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कैफा – वह मनुष्य जिसने
मसीह की हत्या की योजना बनाई !

CAIAPHAS – THE MAN WHO
PLANNED THE MURDER OF CHRIST!
(Hindi)

संदेश जो डॉ आर एल हिमर्स द्वारा लिखा गया,
जॉन सैम्यूएल कैगन द्वारा लॉस ऐंजीलिस के
बैपटिस्ट टैबरनेकल चर्च में प्रचार किया गया
रविवार, प्रातः ९ अप्रैल २०१७
A sermon written by Dr. R. L. Hymers, Jr.
and preached by Mr. John Samuel Cagan
at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, April 9, 2017

“तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उन से कहा, तुम कुछ नहीं जानते। और न यह सोचते हो, कि तुम्हारे लिये यह भला है, कि हमारे लोगों के लिये एक मनुष्य मरे, और न यह, कि सारी जाति नाश हो। यह बात उस ने अपनी ओर से न कही, परन्तु उस वर्ष का महायाजक होकर भविष्यद्वणी की, कि यीशु उस जाति के लिये मरेगा। और न केवल उस जाति के लिये, वरन इसलिये भी, कि परमेश्वर की तित्तर बित्तर सन्तानों को एक कर दे। सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्मति करने लगे'' (यूहन्ना ११:४९–५३)


यीशु मसीह की इस जगत की सेवा के वर्ष पूरे हो रहे थे। उन्होनें अपने मित्र लाजर को उसकी मृत्यु के चौथे दिन जीवित कर दिया। उसके बाद यरूशलेम में जब फसह का पर्व बनाया जा रहा था, तभी उन्होंने उस नगर में प्रवेश किया। यही समय उनके क्रूस पर चढ़ाये जाने का था। हम सोच सकते है कि अपने मित्र को जीवित करके यीशु ने धार्मिक अगुवों को उनके ईश्वरीय होने का यकीन दिला दिया होगा। परंतु हुआ इसके ठीक विपरीत। यीशु ने धार्मिक अगुवों के लिये पूर्व में कहा भी था,

“जब वे मूसा और भविष्यद्वक्ताओं की नहीं सुनते, तो यदि मरे हुओं में से कोई भी जी उठे तौभी उस की नहीं मानेंगे''
(लूका १६:३१)

लोग अक्सर आश्चर्यकर्मो को देखकर प्रतीति नहीं करते हैं। उन्हें पवित्र आत्मा का उनकी आत्माओं के भीतर पाप का बोध जगाया जाने का आश्चर्य कर्म चाहिये। क्योंकि लोगों की आत्मा “अपने अपराधों और पापों के कारण'' मरी हुई है (इफिसियों २:१) । अगर अदभुत रूप से किसी की आत्मा के भीतर कार्य नहीं होता है, तो वह अपने पापों से मन नहीं फिरा सकता “भले ही कोई मरे हुओं में से जीवित हुआ'' अर्थात यीशु ही उन्हें क्यों न कहें।'' (लूका १६:३१) जब परम प्रधान का आत्मा पाप के लिये मनुष्य की अंतर्रात्मा को जगाता है, ऐसा आश्चर्यकर्म ही मनुष्य को सच्चे रूप में परिवर्तित करता है।

