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हमारे युद्व के हथियार

THE WEAPONS OF OUR WARFARE
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

शनिवार की संध्या, ७ जनवरी, २०१७ को लॉस ऐंजीलिस के
दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Saturday Evening, January 7, 2017

‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं'' (२ कुरूंथियों १०:४)


मेरे मित्रों हम युद्वरत हैं। संसार जिस युद्व की बात करता है, यह वैसा युद्व नहीं है। मुस्लिम अतिवादियों के साथ का युद्व नहीं है। देशों के मध्य छिड़ने वाला युद्व नहीं है। यह अलग प्रकार का युद्व है। ये युद्व उपर कहे गये सभी युद्वों से बढ़कर है। इस युद्व को बंदूक, हैंडग्रेनेड और बम के बलबूते पर नहीं जीता जा सकता है। हमारे पूर्वजों ने इन हथियारों का प्रयोग हिटलर के विरूद्व युद्व में किया था। उन्होंने दूसरा विश्व युद्व जीता, जैसा चर्चिल कहते हैं, ‘‘रक्त, मेहनत, पसीना और आंसू के दम पर।'' उन्होंने उद्वेलित कर देने वाली विषम परिस्थितियों के विरूद्व युद्व जीता। इंग्लैंड और अमेरिका की संयुक्त सेना से बढ़कर हिटलर की सेना की ताकत थी। अगर हिटलर जीत गया होता तो उसने हमारे जीवन जीने को ही दुश्वार कर दिया होता। पश्चिमी जगत के इतिहास को ही मिटा दिया होता। अभी हम खौफनाक विनाश और बर्बादी में अचेत अवस्था में जी रहे होते − बम के गिरने से उत्पन्न हुए मलबे के ढेर के समान। चर्चिल और रूजवेल्ट के लिये और संयुक्त सेना के उन सैनिकों के लिये ईश्वर का धन्यवाद हो, जिन्होंने एडोल्फ हिटलर और उसकी नाजी मशीन से उत्पन्न क्रोध और पागलपन वाले तानाशाही नियंत्रण को समाप्त करने के लिये, उनका पीछा किया और उन्हें नष्ट किया।

उस युद्व की धुंधली सी याद मुझे है। मेरे बाल मन पर उस समय के घोषित होने वाले अंधेरे, सायरन और डर की याद अंकित है। हमारे धर्मशास्त्र किसी अन्य प्रकार के युद्व के बारे में बताते हैं। यह युद्व शत्रु के शरीरों और रक्त के विरूद्व लड़े जाने वाला युद्व नहीं है। यह घातक और विध्वंसकारी युद्व से कई गुना अधिक बढ़कर, शरीर और रक्त के विरूद्व, शैतान और उसकी ताकत वाले गढ़ों के विरूद्व युद्व है।

प्रेरित पौलुस इसे सरल रूप में समझाते हैं वह कहते हैं, ‘‘क्योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते'' − ‘‘शरीर के अनुसार नहीं लड़ते'' (२ कुरूंथियों १०:३) । हम केवल मनुष्य है। हम मानवी संसाधनों से इनका अंत नहीं कर सकते। कोई राजनेता, जनरल, सेनापति − डोनाल्ड ट्रंप या हाड़ मांस का व्यक्ति, सब युद्वों से बढ़कर इस भयानक युद्व को नहीं जीत सकता।

‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं'' (२ कुरूंथियों १०:४)

१॰ पहली बात, हमें यह पहचानना आवश्यक है कि हम युद्वरत हैं।

एक सामान्य व्यक्ति तो कभी यह जान ही नहीं पाता है कि ऐसा कोई युद्व भी चल रहा है। वह तो अपने छोटे से सैल फोन पर खेल रहा होता है। वह मैरीजुएना का आनंद लेता है और नहीं जानता कि कि कितना विनाश इससे फैल रहा है। वह व्यभिचारिणी स्त्रियों के साथ और दूषित मानसिकता के पुरूषों के साथ सैक्स संबंध में लिप्त रहता है। ऐसे लोगों के लिये डॉ टोजर कहते हैं, ‘‘यह संसार एक खेलने का मैदान है बजाय युद्वभूमि के।''

