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यहूदा इस्किरियोती शैतान
द्वारा कैसे नष्ट किया गया

HOW JUDAS ISCARIOT
WAS DESTROYED BY SATAN
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, १३ मार्च, २०१६ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में किया गया प्रचार संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, March 13, 2016

''और टुकड़ा लेते ही शैतान उस में समा गया'' (यूहन्ना १३:२७)


यीशु और उनके शिष्यों ने अंतिम भोज के समय ''भिगोई हुई'' अखमीरी रोटी के टुकडे खाये। उस ''टुकडे'' के ग्रहण करते ही शैतान यहूदा में समा गया। लिखा है ''और टुकड़ा लेते ही शैतान उस में समा गया।'' बाइबल के दारूण पदों में से एक पद यह भी है। यह बताता है कि शैतान स्वयं यहूदा में समा गया − और वह दुष्टात्मा से ग्रसित हो गया। यह बहुत याद रखने वाली बात है क्योंकि यहूदा यीशु के नजदीकी चेलों में से एक था। यहूदा की कहानी में यह हम सब के लिये भी एक चेतावनी है − भले ही हमारा उद्वार हो चुका हो या नहीं।

यहूदा इस्किरियोती शिमौन इस्किरियोती का पुत्र था। ''इस्किरियोती'' उपनाम दक्षिणी यहूदिया में करियोत नामक उनके गृह-नगर की ओर संकेत देता है। तो बारह शिष्यों में से एकमात्र यहूदा ऐसा शिष्य था जो उत्तर के गलील क्षेत्र से नहीं था। शिष्यों की सूची में उसका नाम सदैव अंत में दिया जाता है। वह एक महत्वपूर्ण शिष्य होना चाहिये। वह उनका खजांजी था।

यहूदा इस्किरियोती की कहानी निराशाजनक और भयभीत करने वाली है। पर चूंकि यह चारों सुसमाचारों में दी हुई है, प्रचारक के लिये इस पर प्रचार करना कभी कभी आवश्यक हो जाता है। मैं आप को बताउंगा कैसे यहूदा के भीतर शैतान समा गया। कहानी इस प्रकार है।

मरकुस का तीसरा अध्याय बताता है कि मसीह पहाड पर गये और शिष्यों को अपने पास बुलाया। ये वे लोग थे जिन्होंने मसीह के स्वर्गारोहण हो जाने के पश्चात चर्चेस की स्थापना की। अब मसीह का मुख्य काम था इन शिष्यों को शिक्षा प्रदान करना और प्रशिक्षण देना। यीशु इन्हें प्रेरित कहकर बुलाते थे − अर्थात ''भेजे हुये।'' वह उन्हें अपने साथ रखते थे ताकि अपने उदाहरण और अनुभवों से आगे की सेवकाई के लिये सिखा सकें। वह उन्हें अपने जैसा प्रचार करने का अधिकार सौंपना चाहते थे, स्वयं के समान रोगों को ठीक करना और उनके नाम से दुष्टात्मों को निकालना सिखाते थे। शिष्यों की एक प्रमुख जिम्मेदारी थी शैतान की ताकत पर विजय प्राप्त करना। उनके नाम मरकुस ३:१६−१९ में दर्ज हैं। पहला नाम पतरस का है बारहवां नाम यहूदा इस्किरियोती का है।

