रात पहले अखमीरी रोटी खाने के बाद ना तो कुछ खाया था नाही कुछ पीया था। वे गेत्समनी के अंधेरे मे प्रार्थना कर रहे थे, पसीना मानो रक्त की बड़ी बड़ी बूंदो के जैसे टपक रहा था, इंसानो के पापोके बोज के नीचे, उनके पीडा यातना के घंटे मे (लूका 22:44)। वे वहा पकडे गये थे, और बडे याजक को सामने खींचकर ले जाए गये, जहाँ पर वे उनके मुंह पर थूंके और उन्हे हाथो से मारने लगे (मती 26:67)। उन्हे रोमी षासक पिलातुस के सामने लाया गया, और फिर राजा हेरोदस के सामने, और फिर से पिलातुस के सामने। वे पिलातुस द्वारा जख्मी किये गये, रोमी लोगोने कोड़े से मार कर अध मरा करके उनके पीठ के चीथरे उडा दिये। सिपाहीयोने उनके सिर पर कांटो का ताज पहना दिया, जिसमे उन्हे न बना सकनेवाला दर्द और तडप दिये होंगे। फिर सिपाही उन पर थूंके और उनके सिर पर लकडी के दंडे से मारा (मती 27:30)। यह कोई ताजुब नही है, ये सारी क्रुरता अनुभव करने के बाद, अब यीषु पूरी तरह थक चूके थे। हममे से कोई पूरी तरह समज नही सकता के हमारे लिये उनको जो प्रेम था उसीने उनको तडपने पर मजबूर किया!

कॅथलिक कलीसिया हमे बताता है कि यीषु अपने क्रूस पर चढाने की जगह पर जाने के रास्ते में तीन बार गिरे। षायद वे गिरे, परन्तु बाइबल हमे ये नही कहता। वे एक बार, या दो बार, या तीन बार बेहोष हुए, हमे नही कहा गया। पवित्र वाक्या ये नही कहता कि सिपाहीयोने षमौन को उनका क्रूस उठाने पर मजबूर क्यों किया। हम सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते है की, ये सारी संभावना में, यीषु बहुत अषक्त थे क्रूस को और आगे उठाने के लिये जिसके लिये ये हमे पता है कि क्रुर सिपाहीयोने कोई दया दिखाकर नहीं किया, या खून से लथपथ तारणहार के लिये कोई सहानूभूति। उनकी ये अषक्ति मे, और मरनेवाली दषा में, यह लगता था की यीषु क्रूस को और आगे नहीं उठा सकते थे,

“सिकन्दर और रूफुस का पिता षमौन, एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उन्होनें उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रुस उठा ले चले” (मरकुस 15:21)।

इस सुबह कुछ वक्त के लिये षमौन के बारे में सोचना हमारे लीये मदद रूप होगा, वह आदमी जिसने यीषु का क्रुस उठाया।

I. पहला, प्रभु की योजना द्वारा ही षमौन को यीषु के संपर्क मे लाया गया।

हमें किताबो मे कहा गया है की वो कुरेनी था। वो है, वह कुरेनी से आया था, जो दक्षिण आफ्रिका के लिबिया का एक मुख्य षहर है। वहाँ बडी संख्या मे यहूदी रहते थे, जो वहाँ पर लंबे अरसे से थे, यहूदी और बीन यहूदी को यहूदी धर्म मे परिवर्तन कराके उनके बीच आंतरविवाह करके, ताकि वहा थोडा संदेह था की षमौन काली चमडी का आफ्रिकन यहूदी था। स्पर्जनने सोचा वह काला आदमी था, और मैं सोचता हूँ वे सच्चे थे (घ मेट्रोपोलीटन टबरनेफल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, भाग. XXVII, पृश्ठ 562)। निसंदेह वे मुष्किल हालात और अपने पैसे बचाये ताकि वे यरूस्लेम की लंबी यात्रा कर सके अखमीरी रोटी खाने और मंदिर के उत्सव में षामिल हो सके। किताब हमे यह कहता है की वह “उधर से निकला गाँव से आ रहा था।”

“षमौन एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उसे बेगार मे पकडा कि उसका क्रूस उठा ले चले...” (मरकुस 15:21)।

