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पुर्नजागरण के लिये प्रार्थना

(पुर्नजागरण पर संदेश संख्या १३)
A PRAYER FOR REVIVAL
(SERMON NUMBER 13 ON REVIVAL)
(Hindi)

द्वारा डॉ. आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २ नवंबर, २०१४ को दि बैपटिस्ट टैबरनेकल आँफ लॉस एंजीलिस में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Morning, November 2, 2014

''भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे। जैसे आग झाड़−झंखाड़ को जला देती वा जल को उबालती है, उसी रीति से तू अपने शत्रुओं पर अपना नाम ऐसा प्रगट कर कि जाति जाति के लोग तेरे प्रताप से कांप उठें!'' (यशायाह ६४:१, २)


डॉ जॉन एच आर्मस्ट्रांग सुधारवाद व पुर्नजागरण सेवकाई के अध्यक्ष हैं। वह ''दि कमिंग इवेंजलीकल क्राइसिस'' के लेखक हैं। डॉ आर्मस्ट्रांग ने कहा,

पश्चिम में समाज के पतन की समस्या बहुत गंभीर है.......हम पहले से ही जैसा हमने जाना है कि सभ्यता को नष्ट होते हुये देखने के गवाह हैं। हम....सोचते हैं कि जिस तरह की यह बातें हो रही हैं वे ऐसी ही रहेंगी। हम......यह पहले से ही भूल चुके हैं कि वह कुछ दिनों की ही रहेंगी। हम.....यह पहले से ही भूल चुके हैं कि वह कुछ दिनों की ही बात थी अब अभेध ''लौह कवच'' नीचे उतर आया था। (जॉन एच आर्मस्ट्रांग, पीएचडी, ट्रू रिवाइवल, हार्वेस्ट हाउस पब्लिशर्स, २००१, पेज १२५,१२६)

उनका कहने का यह आशय था कि यह सभ्यता उतनी ही जल्दी समाप्त हो जायेगी जितना पूर्व सोवियत यूनियन में कम्यूनिज्म समाप्त हो गया − बिल्कुल कुछ ही दिनों के भीतर! मैं सोचता हूं ऐसा ही होगा। डॉ आर्मस्ट्रांग ने इसे २००१, में तेरह वषों पहले लिखा था।

एक रात सोने से पूर्व मैंने वल्र्ड मैग्जीन में बहुत विचलित कर देने वाला लेख पढा। जब मैं सो रहा था, मुझे ख्याल आया, ''हम अब उस दशा में पहुंच चुके हैं। हमारी सभ्यता का अब पतन हो रहा है। यह उतनी ही जल्दी समाप्त हो सकती है जितनी जल्दी सोवियत यूनियन का पतन हुआ।''

यह पतित संसार को तो जरा सी भी खबर नहीं है, किंतु मसीहत वह ''गोंद'' है जो इस सभ्यता को जकडे रखी हुई हैं। साथ ही हमारे चर्चेस भी इतने सामर्थशाली नहीं है कि मदद करें। वे इससे अधिक कुछ कर ही नहीं सकते। हमारी जीवन शैली हमारी आंखों के आगे से नष्ट हुई जा रही है।

लॉस ऐंजीलिस के बहुत थोडे चर्चेस में से, एक हमारा चर्च है जहां शाम की भी आराधना होती है। अधिकतर चर्च में तो बुधवार शाम की प्रार्थना सभायें भी खत्म हो चुकी है! सचमुच प्रभु हमारी सहायता करे! हम अकेले पड गये है, हम यह महसूस करते हैं। हम अकेले पड गये हैं, और हम हमजोर भी हैं। हमारे शत्रु बहुत शक्तिशाली और वाचाल हैं। हमें उनके चीखने की आवाजें प्रतिदिन आती है। क्या हमारे ही समय में अब मसीहत नष्ट होना प्रारंभ हो गई है? हर विचार करने वाले मसीही जन के मन में ये नकारात्मक विचार कौंधते हैं। तब हम सोचते हैं क्या किया जा सकता है। हम चर्चेस को देखते है और चर्चेस में गवाहियां बिखर रही हैं। हम प्रचारकों की रईसी जीवन शैली देख रहे हैं साथ ही वे अंदर से कमजोर हैं हम यह भी जानते हैं। प्रचारकों की कमजोर अवस्था अर्थात मसीह में बने नहीं रहना हम सबको विचलित कर देने वाली बात है।

