Print Sermon

इन संदेशों की पांडुलिपियां प्रति माह २१५ देशों के १,५००,००० कंम्प्यूटर्स पर इस वेबसाइट पते पर www.sermonsfortheworld.com जाती हैं। सैकड़ों लोग इन्हें यू टयूब विडियो पर देखते हैं। किंतु वे जल्द ही यू टयूब छोड़ देते हैं क्योंकि विडियों संदेश हमारी वेबसाईट पर पर पहुंचाता है। यू टयूब लोगों को हमारी वेबसाईट पर पहुंचाता है। प्रति माह ये संदेश ३५ भाषाओं में अनुवादित होकर १२०,००० प्रति माह हजारों लोगों के कंप्यूटर्स पर पहुंचते हैं। लिये उपलब्ध रहते हैं। पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। आप यहां क्लिक करके अपना मासिक दान हमें दे सकते हैं ताकि संपूर्ण संसार जिसमें मुस्लिम व हिंदु भी सम्मिलित है उनके मध्य सुसमाचार फैलाने के महान कार्य में सहायता मिल सके।

जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net.




मुझ पर अपनी अप्रतिम सुंदरता प्रकट कीजिये

SHOW ME THY GLORY
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल चर्च में‚ १२ अगस्त‚ २०१७
रविवार संध्या दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Saturday Evening, August 12, 2017


मेरे साथ बाइबल में से निर्गमन की पुस्तक अध्याय ३३ निकाल लीजिये। स्कोफील्ड स्टडी बाइबल में यह पेज ११५ पर मिलता है। अब खड़े हो जाइये और निर्ग ३३:१८ को देखिये। यहां आप को मूसा द्वारा परमेश्वर से की गई प्रार्थना मिलेगी‚

‘‘उसने कहा (मैं आप से विनती करता हूं) मुझे अपना तेज दिखा दे" (निर्ग ३३:१८)

अब आप बैठ सकते हैं। अगर आप को जॉन सैम्यूएल कैगन का संदेश अगर याद हो प्रार्थना में क्रम और बहस आप निर्गमन ३२ और ३३ में ऐसी कई प्रार्थनाओं को खोज सकते हैं। मूसा की जो प्रार्थना है‚ वह पद १७और १८ में अपने शीर्ष रूप में पहुंच गयी है। पद १५ में मूसा इस प्रकार कहते हैं‚ उसने उससे कहा‚ ‘‘यदि तू आप न चले तो हमें यहां से आगे न ले जा।" ‘‘मैं आप से विनती करता हूं मुझे अपना तेज दिखा दे"। पद १८ में कहते हैं‚ ‘‘मैं आप से विनती करता हूं मुझे अपना तेज दिखा दे" ‘‘महिमा" के लिये इब्रानी शब्द कावोद प्रयुक्त होता है‚ यथाशब्द जिसका अर्थ है ‘‘परमेश्वर का वजन" । मैने अपने व्यक्तिगत जीवन में कई बार इस ‘‘वजन" को महसूस किया है। जब मैं पंद्रह साल की उम्र में जंगल के हरी घास वाले कब्रस्तान में हॉफ रहा था‚ मैंने महसूस किया जैसे परमेश्वर उतर आये हो‚ जैसे कोई हल्की सी चादर किसी ने मुझ पर डाल दी हो। तीन बार जब आत्मिक जाग्रति को मैंने देखा‚ मैंने अपने आस पास कावोद को वातावरण में महसूस किया। ब्रायन एच एडवर्डस ने कहा था‚ ‘‘परमेश्वर की उपस्थिति’ मनुष्य की व्याख्या को तुच्छ समझती है‚ परंतु यह तो असाधारण आत्मिक जाग्रति के अनुभव के रूप में उत्तर देती है।" (रिवाईवल ए पीपल सैचुरेटेड विथ गॉड) ‘‘आदम और हवा परमेश्वर की उपस्थिति से छिप गये। कैन परमेश्वर की उपस्थिति से वंचित हो गया" (उक्त संदर्भित‚ पेज १३५) जब आत्मिक जागरण आता है तब परमेश्वर की उपस्थिति (स्पर्श) होने वाला अनुभव मिलता है। आत्मिक जाग्रति फैलने के समय परमेश्वर की आत्मा इतनी प्रामाणिक हो जाती है कि इसकी तीव्रता मानो प्रकट रूप में दिख पड़ती है" (उक्त संदर्भित‚ पेज १३५)

