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मसीह को ढूँढ़ने और पाने पर

ON SEEKING AND FINDING CHRIST
(Hindi)

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की
षाम, 11 अगस्त, 2013, को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, August 11, 2013

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।


ऐसा कहा गया है कि आर्मीनीयन्स कई बार काल्वीनीस्टस की तरह प्रार्थना करते है। अवष्य मैं बात कर रहा हूँ पुराने समय के काल्वीनीस्टों की। इसका अर्थ है कि आर्मीनीयन्स, जिन्होंने आदमी को मुक्ति सूचित की, तथापि प्रभु को प्रार्थना करते हुए, ‘‘हे परमेष्वर, मेहरबानी करके मेरे भाई को बचाईए!'' और इसलिये, मसीही जो आर्मीनीयन्स है प्रार्थना करते है जैसे कि वे काल्वीन्स्ट थे! यह दिखावटी पहेली उन लोगों को आसानी से स्पश्ट की जाती है जो आध्यात्मिक मन के साथ होते है। बाइबल कहता है,

‘‘डरते और काँपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ। क्योंकि परमेष्वर ही है जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है'' (फिलिप्पियों 2:12,13)।

आदमी अपने उद्धार का कार्य स्वयं करता है, परंतु वह ये करता है तब जब परमेष्वर उसमें कार्य करते है - और उसे ऐसा करने चलाते है। वह दोनों पद मन में रखो। फिर आप देखोगे की वहाँ पर बाइबल में कोई विरोध नहीं है। हमारा पाठ कहता है,

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

परंतु बाइबल यह भी कहता है,

‘‘कोई परमेष्वर का खोजनेवाला नहीं'' (रोमियों 3:11)।

कौन सा सही है? आदमी का तर्कषास्त्र कहता है कि दोनो सही नहीं हो सकते। तौभी फिलिप्पियों के उन पदो की रोषनी में हम देखते है कि हकीकत में दोनों सही है। हकीकत में यहाँ असत्याभास नहीं है। वहाँ हकीकत में विरोध नहीं है। और यह फिर से बार-बार लाया जाता है जैसे हम सुसमाचार प्रचार करते है और पूछताछ कक्ष में लोगों से बातचीत करते हैं। कोई भी खोया व्यक्ति अपने आप परमेष्वर को ढूँढ़ता नहीं। पचपन वर्शों की सेवा में, मैं किसी को भी कलीसिया के बाहर नहीं मिला जो प्रभु को ढूँढ़ रहा हो। एक भी नहीं। परंतु जब परमेष्वर लोगों को खींचते है, वे यीषु को अपने सम्पूर्ण मन से ढूँढ़ते है और उन्हें पाते है! यहाँ तीन विचार है मसीह को ढूँढ़ने और पाने पर, जो हमारे पाठ से सम्बंध रखता है।

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

।. पहला, जिन्हें परमेष्वर खींचते हैं, वे वह है जो यीषु को ढूँढ़ेंगे और उन्हें पाएंगे।

‘‘... क्योंकि परमेष्वर ही है जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है'' (फिलिप्पियों 2:13)।

आज के स्वधर्म-त्याग में लोगों के लिये कहना सामान्य है कि किसी को भी कोई भी समय बचाया जा सकता है। सब खोए लोगों को इतना करना है कि उन्हें कहने है ‘‘पापीयों की प्रार्थना'' के षब्द और वे बचाए गए है। उन सब को करना है ‘‘आगे आना'' या वह प्रार्थना कहो, या दोनों करो। इस प्रकार मुक्ति पूरी तरह से मानवीय घटना है। प्रभु की आवष्यकता है ही नहीं। यह हकीकत में पेलाजीयानीझम के प्राचीन नास्तिकता का दुहराव है। उस पेलाजीयन नास्तिकता को, आदमी सुसमाचार को भौकित प्रतिभाव देने के द्वारा अपने स्वयं को बचाता है। यह ज्यादा आध्यात्मिक निरीक्षण नहीं लेना चाहिए देखने की यह पूर्णरूप से झूठ है। प्रभु आपकी आँखे खोले इस आधुनिक ‘‘निर्णायक्ता'' की झूठी षिक्षा को!