मत्ती १०:१−४ में बताया गया है यीशु ने इन चेलों को दुष्टात्मा को निकालने बीमारों को ठीक करने व प्रचार करने के लिये भेजा था। फिर से बारह चेलों के नाम दर्ज हैं। फिर से पहले का नाम पतरस और अंतिम नाम यहूदा इस्किरियोती का है। मत्ती १०:१−४ बताता है कि यीशु ने सभी शिष्यों को ''अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया'' कि उन्हें निकालें, उसी प्रकार दूसरे आश्चर्यकर्म करने और प्रचार करने की सामर्थ प्रदान की थी। यहूदा को भी यह ''सामर्थ'' दी गयी − उसने स्वयं दुष्टात्माओं को निकाला, बीमारों को अच्छा किया और प्रचार किया। यहूदा बाद में वह मनुष्य निकला जिसने मसीह को धोखा दिया था। यीशु ने इस व्यक्ति को सामर्थ और प्रचार करने का अधिकार दिया था (मत्ती १०:७) । उसे भी सामर्थ दी प्रदान की गयी कि ''बीमारों को चंगा करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढिय़ों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो।'' हमारे लिये याद रखने के लिये यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है। यह हमें बताता है कि जो भी मसीह होने का दावा करते हैं उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता − भले ही वह बीमारों को अच्छा करते हो, दुष्टात्माओं को निकालते हो − और हां मुरदो, को ही क्यों न जिलाते हो! कुछ दुष्ट लोग पूरे मसीही इतिहास में ऐसा करते हुये आये हैं। उदाहरण के लिये रशिया के एक भिक्षुक, रसपुतिन जिन्हें रशिया के किले में सम्राट के पुत्र को अच्छा करने के लिये बुलाया गया था। वर्तमान में भी हमें ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिये जैसे बैनी हिन और अनेक ऐसे चंगाई देने वाले इवेंजलिस्ट होते हैं। वे भी यहूदा इस्किरियोती जैसे बुरे हो सकते हैं जिसने मसीह को गैतसेमनी के बगीचे में धोखा दिया था। यहूदा के भीतर एकाएक शैतान नहीं समा गया था। अपने विनाश के रास्ते पर जाने के लिये उसने कुछ कदम उठाये थे!

जैसा कि मैंने बताया, यहूदा यीशु का खजांजी था। वह एक छोटी ''थैली'' उठाये फिरता था। दूसरे शिष्यों को जब आवश्यकता होती थी वह उसमें से उन्हें देता था। बाइबल बताती है ''कि वह चोर था और उसके पास उन की (पैसे की) थैली रहती थी, और उस में जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था'' (यूहन्ना १२:६) ।

यहूदा ''एक चोर था।'' उसकी प्रवृत्ति चोरी की थी। जिस थैली को वह लिये चलता था उसमें से ही पैसे निकाल लेता था। मैथ्यू हैनरी की व्याख्या कहती है ''उसे पैसे का स्पर्श करना बहुत अच्छा लगता था।'' ईमानदारी से पैसे कमाना गलत नहीं है। किंतु प्रेरित पौलुस ने कहा था,

“क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है” (१ तीमुथियुस ६:१०)

जे सी राइल ने भी ''पैसों से प्रेम रखना अधिक खतरे को निमंत्रण देना बताया है......यह गरीब और अमीर दोनों के लिये फंदा है। इस पर विश्वास रखना आत्मा को नष्ट कर देता है। जो हमारे पास है उसमें ही संतुष्ट रहें'' (जे सी राइल, एक्सपोजिटरी थाटस ऑन मार्क, बैनर ओफ ट्रूथ, १९९४ पेपरबैक, पेज २१०, २११; मरकुस १०:२३ पर व्याख्या)।

मैंने अनेक जवान लोगों को भटकते हुये देखा है जो ''सुरक्षा'' चाहते हैं। मैंने देखा है कि धीरे धीरे वे उंची तनख्वाह देने वाली नौकरी में ''सुरक्षा'' पाने के लिये अपने मजबूत मसीही विश्वास को छोडते जाते है। जब मैं यह वाक्य लिख रहा था तो उसकी अगली रात मुझे एक मित्र की याद आयी जो बहुत समय पहले संसार के प्रलोभन में खो गया और यीशु से मुंह मोड लिया। पैसा सुरक्षा का दूसरा नाम है। पैसे पर भरोसा रखना खतरनाक है। यीशु ने कहा था, ''जो (धन) पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है'' (मरकुस १०:२४)

