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स्पर्जन के अनुसार "समस्त धर्मविज्ञान का मूल"

SPURGEON’S “SUBSTANCE OF ALL THEOLOGY”
(Hindi)

डॉ आर एल हायमर्स जूनि द्वारा
रविवार की शाम ६ मई‚ २०१८ को लॉस ऐंजीलिस के
बैपटिस्ट टैबरनेकल में दिया गया संदेश
Preached by Dr. R. L. Hymers, Jr.
at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, May 6, 2018


स्पर्जन उस समय मात्र २७ वर्ष के थे। परंतु वे पहिले से ही लंदन के सर्वाधिक विख्यात प्रचारक माने जाते थे। प्रति रविवार प्रात: ३०‚००० हजार लोगों को संदेश सुनाया करते थे। २५ जून‚ १९६१ मंगलवार का दिन था जब ये प्रसिद्ध युवा प्रचारक स्वांसिया नगर में आया। उस दिन पानी बरसा था। इसलिये लोगों से कहा गया कि वे दो स्थानों पर संदेश देंगे। दिन के समय बारिश बंद हो गयी थी। उस संध्या इस मशहूर प्रचारक ने बाहर खुले में एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उनका वही संदेश मैं आज कुछ अपनी ओर से जोड़कर प्रस्तुत कर रहा हूं। हमारे आज के बाइबल पद यूहन्ना की पुस्तक ६:३७ को खोल लीजिए।

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है वे सब मेरे पास आयेंगे‚ उन्हें मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना ६:३७)

यह वह पद है जिस पर कोई हजारों संदेश तैयार कर सकता है। हम इस जीवनपर्यंत विधमान पद से दो बिंदु लेकर चर्चा करेंगे — इसके अंदर जो महान सत्य निहित है‚ उनको समझने में हम कभी नहीं थकेंगे।

वर्तमान में कई कैल्वीनिस्टिक प्रचारक इस पद के आधे हिस्से पर बहुत अच्छा बोल सकते हैं‚ ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे........ "

दूसरी ओर‚ बहुत सारे आर्मीनियन प्रचारक इस पद के दूसरे हिस्से‚ ‘‘उसे मैं कभी न निकालूंगा" पर बहुत अच्छा संदेश दे सकते हैं। किंतु ये लोग पहिले हिस्से ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे........ " पर इतनी प्रबलता से संदेश नहीं दे सकते हैं।

प्रचारकों के दोनों समूहों में ऐसे लोग हैं जो इस पद के दोनों भाग को नहीं देख सकते हैं। वे इस पद को एक ही दृष्टिकोण से देखते हैं। अगर वे दोनों आंखे खोलकर भी देखें तौभी इस पद के संपूर्ण अर्थ को समझाने में असफल रहेंगे।

आज रात मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगा कि इस पद के दोनों हिस्सों का अर्थ आप तक पहुंचाउं और वह सब प्रकट करूं — जिसे प्रभु यीशु चाहते हैं कि हम सुनें।

१॰ पहिला‚ यह वह नींव है जिस पर उद्धार स्थिर है।

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे"

हमारे कर्मो पर हमारा मोक्ष या उद्धार निर्भर नहीं करता। यह वह चीज है जो परमेश्वर यहोवा अर्थात पिता द्वारा प्रदान की जाती है। पिता कुछ निश्चित लोगों को अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को देते हैं। इसलिये पुत्र कहते हैं, ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।" प्रत्येक जो मसीह के पास आता है, उसे पिता ने मसीह के पास भेजा है। पिता उनके मनों में यह बात डालते हैं इसलिये वे मसीह के पास आते हैं। क्यों किसी व्यक्ति को उद्धार मिलता है, इसका कारण पिता में मिलता है — न कि उद्धार पाने के कुछ प्रयास करने में या न करने में। उद्धार पाने वाले ने कैसा महसूस किया या न किया, ये भी कुछ मायने नहीं रखता। ये तो उद्धार पाने वाले की सामर्थ के बाहर की बात है, पूर्णतः विराट परमेश्वर यहोवा का परम अनुग्रह ही उस पर प्रकट होता है, जो उसे उद्धार अलौकिक अनुकंपा से मिलता है। यहोवा के अपार अनुग्रह में यह संभव बनाया जाता है कि जिसको उद्धार मिलने वाला होता है, वह खुद ब खुद प्रभु यीशु की ओर खिंचा चला आता है। बाइबल में आवश्यक रूप में इस बिंदु का उल्लेख है। बाइबल कहती है,