रीच योन्ग रूलर यीषु से फिरे और उनके पाप के स्वार्थी जीवन में लौट गए। यीषु ने चेलों से कहा कितना ‘‘कठीन'' है यह ऐसे लोगों के लिये ‘‘प्रभु के राज्य में प्रवेष करना''। चेलों ने कहा, ‘‘तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?'', ‘‘मनुश्यों से तो यह नहीं हो सकता'' (मरकुस 10:24,26,27)। मैंने इसे काट दिया उन मुख्य षब्दों को लाने।


(1) यह ‘‘कठिन'' है ‘‘परमेष्वर के राज्य में प्रवेष करना''।

(2) ‘‘तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?''

(3) ‘‘मनुश्यों से तो यह नहीं हो सकता'' (मरकुस 10:24-27)।


फिर यीषु ने कहा, ‘‘परंतु प्रभु के साथ नहीःं क्योंकि प्रभु के साथ सब चीजे षक्य है।'' उसे अपने मनमें पकड़े रखो। फिर रोमियों 3:11 को सोचो, ‘‘कोई परमेष्वर का खोजनेवाला नहीं'' (रोमियों 3:11)। फिर हमारे पाठ के बारे में सोचो,

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

मैं प्रयत्न कर रहा हूँ आपको पेलाजीयन के ‘‘निर्णायक्ता'' की नास्तिकता से दूर करने जिसने हमारे कलीसियाओं को लाखो खोए लोगों से भर दिये है। मरकुस 10, और रोमियों 3:11, और यिर्मयाह 29:13 के पदों को देखते हुए, हम इस महान् सच्चाई पर आते है - खोए लोग नहीं कर सकते और नहीं करेंगे किफायत से मसीह को ढूँढ़ना जब तक परमेष्वर उनको जागृत नहीं करते और उद्धारक के पास नहीं ले जाते।


(1) ‘‘तो फिर किसका उद्धार हो सकता है?'' (मरकुस 10:26)।

(2) ‘‘मनुश्यों से तो यह नहीं हो सकता है'' (मरकुस 10:27)।

(3) ‘‘परमेष्वर ही है जिसने अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है'' (फिलिप्पियों 2:13)।


कोई षायद कहे, ‘‘वह अधिक-काल्वीनीझम है''। परंतु वे गलत है। यह हकीकत में काल्वीनीझम प्रति नहीं है; और यह निष्चितरूप से ‘‘अधिक-काल्वीनीझम'' नहीं है। लोग वह षब्द आसपास फेंकते है बिना जाने कि अध्यात्मविद्या के इतिहास में इसका अर्थ क्या है। ‘‘अधिक-काल्वीनीझम'' संदर्भ करता है सिर्फ उन्हें जो सोचते है हमें बाहर जाकर खोए हुओं को अन्दर नहीं लाना है, क्योंकि प्रभु उन्हें अन्दर लाएँगे ‘‘बिना आपकी या मेरी सहायता के'' - सच्चे अधिक-काल्वीनीस्ट की तरह वीलीयम केरे (जो स्वयं पाँच-मुद्दो के काल्वीनीस्ट थे, परंतु अधिक-काल्वीनीस्ट नहीं) ने कहा। परंतु आपको किसी भी तरह का काल्वीनस्ट होना जरूरी नहीं है देखने मैं कि क्या पाता हूँ। डॉ. ए. डब्ल्यु टोझर कभी भी काल्वीनीस्ट नहीं थे। फिर भी वह बाइबल के गंभीर विद्यार्थी थे, इसलिये उन्होंने कहा,

     क्या आप महसूस करते हो कि आपका विष्वास परमेष्वर की ओर से भेंट है? आपको आपके विष्वास को चमत्कार की तरह देखना चाहिए। यह योग्यता है प्रभु देते है खोए आदमी और औरतों को हमारे उद्धारक और प्रभु पर भरोसा करने और उनकी आज्ञा मानने ... (ए. उब्ल्यु टोझर, डी.डी., यीषु, हमारे विष्वास के लेखक, जीसस, ध ओथर ओफ अवर फेइथ, क्रीस्टीयन प्रकाषन, 1988, पृश्ठ 3)।