मेंरे सहयोगी डॉ कैगन के जीवन को प्रभावित करने वाले पदों में से एक पद नीतिवचन ११:४ में से है, ''कोप के दिन धन से तो कुछ लाभ नहीं होता'' (नीतिवचन ११:४) सहयोगी डॉ कैगन ने अभी मुझे बताया कि जवान लोग अक्सर सोचते हैं कि ''लालसा'' का अर्थ सिर्फ सैक्स संबंधी पाप या नशीली दवा ही है। उनका कहना है, ''जवान लोग यह नहीं महसूस करते कि पैसों और प्रतिष्ठा की लालसा रखना भी सैक्सुअल पाप या नशे करने के पाप के ही बराबर है − जवान लोगों के लिये तो और बढकर हो सकता है।'' इस सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिये डॉ कैगन की भी परीक्षा शैतान ने ली थी। वह तीस साल की उम्र के होते होते मिलियन डालर कमाना चाहते थे। जब उन्होंने यीशु को ग्रहण किया तो उनकी यह लालसा मिट गयी। अब वह इस चर्च के सहायक पास्टर हैं। उनका अनुसरण कीजिये!

यहूदा इस्किरियोती नष्ट हो गया और नर्क में गया क्योंकि जो पैसा वह थैली में लेकर चलता था उसने उसका लालच किया! बीज बोने वाली कथा का स्मरण कीजिये!

''जो झाड़ियों में गिरा, सो वे हैं, जो सुनते हैं, पर होते होते चिन्ता और धन और जीवन के सुख विलास में फंस जाते हैं, और उन का फल नहीं पकता।'' (लूका ८:१४ )

आप ''इस दुनिया के धन और आनंद की'' खोज में इतना जकड चुके होते हैं कि आप धीरे धीरे आत्मिक बातों की ओर से स्वयं को ''बंद'' कर लेते हैं। इसी चीज ने एक पूर्व अगुवे को बर्बाद किया जिसने सालों पहले हमारे चर्च में विभाजन किया था। इस चीज से भागिये! इस चीज से भागिये! इस चीज से भागिये! यहूदा द्वारा रखी जाने वाली इस लालसा से भागिये!

''इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।'' (मत्ती ६:३३)

आप में से अधिकतर ने मुझे यह बताते हुये सुना होगा जब मैं कालेज में था तब मेरे साथ यह घटना घटी थी। मुझे बहुत कडी मेहनत करना पडती थी। सुबह ८ बजे से शाम ५ बजे तक मैं काम करता था फिर मैं रात्रि में काल स्टेट ल्यास ऐंजीलिस में कक्षा में भाग लेता था। रात्रि कालीन स्नातक डिग्री हासिल करने में मुझे आठ साल लगे। कालेज के आधे समय में ही मैं इतना थक गया और हताश हो गया कि शैतान ने मेरी परीक्षा ली। तभी मेरे एक प्राध्यापक ने मुझे समझाया कि मैं टीचर बन जाउं। मैं उन्हें पसंद करता था वह हमें आधुनिक साहित्य पढाते थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी टीचर के रूप में मेरा कैरियर बहुत अच्छा रहेगा। मैंने बहुत गंभीरता से सेवकाई में जाने का विचार त्याग दिया और टीचर बनने का विचार मेरे मन में घर करने लगा। मैं लगभग तैयार ही था पर इसके पहले मैं अपने पास्टर डॉ लिन से मिलने गया। उन्होंने कहा कि मुझे सेवकाई के अलावा कहीं शांति नहीं मिलेगी। अब मैं याद करता हूं अंग्रेजी टीचर बनने की परीक्षा शैतान की ओर से थी। सेवकाई में जाने से पहले जोन आर राईस को इसी परीक्षा का सामना करना पडा था। टीचर बनने में कोई पाप नहीं था। पर यह मेरे लिये पाप हो जाता। परमेश्वर नहीं चाहते थे कि मैं अपने जीवन में यह चुनाव करूं।

