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मारना, नोचना, शर्मिंदा करना और थूकना

THE SMITING, PLUCKING, SHAME AND SPITTING
(Hindi)

डॉ आर एल हायमर्स‚ जूनि
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लॉस ऐंजीलिस बैपटिस्ट टैबरनेकल में‚ रविवार संध्या २५ मार्च‚ २०१८
को प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, March 25, 2018

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)


यशायाह की पुस्तक में तीसरे स्थान पर दास का वर्णन किया गया है‚ जो मसीह के दुख उठाने को लेकर की गयी बिल्कुल सिद्ध भविष्यवाणी है। दूसरे पदों के साथ यह भी एक पद था जिसका उल्लेख प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों के समक्ष भी किया था‚

‘‘फिर उन्होंने बारहों को साथ लेकर उन से कहा; देखो‚ हम यरूशलेम को जाते हैं और जितनी बातें मनुष्य के पुत्र के लिये भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा लिखी गई हैं वे सब पूरी होंगी। क्योंकि वह अन्यजातियों के हाथ में सौंपा जाएगा और वे उसे ठट्ठों में उड़ाएंगे; और उसका अपमान करेंगे और उस पर थूकेंगे। और उसे कोड़े मारेंगे और घात करेंगे और वह तीसरे दिन जी उठेगा" (लूका १८:३१—३३)

यशायाह की पुस्तक ५०:६ में की गयी यह विशिष्ट भविष्यवाणी यीशु के अतिरिक्त और किसी के लिये नहीं कही गयी है। प्रभु यीशु ने शब्दश: यह भविष्यवाणी पूर्ण की है।

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (लूका १८:३४)

इस पद में से तीन महान सत्यों का निष्पादन आज रात मैं करूंगा।

१॰ पहिला सत्य‚ प्रभु यीशु ने स्वयं को दुख उठाने के लिये ‘‘सौंप दिया"!

डॉ स्ट्रॉंग (पृष्ठ संख्या ५४१४) बताते हैं कि इब्रानी शब्द ‘‘नथान" का अर्थ ‘‘देना" पाया जाता है। सचमुच में यीशु ने अपनी पीठ प्रहार करने वालों को सौंप दीं। उन्होंने अपने गाल‚ दाढ़ी उखाड़ने के लिये आगे कर दिये। चेहरे को शर्म उठाने और थूके जाने के लिये ‘‘सौंप दिया"। प्रभु यीशु इस बारे में कहते थे‚

‘‘मैं अपना प्राण देता हूं........... कोई उसे मुझ से छीनता नहीं‚ वरन मैं उसे आप ही देता हूं" (यूहन्ना १०:१७—१८)

गैतसेमनी के बगीचे में जब वे उन्हें बंदी बनाने के लिये पहुंचे‚ यीशु अपने आक्रोशित शिष्य पतरस से बोले‚

‘‘क्या तुम नहीं समझते कि मैं अपने पिता से बिनती कर सकता हूं और वह स्वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देंगे? परन्तु पवित्र शास्त्र की वे बातें कि ऐसा ही होना अवश्य है‚ क्योंकर पूरी होंगी?" (मत्ती २६:५३—५४)

जब वे मसीह को घसीट कर बंदी बनाने के लिये लेकर जा रहे थे‚ मसीह चाहते तो ७२‚०००स्वर्गदूतों की सेना को आत्म रक्षा के लिये बुलवा सकते थे। परंतु जानबूझ कर उन्होंने ऐसी सहायता लेने से इंकार किया। हां‚ मसीहा ने अपने गाल‚ पीठ और चेहरे को ‘‘दंड देने वालों" के ‘‘समक्ष कर दिया।" उन्होंने सारे दंड उठाने के लिये स्वयं को ‘‘प्रस्तुत कर दिया" ताकि पृथ्वी पर उनके आने का अभिप्राय पूर्ण हो सके कि उनके पास आने वाले लोगों को पापों से मुक्ति मिले। उन्होंने‚

‘‘अपने आप को सब के छुटकारे के दाम में दे दिया" (१ तीमोथियुस २:६)