जैसे ही षमौन येरूस्लेम मे आया, वह “उधर से निकला” सिपाहीयो और यीषु क्रुस के बोज के वजह से बेहोष हो रहे थे। यह एक “अकस्मात” जैसा लगता था की वह यीषु के संपर्क मे आया। डॉ. मेकगी ने कहाँ, “षमौन दक्षिण आफ्रिका के कुरेनी से था। वह... यरूस्लेममे अखमीरी मे षामिल होने गया था। अैसा लगता था की वह भीड़ से अचानक ही क्रुस को उठाने बुलाया गया” (जे. वॅनोन मेकगी, टीएच.डी. थ्रु घ बाइबल, थोमस नेलसन प्रकाषन, 1983, भाग. IV, पृश्ठ 231; मरकुस 15:21 पर टीप्पणी)। परन्तु जो “अचानक” लगता था वह हकीकत मे प्रभु की योजना थी!

“मनुश्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता हैः परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है” (नीतिवचन 16:9)।

योजना का मतलब प्रभु का हमारे जींदगी के हिलचाल पर अंकुष। जैसे सेक्सपीयर ने बताया, जब हेमलेट ने होराटीयो से कहाँ,

“वहॉ पर प्रभु की प्रभुता है जो हमारे अंत को तराषता है, हम उसे कैसे तहेषनहेष कर सकते है। (हेमलेट, नाटक अ, दृष्य 2, वाक्य 10-11)।

षमौनने गाँव में आने का सोचा और “उधर से निकला” सिपाहीयों और टोली जो यीषु के उनके क्रुस पर चढाने की जगह जाने के रास्ते पर पीछे जा रहे थे। वह ये नही समझ सका की उसके पैर अपने आप पवित्र योजना की ओर जा रहे है! प्रभुने उसको वहा जाने के लिये राह दिखाई, सही समय पर, यीषु का क्रुस उठाने के लिये!

मै श्रीमान ग्रीफिथ के बारे में सोचता हूँ, जिसने कुछ क्षण पहले गाया “प्रभु रहस्यमय रास्ते से चलते है” (वीलीयम काऊपर द्वारा, 1731-1800)। श्रीमान ग्रीफिथ की अपनी जींदगी मे प्रभु बहुत रहस्यमय तरीके से चले थ। वे अपने मित्र के साथ इस कलीसिया मे मोटर-साइकल पर आये, जिसने उनको कहाँ, “चलो कलीसिया चलते है और सबको परेषान करते है।” जब मैंने प्रवचन देना षुरू किया उनके मित्र वहाँ से भाग गये, परन्तु श्रीमान ग्रीफिथ वहाँ रूके और वे परिवर्तित हुए! तीस साल से भी ज्यादा समय से वे मेरे प्रवचन के पहले गाना गाते है! श्रीमान ग्रीफिथ हमारे कलीसिया में प्रभु की योजना से ही आये थे!

और आज सुबह आप यहाँ प्रभु की योजनासे ही हो। किसीने आपसे बाते की। उन्होने आपको आने के लिये आमंत्रित किया। और आप यहाँ हो! षायद अब से तीस साल बाद आप भी कह सकोगे, श्रीमान ग्रीफिथ और कुरेनी के षमौन के साथ, “प्रभु अपने चमत्कार दिखाने रहस्यमय तरीके से चलते है।” उस समय, षमौन यह नही समज पाया की यीषु के साथ उसकी ये योजनापूर्ण मिलन उसके जींदगी का मकसद बदल देगा। षायद यहाँ आकर और इस सुबह सुसमाचार सुनना आपकी भी जींदगी बदल सकता है! हम ऐसा होने के लिये कैसे प्रार्थना करे!

