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जितनों ने उन्हें ग्रहण किया!

AS MANY AS RECEIVED HIM!
(Hindi)

डॉ आर एल हायमर्स जूनि
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लॉस ऐंजीलिस टेबरनेकल कैलीफोर्निया में रविवार संध्या
अप्रैल १५‚ २०१८ में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, April 15, 2018

‘‘वह अपने घर आये और उनके अपनों ने उन्हें ग्रहण नहीं किया। परन्तु जितनों ने उन्हें ग्रहण किया‚ उन्होंने उनको परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उनके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से‚ न शरीर की इच्छा से‚ न मनुष्य की इच्छा से‚ परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:११—१३)


यीशु यरूशलेम में थे। फसह के पर्व का अवसर था। अनेक लोगों ने प्रभु यीशु को अलौकिक कर्म करते हुए देखा था। जब उन्होंने आश्चर्यकर्म देखें तब विश्वास किया। तौभी उन्होंने यीशु के उपर विश्वास नहीं किया। उन्होंने अदभुत कार्यों पर विश्वास किया किंतु यीशु पर अविश्वास यथावत बना रहा। इसलिये अदभुत कार्यों पर विश्वास करना मूल्यहीन ठहरा। उस समय के लोग मुझे वर्तमान के करिश्मा पसंद लोगों की याद दिलाते हैं। आज ऐसे लोगों का विश्वास करिश्में पर टिका हुआ है। वास्तव में वे ‘‘चिंन्ह" चाहते हैं। वे सदैव चिंन्ह और आश्चर्यकर्म की खोज में रहते हैं। परंतु ऐसे लोगों को ये बातें मोक्ष नहीं दिला सकती हैं।

‘‘परन्तु यीशु ने अपने आप को उन के भरोसे पर नहीं छोड़ा‚ क्योंकि वे सब को जानते थे। और उन्हें प्रयोजन न था‚ कि मनुष्य के विषय में कोई गवाही दे‚ क्योंकि वह आप ही जानते थे कि मनुष्य के मन में क्या है" (यूहन्ना २:२४‚२५)

यीशु उनके हृदय में देख सकते थे। वे यह जानते थे कि इन लोगों ने कभी उन पर विश्वास नहीं किया। वे तो केवल आश्चर्यकर्म में विश्वास करते थे। वे यह बात जानते थे कि इन लोगों का चिंन्हों और आश्चर्यकर्मो में जो विश्वास है‚ वह उद्धार पाने के लिये पर्याप्त नहीं है। ‘‘वे उनके दिलों की दशा से वाकिफ थे।" वे ‘‘सारे लोगों के" हृदय को जानते हैं। वे आप के हृदय को जानते हैं। वे यह जानते है कि आप ने नया जन्म पाया है या नहीं। नये जन्म के पूर्व आप का हृदय पूरी रीति से भ्रष्ट है। बाईबल के वचन हैं‚

‘‘मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है.........." (यिर्मयाह १७:९)

बाइबल हमें यह नहीं बताती कि यीशु ने वह रात कहां बिताई। किंतु एक प्रसिद्ध विद्वान नीकुदेमस ‘‘यीशु के पास उस रात" आये थे (यूहन्ना ३:१‚२) । अब यूहन्ना के पद १:११—१३ को पुनः पढ़िये‚

‘‘वह अपने घर आये और उनके अपनों ने उन्हें ग्रहण नहीं किया।
परन्तु जितनों ने उन्हें ग्रहण किया‚ उन्होंने उनको परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उनके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से‚ न शरीर की इच्छा से‚ न मनुष्य की इच्छा से‚ परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:११—१३)

उद्धार तब प्राप्त होता है जब एक व्यक्ति मसीह को ग्रहण करता है। ये तीनों पद यीशु को ग्रहण किये जाने की मूल रूपरेखा प्रदान करते हैं। पद ११ में प्रकट है कि अधिकतर लोग मसीह को नहीं स्वीकारेंगे। बड़ी संख्या में लोग नर्क जायेंगे। यह पद कहता है‚

‘‘वह अपने घर आये और उनके अपनों ने उन्हें ग्रहण नहीं किया" (यूहन्ना १:११)