सिर्फ वे जिन्हें दिया गया है यह चमत्कार और यह भेंट वे यीषु को पाएँगे और बचाए जायेंगे। बाकी सारे उनके स्वयं पर छोड़े जायेंगे, और मसीह को नहीं पाएँगे। जब वे कहते है, ‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और मुझे पाओगे,'' वे बात करते है सिर्फ उनसे जिन्हें वे बचानेवाला विष्वास देते है। वे किसी और से बात नहीं करते जब वे कहते है,

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

वह षपथ सिर्फ उनके लिये है जिसे बचानेवाले विष्वास की भेंट दी गई है। वे, और वे अकेले, है जिन्हें यह षपथ दी गई है। बाकी सारे आसपास ठोकर खाते रहेंगे पल के लिये और, जल्दी या बाद में, कलीसिया छोड़ेंगे-या, सर्वोत्तम में, सिर्फ अवसरों पर ही हाजरी देंगे, ‘‘नाम-मात्र के'', बिन बचाए हुए सदस्य की तरह।

वे जिनपर परमेष्वर कार्य करते है, वे है जो मसीह को ढूँढ़ेंगे और पाएँगे। और सिर्फ वे ही है जो यर्थाथ में ढूँढ़ेंगे और यर्थाथ में उन्हें पाएँगे! इसीलिये यीषु कहते है,

‘‘कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले...'' (यूहन्ना 6:44)।

जब कोई भी यीषु के पास आते है, यह सदैव सिर्फ प्रभु के अनुग्रह द्वारा।

अद्भूत अनुग्रह! कितना मधुर स्वर,
   जिसने मुझ जैसे नीच को बचाया!
मैं एकबार खोया था, परंतु अब मिल गया हूँ,
   अंधा था, परंतु अब देखता हूँ।
(‘‘अद्भूत अनुग्रह'' जोन न्यूटन द्वारा, 1725-1807)।

॥. दूसरा, वे जिन्हें प्रभु नहीं खींचते है उन्हें यीषु नहीं मिलेंगे।

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

वह षपथ कहती है, ‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे, और पाओगे।'' किसे वह ‘‘तुम'' संदर्भ करता है? जैसे मैंने इस सुबह कहा, ‘‘तुम ... मुझे पाओगे'' संदर्भ करता है सिर्फ उनको जो ‘‘अपने सम्पूर्ण मनसे [उनके] पास आते है। कौन, फिर, है जिनका इस षपथ में कोई हिस्सा नहीं है? वे वह है जो ‘‘[अपने] सम्पूर्ण मन से उनके पास आते'' ughaA

वे जो सोचते है वे कुछ पाप जिसे वे प्रेम करते है उसे जारी रख सकते है उन्हें यीषु नहीं मिलेंगे। यीष्‍ो ने कहा,

‘‘और दण्ड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुश्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उनके काम बुरे थे'' (यूहन्ना 3:19)।

वे जो ‘‘अन्धकार को ज्योति से अधिक'' प्रिय जानते है वे यीषु के पास नहीं आएँगे। स्पर्जन ने कहा, ‘‘प्रभु की दया पर अनुमान कारण है क्यों इतने सारे उनको स्वयं को षरीर पर मन लगानेवाली सुरक्षितता के पहिनावे में लपेट लेते है, और बुरे दिन से दूर रखते है। प्रभु आपको इस बड़ी बुराई से छुडाते है!'' (सी. एच. स्पर्जन, ‘‘ढूँढ़नेवाले को दूसरा वचन,'' एमटीपी, क्रमांक 1,313, पृश्ठ 514)।