II.   दूसरा, यीषु का क्रुस उठाने के लिये षमौन को विवष किया गया।

“सिकन्दर और रूफुस का पिता षमौन, एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उन्होनें उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रुस उठा ले चले।” (मरकुस 15:21)

उस रोमी सिपाहीयोने षमौन को यीषु का क्रुस उठाने पर “विवष” किया। “विवष” का ग्रीफ षब्द है बहुत मजबूत। यह सेना का षब्द है। इसका मतलब है वह जोर जबरदस्ती या दबाव से लाया गया। इस का मतलब है वह हकीकत में क्रुस उठाने के लिये सिपाहीयो द्वारा “दबाया” गया। वह उस वक्त यीषु का सेवक नही था। सिपाहीयोने उसे यह करने को “दबाया”। उन्होने उसके कंधो पर क्रुस को डाल दिया! षायद उसने वहाँ से चले जाने के कोषिश की, परन्तु वह नहीं जा सका। उसे तारणहार का क्रुस उठाने के लिये “दबाया” गया।

तब षायद षमौनने पहली बार यीषु की ओर देखा। वह सिपाहीयो के साथ जूज रहा था। जब उसने देखा की वह वहॉ से नही नीकल सकता है, उसने क्रुस उठाना षुरू किया। तब उसने षायद यीषु की ओर देखा। उसने तारणहार के चेहरे पर क्या देखा? मैं इतना ही कह सकता हूँ की उसने उनके प्रेम की दिव्यता देखी होगी। उसने षायद यीषु के अद्भूत कामो के बारे मे सूना होगा - चमत्कार, मरे हुओ को उठाना, भूखे को खिलाना, बीमारो को ठीक करना। परन्तु अब उसने यीषु के चेहरे मे प्रभु का प्यार देखा होगा।

अब तारणहार उसके आगे गये, और षमौनने पीछे से क्रुस को उठाया। अब वह ये करने के लिये मान गया था। उसने सोचा, “ठीक है, मै उनको क्रुस पहाडी के षिखर पर ले जाने मे मदद करूंगा। परन्तु मै वहाँ तक ही जाऊंगा। जैसे मैं वहाँ पहुचता हूँ मैं वहा से निकल जाऊंगा।” ये सिर्फ अनुमान ही था, परन्तु मैं सोचता हूँ की षायद ये होना ही था।

अब, जैसे ही वे कालवरी के पहाडी के षिखर पर पहुंचते है, और उसने क्रुस को छोडा, मै उसे पीछे खडे होते हुए देख सकता हूँ, सिपाहीयो और चिल्लाते हुए लोगों की टोली के सामने। वह देख रहा था की सिपाही यीषु के हाथ और पैरों मे किल ठोक रहे थे। उसने देखा की उन्होने क्रुस को खडा किया। उसने अपने आपको दूर ले जाने की कोषिश की और फिर से “उधर से निकला”, परन्तु पता नही क्युं वह नही कर सका। उसकी आखें यीषु को ताकते ही रह गई, और वह प्रभु के बेटे को रक्त से लथपथ क्रुस पर मरता हुआ देखता ही रह गया। उसने यीषु की प्रार्थना सूनी “पितामह, उनको माफ करना” (लूका 23:34)। वह सोचता है, “ये कैसा इंसान है जो प्रभुसे उनको माफ करने की प्रार्थना करता है जिन्होने उसे क्रुस पर चढाया?” षमौन की आखों से आसूं निकले होंगे, आसूं तो उसके अपने मन की बात कह रहे थे, जो षायद अब तक दूर हुअे होंगे यीषु के उन लोगो के प्रति प्रेम दिखाना जिन्होने उन्हे दर्द दिया। उसने निसंदेह जोन न्यूटन के साथ कहॉ होगा,

मैंने उनको पेड़ पर लटकता हुआ देखा
   तडप और रक्त;
उन्होने अपनी दर्द भरी आखे मुज पर टीकादी,
   जैसे मैं उनके क्रुस के पास खडा हुआ।

जरूर, कभी नही, अपनी आखरी सांस तक,
   वो उनका देखना मैं भूल सकता हूँ;
उनकी मृत्यु से मै चकित रह गया,
   उनके कुछ बोलने पर भी।

मेरी आत्माने महसूस किया और अपराधी मानने लगा,
   और अचानक मुझे निराषा मे धकेल दिया;
मैने अपने पापो को उनके रक्त से गीरते देखा
   और उनको कील से लगाने मे मदद की।

