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अपने लिये रोअे!

WEEP FOR YOURSELF!

डॉ.आर.एल. हायमर्स, जूनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बेप्टीस टबरनेफल मे फरवरी 14, 2010 को
प्रभु के दिन की सुबह को दिया गया धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, February 14, 2010

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ”
(लूका 23:28)।


अपने दिमाग में ये दृष्य चित्रित करें। यीषु को क्रुरता से जख्मी किया गया। अब रोमी प्रधान, पतरस, ने यीषु को अपने सैनिकों के जूथ के साथ दूर भेजा-नीचे रास्ते पर, क्रुस पर चढानेकी जगह की ओर। यह देखते की यीषु उत्त्ोजीत ओर अधमरे से हुए वह मार से जो उन्होंने पायी है, वह भय से की वे षायद क्रुस पर चढाने से पहले रास्ते पर मर जाये, सैनिको ने भीड़़ से एक आदमी को बुलाया, और उसे जबरदस्ती से क्रुस को उठाने में यीषु की मदद के लिये भेजा।

बहुत बडी तागात में लोग यीषु के पीछे गये। ये वे लोग थे जो रो रो कर कह रह थे “उन्हें क्रुस पर चढाओ! उन्हे क्रुस पर चढाओ!” थोडी देर पहले। कुछ और लोग उनमे सामील हुअे। भीड़़ के बीच में यीषु है, उनके कपड़़े उनके जखम से बहने वाले खून से भीग गये थे, उनके सिर पर कांटो के ताज के बीच से उनके मुंह पर खून बह रहा था। उनकी “बहुत से लोग उसे देखकर चकित हुए” (यषायाह 52:14) “ताकि वे मुष्किल से पहचाने जाये” (रायरी स्टडी बाइबल, यषायाह 52:14 पर टीप्पणी)। और अब यीषु को क्रुस पर चढाकर षर्म नाक मृत्यु की और बढाया गया।

वह भीड जो उनके पीछे चल रही थी कई याजक और पुरनियो अपने चमकते हुए चहेरे से चलते थे जो उन्हे मरा हुआ देखना चाहते थे। वहा पर भी आक्रमक रोमी सैनिक थे, सेंकडो की तागात मे जो इसी तरह कार्य करके उनके लिये थोड़़ी भी सहानुभुति नही बनाते। और वहां पर रोता हुआ जुथ था जिनको याजको ने उनके क्रुस पर चढाने पर रोने के लिये रिष्वत दी थी। फिर भी इस धमाल वाली भीड़़ मे कुछ महिलायेभी थी। उन्होने दूसरो के सिर को दबाकर, और सीधा यीषु के पीछे आ गयी। वे जोरसे रो रो कर उनके तरफ अफसोस जाहिर करने लगी, जैसे की वे किसी अपने दोस्त या अपने रिष्तेदार की मैयत मे आयी हो।

ज्यादातर भीड़़ इन महिलाओ पर ध्यान नहीं दे रही थी। लेकिन कडवा बीलखना और आसूं भरे चहेरोने यीषु का ध्यान अपने ओर खींचा। वे रूके, और उनकी तरफ मूडे, उन्होने कहाँ,

“मेरे लिये मत रोओ; परन्तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

यह वाक्या सहजता से अपने आपसे दो मुदे मे बांटा जाता है।

I.  पहला, “मेरे लिये मत रोओ।”

कुछ प्रवक्ता कहते है की ये महिलायें पेष्‍ोवार रूदाली थी। लेकिन मुझे संदेह है की वे सच्चे है। अगर उन्हे यीषु के षौक के लिये पैसे दिये गये हो, तो यीषु को यह पता चल जाता, “क्योंकि वह आप ही जानता था कि मनुश्य के मन मे क्या है” (यूहन्ना 2:25)। परन्तु, उनको अधर्मी कहने के बजाये यीषु ने कहा, “मेरे लिये मत रोओ।” क्योंकि यीषु हमारे मन को जानते है, वे जानते थे कि वह महिलाये हकिकत मे उनके लिये रो रही थी।

