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आदम का तहबंद आप को छिपा नहीं सकता!

ADAM’S APRON CANNOT HIDE YOU!
(उत्पत्ति की पुस्तक पर संदेश ९१)
(SERMON #91 ON THE BOOK OF GENESIS)
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, ११ दिसंबर, २०१६ को लॉस ऐंजीलिस
के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, December 11, 2016

‘‘सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।'' (उत्पत्ति २:१६−१७)


जब मैं छोटा था मुझे विकासवाद की शिक्षा मिली थी। पर प्रत्येक जीवित वस्तु जीवन के रूप से विकसित हुई थी। मैंने इस पर विश्वास किया। अब मैं उस पर विश्वास करता हूं जो बाइबल कहती है,

‘‘और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया और आदम जीवता प्राणी बन गया।'' (उत्पत्ति २:७)

जीवन के निम्न रूपों से मनुष्य विकसित हुआ, इस धारणा से मेरा मन कैसे हटा? इस विषय का अध्ययन करने से मेरा मन इस पर से नहीं हटा। कई पुस्तकें हैं जो यह शिक्षा देती हैं कि विकासवाद झूठ है। परंतु मैंने उन्हें नहीं पढ़ा। वे बाद में मेरे लिये उपयोगी सिद्व हुई। परंतु जो पुस्तकें विकासवाद के विरूद्व सिखाती थी, उनकी कोई भूमिका मेरी इस धारणा को बदलने में नहीं थी। किसी की भी कोई भूमिका नहीं थी। जिस क्षण मेरा मन परिवर्तित हुआ, मैंने विकासवाद को मानने से इंकार कर दिया। मेरे विचारों को बदलना परमेश्वर का कार्य था। यह स्वयं परमेश्वर का कार्य था, जिन्होंने मेरे विचारों को बदला। परमेश्वर ने असत्य परिकल्पना से मेरे मन के विश्वास को हटा लिया। नये नियम में यूनानी शब्द ‘‘परिवर्तित'' होने का अर्थ है ‘‘मुड़ जाना या पलटना'' (स्ट्रॉंग)। सच्चे परिवर्तन में हमारे विचार परिवर्तित होते है, विचारों की दिशा बदल दी जाती है। परमेश्वर ने मेरे मन की धारणा को बदल दिया और मेरे विचारों को डार्विनवाद के असत्य से के सत्य की ओर मोड़ दिया। सच्चे परिवर्तन में हमारे विचार परिवर्तित होते है, विचारों की दिशा बदल दी जाती है। आप पायेंगे कि एक समय विकासवाद मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण हुआ करता था। परंतु एक छोटे से क्षण में मैने यीशु पर विश्वास किया। उस संक्षिप्त क्षण में परमेश्वर ने मेरे दिमाग को बदल कर रख दिया, मेरी धारणा बदल गयी - मैं अपने विचारों में जान गया कि विकासवाद एक झूठ था, शैतानी झूठ। उस एक क्षण में मैं जान गया कि परमेश्वर ने मनुष्य को मिटटी से बनाया था। डॉ हैनरी एम मौरिस ने कहा था, ‘‘मनुष्य का शरीर पृथ्वी के तत्व कार्बन, हायडोजन, ऑक्सीजन और अन्य तत्व से मिल कर बना है'' (डिफेंडर्स स्टडी बाइबल उत्पत्ति २:७ पर व्याख्या)। पृथ्वी पर पाये जाने वाले तत्व मनुष्य के शरीर में भी पाये जाते हैं। इसलिये जब मै परिवर्तित हुआ, मैं निश्चित रूप से जान गया कि पहला मनुष्य मिटटी से ही रचा गया - और मैंने विज्ञान की उस परिकल्पना को झूठ समझकर मानने से इंकार कर दिया कि मनुष्य जीवन के निम्न रूपों से निकला है।