अगर मैं उस परीक्षा के सामने झुक गया होता तो आप में से कोई भी आज इस रात यहां नहीं होते! मि. ग्रिफिथ ने नया जन्म नहीं पाया होता। डॉ चान का उद्वार नहीं हुआ होता। न ही मि. ली और हमारे चर्च के अन्य अगुवे बचाये गये होते। आप भी शायद उद्वार नहीं पाये होते। सच कहें तो आप में से अनेक का नया जन्म ही नहीं होता! आप में से कईयों के माता पिता हमारे इसी चर्च में मिले। यह चर्च नहीं होता तो उनका विवाह नहीं होता और आप का जन्म भी नहीं हुआ होता। यह चर्च नहीं होता। तो मैं अपनी अदभुत पत्नी को नहीं जान पाता। मेरा पुत्र पैदा नहीं होता और उसकी बच्ची हन्ना भी नहीं होती।

जो चर्च उत्तरी कैलीफोर्निया में मैंने प्रारंभ किया था वह नहीं होता। उसमें से चालीस चर्च जो निकल कर आये वह नहीं होते। सैकडों लोगों ने नया जन्म नहीं पाया होता − हमारी वेबसाईट पर संदेशों की हस्तलिपि नहीं छपी होती और विडियो प्रसारित नहीं होते अगर मैं किसी कालेज या युनिवर्सिटी में अंग्रेजी का प्रोफेसर बन गया होता तो हजारों जीवन बुरी अवस्था में ही जी रहे होते कभी परिवर्तित नहीं होते।

बाद में, मैंने जब कालेज से स्नातक किया और सेमनरी गया, तो फिर से मैं सेवकाई को छोडने की परीक्षा में पडा। देखा जाये तो कुछ दिन के लिये मैंने सेवकाई छोड भी दी थी। पर परमेश्वर ने मुझे एक रात वापस बुला लिया। बहुत अकेलेपन और टूटे मन को लिये मैं वापस लौटा − पर मैं खुश हूं कि मैंने वह किया। इस पृथ्वी पर का सोना भी मेरे चर्च के प्रति प्रेम के आगे नगण्य है। विश्व में इंटरनेट पर फैली यह सेवकाई मिलियन डालर्स से भी बढकर है! आप को यह छोटी चीज लग सकती है पर मेरे लिये संसार में यह बहुत महत्वपूर्ण बात है!

मेरा जीवन, मेरा प्रेम मैं आप को देता हूं प्रभु,
   आप का परमेश्वर का मेम्ना जो मेरे लिये मरा;
हो सके मैं सदैव विश्वसनीय बना रहूं,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरा जीवन कितना संतुष्ट होगा!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!
(''मैं उसके लिये जीउंगा'' राल्फ इ हडसन, १८४३−१९०१;
      हिमर्स द्वारा बदला गया)

अब इस चर्च को न केवल मैं एक धरोहर के रूप में देखता हूं − पर मैं यह भी सोचता हूं कि यह कैसा होना चाहिये, कैसा हो सकता है, और परमेश्वर के अनुग्रह से यह कैसा होगा! मेरे दिमाग में यह छवि उभरती है कि इस आडिटोरियम का हर कोना प्रफुल्लचित्त जवान लोगों से भरा हुआ हो! मैं देख सकता हूं परमेश्वर का आत्मा उतर रहा है। मै देख रहा हूं जवान लोगों के चमकते चेहरे रोते हुये प्रार्थनारत हैं और आनंद से चिल्ला रहे हैं! मै देख रहा हूं जवान लोग सेवकाई के लिये अपना जीवन दे रहे हैं और कुछ बाहर के देशों में मिशनरी बन कर जा रहे हैं। मै इसे एक शक्तिशाली चर्च के रूप में देख रहा हूं, जो अपने स्तर से आगे बढा जा रहा है − इस देश और संसार के अंधकारयुक्त भाग में परमेश्वर का प्रेम यहां से फैल रहा है! मैं देख रहा हूं मसीह यीशु उंचे से अपना प्रेम संपूर्ण धरती पर व्याप्त हजारों हजार आत्माओं पर उडेल रहे हैं! मैं उन आत्माओं को गाते हुये सुन रहा हूं,

मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरा जीवन कितना संतुष्ट होगा!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!

