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जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net .




क्रूस का प्रचार

THE PREACHING OF THE CROSS
(Hindi)

डॉ आर एल हायमर्स जूनि द्वारा लिखा गया संदेश
रेव्ह जॉन सैम्यूएल कैगन द्वारा रविवार की
प्रातः २७ मई‚ २०१८ को लॉस ऐंजीलिस के
बैपटिस्ट टैबरनेकल में दिया गया संदेश
A sermon written by Dr. R. L. Hymers, Jr.
and preached by Rev. John Samuel Cagan
at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, May 27, 2018

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है‚ परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (१ कुरूं १:१८)


हमारे पास्टर डॉ हायमर्स साठ सालों से संदेश दे रहे हैं। हजारों संदेश दे चुके हैं। जो संदेश मैं अभी आप को दे रहा हूं‚ उसे भी उन्होंने लिखा है। उनके संदेश की सैकड़ों हस्तलिपियां‚ शब्दश: हमारी वेबसाईट पर मिलती हैं। वे ३८ भाषाओं में अनुवादित होती हैं। उनके संदेश के विडियोज और हस्तलिपियां विश्व के देशों में पहुंचते हैं। विश्व भर के पास्टर्स उनके संदेशों से प्रचार कर रहे हैं। डॉ हायमर्स एक उत्कृष्ट प्रचारक हैं! इतना अनुभव रखने के उपरांत‚ उनके लिये यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि क्या प्रचार करें।

‘‘बेशक आप पूछ सकते हैं कि क्यों मुश्किल होता है?" मैं इसका जवाब देता हूं‚ क्यों? हमारे चर्च में रविवार की प्रात: अनेकों लोग आते हैं‚ जो सच्चे क्रिश्चयंस नहीं होते हैं। कुछ बौद्ध धर्म को मानने वाले हैं। कुछ कैथोलिक्स हैं या कुछ नये प्रचलित क्रिश्चयंस पंथ से आये होते हैं‚ कुछ नामधारी क्रिश्चयंस अर्थात सिर्फ नाम से क्रिश्चयंस। कुछ लोगों की बिल्कुल कोई धार्मिक नहीं होती। कुछ हमारे ही चर्च के वे लोग हैं‚ जिन्होंने उद्धार नहीं पाया है‚ बाइबल का अथाह ज्ञान उनके पास हैं‚ परंतु यीशु उनके जीवन में नहीं हैं। इन सब लोगों के लिये एक बात सत्य है। वे सब यीशु मसीह के सच्चे अनुयायी नहीं बन पायेंगे।

रविवार की सुबह संदेश एक घंटे या उससे कम अवधि का होता है। उस थोड़े से समय में‚ हमारे संदेश से ऐसे विचार आप तक जाना आवश्यक हैं जो धर्म के प्रति आप की सोच को बदल कर रख दे। सच्ची क्रिश्चयनिटी क्या है‚ उसके सत्य को प्रकट करें। वह एक सत्य नहीं — परंतु वही सत्य है‚ यही संदेश जाये। यह संदेश आप को उस एक बात पर राजी करे‚ जहां से आप के सोचने का पूरा ढंग बदल जाये। यह संदेश आप के गलत विचारों को छोड़ देने के लिये‚ समझाने का प्रयास करने वाला हो। पाप के प्रति बोध से आपको भर दे और आप का संपूर्ण जीवन यीशु मसीह की ओर मुड़ जाये। एक बड़ा नियत कार्य है ये! इसे करने के लिये केवल एक घंटा है! मैं जो संदेश देता हूं, वह एक सरल सा सुसमाचार बताने वाला संदेश प्रतीत होता है। परन्तु उसके पीछे एक बड़ी विचारधारा और प्रार्थना कार्य करती है।