दूसरे प्रवक्ता कहते है की “उनका यीषु के प्रति दया दिखाने का यह एक अच्छा तरीका था..., ऐसी भावना का दिखावा करना पूर्णतः निरर्थक है।” मेरे ख्याल से इस तरह का दिखावा कुछ अर्थपूर्ण नही है! क्यों, ये महिलायें यीषु को इस तरह तडपते देखकर जरूर रोयी होगी! मुझे षर्म आनी चाहिये अगर मै यह अच्छी महिलाओं के आसू को “सिर्फ दया” या “भावना” कहता हूँ। मुझे यह जानकर हैरत हुई की सिर्फ वे ही रो रही थी। भीड मे से बहुत से लोग तारणहार से अच्छे हुए थे। दूसरे उनसे खिलाये गये थे- और सभी को जानकारी थी की वे बेकसूर थे। अगर आप किसी को देखते हो जैसे उनके साथ व्यवहार किया गया था, मैं आषा रखता हूँ की आपकी आखोंसे आसूं नीकलेंगे!

यह भावना को “दया की भावना” कहाँ जाता है - जिसे दया, दुःख, सहानूभूति और करूणा की भावना होती है। वे महिलाओको हकिकत मे यीषु को उनकी तडपसे देखकर दुःख और करूणा थी, जब वे “छाती पीटती (उनको) और उनके लिये विलाप करती थी” (लूका 23:27)। प्रधान याजक को यीषु पर उनकी तडप के लिये कुछ भी दया नही आयी। उन्होने यीषु को कील से क्रुस पर चढाने के बाद उनकी ठठ्ठा की (मती 27:41)। रोमी सिपाहीयोंने यीषु के लिये कोई भी सहानुभूति नहीं दिखाई जब उन्होने उनके सिर पर मारा और उनके चेहरे पर थूंके। वे पथ्थर-दील, भावनाहीन और क्रुर थे।

परंतु ये महिलायें यीषु के लिये रो कर बीलखी और विलाप कर रही थी जैसे ही वे क्रुस की ओर गये। मैं सोचता हूं उनकी यह दया की भावना के लिये प्रषंसा करनी चाहिये। और यीषु के लिये उस तडप और षर्म के घंटे में लोगो की यह भावना और दुःख अच्छे थे। जैसे फ्रेडरिक फेबरने कहा,

ओ आओ और मेरे साथ कुछ पल षोक मनाओ;
ओ आओ आप तारणहार की बाजू;
ओ आओ साथ मिलकर, षोक करेः
यीषु, हमारे प्रभु, क्रुस पर चढाये गये।

हमारे पास उनके लिये बहाने आसूं नही है,
जब सैनिकोका डर और (याजको) मष्करी,
आह! देखिये कितने धैर्य से वे लटके हुए है;
यीषु, हमारे प्रभु, क्रुस पर चढाये गये।
    (“उन्होने उनको क्रुस पर चढाया” फ्रेडरिक. डब्ल्यु. फेबर द्वारा,
      1814-1863; “ये मध्यरात्रि है, और जैतुनकी डाल पर” के राग में)।

और फिर भी यीषु ये रोती हुई महिलाओंके तरफ मूडे और कहा, “मेरे लिये मत रोओ”(लूका 23:28)। उन्होने एैसा क्युं कहा? उनका रोना एक सामान्य भावना थी। यह बीना दया के क्रुरतावाले लागोकी टोली से कई ज्यादा अच्छा था, और सैनिको की और याजको की गंदी नियत से। यह मन की कोमलता बनाता है। और यह कोमलता सिर्फ कुदरती भावना है फिर भी, यह हकीकत में पापो का प्रायष्चित ही है। मुझे अच्छी तरह याद है एक बालक की तरह मेरी अपनी आखेंसे आसु का आना, जब मैने यीषु की तड़प के बारे मे सोचा। लेकिन यह सालो बाद नही जब मैं अपने पापों के बारे में दुःखी हुआ और उनके पास सच्चे परिवर्तन से आया।