दूसरी बार उन्होने नजर की, जिसने कहा,
   “मैं सबकुछ माफ करता हूँ;
यह रक्त उनके लिये चूकायेगा,
   मैं मरूंगा ताकि वे जीये।”

(“मैंने उनको पेड़ पर लटकते देखा”, जोन न्यूटन द्वारा, 1725-1807;
“ओ सेट दी ओपन अनटू मी” के राग पर)।

ये षायद अच्छा था कि षमौन को यीषु के क्रुस को उठाने के लिये उसी वक्त “दबाया” गया। मैंने वो देखा था, बहुत बार, अच्छे ख्रिस्ती वही है जिसने यीषु का जूआ षुरूआत मे उन पर लिया - जो दिखता है (जैसे पुराने पत्रावली और बप्तीस कहेंगे) की “नरूकनेवाली अनुग्रह” द्वारा मुक्ति के लिये “दबाया” गया। यीषुने कहा,

“सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरे पास आओ, मैं तुम्हे विश्राम दूँगां। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझसे सीखो... क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हलका है। (मती 11:28-30)।

ज्यादातर परिवर्तित लोग वे थे जो पापो को माननेवाले थे - इसालिये जब वे यीषु के पास आये तो उन्होने मेहसूस किया उनका जूआ सहज था, और उनका बोझ हलका! लुथर, जोन बनयान, जोन वेस्ली, ज्योर्ज वाइंटफिल्ड, और सी. एच. स्पर्जन जैसे लोगोने इतना सुकुन मेहसूस किया जब उन्हे यीषु से माफी मिली और उनका जूआ उठाना आसान लगा। वे अपनी पूरी षक्ति से यीषु के लिये काम करने गये, और जब तक वे जीये उन्होने ये छोडा नहीं!

हमने अपने समय में और फिर हमारे अपने कलीसिया मे ये होते हुए देखा है। हमारे कलीसिया के मूल 39 समय के चित्र को देख कर, मैने मेहसूस किया की उनमे से ज्यादातर आये थे, अभी इसी वक्त, कलीसिया के काम मे। उन्हे सुसमाचार प्रचार या प्रार्थना सभा मे आने के लिये बीनती नही करनी पडी। वे प्रभु के द्वारा अपने आप ही काम मे “दबाये” हुए थे! मिसाल के तौर पे, डॉ चान तुरन्त अपने कुछ सहपाठी के पास गये और उन्हे अंदर ले आये। उसी वक्त वे श्रीमती सेन्डर्स, डॉ ज्युडीथ केगन और विनी चान को ले आये। श्रीमती हायमर्स जैसे ही परिवर्तित हुई वे तुरन्त ही फोन पर प्रचार करनेवाली बनी। ये उनके हर हफ्ते बीना भूले फोन पर सुसमाचार प्रचार करने की 30 वी सालगिरह है। श्रीमान ग्रीफिथ, और श्रीमान सोंग, और श्रीमान मेन्सीया, और श्रीमान सलझार सब तुरन्त ही कलीसिया मे काम करने गये। जैसे मैने चित्र मे उन 39 लोगो के चेहरे देखे, मुझे महसूस हुआ की मुझे उनके साथ विवाद नही करना चाहिये था, या उनके साथ चर्चा, सभा मे आने के लिये और सुसमाचार प्रचार का काम करने के लिये। उन्होने तुरन्त ही यीषु का जूआ उठा लिया था! उन्हे तुरन्त ही पता चला की जूआ सहज था और उनका बोझ हलका! उन्होने यीषु के साथ वाद-विवाद नही किया जब उन्होने कहाँ,

“यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे, और अपना क्रुस उठाए, और मेरे पीछे हो ले” (मती 16:24)।

परन्तु मुझे यह भी पता चला कि जिन को हमे विनती या मनाना पडता है, षनिवार की एक सभा मे विष्वाससे आने के लिये, कभी अचानक ही पक्के ख्रिस्ती बन जाते है। जब छुट्टिया आती है तो वे कलीसिया से दूर होते हे, या कलीसिया से कुछ समय मे ही चले जाते है, या वे अपने “गाडीयो से भीड़े रहते है और धनवान लोगो और अपनी जींदगी के आनंद मै” लगे रहते है (लूका 8:14)। परन्तु कुरेनी का षमौन उनके जैसा नहीं था। हमारी किताबे पक्के तरिके से यह बताती है कि वो एक सच्चा ख्रिस्ती बना। पहले वह यीषु का क्रुस उठाने पर विवष किया गया, परन्तु फिर उसने अपनी मरजी से ये उठया।