हमारे चर्चेस भी अनेक प्रकार के खेलों में लिप्त रहते हैं। हमारे अंधे प्रचारकों ने रविवार संध्या की आराधनायें बंद कर दी हैं। वे युवाओं के लिये विचार नहीं करते कि वे शाम को कहां जायेंगे, इसीलिये युवाओं के पाप की जीवन शैली में जाने का खतरा उत्पन्न होता है। दिमाग से निष्प्राण हो चुके इन प्रचारको को कोई अंतर नहीं पड़ता। वे रविवार की सुबह चर्च की आराधना से सारा पैसा बटोर लेते हैं − ताकि रविवार की रात उनके पास टेलीविजन देखने का पर्याप्त समय हो और कोई संदेह नहीं कि वे अपने कमरे में बंद होकर निर्लज्ज होकर पोर्नोग्राफी भी देखते हो, जिसके वे आदी होते हैं। अब तो प्रतिष्ठित माने जाने वाला मूडी संस्थान भी अपने फैकल्टी और स्टॉफ के लिये तंबाकू और अल्कोहल के उपयोग की आज्ञा दे चुका है। पिछले साल बायोला यूनिवर्सिटी ने भी अपने यहां यह नियम लागू कर दिया (डॉन बॉयज, पी एच डी, दिसंबर २६,२०१६) मैं और मेरी पत्नी स्तंभित रह गये जब मेरे द्वारा बरसों पहले स्थापित किये गये चर्च के एक पास्टर के पुत्र के विवाह में बीयर और शराब परोसी गयी और लोगों ने विवाह में नृत्य किया। ‘‘बीयर, बाइबल और ब्रदरहुड'' पर आक्सफोर्ड, कनेक्टीकट चर्च में रिक वारेन की पुस्तक का अध्ययन किया जाता है। अमेरिका में अधिकतर चर्चेस में ऐसे कार्यक्रम हो रहे हैं (बॉयज, उक्त संदर्भित)।

रविवार की सुबह चर्चेस में एक घंटे तक हुडदंग प्रकार का संगीत बजाया जाता है − जिसके पश्चात बिल्कुल शुष्क प्रकार की ‘‘शिक्षा'' दी जाती है, जिसमें एक एक पद का अर्थ समझाया जाता है। कहीं भी सुसमाचार या यीशु मसीह का वर्णन नहीं होता है। सुसमाचार प्रचार के तहत किसी भी खोये हुए जन को चर्च में नहीं लाया जाता, कोई वर्णन नहीं किया जाता कि एक पापी किस प्रकार से उद्वार पा सकता है! एक बड़ा युद्व जारी है, जब चर्च में बैठे ये लोग पूर्ण रूप से इन आवश्यक बातों की ओर से अंधे हैं, वे अपने छोटे छोटे खेल खेलते हैं और सोचते है कि वे सच्चे क्रिश्चियंस हैं। वे प्रार्थना सभाओं से दूर रहते हैं। वे सुसमाचार सुनने के लिये खोयी हुई आत्माओं को लेकर चर्च में नहीं आते हैं। ‘‘ऐसे चर्च से बाहर आ जाइये।'' कभी ऐसे चर्च की सदस्यता मत लीजिये। अगर आप ऐसे किसी चर्च में शामिल हो चुके हैं तो वहां से निकल भागिये, जैसे लूत न्याय के दिन में सदोम से निकल भागा था।

मैं तो बूढ़ा हूं और ढल चुका हूं। किसी दिन यहां नहीं रहूंगा। परंतु मैं आप में से प्रत्येक को आगाह कर देना चाहता हूं कि कभी ऐसा पागलपन मत कर बैठना। सांसारिक मूर्खता का हिस्सा मत बन बैठना। कभी भी ऐसे चर्च में मत जाइयेगा! कभी नहीं! कभी नहीं! कभी भी नहीं। प्राचीन समय में जो आत्मिक जाग्रति फैली थी, उसके गीतों को मत त्यागना। उस महान पुराने गीत को जो मि ग्रिफिथ ने कुछ क्षण पहले गाया, उसे मत छोड़ देना! यह आप के गीत की पुस्तक में पेज संख्या १० पर हैं। ‘‘उठो आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं'' गीत है, इसे खड़े होकर गाइये − स्पष्ट और जोर से!