आश्चर्यकर्म मनुष्य के मन को परमेश्वर के विरूद्व कड़ा भी कर सकते हैं। अब जब महापुरोहितों और धर्म के शास्त्रियों ने देखा कि यीशु “अनेक आश्चर्यकर्म'' करते जा रहे हैं। उन्होंने “एक सभा'' बुलवायी, सेंन्हेंद्रिन कमेटी (यूहन्ना ११:४७)। उस कमेटी में एक अजीब बात हुई। कैफा ने मसीह के संबंध में एक सटीक भविष्यवाणी दी। न्यू टेस्टामेंट कमेंटरी के अनुसार दृश्य इस प्रकार है कैफा अपनी बात मनवा लेने वाला व्यक्ति था, अवसरवादी, सही गलत का अर्थ नहीं जानने वाला....वह निर्दोष का लहू बहाने से भी नहीं झिझका। (जो चाहता था ऐसी स्थितियां निर्मित की)। लोगों को ऐसा महसूस करवा दिया कि उनके भले के लिये यीशु का मरना अवश्य था। कैफा यीशु से जलन रखता था। अपने स्वार्थ की पूर्ति करने के लिये उसने यीशु को मरवा डाला। यीशु के उपर दोष को प्रभावी बनाने के लिये, वह अपनी कुलटा बुद्वि से योजनायें बनाता रहा कि दोष सच प्रतीत हो। लोगों खुद मांग कर बैठे कि यीशु को क्रूस पर चढ़ा दो...... अंत में वह मन ही मन में आनंद से भर गया......क्योंकि जो साजिश उसने रची, वह बिल्कुल वैसी ही पूर्ण होती गई। एक दुष्ट आदमी ने सही भविष्यवाणी की! ऐसा था कैफा। जोसेफस को भी पढियें ऐंटीक्विटीज, १८, ४:३ (विलियम हैंडरीकसैन, टी एच डी, न्यू टेस्टामेंट कमेंटरी, बेकर बुक हाउस, १९८१ संस्करण, वॉल्यूम १, पेज १६३; व्याख्या यूहन्ना ११:४९–५०) । अब ध्यान दीजिये कि इस दुष्ट महायाजक ने एक भविष्यवाणी की। पुराने नियम में बालाम के समान, इस बुरे आदमी ने आगे की बात सच कह दी,

“तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उन से कहा, तुम कुछ नहीं जानते। और न यह सोचते हो, कि तुम्हारे लिये यह भला है, कि हमारे लोगों के लिये एक मनुष्य मरे, और न यह, कि सारी जाति नाश हो। यह बात उस ने अपनी ओर से न कही, परन्तु उस वर्ष का महायाजक होकर भविष्यद्वणी की, कि यीशु उस जाति के लिये मरेगा। और न केवल उस जाति के लिये, वरन इसलिये भी, कि परमेश्वर की तित्तर बित्तर सन्तानों को एक कर दे। सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्मति करने लगे'' (यूहन्ना ११:४९–५२)

पंरतु तब बाइबल कहती है,

“सो उसी दिन से वे उसको मार डालने की सम्मति करने लगे'' (यूहन्ना ११:५३)

एक सप्ताह बाद, कैफा ने मंदिर के संतरियों को यीशु को कैद करने के लिये भेजा, जब वह गैतसेमनी बाग में प्रार्थना कर रहे थे। वे यीशु को पकड़ कर कैफा के पास ले गये, जिसने यीशु से प्रश्न किया, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे'' (मत्ती २६:६३) । यीशु का उत्तर हां में आया,

“तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़कर कहा, इस ने परमेश्वर की निन्दा की है, अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन? देखो, तुम ने अभी यह निन्दा सुनी है! तुम क्या समझते हो? उन्होंने उत्तर दिया, यह वध होने के योग्य है। तब उन्होंने उस के मुंह पर थूका, और उसे घूंसे मारे, औरों ने थप्पड़ मार के कहा। हे मसीह, हम से भविष्यद्ववाणी करके कह कि किस ने तुझे मारा?'' (मत्ती २६:६५–६८)।

महापुरोहित के पास अधिकार नहीं थे कि लोगों के उपर मुकदमा चलाये। इसलिये कैफा यीशु को घसीटकर पोंतियुस पीलातुस रोमन गर्वनर के पास ले गया – और रोमी लोगों से कहा कि उसे क्रूस पर चढ़ा दो।

किसी को लेकर आत्मकथात्मक संदेश बनाना कठिन होता है। परंतु इस व्यक्ति जोसेफ कैफा, महायाजक के शब्द और कार्य से दो आम निष्कर्ष निकालना आसान है।

१॰ पहला, कैफा बहुत धार्मिक आदमी था उसने एक गहरा सच भी कहा था कि मसीह स्थानापन्न मृत्यु मरेगा।

कैफा बूढ़े महायाजक हन्ना का दामाद था। उसने १८ सालों तक महा याजक की गददी संभाली थी, किसी का कार्यकाल इतना लंबा नहीं था।