पीछले रविवार को मैंने यीषु के कांटो वाले ताज पर प्रवचन दिया। धार्मिक प्रवचन के बाद एक जवान आदमी ने मुझसे कहां, “मुझे यीषु की मृत्यु पर दुःख हुआ है।” मैंने उनसे कहां की यीषु की तडप के लिये दुःखी होना कोई गलत नही है। लेकिन मैने उनसे ये भी कहा की इस तरह का दुःख सच्चा परिवर्तन नहीं है। बहुत गहरी भावना, पापो का प्रायष्चित, अपने दूसरे जन्म के पहले हर एक को महसूस करना चाहिये। और यह हमे दूसरे मुदे पर ले जाता है।

II.  दूसरा, “लेकिन अपने लिये रोओ।”

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

यीषु की तडप पर अपना दुःख जताना इतना महत्वपूर्ण नही है जितना अपने पापो के लिये रोना-जीसने उन्हे तडपने और क्रुस पर मरने के लिये मजबूर किया। इसीलिये यीषु ने कहां,

“...परन्तु अपने लिये रोओ” (लूका 23:28)।

जब यीषुने उनसे कहा “अपने लिये रोओ”, उनका मतलब था कि उन्होने जो पाप किये है उसके लिये रोना है, जिसने यीषु को तडपने और मार कर उन्हे बचाने के लिये मजबूर किया। प्रेरितो पौलूसने यह स्पश्ट किया है की यहाँ दो तरह का दुःख है जब वे कहते है,

“...परमेष्वर-भक्ति का षोक ऐसा पष्चाताप उत्पन्न करता है जिसका परिणाम उध्धार है... परन्तु सांसारिक षोक मृत्यु उत्पन्न करता है” (2 कुरिन्थियो 7:10)।

वो महिलाये जो सिर्फ यीषु के लिये उन्हे “दुनिया का दुःख था।” इस तरह का दुःख सिर्फ पसार होने वाली भावना है। यह परिवर्तन तक नही ले जाता। लोग जो सिर्फ यीषु के लिये दुःख महसूस करते है उन्हे इसमें गर्व होता है, और सोचते है “मैं अब ख्रिस्ती बनने के नजदीक हूँ।” लेकिन अगर वह दया महसूस करते है फिर भी सच्चे ख्रिस्ती बनने से काफी दूर है। यीषु की तडप के लीये सारी दया कुछ काम की नही, अपने आखोंमे आसुं लाने के बावजूद भी। डॉ. लेन्सकीने कहाँ, “पापीयोंको अपनेआप और अपने पापो के रोने दो, उनको पतरस की तरह विलाप करने दो (लूका 22:62); उनके आसूं षायद उन्हे कुछ हद तक कहीं ले जायें जो काम का हो” (आर.सी.एच. लेन्सकी, डी. डी., सेंट लूका के सुसमाचार का अनुवाद, अगसबर्ग प्रकाषित हाऊस, 1946 पृश्ठ 1128, लूका 23:28 पर टीप्पणी)।

आंसू जो सच्चे परिवर्तन तक ले जाते है वे आंसू पापो के पष्चाताप के है! पापो की सच्ची समज आप प्रभु के दीये गये कायदे की पवित्रता से कितने दूर हो उससे आती है। कायदा कहता है,

“तू अपने अरमेष्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी षक्ति के साथ प्रेम रखना” (व्यवस्था विवरण 6:5)।

क्या आपने वो किया? क्या आप अपने आपसे इमानदारीसे कह सकते है की आपने अपने सारे मनसे, और अपने सारे जीव से, और अपनी सारी षक्तिसे प्रभु को प्यार किया? क्या आपने?

