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आदम तुम कहां हो?

(उत्पत्ति की पुस्तक पर ८९ संदेश)
ADAM, WHERE ART THOU?
(SERMON #89 ON THE BOOK OF GENESIS)
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, २७ नवंबर, २०१६ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, November 27, 2016

‘‘तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा'' (उत्पत्ति २:१६−१७)


पहला मनुष्य आदम परमेश्वर द्वारा पूर्णतः निर्मलता में बनाया गया था। उसे एक खूबसूरत बगीचे में रखा गया था। बगीचे का हर पेड़ खाने की द`ष्टि से उत्तम था। आदम उन तक पहुंच सकता था और स्वादिष्ट फलों को तोड़ सकता था। उस मनोहर से बगीचे में उसे न तो कोई चिंता थी, न कोई उसका शत्रु। सभी जानवर और चिड़िया शाकाहारी थे। मनुष्य स्वयं शाकाहारी था। इसलिये उसे जानवरों को उनके मांस के लिये मारने की आवश्यकता नहीं थी। अदन की वाटिका में सब कुछ शांतिपूर्ण था। कोई तूफान नहीं आते थे कि उनसे बचना पडे, क्योंकि कभी पानी नहीं बरसा था। ‘‘तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी'' (उत्पत्ति २:६) मनुष्य को किसी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं थी। सारे जानवर और पक्षी शाकाहारी थे। ऐसी कोई बीमारी नहीं थी जो उसे बीमार करे। लड़ने के लिये कोई शत्रु नहीं थे और जानवरों से भी भय खाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यह एक सुंदर स्वर्ग था।

आदम को तकलीफ देने के लिये कोई पाप नहीं था। उसके अंदर पाप का स्वभाव नहीं था, कोई मनोवैज्ञानिक समस्याऐं उसके दिमाग में नहीं थी। स्वयं के भीतर बहुत शांति थी। परमेश्वर के साथ मेल मिलाप था। खूबसूरत स्वर्ग था। यहां तक कि उसे महिला मित्र भी ढूंढने की आवश्यकता नहीं थी। परमेश्वर ने उसके लिये एक संपूर्ण, सुंदर, प्रसन्नचित्त करने वाली, उसकी सहायता करने वाली पत्नी बनाई थी। इसलिये वह कभी भी अकेला नहीं था। चूंकि वह संपूर्ण स्त्री थी, इसलिये ऐसी कोई संभावना नहीं थी कि वह उसका दिल तोड़ती, या उसे छोड़ कर चली जाती, या उससे प्रेम रखना बंद कर देती या उसे त्याग देती। चूंकि कोई पाप उस स्वर्ग में नहीं था, वह उसकी हर सैक्सुएल इच्छा व आवश्यकता को बिना परमेश्वर को अप्रसन्न किये पूर्ण करती। सचमुच एक खूबसूरत स्वर्ग था वह।

परमेश्वर का आदम के साथ परस्पर सामंजस्य था। वह कभी प्रलोभन में नहीं पड़ा। परमेश्वर के क्रोध को शांत करने के लिये उसे कुछ नहीं करना होता था, क्योंकि परमेश्वर का ऐसा कोई क्रोध होता ही नहीं था। मनुष्य एक सुंदर स्त्री के साथ रहता था जो उससे प्रेम रखती थी। वह स्वादिष्ट भोजन से परिपूर्ण बगीचे में रहता था। परमेश्वर के साथ सुख चैन से रहता था। यह एक खूबसूरत स्वर्ग था।

बस परमेश्वर ने उसे एक ही आज्ञा दी थी। उस आज्ञा को मान पाना भी बहुत आसान था। केवल एक बहुत आसान आज्ञा को मानना था। परमेश्वर ने उससे कहा, ‘‘तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, कि तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा'' (उत्पत्ति २:१६−१७) परमेश्वर ने उससे कहा, तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है: पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा'' (उत्पत्ति २:१६−१७) परमेश्वर उससे केवल यही चाहता था। उसे केवल भले बुरे के ज्ञान के वृक्ष का फल कभी नहीं खाना था। यह आज्ञा मानना बहुत आसान थी। सचमुच एक खूबसूरत स्वर्ग था वह।