दुर्भाग्यवश हम जान सकते हैं कि किस प्रकार का व्यक्ति वह था। उदाहरण के लिये, जब डॉ हिमर्स युवा थे, उनसे कहा गया था, “आप यह प्रचार नहीं कर सकते या आप इसके समान प्रचार नहीं कर सकते।'' जैसे जैसे साल बीतते गये यह स्पष्ट होता चला गया कि यह सलाह गलत थी। जिस व्यक्ति ने उन्हें कहा था, वे अपने पदों के प्रति अधिक चिंतित थे, बजाय सत्य के, जो बाइबल में दिया गया है। एक प्रचारक सिर्फ अपनी नौकरियों की चिंता करने वाले को खुश नहीं कर सकता। कोई नाराज न हो, यह प्रचारक का लक्ष्य नहीं होता है। कैफा इस प्रकार का व्यक्ति था। वह जानता था कि यीशु ने “बहुत से आश्चर्यकर्म'' किये थे। कैफा इस प्रकार का व्यक्ति था। वह जानता था कि यीशु ने बहुत से आश्चर्यकर्म किये थे। (यूहन्ना ११:४७) परंतु वह यीशु को राजनीतिक उपयोगिता के लिये रोकना चाहता था। वह जानता था कि, “अगर हम उसे अकेला छोड़ देंगे तो हम सब कुछ हार बैठेगे।''

यीशु ने जो कहा और किया, वह उन्होंने परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता रखते हुए और प्रेमवश किया। कैफा ने जो कहा और किया, वह बिना परमेश्वर का ख्याल किये बगैर किया। कैफा के समान आज अनेक लोग चर्च में हैं। वह बहुत धार्मिक था। उसे ध्यान भी नही था, और उसने मसीह के लिये यह सत्य कह दिया कि वह लोगों के स्थान पर प्रतिनिधि बनकर मरेगा,

“तुम्हारे लिये यह भला है, हमारे लोगों के लिये एक मनुष्य मरे'' (यूहन्ना ११:५०)

इस तरह, उसने वह गहरा सच कह दिया जो मसीह के पापियों के एवज में मरने की बलिदानी की भविष्यवाणी करता है, ये शब्द यशायाह के शब्दों के समान प्रतीत होते हैं,

“परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं'' (यशायाह ५३:५)

परंतु सचेत रहिये! आप उन शब्दों को जान सकते हैं बिना उनसे कोई लाभ लिये बगैर! यही कैफा के साथ हुआ। वह सही शब्द तो जानता था परंतु उसके जीवन पर उन शब्दों का कोई प्रभाव नहीं था।

यह वही महायाजक था, जिसने पतरस को मुरदों में से पुर्नरूत्थित हुए मसीह का प्रचार करने के लिये धमकाया था। चूंकि वह लोगों से डरता था, उसने पतरस को धमकाकर छोड़ दिया (प्रेरितों के कार्य ४:२१) । पुनः कैफा वह महायाजक था, जिसने चेलों को जेल में डलवा डाला (प्रेरितों के कार्य ५:१७–१८) । परंतु परमेश्वर ने एक स्वर्गदूत को भेजा ताकि बन्दी गृह का दरवाजा खोल कर उन्हें मुक्त करवा दे। फिर कैफा ने अधिकारियों को भेजा कि पतरस को सेंन्हेंद्रिन के सामने उपस्थित किया जाये “परन्तु बरबस नहीं........ क्योंकि वे लोगों से डरते थे, कि हमें पत्थरवाह न करें'' (प्रेरितों के कार्य ५:२६) । बहुत से लोग जो चेलों की बातें सुनते थे, कैफा उनसे डरता था कि अगर उसने उनको नुकसान पहुंचाया तो वे उसे पत्थरवाह करके न मार डाले! सेंन्हेंद्रिन में गैमलीएल नामक व्यक्ति ने कैफा और अन्यों को समझाया

“और उन से कुछ काम न रखो; क्योंकि यदि यह धर्म या काम मनुष्यों की ओर से हो तब तो मिट जाएगा परन्तु यदि परमेश्वर की ओर से है तो (तुम उन्हें) कदापि मिटा न सकोगे; कहीं ऐसा न हो‚ कि तुम परमेश्वर से भी लड़ने वाले ठहरो।'' (प्रेरितों के कार्य ५:३८–३९)

कैफा और अन्य गैमलीएल की बात से सहमत हो गये। परंतु उन्होंने क्या किया? क्या उनके मनों में परमेश्वर के लिये कुछ विचार था? उन्होंने चेलों को पिटवाया और “यह आज्ञा देकर छोड़ दिया, कि यीशु के नाम से फिर बातें न करना'' (प्रेरितों के कार्य ५:४०)