‘‘आत्मिक जागरण को समझने का यह मुख्य बिंदु है। अगर क्रिश्चियंस में एक बात की कमी है तो वह है चर्च में......... परमेश्वर की महसूस की जाने वाली उपस्थिति का अनुपस्थित होना.........तभी तो आराधना करते समय हमारा व्यवहार लापरवाह होता हैं। परमेश्वर के आत्मा के गहरे कार्य से आत्मिक जागरण आता है और उनकी उपस्थिति महसूस की जा सकती है ......आत्मिक जागरण एक बहुत ही भिन्न अनुभव है। परमेश्वर आप के मध्य उपस्थित होने के लिये जाने जाते हैं और यहां तक कि एक अविश्वासी भी कहने के लिये बाध्य होता है कि परमेश्वर सचमुच आप के मध्य है १ कुरूं १४:२५" (उक्त संदर्भित‚ पेज १३४)। ‘‘जब परमेश्वर पवित्र आत्मा (नीचे) उतर आता है‚ तो वह चर्च में की जा रही प्रार्थनाओं को ग्रहण करके उनमें नया जीवन फूंक देता है।" (उक्त संदर्भित‚ १२९) ‘‘जब आत्मिक जागरण फैलता है तब प्रार्थनायें आनंद और हर्ष से भर जाती हैं (उक्त संदर्भित‚ १२८)।" जब पाप का प्रायश्चित कर लिया जाता है, तब मसीह के रक्त से मनुष्य शुद्ध हो जाता है।

सैक्सोनी में, ‘‘मसीह के पास होने का अनुभव हम सब को उसी समय मिला......प्रभु ने जो वहां किया‚ उस शीत ऋतु में जो अदभुत कार्य मसीह द्वारा (वहां) किया गया‚ वह अव्यक्त है। पूरा स्थान मानो परमेश्वर ओर मनुष्य के निवास समान लगने लगा।" (उक्त संदर्भित‚ १३५) कोरिया में‚ १९०७ में‚ ‘‘प्रत्येक (व्यक्ति) ने जब चर्च में प्रवेश किया तो ऐसा अनुभव हुआ कि वह स्थान परमेश्वर की उपस्थिति से भरपूर है......उस रात परमेश्वर की समीपता का वर्णन कर पाना असंभव था (उक्त संदर्भित‚ पेज १३५‚१३६)।"

नवंबर १९८० में, मैं और मेरा एक मित्र टेलीविजन कार्यक्रम के लिये डॉ जॉन आर राईस का इंटरव्यू लेने मरफीबोरो, टैनिसी गये। डॉ राईस बहुत बूढ़े थे और आघात के कारण अपंग हो गये थे। वे ८५ वर्ष की उम्र के थे और व्हील चेयर पर उनको हमारे सामने लाया गया। जब उन्हें व्हील चेयर पर लाया गया, तो मुझे और मेरे मित्र को एकाएक हवा में हल्के से भारीपन के साथ ‘‘कावोद" की उपस्थिति का अहसास हुआ। मैं जानता हूं कि परमेश्वर नीचे उतर आये थे क्योंकि ऐसे तीन आत्मिक जाग्रतियों का मैं साक्षी रहा, तब का मेरा अनुभव भी यही रहा।

हमने उस नगर में एक कैमरा और एक कैमरामेन किराये पर ले लिया था। कैमरामैन कैथोलिक पृष्ठभूमि का था परंतु वह चर्च छोड़ चुका था। जब हमने इंटरव्यू लिया तो उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे, जिसको वह पोंछता जा रहा था, क्योंकि डॉ राईस रूक रूक कर उन महान सुसमाचारिय सभाओं, जिसका संचालन उन्होंने किया, के अनुभव बता रहे थे। जब इंटरव्यू समाप्त हुआ और डॉ राईस को कार में ले जाया गया। मेरा मित्र ओैर मैं व कैमरामैन उस कमरे में अकेले रह गये। वह अभी भी रो रहा था। उसने मुझसे डॉ राईस के बारे में पूछा, मैंने उससे कहा कि वह परमेश्वर के एक महान जन हैं। जब मै बोल रहा था, मैंने परमेश्वर की उपस्थिति को और तीव्रता से महसूस किया। वह व्यक्ति निरंतर रो रहा था। मैंने उससे यही कहा, कि ‘‘यीशु आप से प्यार करते हैं। उन पर विश्वास रखिये और वह आप के सारे पापों को अपने लहू से धो देंगे।’’ मुझे और कुछ कहना नहीं पड़ा। वह व्यक्ति घुटनों पर बैठ गया और उसकी आंखों से आंसू बहते रहे और उसने यीशु पर विश्वास किया। यह इतना आसान था क्योंकि परमेश्वर की उपस्थिति वहां थी। मुझे बाइबल का वह पद स्मरण आया ‘‘प्रभु तो आत्मा है और जहां कहीं प्रभु का आत्मा है वहां स्वतंत्रता है’’ (२ कुरूं ३:१७)। मैं जानता हूं कि कितना आसान है कि कोई भेटकर्ता नया जन्म प्राप्त कर ले। यहां तक कि पहली बार आने वाला भेंटकर्ता भी। जब डॉ राईस जैसे मनुष्य के साथ परमेश्वर के आत्मा की उपस्थिति हो!