यद्यपि बगीचे में एक और व्यक्ति था। शैतान वहां था। वह स्वर्ग के स्वर्गदूतों में से एक था। उसने परमेश्वर के विरूद्व विद्रोह किया और पृथ्वी पर गिरा दिया गया। शैतान परमेश्वर का शत्रु था। परंतु आदम को प्रभु ने बचा रखा था। शैतान परमेश्वर को केवल इसी तरह चोट पहुंचा सकता था कि वह आदम को परमेश्वर के विरूद्व विद्रोह करने को उसकाये।

अदन के बगीचे में दो पेड़ बहुत महत्वपूर्ण थे। एक जीवन का पेड़ था। अगर आदम जीवन के उस पेड़ में से फल खाता रहता, तो वह सदा के लिये अदन के स्वर्ग में जीवित रहता (उत्पत्ति ३:२२) । परंतु अगर उसने भले बुरे के वृक्ष में से खाया होता तो वह निश्चित मर जाता। तो यह एक खूबसूरत स्वर्ग था − जिसमें केवल एक ही आज्ञा का पालन करना था − जीवन के पेड़ में से खाना था तो वह सदा जीवित बना रहता। यह आज्ञा का सकारात्मक पक्ष था। भले बुरे के वृक्ष में से खाओगे और आप निश्चित मर जाओगे। यह आज्ञा का नकारात्मक पक्ष था। यह एक सरल आज्ञा थी − और मानने में आसान। इस पेड़ में से खाओ और सदा के लिये जीवित रहो। इस पेड़ में से खाओं और सदा के लिये मर जाओ। यह एक खूबसूरत स्वर्ग था जिसमें केवल एक और केवल एक मात्र − बहुत आसान आज्ञा मानी जानी थी।

अब, चूंकि परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी को बचा रखा था, शैतान उनका कुछ नहीं कर सकता था। शैतान उन्हें केवल प्रलोभन दे सकता था कि इस सरल सी आज्ञा को तोड़ देवे। शैतान पहले एक छटपटाता हुआ सर्प नहीं था। यह तो तब हुआ जब परमेश्वर ने उसे श्राप दिया। परंतु अभी, इस समय शैतान ने बगीचे के एक प्राणी के अंदर प्रवेश किया। जैसे बाद में हम देखते हैं कि मसीह के आज्ञा देने पर शैतान और उसकी सेना ने सुअरों में प्रवेश किया। यहां, यद्यपि, प्रारंभ में तो शैतान ‘‘ज्योतिर्गमय स्वर्गदूत'' प्रगट हुआ (२ कुरूंथियों ११:१४)।

हम नहीं जानते कि वास्तविक सर्प कैसा दिखता था। परंतु हम जानते हैं कि इसके पैर थे और यह भी ऐसा प्राणी रहा होगा जिसे अदन के बगीचें में दोनों ने अक्सर देखा होगा, क्योंकि हवा उससे डरी नहीं थी। हम जानते हैं कि शैतान ने इस जानवर के भीतर प्रवेश किया और इसके मुख से आदम की पत्नी से बातें की। हवा को आश्चर्य नहीं हुआ जब उसने उससे बातें की। शायद उसने उससे कई बार बातें की होगीं और वह उससे बातें करने की आदी थी। शैतान यही तरीका आज भी अपनाता है। वह पापियों के दिमाग से बातें करते रहता है, जब तक कि वे आदी नहीं हो जाते हैं, और उससे डरते नहीं है।