उन्होंने‚

‘‘अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया‚ ताकि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए" (गलतियों १:४)

उन्होंने‚

‘‘जिस ने अपने आप को हमारे लिये दे दिया कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले" (तीतुस २:१४)

उन्होंने कहा,

‘‘मैं अपना प्राण देता हूं........... कोई उसे मुझ से छीनता नहीं‚ वरन मैं उसे आप ही देता हूं" (यूहन्ना १०:१७—१८)

उन्होंने स्वयं को यातना झेलने के लिये‚ शर्म उठाने के लिये और सलीब पर चढ़ाये जाने के लिये दे दिया क्योंकि वे आप से प्रेम रखते हैं! उनकी वाणी है‚

‘‘इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं‚ कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना १५:१३)

प्रभु यीशु स्वर्ग के सिंहासन का त्याग करके पर इसी उददेश्य से आये थे: ताकि अपने जीवन को यातना सहने और शर्म उठाने के लिये अर्पण कर देंवे ताकि हम भरपूरी का जीवन जी सकें! कैसे अदभुत विचार है! वे कहते हैं‚ ‘‘मैंने अपनी पीठ कोड़े बरसाने वालों को सौंप दी क्योंकि मैं तुमसे प्रेम रखता हूं। अपने गालों को उनके आगे कर दिया कि वे मेरी दाढ़ी के बाल नोंच सकें क्योंकि तुम्हारे पाप विमोचन का यही एक रास्ता था। मैंने अपने चेहरे को शर्म झेलने और थूके जाने के लिये दे दिया कि अंतिम न्याय के दिन तुम्हारे चेहरे शर्म से न झुके रहें!" इतने भयानक रोंगटे खड़े कर देने वाली यातना सहने के लिये स्वयं को अर्पण कर देना इसीलिये संभव हो पाया क्योंकि वे आप से प्रेम रखते हैं और आप के मित्र हैं! ‘‘यीशु पापियों के परम सखा हैं!" अपने स्थानों पर खड़े होकर इस गीत को गाते हैं!

यीशु पापियों के परम सखा हैं‚
   पापियों के सखा हैं‚ सखा पापियों के‚
यीशु पापियों के परम सखा हैं‚
   वे आप को पापों से मुक्त कर सकते हैं!
(‘‘जीसस इज दि फ्रेंड ऑफ सिनर्स‚" जॉन डब्ल्यू पीटरसन‚ १९२१—२००६)

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)

२॰ दूसरी बात‚ आप की पापयुक्त आत्मा को दोषमुक्त बनाने के लिये यीशु ने स्वयं को उन यातनाओं को सहने के लिये ‘‘दे दिया!"

उन्होंने ‘‘(अपनी) पीठ को कोड़े मारने वालों के लिये दे दिया।" इस बात को हल्का मत जानिये! बाइबल कहती है‚

‘‘इस पर पीलातुस ने यीशु को लेकर कोड़े लगवाए" (यूहन्ना १९:१)

स्पर्जन का कथन था‚

पीलातुस‚ जो राज्यपाल था‚ उसने उन्हें कोड़े मारे जाने की क्रूर सजा के लिये सौंप दिया.....कोड़ा....बैल के स्नायुओं से बना होता था। इसमें भेड़ के कूल्हे की हडिडयां गूंथी हुई होती थीं। इसमें हडिडयों से निर्मित नुकीले कांटे होते थे ताकि कोड़े का हर वार प्रभावशाली गिरे और मांस भेदता हुआ क्षतविक्षत कर दे। कोड़े मारे जाने को सामान्य तौर पर अपने आप में मौत से भी बदतर सजा माना जाता था। वास्तविकता यह थी कि कई लोग कोड़े खाते खाते मर जाते थे या शीघ्र ही इस सजा के उपरांत दम तोड़ देते थे। हमारे परम धन्य विमोचक ने तो अपनी पीठ उनको सौंप दी और (उन्होंने) उसमें गहरे (घाव) कर डाले। ओह दुर्गति का कैसा प्रदर्शन! हम उनकी ओर देखने का साहस भी नहीं कर सकते थे? (सी.एच. स्पर्जन‚ ‘‘दि शेम एंड स्पिटिंग" दि मेटोपोलिटन टैबरनैकल पुल्पिट, पिलग्रिम्स पब्लिकेशंस, १९७२ पुर्नमुद्रण, वॉल्यूम २५‚ पृष्ठ ४२२)