फिर, भी, वे जो निराषा में छोड देते है उन्हें यीषु नहीं मिलेंगे। स्पर्जन ने कहा, ‘‘आओ, गरीब आत्मा, परमेष्वर आपको प्राप्त करेंगे, आप चाहे कोई भी हो। अगर आप अपने सम्पूर्ण मन से एक बार में सहमत हो प्रभु यीषु पर भरोसा करने, वे आपको प्राप्त करेंगे। हाँ वे आपको दिखाएँगे कैसे भरोसा करना है, वे आपको विष्वास देंगे ... [आप पाओगे] दया जो हमारा पाठ घोशित करता है ... अगर आप ढूँढ़ते हो [यीषु] को अपने सम्पूर्ण मन से'' (ibid, पृश्ठ 515)।

फिर, भी, वे जो झूठे मसीही के बुरे द्रश्टांत की ओर देखते है वे यीषु को नहीं पाएँगे। स्पर्जन ने कहा, ‘‘मुझे ड़र है कि कुछ लोगों को सम्पूर्ण-मन से ढूँढ़ने से मसीही प्राध्यापको के व्यवहार द्वारा दूर रखा गया है। मुझे आपको विनती करने दो कभी भी आपके [द्रश्टांत] उनसे नहीं लो जो उनके अनुकरण करनेवाले होने का बहाना करते है, क्योंकि कुछ [निर्गुण] प्रकार [के द्रश्टांत] है। उन्हें, वे है उतने बुरे होने दो, वह आपको क्या है? आपके पास आपकी अपनी आत्मा है [उस बारे में सोचने] को; और आपको मसीह को ढूँढ़ना है और ज्यादा उत्सुकता के साथ ... उनके मन पराकाश्ठा मैं उत्साहहीन है और इसलिये वे कभी भी नहीं खौलते उत्साह और प्रेमभरे कथन के साथ'' (ibid, पृपृश्ठ 515, 516)। उनके बुरे द्रश्टांत का अनुकरण मत करो!

वे जो सोचते है कि वे कुछ घृणित पाप में जारी रह सकते है वे यीषु को नहीं पाएँगे। वे जो इर्श्या में छोड़ देते हे यीषु को नहीं पाएँगे। वे जो झूठे मसीही के द्रश्टांत का अनुकरण करते है वे यीषु को नहीं पाएँगे।

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

॥।. तीसरा, कौन, फिर, यीषु को पाएँगे?

फिर से, मुझे अपने पाठ का कथन करना ही चाहिए,

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

आपको अपने सम्पूर्ण मन से मसीह को ढूँढ़ना चाहिए! हम कई बार चक्ति हो जाते है कैसे जल्दी से कुछ नये लोग मसीह को ढूँढ़ते है और उन्हें पाते है! परंतु वे जो आधे-मन के है वे लंबे समय तक खोए रह सकते है। एक बार फिर से, महान् स्पर्जन ने कहा,

     आपके ढूँढ़ने में वहाँ आपके मन की सम्पूर्णता होनी ही चाहिए, क्योंकि वह जो आप ढूँढ़ते हो वह सम्पूर्ण मन की चीज है। सुनिये कैसे सच्चे मसीही प्रार्थना करते है। क्या वे उनके आधे-मन से प्रार्थना करते है? नहीं, क्योंकि एक ने कहा है, ‘‘मैं पूरे मन से तेरी खोज में लगा हूँ'' [भजन संहिता 119:10] ... वे मल्लयुद्ध करते हुए याकूब के साथ प्रार्थना करते है, ‘‘जब तक तू मुझे आषीर्वाद न दे, तब तक मैं तुझे जाने न दूँगा'' [उत्पति 32:26]। प्रार्थना मसीही का अति-आवष्यक ष्वास है, और अगर वह सम्पूर्ण मन से प्रार्थना नहीं कर सकता है, फिर यह स्पश्ट है कि आध्यात्मिक जीवन का होने, आप, ओ ढूँढ़नेवाले, आपको सम्पूर्ण मन इसको देना ही चाहिए (ibid, पृपृश्ठ 512, 513)।