एक दिन हवा बगीचे में अकेली थी। आदम कहीं और ‘‘बगीचे में कार्य'' कर रहा था (उत्पत्ति २:१५) । वह भले बुरे के ज्ञान के पेड़ को देख रही थी। तभी शैतान उसके पास आया। तभी शैतान ने उसके कान में फुसफुसाहट भरी, ‘‘क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी पेड़ का फल न खाना?'' (उत्पत्ति ३:१) । तब शैतान ने परमेश्वर के वचन पर प्रश्न उठाया। यही तो शैतान आज भी करता है। वह हमें बाइबल में लिखे परमेश्वर के वचन पर विश्वास नहीं करने का प्रलोभन देता है। परमेश्वर जो हमसे कहता है उस पर विश्वास नहीं करने का प्रलोभन देता है। जब पास्टर हमें परमेश्वर के वचन की बातें बताता है तो शैतान उस पर विश्वास नहीं करने का प्रलोभन देता है। परंतु, इससे भी बढ़कर बात, कि शैतान परमेश्वर के वचन को तोड़ मरोड़ कर अर्थ निकालता है, चूंकि परमेश्वर ने कहा था, ‘‘तू वाटिका के सब वृक्षों का फल बिना खटके खा सकता है।'' शैक्सपीयर का कथन था, ‘‘शैतान अपने उददेश्य के लिये धर्मपदों का भी उदाहरण दे सकता है।'' शैतान यहां परमेश्वर के संदेश का दूसरा भाग छोड़ देता है, ‘‘पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाए उसी दिन अवश्य मर जाएगा'' (उत्पत्ति २:१७) । सर्प ने परमेश्वर के वचन का दूसरा हिस्सा छोड़ दिया। बाइबल में दो स्थानों पर हमें चेतावनी दी गयी है कि हमें धर्मशास्त्र के किसी शब्द को छोड़ना नहीं है, व्यवस्थाविवरण १२:३२ और प्रकाशितवाक्य २२:१९ में इसे बताया गया है, जहां ऐसा लिखा हुआ है, ‘‘और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्तक की बातों में से कुछ निकाल डाले तो परमेश्वर उसे जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से भाग निकाल देगा .........'' यह बुराई संसार की हर उदारवादी सेमनरी में सिखाई जा रही है। युवा जो सेवकाई के लिये अध्ययन कर रहे हैं उन्हें सिखाया जा रहा है कि बाइबल के कई हिस्से सही नहीं हैं। जब मैंने एक उदारवादी सेमनरी में पढ़ाई की थी तब मुझे भी यही सिखाया गया था। अगर कोई इस बुरी शिक्षा पर विश्वास लाता है तो यह उसकी सेवकाई को बर्बाद करके रख देती है। प्रेरित पौलुस ने कहा था, ‘‘हर एक पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है, लाभदायक है .........'' (२ तिमोथीयुस ३:१६) धर्मशास्त्र का प्रत्येक वचन परमेश्वर द्वारा प्रेरित होकर मूल इब्रानी और यूनानी में रचा गया है। इसलिये मैं किंग जेम्स बाइबल से चिपका रहता हूं। आधुनिक बाइबल मरकुस ९:२९ में ‘‘और उपवास'' शब्द छोड़ देती है और यशायाह ७:१४ में ‘‘कुंआरी कन्या'' को ‘‘युवती'' में परिवर्तित कर देती है। धर्मशास्त्र की मूल दो प्रतियों को लेकर यह परिवर्तन किये गये हैं जो आरंभिक रहस्यवादी अनुवादकारियों ने किये थे।

उदारवादी सेमनरी में उन्होंने मुझे रिवाईज्ड स्टैंडर्ड बाइबल कक्षा में लाने के लिये कहा था। मैंने उनकी आज्ञा नहीं मानी और मैं सदैव किंग जेम्स बाइबल अपने साथ ले गया। मैं बिल्कुल भी ‘‘नये'' अनुवादों पर भरोसा नहीं करता हूं और आप से भी ऐसी अपेक्षा करता हूं कि आप को भी नहीं करना चाहिये। कभी कभी मैं उनमें से उद्वरण दे देता हूं परंतु मैं अपने संदेश में और निजी बाइबल वाचन के समय बिल्कुल प्रयुक्त नहीं करता हूं। मैंने जीवन पर्यंत यह आदत बना रखी है कि किंग जेम्स बाइबल से पढ़ू और आप से भी यही अपेक्षा रखता हूं!