आज हम बाइबल के एक पद पर ध्यान लगायेंगे । अब मेरी प्रार्थना है‚ जो थोड़े शब्द मैं भी मैं इस पद को लेकर कहूं‚ आप के लिये सहायक ठहरें। कम से कम मेरी प्रार्थना है, आज घर जाने के पूर्व आप को ये थोड़े से शब्द मेरे याद रह जायें। उससे भी कम प्रयास करूंगा, कि जो विचार मैं इसमें से निकाल कर लाउंगा, वे आप को प्रभु यीशु मसीह के बारे में सोचने पर एवं आप की आत्मा को अनंतकाल तक उद्धार देने के लिये जो उन्होंने किया है, उसके बारे में सोचने के लिये प्रेरित करे। यहां बाइबल की पुस्तक अध्याय १ कुरूंथियों १:१८ से मैंने इसे लिया है। जब मैं इसे पढ़ता हूं, आप सुनिये,

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है‚ परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (१ कुरूं १:१८)

इस संदेश में तीन बिंदु हैं (१) केवल क्रूस का प्रचार करना ;(२) नष्ट होने वालों को इसकी शिक्षा देने की मूर्खता ;(३) एक मजबूत चर्च होने के लिये एकमात्र क्रूस की शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है।

१॰ पहिला, केवल क्रूस का प्रचार करना।

शिष्य पौलुस ने जब ‘‘क्रूस का प्रचार" शब्द कहे थे तो ऐसा कहने से उनका क्या तात्पर्य था? ‘‘क्रूस का प्रचार" शब्द में एक मुख्य प्रसंग है। इन शब्दों में एक ही सत्य निर्धारित है। ये शब्द एकमात्र सच्चे सुसमाचार की ओर संकेत देते हैं। एक ही सुसमाचार है‚ जैसे एक ही यहोवा परमेश्वर हैं। और वैसे ही पाप से छुटकारा देने वाले एकमात्र मसीहा हैं — यीशु मसीह। हम इस आधुनिक विचार को नहीं मानते‚ जो कहता है ‘‘क्रूस का प्रचार" मेरे लिये सत्य हो सकता है परन्तु तुम्हारे लिये नहीं। आधुनिकतावादी यूं भी कहते हैं, ‘‘ये तुम्हारा सत्य है। यह तुम्हारे लिये सत्य होगा। परन्तु यह मेरा सत्य नहीं है।" मेरा मानना है आधुनिकवाद दोहरी बात करता है। जब बाइबल क्रूस की बात करती है, तो एक लक्ष्यपूर्ण सत्य कहती है — ये सत्य आप में से हरेक के लिये है। एक सत्य, सत्य ही रहता है, आप इसे मानें अथवा न मानें। चूंकि परमेश्वर यहोवा ने बाइबल में इसे कहा है, तो यह सत्य है, भले ही आप सोचते रहिये कि ये सत्य है या नहीं। यह लक्ष्यपूर्ण सत्य है जिसका अर्थ है कि यह सत्य है, चाहे आप इसके महत्व को समझ पा रहे हैं या नहीं।

अगली बात‚ ‘‘क्रूस का प्रचार" न केवल बाइबल में लिखी बातों पर आधारित है। यह इतिहास की सच्चाई भी है — वह सच्चाई कि यीशु मसीह ने आप के पापों के लिये गहनतम दुख सहा। वे गैतसेमनी बगीचे में अथाह वेदना और पीड़ा से होकर गुजरे‚ जब आप के पाप स्वयं उनकी देह में लाद दिये गये थे। पीलातुस के दरबार में उन्हें मरने की हद तक पहुंचने तक कोड़े मारे गये। विकराल यातनाएं उन्हें दी गयीं। शरीर की क्षत विक्षत हालत में ही कलवरी क्रूस तक घसीट कर ले जाया गया। जहां हाथ और पैरों को क्रूस पर कीलों से ठोंक दिया गया। जहां उन्होंने क्रूस को उंचा खड़ा कर दिया। उन्हें लटके रहने की अवस्था में छोड़ दिया। लहू बह रहा था, हमारे पापों का मूल्य चुकाने के लिये वे बलिदान दे रहे थे। ताकि हम पापों से छुटकारा पा सकें। अब न केवल हमें पापों की क्षमा मिल चुकी थी। परन्तु उनके मरने ने हमें परमेश्वर की निगाह में धर्मी बना दिया। उनके उपर एक सरल सा विश्वास रखकर हम पाप से निर्दोष माने हैं।

‘‘क्रूस का प्रचार" वह प्रचार है जो दिखाता है कि वास्तव में आपकी दशा क्या है?