“और प्रति दिन मन्दिर में और घर घर में उपदेश करने, और इस बात का सुसमाचार सुनाने से, कि यीशु ही मसीह है न रूके'' (प्रेरितों के कार्य ५:४२)

इस तरह हम कैफा हमारे सामने है – एक दुर्बल व्यक्ति के रूप में, जो सुसमाचार के प्रचार को नहीं रोक पाया और मसीहत के फैलाव की भी रोक नहीं कर पाया। परमेश्वर के प्रति विचार उसके मन में कभी आया नहीं और पाप से प्रायश्चित भी नहीं किया। वह राजनीति खेलता रहा – धर्म की आड़ में, बिना परमेश्वर का भय माने - कुछ सालों बाद, जोसेफस के अनुसार ३६ ए.डी. में पीलातुस के उत्तराधिकारी वितेलेस ने कार्य भार संभाला, (ऐंटीक्विटिस‚ १८:४२) । यह ज्ञात नहीं है कि गददी छोड़ने के बाद कैफा का क्या हुआ। यरूशलेम में कैफा के नाम खुदी हुई मेहराबदार छत से युक्त क़ब्र मिली – पुरातत्वशास्त्रियों ने उसे कैफा की वास्तविक कब्र मानी (आर्कीलोजिकल स्टडी बाइबल, जोंदरवन‚ २००५‚ पेज १६०९; मत्ती २६:३ पर व्याख्या) । वह केवल इसलिये याद किया जाता है कि वह “गहराई तक एक निर्दोष कैदी (यीशु) की न्यायिक हत्या के लिये उत्तरदायी था'' (जॉन डी डेविस, डी. डी., डेविस डिक्शनरी ऑफ दि बाइबल, बेकर बुक हाउस, १९७८ संस्करण, पेज ११४) ।

२॰ दूसरा, कैफा ने भी कैन के समान कभी प्रायश्चित नहीं किया – और इसलिये बचाया नहीं गया।

दूसरा कैफा ने भी कैन के मध्य वास्तविक समानता है। कैन जानता था कि उसे प्राणबलि चढ़ाने की आवश्यकता है जैसे हाबिल ने चढ़ायी थी। कैन ने प्रायश्चित नहीं किया। इसके बदले,

“तब कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढ़ कर उसे घात किया'' (उत्पत्ति ४:८) ।

नये नियम में भी कैन और कैफा के मध्य कड़ी जुड़ती है। जहां शिष्य यूहन्ना इस प्रकार कहते हैं,

“और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्ट से था, और जिस ने अपने भाई को घात किया: और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे। हे भाइयों, यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्भा न करना'' (१ यूहन्ना ३:१२–१३)

कैफा भी कैन के समान शैतान अर्थात उस “दुष्ट जन'' से प्रेरित था। कैन कैफा के समान “इस संसार'' का था। अर्थात उस उसने शैतान की बात मानना कभी बंद नहीं किया। उसने परमेश्वर की सेवा करने के लिये कभी “संसार'' को नहीं छोड़ा। यहूदी कुमरान कमेटी के ऐसनीस, जिन्होंने डैड सी स्क्रोल को प्रकाशित किया था, कैफा के घोर आलोचक थे, उसे वे “दुष्ट महापुरोहित'' भी कहते थे (आर्कीलोजिकल स्टडी बाइबल, उक्त संदर्भित) ।

कैन और कैफा एक भयंकर चेतावनी देना चाहते हैं उन धार्मिक लोगों को जो धार्मिक तो है, पंरतु फिर भी उन्होंने नया जन्म नहीं पाया है। दोनों प्राण बलि चढ़ाने के विषय में जानते थे। कैन और कैफा दोनों को, सीधे परमेश्वर ने बोला था। परमेश्वर पुत्र ने सीधे कैफा से कहा था - जैसे कैन से भी कहा था (उत्पत्ति ४:६–७) । कैन और कैफा दोनों ने परमेश्वर की आवाज को सुनने से इंकार कर दिया, वह आवाज जो उनके विवेक को झकझोर रही थी, उनके स्वार्थी जीवन में सीधे नश्तर चुभो रही थी। दोनों, कैन और कैफा अंतिम न्याय के दिन मसीह के सामने खड़े होंगे, और वह उनसे कहेगा।