उस दिन बगीचे में सर्प ने ने प्रश्न उठाया और हवा को प्रलोभन में डालते हुए परमेश्वर के कहे गये शब्दों को तोड़ मरोड़ दिया। परमेश्वर ने सीधे सीधे उस दंपत्ति को वह फल खाने को मना किया था। परंतु केवल खाने को ही मना किया था। परमेश्वर ने फल को ‘‘छूने'' के लिये मना नहीं किया था। जब हवा ने कहा, ‘‘न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे'' उसने परमेश्वर के वचन में जोड़ा। उसने व्यवस्थाविवरण १२:३२ का उल्लंघन किया परमेश्वर ने कहा, ‘‘जितनी बातों की मैं तुम को आज्ञा देता हूं उन को चौकस हो कर माना करना और न तो कुछ उन में बढ़ाना.........'' (व्यवस्थाविवरण १२:३२) यह आज्ञा व्यवस्थाविवरण २२:१८ में भी दी हुयी है,

‘‘मैं हर एक को जो इस पुस्तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्तक में लिखीं हैं, उस पर बढ़ाएगा'' (प्रकाशितवाक्य २२:१८)

उदारवादी विचारधारा के लोग वचन को तोड़ मरोड़ देते हैं और परमेश्वर के वचन के हिस्सों को छोड़ देते हैं। मार्मन संप्रदाय उनकी बुक ऑफ मार्मंस में परमेश्वर के वचन में और जोड़ देते हैं। इसलिये प्रलोभन यह है कि परमेश्वर के वचन में या तो जोड़ा जाना या उसमें से कुछ हिस्सों को छोड़ देना। कुरान यीशु के क्रूस के वर्णन को छोड़ देती है। कुछ संप्रदाय जैसे क्रिश्चियन सांईंटिस्ट, मेरी बेकर एडी के लेखन में इसका वर्णन करते हैं। सभी झूठी शिक्षाओं के मूल में परमेश्वर के वचन को विकृत करना पाया जाता है। इसलिये बाइबल के हिस्सों में जोड़ना या उसमें से कुछ छोड़ देना आज भी हवा द्वारा वचन को विकृत करने का दोहराव करता है। सारे मतांतर के केंद्र में यही पाया जाता है।

अब सर्प हवा को फुसलाने में इतनी दूर तक ले गया कि वह परमेश्वर के वचन पर सीधा प्रहार भी सुन रही थी। उसने उससे कहा कि अगर तुम यह फल खाओगी तो, ‘‘तुम निश्चित नहीं मरोगी।''

‘‘सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये'' (उत्पत्ति ३:६‚७)

उन्होनें परमेश्वर के वचन की अवज्ञा की। अब वे जानते थे कि वे वस्त्रहीन पापी जन थे। प्रायश्चित करने और परमेश्वर से दया मांगने के बजाय, ‘‘उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये'' (उत्पत्ति ३:७)। ठीक यही तो पापी आज करते हैं। वे कई तरह से अपने पाप को ढांपने की चेष्टा करते हैं, जैसे ‘‘पुण्य कार्य'' करने के द्वारा और ‘‘भक्ति का वेष धरने'' के द्वारा (२ तिमोथी ३:५)।

अब जब उन्होनें आवाज सुनी कि परमेश्वर पुकार रहा है, ‘‘तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए......... तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?'' (उत्पत्ति ३:८,९)। डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल ने कहा था,

एक उदासी भरा प्रश्न जो परमेश्वर ने व्यक्त किया कि आदम तू कहां है (इसके पहले) पुरूष और महिला परमेश्वर से बहुत स्वर्गिक जिज्ञासा से मिला करते थे....और यह अत्यंत महिमादायी, प्रसन्न कर देने वाला समय हुआ करता था, जब (परमेश्वर) उनसे बातें करने आता था। उन्हें कोई डर नहीं था। परंतु अब (उन्होंने पाप किया)। मनुष्य डर गया। दोनों शर्मिंदा थे। प्रभु की आवाज में सिसकी थी, ‘‘आदम, तू कहां है और तूने क्या कर डाला?'' इस हृदय विदीर्ण कर देने वाले प्रश्न का उत्तर ही पाप की कहानी, अनुग्रह और प्रायश्चित को जन्म देता है। (डब्ल्यू ए क्रिसवेल, पी एच डी, बेसिक बाइबल सर्मन ऑन दि क्रॉस, ब्राडमैन प्रेस, १९९०‚ पेज ५५)