प्रथम आदम बिल्कुल निर्दोष बनाया गया था। उसे एक सुंदर बगीचे में रखा गया था। बगीचे का हर पेड़ स्वादिष्ट फल पैदा करता था। आदम को सिर्फ यह करना था कि उन तक पहुंचना था और तोड़ना था। चूंकि प्रत्येक जानवर और पक्षी शाकाहारी थे, आदम का कोई शत्रु नहीं था। तब परमेश्वर ने उसके लिये एक सुंदर स्त्री बनाई। वे दोनों उस उत्तम वातावरण में रहते थे। प्रत्येक सांझ को परमेश्वर बगीचे में आता था और उनसे बातें किया करता था। परमेश्वर से उनकी बातचीत को रोकने के लिये कोई पाप वहां नहीं था।

यद्यपि शैतान वहां था। वह परमेश्वर का एक खूबसूरत स्वर्गदूत था, जिसने विद्रोह किया था। परमेश्वर ने उसे स्वर्ग से नीचे धरती पर फेंक दिया। वह आदम और हवा पर प्रहार नहीं कर सका। परमेश्वर ने उन दोनों को शैतान के सीधे प्रहार से बचाया था। शैतान अब सिर्फ उन्हें परीक्षा में डाल सकता था। केवल एक चीज वहां थी जिससे वह उनकी परीक्षा ले सकता था। यह परीक्षा थी भले बुरे के पेड़ से फल तोड़कर खाने की परीक्षा। परमेश्वर ने उनसे कहा था कि उस फल के खाने पर उनकी मृत्यु हो जायेगी।

शैतान ने सर्प का रूप धारण कर लिया था। शैतान उस प्राणी के मुख से बोला। बाइबल में आगे चलकर हम देखते हैं कि एक झूठे भविष्यवक्ता बालाम से एक गधे ने बातें की थी।

शैतान ने आदम और हवा से कहा कि वे सदा के लिये उस अदभुत बगीचे में रह सकते हैं। वे बिना बूढ़े हुए बगीचे में रह सकते हैं। वे बिना कोई बीमारी, सिरदर्द, कष्ट या दुख उठाकर इस बगीचे में सदाकाल के लिये रह सकते हैं। उन्हें कभी मौत नहीं आयेगी।

परंतु एक बहुत सरल सी आज्ञा है जिसका पालन उन्हें करना है। एक बहुत आसान सी आज्ञा, जिसका पालन परमेश्वर ने उन्हें करने के लिये कहा था।

‘‘पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना, क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा'' (उत्पत्ति २:१७)

परमेश्वर ने उन्हें केवल यही एकमात्र आज्ञा दी थी।

उस बगीचे में और भी कोई था। शैतान वहां था। इस एक आज्ञा का तोड़ा जाना, एक मात्र रास्ता था जिसके द्वारा शैतान उनको परीक्षा में डाल सकता था। उसने हवा को यह कहकर भ्रम में डाला कि परमेश्वर झूठ बोल रहे हैं। हवा ने उसकी बात पर विश्वास किया और प्रतिबंधित फल खाया।

‘‘सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये'' (उत्पत्ति ३:६‚७)

जैसे ही उन्होंने प्रतिबंधित फल खाया, वे पापी कहलाये। अब वे निर्दोष नही रहे। वे पापी कहलाये। उनका स्वभाव बिल्कुल परिवर्तित हो गया। निर्दोष स्वभाव से पापमय स्वभाव को धारण कर लिया। अब पाप का स्वभाव उनके भीतर व्याप्त हो गया। उन्होंने अंजीर के पत्तों से अपने को ढांपने के लिये तहबंद बना लिये। इससे भी बढ़कर जो बात हुई कि उन्होंने स्वयं को परमेश्वर से छिपाना चाहा।