१९५० के पुराने मसीही जन अब इस संसार में नहीं रहे। राष्ट्रपति रीगत अब मर चुके हैं। फ्रांसिस शैफर अब नहीं रहे। जॉन आर राईस इस दुनियां से रूखसत हो गये। हैराल्ड लिंडसेल, बिल ब्राईट, डब्ल्यू ए किसवेल, जैरी फॉलवेल एवं डॉ ल्योड − जोंस अब जिंदा नहीं हैं। बिलीग्राहम, ९६ वर्ष की उम्र में, दूर कहीं नार्थ कैरोलिना के पहाडों में उनकी व्हील चेयर पर अकेले बैठे हुये हैं। हम सब अकेले हैं − और जब पश्चिम सभ्यता बिखर रही है तो कोई ऐसा मजबूत प्रचारक नहीं हैं जो लोगों को पतित दशा में जाने से रोक पाये।

यशायाह भविष्यदर्शी ने इस तरह से महसूस किया था। वह परमेश्वर का खोजी बन गया था। उसने कहा,

''निश्चय तू हमारा पिता है, यद्यपि इब्राहीम हमें नहीं पहिचानता, और इस्राएल हमें ग्रहण नहीं करता; तौभी, हे यहोवा, तू हमारा पिता और हमारा छुड़ाने वाला है; प्राचीनकाल से यही तेरा नाम है।'' (यशायाह ६३:१६)

डॉ ल्योड−जोंस ने कहा था,

आपको और मुझे परमेश्वर की उपस्थति में जाने के लिये किन्हीं परंपराओं का निर्वाह करने की आवश्यकता नहीं है......सिर्फ इसलिये कि पूरा समाज ऐसा करता आया है या हमारे बाप दादे ऐसा करते थे। वे जो भी रहे हों, चाहे मैथोडिस्ट पुरोहित रहे हों, या प्यूरीटंस, या सुधारवादी समूह के रहे हों। अब, हम ऐसे कोई नाम लेकर याचना नहीं करते मानो, अब्राहम या याकूब − बिल्कुल नहीं। ''हे पिता तू जो स्वर्ग में है।'' न सुधारवादी हमें उद्धार दे सकते थे, न मेथोडिस्ट पुरोहित हमें नया जन्म देकर बचा सकते थे। (आज) एक बडा खतरा हमारे उपर मंडरा रहा है। हमें मानना चाहिये, कि वह परम प्रधान है। ''तू ही हमारा पिता है,'' और उसे छोड और कोई दूसरा.......परमेश्वर नहीं है, ''तेरा नाम युगानयुग तक रहेगा,'' युगानयुग तक रहेगा। परमेश्वर मरे हुओं का परमेश्वर नहीं है, वह जीवितों का परमेश्वर है, और वह स्वयं जीवित परमेश्वर है (मार्टिन ल्योड − जोंस एमडी, रिवाइवल, क्रासवे बुक्स, १९८७, पेज ३०१, ३०२)

मैं बहुत खुश हूं कि कई बैपटिस्ट फिर से सुधारवादियों के पास जा रहे हैं। किंतु, जितना मैं भी सुधारवादियों का पसंद करता हूं, मैं जानता हूं, यशायाह के समान, कि चाहे सुधारवादी हो या प्यूरीटंस कोई हमें नहीं बचा सकता! वे हमारी कोई मदद नहीं कर सकते! हमारी सभ्यता बहुत आगे निकल आई है, बहुत पतित हो गई है, बहुत अंधी हो गई है, यह इन किन्ही भी प्रचारकों के धर्मविज्ञान से नहीं बचाई जा सकती। हमें फिर से परमेश्वर की शरण में जाना ही पडेगा! अकेला परमेश्वर ही हमें बचा सकता है!

किंतु हमें केवल परमेश्वर की शरण में जाकर यह नहीं मांगना है कि केवल हमारे देश को बचा। बिल्कुल भी ऐसा न कहें! बल्कि, हमारे देश के लोग तो परमेश्वर के लोग भी नहीं हैं। वे तो जीवित परमेश्वर के साथ कोई मेलमिलाप करना ही नहीं चाहते हैं! यशायाह ने इस प्रकार कहा,

''हम लोग तो ऐसे हो गए हैं: मानो तू ने हम पर कभी प्रभुता नहीं की; और उनके समान जो कभी तेरे न कहलाए'' (यशायाह ६३:१९)