परमेश्वर की उपस्थिति होने में एक और लाभ है। यह स्वर्ग का आनंद पहिले ही चखने जैसा है। मैं जानता हूं कि स्वर्ग की बातें अभी आप को अवास्तविक प्रतीत होगी। परंतु जब भी ‘‘कावोद" हमारे चर्च में आता है‚ जब वह आप का स्पर्श करता है‚ आप को महसूस होगा कि यह स्वर्ग जाने जैसा है। यह ‘‘स्चर्गिक महिमा का पहले से अनुभव" लेने जैसे होगा। स्वर्ग आप को दूर की बात प्रतीत नहीं होगी। जब आप हमारे चर्च में प्रवेश करते हैं तो आप को लगता है कि आप वास्तव में स्वर्गिक आनंद को ‘‘चख" रहे हैं। तब आप जॉन पीटरसन का छोटा सा यह गीत भी बहुत आनंद से गाने लगते हैं!

स्वर्ग नीचे उतर आया और उसकी महिमा ने मेरी आत्मा को छू लिया।
क्रूस पर मसीहा ने मुझे पूर्ण व्यक्तित्व प्रदान किया।
मेरे पाप सब धुल गये और मेरी रात दिन में बदल गयी−
स्वर्ग नीचे उतर आया और उसकी महिमा ने मेरी आत्मा को छू लिया।
   (‘‘स्वर्ग नीचे उतर आया" जॉन डब्ल्यू पीटरसन‚ १९२१−२००६)

मैं पेंटीकोस्टल्स की अनियंत्रित सभाओं का वर्णन बिल्कुल नहीं कर रहा हूं न ही उन करिश्माई लोगों की गलत धारणा के लिये कह रहा हूं। कदापि नहीं! उनका उददेश्य अच्छा हो सकता है‚ परंतु १९०५ में जब पेंटीकोस्टलवाद आरंभ हुआ‚ तब परमेश्वर का आत्मा इस तरह से उपस्थित नहीं हुआ करता था और लोगों को आत्मिक जाग्रति इस तरह नहीं मिला करती थी। हमें पुराने रास्ते पर जाने की आवश्यकता है क्योंकि पुराने मार्ग सच्चे हुआ करते थे − आज भी वे सच्चे हैं!

हमें फर्श पर गिर गिर जाने के द्वारा कावोद को बुलाने की आवश्यकता नहीं हैं‚ यद्यपि यद्यपि जब परमेश्वर नीचे उतर आते हैं तो कुछ लोग फर्श पर गिर सकते हैं। परंतु हम भावनाओं के अतिरेक प्रवाह में या चीख चीख कर आनंदित नहीं होंगे। कदापि नहीं! परंतु हम आनंदित होंगे जब हमारे मसीही भाई बहिन अपने पापों को महसूस करेंगे‚ जो उनके भीतर समाया हुआ है‚ जिन पापों के लिये उन्हें शर्मिंदगी है उन्हें अपने पापों को परमेश्वर के सामने स्वीकार करना है − और गलतियां एक दूसरें के सामने मान लेना है ताकि हमारे स्वर्गिक पिता द्वारा हमें आत्मा में चंगाई प्राप्त हो! निवेदन करता हूं कि अपने स्थानों पर खड़े होकर यह गीत संख्या १० गाये।

‘‘हे ईश्वर‚ मुझे जांच कर जान ले:
मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले:
और देख कि:
मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं‚
और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!"
   ( भजन १३९:२३‚२४)

मत डरिये! परमेश्वर आप से प्यार करते हैं। जब आप पाप स्वीकार करेंगे तो वह आप की निंदा नहीं करेंगे। आप के पाप कितने ही बुरे क्यों न हों, वह आप को चंगाई देगें। परमेश्वर यीशु के लहू से आप के पापों को धो सकते हैं। आप के पाप कैसे भी क्यों न हों हमारें प्यार में आप के लिये कभी कमी नहीं आयेगी! हम पर भरोसा कीजिये और भय भीत मत होइये। यीशु के पास वापस आ आइये। वापस आइये और अपने पाप स्वीकार लीजिये‚ ताकि आप यीशु के लहू से पापों को धोकर शुद्ध किये जा सकें। और अब वे जो जवान नहीं रहें वे भी आ सकते हैं। मैं यहां दो कुर्सियां भी रख रहा हूं। जो सोचते हैं कि जो वे कहना चाहते हैं‚ वह सार्वजनिक नहीं किया जाये‚ तो वे गुप्त में मुझे बता सकते हैं‚ और मैं उन्हें बताउंगा कि उन्हें वह कहना है या नहीं।