आप कहते हो, ‘‘मुझे प्रार्थना और उत्साह में ऐसा साहसी होना ही चाहिए जैसे श्रीमान ली और श्रीमान प्रुद्योेम्म? मुझे जोन केगन या एन्थोनी कीम की तरह उत्साह के साथ प्रार्थना करनी ही चाहिए?'' हाँ! हाँ, वह षायद आपको सहाय करें! यह निष्चिंतरूप से यीषु को बड़े उत्साह के साथ ढूँढ़ना आपको नुकसान नहीं करेगा! आप जेसे हो वैसे आप कहीं भी जा सकते हो! मैंने सुना है युवा लड़किया और बहुत कायर लोग, प्रार्थना करते है पवित्र त्याग के साथ जब वे यथार्थ में परिवर्तित है! मैंने सुना है बच्चे प्रार्थना करते है ऐसी प्रबलता के साथ कि इसने मेरी आँखो में आँसूओं की बाढ़ ला दी! कारण हम ज्यादा नहीं सुनते छोट़े बच्चों को उस प्रकार करते हुए एैसा है क्योंकि बहुत थोड़े बच्चे सच्चाई से परिवर्तित है इन स्वधर्म त्याग के दिनों में। ऐसी उत्साहपूर्वक प्रार्थना की कमी का कारण है उसके पीछे जो पोलस्टर र्ज्योज बार्ना हमें कहते है - कि हम कलीसिया में 88% बच्चों को खो देते है उनके तीस वर्श के होने से पहले। वह सचमें भयानक और सचमें कारूणिक है! अगर हमारे ज्यादा बच्चे यर्थाथ में परिवर्तित होते, हम उन्हें श्रीमान बेबाऊट, या तीमोथी चान, या नोह सोन्ग के प्रभाव के साथ प्रार्थना करते।

आप षायद कहो, ‘‘परंतु हम कितने छोट़े है! युवा लोग उतने सारे प्रभाव के साथ प्रार्थना नहीं कर सकते!'' क्या आप मज़ाक कर रहे हो? आप जब बाहर खेलते हो अपने को सुनो। आपको वहाँ बाहर बोलने में कोई परेषानी है? नहीं! नहीं चाहे जो भी हो! आप किसी के कान के पड़दे फाड़ दोगे जब आप बाहर खेलते हो। क्यों? क्योंकि वह खेल आपके लिये बहुत महत्वपूर्ण है! परंतु प्रार्थनाएँ आपके लिये महत्वपूर्ण नहीं है! आप तब तक प्रार्थना करोगे जब तक आप पसीना बहाओ जब परमेष्वर आपको मसीह के पास ले जाते है! मैंने सच्चे पुनःजीवन के समय में बहुत मजबूत प्रार्थना करना और रोना सुना है! परंतु मेरे षब्दों पर भरोसा मत कीजीये। प्रेरितों की किताब में इसके बारे में पढ़ीये!

‘‘उन्होंने एक चित्त होकर ऊँचे षब्द से परमेष्वर से कहा'' प्रार्थना में (प्रेरितो 4:24)।

उन्होंने अपनी आवाजे ‘‘ऊँची की''। यह संदर्भ करता है मजबूत, महत्वाकांक्षी प्रार्थना को!

‘‘जब वे प्रार्थना कर चुके तो वह स्थान जहाँ वे इकट्ठे थे हिल गया, और वे सब पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गए, और परमेष्वर का वचन हियाव से सुनाते रहे'' (प्रेरितो 4:31)।

उस प्रकार का हियाव प्रार्थना और गवाही में हम देखेंगे आप से जब आप सच में परिवर्तित होंगे!