पहिली बार ‘‘अपने" शब्द का प्रयोग इस जगत की ओर संकेत देता है। दूसरी बार ‘‘अपने" शब्द का प्रयोग यहूदी लोगों की ओर संकेत देता है। यद्यपि पुराने नियम में उनके विषय में अनेकों भविष्यवाणियां हुई हैं‚ जिनमें से अधिकतर में यह कहा गया कि लोगों ने उन्हें मसीहा और प्रभु के रूप में ग्रहण नहीं किया। यहूदियों और सामान्य जनों ने जब वे धरती पर आये‚ तब उन्हें नहीं स्वीकारा — और आज भी वे उन्हें ग्रहण नहीं करते हैं।

‘‘वे मनुष्यों के त्यागे हुए थे.........हमने अपने मुख उनकी ओर से फेर लिये थे" (यशायाह ५३:३)

यह परमेश्वर यहोवा की परम सत्ता का कार्य है कि वे भटके हुए पापी जन को मसीह के पास लेकर आते हैं। यहां से हम अपने पद १:१२ की ओर चलते है‚

‘‘जितनों ने उन्हें ग्रहण किया, उन्होंने उनको परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उनके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना १:१२)

हम इस पद से तीन बिंदुओं पर पहुंच सकते हैं।

१॰ पहिली बात‚ मैं इसका वर्णन करूंगा कि मसीह को ग्रहण करना क्या होता है।

यूनानी शब्द ‘‘लंबानों" का अनुवाद ‘‘ग्रहण करना" किया गया है। इसका अर्थ है ‘‘अपनाना‚ ‘‘स्वीकारना‚" ‘‘प्राप्त करना।" हम आप से कहते हैं कि आप मसीह को ग्रहण करें। हम आप से कहते हैं कि उन्हें प्राप्त करें‚ उन पर विश्वास करें और उन्हें आप के मसीहा और प्रभु स्वीकार करें।

मसीह को ग्रहण करने के लिये आप को उन्हें ऐसे ग्रहण करना होगा जैसे बाइबल में बताया गया है। मसीह इम्मानुएल है — इस नाम का अर्थ होता है परमेश्वर हमारे साथ हैं। परमेश्वर यहोवा देहधारण करके आये। अर्थात यीशु मसीह परम प्रधान यहोवा के एकमात्र पुत्र रूप में आये। वे त्रिएक परमेश्वर के दूसरे स्थान के अस्तित्वधारी हैं जो मनुष्य के स्वरूप को धारण कर आये। परमेश्वर व मानव दोनों रूप थे और अब प्रभु यहोवा के दाहिने स्थान पर स्वर्ग में आसीन हैं। मनुष्य रूप में कुंआरी कन्या से उनका जन्म हुआ। वे शाश्वत प्रभु हैं — उनका न अंत है न आरंभ, यहोवा परमेश्वर के शाश्वत पुत्र हैं। अगर आप इन बातों को स्वीकार नहीं करेंगे, तो फिर स्वीकार करने को क्या शेष रह जाता है? वे ही मसीहा है जो अपने उपर आप के पापों को वहन कर ले जाते हैं और शाश्वत काल तक आप को पापों से क्षमा मिलती है!

जब तक आप उनको अपने जीवन का शासक नहीं समझते‚ आप यीशु को ग्रहण नहीं कर सकते। आप के जीवन पर उनकी प्रधानता होनी चाहिये। आप को स्वयं को उनकी शरण में सौंप देना चाहिये। उनको पूर्णरूपेण समर्पित हो जाना चाहिये। अपनी देह और आत्मा को मसीह द्वारा नियंत्रित होने के लिये सौंप देना चाहिये। आप‚ उनको समर्पित होने के लिये प्रस्तुत कर दीजिये। आप की इच्छा‚ आप के विचार‚ आप की आशाएं‚ आप का मूल जीवन‚ यीशु से नियंत्रित होने के लिये दे दीजिए। अब से आप ऐसा न कहने पाए कि‚ ‘‘इस व्यक्ति को हम अपने उपर शासन नहीं करने देंगे।" जॉन कैगन ने अपनी आत्मा में आवाज सुनी थी ‘‘मसीह को समर्पित हो जाओ! मसीह को समर्पित हो जाओ!" परंतु इस आवाज से वे हताश हो गये थे। यीशु के सामने वे ‘‘समर्पण नहीं करना" चाहते थे। वे नहीं चाहते थे कि यीशु उनकों नियंत्रित करें। किंतु जॉन बेहद विकल हो उठे। ‘‘यीशु मेरे लिये क्रूस पर चढ़े.........और मैं उनके सामने ही समर्पण नहीं करूंगा। इस विचार ने मुझे भीतर तक तोड़ डाला.........।" बस वहीं एक निर्णायक क्षण आया जब जॉन यीशु के सामने समर्पित हो गये। उनका कथन था‚ ‘‘मैंने स्वयं को मर जाने दिया और तब मसीह ने मुझे नया जीवन प्रदान किया।" जार्ज मैथीसन (१८४२—१९०६) ने इसे बहुत प्रभावकारी तरीके से कहा है। उनका एक गीत है ‘‘मैक मी ए कैप्टिव‚ ओ लार्ड।"