‘‘परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया‚ उस ने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से‚ न शरीर की इच्छा से‚ न मनुष्य की इच्छा से‚ परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:१२‚ १३)

बाइबल आगे यह भी कहती है‚

‘‘सो यह न तो चाहने वाले की‚ न दौड़ने वाले की परन्तु दया करने वाले परमेश्वर की बात है" (रोमियों ९:१६)

हर वह व्यक्ति जो स्वर्ग में है‚ इसलिये है क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने उसे मसीह के पास खींचा हैं।

और हर वह व्यक्ति जो स्वर्ग जाने की राह पर है‚ यह उपाय एकमात्र पिता परमेश्वर ने ही संभव किया है कि ‘‘दूसरे से अलग हो" (१ कुरूं ४:७)

सभी मनुष्य‚ स्वभावगत ऐसे होते हैं कि प्रभु यीशु के आमंत्रण को ठुकराते हैं। ‘‘सब के सब पाप के वश में हैं........ कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं। सब भटक गए हैं" (रोमियों ३:९‚ ११‚ १२) लोग यीशु के पास नहीं आने के लिये बहाने बनाते हैं। लूका में वर्णित कहानी बताती है ‘‘वे सब के सब क्षमा मांगने लगे" (लूका १४:१८) कुछ लोगों का बहाना है हम यीशु को देख नहीं सकते इसलिये उनके पास आने में दिक्कत है। दूसरे कहते हैं‚ हम उनको स्पर्श नहीं कर सकते इसलिये उनको मानने में दिक्कत है। कुछ लोग मसीह की शिक्षाओं को दोहरा देने को ही सब कुछ समझते हैं। ये सब बहाने हैं सीधे प्रभु यीशु के पास नहीं आने के लिये। लेकिन‚ परमेश्वर यहोवा अपने परम प्रताप में ऐसी व्यवस्था करते हैं कि कुछ लोगों में वह खास दृष्टि उत्पन्न करते हैं।

कुछ पुरूषों और स्त्रियों में वे ऐसी इच्छा उत्पन्न करते हैं कि वे मसीह के पास खिंचे चले आते हैं ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।" वे लोग ‘‘तेरे पराक्रम के दिन स्वेच्छाबलि बनते हैं" (भजन ११०:३)। यहोवा अपनी पवित्र आत्मा की सामर्थ से कुछ लोगों को मसीह के पास खींचते हैं। ‘‘हम इसलिये प्रेम करते हैं कि पहिले परमेश्वर ने हम से प्रेम किया" (१ यूहन्ना ४:१९)। मेरे मित्रों‚ इसे चुनाव कहते हैं।

बहुत लंबे समय तक मैं इस पर विश्वास नहीं करता था। तौभी मुझे आश्चर्य होता था कि मैंने किस प्रकार उद्धार पाया। मुझे हंटिगटन पार्क के फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च के संडे स्कूल में ले जाया गया था। जहां तक मुझे ज्ञात है कि उस बड़ी कक्षा में से आज मैं ही हूं जो चर्च में हूं। जहां तक मेरा ज्ञान है‚ एकमात्र मैंने ही नया जन्म पाया। ऐसा कैसे हो सकता था? मैं तो एक बहुत बेकार परिवार से आया हुआ था। चर्च में आने के लिये मेरी हंसी उड़ायी जाती और सताया जाता था। कोई प्रोत्साहन मुझे नहीं मिलता था। तौभी दिल में एक आशा पलती थी जो कहती थी‚ यीशु के बिना उद्धार कहीं नहीं है। मैंने कैसे यह जाना? मेरी आत्मकथा‚ अगेंस्ट ऑल फियर्स पढ़िये। मेरे लिये कहीं कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा था। बावजूद इसके‚ आज सत्तर साल बीत चुके हैं और मैं उद्धार का शुभ संदेश सुना रहा हूं! संडे स्कूल की कक्षा में से मैं एक को भी नहीं जानता हूं जो मसीह का सच्चा विश्वासी बना। और यह भी संभव हुआ कि किसी ने शुभ संदेश सुनाते हुए साठ साल बिताये हों। कैसे इतना अनुग्रह बना रहा?