यहूदा ने भी एक बार ऐसा महसूस किया होगा। पर वह यीशु का अभागा प्रेमी था। पर वह दो भागों में बंट गया। एक हिस्सा उसका यीशु को चाहता था। दूसरा हिस्सा संसार की चीजों को चाहता था। बाइबल कहती है, ''वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है'' (याकूब १:८) । इसीलिये वह चेलों के लिये रखी हुई चंदे की थैली में हाथ डाला करता था। यह ज्यादा नहीं होते थे − पर कुछ मुठठी भर सिक्के जो लोग आशीषित होकर दान में यीशु को दे दिया करते थे। यहूदा बारंबार उन पैसों का स्पर्श करता था। उनमें से कुछ सिक्के अपने लिये उठा लिया करता था।

सब शिष्यों के समान वह भी सोचा करता था कि यीशु इसी समय पृथ्वी पर अपना राज्य स्थापित करेंगे। जब वह मर कर जीवित हुये तब भी उन्होंने पूछा, ''कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा?'' (प्रेरितों १:६) वे यह योजना बना रहे थे कि उस राज्य में कौन बडा पद हासिल करेगा। उन में यह विवाद होने लगा, ''कि हम में से बड़ा कौन है?'' (प्रेरितों ९:४६)

''उस समय से यीशु अपने चेलों को बताने लगा कि मुझे अवश्य है, कि यरूशलेम को जाऊं, और पुरनियों और महायाजकों और शास्त्रियों के हाथ से बहुत दुख उठाऊं; और मार डाला जाऊं........ '' (मत्ती १६:२१) । मैं ऐसा मानता हूं कि यहूदा ऐसा विचार करने लगा था कि यीशु मर जायेंगे और अपना राज्य स्थापित नहीं कर पायेंगे − इसलिये यीशु के पीछे चलने से उसे कोई फायदा होने वाला नहीं है। जब यहूदा ऐसी बातें सोच रहा होता था शैतान और उसके नजदीक आता चला गया।

अब फसह का पर्व नजदीक आ रहा था। महा पुराहित और शास्त्री यीशु को मारने का रास्ता खोज ही रहे थे। ''और शैतान यहूदा में समाया........उस ने जाकर महायाजकों और पहरूओं के सरदारों के साथ (बातचीत) की, कि उस को किस प्रकार उन के हाथ पकड़वाए। वे आनन्दित हुए, और उसे रूपये देने का (वचन) दिया'' (लूका २२:३−५) । ''और शैतान यहूदा में समाया'' − वह सिर्फ पैसा चाहता था। शैतान ने उसकी कमजोरी पर प्रहार किया और यहूदा ने समर्पण कर दिया − ''और शैतान यहूदा में समाया'' − वह यीशु को धोखा देने के लिये महापुरोहितों के पास गया। यहूदा इस्करियोति ने पैसों के पीछे मसीह को धोखा दिया! लोलुपता ने उसकी आत्मा को नष्ट किया!

डॉ कैगन ने आज सुबह ''आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड'' पर प्रभावशाली संदेश दिया (१ यूहन्ना २:१६) डॉ कैगन ने कहा, ''आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्ड'' से मेरा क्या तात्पर्य है? मैं पैसे और पैसों से खरीदे जाने वाली चीजों की बात कर रहा हूं एक घर, कार, अच्छे कपडे, आकर्षक यात्राएं और ऐसा ही सब कुछ। जब पैसा और यह सब चीजें पाना आप का ध्येय हो जाता है, आप अधिकाधिक धन कमाने के पीछे भागने लगते हैं, तब आप पैसों और आंखों की अभिलाषा में पड जाते हैं। मैं लोगों की प्रशंसा पाने की चाहत के लिये (भी) बात कर रहा हूं। मैं आप को मिलने वाले सम्मान, तरक्की, पद और सर्टीफिकेट और जितनी भी अच्छी बातें लोग आप के लिये करते हैं उनकी भी बात कर रहा हूं। हां, आप को स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहिये। हां, आप को नौकरी करना चाहिये और उसमें खूब मेहनत करना चाहिये। पर जब सम्मान, तरक्की, पद और प्रशंसायें आपके दिमाग को घुमा देती हैं आप परमेश्वर की बातों से दूर चले जाते हैं, तब आप जीवन में घमंड के वश में हो जाते हैं।''