मुझे अपने अधीन कर लीजिये प्रभु‚ तब मैं मुक्त हो जाउंगा;
मैं अपनी तलवार रख दूं‚ तो मैं विजयी हो जाउं;
जब अपने बल पर फूलता हूं तो दुनियावी भय से घिर जाता हूं;
मुझे अपनी भुजाओं में कैद कर लीजिये प्रभु‚ तब मेरे हाथ प्रबल होवेंगे।

मसीहा को ग्रहण करने के लिये आप को उन्हें अपने मसीहा और अपने राजा के रूप में स्वीकार करना होगा। स्वयं को उनके हाथों में छोड़ देना होगा। जीवन में ऐसा अनुभव आप के साथ घटित होना आवश्यक है। क्या मसीह के बेशकीमती लहू ने आप के पापों को धोकर शुद्ध कर दिया है? क्या आप ने उनके लहू पर विश्वास किया है? क्या इस लहू की धारा ने आप को आप के पापों से साफ कर दिया है? क्या आप ने मसीह को राजा मान कर अपने जीवन का समर्पण किया है? आप मसीह को तब तक ग्रहण नहीं कर सकते जब तक आप उनको मजबूती से पकड़ नहीं लेंगे और अपना अधिकार नहीं जतायेंगे। उनको ‘‘ग्रहण करना" अर्थात उन पर ‘‘विश्वास करना" — अपने मसीहा के रूप में और अपने राजा के रूप में। जैसे भजनकार कहते हैं‚ ‘‘पुत्र को चूमो ऐसा न हो कि वह क्रोध करे, और तुम मार्ग ही में नाश हो जाओ........धन्य हैं वे जिनका भरोसा उस पर है" (भजन २:१२) परमेश्वर यहोवा के पुत्र को चूम लीजिए! प्रभु परमेश्वर के पुत्र को समर्पित हो जाइये! परम प्रधान के पुत्र पर विश्वास कीजिए! तब जाकर यह अर्थ सार्थक सिद्ध होगा कि आप ने यहोवा परमेश्वर के पुत्र को ‘‘ग्रहण" किया है!

२॰ दूसरी बात‚ हम उस अधिकार के बारे में सीखते हैं जो यहोवा हमें उनके पुत्र को ग्रहण करने के लिये प्रदान करते हैं।

‘‘जितनों ने उन्हें ग्रहण किया‚ उन्होंने उनको परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया ........... "

‘‘एक्जोशिया" शब्द के अनुवाद से ‘‘अधिकार" शब्द प्राप्त होता है। जैमीसन फासेट और ब्राउन कहते हैं‚ ‘‘यह शब्द अधिकार और योग्यता को महत्व देता है........... इसमें निश्चित ही दोनों गुण सम्मिलित है" (पेज ३४८) ‘‘परमेश्वर के पुत्र का अनुवाद और बेहतर रूप में ‘‘परमेश्वर की संतान" किया गया है (एनकेजीवी)। मसीह को ग्रहण करने का अर्थ है अपना विश्वास मसीह में रखना और स्वयं को उनके हाथ में समर्पित कर देना। कैसे आप परमेश्वर की संतान बन सकते हैं? उत्तर है यीशु मसीह को ग्रहण करने के द्वारा।