हमारे भाई जैक नान ने मेरे ७६ वें पर जन्मदिन पर मुझे यह पत्र लिखा।

प्रिय डॉ हिमर्स‚

इतने सालों आप की विश्वसनीयता के लिये बहुत मैं आप को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं अक्सर सोचता हूं कि इस स्वधर्मत्याग के दिनों में (कम से कम थोड़े भाग में तो) परमेश्वर के थोड़े लोग शेष हैं क्योंकि परमेश्वर आप का उपयोग कर रहे हैं....जो सच्चाईयां आप सिखाते हैं‚ वे उन चिंगारियों के समान हैं जो आत्मिक जाग्रति की लौ......को जला सकती है हो सके कि आप की सेवकाई खूब फलीभूत हो। (इंटरनेट) पर आप के संदेश की गूंज अनंतकाल तक होती रहे। मैं आपसे प्यार करता हूं‚ पास्टर।

मसीह में आप का
जैक नान

मैं मसीह में आप का इसलिये लिख रहा हूं कि आपकी सेवकाई ने (हमें उद्धार पाने के लिये मसीह की ओर प्रवत्त) किया।

जैक नान जानतें हैं कि मैं कितनी गहराई से चर्च की देखभाल करता हूं। इसलिये मैं आत्मिक जाग्रति पर बल देता हूं। क्रिश्चयन जीवन में केवल उद्धार पाने की गवाही देकर आप सफल नहीं हो सकते हैं। आप को इस जीवन में अनुग्रह द्वारा बढ़ना है − यह जीवन कष्टप्रद भी हो सकता है। आप ने अपने पापों का सामना किया है और जो गलतियां आप के जीवन में हो गयी हैं। आप इस गीत के बारे में नहीं सोचना चाहेंगे‚ ‘‘‘‘हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले‚ मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले‚ और देख कि‚ मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर...." परंतु आप को इसके बारे में सोचना चाहिये। भले ही स्वयं को जांचना दर्दनाक हो‚ तौभी जांचिये। आपके पाप को यीशु मसीह के लहू में धुल जाने दीजिये। तब आप कावोद‚ का अहसास करेंगे‚ जाग्रति में परमेश्वर का रोमांचक अनुभव करेंगे!

‘‘मैं आप से विनती करता हूं मुझे अपना तेज दिखा दे"

प्रार्थना कीजिये और पापों को स्वीकार कीजिये‚ परमेश्वर आप को उत्तर देंगे जैसा उन्होंने मूसा को दिया था।


अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स आप से सुनना चाहेंगे। जब आप डॉ हिमर्स को पत्र लिखें तो आप को यह बताना आवश्यक होगा कि आप किस देश से हैं अन्यथा वह आप की ई मेल का उत्तर नहीं दे पायेंगे। अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स को इस पते पर ई मेल भेजिये उन्हे आप किस देश से हैं लिखना न भूलें।। डॉ हिमर्स को इस पते पर rlhymersjr@sbcglobal.net (यहां क्लिक कीजिये) ई मेल भेज सकते हैं। आप डॉ हिमर्स को किसी भी भाषा में ई मेल भेज सकते हैं पर अंगेजी भाषा में भेजना उत्तम होगा। अगर डॉ हिमर्स को डाक द्वारा पत्र भेजना चाहते हैं तो उनका पता इस प्रकार है पी ओ बाक्स १५३०८‚ लॉस ऐंजील्स‚ केलीफोर्निया ९००१५। आप उन्हें इस नंबर पर टेलीफोन भी कर सकते हैं (८१८) ३५२ − ०४५२।

(संदेश का अंत)
आप डॉ.हिमर्स के संदेश इंटरनेट पर प्रति सप्ताह पढ सकते हैं
www.sermonsfortheworld.com पर
''पांडुलिपि संदेशों'' पर क्लिक कीजिये।

पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना डॉ.
हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। यद्यपि डॉ.
हिमर्स के सारे विडियो संदेश का कॉपीराईट है और उन्हें
अनुमति से उपयोग में ला सकते हैं।

संदेश के पूर्व डॉ क्रीटन एल चान द्वारा संदेश पढ़ा गया: यशायाह ६४:१−३
संदेश के पूर्व बैंजमिन किंकेड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया:
‘‘मे जीजस क्राईस्ट बी प्रेज्ड’’(अनुवादित एडवर्ड कासवेल, १८१४−१८७८)