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)

प्रभु यीशु ने क्यों अपनी पीठ मारने वालों को सौंप दीं? फिर से‚ यशायाह इस प्रश्न का उत्तर देते हैं‚

‘‘उनके कोड़े खाने से हम स्वस्थ हुए" (यशायाह ५३:५)

उनके ‘‘कोड़े खाने से" हम आत्मा के पापों से दोषमुक्त किये गये! शिष्य पतरस ने इसे बहुत अच्छी तरह स्पष्ट कर दिया था, जब उन्होंने यह कथन किया,

‘‘वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गये जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उन्हीं के मार खाने से तुम चंगे हुए" (१ पतरस २:२४)

हमारी आत्मायें‚ जो पाप के प्रभाव से क्षत विक्षत हो गयी थी‚ केवल यीशु द्वारा खाये गये कोड़ों की मार से ही स्वस्थ हो सकती थीं!

तिबिरयास की झील पर बड़ी भीड़ उमड़ी जाती थी और यीशु ने उनमें से बीमारों को आरोग्य प्रदान किया।

‘‘और उन्होंने सब को चंगा किया" (मत्ती १२:१५)

जैसे उन्होंने उन्हें शारीरिक आरोग्यता प्रदान की‚ वैसे ही वे आप के हृदय को भी रोगमुक्त कर सकते हैं जिसमें ‘‘असाध्य रोग" लगा हुआ है (यिर्मयाह १७:९) । चार्ल्स वैस्ली ने अपने महानतम मसीही भक्तिगान ‘‘हार्क‚ दि हैरोल्ड ऐंजेल्स सिंग" में गीत की पंक्तियां लिखी थीं कि मसीह ‘‘रिजन विथ हीलिंग इन हिज विंग्स.....बोर्न टू रेज दि संस ऑफ अर्थ, बोर्न टू गिव देम सेकंड बर्थ।" प्रभु यीशु के पास आ जाइये और आप की आत्मा में लगे पाप के घाव, उनके कोड़े खाने से स्वस्थ हो जायेंगे!

३॰ तीसरी बात‚ यीशु ने एक पापी मनुष्य अर्थात आप के स्थान पर दंड भोगने के लिये स्वयं को ‘‘अर्पित कर दिया!"

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)

धर्मशास्त्र के इस पद में जो लिखा गया‚ उससे बढ़कर स्पष्ट और क्या हो सकता है:

‘‘परन्तु वे हमारे ही अपराधो के कारण घायल किये गये‚ वे हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचले गये; हमारी ही शान्ति के लिये उन पर ताड़ना पड़ी कि उनके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उन्हीं पर लाद दिया" (यशायाह ५३:५—६)

यीशु नर्क की यातनाओं से आप को बचाने के लिये‚ स्वयं उन यातनाओं से होकर गुजरे!

‘‘तब उन्होंने उनके मुंह पर थूका और उन्हें घूंसे मारे औरों ने थप्पड़ मारे" (मत्ती २६:६७)

‘‘तब कोई तो उन पर थूकने और कोई उनका मुंह ढांपने और उन्हें घूसे मारने और उन से कहने लगे कि भविष्यद्वाणी कर और प्यादों ने उन्हें लेकर थप्पड़ मारे" (मरकुस १४:६५)

‘‘और उन पर थूका और वही सरकण्डा लेकर उनके सिर पर मारने लगे" (मत्ती २७:३०)

‘‘और वे उनके सिर पर सरकण्डे मारते और उन पर थूकते और घुटने टेककर उन्हें प्रणाम करते रहे" (मरकुस १५:१९)

