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पापियों के लिये रोटी मांगना

ASKING BREAD FOR SINNERS
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २ अगस्त, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, August 2, 2015

''सो जब तुम बुरे होकर अपने लड़के−बालों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा'' (लूका११:१३)


एक दृष्टान्त वह कहानी है जो आध्यात्मिक सत्य को उजागर करती है। यह दृष्टान्त एक बहुत साधारण कहानी है। चेलों में से एक ने कहा था, ''हे प्रभु, हमें प्रार्थना करना सिखा दे।'' (लूका ११:१) यीशु ने उन्हें प्रभु की प्रार्थना करना सिखाई (हे हमारे पिता) यह वह प्रार्थना है जो मैं अपने पूरे जीवन काल में प्रतिदिन एक बार करता आया हूं। यीशु ने अपने चेलों को, यह छोटी सी साधारण कहानी सुनाई।

मसीह ने वह कहानी सुनाई जिसमें एक मनुष्य के पास उसका मित्र मध्य रात्रि में भोजन मांगने आया, क्योंकि उस व्यक्ति के घर में रोटी नहीं थी। उसने यह कहा कि उसके घर में उसका एक मित्र लंबी यात्रा करके आया है ''और उसके पास उसे परोसने के लिये कुछ भी नहीं है।'' उसके पडोसी ने उसे जाने के लिये कहा। क्योंकि वह और उसके बच्चे पहले ही सो चुके थे। पर उस व्यक्ति ने दरवाजा खटखटाना जारी रखा। आखिरकार उस पडोसी ने दरवाजा खोला और जो रोटी वह मांग रहा था उसे दे दी।

तब यीशु ने इस कहानी से प्रमुख बात निकाली; जिसे लोग कहानी का ''नैतिक'' सबक कहते हैं। इस कहानी को बताने के पीछे कारण क्या है;

''और मैं तुम से कहता हूं; कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।'' (लूका ११:९)

मूल यूनानी में जो शब्द प्रयुक्त किये जाते हैं वे हैं लगातार मांगना, खोजना, खटखटाना। डॉ जॉन आर राइस ने कहा कि इस पद का ऐसा अनुवाद होना चाहिये कि, ''मांगते रहो और तुम्हें दिया जायेगा; खटखटाते रहो और तुम्हारे लिये खोला जायेगा।'' (प्रेयर: आस्किंग ऐंड रिसीविंग, सोर्ड आँफ दि लोर्ड पब्लिशर्स, १९७० का संस्करण, पेज ९४)

तब उन्होंने इस कहानी का दूसरा सबक दिया। जब वह आदमी खटखटा रहा था तब वह ''रोटी'' मांग रहा था। यह ''रोटी'' क्या हैं? पद तेरह इसका उत्तर देता है, ''तो तुम्हारा स्वर्गिक पिता मांगने वालों को और अधिक पवित्र आत्मा क्यों न देगा?'' मैं सोचता हूं कि इसके और भी अधिक अर्थ निकल सकते हैं लेकिन मैं इसके सर्वाधिक इस अर्थ से सहमत हूं − कि हमें परमेश्वर से निरंतर पापियों के लिये पवित्र आत्मा मांगते रहना चाहिये खोजते रहना चाहिये और खटखटाते रहना चाहिये कि वह पापियों को ज्योति मय करें, कि वह उन्हें उनके पापों का बोध करवाये करें, और मसीह के पास लेकर आये। इसलिये मैं ऐसा मानता हूं कि इस कहानी में ''रोटी'' पवित्र आत्मा का सूचक है। पद छ: में जो व्यक्ति रोटी मांग रहा है वह कहता है ''कि मेरा मित्र यात्रा से लौटा है और मेरे पास उसे देने के लिये कुछ भी नहीं है'' हमारे चर्च में आने वालों के पास अगर पवित्र आत्मा नहीं है तो भटके हुये पापियों को देने के लिये हमारे पास कुछ नहीं है।