III.   तिसरा, षमौन ख्रिस्ती बना।

“सिकन्दर और रूफुस का पिता षमौन, एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उन्होनें उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रुस उठा ले चले।” (मरकुस 15:21)।

मै बहुत खुष हुँ की मरकुस षमौन के बेटों का नाम दर्ज करने आगे बढे थे-क्योंकि उनके द्वारा उनके पिताके परिवर्तन की बाते सुनकर हम सीखते है, जो षायद हम और काई तरीके से न जान पाते। डॉ. लेन्सकीने कहा,

मरकुसने उसके बेटो का नाम रखा जिसने, यह मंजूर किया, बाद मे कलीसिया मे महत्वपूर्ण पद पाया। {इस} माहिती द्वारा ये सारांष नीकलता है की यीषु के साथ यह अचानक संपर्क षमौन को परिवर्तन तक ले गया और उनके बेटो को कलीसिया मे मषहूर किया (आर.सी.एच.लेन्सकी, डी.डी., सेंट मती के सुसमाचार का अनुवाद, अगसर्बग प्रकाषन, 1961 मे फिर से छापा गया, पृश्ठ 1105; मती 27:32 पर टीप्पणी)।

डॉ. लेन्ग कहते है कि षमौन के बेटे, सिकन्दर और रूफुस,

... अभी के मौजूदा कलीसिया मे बहुत जानेमाने व्यक्ति रहे होंगे, और वे लोगो को, उनकी जीवंत यादे और मरकुस को असलीयत को जांचते होंगे... उनको रोम के कलीसिया मे बहुत जाने माने व्यक्ति बताना बहुत साहजिक है (जोन पीटर लेन्ग, डी.डी., पवित्र वाक्या पर संभाशण - मरकुस, झोन्डेरवन प्रकाषन घर, अेन.डी., पृश्ठ 151; मरकुस 15:21 पर टीप्पणी)।

डॉ अेलीकोट बताते है,

सेंट पौलुस रूफुस की मां के बारे मे कहते है जैसे वह उनकी भी मां हो - जैसे. अपनी मां की ममता के जैसे कई सबूत द्वारा उसको प्यार किया- और इसीलिये हम मानने लगे की कुरेनी के षमौन की पत्नी जरूर... सेट. पौलुस के खास मित्रोमें से ही आयी होगी। यह, इस वक्त, अेन्टीओच के जेन्टाइल कलसिया की नीव के संदर्भ मे सेंट लूका के हिसाब से अपने आपको जो महत्व दिया गया उसे “कुरेनी के लोगों” के साथ जोडा गया, प्रेरितो 11:20 (चार्ल्स जोन अेलीफोट, डी.डी., पूर्ण बाइबल पर अेलीकोट का संभाशण, झोन्डेरवान प्रकाषन घर, 1954 अध्याय, भाग 6, पृश्ठ 231; मरकुस 15:21 पर टीप्पणी)।

और मै मेहसूस करता हूँ की मुझे भी इस विशय पर डॉ. सी.एच.स्पर्जन की राय पेष करनी चाहियेः