उठो आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं, युद्व के लिये बढ़ना है,
   यीशु का क्रूस हमें लिये चलता है;
मसीह वह राजा है जो शत्रु के विरूद्व नेतृत्व करता है;
   युद्व में आगे बढ़ो, उसकी पताका फहरा रही है।
उठो आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं, युद्व के लिये बढ़ना है,
   यीशु का क्रूस हमें लिये चलता है।

सामर्थशाली सेना के समान परमेश्वर की मंडली को जगाओ;
   भाइयों, हम वहां मार्ग बना रहे हैं जहां संतों ने राह बनाई थी;
हम बंटे हुए नहीं हैं, हम एक हैं
   हम आशा रखने में सिद्वांतों में, करूणा में एक हैं।
उठो आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं, युद्व के लिये बढ़ना है,
यीशु का क्रूस हमें लिये चलता है।

मुकुट और सिंहासन नष्ट हो जाते हैं, राज्य आते और जाते रहते हैं,
   यीशु की मंडली सदा बनी रहेगी;
नर्क के दरवाजें इस मंडली पर प्रबल नहीं होंगे;
   खुद मसीह की प्रतिज्ञा हमारें साथ है, जो कभी टल नहीं सकती।
उठो आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं, युद्व के लिये बढ़ना है,
यीशु का क्रूस हमें लिये चलता है।
      ( ‘‘आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं'' सैबिन बैरिंग गोल्ड, १८३४−१९२४)

अब आप बैठ सकते हैं।

‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं'' (२ कुरूंथियों १०:४)

हमारे युद्व के हथियार सांसारिक नहीं और न ही मानव निर्मित है। वे अलौकिक हथियार है। ऐसे अलौकिक हथियार हमारे पास होना आवश्यक है क्योंकि हम हवा में व्याप्त सेनाओं से ही लड़ रहे हैं। हम शैतान और उसकी सेना से लड़ रहे हैं। हम ‘‘शैतान की युक्तियों के विरूद्व'' लड़ रहे हैं (इफिसियों ६:११) हम जो मसीही हैं शैतान की पद्वति के विरूद्व लड़ रहे हैं। हम उपकरणों, झूठे विचार और विकृत विचारों के विरूद्व लड़ रहे हैं। जो अपरिवर्तित लोग हैं, शैतान उनके दिमाग में विचार पैदा करता है। बाइबल कहती है, ‘‘क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं.......परन्तु इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है ....... '' (इफिसियों ६:१२ एन आय वी) । हमें शैतान और दुष्टता की सेनाओं से लड़ना है। हर वह खोई हुई आत्मा जिसे हम मंडली में लाते हैं उसके लिये हमें शैतान से लड़ना है। बिना युद्व के शैतान उन्हें अपने हाथों से जाने नहीं देगा।

अगर आप का उद्वार अभी तक नहीं हुआ है तो शैतान आप के दिमाग में कार्य कर रहा है! शैतान इस सभा में भी आप के दिमागों में कार्य कर रहा है। जब मैं बोल रहा हूं, तब भी शैतान अपनी चालाकियों और युक्तियों को आप के मनों में भर रहा है। शैतान वह ‘‘आत्मा है जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है'' (इफिसियों २:२ एन आय वी) । बाइबल कहती है शैतान आप के मनों और विचारों में ‘‘अभी कार्य कर रहा'' है।