एक प्रचारक ने एक युवा आदमी से कहा, ‘‘इतनी ऊँची आवाज में मत बोलो! प्रभु को प्रचार मत दो!'' क्या वे सही थे? नहीं, वे एकदम गलत थे! प्रेरितो की किताब में, ‘‘उन्होंने ऊँचे षब्द से प्रभु से कहा।'' अगर किसीने वह हमारे बहुत से कलीसियाओं में किया, तो यह षरीर पर मन लगानेवाले सदस्यों उनकी ऊँगलिया उनके कान में डालेंगे! षरीर पर मन लगानेवाले एैसे उनकी ऊँगलिया उनके कान से बाहर निकालते है सिर्फ बास्केटबोल के खेल या फुटबोल के खेल में उत्साह के साथ। वे वह चीजे है जिसके बारे में वे उत्साही है! परंतु यर्थाथ में फिर से जन्मे मसीही मजबूत प्रार्थना में और उत्साहपूर्ण प्रचार करने में प्रसन्न होंगे - जैसे उनके पास है चीन, भारत, अफ्रिका, और दक्षिणपूर्वीय एषिया में। परमेष्वर दया रखो हमारे दूसरे-क्रमांक, जीवनहीन कलीसिया अमरिका और पष्चिम में! हम बहुत नीचे है तीसरी - दुनिया के कलीसिया के स्तर और प्रेरितो की किताब में कलीसिया के!

युवा लोग प्रभु द्वारा आग पर रखे जाए और वे यीषु को बहुत जल्दी पाएँगे! वे जो साथ में घसीटे गए, और उत्साह के साथ गाते या प्रार्थना नहीं करते, वे प्रभु के मुख से बाहर फेंके जाएँगे जब वे न्याय में आते है! मसीह ने कहा,

‘‘इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुँह में से उगलने पर हूँ'' (प्रकाषितवाक्य 3:16)।

आप तब तक बचाए नहीं जाओगे जब तक आप मसीह को पाने के बारे में बहुत उत्सुक नहीं होते! सिर्फ जब आप अपने सम्पूर्ण मन के साथ मसीह को ढूँढ़ते हो आप बचाए जाओगे!

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

उत्साह! उत्साह! उत्साह! पहली महान् जागृतता में उन्होंने पुराने-समय के (मेथोडीस्टस) नियम के अनुसार चलनेवालों को ‘‘उत्साही'' कहा क्योंकि उन्होंने प्रार्थना की और गाया और गवाही दी और प्रचार किया उनके फेफडों के ऊँचे अवाज में! मैं आषा करता हूँ परमेष्वर से हमारे पास उस प्रकार के ज्यादा बेपटीस्ट होते आज हमारे कलीसिया में!

कोई आष्चर्य नहीं आपको मसीह नहीं मिलते! आप कलीसिया आते हो मरे हुए धर्माध्यक्ष, और मसीह को पाने की आषा करते हो! अनर्थक वचन! आपको संपूर्ण मन से मसीह को ढूँढ़ना चाहिए और आपस्वयं को उन पर फेंको। फिर आप कलीसिया से घर जाओगे चिल्लाते हुए ‘‘हल्लिलूय्याह! मैं बचाया गया हूँ!'' आपके मृत, षुश्क, धर्माध्यक्ष और आधुनिक बेपटीस्ट धर्म के साथ दूर! इस से दूर धरती के चेहरे से!

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

आप षायद याकूब के साथ चिल्लाओ, ‘‘जब तक तू मुझे आषीर्वाद न दे, तब तक मैं तुझे जाने न दूँगा'' (उत्पति 32:26)। क्या यीषु उन पर गुस्सा थे? नहीं! उन्होंने उसकी प्रार्थना का उत्तर दिया और उसकी आत्मा बचाई, जब उसने पुकारा और अवतार लेने के पहले के मसीह पर पवित्र साहसिकता के साथ भरोसा किया!

वहाँ पर कोई चिल्लाना नहीं होना चाहिए जब आप पूछताछ कक्ष में जाते हो! ओह, नहीं, आपको कभी भी चिल्लाना या रोना नहीं चाहिए। आपको कभी भी रोना या प्रार्थना ऊँचे आवाज में नहीं करनी चाहिए आपकी मुक्ति के लिये जैसे जोन केगन और तीमोथी चान ने किया! आपको वह किसने कहा? दुश्टात्मा ने आपको वह कहा! वह कौन? दुश्टात्मा! आपको वह सलाह दुश्टात्मा से मिली। और इसने आपको क्या अच्छा किया? आप ऐसे ही खोए हुए हो जैसे आप पहली बार जब पूछताछ कक्ष में गए थे! आपके रास्ते ने आपको कुछ भी अच्छा नहीं किया!

