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पतरस का मन परिवर्तन

THECONVERSION OF PETER
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २८ मार्च, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Friday Evening, April 3, 2015

''शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम लोगों को मांग लिया है कि गेंहूं की नाईं फटके। परन्तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे: और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३१−३२)


मैंने अभी एक क्रमबध्द संदेश का प्रचार किया था जिसमें वर्णन था कि प्रभु यीशु यरूशलेम मरने के लिये जा रहे थे। आप इन तक आसानी से पहुंच सके इसलिये मैंने इन पर हायपरलिंक लगा दी हैं− ''डिटरमिंड टू सफर'' ''चेलों का भय'' ''दिस सेइंग वॉज हिड फ्राम हिम'' इसमें से प्रथम तो परिचयात्मक है। दूसरा और तीसरा संदेश चेलों के भय और अविश्वास पर केंदित है। यह स्पष्ट है कि जब तक यीशु जीवित नहीं हुये थे तब तक चेलों ने सुसमाचापर विश्वास नहीं किया था। मसीह ने कहा था,

''क्योंकि वह अपने चेलों को उपदेश देता और उन से कहता था, कि मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा, और वे उसे मार डालेंगे, और वह मरने के तीन दिन बाद जी उठेगा। पर यह बात उन की समझ में नहीं आई, और वे उस से पूछने से डरते थे'' (मरकुस ९:३१−३२)

इस वाक्यांश पर टिप्पणी करते हुये कि ''पर यह बात (सुसमाचार) उन की समझ में नहीं आई, और वे उस से पूछने से डरते थे'' डॉ ए टी राबर्टसन ने कहा था,

वे लगातार ही सुसमाचार को नहीं समझ पा रहे थेवे (मसीह) की मौत और पुर्नरूत्थान के प्रति संशयवादी और अविश्वासी बने रहे रूपांतरण की घटना के उपरांत भी.........जब वे पहाड़ से नीचे उतरे और यीशु ने पुर्नरूत्थान का उल्लेख् किया तब भी वे अपने मालिक के दिये गये संकेत के प्रति उलझे हुये थे (मरकुस ९:१०)। मत्ती १७:२३ वर्णन करता है कि वे यीशु द्वारा इस उल्लेख पर उदास हुये जब उन्होंने यीशु को (अपने कूस पर चढ़ाए जाने और पुर्नरूत्थान के विषय) में बोलते सुना परंतु मरकुस वर्णन करता है कि ''वे उस से पूछने से डरते थे'' (ए टी राबर्टसन, लिटरेचर डी, वर्ड पिक्चर्स इन दि न्यू टेस्टामेंट, ब्राडमैन प्रेस, १९३०, संस्करण १, पेज ३४४; मरकुस ९:३२ पर व्याख्या)

यह स्पष्ट प्रगट करता है कि चेलों ने मसीह के सुसमाचार में विश्वास नहीं किया था जब तक कि यीशु का पुनरुत्थान नहीं हुआ था।

डॉ जे वर्मन मैगी ने कहा था कि चेलों का नया जन्म और पुनरूद्वार तब तक नही हुआ था जब तक वे (पुनरूद्वित) मसीह से ईस्टर की शाम तक नहीं मिले थे। डॉ मैगी ने कहा, ''व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि जिस समय मसीह ने उन पर पवित्र आत्मा फूंका (यूहन्ना २०:२२) उसी घड़ी उन्होंने नया जन्म पाया इसके पहले परमेश्वर पवित्र आत्मा का वास उनके भीतर नहीं था'' (जे वर्मन मैगी, टी एच डी, थ्रू दि बाईबल, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, संस्करण ४, पेज ४९८; यूहन्ना २०:२१ पर व्याख्या)

पवित्र शास्त्र के इन पदों के अध्ययन के आधार पर, मैं भी इस बात से सहमत हूं कि पतरस का तब तक नया जन्म नहीं हुआ था जब तक वह मसीह से ईस्टर की शाम तक नहीं मिला था। देखिये इस पद में क्या लिखा है,

''शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम लोगों को मांग लिया है कि गेंहूं की नाईं फटके। परन्तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे; और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३१−३२)