प्रभु का नाम धन्य होवे! हम ऐसा कुछ नहीं चाहते, और ना ही ऐसा खोजते हैं, कि ''मोरल मेजोरिटी,'' ''अमेरिका फस्र्ट,'' दि रिपब्लकन पार्टी, या ऐसी कोई शाखा हमें कंधा रखने को चाहिये! हम ऐसी नष्ट होने वाली आकर्षक शाखाओं पर अपनी प्रार्थनायें बरबाद नहीं करेंगे! हम तो केवल परमेश्वर की भुजा पर सिर टिकायेंगे! ''प्रभु, तू ही हमारा पिता है, हमारा छुडानेवाला; तेरा ही नाम युगानयुग रहेगा''

पहले से ही पहाडियां सीधी की गयी,
   या धरती ने अपना आकार बदला,
आप ही सनातन परमेश्वर के लिये,
   अंतहीन युग तक यही रहेगा।

हजारों साल, तेरी निगाहों में,
   जैसे सिर्फ एक बीतती शाम हो;
जैसे सिर्फ बीतती रात हो,
   सूरज के उगने के पहले।
(''प्रभु, सनातन काल तक हमारा सहायक है''
      आइजक वाटस, डीडी १६७४−१७४८)

अब, हम अपने पद पर आते हैं। एक भविष्यवक्ता परमेश्वर की तरफ ही अपने मुंह को फेरता है। वह परमेश्वर ही है जिससे वह याचना कर सकता है जब वह प्रार्थना में लगा रहता है,

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........'' (यशायाह ६४:१)

जब यह प्रार्थना की गई थी तब परमेश्वर के लोग बहुत बुरी दशा में थे। वे भय और दुख को अत्यंत अधिकाई से झेल रहे थे। तब भविष्यवक्ता ने यह प्रार्थना नहीं की कि प्रभु उन्हें आर्थिक रूप से संपन्न बना दे। उसने यह दुआ नहीं मांगी कि उन्हें शांति मिले। उसने उनकी सफलता के लिये भी प्रार्थना नहीं मांगी! वह जोएल आँस्टन के समान भी नहीं था! वह जानता था प्रभु के लोगों के लिये आवश्यक बातें क्या थी। यशायाह जानता था कि उन लोगों के लिये सबसे अधिक, सबसे प्रमुख आवश्यकता थी कि परमेश्वर उनके मध्य में उपस्थत हो। इसलिये जो प्रार्थना उसने मांगी वह महान प्रार्थनाओं में से एक मानी जाती है,

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........'' (यशायाह ६४:१)

मैं डॉ जे वर्नान मैगी से बहुत कम असहमत रहता हूं। किंतु इस पद की व्याख्या के लिये मैं उनसे सहमत नहीं हूं। उन्होंने कहा, ''कि यशायाह उस महान क्लेश के समय इजरायल की प्रार्थना का प्रकाशन कर रहा था'' (थू दि बाईबल, वॉल्यूम ३, पेज ३४२; यशायाह ६४:१ पर व्याख्या) नहीं, इजरायल के लिये वह यह प्रार्थना नहीं कर रहा था कि उस महान क्लेश के समय मसीह का द्वितीय आगमन होगा। वे यह प्रार्थना शायद, बाद में करेंगे किंतु इस पद से तो यह स्पष्ट है कि वे कुछ और बात के लिये प्रार्थना कर रहे थे। भविष्यवक्ता कह रहा था कि परमेश्वर अभी नीचे उतर आये! स्पर्जन और डॉ ल्योड−जोंस दोनों ने कहा था यह प्रार्थना पवित्र आत्मा से नीचे उतर आने के लिये याचना थी।

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........'' (यशायाह ६४:१)

डॉ ल्योड जोंस ने कहा, ''मुझे यह (कहने) में कोई हिचक नहीं है कि यह पुर्नजागरण के लिये मांगी गई दुआ थी......एक विशेष, अलग सी, एकाएक मांगी गई प्रार्थना जिसमें परमेश्वर का आत्मा आकर लोगों के मनों मे वास करेगा। काउपर के गीत में इस याचिका के मर्म को बहुत अच्छी रीति से दर्शाया है,

''भला हो कि, तू आकाश को फाड़कर उतर आए,
और हजारों मनों को अपना बना लो।

   यही तो पुर्नजागरण में होता है'' (मार्टिन ल्योड−जोंस एम डी रिवाइवल, उक्त संदर्भित, पेज ३०५)