      हमे कहा गया था की (षमौन) सिकन्दर और रूफुस का पिता थे... जरूर मरकुस इस दोनो बेटो को जानते थे, नही तो उन्होने इनके बारे मे बताने की चेश्ठा नही की होती; वे कलीसिया जरूर जाने पहचाने होंगे, नही ंतो उन्होने उनके पिता का जिक्र नही किया होता। यह षायद तप था क्योंकि यह रूफुस था जिसके बारे मे पौलुसने अपने पत्र के आखरी पाठ मे बताया है जो उन्होने रोमी लोगो को लिखा था, क्योंकि मरकुस पौलुस के साथ थे, और इस तरह उन्हे षमौन और रूफुस लिखते है, “रूफुस को सलाम है जो प्रभु, और उनकी माँ और मेरे द्वारा चुना गया।” {रूफुस} की मा इतनी ममतावाली थी के वे रूफुस के साथ साथ पौलुस की भी मा बनी... ये ऐसे लगता था जैसे {षमौन}, उनकी पत्नी, और उनके दो बेटे सभी प्रभु के परिवर्तित हुए जब उसने क्रुस उठाने के बाद... ओह, व्यक्ति को कितना आषिर्वाद है कि वो अपने बेटो द्वारा जाना जाता है! प्रार्थना करे, प्यारे ख्रिस्ती मित्रो, आप जिनके पास सिकन्दर और रूफुस है, कि ये षायद आपके लिये सम्मान होगा उनके पिता की तरह पहचाने जाने मे (सी.एच. स्पर्जन, “भाग्यषाली क्रृस उठाने वाले और उनके पीछे जाने वाले, घ मेट्रोपोलीटीन टबरनेफल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1973 मे फिर से छापा हुआ, भाग XXVIII, पृश्ठ 562-563)।

यह एक असामान्य प्रवचन है। मैंने दो दिनो में इसे तैयार करने की मेहनत की, जब गये हफ्ते मैं बीमार था। कुरेनी के षमौन के बारे मे बाइबल में बहुत ही कम लिखा गया है। और फिर भी उनका नाम चार मे से तीन सुसमाचार मे लिया जाता है-और पवित्र वाक्या में हमे उनके बेटो के और उनकी पत्नी के बारे मे अधिक जानकारी दी गइ्र है। मैंने ये बहुत अधिक ध्यान से कई घंटो तक पढा है-और मैं जरूर केहसूस करता हूँ की ये षमौन पेहले के कलीसिया मे महत्वपूर्ण व्यक्ति रहा होगा। आप षायद ये दृश्टांत को जान सकते हो - और सच्चे ख्रिस्ती बन सकते हो, जैसे वो था। प्रभु की रहस्यमय योजना से यीषु की समक्ष लाया गया, यीषु का क्रुस उठाने के लिये मजबूर किया गया, परन्तु बाद मे जब वह परिवर्तित हुआ उसने अपनी इच्छा से उठाया फलस्वरूप, सिर्फ उनकी मुक्ति ही नही, परन्तु उनकी पत्नी और पुत्रो का भी परिवर्तन हुआ।

मै प्रार्थना करता हूँ की आप उनका क्रुस उठा सके और उनके पीछे जा सके चाहे कोई भी किंमत हो। क्योंकि अगर आप ये करते हो, आपका जीवन और मंजिल हमेषा के लिये बदल लायेगा, और आपकी प्रेरणा से और भी कई लोगो का जीवन।

यीषु मसीह के पास आओ! उनके रक्त से अपने आपको धोओ! कलीसिया में आओ! डनके लिये जिये! प्रभु आषीर्वाद ये! आमेन!।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डॉ. केगटन एल.चान द्वारा पढा गया पवित्र वाक्याः मरकुस 15:16-24।
धार्मिक प्रवचन के पहले डॉ. बेन्जामिन कीनफेड ग्रिफिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
“प्रभु रहस्यमय तरीकोसे चलते है” (वीलीयम काऊपर द्वारा, 1731-1800)।
“मैने उनको पेड़ पर लटकता हुआ देखा है” (जोन न्यूटन द्वारा, 1725-1807)।


रूपरेखा

कुरेनी का षमौन

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि द्वारा

“सिकन्दर और रूफुस का पिता षमौन, एक कुरेनी मनुश्य, जो गाँव से आ रहा था, उधर से निकला, उन्होनें उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रुस उठा ले चले।” (मरकुस 15:21)

(यूहन्ना 19:17; लूका 22:44; मती 26:67; 27:30)

I.    पहला, प्रभु की योजना द्वारा ही षमौन को यीषु के संपर्क मे लाया गया, नीतिवचन 16:9।

II.   दूसरा, यीषु का क्रुस उठाने के लिये षमौन को विवष किया गया,
लूका 23:34; मती 11:28-30; 16:24; लूका 8:14।

III.  तिसरा, षमौन ख्रिस्ती बना। मरकुस 15:21।