जो मनुष्य यीशु को पकड़े हुए थे‚ वे उन्हें ठट्ठों में उड़ाकर पीटने लगे। और उन की आंखे ढांपकर उन से पूछा‚ कि भविष्यद्वाणी करके बता कि तुझे किसने मारा। और उन्होंने बहुत सी और भी निन्दा की बातें उन के विरोध में कहीं" (लूका २२:६३—६५)

‘‘इस पर पीलातुस ने यीशु को लेकर कोड़े लगवाए" (यूहन्ना १९:१)

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)

जोसेफ हार्ट ने बहुत सटीक इस मंजर का बयां किया है‚

कितने धैर्य से यीशु खड़े हुए हैं‚
   (डरावने स्थान पर)‚ अपमानित होकर!
पापियों ने परमप्रधान के हाथ बांध दिये‚
   अपने ही रचयिता के मुंह पर थूका
(‘‘हिज पैशन" जोसेफ हार्ट‚ १७१२—१७६८; डॉ हायमर्स ने इसमें थोड़ा बदलाव किया है)

यीशु घोर पीड़ा से होकर गुजरे। और तब उन्होंने उनके हाथों और पैरों को कीलों से सलीब पर ठोंक दिया! इतनी सारी भयावह पीड़ा और क्रूरता को उन्होंने आप के स्थान पर सहा। आप के पापों का मूल्य चुकाने के लिये वे क्रूस पर बलिदान देते हैं कि आप परमेश्वर यहोवा की उपस्थिति में अपने पापों से स्वस्थ व शुद्ध होकर जा सकें!

‘‘इसलिये कि मसीह ने भी अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए" (१ पतरस ३:१८)

डॉ आयजक वाटस के अनुसार‚

उनके माथे‚ हाथ‚ और पैर को देखिये
   दुख और प्रेम समाविष्ट होकर बह रहा था‚
क्या प्रेम व दुख का ऐसा मिलन संभव है‚
   क्या कांटों ने भी मिलकर बड़ा अनोखा ताज नहीं गढ़ा?

जो तीनों लोक दे सकता मैं‚
   कितने नगण्य होते वे भी;
प्रेम कितना अदभुत और स्वर्गिक‚
   इसके बदले मेरी संपूर्ण आत्मा सर्वस्व ले लो।
(‘‘व्हेन आय सर्वे दि वंडरस क्रास" आयजक वाटस‚ डी डी‚ १६७४—१७४८)

इसके साथ ही विलियम विलियम का कथन था‚

मनुष्य के दोष का वह बड़ा भार‚
   मसीह के उपर रख दिया गया था।
उनके वस्त्र बांट लिये गये‚
   पापियों की श्रेणी में वे गिने गये।
(‘‘लव इन एगोनी" विलियम विलियम द्वारा रचित‚ १७५९)

एमी जबाल्गा हमारे चर्च में ही पैदा हुई है। प्रत्येक आराधना में नियमित आती थी। किंतु इससे वह सही मायनों में क्रिश्चियन नहीं कहलायी। जैसे हर कोई स्वभावगत पापी मनुष्य होते हैं‚ एमी भी ऐसी ही थी। वह अपने पाप और स्वयं के साथ संघर्ष कर रही थी। एक दिन मेरे संदेश समाप्त होने के पश्चात वह मेरे पास आई। वह घुटनों के बल बैठ गयी और मसीह पर विश्वास किया! सुनिये वह क्या कहती है‚

