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आत्मिक जागरण के लिये दिल से पुकार!

HEARTCRY FOR REVIVAL!
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल चर्च में‚ १६ जुलाई‚ २०१७
रविवार प्रातः दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Morning, July 16, 2017

‘‘मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बड़ी − बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता" (यिर्मयाह ३३:३)


यिर्मयाह जेल में था। वह यह प्रचार करने के कारण जेल में था कि यहूदा के लोग बंधुवाई में जायेंगे। यिर्मयाह हताश महसूस कर रहा था। उसने सोचा कि उसके लोगों को परमेश्वर ने त्याग दिया है। उसकी सारी आशा जाती रही थी और वह जेल में बंद असहाय महसूस कर रहा था। अब परमेश्वर उसके हृदय से बातें करते हैं। परमेश्वर उससे कहते हैं,

‘‘मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बढ़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता" (यिर्मयाह ३३:३)

पिछले रविवार की रात्रि को मैंने ‘‘प्रार्थना में आत्मिक जागरण पाने के लिये संघर्ष" पर संदेश दिया था। रात्रि को मैंने कहा था कि हम भौतिकतावाद के शैतान के अधीन होकर रह रहे हैं। मैंने कहा‚ परमेश्वर जा चुके हैं! वह चर्चेस में नहीं हैं। उन्होंने हमारे चर्चेस से विदा ले ली है..........परंतु हम नहीं चाहते कि वे नीचे उतर आयें। हमें हमारे आलस में बने रहना अच्छा लगता है‚ हमारा चर्च पवित्र आत्मा के बगैर चलता रहे‚ हम इतने लापरवाह हो चले हैं। केवल दिनचर्या में ही डूबे रहिये। क्यों कोई हलचल हो? क्यों हमें परेशानी में डालें? आइये हम तो सुस्ती में खो जायें। हम परमेश्वर की उपस्थिति के लिये कठिन श्रम करने में जैसे उपवास रखने और प्रार्थना करने में क्यों समय बितायें।" कुछ ही सप्ताह में हमारे यहां १७ लोगों ने उद्धार पाया। डॉ चान ने अपने आप को पुर्नस्थापित किया और पुर्नरूद्धार पाया। जॉन सैम्यूएल कैगन ने सुसमाचार प्रचार के लिये अपने आप को समर्पित किया। ऐरोन यांसी और जैक नैन डीकंस बनाये गये। क्रिस्टीन यूयेन और मिसिस ली प्रार्थना योद्धा बन गये।

हमने आत्मिक जाग्रति का ‘स्पर्श पाया। उन दिनों में मैंने और डॉ कैगन ने यह सीखा कि जब परमेश्वर उपस्थित होते हैं तब लोग मन फिरा कर प्रायश्चित करते और उद्धार पाते हैं। परंतु परमेश्वर जब उपस्थित नहीं होते हैं तो कोई भी आश्चर्यकर्म नहीं होता है। ऐरोन और जैक नैन ने कुछ और सीखा। उन्होंने सीखा कि प्रार्थना में शैतानी ताकतों से कैसे मल्ल युद्ध लड़ा जाता है। जैक ने बताया,

‘कि हमने परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना आरंभ की।" जब मैंने अपनी दूसरी प्रार्थना की। मेरा सिर घूमने लगा और मैं मूर्च्छित होने वाला था। प्रार्थना में वाक्य बनाने में दिक्कत आने लगी और मैंने ऐरोन से कहा कि मैं प्रार्थना करने में असमर्थ महसूस कर रहा हूं। तब ऐरोन ने प्रार्थना करना आरंभ की तो उसको भी समान दिक्कत, प्रार्थना को जमा कर बोलने में आने लगी। हमने समझ लिया कि एक बड़ी शैतानी बाधा है और फिर हमने घुटनों के बल पर प्रार्थना करना आरंभ की कि उस बाधा की उपस्थिति उठा ली जाये और मसीह के लहू का छिड़काव हमने मांगा। मैं दंडवत करते हुए गिरा। हमने इसी अवस्था में तीसरी बार प्रार्थना की और महसूस किया कि परमेश्वर ने उस अंधकार को तोड़ दिया और उस उपस्थिति को हटा दिया गया। हम जानते थे कि वह (संध्या सभा) बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाली थी। यह ४ बजे अपरान्ह में हुआ।'

दो घंटे बाद‚ उस रात शाम की सभा में मि वर्जिल निकैल आगे आये और उनकी आंखे आंसुओं से तर थी‚ डॉ कैगन ने यीशु के पास ले जाने में उनकी सहायता की। तब हमें पता चला कि क्यों दो घंटे पहिले ऐरोन और जैक ने प्रार्थना में इतना घोर संघर्ष क्यों किया!"

