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जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net.




भली वस्तुएं प्रार्थना से मिलती हैं।

GOOD THINGS COME THROUGH PRAYER
(Hindi)

डॉ आर एल हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, ५ जून, २०१६ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में किया गया प्रचार संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, June 5, 2016

''सो जब तुम बुरे होकर, अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों न देगा?'' (मत्ती ७:११)


इस अदभुत गधांश में यीशु हमें प्रार्थना करने के लिये प्रेरित करते हैं। यूनानी भाषा में ७ और ८ पद वर्तमान काल में पाया जाता है। अर्थात मांगते रहो और खटखटाते रहो। जब पवित्र आत्मा आप के मन में किसी चीज की आवश्यकता बार बार डालता रहे तो समझिये कि परमेश्वर की ओर से आप को यह बोझ दिया गया है। तब आप उस वस्तु के लिये तब तक प्रार्थना करते रहेंगे जब तक कि उसका उत्तर स्वर्ग से न मिल जाये।

मैं और मेरा परिवार जब मैक्सिकों से छुटिटयां बिता कर लौटे तब एकाएक चर्च की आठ बड़ी समस्याओं से मेरा सामना हुआ। उन समस्याओं से निपटने का कोई रास्ता सूझ नहीं पड़ रहा था। मैं नहीं जानता था कि उन से कैसे निपटा जाये तो मैंने हर समस्या को प्रार्थना में रखा। वे बहुत बड़ी समस्या थी। बेशक शैतान ने मेरे दिमाग को शक और भय से भर दिया था। मेरा पुराना मनुष्यत्व तो यही मानता था कि परमेश्वर हमारी क्या चिंता करेगा। पर मैं उस मनुष्य के समान प्रार्थना करता रहा जो यीशु से कहता था, ''मेरे अविश्वास का उपाय कर।'' (मरकुस ९:२४) जब आप का विश्वास कमजोर हो तो यह एक अच्छी प्रार्थना है जिसे आप कह सकते हैं, ''प्रभु मैं मानता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर'' − मेरे अविश्वास का उपाय कर और मेरे विश्वास को मजबूत बना। इस तरह मैंने उन आठ समस्याओं के लिये प्रार्थना की।

और एक दिन परमेश्वर ने मेरी प्रार्थनाओं का उत्तर दिया। वे समस्याएं जो असंभव प्रतीत होती थी वे एक एक करके सुलझने लगी। एक समस्या जिस पर मैं पंद्रह साल से प्रार्थना कर रहा था वह पिछले रविवार सुलझी! कैसा आश्चर्य कर्म है! परमेश्वर की महिमा हो जिससे सब आशीषें बहती है! एक के बाद एक आठों समस्यायें जिनका मैंने जिक्र किया वे सब सुलझती गयीं। अंतिम समस्या भी जब मैं यह संदेश लिखने बैठा तब सुलझ गयी! यह सचमुच में एक बड़ी समस्या थी। कई महिनों से मेरे मन पर इसका बोझ था! पर जब परमेश्वर ने इसका उत्तर दिया तो यह आसान प्रतीत हुई! मेरे मन पर से बोझ उठा लिया गया और परमेश्वर ने इतनी सहजता से उसका उत्तर दिया कि मुझे यह मूर्खता प्रतीत हुई कि मैंने इस पर कितना जोर दे रखा था!

हे मेरी आत्मा, आ, तेरी प्रार्थना तैयार है,
   यीशु प्रार्थना का उत्तर देना पसंद करते हैं;
उन्होंने ही कहा है तुमसे कि प्रार्थना करो,
   इसलिये वह तुम्हारा इंकार नहीं करेंगे,
इसलिये वह तुम्हारा इंकार नहीं करेंगे।

तुम एक राजा के पास आ रहे हो;
   अपने साथ तुम बड़ी विनती लाये हो;
उसका अनुग्रह और सामर्थ इतनी है,
   कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता,
कि कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता!
   (''हे मेरी आत्मा, आ, तेरी प्रार्थना तैयार है'' जौन न्यूटन, १७२५−१८०७)

मेरा मन खुशी से झूम उठता है जब मैं देखता हूं कि परमेश्वर ने किस तरह से मेरी प्रार्थना का उत्तर दे दिया! मेरा मन प्रफुल्लित हो उठता है जब मैं परमेश्वर को अपनी उत्तरित प्रार्थना का धन्यवाद देता हूं!

''सो जब तुम बुरे होकर, अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों न देगा?'' (मत्ती ७:११)

उसका अनुग्रह और सामर्थ इतनी है,
   कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता,
कि कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता!