डॉ कैगन को देखिये। नास्तिक के समान ही उनकी परवरिश हुई। किसी ने उनको सहयोग नहीं दिया। किसी ने देखभाल नहीं की। तौभी मेरे जानने वालों में वे सबसे उत्तम मसीही जन हैं। ये कैसे हुआ?

मिसिस सालाजर को देखिये। चर्च आने के कारण पति उनको मारते थे। उनके बच्चों ने चर्च आना छोड़ दिया और परमेश्वर के लिये अनुपयोगी हो गये। तौभी पैदल चल कर चर्च आती रही हैं। अपने आप में आनंदित महिला है। चर्च में युवाओं की मदद करने में वे अपने जीवन को व्यतीत करती हैं। ये किसने संभव किया?

ऐरोन यांसी को देखिये! उसके परिवार में कोई एक भी भला मसीही जन नहीं है। तौभी मैंने अभी तक उत्तम मसीहियों में से एक के रूप में ऐरोन को जाना है। तो ये कैसे संभव हुआ?

मिसिस विनी चॉन को देखिये। हमेशा खामोशी से पीछे रहकर प्रभु यीशु के लिये कार्य करती रहती हैं। चर्च में और दूसरी लड़कियों की तुलना में शुभ संदेश प्रचार के लिये वही सबसे अधिक नाम लेकर आती है। आखिर क्या चीज है जो उनको प्रेरित करती है? और कौन सी सत्ता उनसे यह सब करवाती है?

जॉन सैम्यूएल कैगन के जीवन को देखिये। उन्होंने चर्च के बड़े विभाजन को देखा। उस विभाजन ने उनके सारे मित्र छीन लिये। तौभी हर रविवार की सुबह वे यहां संदेश दे रहे हैं। सैमनरी में प्रचार कार्य के लिये प्रशिक्षण भी ले रहे हैं। किसने ये सब संभव किया?

मिसिस हायमर्स का उदाहरण सामने है। जब पहिली बार उन्होंने मुझे शुभ संदेश का प्रचार करते हुए सुना, अदभुत तौर पर उद्धार प्राप्त किया। उनके सारे मित्र स्वार्थ और पाप के जीवन में लिप्त होने के लिये चर्च छोड़कर चले गये थे। किंतु मिसिस हायमर्स परमेश्वर यहोवा की एक सशक्त योद्धा के रूप में उभरी! तो ये कैसे संभव हो पाया?

इन सब लोगों ने किस तरह नया जन्म पाया और मसीह व चर्च के प्रति विश्वसनीय बने रहे, इसको समझाने के लिये मैं इससे बेहतर और कोई तरीका नहीं जानता। इनका चुनाव ही एकमात्र उत्तर है! ये लोग भी धर्म प्रधान अय्यूब के समान कहते हैं,

‘‘यद्यपि, परमेश्वर ने मुझे घात किया है, तौभी मैं उन पर भरोसा रखूंगा" (अय्यूब १३:१५)

अभी तक जिस महानतम सच्चे मसीही जन को मैंने जाना है तो वे थे पास्टर रिचर्ड वर्मब्रैंड। उनकी कहानी‚ टाचर्ड फॉर क्राईस्ट पढ़िये । तब आप मुझसे सहमत हो जावेंगे कि परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में वे बिली ग्राहम, पोप जॉन पॉल द्वितीय और २० वीं सदी के किसी भी पुरोहित से बढ़कर थे। एक कम्यूनिस्ट जेल में वे १४ सालों तक मरने की हद तक पहुंचकर यातना झेलते रहे। उन्हें इतना पीटा जाता कि दम ही तोड़ दें। भूखा रखा जाता कि दिमाग से विक्षिप्त हो जाते। वे भी धर्म प्रधान अय्यूब के समान कह सके‚

‘‘यद्यपि, परमेश्वर ने मुझे घात किया है, तौभी मैं उन पर भरोसा रखूंगा" (अय्यूब १३:१५)

ये कैसे संभव हो सकता था कि यह परमेश्वर यहोवा का सर्वश्रेष्ठ परम अनुग्रह न था जिसने रिचर्ड को चुना और उन्हें मसीह यीशु की ओर खींचा? ये कैसे हो सकता था कि मसीह के शब्द सही नहीं ठहरते? क्योंकि स्वयं प्रभु यीशु ने कहा था,

‘‘तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है" (यूहन्ना १५:१६)