परमेश्वर आज रात आप को पुकारते हैं, ‘‘हे पापी तू कहां है?''

‘‘तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है?'' (उत्पत्ति ३:९)।

अमल में लाना

अब मैं आप को इस विषय पाठ को अमल में लाने के लिये कहूंगा। आज रात आप कहां हैं?

१.  क्या आप परमेश्वर से छिप रहे हैं? वे सब जो प्रायश्चित करने से इंकार करते और मसीह के पास नहीं आना चाहते, वे परमेश्वर से छिप रहे हैं। क्या आप उन में से हैं? क्या आप को जब पवित्र आत्मा बुलाता है तो आप परमेश्वर से छिपते हैं? क्या आज की रात यह आप का पाप है?

२.  क्या आप परमेश्वर से छिप रहे हैं? क्योंकि आप ने बाइबल पर विश्वास लाने से इंकार कर दिया। क्या शैतान ने आप को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि परमेश्वर का वचन केवल एक पुरानी पुस्तक है? जिससे आप को इस पर विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है? क्या उसने आप से यह कहा कि कोई स्वर्ग नहीं मिल सकता और न किसी नर्क से डरने की आवश्यकता है? क्या आज रात यह आप का पाप है?

३.  क्या आप को लगता है कि आप एक अच्छा और नैतिक जीवन जी रहे हैं? क्या आप को लगता है कि आप इतने अच्छे हैं कि आप को अपने पाप स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है और मसीह द्वारा किये गये प्रायश्चित की आवश्यकता नहीं है? क्या आप का अच्छा और नैतिक जीवन पर्याप्त है कि आप को पापों से मुक्ति दिला सके? क्या यही झूठ शैतान आप से बोल चुका है? क्या आज रात यह आप का पाप है?

४.  जब परमेश्वर आत्मिक जाग्रति में नीचे उतर आया तब क्या आप को अपने विचारों के पाप और दुष्ट मन के पाप का अहसास हुआ था? क्या आप ने उनको देखा जो अपने पापों के कारण रोये और स्वयं को कमजोर और मूर्ख महसूस किया? क्या आप अभी ऐसा सोचते हैं? क्या शैतान आप को ऐसा विचार देता है कि जो रोते हैं और प्रायश्चित करते हैं वे मूर्ख हैं? क्या आज रात यह आप का पाप है?

५.  जब आप ने जोन कैगन का ऐसा संघर्ष आत्मा में सुना कि वह सो नहीं पा रहा था, तो क्या यह गवाही सुनकर आप को कुछ अजीब लगा? क्या आप ऐसा सोचने लगे कि ये तो मूर्ख लड़का है, इसे अपने पाप की इतनी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है? क्या शैतान ने आप को यह सोचने में लगा दिया कि जोन कैगन कुछ ज्यादा ही भावुक था? ऐसा कुछ आप को अपनी आत्मा के लिये नहीं चाहिये? क्या ऐसे विचारों में बने रहना आज रात आप का पाप है?

६.  जब मैं आप से कहता हूं कि एक सच्चे परिवर्तन में आप को पाप के विरूद्व संघर्ष करना पड़ता है और अपने पाप के प्रति मन में गहरी उदासी आती है, तब क्या आप ने मेरे बजाय शैतान की बात सुनी? आप ने मेरी बात मानने से इंकार किया और कहा कि आप ऐसे ही ठीक हैं। आज रात क्या यह आप का पाप है?