शैतान ने यहूदा को पहले से ही अपने कब्जे में ले लिया था, ''और शैतान यहूदा में समाया'' (लूका २२:३) अब, यीशु पतरस से कहते हैं कि, ''हे शमौन, देख, शैतान ने (तुम को भी) लोगों को मांग लिया है कि गेंहूं की नाईं फटके।'' (लूका २२:३१) मसीह के दुख उठाने के समय पतरस ''निरंतर गहन पीडादायक क्षणों से'' होकर गुजरा बिल्कुल जैसे फटका जा रहा हो (डॉ आर सी एच लेंस्की)। पतरस के भीतर कुछ विश्वास मौजूद था और प्रभु ने प्रार्थना की थी कि यह विश्वास ''नाकाम न हो'' पतरस के इस विश्वास को स्पर्जन ने कहा है, यह ''विश्वास के पहले विश्वास'' कहलाता है अर्थात यह परिवर्तन के पहले प्रदीपन मिलना कहलाता है, परमेश्वर ने उसे पहले से ही प्रदीपन दे दिया था जिसके कारण वह अपने पर्याप्त विश्वास में होकर भी यह कह सका कि ''कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।'' (मत्ती १६:१६) अब मसीह ने प्रार्थना की कि पतरस का आरंभिक विश्वास अब और शैतान द्वारा न बुझाया जाये जब तक वह मसीह से ईस्टर की शाम मिल कर नया जन्म न प्राप्त कर ले,

''जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३२)

यद्यपि इस पद की प्राय: यह विवेचना नहीं है। किंतु मैं सोचता हूं कि यह सही है निवेदन है कि मेरे साथ अंत तक बने रहे तभी किसी निर्णय पर पहुंचे। यहां तीन बिंदुओं का वर्णन मैं करूंगा जिससे मैं यह मानता हूं कि मसीह इस पद में पतरस के वास्तविक परिवर्तन के विषय में जो ईस्टर की शाम को हुआ था बताते हैं,

१. पहला, यह पद पतरस के परिवर्तन का संकेत देता है क्योंकि किंग जेम्स बाईबल और जिनेवा बाईबल १५९९ ''परिवर्तन'' का सही रूप में यूनानी अनुवाद करते हैं

मैं जानता हूं कि एनआयवी इसे फिरना अनुवादित करती है और एनएएसवी इसे पुन: फिरना अनुवादित करती है परंतु इससे मुझे परेशानी होती है यह परस्पर-विरोधी है क्योंकि यूनानी में इस शब्द का मूल प्रेरितों के कार्य में वर्णित अर्थ के समान है ''जो अन्यजातियों के परिवर्तन के लिये कहता है।'' (देखें एनआयवी और एनएएसवी दोनो इसे परिवर्तन) अनुवादित करती है यूनानी भाषा के शब्द ''एपिस्ट्रेफों'' ''एपिस्ट्राफी'' को लूका २२:३२ में और प्रेरितों के कार्य १५:३ में ''क्यों फिरे'' या ''मन फेरना'' कह कर संबोधित किया गया है? मैं सोचता हूं इसका कारण साधारण सा है − क्योंकि अन्यजातियों ने वास्तव में ''मन फिराया'' था। वे मात्र ''फिरे नहीं'' थे। किंतु जब आधुनिक अनुवादक लूका में पतरस के विषय में अनुवाद करते हैं तो उनकी नयी सुसमाचारिय सोच और निर्णयवादी पूर्वधारणाओं ने उन्हें पुराने केजेवी और १५९९ जिनेवा बाईबल का मन फेरना शब्द प्रयुक्त करने से रोक दिया। मेरे विचार से तो आधुनिक अनुवाद में कमजोर संयोजन है बजाय उचित अनुवाद के। डॉ बर्नाड रेम के अनुसार, ''हर्मनूटिक बाइबल के अनुवाद का विज्ञान व कला है'' (बर्नाड रेम, पीएचडी, प्रोटेस्टैंट बिब्लीकल इंटरप्रीटेशन, बेकर बुक हाउस, १९७० संस्करण, पेज १) डॉ रेम ने यह भी कहा, सुधारवादी यह भी घोषणा करते हैं ''धर्मशास्त्र ही धर्मशास्त्र को प्रगट करता है'' हर्मनूटिक का एक नियम यह भी है कि धर्मशास्त्र ही धर्मशास्त्र को प्रगट करे अगर विद्वान प्रेरितों के कार्य १५:३ का अनुवाद ''अन्यजातियों ने मन फिराया'' करते हैं तो उन्हें लूका २२:३२ का भी अनुवाद ''जब तू फिरे'' करना चाहिये क्योंकि किंग जेम्स बाइबल और १५९९ जिनेवा बाइबल प्रामाणिक रूप में अनुवादित किये गये हैं! यहां तक कि न्यू किंग जेम्स में भी इसका अनुवाद सही नहीं है। वे अन्यजातियों के लिये तो ''मनपरिवर्तन'' प्रयुक्त करते हैं और पतरस के लिये लूका २२:३२ में ''फिरे'' शब्द का प्रयोग करते हैं इसलिये मैं बता देना चाहता हूं कि मैं किंग जेम्स बाइबल में से प्रचार करता हूं! मूडी की विवेचना के अनुसार, केजेवी बहुत अधिक मात्रा में आधुनिक अनुवादों पर प्रकाश डालते हैं! मैंने इसे समय समय पर सही पाया है।