क्या आप भावना के लिये देख रहे हो? आप कभी भी नहीं पाओगे ठंडे, मृत तरीके से जैसे आप पूछताछ कक्ष में जाते हो! आप षायद पवित्र भावना पा सको अगर आप बेपटीस्टस, प्रेसबायटेरीयन्स, और नियम अनुसार कार्य करनेवालों की तरह रोओं और पुकारो जैसे उन्होंने पुराने समयों में किया! उन्होंने याचना की थी मजबूत पुकार के साथ उनको जो समर्थ है आत्मा को पाप और मृत्यु से बचाने के! वही है जो आपको आवष्यक है! मजबूत खोजना! मजबूत प्रार्थना करना! मजबूत आँसू! मजबूत चिल्लाना! मजबूत पुनःआनंदित होना!

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

अगर आप पूछताछ कक्ष में जाते हो समान प्रकार से जैसे आप सदा जाते हो, आप बचाए नहीं जाओगे। अगर कोई जाता उस प्रकार जैसे मैंने आपको जाने को कहा है, मजबूत पुकार और प्रार्थना के साथ, वह व्यक्ति षायद आज रात बचाया जाए! याकूब के साथ पुकारो, ‘‘जब तक तू मुझे आषीर्वाद न दे, तब तक मैं तुझे जाने न दूँगा'' (उत्पति 32:26)।

अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं आते यीषु के पास?
अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं आते यीषु के पास?
(‘‘अभी क्यों नहीं? डेनीयल डब्ल्यु. व्हाइटल द्वारा, 1840-1901)।

पूछताछ कक्ष में जाओ और याकूब के साथ पुकारो, ‘‘जब तक तू मुझे आषीर्वाद न दे, तब तक मैं तुझे जाने न दूँगा''। यीषु के लिये मजबूत इच्छा के साथ जाओ, और आप उन्हें पाओगे।

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

यीषु क्रूस पर मरे आपके पाप का दण्ड चुकाने। वे मृत्यु से उठे आपको अनन्त जीवन देने। अगर आप चाहते हो यीषु आपके पाप माफ करे, और आपको उनके लहू द्वारा षुद्ध करे, पूछताछ कक्ष में जाओ और यीषु को मुक्ति के लिये पुकारो। अभी सभागृह के पीछे जाओ। डो. केगन आपको पूछताछ कक्ष में ले जाएँगे। डॉ. चान, मेहरबानी करके प्रार्थना कीजीए किसी के मुक्ति के लिये जिन्होंने प्रतिसाद दिया था। आमीन।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान एबल प्रुद्योम्म द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रषास्त्रः मरकुस 10:23-27।
धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन कीनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीतः
‘‘अभी क्यों नहीं'' (डेनीयेल डब्ल्यु. व्हाइटल द्वारा, 1840-1901)।


रूपरेखा

मसीह को ढूँढ़ने और पाने पर

डॉ. आर. एल. हायमर्स, जुनि. द्वारा

‘‘तुम मुझे ढूँढ़ोगे और पाओगे भी, क्योंकि तुम अपने संपूर्ण मन से मेरे पास आओगे'' (यिर्मयाह 29:13)।

(फिलिप्पियों 2:12, 13; रोमियों 3:11)

।. पहला, जिन्हें परमेष्वर खींचते है, वे वह है जो यीषु को ढूँढ़ेंगे और उन्हें पाएंगे, फिलिप्पियों 2:13; मरकुस 10:24,26,27; रोमियों 3:11; यूहन्ना 6:44।

॥. दूसरा, वे जिन्हें प्रभु नहीं खींचते है उन्हें यीषु नहीं मिलेंगे, यूहन्ना 3:19।

॥।. तीसरा, कौन, फिर, यीषु को पाएँगे, भजन संहिता 119:10; उत्पति 32:26; प्रेरितो 4:24,31; प्रकाषितवाक्य 3:16।