मैं जब दो वर्ष का था‚ मेरे पिता मुझे छोड़कर चले गये थे। उनके साथ मैं फिर कभी नहीं रहा। जैसे जैसे बड़ा होता गया‚ मुझे बड़े लड़के चिढ़ाने लगे। वे मेरा मजाक उड़ाते और कहते‚ ‘‘राबर्ट के पिता नहीं हैं।" यह तब कि बात है कि मैने ‘‘राबर्ट एल हायमर्स जूनियर" लिखना आरंभ किया। मैंने अपना नाम पिता के नाम पर ही रखा। मैंने अपने नाम के आगे ‘‘जूनियर" लिखा यह दर्शाने के लिये कि सचमुच मेरे पिता हैं। मैं आज तक यही लिखता हूं। मैं हरेक को यह बता देना चाहता था कि मेरे पिता थे! किंतु इससे भी बढ़कर यह महत्वपूर्ण है कि परमेश्वर यहोवा आप के पिता हैं! हर पुरूष‚ हर महिला और हरेक बच्चा जो मसीह को ग्रहण करता है‚ परमेश्वर यहोवा उनके पिता होते हैं! अगर आज रात मैं इस मंच से कहूं कि मैं संयुक्त राज्य अमेरिका के का पुत्र हूं तो आप मुझसे ईर्ष्या करने लगेंगे। किंतु इससे भी कहीं गुना बढ़कर मुझे यह कहने में गर्व होगा कि मैं यहोवा की संतान हूं। मैंने यीशु को ग्रहण किया एवं यीशु ने मुझे परमेश्वर के पुत्र होने का अधिकार और बल प्रदान किया‚ मैं उनकी संतान हूं जो संपूर्ण जगत पर शासन करते हैं!

मैं राजा की संतान हूं
मैं राजा की संतान हूं
यीशु मेरे मसीहा हैं
मैं राजा की संतान हूं
(‘‘ए चाईल्ड ऑफ दि किंग" हैरियट ई बुयेल‚ १८३४—१९१०)

अगर आप यहोवा की संतान हैं तो वे आप से बहुत प्रेम रखते हैं। अगर आप उनकी संतान हैं तो आप उनसे जुड़े हुए हैं‚ ‘‘उनके स्वर्गिक स्वभाव में सहभागी हैं।" अगर आप उनकी संतान हैं तो आप उनके पास रात्रि की किसी भी घड़ी में आ सकते हैं। वे आप का मार्ग दर्शन करने और सहायता करने के लिये हर समय उपलब्ध हैं। जॉन कैगन के पास अदभुत पिता हैं। वे अक्सर अपने पिता का परिचय इस तरह देते हैं कि‚ ‘‘मेरे पिता दो दो विषय में पी॰एच॰डी॰ हैं।" अगर मैं अपने पिता का परिचय दूं तो ऐसा कहूंगा! मेरे सांसारिक पिता तो हाई स्कूल से ग्रेजूएट भी नहीं हुए थे। किंतु मेरे स्वर्गिक पिता जगत के राजा हैं!

मेरे पिता के पास निवास है भूमि है‚
संसार की दौलत वे अपने हाथों में थामे हुए हैं!
रूबी‚ हीरे‚ चांदी और सोना‚
उनका कोष भरा हुआ है‚ दौलत बेशुमार।
मैं राजा की संतान हूं‚ मैं राजा की संतानः
यीशु मेरे मसीहा‚ मैं राजा की संतान।

मेरे कॉलेज और सेमनरी की फीस भरने के लिये या मुझे नयी कार खरीद कर देने के लिये मैं पिता के साये से वंचित था। किंतु मेरे पास एक स्वर्गिक पिता हैं ‘‘जो अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है (मेरी) हर एक घटी को पूरी करते हैं (फिलिप्पयों ४:१९) स्वर्ग में मेरे एक पिता हैं जिन्होंने अकल्पनीय प्रतिज्ञा दी हुई है जिसके तहत‚ ‘‘मसीह जो मुझे सामर्थ प्रदान करते हैं उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पयों ४:१३) मैं अपने पिता मेरे राजा यहोवा की कीर्ति‚ प्रशस्ति गाता हूं‚ प्रतिष्ठा देता हूं। मुझे हिम्मत प्रदान करने के लिये‚ जीवन पर्यंत मेरी जरूरतों को पूर्ण करते आने के लिये। कहीं मेरी आत्मकथा के भीतर डॉ कैगन ने यह कहा है‚