‘‘अनंतहीन सागर के समान मेरे पापों का फैलाव था। अब पापों का भार सहा नहीं जा रहा था। मसीह की मुझे तीव्र आवश्यकता थी! मसीह के लहू की मुझे तीव्र आवश्यकता थी! मैं घुटनों के बल बैठ गयी‚ मैंने केवल यीशु पर विश्वास किया। परमेश्वर यहोवा ने मुझे मेरी भावनाओं‚ मनोविश्लेष्णों और किसी आश्वासन मिलने की इच्छा रूपी जो मूरतें मैंने अपने भीतर बना रखी थीं‚ उनसे आजाद किया। मैंने अपने भीतर की सारी बातों को पिघलने दिया और मसीह की बांहों में स्वयं को समर्पित कर दिया। पहिले जो मैं भावनाओं पर आधारित निर्णय लेकर झूठा मन परिवर्तन करती थी‚ इस बार मैंने ऐसा नहीं करके‚ सीधे मसीह पर विश्वास किया। जीवित मसीह ने मुझे बचा लिया। उन्होनें अपने बहुमूल्य लहू में मेरे पापों को धोकर शुद्ध किया। मेरे पापों के असहनीय बोझ को अपने उपर उठा लिया। प्रभु यीशु ने परमेश्वर यहोवा के क्रोध को अपने भीतर आत्मसात कर लिया, वह क्रोध जो मुझे नर्क भेज सकता था। उन्होंने मुझे पापों की क्षमा प्रदान की और मेरे सारे पापों को मिटा डाला। मेरे लेखे अब उनके लहू से दर्ज है ‘‘दोषमुक्त।" वह मेरे मध्यस्थ हैं, मेरे विमोचक हैं, मेरे नायक हैं, मेरे प्रभु हैं! मैं प्रेरित पौलुस के साथ बस इतना कह सकती हूं कि परम प्रधान परमेश्वर आप को अकथनीय उपहार — यीशु के लिये धन्यवाद!"

मसीह आपके स्थानापन्न हैं। वह आप के स्थान पर मरे — कि आप के पापों का दाम चुका देवें। महान स्पर्जन ने कहा था‚ ‘‘दूसरे कोई भी प्रचार करें‚ किंतु यह पुल्पिट हमेशा मसीह के हमारे स्थान पर मरने की शिक्षा से गुंजायमान रहेगा!"

यीशु ने क्रूस पर दुख भोगने के द्वारा और अपने मरण के द्वारा आप के पापों का कर्ज चुकता कर दिया! यीशु के पास आइये। वे आप के पापों को क्षमा कर देवेंगे और आप की आत्मा को उद्वार प्रदान करेंगे! हो सके आप अपने संपूर्ण मर्म से कह सकें‚

प्रभु मैं आप के समीप आता हूं!
   मैं अभी आप के पास आता हूं!
मुझे अपने लहू से धो दीजिए‚ शुद्ध कर दीजिए
   जो क्रूस से बहता है।
(‘‘आय एम कमिंग‚ लार्ड" लेविस हार्टसौ‚ १८२८—१९१९)


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व एकल गान मि बैंजामिन किंकेड ग्रिफिथ द्वारा गाया गया:
‘‘माय जीसस‚ आय लव दी" (विलियम आर फेदरस्टोन‚ १८४२—१८७८)


रूपरेखा

मारना, नोचना, शर्मिंदा करना और थूकना

THE SMITING, PLUCKING, SHAME AND SPITTING

डॉ आर एल हायमर्स‚ जूनि
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

‘‘मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और गलमोछ नोचने वालों की ओर अपने गाल किए; अपमानित होने और थूकने से मैं ने मुंह न छिपाया" (यशायाह ५०:६)

(लूका १८:३१—३३)

१॰ पहिला सत्य‚ प्रभु यीशु ने स्वयं को दुख उठाने के लिये ‘‘सौंप दिया"!
यूहन्ना १०:१७—१८; मत्ती २६:५३—५४; १ तिमोथियुस २:६;
गलातियों १:४; तीतुस २:१४; यूहन्ना १५:१३

२॰ दूसरी बात‚ आप की पापयुक्त आत्मा को दोषमुक्त बनाने के लिये यीशु ने
स्वयं को उन यातनाओं को सहने के लिये ‘‘दे दिया!" यूहन्ना १९:१;
यशायाह ५३:५; १ पतरस २:२४; मत्ती १२:१५; यिर्मयाह १७:९

३॰ तीसरी बात‚ यीशु ने एक पापी मनुष्य अर्थात आप के स्थान पर
दंड भोगने के लिये स्वयं को ‘‘अर्पित कर दिया!" यशा ५३:५—६;
मत्ती २७:३०; मरकुस १५:१९; लूका २२:६३—६५; यूह॰ १९:१;
१ पतरस ३:१८