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे"

२॰ दूसरा‚ जो लोग यीशु को सौंपे गये‚ उनका अनंतकाल तक के लिये उद्धार हो गया है।

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे"

शाश्वत रूप में यह प्रक्रिया निर्धारित हो चुकी है और इस तरह तय की गयी है कि कोई मनुष्य या यहां तक कि शैतान भी इसे बदल नहीं सकता। चाहे कोई बड़ा ख्रीस्त विरोधी ही क्यों न हो। चाहे जिन के नाम ‘‘उस मेम्ने की जीवन की पुस्तक में लिखे नहीं गए‚ जो जगत की उत्पत्ति के समय से घात हुआ है" वे भी क्यों न हो (प्रकाशितवाक्य १३:८) । ठहराये गये अंतिम व्यक्ति तक पवित्र आत्मा उसे खींचेगा और वह जन मसीह के पास आयेगा। परमेश्वर यहोवा के द्वारा प्रभु यीशु मसीह के अनमोल लहू में सुरक्षित रखा जायेगा। एवं उनकी भेड़ों के साथ उस उंचे महिमायुक्त शिखरों पर उस अलौकिक स्वर्ग में ले जाया जायेगा!

सुनिये! ऐसा लिखा है ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।" जिन्हें भी परमेश्वर यहोवा ने प्रभु यीशु को सौंपा है‚ उनमें से एक भी नष्ट नहीं होगा। अगर उनमें से एक भी खो जाने वाला होता तो बाइबल का यह पद यूं कहता कि ‘‘लगभग सब" या ‘‘केवल एक को छोड़कर सब" । परंतु यहां स्पष्ट उल्लेख है कि ‘‘सब" अर्थात बिना किसी एक को भी छोड़कर। मसीह के मुकुट का एक हीरा भी खोयेगा तो मुकुट महिमा मंडित नहीं कहलायेगा। मसीह की देह का एक सदस्य भी अगर नष्ट होगा, तो मसीह की देह अधूरी ही मानी जायेगी।

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।" ‘‘मान लीजिए वे नहीं आयेंगे।" लेकिन ऐसे शाश्वत निर्धारित सत्य में मान लीजिए वाली बात मैं नहीं कर सकता। क्योंकि मसीह कहते हैं कि वे आयेंगे। परमेश्वर के ठहराये समय में उनकी सामर्थ से चुने हुओं के भीतर वह इच्छा उत्पन्न होगी। यद्यपि मनुष्य को स्वतंत्र इच्छाशक्ति सौंपी गयी हैं किंतु उसकी इच्छा को यहोवा झुका सकते हैं। मसीह के पास आने के लिये इच्छुक बना सकते हैं। आखिर, मनुष्य का निर्माता कौन? यहोवा परमेश्वर! तो परमेश्वर का रचनाकार कौन? क्या हम सर्वश्रेष्ठ परम पिता के अनुग्रह के सिंहासन तक मनुष्य को उठा ले जाने के योग्य हैं क्या? कौन स्वामी हो सकता है और स्वामी के मार्ग को संचालित कर सकता है? परमेश्वर या मनुष्य? परमेश्वर की इच्छा जो कहती है कि ‘‘वे आयेंगे," तो वह यह भी जानती है कि कैसे उन्हें यीशु मसीह के समीप लाया जाये।

अब हम पढ़ते हैं कि सैकड़ों कठोर हृदय वाले मुस्लिम भी प्रभु यीशु के समीप आ रहे हैं। उस समय की तुलना में‚ जब शैतान प्रेरित धर्म ने एसाव की संतानों को अंधा कर दिया था‚ वर्तमान में अधिक संख्या में वे मसीह को स्वीकार कर रहे हैं। ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।" अनेक माध्यमों को परम पिता उपयोग में ला रहे हैं, यहां तक कि चीनं, ईरान, समुद्री टापुओं तक में, और इसके अतिरिक्त शैतान के बंधन तले दबे कैदियों का जीवन भी बदल रहा है। फिने नामक शख्स की झूठी शिक्षाएं भी सर्वशक्तिशाली यहोवा के सर्वश्रेष्ठ अनुग्रह की ताकत का असर कम नहीं कर सकती है! यह धर्मशास्त्र का सिद्धांत है! यह यहोवा परमेश्वर का सिद्धांत है! वह सिद्धांत जिसे समय समय पर आत्मिक जाग्रति लाने के लिये वे प्रयोग में लाते रहें। हिप्पियों का नशीली दवाएं लेना, मुक्त सैक्स का वातावरण भी प्रभु यीशु के आंदोलन को रोक नहीं पाया जिसमें शैतान की हजारों संताने परमेश्वर यहोवा के अनुग्रह में स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर गयीं! वे पुनः इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं! ‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है‚ वे सब मेरे पास आयेंगे।"