‘‘अपने अपराधों में मुर्दा थे" (कुलुस्सियों २:१३)

अपने पापों का मूल्य आप को भरना था‚ किंतु मसीह ने आप के स्थान पर मरकर उस मूल्य को चुकाया। आप के पापों को निष्प्रभावी बना दिया। मसीह ने पुर्नज्जीवित होकर आप को भी नया जीवन प्रदान किया।

‘‘क्रूस का प्रचार" यह प्रकट करता है कि अच्छे कर्म करके या कभी — कभी चर्च आकर आप उद्धार नहीं कमा सकते हैं। नहीं! सीधे नहीं! क्रूस का प्रचार इस सत्य को सामने लाता है कि आप के कितने ही सत्कर्म या पाप धोने के प्रयास का उद्धार मिलने से कोई लेना देना नहीं है। ‘‘क्रूस का प्रचार" आप के जीवन भर किये सारे ‘‘भले कर्मो" को पोंछ कर रख देता है — और कहता है केवल एक चीज जो आप को उद्धार दे सकती है, वह है यीशु का आप के स्थान पर क्रूस पर मरना और आप के सारे पापों का मूल्य चुका देना — एक मनुष्य, मसीह‚ (परमेश्वर —मनुष्य का स्वरूप) बन कर आये। आप के पापों का कर्ज चुकाने के लिये मरते हैं। आप के सारे सत्कर्मो से‚ या ‘‘संकल्प लेने" आप के पाप नहीं धुल रहे हैं।

मै एक मिनिट भी संशय नहीं करता कि आप ने कुछ अच्छे कर्म नहीं किये होगें। पर सिर्फ इतना कह रहा हूं कि ये भले कर्म आप को नहीं बचायेंगे! उद्धार यीशु की मृत्यु के द्वारा मिलता है, वे परमेश्वर यहोवा के एकमात्र पुत्र हैं, त्रिएकत्व के दूसरे व्यक्ति हैं, जो आप के सारे पापों को लेकर क्रूस पर चढ़ गये और मरकर पाप का दंड चुका दिया। शिष्य पौलुस ने यह कथन कहकर सब स्पष्ट कर दिया‚

‘‘परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करते हैं (दर्शातें है) कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरें। सो जब कि हम‚ अब उनके लोहू के कारण धर्मी ठहरे तो उनके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?" (रोमियों ५:८—९)

जब आप पापी ही थे‚ यहोवा परमेश्वर ने आप से प्रेम किया है। जब आप पापी ही थे‚ मसीह आप के पापों का दंड चुकाने के लिये मरे। भले ही आप पापी हैं‚ लेकिन क्रूस पर उनके बहाये गये लहू में आप के सारे पाप धुल जाते हैं। आप निर्मल हो जाते हैं।

प्रभु यीशु‚ इसीलिये तो मैं परम दीनता से अनुनय करता हूं‚
   राह तकता हूं‚ धन्य प्रभु‚ तेरे क्रूस पर ठोके गये चरणों पर;
यकीन रखता हूं अपने पाप धुल जाने का‚ देखता हूं जब क्रूस से‚
   बहती लहू धारा को अब शुद्ध कर दीजे‚ मैं बर्फ से भी;
श्वेत हो जाउंगा‚ हां‚ बर्फ से भी श्वेत‚ बर्फ से भी श्वेत होउंगा
   अब शुद्ध कर दीजे‚ मैं बर्फ से भी श्वेत हो जाउंगा।
(‘‘व्हाइटर देन स्नो" जेम्स निकलसन‚ १८२८—१८९६)

तेरी शीरीन आवाज मैं सुनता हूं खुदा‚
   बुलाती पास उस सोते के
जो बहता क्रूस से ही
   आता तेरे पास‚ आता हूं मसीह
धो के शुद्ध कर सोते से‚ जो बहता क्रूस से ही
   आता तेरे पास‚ आता हूं मसीह
धो के शुद्ध कर सोते से‚ जो बहता क्रूस से ही
   (‘‘आता तेरे पास आता हूं मसीह" लैविस हार्टसौ‚ १८२८—१९१९)

इसे क्रूस का प्रचार कहते हैं!