मैं वह समय याद करता हूं जब मैंने बडी सावधानी से एक संदेश तैयार किया था। पर जब मैं पुल्पिट पर पहुंचा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरे मुंह से सिर्फ खाली शब्द निकल रहे हैं! उस संदेश में बहुत अच्छी अच्छी बातें थीं, और उससे कई भटके हुये लोगों को राह पर लाया जा सकता था। किंतु उस संदेश में सामर्थ नहीं थी। उससे कोई आशीषित नहीं हुआ। इन अंतिम दिनों में कुछ प्रचारकों को पता ही नहीं है कि मैं किस बात के लिये बातें कर रहा हूं। उन्हें कोई अंतर ही पता नहीं पडता जब वे प्रचार करते हैं। यह बडी उदासीन कर देने वाली बात है इसका यह अर्थ हुआ कि वे पवित्र आत्मा के लिये सर्वथा अनभिज्ञ है। वे तो यह कह पाने में भी असफल है कि जब वे प्रचार करते हैं तो परमेश्वर का आत्मा उपस्थित है कि नहीं।

एक बार मैं अपने भटके हुये पिता को न्यू आर्लियंस के बोरबोर्न में एक प्रसिद् प्रचारक के संदेश को सुनाने ले गया। लोगों ने बताया कि यह प्रचारक मेरे पिता तक पहुंच सकता है क्योंकि उसके द्वारा सुनाये गये चुटकुले अधेड उम्र के लोगों को बहुत पसंद आये और उन्होने सुसमाचार के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। केवल यह ही वह समय था जब मैं अपने पिता के साथ अकेला चर्च गया था। बोरबोर्न स्ट्रीट का वह प्रचारक खडा हो गया और उसने चुटकुले सुनाने शुरू कर दिये। वह इस कला में बहुत माहिर था। निसंदेह बहुत माहिर था! जब उसने प्रचार समाप्त किया तब वह जीवन बचाये जाने के विषय में थोडा सा बोला। उसके पश्चात उन्होने आगे आने का निमंत्रण दिया ताकि बचाये जा सकें। किंतु मेरे पिता अपनी जगह से नहीं हिले। जब हम कार में लौट रहे थे तब मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कैसा लगा तो उन्होंने उत्तर दिया कि, ''वह बॉब होप से अधिक अच्छे नहीं लगे।'' (आप जवान लोगो की जानकारी के लिये में बता दूं − कि बॉब होप एक प्रसिद् हंसानेवाला जन था जो चुटकुले सुनाया करता था।) पिता ने मुझसे सिर्फ इतना कहा, ''वह बॉब होप जितने अच्छे नहीं हैं।''

बोरबोर्न स्ट्रीट के प्रचारक के संदेश सुनकर सारी मंडली पूरे रास्ते लौटते समय हंसती रही। मुझे पूर्ण निश्चय है कि वह प्रचारक जरूर इसे अपनी अपार सफलता मान रहे होंगे। किंतु उनके संदेश प्रचार में पवित्र आत्मा नहीं था! बिल्कुल भी नहीं था! मै तब भी जानता था, और अब भी जानता हूं। मेरे पिता इसलिये आये थे क्योंकि मैंने उनसे अपील की थी। हां, मेरे पिता तो आये थे − पर पवित्र आत्मा नहीं आया! मेरे पिता एक भटके हुये पापी थे − पर डाउनी के पास वाले उस चर्च में, उनके लिये ''रोटी'' नहीं थी।