अगर परम पिता द्वारा चुना गया कोई व्यक्ति हो जिसका हृदय इतना कठोर हो गया हो कि उसे अपने लिये उद्धार पाने की कोई आशा ही नहीं जगती हो? तो क्या होगा? ये निर्विवाद सत्य है‚ अगर चुना गया है तो पिता का अनुग्रह उसे अपनी जकड़ में ले ही लेगा। आंसु उसके गालों से लुढ़कने लगेंगे‚ उसके भीतर ऐसी इच्छा उत्पन्न की जायेगी कि वह प्रभु यीशु के पास आ जाये और अपने पापों से छुटकारा पा जाये। मैं ८ वर्षो से कर्मो के बलबूते पर उद्धार कमाना चाह रहा था। अगर प्रभु परमेश्वर मेरी इच्छा को झुका सकते हैं‚ मुझे यीशु के कदमों में ला सकते हैं‚ तो वे किसी को भी उनके कदमों में ला सकते हैं! चुनी गयी ऐसी कोई आत्मा नहीं‚ जो उम्मीद की पहुंच से बाहर हो। ऐसा कोई चुना हुआ जन नहीं जो यीशु के पास खींच कर नहीं लाया जा सके। भले ही वह नर्क के द्वार तक ही क्यों न पहुंच गया हो! परमेश्वर अपने हाथ को प्रकट कर सकते हैं‚ उस हाथ को आगे बढ़ा सकते हैं और उस व्यक्ति को ‘‘आग में से" खींच सकते हैं (जर्कयाह ३:२)।

३॰ तीसरा‚ इस पद के दूसरे भाग को सुनिये।

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है वे सब मेरे पास आयेंगे‚ उन्हें मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना ६:३७)

इस पद में कुछ भी गलती नहीं है। गलत व्यक्ति नहीं आयेगा। अगर कोई भटका हुआ पापी जन मसीह के पास आता है‚ उसे निश्चय है कि वह ठीक हो जायेगा। कोई कह सकता है‚ ‘‘मान लीजिए मैं गलत तरीके से आ गया तो।" तो सुनिये‚ आप गलत तरीके से यीशु के पास आ ही नहीं सकते। यीशु के वचन थे‚ ‘‘कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले" (यूहन्ना ६:४४‚ ६५) अगर आप प्रभु यीशु के पास आते हैं‚ तो आने की वह सामर्थ पूर्णत: यहोवा परमेश्वर ने आप को सौंपी है। अगर यीशु के पास आ गये हैं तो वे आप को अपने पास से कभी निकालेंगे नहीं। कोई भी पापी जन जब यीशु के पास आता है‚ तो कोई संभव कारण ही नहीं कि वे उसे अपने से दूर कर देवें। यीशु का आमंत्रण कहता है‚

‘‘हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों‚ मेरे पास आओ‚ मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती ११:२८)

यह प्रभु का आमंत्रण और उनका वायदा दोनो है।

स्पर्जन‚ जो मात्र २७ वर्ष के थे‚ उन्होंने अपने संदेश को इन शब्दों से समाप्त किया:

आप में से प्रत्येक से प्रभु यीशु यह कहते हैं — यह शुभ संदेश का आमंत्रण है: ‘‘जिस दशा में हैं‚ वैसे ही‚ यीशु के पास आ जाइये‚ आ जाइये‚ आ जाइये। आप कहते है‚ ‘‘अभी तो मेरे भीतर उद्धार पाने को लेकर और भावनाएं पैदा होगीं।" ‘‘नहीं‚ जिस रूप में हैं‚ वैसे ही आ जाइये।" ‘‘परंतु मुझे घर जाने दीजिए‚ इस बारे में प्रार्थना करने दीजिए।" ‘‘नहीं‚ नहीं‚ यीशु के पास अपने मौलिक रूप में ही आ जाइये।" अगर सीधे यीशु पर भरोसा है‚ तो वे तुम्हें बचा लेंगे। सचमुच‚ मेरी प्रार्थना है कि आप यीशु पर विश्वास करने का हियाव करें। अगर कोई आपत्ति लेता है‚ ‘‘कि तुम तो बड़े भ्रष्ट पापी जन हो" तो जवाब दीजिए‚ ‘‘हां‚ यह सच है कि मैं हूं‚ किंतु स्वयं यीशु ने मुझे बुलाया है।"