सारी इंमानदारी मे, हकीकत मे, आप मुष्किल से प्रभु को याद करते हो! यह मानीये! और आप जब उनके बारे मे सोचेंगे, आपको उनके लिये सच्चा प्यार नही होगा। यह मानीये! जब आप कलीसिया मे नही होते हो तो प्रभु मुष्किल से आपके विचारो मे होते है। यह मानीये! तो क्या आपने नही, फिर, लगातार उनके सारे आदेष को तोडा है? क्या यह सच नही है की आपने अपने मनमें प्रभु के विपरित पाप कीये है सारे जीवनभर? और, तबसे यह सच है, अपने पापो के दुःख से प्रभु को मानीये! वेस्टमीन्स्टर षोर्टर केटेषीयम कहते है,


सवाल 11 ः हम षायद पापो के लीये सच में दुःखी न हो, इसलिये हम उसके लिये रोते नही?

जवाब ः अगर हम दूसरी चीजोके लिये रोने को तैयार रहते है, और पापो के लिये रोते नही है, तो अपने दुःख का सत्य एक बडा सवाल है (घ षोर्टर फेटेषीयम अॉफ घ वेस्टमीन्स्टर फनकेषन पवित्र वाक्या से समझाया और प्रमाणित किया हुआ, थोमस वीन्सेंट द्वारा, ट्रुथ ट्रस्ट के बेनर, 2004 मे 1674 का अध्याय फिर से छापा गया, पृश्ठ 230)।


यीषु ने कहा,

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालको के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

प्रेरितो याकूबने कहा,

“दुःखी हो, और षोक करो, और रोओ। तुम्हारी हँसी षोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी मे बदल जाए। प्रभु के सामने दीन बनो तो वह तुम्हे...” (याकूब 4:9-10)।

अगर आप दुःख महसूस नहीं करते हो और उदासी और आपके पापो से तूटे हुए, आप कभी भी सच्चे ख्रिस्ती कैसे बन सकते हो? डॉ. मेकन ने कहाँ, “ख्रिस्ती धर्म ...तूटे हुअे मन (स) ही षुरू होता है; यह षुरू होता है पापो की जागृतता से” (जे. ग्रेषाम मेकन, पी.एच.डी., ख्रिस्ती धर्म और स्वतंत्रता, इरडमान्स, 1990 में फिर से छपा हुआ 1923 का अध्याय, पृश्ठ 65)। यीषु ने कहाँ

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालको के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

उनके लिये मत रोओ, क्योंकि वे क्रुस पर कुछ मकसद से गये, आपके पापो का दंड चूकाने। और वे क्रुस पर खुषीसे गये, जैसे हमने इब्रानियो 12:2 मे पढा,

“विष्वास के कर्ता और सिध्ध करने वाले यीषु की और ताकते रहें, जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रुस का दुःख सहा, और परमेष्वर के सिहांसन की दाहिनी ओर जा बैठा” (इब्रानियों 12:2)।

और इसलिये यीषु ने कहाँ,

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालको के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

मसीह पर दया मत रखीये, परन्तु अपने आप पर दया रखीये। अपने लिये रोअे, क्यों कि आपके पाप आपकें न्याय लायेंगे। अपने लिये राअे क्योंकि आप पापो मे रहे हो, और उसके लिये आपको अंतरहित सजा मिलनेवाली है। अपने लिये रोअे क्योंकि आपने अपने आत्मा के उध्धार के लिये बहुत सामान्यता से सोचा है। अपने लिये रोअे, क्योंकि आपने आपके पापो के लिये यीषु के दिये हुअे समर्पण के बारे में बहुत कम सोचा है। अपने लिये रोअे, क्योंकि आपके पास है,

“... वाचा के लहू को जिसके द्वारा वह पवित्र ठहराया गया ... अपवित्र जाना है, और अनुग्रह के आत्मा (का) अपमान किया”(इब्रानियों 10:29)।

अपने लिये रोअे, जैसे चार्ल्स वेस्लीने किया, जिसने लिखा,

दया की गहराई? क्या वहां है
   मेरे लिये अभी भी दया आरक्षित है?
क्या मेरे प्रभु अपने क्रोध को धैर्य देंगे
   मुझे, पापीयोंका प्रमुख, बक्षेंगे?
दया की गहराई! क्या वहां है
   मेरे लिये अभी भी दया आरक्षित है?