‘‘क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध‚ लोहू और मांस से नहीं‚ परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से‚ और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से‚ और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं‘‘ (इफिसियों ६:१२)

आत्मिक लड़ाईयां प्रार्थना के बलबूते पर जीती जाती हैं!

‘‘मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बड़ी − बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता" (यिर्मयाह ३३:३)

‘‘प्रार्थना में सामर्थ है" इस गीत को खड़े होकर गाइये!

प्रार्थना में सामर्थ है‚ प्रभु‚ प्रार्थना में सामर्थ है‚
यहां इस धरती पर पाप‚ दुख और चिंता हैं;
हमें आत्मिक जाग्रति चाहिये‚ आत्मा दुख में हैं;
मुझे प्रार्थना में सामर्थ दीजिए!
(‘‘मुझे प्रार्थना करना सिखाइये" अल्बर्ट एस रिटर्ज‚ १८७९−१९६६)
मैंने तीसरी पंक्ति को बदल दिया है ‘‘हमें आत्मिक जाग्रति चाहिये;
आत्मा दुख में हैं; मुझे प्रार्थना में सामर्थ सामर्थ दीजिए!"

अब आप बैठ सकते हैं।

शैतान ने आप में से कईयों को आत्मिक जाग्रति फैलने की प्रार्थना करने से रोक दिया है। मैंने पिछले गुरूवार की रात मतदान करवाया। मैंने आप लोगों से पूछा‚ ‘‘आप में से कितने सोचते हैं कि आत्मिक जागरण की प्रार्थना के द्वारा हमकों और अधिक लोग चर्च में चाहिये?" लगभग आधे से अधिक लोगों ने हाथ उंचे किये। तब मैंने पूछा, ‘‘आप में से कितने सोचते हैं कि आत्मिक जागरण की प्रार्थना के लिये मैं आप से अधिक कार्य करवाने की आशा रखूं?" तब आप में से एक तिहाई लोगों ने हाथ खड़े किए। यह धक्का लगने वाली बात थी। कितनी कितनी बार मैंने आप से कहा है, ‘‘यह लोगों के लिये नहीं हैं! कितनी कितनी बार मैंने आप से कहा है, यह अधिक कार्य के लिये नहीं हैं! कितनी कितनी बार मैंने आप से कहा है जब आत्मिक जाग्रति आती है तो कार्य कम होता है!"

आप को सैंकड़ों सैकड़ों नाम लेकर आने होते हैं उसमें से किसी एक आगंतुक को आप लेकर आने में सक्षम होते हैं। और वह एक आगंतुक फिर दुबारा नहीं आता! आत्मिक जागरण में आप को थोड़ें ही नाम लेने होते हैं‚ उनमें से वे सभी लौटकर आते हैं। हम सुसमाचार प्रचार अभियान बंद कर सकते हैं और उसके उपरांत बहुत से लोग हमारे साथ सम्मिलित हो सकते हैं और उद्धार प्राप्त कर सकते हैं! चायनीज चर्च में कोई ऐसा अभियान नहीं चलाया जाता। वे किसी के लिये ऐसे इंतजाम भी नहीं करते। तौभी २००० लोग उनके साथ सम्मिलित होते हैं और ठहर कर रह जाते हैं। क्यों? क्योंकि उनके यहां आत्मिक जाग्रति हुई! इसलिये मैंने यह बात पहिले भी कही थी‚ किंतु आप ने मेरा विश्वास नहीं किया। आप विश्वास नहीं करते क्योंकि आप ने कभी देखा नहीं। धर्मशास्त्र के इस पाठ को सुनिये‚

‘‘मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बड़ी − बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता " (यिर्मयाह ३३:३)

‘‘मैं तुझे बड़ी − बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता।" क्या आप यह विश्वास कर सकते हैं? क्या आप यह विश्वास कर सकते हैं? क्या आप इतने नम्र हो सकते हैं कि विश्वास करें जो चीज आप ने पहले नहीं देखीं‚ परमेश्वर आप को वे चीजें दिखायेंगे? क्या आप यह विश्वास कर सकते हैं कि ‘‘जो चीज आप नहीं जानते‚ परमेश्वर उनका उत्तर प्रार्थना में आप को देंगे?" खड़े होइये और इस गीत को गाइये!