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

अगर मैं यहां प्रचार करने खडा रहूं और पवित्र आत्मा नहीं हो तो फिर यहां किसी भी जन को कोई सहायता नहीं मिल पायेगी, न कोई बचाया जायेगा, पर कोई मसीह का चेला नहीं बन पायेगा। इसलिये जब मैं इस संदेश को लिखता हूं तो मैं इसके हर वाक्य, हर अनुच्छेद, पर प्रार्थना मांगता हूं। इसलिये मैं आपसे अपनी तीनों प्रार्थना सभाओं में मेरे समस्त संदेशों के लिये प्रार्थना करने को कहता हूं। इसलिये मैं अपने दोनों प्रार्थना योद्वाओं से जब मैं प्रचार कर रहा होता हूं तो अलग कमरे में प्रार्थनारत रहने को कहता हूं। अन्यथा हम पुलपिट से आप को कुछ भी नहीं दे पायेंगे − ''और (उनके) आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' इन अंतिम दिनों में चर्चेस में ऐसी त्रासदायक स्थिति है! प्रार्थना कीजिये कि हमारे यहां भी ऐसा न होने पाये!

तो हमे किस प्रकार प्रार्थना करना चाहिये कि पापियों को ''रोटी'' मिले? हमे किस प्रकार प्रार्थना करना चाहिये कि पवित्र आत्मा मिले? पद ९ की ओर देखिये,

''और मैं तुम से कहता हूं; कि मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ों तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।'' (लूका ११:९)

मांगते रहिये! खोजते रहिये! खटखटाते रहिये! हिम्मत मत हारिये! मत पीछे हटिये! लौलीन होकर परमेश्वर से प्रार्थना करते रहिये कि वह आपकी आत्मा को प्रज्जवलित करें − ताकि आप पवित्र आत्मा पाने के लिये प्रार्थना करते रहें − भूखे पापियों के लिये रोटी मांग सकें!

तब हमें मांगना चाहिये कि परमेश्वर इस संगति को इस्तेमाल करें कि ताकि हम रोटी पापियों को दे सकें। हमारे लिये बहुत अच्छा भोजन मिसिस कुक, मिसिस ली, राबर्ट लेविस, मि. डिक्सन और अन्य लोगो ने मिलकर तैयार किया है। परन्तु अगर पवित्र आत्मा की उपस्थिति नहीं है तो सुबह और संध्या की आराधनाकाल के पश्चात यह भोजन लोगो की सहायता नहीं करेगा। मैं एक चर्च को जानता हूं जो आराधना के पश्चात भोजन परोसता है। उनके पास्टर की पत्नी ने बडे उत्साह के साथ मुझे बताया। उसने बताया कि इस भोजन के कारण कई लोग इस चर्च में जुडे। फिर मैंने पूछा कि ''क्या अभी भी भोजन की व्यवस्था जारी है?'' उसने कहा, ''नहीं ये भोजन व्यवस्था ने लोगों की अधिक मदद नहीं की तो उन्होंने इसे रोक दिया।'' ऐसा नहीं था कि भोजन लोगो की सहायता नहीं करता था। असली कारण था कि लोगों ने भोजन के लिये प्रार्थना करना बंद कर दिया था! जब पवित्र आत्मा नहीं होगा तो खोये हुये लोग क्योंकर भोजन के लिये आना चाहेंगे? अगर पवित्र आत्मा नहीं है तो ये मात्र एक साधारण सा भोजन बनकर रह जाता है! कौन चिंता पाले? एक बडा मैक डोनेल्ड क्यों न खा लिया जाये? घर पर ही क्यों न खा लिया जाये?

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

एक प्रचारक ने सोचा कि उनका भोजन सर्वश्रेष्ठ है! उन्होंने सोचा कि वह उसे थोडा साबदल देगें − उन्होंने सोचा कि वह उसे थोडा सा बदल देगें। क्योंकि एक बडा सा भोजन बनाना जैसा हम बनाते हैं वह थोडा मुश्किल है। इसलिये उन्होनें भोजन का स्वरूप ''थोडा बदल दिया।'' भोजन परोसने के स्थान पर उन्होंने भूख बढ़ाने वाला पेय परोसना शुरू कर दिया। जब अल्फ्रेड हिचकॉक अपनी भयाक्रांत फिल्म ''सायको'' प्रदर्शित करने वाले थे तो उन्होंने फिल्म की सभी बडी हस्तियों को अपने स्टूडियों को बुलवाया। उन्होंने उन सब को ''अंगुली भोजन'' परोसा − ''जो वास्तविक अंगुलियों से बना हुआ था'' − ऐसा उन्होंने उनको बताया! एक महिला चीख पडी और अपना भोजन जमीन पर गिरा दिया!