तब डॉ कैगन ने कहा कि शैतान आप को परीक्षा में डालने के लिये उन लोगों का उपयोग करेगा जिन्हें आप चाहते हैं डॉ कैगन का कथन था, ''जिन लोगों को आप पसंद करते हैं शैतान उन का उपयोग करेगा। वह उन लोगों को काम में लेगा.......जिनसे आप ने सीखा है − जिन्हें व्यावसायिक जीवन में ‘मेंटर्स’ कहते हैं। वह कालेज में उन लोगों का इस्तेमाल करेगा जिन्हें आप पसंद करते हैं − आप के प्राध्यापक और मेंटर्स जो दूसरे क्षेत्रों में मिलते हैं। आप उन की सुनोगे और उनकी सलाह पर चलोगे। आप इस तरह से नहीं सोचते पर वे आप के लिये सच्चे पास्टर हो जाते हैं − आप को हांकने वाले गडरिये, आप के मार्गदर्शक....... आप इसे परीक्षा में पडना नहीं समझेंगे। आप को यह अच्छा लगेगा। पर मसीह के प्रति आप के प्रेम को यह ठंडा कर देगा....... जब आप छोटे थे तब मसीह और चर्च आप के लिये बहुत महत्वपूर्ण थे। पर अब आप उनको अपने जीवन में मात्र शेल्फ पर रखने जितना अर्थात एक छोटे भाग तक सीमित कर देते हैं....... और ऐसा ही चक्र चलता रहता है − चलता रहता है − जब तक कि आप इसके गुलाम नहीं बन जाते हैं − सेमसन के समान जो अंधा था और चक्की का पहिया चलाता जा रहा था! (क्रिस्टोफर एल कैगन, पीएचडी, ''दि चर्च वल्र्ड और दि वाइड वल्र्ड?'' लार्डस डे मार्निंग, मार्च १३, २०१६)

जब मैंने डॉ कैगन का संदेश पढा तो मुझे विचार आया, ''हे प्रभु! मुझे तो यह बहुत समय पहले ही प्रचार कर लेना था!'' क्या यह केवल एक दो जवान लोगो पर ही लागू होता है? मैंने कुछ क्षणों तक इस पर विचार किया। फिर मैंने एक कागज के टुकडे पर हमारे चर्च के बारह जवानों के नाम लिखे जो डॉ कैगन के संदेश में बतायी गयी अभिलाषाओं के वशीभूत होकर शैतानी परीक्षा में फंसे। मेरा दिल बैठने लगा कि मेरा प्रचार इस बिंदु पर जाकर असफल रहा। क्योंकि बारह जवान धीरे धीरे उसी संसार की उसी परीक्षा में फंस गये थे जो यहूदा इस्किरियोती को एक के बाद एक विनाश के रास्ते पर ले गयी थी कि उसने मसीहा से धोखा किया!