शैतान ने अपनी दुष्ट योजना को पूर्ण कर लिया था। वे पापी हो चुके थे। जिस क्षण उन्होनें प्रतिबंधित फल खाया वे अपने ‘‘अपराधों और पापों में मृत कहलाये।'' अब वे अपने ‘‘पापों के कारण मरे'' हुए थे (इफिसियों २:१‚५) वे न केवल अब आत्मिक रूप से मृत कहलाये बल्कि वे परमेश्वर को अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में भी देखने लगे। ‘‘क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है'' (रोमियों ८:७) । अब वे अपने विनष्ट और सांसारिक विचारों में परमेश्वर के शत्रु थे।

इससे भी बुरा यह हुआ कि आदम का विनष्ट स्वभाव और आत्मिक रूप से मृत आत्मा उसकी आने वाली पीढ़ियों में वंशागत पायी गयी − पृथ्वी पर एक एक जन के भीतर। क्योंकि ‘‘जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से (बहुत) लोग पापी ठहरे'' (रोमियों ५:१९; केजेवी ईएसवी) । ‘‘इसलिये....... जैसा एक अपराध (आदम) सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ'' (रोमियों ५:१८) । आदम का मूल पाप आप के मन में हैं। आप का मन भ्रष्ट है पापमयी है। सारे बुरे कर्म जो आप करते हैं, उसकी जड़ मन में है। यह पापी स्वभाव आप को आदम से मिला है। ‘‘हम पाप करते हैं, इसलिये पापी नहीं हैं। परंतु हम स्वभाव से ही पाप के वश में हैं, इसलिये पापी कहलाते हैं'' (रिफार्मेशन स्टडी बाइबल; पेज ७८१ पर व्याख्या)। ‘‘मनुष्य पाप में मृत (है) (और) इस योग्य नहीं कि अपनी सामर्थ से स्वयं को परिवर्तित कर लेवें'' (वेस्टमिंस्टर कंफेशन‚ ९‚ ३) ।

इस तरह आप आदम की संतान हैं। उसका पापमय स्वभाव संपूर्ण मनुष्य जाति में (आया) धारित किया गया। आप पाप के दास हैं। आप ऐसा कुछ नहीं कर सकते या कह सकते जो आप को पापों से छुटकारा दिला देवे। बाइबल पढ़ना और अध्ययन करना आप को नहीं बचा सकता। प्रति रविवार चर्च में आप की उपस्थिति आप को उद्वार नहीं दिला सकती। मैं एक व्यक्ति को जानता हूं जो पूरे जीवन भर चर्च में उपस्थित रहा। उसने चर्च की एक भी आराधना नहीं छोड़ी। परंतु वह आज भी खोया हुआ है। वह ‘‘पापों में मरा हुआ'' है (इफिसियों २:५)

आप उद्वार पाने के सैकड़ों संदेश सुन सकते हैं, परंतु उनसे आप को सहायता नहीं मिलेगी। क्योंकि आप पाप के दास हैं ‘‘अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए'' हैं (इफिसियों २:१) ।

आप कहते है कि ‘‘आप यह नहीं हैं!'' परंतु आप गलत हैं। यह आप ही हैं। आदम के समान आप भी अपने पापों को ढंकने का प्रयास करते हैं जैसे उसने अंजीर के पत्तों से स्वयं को ढंकने का प्रयास किया। आप भले कर्म करके अपने पापों को ढांपते हैं। मैंने ऐसा पांच साल पूर्व किया था।