इसका क्या अर्थ है कि, ''परमेश्वर नीचे उतर आया''? मैं आपको बताउंगा कि इसका सीधा अर्थ क्या है। सनफ्रांसिस्को के उत्तर में; मिल वैली में एक चर्च प्रारंभ करवा कर मैं फिर से लॉस एंजीलिस आ गया। उन्होंने मुझे ''फेस्टीवल आँफ दि सन'' में प्रचार करने के लिये बुलाया था। मैं विमान से सैन फ्रांसिस्को पहुंचा और कुछ घंटे की या़ उत्तरी भाग के लिये कार, से तय की। वह सभा एक खेत में रखी गई थी। जैसे ही हम वहां पहंचे, मैंने परमेश्वरी की उपस्थति महसूस की। जब मैं कार से उतरा मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि सैंकडों जवान लोग वहां एकत्रित थे। कुछ गीत गाने के उपरांत, मेरा परिचय दिया गया। मैं बडी भीड के समक्ष खडे हो गया और माइक्राफोन पर अपना पद पढा। उस समय एक रात हो चुकी थी। तारे तो निकले थे, तौभी अंधकार था। माईक्राफोन और रोशनी को जनरेटर से बिजली मिल रही थी। जैसे ही मैंने पद पढा, सब ओर की बिजली गुल हो गई। माइक्राफोन बंद हो गया था। बत्तियां गुल हो गई थी। इतना अंधेरा था कि मुझे मेरा खुद का हाथ नहीं सूझ पड रहा था। मैंने सोचा, ''क्या करूं''? सैंकडो जवान जमीन पर बैठे हुऐ थे। उनमें से कई ने तो चर्च के अंदर कभी कदम भी नहीं रखा था। मैं इनसे अब क्या बोलूं? इस घटाटोप अंधेरे में मैं क्या कर सकता हूं? तब परमेश्वर नीचे उतर आया!

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........''

मैं तो सिर्फ इतना बता सकता हूं कि परमेश्वर की उपस्थति को मैंने सामर्थ के साथ उतरते हुये महसूस किया। मैं तो चिल्ला चिल्ला कर प्रचार करने लगा। रोशनी नहीं थी। माइक्राफोन नहीं था। अब कुछ भी चीजों की जरूरत महसूस नहीं हो रही थी! परमेश्वर तो उस काली अंधेरी रात में भी कार्य कर रहा था। अब जब मैं प्रचार करने लगा तो मैं उन बातों के लिये सोच भी नहीं रहा था। लगातार मेरे मुंह में शब्द भरे हुये थे! जवान लोग तो बिल्कुल शांत हो गये। मेरी आवाज के अतिरिक्त कोई अन्य आवाज न थी। मैंने अपना संदेश समाप्त किया, उसके एक सेकेंड या दो सेकेंड पश्चात, मैं सोच ही रहा था कि अब क्या करूं। उसी समय, मैंने एक आवान सुनी। जनरेटर वापस चालू हो गया था। खेत में अचानक बिजली आ गई − माइक्राफोन की आवाज लौट आई। मैंने उन्हे एक साधारण आमंत्रण दिया। और मैं देखकर सकते में आ गया कि सैंकडो हिप्पी सामने आ गये, कई लोगों की आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। उस समय वहां न कोई संगीत बज रहा था, कोई आवाज न थी, सिवाय लोगों के पैरों की आहट थी कि वे आते और नीचे घुटनों के बल बैठते जाते। हम वहां बहुत लंबे समय तक रूके, उनसे बातें करते रहे। मेरे मित्र, रेव्ह मार्क बकले, वह रात कभी भूल नहीं पाते − उस रात जब बत्ती गुल हो गई थी और परमेश्वर नीचे उतर आया था − हिप्पयों के झंड और नशीली दवायें लेने वालों ने मसीह के रक्त में धुलकर परमेश्वर से मेलमिलाप किया! उस पुर्नजागरण से चालीस से अधिक चर्च और स्थापित हुये − पूरे अमेरिका, यूरोप, एशया और अफ्रीका में! परमेश्वर ने इसे तब किया था और परमेश्वर इसे आज भी कर सकता है! बिल्कुल जैसा स्पर्जन ने कहा था, ''परमेश्वर का काम केवल परमेश्वर कर सकता है।''

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........''