क्षुधावर्धक किसी पार्टी में परोसे जाने के लिये अच्छे हैं लेकिन जो समूह लंबे समय तक चर्च की आराधना में बैठा हुआ हो उनके लिये क्षुधावर्धक ठीक नहीं है। मेरा ऐसा मानना है कि अगर पास्टर और उनके लोगों ने गंभीरतापूर्वक प्रार्थना में समय बिताया होता तो वे इस गलती को पहचान जाते। आप ध्यान रखें कि अगर पवित्र आत्मा की उपस्थिति नहीं है तो जो भोजन हम परोसते हैं वह भी लोगो के लिये आशीष नहीं ठहरेगा। अगर परमेश्वर पवित्र आत्मा यहां नहीं है − तो हमारे पास उनके सामने रखने के लिये कुछ नहीं है!

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

पूर्वी तरफ के एक पास्टर ने बताया कि उनका चर्च सुबह की आराधना के बाद भोजन परोसता है। तत्पश्चात सब लोग एक छोटे बाइबल अध्ययन के लिये पुन: बडे हॉल में जाते हैं। तो इस तरह उनका मानना है कि उन्हें रविवार संध्या की प्रार्थना सभा की जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि दोपहर के भोजन के पश्चात बाइबल स्टडी करके उन्हें रविवार की संध्या की आराधना जैसा ही आनंद आता है। वह फटी आवाज में बोले कि, ''लोग अधिक से अधिक बाइबल का लाभ उठा पाते हैं!''

मैंने सोचा, ''बेचारा आदमी! इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वह कभी सफल पास्टर नहीं रहा!'' संध्या की आराधना का अर्थ यह नहीं था कि ''चर्च के विद्रोही बच्चों'' के दिमागों में ठसाठस बाइबल के पदों को भर दिया जाये! क्या वह यह नही देख सका? संध्या की आराधना गंवा कर वह अपने लोगो द्वारा भटके हुये लोगों को सांध्यकालीन आराधना में लाने का अवसर छीन रहे हैं! सचमुच परमेश्वर हमारी सहायता करे! अगर पास्टर और उनके लोग गंभीरता पूर्वक प्रार्थना कर रहे होते तो मैं बिल्कुल कह सकता हूं कि परमेश्वर उन्हें दिखा देते कि वे क्या मूर्खता कर रहे हैं! खोये हुए लोग चर्च में नहीं आते है, बचाये नहीं जाते हैं क्योंकि पास्टर की अगुवाई करने के लिये वहां पवित्र आत्मा नहीं है, जो लोगो की आत्माओं को प्रकाशित करे! परमेश्वर इन बुरे दिनों में हमारी सहायता करे!

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

इन अंतिम दिनों में प्रचारक और चर्च के सदस्य अंधकार में लडखडाते हुये प्रतीत होते हैं! चर्च में हम जो भी करते हैं वह प्रार्थना में पूरी तरह से भीगा हुआ होना चाहिये। अन्यथा यह कहा जायेगा, ''कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ।'' (प्रकाशितवाक्य ३:१) ''एक नाम है जो जीवित है − लेकिन आप वास्तव में मरे हुये हैं।'' यह किसी भी चर्च में हो सकता है − विशेषकर इन बुरे दिनों में − इन अंतिम दिनों में! अगर हम जो भी करते हैं उसमें पवित्र आत्मा की उपस्थिति नहीं मांगते हैं, तो जल्द ही हम सर्दीस की मंडली के समान माने जायेंगे!