पंद्रह साल की उम्र में मैंने अपनी दादी मां को निष्प्राण कॉफीन में देखा। इसने मुझे भीतर से तोड़ दिया। जब लोग उन्हें दफना रहे थे, मैं ग्लैंडेल में फारेस्ट लॉन कब्रस्थान में लगे पेड़ों के बीच भाग गया। मै। भागता रहा और भागता रहा − जब तक कि मैं पसीने से तरबतर नहीं हो गया और हांफते हांफते जमीन पर नहीं गिर गया। तब परमेश्वर मेरे पास आये जैसे वे याकूब के पास आये थे। याकूब ने कहा था, ‘‘निश्चय इस स्थान में यहोवा है, और मैं इस बात को न जानता था।'' (उत्पत्ति २८:१६) । परंतु याकूब ने उस समय तक उद्वार नहीं पाया था, और मेरा भी उद्वार नहीं हुआ था। परंतु उस क्षण तक मैं जान गया था कि परमेश्वर वास्तविक हैं और मैं एक पापी हूं। अगले पांच सालों तक मैं अपने पापों के कारण व्यथित होता रहा। मैंने इस उत्पीड़न को रोकने के सब प्रकार के प्रयास किये। मैं हर दिन प्रार्थना किया करता था। मैं हर दिन बाइबल पढ़ा करता था। रविवार सुबह शाम चर्च जाया करता था। चर्च में सामने बुलाने के हर आमंत्रण पर मैं आगे जाया करता था। मैं अपना जीवन रविवार की हर रात्रि को समर्पित और पुर्नसमर्पित किया करता था। मैंने पापियों द्वारा उद्वार पाने के लिये दोहराये जाने वाली प्रार्थना भी बारंबार बोली। सत्रह की उम्र में मैंने अपना जीवन सुसमाचार प्रचार के लिये समर्पित कर दिया। उसके पश्चात अपना जीवन मिशनरी बनने के लिये समर्पित कर दिया। लेकिन इन सब से भी मेरा कोई भला नहीं हुआ! जितना अधिक मैं अच्छा करने का प्रयास करता, उतना पापमयी मैं होता जाता। मैं परेशान हो गया और पापी होने के विचार ने मुझे भयभीत कर दिया। मेरे सारे भले कार्य जैसे उन वस्त्रों के समान थे जिनके द्वारा आदम अपनी नग्नता को परमेश्वर के सामने ढंकने का प्रयास कर रहा था। परंतु मैं परमेश्वर की आंखों में नग्न पापी था − और मैं जानता था। मैं कहता था कि मेरा उद्वार हो चुका है। परंतु हर बार जब मैं कहता कि मेरा उद्वार हो चुका है मैं जानता था कि मैं झूठ बोल रहा हूं। परमेश्वर मुझसे बिल्कुल प्रसन्न नहीं थे − मैं यह जानता था। मैं पांच सालों तक पाप के बोध में दबा रहा। वे पांच साल व्यथित रहने, भय और पाप के बोध में दबे रहने के थे।

इसे मुझे आप पर लागू करने दीजिये। आप यहां चर्च में बैठे हुए हैं, आप सोचते हैं कि आप का उद्वार हो चुका है। परंतु मन की गहराई में आप जानते हैं कि यह गलत है। जो आत्मिक जागरण परमेश्वर ने भेजा था, उस समय भी मेरा झूठ कायम रहा। दूसरे लोग अपने पापों को मान रहे थे और मसीह में शांति पा रहे थे। परंतु आप मन ही मन यह दिलासा देते रहे कि आप कितने अच्छे हैं। हे पापी, अंजीर के पत्ते से बना तहमंद आप को परमेश्वर से नहीं बचा सकता! आप को कभी भी शांति नहीं मिल सकती जब तक आप परमेश्वर के सामने यह मान नहीं लेते कि आप एक भटके हुए पाखंडी हैं। जब तक स्वीकार नहीं कर लेते कि आप भटके हुए हैं, आप कभी भी उद्वार नहीं पा सकते!

आज सुबह जोन कैगन ने एक संदेश प्रचार किया − ‘‘परमेश्वर सही है और आप गलत हैं।'' जोन कैगन ने कहा, ‘‘मैंने कई रातें बिना सोये काटी और द्वंद में डूबा रहा। मैंने अपने बल पर परमेश्वर से दूर जाने का भरसक प्रयास किया और मेरे विचारों से पाप को दूर करने का प्रयास किया क्योंकि मैं जानता था कि परमेश्वर सही थे, और मैं गलत। परंतु मैं इस सत्य को मानने से बच रहा था.....लेकिन यह अनुभव बहुत तकलीफदायक था।''