यहूदा जब धीरे धीरे परीक्षा में पडता जा रहा था तब उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका अंत इस प्रकार का होगा। अंत में वह पूर्ण रूप से शैतान के नियंत्रण में हो गया और मसीह को धोखा दे बैठा। क्या आप जानते हैं कि कितने पैसे के लिये उसने मसीह को धोखा दिया। उसे ३० चांदी के सिक्के मिले। दि डेविस डिक्शनरी ओफ बाइबल कहती है कि ''वह केवल १९.५० डालर थे एक साधारण गुलाम का दाम'' शैतान कम दामों में ही अधिकतर लोगों को खरीद लेता है! वह कभी बडा मूल्य नहीं चुकाता। उसे सस्ते में लोग मिल जाते हैं! अजीब बात है मैंने अपने चर्च के १२ जवान लोगों को गिना जिन्हें शैतान ने इस तरह से ले लिया। फिर मैं और तीस साल पहले विचारों में पीछे चला गया और मैंने १२ लोगों के नाम लिखे जो हमारे चर्च में वेतन पाने वाले सेवक थे − शैतान ने उन्हें भी ऐसे ही बर्बाद कर दिया! सच में प्रभु मुझे इस विषय को बार बार प्रचार करना चाहिये! हां प्रभु, मैं वायदा करता हूं कि मैं संसार के प्रलोभन को आज रात से अपने प्रचार में प्रमुख स्थान दूंगा!

और इस तरह, उस भयानक रात में यहूदा इस्किरियोती यीशु के शत्रुओं को बगीचे में ले आया। और वे लोग यीशु को कोडे लगाने और क्रूस पर चढाने के लिये ले गये। यहूदा को ३० चांदी के सिक्के मिल गये − लगभग १९.५० डालर के बराबर।

बाद में उस रात, जब उसके पकड़वाने वाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह (पछताया) और वे तीस चान्दी के सिक्के महायाजकों और पुरनियों के पास फेर लाया। और कहा,

‘मैं ने निर्दोषी को घात के लिये पकड़वाकर पाप किया है’

तब वह उन सिक्कों मन्दिर में फेंककर चला गया, और जाकर अपने आप को फांसी दी।'' (मत्ती २७:३−५) उसने अपने गले में फंदा डालकर स्वयं को फांसी लगा ली! यह मेरा पहला बाइबल का पद था जो मैंने याद किया था, ''मैं ने निर्दोषी को घात के लिये पकड़वाकर पाप किया है'' (मत्ती २७:४) मैंने इस पद को याद कर के फस्र्ट बैपटिस्ट चर्च हटिंगटन पार्क कैलीफोर्निया में, दुख भोग समय के एक नाटक में यहूदा की भूमिका निभाते समय कहा था। यह पद मेरे मन में बसा रहा जब तक कि मैं दो साल बाद परिवर्तित नहीं हो गया। ''मैं ने निर्दोषी को घात के लिये पकड़वाकर पाप किया है।''

मैं आज रात आप से पूछता हूं, क्या आप यीशु को अपने जीवन में धोखा देंगे? क्या आप मसीह और चर्च को अपने हृदय और जीवन में प्रथम स्थान देगे? क्या आप उस पर विश्वास रखेंगे और उसी के लिये जीयेंगे, केवल उसी के लिये जीयेंगे? क्या तीस साल बाद आप हृदय से यह यह गीत गा सकेंगे?

मेरा जीवन, मेरा प्रेम मैं आप को देता हूं प्रभु,
   आप का परमेश्वर का मेम्ना जो मेरे लिये मरा;
हो सके मैं सदैव विश्वसनीय बना रहूं,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरा जीवन कितना संतुष्ट होगा!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!

हे जवान, अपना हृदय और जीवन यीशु को दे− और उसे छोडकर संसार की परीक्षाओं में न पड! यह गीत मेरे साथ गाइये। यह गीत के पेज पर संख्या तीन पर है।

मेरा जीवन, मेरा प्रेम मैं आप को देता हूं प्रभु,
   आप का परमेश्वर का मेम्ना जो मेरे लिये मरा;
हो सके मैं सदैव विश्वसनीय बना रहूं,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरा जीवन कितना संतुष्ट होगा!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा,
   मेरे मसीहा और मेरे परमेश्वर के लिये!

आमीन।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा धर्मशास्त्र पढ़ा गया: यूहन्ना १३:२१−३०
संदेश के पूर्व बैंजमिन किंकेड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
                ''परीक्षा मे न पड'' (होरेशियो आर पामर, १८३४−१९०७)