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है‚ परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (१ कुरूं १:१८)

हमारे इस पद में एक और विचार मिलता है।

२॰ दूसरा‚ नष्ट होने वालों के लिये क्रूस के प्रचार की मूर्खता ।

कृपया‚ इन शब्दों को ध्यान से सुनिये‚

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है"

इस पद को फिर से सुनिये।

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है ........." (१ कुरूं १:१८)

‘‘मूर्खता के अंदर" ‘‘मूर्खतापूर्ण बात" भी सम्मिलित होती है‚ ‘‘निरर्थक बातें।" अपरिवर्तित मन के लोगों को यह प्रचार ‘‘मूर्खतापूर्ण बात" ही तो लगेगी कि आप मसीह के मरने के द्वारा पापों से छुटकारा पाते हैं।

जिनकी आत्मा को नष्ट होना है‚ उन्हें इस शिक्षा का कोई मोल नहीं दिखेगा कि मसीह हमारे पाप का दंड चुकाने के लिये मरे। वे इस शिक्षा को इसलिए मूर्खता जानेंगे क्योंकि वे इस बलिदान की कीमत नहीं आंक सकते। इस बिंदु पर पवित्र आत्मा का प्रवेश होता है। यीशु का कथन था,

‘‘और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा........." (यूहन्ना १६:८)

पवित्र आत्मा अवश्य एक व्यक्ति को उसके पाप के लिये फटकार लगाता है‚ पाप का बोध पैदा करता है अन्यथा तब तक मसीह के क्रूस पर मरने के मोल को वह व्यक्ति नहीं जानेगा। पवित्र आत्मा जब उसको पाप के प्रति पश्चाताप के लिये राजी करवाता है‚ उसके पहिले तक वह क्रूस की कथा को मूर्खता समझता है। ‘‘मूर्खता" के लिये मूल यूनानी शब्द ‘‘मोरोस" का अनुवाद अंग्रेजी में ‘‘मोरॉन" किया गया है। क्रूस की शिक्षा की बात करें तो ऐसा प्रतीत होता है कि एक मूर्ख व्यक्ति बोल रहा है‚ निपट मूर्ख जन की बातें हैं। जब तक परमेश्वर का आत्मा‚ इस बात की प्रतीति नहीं करवा देता कि आप एक खोए हुए‚ भटके हुए पापी मनुष्य हैं‚ क्रूस की शिक्षा का मोल आप नहीं आंक सकते।

इसलिए सच्चे मसीही बनना आप ‘‘सीख" नहीं सकते हैं। मानवीय बुद्धि से उद्धार पाने के उपाय नहीं खोजे जा सकते हैं। शिष्य पौलुस ने पद २१ में इसे स्पष्ट किया है‚ जब वे लिखते हैं‚

‘‘संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना" (१ कुरूं १:२१)

किसी भी प्रकार की मानवीय बुद्धि के प्रयास से उद्धार नहीं पाया सकता। हृदय में प्रकाशन मिलना चाहिये। उस रोशनी में आप स्वयं को देखेंगे कि आप एक आशारहित पापी मनुष्य हैं। जब तक ऐसा प्रकाशन नहीं मिलेगा तब तक यह शिक्षा कि आपकी समस्या का एकमात्र हल मसीह को क्रूस पर चढ़ाया जाने में था‚ किसी मूर्ख की व्यर्थ बातें प्रतीत होगीं। अंर्तमन में जब तक नहीं जानेंगे कि यह पाप की समस्या है, तो मसीह के क्रूस पर मरने के महत्व को नहीं जानेंगे। बाइबल कहती है‚

‘‘मसीह हमारे पापों के लिये मर गये" (१ कुरूं १५:३)

हमारे पापों का दंड चुकाने के लिये‚ वह हमारे स्थान पर मरे। बाइबल कहती है‚

‘‘उनके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है" (१ यूहन्ना १:७)