''परन्तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे; और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३२)

मेरे मित्रों, यह केवल अन्यजातियों के लिये ही जरूरी नहीं था कि उन्हें मन फिराने की आवश्यकता थी! परंतु यह पतरस के लिये भी जरूरी था! केवल सड़को या गलियों में घूमने वाले लोगों के लिये ही मन फिराने की आवश्यकता नहीं है। पर सचमुच, आज शाम यहां चर्च में बैठने वाले लोगों के लिये भी, मन परिवर्तन आवश्यक है केवल ''फिरने'' से काम नहीं चलेगा! मन परिवर्तन आवश्यक है! यीशु ने कहा ''तुम्हें नया जन्म लेना आवश्यक है'' (यूहन्ना ३:७) तुम्हें मन परिवर्तन करके नया जन्म लेना आवश्यक है अन्यथा ऐसा जन ''परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।'' (यूहन्ना३:५)

''और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३२)

२. दूसरा, यह दर्शाता है कि केवल यीशु का अनुसरण करके और आध्यात्मिक प्रकाशन से ही किसी का नया जन्म नहीं हो जाता।

पतरस के परिवर्तन से यह दूसरा सबक हम सीखते हैं रोमन कैथोलिक और कई ''निर्णयवादी'' बैपटिस्ट व प्राटेस्टैंट यह सोचते हैं कि पतरस यीशु का अनुसरण करके परिवर्तित हो गया था। बाइबल यह कहती है,

''गलील की झील के किनारे किनारे जाते हुए, उस ने शमौन और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछुवे थे। और यीशु ने उन से कहा; मेरे पीछे चले आओ; मैं तुम को मनुष्यों के मछुवे बनाऊंगा। वे तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।'' (मरकुस १:१६−१८)

यह पेलेजियेनिज्म की सोच में त्रुटि थी कि चेले यीशु के अनुयायी बनने के द्वारा बचाये गये। और आज के कई चर्चेस में भी यह त्रुटि व्याप्त है। हां, पतरस और अंदियास ''तुरन्त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए''। लेकिन हम किसी मानवीय विधि से परिवर्तित नहीं हुये हैं (मरकुस १:१८) यहूदा जो ''विनाश का पुत्र'' था वह भी यीशु का अनुयायी था पर वह परिवर्तित नहीं हुआ था। लूका का सुसमाचार उसके बारे में लिखता है, ''यहूदा इकिरयोती, जो उसका पकड़वाने वाला बना।'' (लूका ६:१६) यीशु उसे ''शैतान'' कहकर बुलाते हैं। (यूहन्ना ६:७०)

यहूदा और पतरस यीशु का तीन वर्षो तक अनुसरण करते रहे लेकिन उन्होंने कभी भी सुसमाचार पर भरोसा नहीं किया। लूका १८:३१−३४ को सुनिये,

''फिर उस ने बारहों को साथ लेकर उन से कहा; देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और जितनी बातें मनुष्य के पुत्र के लिये भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा लिखी गई हैं वे सब पूरी होंगी। क्योंकि वह अन्यजातियों के हाथ में सौंपा जाएगा, और वे उसे ठट्ठों में उड़ाएंगे; और उसका अपमान करेंगे, और उस पर थूकेंगे। और उसे कोड़े मारेंगे, और घात करेंगे, और वह तीसरे दिन जी उठेगा। और उन्होंने इन बातों में से कोई बात न समझी; और यह बात उन में छिपी रही, और जो कहा गया था वह उन की समझ में न आया'' (लूका १८:३१−३४)