आ जाइये‚ हे पापी‚ असहाय‚ निंदनीय जन‚
   दुर्बल घायल‚ बीमार और कष्ट में पड़े हुए;
यीशु तैयार खड़े आप को बचाने के लिये‚
   करूणा और सामर्थ से भरपूर;

वह योग्य हैं‚
   वह इच्छुक आप को बचाने के लिये‚ वह इच्छुक हैं‚
अब और संदेह न कीजिए
   (‘‘आ जाइये‚ हे पापी जन" जोसेफ हार्ट‚ १७१२—१७६८)

हे पापी जन‚ यीशु पर विश्वास रखिये और उन पर भरोसा रखते हुए अगर आप नष्ट हो गये‚ तो आप के साथ मैं भी नष्ट हो जाउंगा। परंतु ऐसा कभी हो नहीं सकता जो प्रभु यीशु पर विश्वास रखते हैं‚ वे कभी नष्ट नहीं होंगे। यीशु के पास आयेंगे‚ तो वे आप को अपने पास से निकाल नहीं देंगे। अपने आप आकलन मत लगाइये। केवल उन पर विश्वास कीजिए‚ और आप की आत्मा कभी नष्ट नहीं होगी‚ क्योंकि वे आप से प्रेम रखते हैं।


अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स आप से सुनना चाहेंगे। जब आप डॉ हिमर्स को पत्र लिखें तो आप को यह बताना आवश्यक होगा कि आप किस देश से हैं अन्यथा वह आप की ई मेल का उत्तर नहीं दे पायेंगे। अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स को इस पते पर ई मेल भेजिये उन्हे आप किस देश से हैं लिखना न भूलें।। डॉ हिमर्स को इस पते पर rlhymersjr@sbcglobal.net (यहां क्लिक कीजिये) ई मेल भेज सकते हैं। आप डॉ हिमर्स को किसी भी भाषा में ई मेल भेज सकते हैं पर अंगेजी भाषा में भेजना उत्तम होगा। अगर डॉ हिमर्स को डाक द्वारा पत्र भेजना चाहते हैं तो उनका पता इस प्रकार है पी ओ बाक्स १५३०८‚ लॉस ऐंजील्स‚ केलीफोर्निया ९००१५। आप उन्हें इस नंबर पर टेलीफोन भी कर सकते हैं (८१८) ३५२ − ०४५२।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व बाइबल से पढ़ा गयाः यूहन्ना ६:३५—३९
संदेश के पूर्व मि बैंजामिन किंकेड ग्रिफिथ द्वारा एकल गान:
‘‘कम यी सिनर्स" (जोसेफ हार्ट द्वारा रचित‚ १७१२—१७६८)


रूपरेखा

स्पर्जन के अनुसार ‘‘समस्त धर्मविज्ञान का मूल"

SPURGEON’S “SUBSTANCE OF ALL THEOLOGY”

डॉ आर एल हायमर्स जूनि द्वारा दिया गया संदेश

‘‘जो कुछ पिता मुझे देता है वे सब मेरे पास आयेंगे‚ उन्हें मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना ६:३७)

१॰ पहिला‚ यह वह नींव है जिस पर उद्धार स्थिर है‚यूहन्ना ६:३७ अ; यूह॰ १:१२‚१३;
रोमियों ९:१६; १ कुरूं ४:७; रोमि॰ ३:९‚११‚१२; लूका १४:१८;
भजन ११०:३; १ यूह॰ ४:१९; १३:१५; यूहन्ना १५:१६

२॰ दूसरा‚ जो लोग यीशु को सौंपे गये‚ उनका अनंतकाल तक के लिये उद्धार हो गया है‚
यूहन्ना ६:३७ अ; प्रकाशित १३:८; जर्कयाह ३:२

३॰ तीसरा‚ इस पद के दूसरे भाग को सुनिये‚ यूहन्ना ६:३७ ब; मत्ती ११:२८