जब परमेश्वर यहोवा का आत्मा आप की आत्मिक आंखे‚ इस सत्य को देखने के लिये खोल देगा कि पाप के श्राप से बचने के लिये आप के लिये कोई मार्ग नहीं है‚ तब औरों को मूर्खता लगने वाली ये कथा आप को बहुत रूचिकर लगेगी। जब आप अपनी असहाय पापमय दशा से सहमत हो जायेंगे‚ तो आप का हृदय खुद ब खुद गाने लगेगा‚

मुझमें ऐसा क्या अच्छा‚ जो मैं मांगू तेरा अनुग्रह
   कलवरी के मेम्ने के बलिदान से बहे लहू में —
मैं अपने पाप के वस्त्र धो लूंगा
   यीशु ने सारा मेरे पाप का दंड भर दिया‚
जितना कुछ था मेरा‚ पाप ने तो एक सूर्ख लाल रंग
   का कलंक छोड़ा था‚ यीशु ने धोकर‚
यीशु ने धोकर बर्फ जैसा श्वेत कर दिया।
    (‘‘यीशु ने सारा मूल्य चुका दिया" एल्विना एम हॉल‚ १८२०—१८९९)

किंतु क्रूस की शिक्षा देने से ही हमारा चर्च मजबूत नहीं होगा। यहां से हम अंतिम बिंदु पर आते हैं।

३॰ तीसरा‚ क्रूस की शिक्षा देना ही हमारे चर्च को मजबूत बनाने के लिये पर्याप्त नहीं है।

अगर आप को उद्वार पाना है तो आप के लिये क्रूस की कथा आवश्यक है। क्रूस पर मसीह ने लहू बहाया ताकि आप को पाप से छुटकारा देवें‚ वे इसीलिये मरें। मगर केवल ऐसा संदेश देने भर से आप का चर्च मजबूत नहीं हो जायेगा। इसलिए मसीह ने चर्च को पास्टर्स दिये हैं। बाइबल कहती है ‘‘कितनों को .........उपदेशक नियुक्त करके दे दिया" (इफिसियों ४:११) ‘‘पास्टर" के लिये यूनानी शब्द पोइमेन है। अर्थात ‘‘चरवाहा"। यीशु ने कुछ मनुष्यों को पास्टर बनने का उपहार दिया है‚ एक चरवाहा‚ अपने स्थानीय चर्च का। चर्च के लिये पास्टर एक उपहार हैं। चर्च में जो लोग आते हैं‚ वे मानो भेड़े हैं। पास्टर चर्च के मेषपाल हैं। भेड़ों की देखभाल करते हैं। सुरक्षा करते हैं। वह उनका मार्गदर्शन करते और भटकने से बचाते हैं। एक मेषपाल का यही कार्य होता है।

‘‘पास्टर" के लिये के लिए एक और यूनानी शब्द एपिस्कोपोस है। इस शब्द का अर्थ है ‘‘अध्यक्ष।" किंग जेम्स बाइबल में इसका अनुवाद ‘‘बिशप" किया गया है। बाइबल में लिखा है‚ ‘‘जो अध्यक्ष (एपिस्कोपोस‚ अध्यक्ष‚ पास्टर) होना चाहता है, तो वह भले काम की इच्छा करता है" (१ तिमोथियुस ३:१) । एक पास्टर चर्च की अध्यक्षता करता है। देखभाल करता है। चर्च की निगरानी करता है। चर्च के लिये प्रार्थना करता और सोचता है। वह देखता है कि चर्च की अवस्था कैसी है। समस्यायें कौनसी हैं। वह जो देखता है‚ अन्य लोग उसे नहीं देख पाते हैं। परमेश्वर के मार्गदर्शन में वह देखता है कि क्या किया जा सकता है। पास्टर देखभाल करता है — चर्च में लोगों की — अध्यक्षता करता है। वह देखता है कि लोग कैसे हैं। वह उनके संघर्षो और समस्याओं को देखता है। परमेश्वर यहोवा के मार्गदर्शन से वह मसीही जीवन में उनके सफल होने के लिये सहायता करता है।