७.  जब आप ने मुझे यह कहते हुए सुना, तो क्या आप के मन में यह बात आई कि जो पाप आप करते हैं वे बहुत छोटे हैं और नर्क के दंड के लायक नहीं हैं? जब यह विचार शैतान ने आप के मन में डाला तो आप ने उसका विश्वास कर लिया? क्या आप सोचते हैं कि आप के पाप इतने छोटे हैं कि परमेश्वर आप का न्याय नहीं करेगा? आज रात क्या यह आप का पाप है?

८.  क्या आप के भटके हुए मित्रों की संख्या बढ़ती जा रही है? क्या आप सोचते हैं कि परमेश्वर आप को आशीष देंगे और आप को बचायेंगे, भले ही आप के मित्र मसीही नहीं हैं? जब आप बाइबल में यह लिखा हुआ पढ़ते हैं, ‘‘सो जो .......कोई संसार का मित्र होना चाहता है वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है'' (याकूब ४:४)। तो क्या आप अपने संसारी मित्रों को त्याग देते हैं? या आप सोचते हैं कि उनसे मित्रता बनी रहना ठीक है? क्या यही बात आज शैतान ने आप के मन में रखी है? क्या यही आज रात आप का पाप है?

९.  क्या आप के मन में लगातार सैक्स करने का विचार जिसे आप जानते हैं उससे बना रहता है − या चर्च में ही किसी के बारे में ऐसा सोचते हैं −क्या शैतान ऐसा आप के मन में डालता है कि इसमें कोई बुराई नहीं है और आप के मन में ऐसे लोलुप विचारों को उड़ेलता रहता है? क्या यही आज रात आप का पाप है?

१०.  क्या आप सोचते हैं कि घंटों तक विडियों गेम्स खेलना अच्छा है? क्या आप को शैतान ऐसा बताता है कि यह हानिरहित खेल है?

११.  क्या आप मुझसे पास्टर के रूप में भय खाते हैं? आप मुझसे क्यों डरते हैं? इसलिये कि मैं बहुत कठोर हूं? या मैं जो कहता हूं या करता हूं, उसमें आप को कुछ गलती नजर आती हो? क्या शैतान आप को मेरे प्रति डर पैदा करता है क्योंकि आप परमेश्वर से छिप रहे होते हैं और इसीलिये मुझ पर आरोप मढ़ते हैं कि मैं सिद्व नहीं हूं? क्या आप जोन कैगन के साथ सहमत है जो उसने आज सुबह संदेश में मेरे बारे में कहा ‘‘थैंक्स गॉड फॉर अवर पास्टर!'' क्या आप को अच्छा लगता है कि मैं ‘‘आप की आत्मा की देखभाल करूं''− या परमेश्वर के प्रवक्ता के रूप में, आप मुझसे डरते हैं और अपने गुप्त जीवन को मुझसे छिपा कर रखना चाहते हैं? जैसे आदम ने अपने को छिपा लिया था कि उसके गुप्त जीवन को फटकार न लगे? क्या शैतान ने आप को मुझसे भयभीत बना रखा है? (इब्रानियों १३:१७)।

१२.  क्या आप पास्टर को पहले बताये बिना किसी को अपने ब्वायफ्रेंड या गर्लफ्रेंड के रूप में चाहते हैं? क्या आप चर्च को चलाने वाले पास्टर पर विश्वास करते है, या आप ने उनसे छिपा रखा है जैसे आदम ने परमेश्वर से स्वयं को छिपा लिया था? क्या यही आज रात आप का पाप है?

१३.  क्या आप के मन में कुछ गहरी बात है जो आप के मुंह को बंद रखती है जब हम आपसे पूछते हैं, ‘‘कि क्या आप यीशु पर विश्वास रखते हैं?'' क्या शैतान ने आप से यह कहा है? क्या उसने आप से कहा है कि आप अगर मुंह बंद रखेंगे और कुछ नहीं कहेंगें तो आप के इंकार करने को क्षमा मिल जायेगी? क्या यही आज रात आप का पाप है?

१४.  क्या आप चर्च में किसी से जलते हैं? क्या आप को जलन होती है कि उनकी प्रशंसा होती है और आप की नहीं होती है? क्या यही आज रात आप का पाप है?