जोन कैगन आदम की संतान थे और परमेश्वर से छिपने का प्रयास कर रहे थे। उन्होनें कहा, ‘‘सत्यता मेरी आत्मा के झरोखे पर थपकियां दे रही थी। जितना मैं सत्य से दूर भागता मेरा छल कपट उतना स्पष्ट होता जाता।'' क्या आज शाम आप को भी ऐसा महसूस हो रहा है? अगर आप को भी ऐसा लगता है जैसा मैंने और जोन कैगन ने महसूस किया है तो आप समझ लीजिये कि परमेश्वर आप को बुला रहे हैं। परंतु यह बुलाहट तब तक प्रभावी नहीं होगी, जब तक कि आप कुछ भी करने में स्वयं को असहाय न महसूस करें − जो दर्द और क्रोध आप के अंदर उपज रहा है उसको रोकने में आप स्वयं कुछ भी नहीं कर पा रहे हों। जो क्रोध और दुख परमेश्वर आप के अंदर भेज रहे हैं, वह आप को तोड़ने के लिये है, ताकि आप प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास ला सके।

प्रसिद्व नार्वेजियन सुसमाचारप्रचारक ओ हैल्सबाय ने कहा था:

‘‘पापी तब बचाया जाता है जब पाप उसके लिये इतना असहनीय हो जाता है कि वह न केवल अपने पाप परंतु चिंता और बैचेनी से बचने के लिये परमेश्वर के साथ पूर्ण मेलमिलाप करने की इच्छा रखता है'' (ओ हैल्सबाय‚ लैटर्स ऑन रिवाइवल, डॉ ई. पोर्टर, लिंडे पब्लिकेशंस द्वारा पुर्नमुद्रित‚ १९९२‚ पेज १९२)

मसीह क्रूस पर इसलिये नहीं मरे कि आप को अच्छा महसूस हो। वह आप को खुश करने के लिये नहीं मरे। वह आप को उद्वार का आश्वासन देने के लिये नहीं मरे। वास्तव में उद्वार पाने के पहिले आप को कई महिने और दिन निकालने पड़ते हैं। परंतु परिवर्तन का क्षण उसके पश्चात अचानक ही आ जाता है। कई लोगों का जब परिवर्तन होता है तब उन्हें मन में किसी प्रकार का आश्वासन नहीं होता है। परंतु वे यीशु पर सीधे विश्वास रखते हैं। उनके पाप पूरी रीति से धो दिये जाते हैं। कई लोगों को दिन, महिने और यहां तक कि सालों तक उद्वार मिलने का आश्वासन नहीं होता है। जब मसीह ने मुझे बचाया उसके छः महिने पहिले तक मुझे इसका कोई भान नहीं था। जो उद्वार का आश्वासन ढूंढते हैं, उन्हें पापों से छुटकारा नहीं मिलता है। मैंने कभी किसी एक जन को भी उद्वार पाते हुए नहीं देखा है जो आश्वासन को महसूस करना चाहता हो।

मसीह केवल और केवल एक ही कारण से बलिदान हुए − कि आप को पापों से छुटकारा देवें और आप के आदम से मिले हृदय को परमेश्वर की संतान के हृदय में परिवर्तित कर दें − ताकि अभी तक जो आप केवल मसीह से प्रेम करते थे, अब यीशु से प्रेम करने लगें।

आप में से अनेक लोग इसलिये आगे आते हैं कि आगे आने से अच्छा महसूस करने लगें । आप चाहते हैं कि चिंता मिट जाये, डर दूर हो जाये, परंतु आप को कभी पापों से छुटकारा नहीं मिल सका। मैं ऐसे अनेक लोगों को जानता हूं जो कई बार सामने आ चुके हैं लेकिन वे कभी उद्वार प्राप्त नहीं कर सके। वे केवल इतना चाहते हैं कि उनकी चिंता का निदान हो जाये और भय दूर हो जाये। वे केवल एक भावना चाहते हैं। जोन कैगन और मेरे समान आप को पाप का भार इतना असहनीय लगना चाहिये कि - आप उससे छुटकारा पाने के लिये स्वयं कुछ भी कर पाने में असमर्थ महसूस करें। तभी आप यीशु के पास मुड़ कर आ सकेंगे और पाप से छुटकारा पा सकेंगे। हम आप की मनोवैज्ञानिक समस्या को हल करने का प्रयास नहीं करते हैं। परंतु हम तो आप के हृदय को आप को दिखाना चाहते हैं जो पाप से पूरी रीति से भरा हुआ है‚ ताकि आप को ऐसी अवस्था में अब और रहने की इच्छा न हो सके। जब तक ऐसा नहीं होगा, आप कभी बचाये नहीं जा सकते।