     यह उस आदमी की कहानी है जो ठोकरें खाकर लड़खड़ाया हुआ था‚ आघातों से क्षत विक्षत होकर बिखर चुका था‚ कि अपने जीवन के बिखरे टुकड़ों को फिर से सहेज कर अपार बाधा को लांघ कर उठ खड़े हो। ताकि लोग ये देख लेवें कि प्रभु यीशु उनकी भी इसी तरह सहायता कर सकते हैं!
     एक टूटे परिवार के शराबखोर व उपद्रवी परिवार में उनकी पैदाइश हुई थी — पर खुद इस कदर प्रेरक बने कि हजारों के जीवन को बदल डाला। कॉलेज में अनुत्तीर्ण हुए — परंतु आगे चलकर तीन तीन विषयों में पी एच डी प्राप्त की और १७ पुस्तकें लिखी। वे अन्य देश में जाकर सेवाकार्य में लीन होना चाहते थे — उसमें असफल रहे — किंतु वापस आकर संसार भर के जनमानस के लिये शक्ति का पुंज बन बैठे!
     जब इतनी बाधाओं के बाद कोई परास्त हो जाता‚ वहीं डॉ आर एल हायमर्स ने लॉस ऐंजीलिस के व्यस्ततम इलाके में एक विस्मयकारी चर्च को स्थापित किया। जो बीस विशिष्ट संस्कृति के लोगों से मिलकर बना है। इस चर्च से होने वाले सेवा कार्य जगत के कोने तक पहुंचते हैं......
     यह डॉ आर एल हायमर्स के जीवन की दास्तान है जो असंभव को प्राप्त करने के लिये उठे — तमाम प्रकार के डर को दरकिनार कर के । मैं उन्हें जानता हूं क्योंकि मैंने चालीस सालों तक उनके साथ नजदीक रहकर कार्य किया है।
                   डॉ क्रिस्टोफर एल॰ कैगन

मैं राजा की एक संतान हूं!

युवाओं अपनी प्रतीति और निष्ठा प्रभु यीशु में रखो। मसीह को ग्रहण करो तो वे तुम्हें परमेश्वर यहोवा के बेटे बेटियां होने के लिये ईश्वरत्व प्रदान करेंगे। जैसे मेरा जीवन प्रफुल्लित हुआ‚ मुझे जीवन की आशीषों से भरपूर किया‚ रहने को बड़ी छत‚ एक अत्युत्तम चर्च का पास्टर‚ एक अदभुत पत्नी‚ दो असाधारण पुत्र और दो सुंदर प्यारी सी पोतियां। मैं निश्चय जानता हूं कि आप भी इतनी ही रीति से धन्य होगें। फिर दोहराउंगा‚ मैं राजा की एक संतान हूं!

अगर आप मसीह पर प्रतीति लाते हैं और ऐसे जीते हैं मानों यीशु के लिये जी रहे हैं‚ तो वे आप के जीवन को उन उन तरीकों से धन्यता से भर देंगे कि जगत देखकर आश्चर्य करेगा — क्योंकि तब आप भी राजा की संतान होंगे। तब आप भी ये गीत गा उठेंगे‚

मैं राजा की संतान हूं
   मैं राजा की संतान हूं
यीशु मेरे मसीहा हैं‚
   मैं राजा की संतान हूं

‘‘वह अपने घर आये और उनके अपनों ने उन्हें ग्रहण नहीं किया।
परन्तु जितनों ने उन्हें ग्रहण किया‚ उन्होंने उनको परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उनके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से‚ न शरीर की इच्छा से‚ न मनुष्य की इच्छा से‚ परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:११—१३)

३॰ तीसरा, जब हम मसीह को जीवन में ग्रहण करते हैं‚ परमेश्वर यहोवा से हुई अपनी नयी उत्पत्ति के बारें में सीखते हैं।

‘‘वे न तो लोहू से‚ न शरीर की इच्छा से‚ न मनुष्य की इच्छा से‚ परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:१३)