मै उनके अनुग्रह के लिये बहोत रूका,
   लंबे समय तक उनके चेहरे को देखता रहा,
उनके बुलावे पर ध्यान न दिया,
   हजारो बार नीचा दिखाकर उनको दुःखी किया।
दया की गहराई। क्या वहाँ है
मेरे लिये अभी भी दया आरक्षित है?
      (“दया की गहराई” चार्ल्स वेस्ली द्वारा, 1707-1788)।

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालको के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

अगर आप अपने पापो के लिये अभी नही रोओगे, आपको यह मौका अपनी मृत्यु के बाद नही मिलेगा।

वह एक भयानक दृष्य था जो मैंने अभी अभी आपके लिये चित्रित किया-यीषु अपने क्रुस को लिये हुअे थे और महिलाये रो रही थी जैसे वे उनके पीछे चल रही है जहॉ उनको क्रुस पर चढाने वाले है। परन्तु और कितना षर्मनाक दृष्य हो सकता है कि कोई आपके पापो को लेकर नर्ककी-अग्नि मे घसीटा जा रहा हो! पाप क्रुस है! जिससे आपकी आत्मा को बांधा गया है, और पाप भरे विचार और आदतें किल है जो आपको वहाँ पकडे़ हुअे है। आपकी आत्मा आपके पापो को ले जा रही है, और प्यार से उनको ले जा रही है! आप खत्म न होने वाली सजा की और चले जा रहे हो, परन्तु आप हर कदम पर हंस रहे हो! आपका हर एक कदम आपको ज्वाला की ओर ले जा रहा है। और फिर भी अबतक, आप को डर नही लग रहा अपने पापो के लिये दुःख नही हो रहा - कोई पष्चाताप नही - कोई रोना नही! अगर ये आपके बारे मे बताया जाता है, मैं यीषु के षब्दो मे आपसे दरखास्त करता हूँ,

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालको के लिये रोओ” (लूका 23:28)।

अब मुझे प्रायष्चित के लिये तैयार करो,
   अब मुझे अपने पापो का अफसोस करने दो;
अब मेरी भूल का विद्रोह दूर हो जाये,
   रोओ, मानो और अब और पाप न करो...
दया कि गहराई ?! क्या वहा है
   मेरे लिये दया अभी भी आरक्षित है?

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन के पहले डॉ. क्रेगटन एल. चान द्वारा पढा गया पवित्र वाक्याः लूका 23:27-33।
धार्मिक प्रवचन के पहले श्रीमान बेन्जमिन कीनपेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
“दया की गहराई” (चार्ल्स वेस्ली द्वारा 1707-1788)।


रूपरेखा

अपने लिये रोओ!

डॉ.आर.एल. हायमंर्स, जूनि. द्वारा

“मेरे लिये मत रोओ, परन्तु अपने और अपने बालकों के लिये रोओ”
(लूका 23:28)।

(यषायाह 52:14)

I.    पहला, “मेरे लिये मत रोओ,” लूका 23:28अ; यूहन्ना 2:25;
लूका 23:27; मती 27:41।

II.   दूसरा, “परन्तु अपने लिये रोओ,” लूका 23:28ब; 2 कुरिन्थियों 7:10;
लूका 22:62; व्यवस्था विवरण 6:5; याकूब 4:9-10;
इब्रानियो 12:2; 10:29।