यहां इसका एक उदाहरण हैं। एक व्यक्ति हमारे चर्च में कई साल पहले आया। वह भला जन प्रतीत होता था। हर आराधना में वह उपस्थित रहता था। परंतु वह मुझसे सदा बहस करते हुए बार बार कहता था, ‘‘मैं उद्वार प्राप्त कर चुका हूं!'' बार बार मैं भी उसे कहता जाता कि तुमने उद्वार नहीं पाया है, क्योंकि मैं उसके पूरे हालात जानता था। वह भी बार बार मुझे झिड़कता जाता और कहता, ‘‘मैं उद्वार प्राप्त कर चुका हूं।'' एक रात्रि प्रार्थना सभा में वह चिल्ला उठा, ‘‘डॉ हिमर्स मेरा उद्वार हो चुका है।'' सुनकर मेरा दिल दो टुकड़े हो गया क्योंकि मैं उसे खोना नहीं चाहता था। परंतु परमेश्वर ने मुझसे कहा, ‘‘तुम उसे पा नहीं सकोगे − उसे नर्क में जाने दो!'' और मैंने ऐसा ही किया! मैंने उसे इतने जोरों से डांटा कि मैं सोचता हूं कि वह दुबारा कभी नहीं आयेगा। परंतु कुछ समय बाद मैंने जोन कैगन की गवाही एक संदेश के दौरान पढ़ी। उस संदेश के बाद मैने किसी कारण से आगे आने का आमंत्रण नहीं दिया। मैं भूल गया कि मैंने क्यों आगे आने का आमंत्रण नहीं दिया। उस दोपहर वह व्यक्ति मेरे पास आया। उसने मुझसे कहा, ‘‘अगर आप ने आगे आने का आमंत्रण दिया होता तो मैं प्रायश्चित कर लेता।'' मैंने उससे कहा, ‘‘मैं आज निमंत्रण दूंगा।'' वह पूरी दोपहर परेशान रहा। उसके पाप उसके लिये ‘‘इतने असहनीय हो गये कि उसकी संपूर्ण मन से परमेश्वर से मेल मिलाप करने की इच्छा हो गयी कि न केवल चिंता और बैचेनी से बल्कि उसके पापों से भी उसे छुटकारा हासिल हो,'' जैसा कि डॉ हैल्सबाय ने कहा।

उस रात मैंने आमंत्रण दिया और वह आंसुओं से भरकर आगे आया। वह बरसों से आदम के समान स्वयं को अंजीर के पत्तों के वस्त्रों में छिपाता आ रहा था। परंतु उस रात वह यीशु के पास आया और मसीहा के लहू में धुलकर शुद्व हो गया!