एक लड़की जूली उद्वार पाने से पहले जो कह रही थी, उसे सुनिये। ‘‘डॉ हिमर्स ने मुझसे कहा कि मैं एक खोयी हुई आत्मा हूं और उन्होंने मुझे पूछताछ कक्ष में जाने के लिये कहा। उस समय तक मैं चर्च आने के लिये भयभीत हुआ करती थी।'' शैतान उसके विचार और मनों में अपनी बात भर रहा था। आप में से कुछ अभी, इस समय भी, शैतान के भुलावे में खोये हुए हैं। मैं कहता हूं कि आप की आत्मा भटकी हुई है, परंतु आप सुनना ही नहीं चाहते हैं। जूली ने कहा, ‘‘मैं सोचती थी कि समाज में मेरी छवि अच्छी है, तो इस जीवन के लिये केवल यही पर्याप्त है।'' वह पूरे समय चर्च आती रही, क्या यह अच्छी बात नहीं थी? डॉ हिमर्स क्यों कह रहे हैं कि मैं खोयी हुई हूं? मैं तो एक अच्छी लड़की हूं। ‘‘मुझे गर्व था कि मैंने दूसरों बच्चों के समान कुछ गलत नहीं किया था......मैं इस बात पर गर्व किया करती थी कि मेरे साथ ऐसा कुछ गलत नहीं है।'' शैतान जूली के मन में ऐसे विचार डाल रहा था।

क्या आप भी जूली के समान अपने को अच्छा मानते हैं? क्या आप भी इसी स्वच्छ छवि के भुलावे सोचते हैं कि आप भले व सभ्य व्यक्ति हैं? बाइबल कहती है कि ‘‘शैतान इस समय आज्ञा न मानने वाले लोगों के भीतर कार्य कर रहा है।'' शैतान इस समय आप के अंदर कार्य कर रहा है! वह आप के दिमाग और विचार में कार्य रत हैं!

जूली कहती थी, ‘‘मैं जितनी अच्छी बन सकती थी बनी रही। वे मुझसे और क्या चाहते थे?...... मैं हर संदेश के पहले चिंतित रहा करती थी। सप्ताह के पहले दिन विकल हुआ करती थी।'' शैतान जूली के भीतर कार्य कर रहा था, उसे बता रहा था कि वह बहुत अच्छी लड़की है। उसे बता रहा था कि वह अच्छी है उसे उद्वार प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। वह अच्छी लड़की है, बल्कि दूसरे उसकी तुलना में अधिक पापी हैं। दूसरों को उद्वार पाने की आवश्यकता है। उसे नहीं है! वह तो पहले से ही बहुत अच्छी है। ऐसे विचार शैतान मन में डालता है। वह शैतान के द्वारा पैदा किये गये भ्रम में जकड़ी गयी थी। वह शैतान की दास बन गयी । वह शैतान द्वारा बंधन में जकड़ ली गयी थी, स्वयं को इस भुलावे में रखने के बंधन में कि हम संभ्रांत लोग है, हमने कोई गलत कार्य आज तक नहीं किया, जो गलत कार्य करते हैं, उन्हें प्रभु यीशु के लहू से अपने पापों को धोने की आवश्यकता है। जूली को शुद्व होने की आवश्यकता नहीं थी। फिर वह हर रविवार चर्च आती थी। आखिरकार, वह बाइबल पढ़ती और प्रार्थना करती थी। ‘‘एक क्रिश्चियन से आपको और क्या चाहिये?'' ऐसे में उसको यह पसंद नहीं आता कि मैं उसे कहता हूं कि तुम्हारी आत्मा भटकी हुई है। बिना यीशु के लहू से शुद्व हुए बगैर खोई और भटकी हुई आत्मा। परंतु परमेश्वर के प्रबल अनुग्रह के कारण वह निरंतर चर्च की ओर खिंची चली आती। परमेश्वर के उस अथक अनुग्रह के कारण जो लोगों को बचाये जाने के लिये उनका चुनाव करता है, वह भी सुसमाचार सुनने आती रही।

वह क्यों पलट कर चर्च आती रही? वह अपने साथ एक सखी को लेकर आती थी, जिसे परामर्श कक्ष में जाने की सलाह दी गयी, तो उसने चर्च आना छोड़ दिया। वह अपने पुराने चर्च में लौट गयी। जहां उसे कोई बताने वाला नहीं था कि उसकी आत्मा पापों में भटकी हुई है, उसे उद्वार पाने की आवश्यकता है। उसके मन में शैतान ने विचार पैदा किये। उसने अपने पापों के विषय में सुनने से इंकार कर दिया। जहां उपरी अच्छी क्रिश्चियनिटी देखने को मिली, वह उसी चर्च में लौट गयी। मुझे जूली के पिता से ज्ञात हुआ, उसकी सखी के जीवन का पाप क्या था? यह वह पाप था जो वह छोड़ना नहीं चाहती थी। उसने सच्चाई से मुंह फेर लिया − अपने स्वामी शैतान की सलाह पर अमल किया, उसे पापों से छुटकारा नहीं मिल सका।