१९६९ में, फस्र्ट चाइनीज बैपटिस्ट चर्च में, तो आप चर्च की इमारत में प्रवेश से पहले ही परमेश्वर की पवित्र उपस्थति को महसूस कर लेते हो। इस बारे में कुछ अजीब नहीं लगता। परमेश्वर वहां होता था। मैं सिर्फ हवा में करेंट के रूप में ऐसा महसूस करता था! बाईबल इसे परमेश्वर की ''महिमा'' का नाम देती है। यह इब्रानी शब्द से अनुवाद होकर आया है जिसका इब्रानी में अर्थ ''वजन'' था । आप हवा में महिमा का अहसास कर सकते हो − परमेश्वर की भारी उपस्थति या वजन, का अहसास कर सकते हो!

रिस बेवन जोंस ने जब बेल्श में वर्णन किया तो मैं समझ सकता हूं कि पुर्नजागरण के लिये उन्होंने क्या बखान किया गया,

वह सारा स्थान प्रभु की महिमा से भरा हुआ था........कोई उस शब्द ''अदभुत'' का वर्णन कर सकता है; परमेश्वर की पवित्र उपस्थति इस रूप में महसूस हुई की वक्ता स्वयं अभिभूत हो गया; पुलपिट परमेश्वर की ज्योति से भर गया कि उसे वह स्थान से हटना पडा! वहां; चलिये इसको छोड देते हैं। ऐसे अनुभव का बखान शब्द नहीं कर सकते हैं (ब्रायन एच एडवर्ड; रिवाइबल! ए पीपल सैचुरेटेड विथ गॉड, इवेंजलीकल प्रेस, १९९१ संस्करण, पेज १३४)

जनवरी १९०७ में, जब परमेश्वर उत्तर कोरिया में उसके लोगों के मध्य उतर आया, एक मिशनरी ने कहा, ''हर व्यक्ति जिसने चर्च में प्रवेश किया, उसे परमेश्वर की उपस्थति मालूम हुई ...उस रात पायोनयांग (वहां पर) परमेश्वर की ऐसी उपस्थति थी जो वर्णन से बाहर थी'' (एडवर्ड, उक्त संदर्भित, पेज १३५, १३६) ब्रायन एडवर्ड ने कहा; ''जल्दी जल्दी परमेश्वर की उपस्थति के कारण मंडली में अपने पाप का गहरा बोध उत्पन्न हुआ। जब परमेश्वर की उपस्थति से बचना नामुमकिन हो गया, तब हमें पुर्नजागरण मिला'' (एडवर्ड, उक्त संदर्भित)। डॉ आर्मस्ट्रांग ने कहा, ''विश्वासी और अविश्वासी दोनों ही इस बात को मानने लगे कि परमेश्वर बहुत सामर्थशाली रूप में वहां उपस्थत था'' तब पुर्नजागरण आया (आर्मस्ट्रांग, उक्त संदर्भित पेज ५३)

''भला हो कि तू आकाश को, फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे........''

मैं आशा करता हूं कि हमारे कुछ लोग एकत्रित होकर यशायाह ६४:१ के शब्दों द्वारा प्रार्थना करेंगे। मैं आशा करता हूं कि आप बाईबल से वह पद निकाल लेंगे, जब आप अकेले होंगे, ताकि जब आप दुआ करें तो भविष्यवक्ता के इन शब्दों को अपनी प्रार्थना बना ले। हमारे चर्च में पुर्नजागरण की सामर्थ देने के लिये परमेश्वर की उपस्थति की प्रार्थना मांगिये! परमेश्वर आपको आशीष दे!

कौन प्रार्थना करेगा? आप में से तो कई अभी परिवर्तित भी नहीं हुये हैं। हम प्रार्थना करेंगे कि परमेश्वर आपको आपके पापों का गहरा बोध दे। जब तक आपको अपने मन व दिमाग में गहरे बसे; पाप का बोध न हो तब तक आप यीशु की गहन जरूरत महसूस नहीं करेंगे। हम पवित्र आत्मा के नीचे उतर आने के लिये प्रार्थना करेंगे जो आपको पापी और खोया हुआ महसूस करने में मदद करेगा। तब, भी हम आपके लिये प्रार्थना करते रहेंगे कि आप यीशु पर विश्वास लायें ताकि उसका कीमती रक्त आपके पापों को धो दे। ये सारी बातों के लिये हम परमेश्वर से आपके जीवन के लिये प्रार्थना करते रहेंगे। डॉ.चान, निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिये! आमीन!

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया डॉ. केप्टन एल. चान द्वारा: यशायाह ६४:१−४
   संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
     ''यीशु, जहां तेरे लोग मिलते हैं'' (विलियम कूपर, १७३१−१८००; ''डॉक्सालोजी ही धुन अनुसार'')