क्या आप को कभी उस व्यक्ति, जोन कैगन और मेरे समान अनुभव हुआ है? क्या आप के पाप असहनीय हो गये? क्या आप का दिल पाप से कष्ट पा रहा है? क्या आप ने मेरे या जोन कैगन या मि निकैल के समान अनुभव किया? जब तक आप ‘‘भावना'' को ढॅूढते रहेंगे पाप का भार असहनीय प्रतीत नहीं होगा। आप को केवल चिंता सताती रहेगी और बैचेनी होगी। परंतु यीशु आप को चिंता और बैचेनी − या और किसी बुरी भावना से बचाने के लिये क्रूस पर नहीं मरे। वह क्रूस पर इसलिये मरे और जीवित हुए कि जो पापमय मानस आपने आदम से पाया है उसे मसीही मानस में बदल देवे। वह क्रूस पर इसलिये मरे कि आप के भीतर से एक स्वार्थी पापी बदलकर मसीही जन में बदल जावे, जो आदम के मानस से अब मसीही जन के मानस को धारण कर लेवे। आप का मन केवल परिवर्तन द्वारा ही बदला जा सकता है। परिवर्तन अर्थात ‘‘बदला हुआ मन।'' केवल परमेश्वर परिवर्तन कर सकता है। चर्च परिवर्तन नहीं करता है। आपके पाप जब असहनीय लगने लगे, परमेश्वर आप के मन को बदल देंगे।

आज सुबह जोन कैगन ने एक स्त्री के लिये बताया जो कहती थी, ‘‘मैं लंबे समय तक अपने उद्वार को सिद्व करने वाली भावना तलाशती रही। यद्यपि डॉ हिमर्स और डॉ कैगन मुझे बारंबार कहते रहें − किसी भावना को तलाशने की जरूरत नहीं है। यह महिला अपने पाप को भावना की मांग की आड़ में छिपा रही थी! जोन कैगन ने कहा, ‘‘आप अपने अहसासों पर ही विश्वास करती हो। जो आप महसूस करती हो, केवल उसी पर विश्वास करती हो। क्योंकि आप मसीह को ‘महसूस’ नहीं कर सकती इसलिये आप मसीह पर विश्वास नहीं ला सकती...... आप को या तो अपने अहसास और भावनाओं पर तब तक विश्वास करते रहना अवश्य जारी रखना चाहिये जब तक कि आप नर्क की अग्नि में जलने न लगे। अथवा आप को मान लेना चाहिये कि आप गलत हैं, परमेश्वर सही हैं। यीशु पर विश्वास करें, न कि किसी भावना में बंधे।''

मेरे प्रिय मित्रों, मैंने लंबी देर तक बोलने का इरादा किया था। परंतु मेरा समय बीत चुका है। आप के स्वभाव में जो आदम बसा हुआ है, उसने आप को परमेश्वर से मेलमिलाप करने से बहुत समय तक रोके रखा। उससे छिपना बंद कीजिये और अभी मेलमिलाप कीजिए! जब तक आप अपने गलत विचारों को त्याग नहीं देंगे, आप को शांति नहीं मिल सकेगी। जब तक पाप को छिपाना बंद नहीं करेंगे, शांति पास नहीं आयेगी। इसके पहले कि बहुत देर हो जाये, अभी प्रायश्चित कीजिए। सीधे यीशु मसीह के पास आइये। आप के पाप को वह अपने लहू से धो देंगे। यीशु के सामने अपने पापों को मान लीजिए और तुरंत क्षमा प्राप्त कीजिए। वह आप के पापों को अपने लहू से साफ कर देंगे। परमेश्वर के साथ इस तरह आप का मेल मिलाप हो जायेगा। आप के पापों का दंड पहले ही क्रूस पर अपने प्राण देकर यीशु ने भर दिया है। वह आप के मन में शांति स्थापित करेंगे। इसके पहले के समय बीत जाये यीशु पर विश्वास कीजिए। डॉ कैगन, जोन कैगन और मैं यहां वेदी पर होंगे। जबकि दूसरे लोग भोजन की संगति में हिस्सा लेने के लिये दूसरे हॉल में जा रहे हैं, आप हमारे पास आ सकते हैं कि हम आप को यीशु के लहू बहाने कि विषय में बता सकें और आज की रात अपने पापों से मुक्त होकर शांत मन से घर जा सकें। आमीन।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व नोहा सोंग द्वारा धर्मशास्त्र पढ़ा गया: उत्पत्ति ३:६−१०
संदेश के पूर्व बैंजामिन किंकैड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
‘‘सर्च मी ओ गॉड'' (भजन १३९:२३−२४)