प्रार्थना में सामर्थ है‚ प्रभु‚ प्रार्थना में सामर्थ है‚
यहां इस धरती पर पाप‚ दुख और चिंता हैं;
हमें आत्मिक जाग्रति चाहिये‚ आत्मायें दुख में हैं;
मुझे प्रार्थना में सामर्थ‚ सामर्थ दीजिए!
(‘‘मुझे प्रार्थना करना सिखाइये" अल्बर्ट एस रिटर्ज‚ १८७९−१९६६)

हम हृदय से डूबकर कार्य करते हैं कि खोये हुए बालकों को चर्च में लेकर आयें। परंतु जब वे यहां आते हैं तो वे परमेश्वर की उपस्थिति को महसूस ही नहीं करते हैं। क्यों नहीं करते? क्योंकि परमेश्वर अपनी सामर्थ में यहां उपस्थित ही नहीं हैं। परमेश्वर पिता पूर्णत पवित्र हैं। वह यह जानते हैं कि आप में से अनेक लोग यह विश्वास नहीं करते कि वे ‘‘अति महान और सामर्थी कार्य कर सकते हैं जिन्हें आप जानते भी नहीं हैं।" आप बिल्कुल विश्वास नहीं करते। आप सोचते हैं कि यह कोई परी कथा है। आप सोचते हैं कि एक बूढ़ा आदमी है जो किसी आश्चर्यकर्म को लेकर बक बक करता रहता है। और आप इसलिये विश्वास नहीं करते क्यांकि आप ने आश्चर्यकर्म कभी देखा नहीं है।

हमने तो इतने आश्चर्यकर्म देखे है किंतु आप तो अभी भी विश्वास नहीं करते हैं! उनचालीस लोगों ने मिलकर दो मिलियन डॉलर इस चर्च इमारत को बचाने के लिये चुका दिये। जिस भी प्रचारक से बात हुई‚ किसी ने भी नहीं सोचा था कि यह हो पायेगा। परंतु यह हुआ! यह बड़ा चमत्कार हो पाया! परंतु आप इसे देखते नहीं! आप इस पर विश्वास नहीं लाते! पिछले साल कुछ ही सप्ताह में १७ लोगों ने हमारे चर्च में उद्धार प्राप्त किया। परंतु आप इसे नहीं देखते! आप नहीं मानते कि यह एक आश्चर्यकर्म था! जॉन कैगन हमें नये प्रचारक नये पास्टर के रूप में मिले‚ भले ही वह पहले कभी दांत किटकिटाकर कहते रहे हो कि‚ ‘‘मैं यह कार्य कभी नहीं करूंगा!" यह एक आश्चर्यकर्म है। आप को यह नहीं दिख पड़ता है! आप इस पर विश्वास नहीं लाते! ३५ भाषाओं में हम संसार भर में सेवकाई कर रहे हैं − इस संदेशों को दुनिया में प्रेषित कर रहे हैं। परंतु आप इसे देखते नहीं! आप इस पर विश्वास नहीं लाते!

सचमुच मेरी प्रार्थना है कि आप जाग जाये और आत्मिक जाग्रति के लिये प्रार्थना करें! शायद आप उन फरीसियों के समान नहीं होंगे जिनके लिये लिखा गया है‚ ‘‘और उस ने उन के साम्हने इतने चिन्ह दिखाए‚ तौभी उन्होंने उस पर विश्वास न किया" (यूहन्ना १२:३७)

और मैं जानता हूं कि आप के धर्म में कोई आनंद नहीं बचा है और और कभी कभी मेरा आप के लिये रोता है। आप के पास कोई आनंद नहीं। कोई आशा नहीं। आप बेचारे सेमसन के समान बंदी घर में चक्की पीसते हैं। हां! कुछ लोगों के लिये यह चर्च बंदीघर के समान है ऐसा बंदीघर आप आराधनाओं में आते रहते हैं और सुसमाचार प्रचार के कार्य को गुलामों जैसे चक्की पीसने के समान करते रहते हैं। आप आत्मिक कड़ियों से बंधे हैं‚ चक्की पीस रहे हैं‚ पीस रहे हैं‚ नाउम्मीदी के साथ पीस रहे हैं‚ आप इस अंत हीन चक्की पीसने वाले कार्य से कैसे बचेंगे? कैसे इस अरूचिकर कार्य से‚ चर्च के कार्य से इस जगह से जो आप को बंदी के समान लगती है‚ बच निकल पायेंगे? मैं आप की सहायता करना चाहता हूं! परमेश्वर जानते हैं कि मैं करता हूं! केवल एक रास्ता है बच निकलने का। आप कैसे जानते हैं‚ प्रचारक महोदय? क्योंकि मैं भी एक समय आप की जगह पर था! मैं चर्च में जैसे कड़ियों में जकड़ा हुआ था‚ चक्की पीसे जा रहा था‚ पीसे जा रहा था‚ इसे नापसंद करता था − परंतु बच निकलने का कोई रास्ता नहीं था! बचने का रास्ता केवल यीशु में है! अपने पापों का स्वीकार करो! क्यों नहीं? क्योंकि पाप वह कड़ियां हैं जो आप को बांधती हैं उनसे छुटकारा पा जाइये! प्रायश्चित कीजिये और यीशु के लहू से शुद्ध हो जाइये‚ केवल वही आप के बंधनों को ढीला कर सकता है और आप को पुनः मुक्त कर सकता है।