अगर एक पास्टर गुणवान नहीं है‚ तो चर्च सफल नहीं हो सकता है। चर्च में सब प्रकार की गतिविधियां हो सकती है। सभाएं हो सकती हैं। हम अपने परिचितों को साथ में ला सकते हैं। हम आप को गीत गाने के लिए एक छोटी पुस्तिका प्रदान करते हैं‚ और समाचार पन्ना भी। हम आप को भोजन प्रदान कर सकते हैं। हम अच्छा संदेश दे सकते हैं — क्रूस का प्रचार कर सकते हैं — करते भी हैं। तौभी अकेले क्रूस का प्रचार हमें मजबूत चर्च प्रदान नहीं करेगा।

परमेश्वर ने चर्च को पास्टर्स क्यों प्रदान किये थे? पास्टर का वरदान आत्मिक वरदानों की सूची में क्यों हैं? अगर केवल प्रचार ही एक चर्च को मजबूत बना सकता‚ तो फिर प्रभु ने चर्च को ‘‘केवल‚ कुछ प्रचारक" ही क्यों नहीं दे दिये गये‚ पास्टर्स बिल्कुल भी नहीं देने थे? मसीह जानते थे कि क्रूस का प्रचार‚ अकेली एक शिक्षा‚ किसी चर्च को मजबूत बनाने के लिये पर्याप्त नहीं होगी। चर्च को पास्टर की आवश्यकता है‚ इसीलिये उन्होंने ‘‘कितनों को .........उपदेशक नियुक्त करके दे दिया।"

पास्टर के बिना चर्च असफल रहेगा। भले ही कितने ही अच्छे प्रचारक वहां आयें। चर्च कमजोर पड़ जायेगा। परेशानी में पड़ जायेगा। अंतत: खत्म हो जायेगा। बिना पास्टर के‚ चर्च में लोग पुन: पाप करने की दशा में आ जायेंगे। उनकी गतिशीलता जाती रहेगी। उनके जीवन में बड़ी गलतियां कर सकते हैं। वे समस्या में घिर सकते हैं। क्यों?

पहिली चीज‚ शैतान सदैव अपनी उपस्थिति बनाये रखता है। बाइबल कहती है‚ ‘‘(गर्जने वाले सिंह की नाईं) इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए" (१ पतरस ५:८)। वह किसको फाड़ खाएगा? भेड़ों को! शैतान नहीं चाहता कि आप चौंकन्ने रहें। वह आप पर लपकना चाहता है और खा जाना चाहता है — और आप को इसकी खबर भी नहीं होने पाये कि यह शैतान ने किया! शैतान और उसके साथ की दुष्टात्माएं भी उपस्थित रहती हैं — चाहे आप को याद हो या न याद हो।

दूसरी चीज‚ क्योंकि सब लोग पापी हैं। चूंकि आदम ने परमेश्वर यहोवा की अवज्ञा की‚ और हममें से प्रत्येक पापमयी स्वभाव लेकर पैदा हुआ। बाइबल कहती है‚ ‘‘क्योंकि जैसा एक मनुष्य के (आदम के) आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे" (रोमियों ५:१९)। प्रत्येक मनुष्य — क्रिश्चयंस भी — के पास पाप का स्वभाव है। पाप करना हमारे लिये स्वाभाविक है। गलती करना हमारी फितरत है। मर्फी का नियम कहता है‚ ‘‘अगर कोई चीज गलत जा सकती है‚ तो वह जायेगी।" चीजें स्वाभाविक तौर पर अच्छी नहीं होती जाती। लोग भी स्वभाववश गलत करते हैं। लोग अपने आप से मजबूत क्रिश्चयंस नहीं बनते। वे पथभ्रष्ट हो सकते हैं। वे शुष्क हो सकते हैं। वे गलतियां कर सकते हैं। गलतियां करने के लिये मेहनत नहीं लगती। अपने आप हो जाती है । चर्च स्वत: मजबूत नहीं बनते हैं। वे कमजोर हो सकते हैं। वे समस्या में घिर सकते हैं। बहुत आसान भी है। उनके समस्या में जाने में कोई परिश्रम नहीं लगता। ये सब खुद ब खुद होता जाता है। और होता जाएगा! इसलिये चर्च को एक पास्टर की आवश्यकता होती है। मसीह ने ‘‘कितनों को .........उपदेशक नियुक्त करके दे दिया।" परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उन्होंने पास्टर्स को चर्च के लिये दिया!