इस स्थान पर उसके समान और भी लोग यहां हैं। आप भी अपने स्वामी शैतान की दासता में हैं। आप पाप करना पसंद करते हैं। आप पोर्नोग्राफी पसंद करते हैं। आप को मलिनता पसंद आती है। जो आप भीतर से हैं, आप स्वयं को वैसा ही पसंद करते हैं। आप को पता भी नहीं चल पाता और आप जाने कब, शैतान के दास बन बैठते हैं।

परंतु सबसे बड़ा पाप यह है कि आप यीशु को अपने मन में ग्रहण करने से इंकार करते हैं। वह आप को पापों से शुद्व करना चाहता है, उस लहू के द्वारा जो उसने क्रूस पर बहाया। आप विचारों से यीशु को बाहर कर देते हैं, और बाकि हर चीज का स्थान आप के विचारों में पाया जाता है।

२॰ दूसरी बात, हमारे युद्व के हथियार कौन से हैं।

बाइबल के पद कहते हैं, ‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।'' शैतान के विरूद्व उपयोग में लाने योग्य प्राथमिक हथियार प्रार्थना और उसकी आज्ञा मानना है। आज्ञा कहती है कि तुम पापी हो। आज्ञा जो कहती है कि तुम पाप से भरे हुए हो। हमारी प्रार्थनायें पवित्र आत्मा को नीचे लाती है। आत्मा आप को पापों से प्रायश्चित करने में सहायता करता है। इसलिये हमें संपूर्ण मन से प्रार्थना करना चाहिये कि खोये हुए लोगों को उनके पापों का प्रायश्चित करने की इच्छा पवित्र आत्मा द्वारा प्रदान की जाये।

आज रात यहां कुछ लोग हो सकते हैं, जिनके लिये जब तक प्रार्थना नहीं की जायेगी, वे उद्वार नहीं पा सकेंगे। जब तक कि हम बड़ी निर्भीकता और आंसुओं के साथ उनके लिये प्रार्थना नहीं करेंगे। केवल जब हम आंसुओं के साथ प्रार्थना करेंगे तब ही वे खोये हुए लोग पापों के प्रायश्चित के लिये तैयार हो सकेंगे। बिना आंसुओं के प्रार्थना बहुत कम सुनी जाती है। हमें यशायाह के समान प्रार्थना करनी चाहिये,

‘‘भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और (पाप के) पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे'' (यशायाह ६४:१)

हमें ऐसी प्रार्थना करनी चाहिये जैसे पहले कभी नहीं की हो, कि परमेश्वर का आत्मा खोये हुए लोगों को उनके पापों का बोध करवाने नीचे उतर आये। पोर्नोग्राफी के पाप का बोध करवाने के लिये नीचे उतर आये। अपने माता पिता से नफरत करने के पाप का बोध करवाने नीचे उतर आये। अपनी स्वयं की अच्छाई पर घमंड करने के पाप का बोध करवाने नीचे उतर आये। यीशु का इंकार करने के पाप का बोध करवाने नीचे उतर आये।