''यह बात उन में छिपी रही'' कौन सी बात? सुसमाचार के यह शब्द कि मसीह मारा जायेगा और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। पतरस और यहूदा ने यीशु के पीछे चलने का ''निर्णय'' तो लिया पर अभी भी सुसमाचार ''उनसे छिपा हुआ था।'' डॉ चाल्र्स सी रायरी ने कहा, ''यहूदा मसीह के बचाये नहीं गये चेले का एक उदाहरण है।'' (रायरी स्टडी बाइबल, मत्ती १०:१ पर व्याख्या) यहूदा की ही बात करके क्यों रूक जाये पतरस ने भी तो यीशु को त्याग दिया था? उनमें से दोनों ने ही सुसमाचार को नहीं समझा था। सुसमाचार ''उनसे छिपा हुआ था'' (लूका १८:३४)

मेरे मित्र आप चर्च में ''आगे जा सकते हैं'' लेकिन तौभी इससे आप नया जन्म नहीं प्राप्त कर लेते। आप यीशु के पीछे चलने का भी निर्णय ले सकते हैं तो भी बच नहीं सकते। यहां तक कि आप ''पापियों द्वारा दोहरायी जाने वाली प्रार्थना'' भी बोलेंगे तो भी बच नहीं सकते क्यों ? क्योंकि ये सब मानव द्वारा किये जाने वाले काम हैं और हम मानवीय कार्यो से परिवर्तित नहीं होते! बाइबल कहती है,

''क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।'' ( इफिसियों २:८−९)

बाइबल कहती है,

''तो उस ने हमारा उद्धार किया: और यह धर्म के कामों के कारण नहीं, जो हम ने आप किए, पर अपनी दया के अनुसार, नए जन्म के स्नान, और पवित्र आत्मा के हमें नया बनाने के द्वारा हुआ। जिसे उस ने हमारे उद्धारकर्ता यीशु मसीह के द्वारा हम पर अधिकाई से उंडेला।'' (तीतुस ३:५−६)

आप यीशु का अनुसरण करने से बच नहीं सकते हैं या अन्य कोई मानवीय कार्यो द्वारा बच सकते हैं। मैंने भी इसी तरह बचने का प्रयास किया था पर यह तरीका काम नहीं आया। मैं तीन वर्षो तक बैपटिस्ट प्रचारक रहा इसके पहले कि अनुग्रह द्वारा मेरा नया जन्म होता! तब मैं परमेश्वर द्वारा मसीह के पास खींचा गया और मसीह के रक्त में मेरे पाप धोये गये।
''परंतु'' कोई कहता है कि ''पतरस का बपतिस्मा हुआ था'' हां मैं जानता हूं। ऐसा ही यहूदा का भी हुआ था। और मेरा भी हुआ था − सात वर्षो पूर्व मेरा भी बपतिस्मा हुआ था जबकि मैने नया जन्म प्राप्त नहीं किया था। ''पर'' कोई कहता है कि ''पतरस में इतना विश्वास तो था कि वह कह सका कि 'तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।' (मत्ती १६:१६) − और यीशु ने कहा परमेश्वर ने उस पर यह बात ‘प्रगट की थी’'' (मत्ती १६:१७) हां, मैं जानता हूं। परमेश्वर ने मेरे परिवर्तन से भी कई साल पहले मुझ पर यह प्रगट किया था, कि यीशु ही मसीह है। परमेश्वर ने यह बात दुष्ट आत्माओं पर भी प्रगट की थी कि यीशु परमेश्वर के पुत्र थे ''और दुष्टात्मा चिल्लाती और यह कहती हुई कि तू परमेश्वर का पुत्र है.........क्योंकि वे जानते थे, कि यह मसीह है'' (लूका ४:४१) दुष्ट आत्माओं ने भी वही बात कही जो पतरस ने यीशु से कही थी। तो पतरस को एक दुष्ट आत्मा के समान ही ज्ञान था इसके पहले कि वह परिवर्तित हो जाता।

तो हम यीशु मसीह के अनुसरण करने से नया जन्म प्राप्त नहीं करते। हम बपतिस्मा लेने से नया जन्म प्राप्त नहीं करते यीशु ही मसीह है यह विश्वास करने से हम नया जन्म प्राप्त नहीं करते पतरस ने तो इन सब बातों का अनुभव किया था तो भी यीशु ने उससे कहा,

''और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३२)