हमारे चर्च के पास्टर डॉ हायमर्स हैं। वह साठ सालों से इस सेवा में हैं। परमेश्वर पिता ने सैकड़ों लोगों को मसीह के पास लाने के लिये उनको प्रयुक्त किया। कई सालों से वे लोगों को परामर्श देते आये हैं। उन्होंने लोगों की चिंता की है। उनकी सहायता की है। डॉ हायमर्स ने दो चर्चेस की स्थापना की। उन्होंने परेशानी और कष्ट के समय चर्च को मार्गदर्शन दिया। वह हमारे चर्च को बड़े विभाजन में से निकाल कर ले गये। परमेश्वर उन्हें हमारे चर्च के निर्माण के लिये‚ हमारी देखभाल के लिये‚ हमारी सुरक्षा करने के लिये‚ हमारे पालन के लिये उपयोग में लाये हैं। डॉ हायमर्स केवल एक पास्टर नहीं है। वह एक उत्कृष्ट पास्टर हैं! मैं परमेश्वर पिता को डॉ हायमर्स के लिये धन्यवाद देता हूं!

आप की क्या दशा है? आप पास्टर तो नहीं हैं। परंतु आप उनकी सहायता कर सकते हैं। आप उन्हें बता सकते हैं अगर आप कुछ गलत होते देखते हैं। हमारे चर्च के डीकंस और पास्टर्स के उपर भी यह लागू होता है। आप यहां पास्टर की सहायता करने के लिये हैं। चीजों को ऐसे ही मत होते रहने दीजिए। मत ऐसा मानिए कि पास्टर सब जानते हैं। अगर कोई चीज गलत देखते या सुनते हैं तो पास्टर को बताइये।

आप में से कुछ तो बिल्कुल भी क्रिश्चयंस नहीं हैं। यीशु पर आप का विश्वास नहीं है। आप के पाप उनके लहू में धुलकर शुद्ध नहीं हुए हैं। क्या दशा है आप की? आप को यीशु के द्वारा उद्धार पाने की आवश्यकता है। वह आप के पाप का दंड चुकाने के लिये क्रूस पर मरे। वह आप को नया जीवन देने के लिये मरकर पुन: जीवित हुए। अगर आप हमसे मसीह पर विश्वास लाने के संबंध में कुछ परामर्श चाहते हैं‚ तो जब चर्च के शेष सदस्य दोपहर भोजन के लिये उपरी मंजिल पर जाते हैं‚ आप यहां आगे की दो पंक्तियों में आकर बैठ सकते हैं। आमीन।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व मि बैंजामिन किंकेड ग्रिफिथ द्वारा एकल गान:
       (‘‘क्रूसित मसीह के लहू से बचाया गया" एस जे हैंडरसन द्वारा रचित‚ १९०२)


रूपरेखा

क्रूस का प्रचार

THE PREACHING OF THE CROSS

डॉ आर एल हायमर्स जूनि द्वारा लिखा गया संदेश
रेव्ह जॉन सैम्यूएल कैगन द्वारा प्रचार किया गया

‘‘क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है‚ परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (१ कुरूं १:१८)

१॰ पहिला, केवल क्रूस का प्रचार करना‚ १ कुरूं १:१८ अ;
कुलुस्सियों २:१३; रोमियों ५:८—९

२॰ दूसरा‚ नष्ट होने वालों के लिये क्रूस के प्रचार की मूर्खता‚
१ कुरूं १:१८ ब; यूहन्ना १६:८; १ कुरूं १:२१; १५:३; १ यूहन्ना १:७

३॰ तीसरा‚ क्रूस की शिक्षा देना ही हमारे चर्च को मजबूत बनाने
के लिये पर्याप्त नहीं है‚ इफिसियों ४:११;१ तिमोथि ३:१;
१ पतरस ५:८; रोमियों ५:१९