“मैं ने तुम को कभी नहीं जाना हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ'' (मत्ती ७:२३) ।

राज्य के सन्तान “बाहर अन्धियारे में डाल दिए जाएंगे: वहां रोना और दांतों का पीसना होगा।'' (मत्ती ८:१२) ।

मैं आज सुबह आप को चेतावनी देता हूं कि – आप यह निश्चित करें कि आप परमेश्वर के बारे में विचार करते हैं! आप यह निश्चित करें कि आप पाप के बारे में विचार करते हैं! यह तय कीजिये कि आप केवल “सही शब्द'' ही नहीं बोलते हैं। आप अपने पापों को भी मानते हैं!

“दुखी होओ, और शोक करो, और रोओ तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए'' (यहूदा ४:९) ।

यह तय कीजिये कि आप को परिवर्तन का सच्चा अनुभव हो – ताकि यीशु मसीह से आप की आमने सामने मुलाकात हो और आप उनके “लहू में अपने पापों को'' धोकर शुद्व कर सकें (प्रकाशितवाक्य १:५) । इंतजार मत कीजिये! यीशु के पास आने से इंकार मत कीजिये! यीशु के पास आने को टालिये मत कि यीशु आप पर से हाथ उठा ले और आप के पथभ्रष्ट विचारों की ओर से मुंह फेर लेवे!

मैंने बहुत समय तक मसीहा की उपेक्षा की।
   इतने समय तक मैंने अपना पाप छिपाये रखा।
इतने समय तक मेरे इंकार के लिये मैं क्षमाप्रार्थी रहा,
   और अब मैं उसके बिना खो गया हूं।
देर हो गयी है, बहुत देर! तौभी वह मेरे द्वार पर खटखटाता है,
      यीशु, प्यारा यीशु मुझे एक बार और बुला रहा है।
      (“टू लोंग आय निगलेक्टेड'' डॉ जॉन आर राईस, १८९५–१९८०)

डॉ हिमर्स आइये और इस सभा का समापन कीजिये।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व बैंजामिन किंकैड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
“टू लोंग आय निगलेक्टेड'' (डॉ जॉन आर राईस, १८९५–१९८०)


रूपरेखा

कैफा – वह मनुष्य जिसने
मसीह की हत्या की योजना बनाई !

CAIAPHAS – THE MAN WHO
PLANNED THE MURDER OF CHRIST!

संदेश जो डॉ आर एल हिमर्स द्वारा लिखा गया,
जॉन सैम्यूएल कैगन द्वारा प्रचार किया गया

“तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उन से कहा, तुम कुछ नहीं जानते। और न यह सोचते हो, कि तुम्हारे लिये यह भला है, कि हमारे लोगों के लिये एक मनुष्य मरे, और न यह, कि सारी जाति नाश हो। यह बात उस ने अपनी ओर से न कही, परन्तु उस वर्ष का महायाजक होकर भविष्यद्वणी की, कि यीशु उस जाति के लिये मरेगा। और न केवल उस जाति के लिये, वरन इसलिये भी, कि परमेश्वर की तित्तर बित्तर सन्तानों को एक कर दे। सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्मति करने लगे'' (यूहन्ना ११:४९–५३)

(लूका १६:३१; इफिसियों २:१; यूहन्ना ११:४७–४८‚ ४९–५२‚५३;
मत्ती २६:६३‚ ६५–६८)

१॰ पहला, कैफा बहुत धार्मिक आदमी था‚ उसने एक गहरा सच भी कहा था कि मसीह स्थानापन्न मृत्यु मरेगा‚ यूहन्ना ११: ४७‚५०; यशायाह ५३:५;
प्रेरितों के कार्य ४:२१; ५:१७–१८‚२६‚ ३८–३९‚ ४०‚ ४२

२॰ दूसरा, कैफा ने भी कैन के समान कभी प्रायश्चित नहीं किया – और इसलिये बचाया नहीं गया‚ उत्पत्ति ४:८; १ यूहन्ना ३:१२–१३; उत्पत्ति ४:६–७; मत्ती ७:२३; ८:१२; याकूब ४:९; प्रकाशितवाक्य १:५