३. इस पद को चारों सुसमाचारों के वर्णन के संदर्भ में इस पद को देखा जाना चाहिये

इन चारों सुसमाचारों में यीशु ने पतरस और अन्य लोगों से सीधे कह दिया था कि मैं यरूशलेम मरने के लिए जाउंगा और तीसरे दिन मरे हुओं मे से जीवित होउंगा। यह बात यीशु ने पतरस और अन्य लोगों के सामने पांच बार दोहराई। यह हमें मत्ती १६:२१;१७:१२;१७:२२−२३; २०:१८−१९ और २०:२८ में मिलता है। डॉ जे वरमन मैगी ने पतरस और अन्य लोगों से कहा, ''इतने गहन निर्देश के उपरांत भी चेले (सुसमाचार) का महत्व समझने मे असफल रहे जब तक कि यीशु जीवित नही हुए'' (जे वरमन मैगी, टी एच डी, थ्रू दि बाईबल, थॉमस नेलसन पब्लिशर्स, संस्करण ४, पेज ९३; मत्ती १६:२१ पर व्याख्या )

''और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३२)

''तो'' कोई कहता है कि ''बाईबल में कहां लिखा है कि पतरस का परिवर्तन यीशु के पुनरूत्थान के पश्चात हुआ?'' तो यह उतनी ही सीधी सी बात है जितना आपके चेहरे पर नाक, आपको चारों सुसमाचारों के अंत में यह लिखा मिलेगा! लूका इसे विशेष रूप से स्पष्ट तौर पर लिखता है,

''वे ये बातें कह ही रहे ये, कि वह आप ही उन के बीच में आ खड़ा हुआ; और उन से कहा, तुम्हें शान्ति मिले। परन्तु वे घबरा गए, और डर गए, और समझे, कि हम किसी भूत को देखते हैं। उस ने उन से कहा; क्यों घबराते हो और तुम्हारे मन में सन्देह क्यों उठते हैं? मेरे हाथ और मेरे पांव को देखो, कि मैं वहीं हूं; मुझे छूकर देखो; क्योंकि आत्मा के हड्डी मांस नहीं होता जैसा मुझ में देखते हो। यह कहकर उस ने उन्हें अपने हाथ पांव दिखाए। जब आनन्द के मारे उन को प्रतीति न हुई, और आश्चर्य करते थे, तो उस ने उन से पूछा; क्या यहां तुम्हारे पास कुछ भोजन है? उन्होंने उसे भूनी मछली का टुकड़ा दिया। उस ने लेकर उन के साम्हने खाया। फिर उस ने उन से कहा, ये मेरी वे बातें हैं, जो मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए, तुम से कही थीं, कि अवश्य है, कि जितनी बातें मूसा की व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं और भजनों की पुस्तकों में, मेरे विषय में लिखी हैं, सब पूरी हों। तब उस ने पवित्र शास्त्र बूझने के लिये उन की समझ खोल दी। '' (लूका २४: ३६−४५)

और यूहन्ना ने इस प्रकार लिखा कि,

''उसी दिन जो सप्ताह का पहिला दिन था, सन्ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्द थे, तब यीशु आया और बीच में खड़ा होकर उन से कहा, तुम्हें शान्ति मिले। और यह कहकर उस ने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेले प्रभु को देखकर आनन्दित हुए। यीशु ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं। यह कहकर उस ने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो।'' (यूहन्ना २०:१९−२२)