१५.  जब आप को आमंत्रण दिया जाता है तो क्या आप आने से इंकार कर देते हैं क्या आप बाइबल का इंकार कर देते हैं जब यह कहती है, ‘‘मूढ़ को अपनी ही चाल सीधी जान पड़ती है, परन्तु जो सम्मति मानता, वह बुद्धिमान है'' क्या आप ऐसे मूर्ख हैं जो संदेश के अंत में दी जाने वाली मंत्रणा को सुनने से इंकार कर दें? क्या यही आज रात आप का पाप है?


इस साल हमारे चर्च में जो आत्मिक जाग्रति आयी उसमें क्या इन पापों ने या और दूसरे किसी पाप ने आप को मसीह के पास आने से रोके रखा ‘‘हे आदम तू कहां है?'' क्या आप परमेश्वर की इस पुकार को सुनते हैं जब वह आप से आप के पाप के विषय में बातें करना चाहता है? या आप भी आदम के समान कह उठते हैं कि मैंने तेरी आवाज सुनी........और मैं डर गया.....और मैंने अपने आप को छिपा लिया? मैं आप को धर्मशास्त्र से दो पद देता हूं,

‘‘जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सुफल नहीं होता, परन्तु जो उन को मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी'' (नीतिवचन २८:१३)

‘‘पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है'' (१यूहन्ना१:७)

निवेदन है कि साथ साथ खड़े हो जाइये। डॉ कैगन, जोन कैगन और मैं यहां पुल्पिट पर खड़े रहेंगे और कोई भी व्यक्ति जो पाप से मुड़ने को तैयार है और यीशु मसीह पर विश्वास लाने को तैयार है और अपने सारे पापों से उसके कीमती लहू से शुद्व होने को तैयार है, मंत्रणा के लिये आ सकता है। जैसे हम गीत संख्या ७ गाते हैं आप अपना स्थान छोड़ कर सामने आ सकते हैं यह गीत संख्या ७ है।

मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीह मैं प्रार्थना करता हूं,
   आज मैं केवल यीशु को देखूं;
यधपि गहरी घाटी से तू मुझे ले चलता है,
   तेरी कभी न मुरझाने वाली आभा मुझे घेरे रखती है।
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   जब तक आप की महिमा से मेरी आत्मा न चमक उठे।
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   आपकी पवित्र छवि मुझमें दिखाई दे।

मेरे दर्शन को भर दीजिए, मेरी हर इच्छा,
   तेरी कभी न मुरझाने वाली, चमक से भर दीजिए
आप की सिद्वता के साथ, आप के प्रेम के कारण
   उपर से उतरने वाली आभा, मेरे मार्ग को प्रशस्त करे।
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   जब तक आप की महिमा से मेरी आत्मा न चमक उठे।
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   आपकी पवित्र छवि मुझमें दिखाई दे।

मेरे दर्शन को भर दीजिए, कि पाप की रत्ती भर भी,
   चमक व छाया मेरे भीतर न रहे।
मैं आप का आशातीत चेहरा देखना चाहता हूं।
   मेरी आत्मा आपके अनंत अनुग्रह पर जीवित है
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   जब तक आप की महिमा से मेरी आत्मा न चमक उठे।
मेरे दर्शन को भर दीजिए, मसीहा मैं प्रार्थना करता हूं,
   आपकी पवित्र छवि मुझमें दिखाई दे।
(''मेरे दर्शन को भर दीजिए'' एविस बर्जसन क्रिश्चियनसन, १८९५−१९८५)


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व नोहा सोंग द्वारा धर्मशास्त्र पढ़ा गया: उत्पत्ति ३:८−१०
संदेश के पूर्व बैंजामिन किंकैड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
‘‘सर्च मी ओ गॉड'' (भजन संहिता १३९:२३−२४)
‘‘आय एम कमिंग लार्ड'' (लेविस हार्टसो‚१८२८−१९१९: मात्र कोरस)