‘‘इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो‚ जिस से चंगे हो जाओ....... " (याकूब ५:१६)

अपना भय‚ संदेह‚ अपना पाप‚ अपना क्रोध‚ अपनी कड़वाहट‚ अपनी जलन सब स्वीकार करो इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो ‘‘और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो‚ जिस से चंगे हो जाओ.......... " (याकूब ५:१६) एक महिला ने ऐसा किया! और प्रभु यीशु ने उसे चंगा कर दिया। एक पुरूष ने ऐसा किया। और यीशु ने उसे चंगा कर दिया। अभी केवल एक ही आशा की किरण है। आप सोचते हैं‚ ‘‘कि क्या ये सच हो सकता हैं?" हां! यह सच है! किसी के लिये विनती करें कि वह उनके पापों को स्वीकार करें और यीशु के द्वारा चंगे किये जायें।

‘‘मसीह ने कहा, ‘धन्य हैं वे जो शोक करते हैं’ (मत्ती ५:४) यह उनके लिये कहा गया है जो अपने पापों पर शोक करते और रोते हैं। जो मसीही जन अपने भीतर आत्मिक जाग्रति आने की राह देखते हैं, पाप सदैव उनके लिये समस्या होता है। जाग्रति पाप से अविचलित मनों में आती है, जिसे दुनिया नहीं देख पाती है। जाग्रति मन के अंधेरे हिस्सों पर प्रकाश डालती है......कि उस जाग्रति को लेने के लिये तैयार हो जायें। यहां तक कि राबर्ट भी उनको स्मरण दिलायेगा कि (पवित्र) आत्मा तब तक नहीं आयेगा‚ जब तक लोग तैयार नहीं होंगेः ‘हमें चर्च को सब प्रकार की बुरी भावनाओं से छुटकारा देना है − सारी जलन‚ मनमुटाव‚ उंचनीच का भाव‚ और गलतफहमियों से। (तब तक प्रार्थना मत कीजिये) जब तक मन से यह सारे दोष क्षमा न कर दिये जायें अगर आप को लगता है कि आप क्षमा नहीं कर पा रहे हैं तो जमीन तक झुककर मांगिये और क्षमा करने वाली आत्मा को मांगिये। तब यह आप को मिलेगा।"’ ..........केवल शुद्ध मसीही जन को परमेश्वर के करीब रह सकते हैं (ब्रायन एच एडवर्डस‚ रिवाईवल‚ इवेंजलीकल प्रेस‚ २००४‚ पेज ११३) ...... ‘‘हर व्यक्ति एक दूसरे को भूल गया। (हरेक जन परमेश्वर के आमने सामने था)...... (जब उन्होंने) अपने पापों को स्वीकार किया.....लगभग यह सभी आत्मिक जाग्रति में घटता है। बिना पाप से गहराई तक अविचलित हुए‚ दीनता से पाप का अनुभव किये बिना आत्मिक जाग्रति नहीं आ सकती। (उक्त संदर्भित‚ पेज ११६) .....‘‘हमारे पास एक अपवित्र चर्च है क्योंकि मसीही जन अपने पापों को नहीं स्वीकारते‚ न उनसे डरते हैं.........जो जाग्रति की चाह रखते हैं‚ उन्हें अपने मनों और जीवनों को पवित्र परमेश्वर के समक्ष जांचना चाहिये। अगर हम अपने पापों को ढांपे रखेंगे‚ (हम जाग्रति का अनुभव नहीं कर पायेंगे)....एक पवित्र परमेश्वर मसीहियों को छोटे से छोटे पाप के लिये सतर्क करते हैं.....जो व्यक्ति परमेश्वर पिता की उपस्थिति का भान करते हैं‚ वे सदैव अपने व्यक्तिगत पाप के प्रति जागरूक रहते हैं.....गहराई से पाप का बोध करना क्षमा करने वाली आत्मा में मुक्ति और आनंद लेकर आता है। जितना ‘हृदय को कष्ट’ देंगे‚ उद्धार के सोते आनंद के साथ बह निकलेंगे।" (उक्त संदर्भित १२०)