ईस्टर की शाम पुनरूत्थत मसीह पतरस और अन्य चेलों के समक्ष प्रगट हुये और उन्हें अपने हाथ में कीलों के और सीने में मारे गये भाले के घाव दिखाये। तत्पश्चात उन्होंने चेलों द्वारा कूसीकरण से संबंधित पुराने नियम की भविष्यवाणी समझने के लिये समझ खोल दी। तब उसने उन पर फूंका और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया तब उसने उन पर फूंका और उन्होंने पवित्र आत्मा पाया उस क्षण में पतरस ने पूर्ण रूप में (नया जन्म) पाया और उसका मन परिवर्तन हो गया। परमेश्वर पवित्र आत्मा का कार्य इतना अधिक शक्तिशाली था एवं यीशु को पुनरूत्थत शरीर में देखकर, उनके हाथ व पैरों में कीलों के निशान व उनकी छाती में घाव के निशान देखने का प्रभाव पतरस पर इतना अधिक पड़ा, कि पतरस को अब कोई संशय ही नहीं रहा। सालों बाद पतरस ने बड़े आत्म विश्वास के साथ लिखा कि, ''वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया.......... उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।'' (१ पतरस २:२४) यह प्रदर्शित करता है कि पतरस का वास्तविक नया जन्म हुआ था! ईस्टर की शाम अपने मन परिवर्तन के उपरांत पतरस ने कभी भी यीशु का इंकार नहीं किया। उसने जीवन के अंत समय तक मसीह के सुसमाचार का प्रचार किया। उसने जीवन के अंत समय तक मसीह के सुसमाचार का प्रचार किया। बहुत अधिक ताड़ना सहते हुये वह कूस पर उल्टा लटकाया गया और मसीह के प्रति विश्वसनीयता बनाये रखने के साथ उसके जीवन का अंत हुआ।
एक ओर बात। यीशु ने पतरस से कही, ''जब तू फिरे तो अपने भाइयों को दृढ़ करना'' (लूका २२:३२) इसलिये यह विचार आता है − जब आप सच्चे रूप में परिवर्तित होते हैं तो आप के कहने से या आप के महसूस करने से यह प्रमाणित नहीं होता। वास्तविक नये जन्म का प्रमाण यह है कि - क्या आप दूसरों को मजबूत बना सकते हैं? क्या उनकी सहायता कर सकते है? यूहन्ना के सुसमाचार के अंत में पुनरूत्थत यीशु ने पतरस से पूछा, ''क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा हे प्रभु तू यह जानता है.......... कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: यीशु ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।'' (यूहन्ना २१:१७) उस क्षण के पश्चात पतरस कभी भी नहीं कांपा। उसने सुसमाचार का प्रचार किया और अपने जीवन काल में कई लोगों को मसीह के पास लेकर आया। अगर आप वास्तविक परिवर्तित है, तो आप भी औरो को विश्वास में मजबूत बनायेंगे − उनके लिये वास्तविक मदद साबित होंगे और खोये हुओं के लिये आशिष का कारण बनेंगे। अगर आपके भीतर इस परिणाम की कमी है तो फिर आप सच्चे रूप में परिवर्तित नहीं है। आप के पास कोरे शब्द मात्र हैं। आप का अभी तक ''यीशु मसीह स्वयं से'' सामना नहीं हुआ है (इफिसियों २:२०) । हमारी प्रार्थना है कि परम प्रधान का आत्मा आप को प्रभु यीशु के पास खींच कर लायेगा और आपके सारे पापों को उसके लहू से धोयेगा! तब आप सच्चे रूप में परिवर्तित माने जायेंगे, जैसे पतरस का ईस्टर की शाम को नया जन्म हुआ था। आमीन, डॉ चान निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिए।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया
''क्रूस का आकर्षण'' (सेम्यएल स्टेनेट१७२७−१७९५)


रूपरेखा

पतरस का मन परिवर्तन

THE CONVERSION OF PETER

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

''शमौन, हे शमौन, देख, शैतान ने तुम लोगों को मांग लिया है कि गेंहूं की नाईं फटके। परन्तु मैं ने तेरे लिये बिनती की, कि तेरा विश्वास जाता न रहे: और जब तू फिरे, तो अपने भाइयों को स्थिर करना।'' (लूका २२:३१−३२)

(मरकुस ९:३१−३२,१०; मत्ती १७:२३; लूका २२:३; मत्ती१६:१६)

१. पहला, यह पद पतरस के परिवर्तन का संकेत देता है क्योंकि किंग जेम्स बाईबल और जिनेवा बाईबल १५९९ ''परिवर्तन'' का सही रूप में यूनानी अनुवाद करते हैं,
प्रेरितों के कार्य १५:३

२. दूसरा, यह दर्शाता है कि केवल यीशु का अनुसरण करके और आध्यात्मिक प्रकाशन से ही किसी का नया जन्म नहीं हो जाता, मरकुस १:१६−१८; लूका ६:१६; यूहन्ना ६:७०; लूका १८:३१−३४; इफिसियों २:८−९; तीतुस ३:५−६; मत्ती१६:१६,
१७; लूका ४:४१

३. चारों सुसमाचारों के वर्णन के संदर्भ में इस पद को देखा जाना चाहिये, मत्ती१६:२१;
१७:१२, २२−२३, २०:१८−१९, २८; लूका २४:३६−४५;
यूहन्ना २०:१९−२२; १पतरस २:२४; यूहन्ना २१:१७; इफिसियों २:२०