हमें इन लोगों को परमेश्वर की आज्ञा का भी प्रचार करना चाहिये। प्रार्थना करना और आज्ञा का प्रचार करना, हमारे पास ये दो प्रमुख हथियार है जिनके द्वारा शैतान से लड़ा जा सकता है। मैं हर रविवार जूली को प्रचार करता रहा। वह कहती थी, ऐसा लगता था, ‘‘डॉ हिमर्स जैसे मेरे पाप को लेकर ही सीधे प्रचार करते थे। वे प्रचार करते थे कि संतान कितनी पापमयी हो गयी (है) कि अपने माता पिता के ही विरूद्व हो गयी है, सुनकर मैं रोने लग जाती। यह वह (पाप) था जिससे मैं जूझ रही थी। मैं (सचमुच) मेरे माता पिता के लिये एक आफत पैदा करने वाली संतान थी। मेरे पिता के प्रति मेरे मन में नफरत थी। पवित्र आत्मा ने मुझे दिखाया कि मैं सचमुच एक अच्छी लड़की नहीं थी। मैं बिल्कुल एक अच्छी लड़की नहीं थी। मैं उतनी अच्छी लड़की नहीं थी जितना लोग मुझे उपर से देखते थे। जितना मैं स्वयं को अच्छा मानती थी। मैं एक कठोर स्वार्थी और घमंडी लड़की थी। अंदर से जैसी मैं थी, मुझे उसके लिये शर्म आती थी। मुझे बड़ी तीव्र इच्छा होती थी कि मुझे क्षमा मिल जाये। यद्यपि मै क्षमा के योग्य स्वयं को नहीं समझती थी। मैंने अपने आप को पापलिप्त और गलत माना। कोई मेरे जैसे धोखा देने वाले पापी को क्योंकर क्षमा कर सकता था?'' प्रार्थना का हथियार और आज्ञा प्रचार के हथियार का प्रयोग उसके उपर से शैतान की पकड़ को ढीली कर रहा था। ‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं (२ कुरूंथियों १०:४)।'' शैतान के गढ़ मजबूत होते हैं। आप के दिलों में बने हुए किले हैं वे, जो आप को शैतान के कारागार में रखते हैं। परमेश्वर की सामर्थ चाहिये होती है कि कारागार की उन दीवारों को तोड़ा जा सका। आप मुक्त हो सकें।

वह निष्क्रिय पाप के बल को तोड़ता है,
   वह बंदी को आजाद करता है।
बेहद मलीन पापी को भी स्वच्छ बना सकता है,
   उसका लहू जो मेरे लिये उपयोगी है।
(‘‘हजारों जीभें जो हो'' चार्ल्स वीसले, १७०७−१७८८)

आप के भीतर किन बातों के किले बने हुए हैं? शैतान के कारागार में कौनसी बातें आप को बंदी रखती है? क्या पोर्नोग्राफी? क्या कोई व्यसन? क्या यह विचार कि आप बहुत अच्छी छवि वाले क्रिश्चियन है, जो बराबर चर्च आते हैं बाइबल पढ़ने व प्रार्थना में लीन रहते हैं, आप को मन परिवर्तन की, यीशु के रक्त से शुद्व होने की कोई आवश्यकता नहीं है? क्या इन तरीकों से शैतान आप को भुलावे में रखकर अपने गढ़ में − उसके कारागार में कैदी रखता है?

अपने लोगों को मैं धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने जूली के मुक्त होने के लिये तल्लीन होकर प्रार्थना की! धन्यवाद हो परमेश्वर का कि मैं हर रविवार इस आज्ञा का प्रचार कर पाया जिसने जूली को यह ज्ञान दिया कि वह पापी है!

‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं'' (२ कुरूंथियों १०:४)

मेरा संदेश समाप्त होने पर जूली मुझसे मिलने आयी। उसने कहा, ‘‘डॉ हिमर्स ने मुझे बताया कि यीशु मेरे लिये क्रूस पर मेरे स्थान पर मरे और (परमेश्वर) का न्याय उन पर पड़ा, ताकि वह दंड मुझे न भोगने पड़े। अब मैं जान गयी कि क्यों मुझे यीशु और उनके रक्त की आवश्यकता है.......मुझे यीशु की आवश्यकता है ताकि मेरे पाप उनके लहू से पूर्णतः शुद्व हो सके। डॉ हिमर्स ने मुझे बताया कि यीशु मुझसे प्रेम करते हैं चाहे कैसे भी पाप मैंने क्यों न किये हों। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं यीशु पर विश्वास रखूं। मैं यीशु की इतनी उपेक्षा नहीं कर सकती। मेरा चेहरा आंसुओं से तर हो गया और मैं मसीह पर विश्वास करने के लिये तैयार थी....... मैं घूटनों के बल बैठ गयी, मैंने मसीह पर विश्वास किया। मैंने मसीह पर विश्वास किया, मेरी अच्छाई पर नहीं। मैंने मसीह पर अपना विश्वास रखा, उनके बहाये गये लहू पर विश्वास रखा....... मैंने यह विचार जाने दिया कि मैं कितनी अच्छी लड़की हूं और मैंने अपने सारे अहंकार को जाने दिया। मैंने यीशु पर विश्वास किया और उन्होंने मुझे बचा लिया!''