‘‘क्या तू हम को फिर न जिलाएगा‚ कि तेरी प्रजा तुझ में आनन्द करे?" (भजन ८५:६)

जब तक आंसुओं से अपने पापों को नहीं स्वीकारेंगे‚ हमारे हृदय प्रफुल्लित नहीं हो सकते हैं! यह चीन में हो रहा है। हमारे चर्चेस में क्यों नहीं होता? हम एक दूसरे के सामने अपने पापों कों मानने से और प्रार्थना करने से डरते हैं इसीलिये चंगाई भी नहीं मिलती। दूसरे क्या सोचेंगे‚ यह भय हमें पाप स्वीकारने से रोक देता है। यशायाह ने कहा था‚ ‘‘तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से डरता है.......... और अपने कर्ता यहोवा को भूल गया है" (यशायाह ५१:१२‚१३)

गीत संख्या १०गायेंगे!

‘‘हे ईश्वर‚ मुझे जांच कर जान ले:
मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले:
मेरे को जान ले;
मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले:
और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं‚ और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!"
(भजन १३९:२३‚२४)

गीत संख्या १७गायेंगे!

मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिये‚ पाप की तुच्छता मेरे
   भीतर की चमक को ढंपने न पाए।
मैं केवल तेरा आशीषित चेहरा देखने पाउं‚
   मेरी आत्मा तेरे अनंत अनुग्रह पर पोषित होती रहे।
मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिये‚ मेरे अलौकिक मसीहा‚
   जब तक तब तक तेरी महिमा से मेरी आत्मा प्रकाशित न हो जाये।
मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिए कि सब देख सके
   तेरी पवित्र प्रतिच्छाया मुझमें दिखाई दें
(‘‘मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिए" अविस बर्जसन क्रिश्चियनसन‚ १८९५−१९८५)

इसके पहले आप ने पाप स्वीकार नहीं किये थे। आप जानते थे कि आप को पाप स्वीकारना चाहिये। परंतु आप डरते थे। एक महिला ने मुझे फोन पर बताया कि उसने बुरी तरह से धर्म का त्याग कर दिया था। रविवार की सुबह मैंने उसे देखा और उसने मेरी ओर देखा। मैं समझ सकता था कि वह उद्धार पाने के लिये आना चाहती थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा ‘‘आओं" वह आयी। वह आगे आने में डर रही थी। आखिरकार वह एक डीकन की पत्नी थी! लोग क्या सोंचेंगे जब वह अपने पापों को स्वीकारेगी?

भूल जाइये दूसरे क्या सोचेंगे! जब हम खड़े होते हैं और गीत गाते हैं तो आगे आकर घुटने टेकिये और अपने पापों को स्वीकार कीजिये। परमेश्वर आप को आपके भीतर पापों का बोध देंगे। तब मसीह का लहू जो क्रूस पर बहाया गया आप को समस्त पापों से शुद्ध कर देगा।

गीत संख्या १७गायेंगे!

मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिये‚ पाप की तुच्छता मेरे
   भीतर की चमक को ढंपने न पाए।
मैं केवल तेरा आशीषित चेहरा देखने पाउं‚
   मेरी आत्मा तेरे अनंत अनुग्रह पर पोषित होती रहे।
मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिये‚ मेरे अलौकिक मसीहा‚
   जब तक तब तक तेरी महिमा से मेरी आत्मा प्रकाशित न हो जाये।
मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिए कि सब देख सके
   तेरी पवित्र प्रतिच्छाया मुझमें दिखाई दें
(‘‘मेरे दर्शन को पूरा कर दीजिए" अविस बर्जसन क्रिश्चियनसन‚ १८९५−१९८५)


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व मि नोहा द्वारा धर्मशास्त्र पढ़ा गया: १ यूहन्ना १:५−१०
संदेश के पूर्व बैंजमिन किंकेड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया
‘‘ओ ब्रीथ ऑफ लाईफ" (बेसी पी हेड‚ १८५०−१९३६)