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

मैं यह जानता हूं कि यह आजकल के चर्चेस के बारे में सच है। जब हमारे चर्च के लोग छुटिटयों में जाते हैं और वे लौट कर आते हैं तो मुझे बताते हैं कि वे उन दिनों में जिन चर्चेस में गये उन्हे वहां जाकर निराशा हुई। ''क्योंकि वहां के गीत भावहीन थे।'' ''प्रचारक उबाउ थे।'' ''लोग मित्रवश नहीं थे।'' ''उनके यहां तो रविवार की संध्याकालीन आराधना भी नहीं होती।'' ''हम तो प्रार्थना सभा में भी गये लेकिन वहां कोई सच्ची प्रार्थना नहीं होती − बस एक और बाइबल अध्ययन करवा देते।'' अगर हमारे लोग ऐसा सोचते हैं, तो खोये हुये लोग क्या कुछ नहीं सोचते होंगे! इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि अंतिम दिनों के चर्चेस बहुत कमजोर हो गये हैं!

''क्योंकि एक यात्री मित्र मेरे पास आया है, और उसके आगे रखने के लिये मेरे पास कुछ नहीं है।'' (लूका ११:६)

अब हमें अधिक घमंड करने की आवश्यकता नहीं है। स्मरण रखिये हम अधिक अच्छे नहीं है! हमे अपनी दुर्बलता स्वीकार करना चाहिये अन्यथा हमें परमेश्वर की सामर्थ नहीं मिल सकती। हमने उपवास रखना और प्रार्थना करना सीखा है − क्योंकि उपवास रखने की परम आवश्यकता है तभी वह मजबूत ताकत हमें शैतान और दुष्टात्माओं के उपर विजय प्राप्त करने के लिये मिल सकती है! (मरकुस ९:२९) हमने उपवास और प्रार्थना की और कुछ आशीषें भी प्राप्त की। पर हमें उपवास रखना जारी रखना पडेगा जो हम अगले शनिवार रखेंगे उसके पश्चात हम ५:३० बजे चर्च में सामूहिक भोजन करेंगे।

आज मैं आप से विनती करता हूं कि आप हमारी सभी गतिविधियों में पवित्र आत्मा की उपस्थिति की प्रार्थना मांगे। बिना परमेश्वर की आत्मा की उपस्थिति के हमारे पास खोये हुये पापियों के ''सामने रखने को कुछ नहीं'' होगा! इसलिये हमें हर बात में विस्तार से प्रार्थना करना चाहिये कि पवित्र आत्मा हर उस काम में जो हम करते हैं नीचे उतर आये और आशीषित करें। पवित्र आत्मा वह ''रोटी'' है जो हमारे पास होनी चाहिये अन्यथा पापी चर्च से भूखे ही चले जायेंगे − और बचाये नहीं जायेंगे।

हां, यीशु कूस पर मरे कि पापियो को परमेश्वर के क्रोध से बचाये। ताकि पापियों को नया जीवन दें। हां यीशु मृतको में से जी उठे ताकि पापियों को नया जीवन दें, यहां तक कि उन्हें अनंत जीवन दे! पर ये चीजें तब तक वास्तविक नहीं होगीं जब तक परमेश्वर का आत्मा उनमें कियाशील न हो। इसलिये पूरे सप्ताह, जब आप प्रार्थना करते हैं, तो पापियों को रोटी मिलने के लिये प्रार्थना कीजिये। परमेश्वर से प्रार्थना कीजिये कि मंडली के लोगो के अंधकार भरे मनों को प्रकाशित करें और उन्हें उनके पापों का बोध करवायें और उन्हें प्रभु यीशु मसीह की महान आवश्यकता के प्रति अवगत करवायें! अब लूका ११:१३ को देखिये! यह स्कोफील्ड स्टडी बाइबल के पेज १०९० पर है। निवेदन है जब मैं इसे पढता हूं आप अपने स्थानों पर खडे हो जाइये।