मैं यहां यह बताना लाजमी समझता हूं कि इस संदेश की रूपरेखा और मूल विचार ‘‘प्रचारकों के राजकुमार" कहलाने वाले महान शख्स स्पर्जन से लिये गये हैं।

हरेक जो प्रभु यीशु पर प्रतीति करता है‚ उसकी नयी उत्पत्ति होती है। कुछ धर्मशास्त्री विचार करते हैं कि कौनसी चीज पहिले आयी — प्रतीति करना या पुर्नज्जीवन मिलना। मैं स्पर्जन से सहमत हूं। उनका कथन है ‘‘प्रतीति और पुर्नज्जीवन साथ साथ चलना चाहिये।" जीवन में आत्मा नये सिरे से जन्मे तो धर्मशास्त्रिय भाषा में इसे पुर्नज्जीवन कहा जाता है। स्पर्जन कहते थे‚ ‘‘अगर मैंने मसीह में निष्ठा रख ली तो फिर मुझे यह जानने की जरूरत ही नहीं कि मेरा पुर्नज्जीवन हुआ कि नहीं। क्योंकि अपुर्नज्जीवित जन कभी प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं रखेगा। अगर मैं आत्मा में पुर्नज्जीवित हूं तो स्वत: मेरी निष्ठा यीशु पर हो चुकी है। जिसकी निष्ठा नहीं वह स्पष्ट रूप में अपने पापों में मृत है...... निष्ठा रखना ही बताता है कि व्यक्ति की आत्मा में नयी उत्पत्ति हो चुकी है।"

पर अबकि बार क्रिश्चियंस के रूप में हमारी उत्पत्ति नहीं हुई है। न हम ‘‘मनुष्य की दैहिक इच्छा से" जन्मी संतान हैं। संसार के महानतम क्रिश्चियंस मिलकर भी हमें आत्मा में नया जीवन प्रदान नहीं कर सकते। ‘‘हाड़ मांस की मर्जी से" अब हमारा नया जन्म नहीं हुआ है। न हमारी स्वयं की मर्जी के तहत। इस मनुष्य की कोई ताकत नहीं कि आत्मा में पुर्नज्जीवन पैदा करके मनुष्य को नयी उत्पत्ति बना दे। यह कार्य होता है उपर से। यहोवा परमेश्वर की पवित्र आत्मा वह उर्जा है जो हमारे भीतर प्रवेश करके हमें नये जन्मे प्राणी बनाती है।

जहां यीशु में निष्ठा प्रबल हुई वहीं नये जीवन का आरंभ हुआ। जहां प्रतीति नहीं वहां नया जीवन नहीं। अगर प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किया है तो आप नये सिरे से उत्पन्न हो चुके हैं। मनुष्य की इच्छा से नहीं परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। इसलिये मैं आप से यह प्रश्न पूछना आवश्यक समझता हूं — क्या आप ने मसीह को ग्रहण किया है? हां या नहीं। क्या आप ने मसीह यीशु को ग्रहण किया है? क्या केवल उन्हीं में आप की निष्ठा है? क्या आप कह सकते है‚

मसीह वे ठोस चटटान हैं जिस पर मैं खड़ा होता हूं‚
शेष सारे आधार फिसलती रेत हैं।

क्या आप यीशु मसीह पर विश्वास रखते हैं? क्या आप ने उन को ग्रहण किया है? अगर नहीं किया है तो वजह? क्या उन को ग्रहण करने में बहुत कठिनाई है? मेरे कहे पर विश्वास करना अलग बात है। यीशु मसीह पर विश्वास करना सर्वथा अलग बात है। उन पर निष्ठा रखना ही उन पर विश्वास करना है। उन पर विश्वास करना ही उन्हें ग्रहण करना है।