कितनी अदभुत साक्षी है! अब जूली ने उद्वार पा लिया है वह मेरी मित्र है! मैं सच में मानता हूं कि वह सच्ची क्रिश्चियन है। ऐसे ही डॉ कैगन हैं। मैं उसे जल्द ही बपतिस्मा दूंगा।

क्या उसके शब्द आज रात आप से बातें करते हैं? क्या आप को ऐसा महसूस हुआ कि आप कितने बड़े पापी हैं? क्या आप को स्वयं में यह आवश्यकता हुई कि आप को यीशु के क्रूस पर बहाये गये लहू से शुद्व होना चाहिये? यीशु आप से बहुत प्रेम करते हैं? क्या आप हमारे पास आयेंगें कि आप यीशु पर विश्वास लाने के लिये मुझसे, जोन कैगन और डॉ कैगन से बातें कर सकें? जब अधिकतर लोग उपर जाकर भोजन ग्रहण करते हैं, क्या आप परामर्श के लिये और आप के लिये प्रार्थना किये जाने के लिये हमारे पास आयेंगे? अगर आप को विश्रामकक्ष में जाने की आवयकता है तो वहां होकर आइये − या अभी आ सकते हैं जब तक हम यहां गीत गाते रहेंगे। परमेश्वर भोजन को आशीषित करे और हर उस जन को जो आज की रात मसीह पर विश्वास लाता है! आमीन!

खड़े हो जाइये और आप के गीत की पुस्तिका में से पेज संख्या ११ निकाल कर गाइये। ‘‘मेरे दर्शन को पूर्ण कर दीजिये'' गीत गायेंगे। यह पेज संख्या ११ पर है। जब तक हम यहां गीत गाते रहेंगें आप आयें, कि मैं आप को परामर्श दे सकूं और आप के लिये प्रार्थना करूं।

मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए, मेरी विनती है, मसीहा,
   आज मैं केवल यीशु को देखूं;
यधपि घाटी से तु मुझे ले चलता है,
तेरी कभी न मुरझाने वाली आभा मुझे घेरे रखती है।
मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए, अलौकिक मसीहा,
   जब तक आप की महिमा से मेरी आत्मा न चमक उठे।
मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए, कि सब देख सके
   आपकी पवित्र छवि मुझमें दिखाई दे।


मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिये, कि पाप की रत्ती भर
   चमक व छाया मेरे भीतर न रहे।
मैं केवल आप का आशातीत चेहरा देखना चाहता हूं,
   मेरी आत्मा आपके अनंत अनुग्रह पर जीवित है।
मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए, अलौकिक मसीहा,
   जब तक आप की महिमा से मेरी आत्मा न चमक उठे।
मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए, कि सब देख सके
   आपकी पवित्र छवि मुझमें दिखाई दे।
(‘‘मेरा दर्शन पूर्ण कर दीजिए,'' एविस बर्जसन क्रिश्चियनसन, १८९५−१९८५)

आमीन।


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व श्रीमान जोन सैम्यूएल कैगन ने धर्मशास्त्र से पढ़ा: २ कुरूंथियों १०:३−५
संदेश के पूर्व बैंजामिन किंकैड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
‘‘आगे बढ़ो मसीही योद्वाओं'' (सैबिन बैरिंग गोल्ड, १८३४−१९२४
अंतरा और कोरस पद १, २, ३)


रूपरेखा

हमारे युद्व के हथियार

THE WEAPONS OF OUR WARFARE

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

‘‘क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं'' (२ कुरूंथियों १०:४)

(२ कुरूंथियों १०:३)

१॰   पहली बात, हमें यह पहचानना आवश्यक है कि हम युद्वरत हैं, इफिसियों
६:११,१२; इफिसियों २:२

२॰   दूसरी बात, हमारे युद्व के हथियार कौन से हैं, यशायाह ६४:१