''सो जब तुम, बुरे होकर, अपने लड़के−बालों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो: तो स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा?'' (लूका ११:१३)

अब यहां वह सूची है जिसमें लिखी बातों के उपर आप को इस सप्ताह और विशेष कर शनिवार को प्रार्थना करना है।

हम हमारे चर्च में अगले शनिवार फिर से उपवास रखेंगे। मैं आप को कुछ बिंदु देना चाहता हूं कि इसे कैसे करना चाहिये।


१.  अपने उपवास को गुप्त रखिये (जितना अधिक संभव हो) लोगो पर जाहिर मत करते रहिये (अपने रिश्तेदारों पर भी नहीं) कि आप उपवास कर रहे हैं।

२.  बाईबल पढने में समय बिताइये। अगर प्रेरितो के काम को पढेंगे (अच्छा होगा उसके प्रारंभिक भागों को पढें)।

३.  शनिवार के उपवास के दिन यशायाह ५८:६ को स्मरण कीजिये।

४.  प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर हमारे चर्च में दस और नये लोग दें जो हमारे चर्च में ठहरे रहें।

५.  उन जवानों के नाम लेकर परिवर्तन के लिये प्रार्थना कीजिये परमेश्वर से ५८:६ में कही बातों को उनके लिये करने के लिये मांगिये।

६.  प्रार्थना कीजिये कि आज (रविवार) को जो आगंतुक पहली बार आये हैं वे अगले रविवार भी आयें। संभव हो तो उनके नाम लेकर प्रार्थना कीजिये।

७.  परमेश्वर से प्रार्थना कीजिये कि मुझे मार्गदर्शन दें कि मैं अगले रविवार को क्या प्रचार करूं − सुबह और संध्या को।

८.  निमंत्रण के लिये प्रार्थना करें − केवल जवानों के प्रार्थना समूह के लिये (हमारे यहां उनमें से तीन समूह है)। अगर आप चाहें तो जॉन सेम्यूएल कैगन के लिये प्रार्थना करें।

९.  खूब मात्रा में पानी पीजिये। हर घंटे में एक एक गिलास पीजिये। अगर आपको रोज सुबह कॉफी पीने की आदत है तो प्रारंभ में ही एक बडा कप भरकर कॉफी पी लीजिये। शीतल पेय या स्फूर्ति देने वाले पेय पदार्थ मत पीजिये।

१०. अगर अपने स्वास्थ्य के लिये चिंतित हैं तो उपवास के पहले मेडिकल डॉक्टर से चर्चा कर लीजिये। (आप डॉ क्रेटन चान या डॉ जूडिथ कैगन को जो हमारे चर्च में हैं उन्हें दिखा सकते हैं) उपवास मत कीजिये अगर आप को कोई गंभीर विकार है तो जैसे डायबिटिज या उच्च रक्तचाप आदि। आप शनिवार का उपयोग इन निवेदनों के उपर प्रार्थना करने में भी बिता सकते हैं।

११. अगले दिन शनिवार की संध्या ५:३० तक चर्च में मिलने वाले भोजन के अतिरिक्त खाने में कुछ ग्रहण मत कीजिये।

१२. स्मरण रखिये कि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हमारे चर्च में जवान भटके हुये लोगों के मन परिवर्तन के लिये प्रार्थना करना − एवं जो नये लोग इस दौरान चर्च में आ रहे हैं वे हमारे साथ स्थायी रहें।

अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स को इस पते पर ई मेल भेजिये rlhymersjr@sbcglobal.net (यहां क्लिक कीजिये)। यह भी उन्हे लिखें कि आप किस देश से हैं। आप डॉ हिमर्स को किसी भी भाषा में ई मेल भेज सकते हैं पर अंगेजी भाषा में भेजना उत्तम होगा।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा बाइबल पाठ पढा गया: लूका ११:५−१३
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''आय एम प्रेयिंग फॉर यू'' (एस औ मेली क्लौ, १८३७−१९१०)