अगर डॉ कैगन आप से पूछते हैं क्या आप ने मसीह को ग्रहण किया है? आप का उत्तर क्या होगा? आप को मसीह को खुली आंखों से नहीं देखना है। किसी भावना के वशीभूत होकर मसीह को महसूस नहीं करना है। आप को सादे सरल रूप में उन पर विश्वास करना है। डॉ कैगन आप के साथ किसी प्रकार की चालाकी नहीं करेंगे। वे चाहते हैं कि वे यह जानकर तसल्ली कर लेवें। और मैं आप को तब बपतिस्मा प्रदान दूंगा । हमें यह देखकर खुशी होगी कि आप के जैसे युवा यीशु पर विश्वास रखते हैं। यीशु आप के पापों का मूल्य चुकाने के लिये क्रूस पर मरे थे। क्या आप उनकी प्रतीति करेंगे? आज रात भी यीशु आप से नितांत प्रेम रखते हैं। आप कहते हैं कि‚ ‘‘मैं उन पर विश्वास करना चाहता हूं।" तो अभी ही क्यों न किया जाये? किसी भावना को मत खोजिये। यीशु को देखिये। किसी महान अनुभव घटने की राह मत ताकिये। यीशु को देखिये। अपने भीतर मत झांकिये। आप के भीतर ऐसा कुछ नहीं है जो आप को उद्धार देगा। अपने विचारों पर भरोसा मत कीजिए। यीशु एकमात्र पर विश्वास कीजिए। यीशु को ग्रहण कीजिए, वे आप को ग्रहण करेंगे!

अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं मसीहा पर प्रतीति की जाये?
अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं मसीहा पर प्रतीति की जाये?

इस संसार में तुम असफल रहे
   पाने में शांति मन की
मसीह के पास आओ उन पर प्रतीति करो
   शांति और विश्राम तुम पा जाओगे

अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं मसीहा पर प्रतीति की जाये?
अभी क्यों नहीं? अभी क्यों नहीं?
   अभी क्यों नहीं मसीहा पर प्रतीति की जाये?
(‘‘व्हाय नॉट नॉउ?" डेनियल डब्ल्यू विटल‚ १८४०—१९०१;
   पास्टर द्वारा गीत के बोल बदले गये हैं)

यीशु पर प्रतीति करना बहुत सरल है। सुनिये एमी जबाल्गा ने क्या कहा‚ ‘‘मैं प्रतीति करने के बजाय किसी भावना को खोज रही थी‚ किसी अनुभव होने की बाट जोह रही थी......यीशु को तो अंतहीन रूप से नकार रही थी। फिर मैंने अपने उपर से नियंत्रण हट जाने दिया और मसीहा के सामने टूटकर गिर गयी।" जॉन कैगन की सुनिये वे कहते हैं‚ ‘‘मैंने अपने दिमाग से तर्क नहीं किया‚ न किसी प्रकार के कर्मकांड को संपन्न किया। सरल से अबोध विश्वास के साथ मैंने मसीह में विश्राम पाया। उन्होंने मुझे उद्धार प्रदान किया।" एमी और जॉन ने यीशु पर विश्वास किया। उन्होंने उन्हें ग्रहण किया। बस इतना ही! मेरी भी अर्ज है कि आज रात्रि आप यहां यीशु की प्रतीति करें। आमीन।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व मि बैंजामिन किंकेड ग्रिफिथ द्वारा गान:
‘‘ए चाईल्ड ऑफ दि किंग" (हैरियट ई बुयेल‚ १८३४—१९१०)


रूपरेखा

जितनों ने उन्हें ग्रहण किया!

AS MANY AS RECEIVED HIM!

डॉ आर एल हायमर्स जूनि
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

‘‘परन्तु जितनों ने उन्हें ग्रहण किया‚ उन्होंने उनको परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया‚ अर्थात उन्हें जो उनके नाम पर विश्वास रखते हैं।" (यूहन्ना १:११—१३)

(यूहन्ना २:२४‚ २५; यिर्मयाह १७:९; यूहन्ना ३:१‚२; १:११—१३; यशा ५३:३)

१॰ पहिली बात‚ मैं इसका वर्णन करूंगा कि मसीह को ग्रहण करना क्या
होता है‚ भजन २:१२

२॰ दूसरी बात‚ हम उस अधिकार के बारे में सीखते हैं जो यहोवा हमें उनके
पुत्र को ग्रहण करने के लिये प्रदान करते हैं‚ फिलि॰ ४:१९‚१३;
यूहन्ना १:११—१३

३॰ तीसरा, जब हम मसीह को जीवन में ग्रहण करते हैं‚ परमेश्वर यहोवा से हुई
अपनी नयी उत्पत्ति के बारें में सीखते हैं‚ यूहन्ना १:१३