हैल्लूयाह! हैल्लूयाह! हैल्लूयाह! परमेश्वर को महिमा मिले! परमेश्वर को प्रशंसा मिले! परमेश्वर को तारिफ मिले! वह प्रार्थना का उत्तर देता है! (ताली बजाये)

हमे इस साल प्रार्थनाओं के कुछ उल्लेखनीय उत्तर मिले। हमने अस्सी साल की महिलाओं का परिवर्तन देखा है। हमने देखा कुछ ही दिनों में बारह नये लोग परिवर्तित हुये। हमने देखा जब ईस्टर पर्व पर डॉ रसमुस्सेन ने प्रचार किया तब राबर्ट वैंग परिवर्तित हुये। फिर दुष्टात्मा की जकड़न से वूडी छुड़ाये गये − अनुग्रह का एक अदभुत आश्चर्यकर्म! उसके बाद जैसी जैकामिटजीन! उसने मेरी तरफ गुस्सैल आंखों से देखा था जब उसे पता चला कि मैं ट्रंप को पसंद करता हूं। पर जब कैगन उसे पूछताछ कक्ष में प्रार्थना द्वारा प्रायश्चित पर लाये तब उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे! अनूठी बात! उसके जीवन में केवल परमेश्वर यह काम कर सकता था! वैलेन्टीन हैरेरा को कुछ अच्छी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी! परंतु परमेश्वर मुझे बता रहे थे कि उसकी बचाये जाने की उम्मीद है। और उसने पापों से मुक्ति पायी! अनूठी बात! केवल परमेश्वर यह काम कर सकता था! फिर मैंने बहुत अधिक क्रिश्चियंस को सुसमाचार सुनाया। मैंने संक्षेप में सुसमाचार का वर्णन किया। यह मेरे लिये अचरज भरी बात थी कि जब मुझे पता चला कि टौम जिया ने भी पापों से मुक्ति पायी! मैं मिसिस जबालगा के मन परिवर्तन के बारे में भी बताना भूल गया जब जौन कैगन ने उनसे सहजता से यीशु पर विश्वास रखने को कहा − वह सहमत हो गयी – ३५ सालों की उलझन और संशय के बाद उन्होंने अपने पापों से मुक्ति पा ली! अनूठी बात! करने वाले केवल परमेश्वर! इस साल लगभग १७ लोग परिवर्तित हुये − और अभी तो आधा ही साल बीता है! (ताली बजाये)

मेरे प्रिय मित्रों परमेश्वर, आश्चर्यकर्म का परमेश्वर है! वह हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देता है! वह भली चीजें उन्हें देता है जो उसके लिये मांगते है! प्रिय भाई और बहिनों, हर आराधना में परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना कीजिये। हर बार जब तुम प्रार्थना करो परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना कीजिये। चायनीज चर्च के मेरे पास्टर डॉ तिमोथी लिन थे (१९११−२००९) वह अक्सर चर्च में परमेश्वर की उपस्थिति के लिये परमेश्वर से प्रार्थना करने की आवश्यकता पर बल देते थे। डॉ लिन का कहना था,

         प्रार्थना का साधारण उददेश्य परमेश्वर से उनके अनुग्रह द्वारा हमें आशीषित किया जाना मांगना है, बीमारों की चंगाई मांगनी है, कुचले हुये को विश्राम देना मांगना है, जरूरतमंद को मदद और परेशानी में पड़े हुये को उससे छुड़ाना, अविश्वासी को विश्वास में सहायता मिले और विश्वासी बढ़े, ऐसा मांगना है........ ये सब विनतियां लक्षणों से बचाव की ओर संकेत करती है बजाय समस्या की जड़ की ओर। हमारे प्रभु ने ........हमें समस्या की जड से छुटकारा दिया है − उसकी उपस्थिति हमारे बीच में बनाये जाने के द्वारा!
         उसकी उपस्थिति से, सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है, वह अंधेरों को रोशनी में तब्दील कर देता है, सारी आपदायें संपत्ति में बदल जाती है........ प्रभु का धन्यवाद हो! उसका वायदा है कि वह हमारी प्रार्थना सुनेगा और हमारे साथ बना रहेगा........ प्रार्थना का उददेश्य परमेश्वर की हमारी साथ उपस्थिति बनी होना है। (तिमोथी लिन, पी एच डी, दि सीक्रेट ऑफ चर्च ग्रोथ, एफ सी बी सी, १९९२, पेज १०८,१०९)

इसलिये मैं आप से कहता हूं कि जब भी आप प्रार्थना करो हमारे चर्च में परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना करो। जब आप सुबह प्रार्थना करें तो हमारे बीच परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना करें। हमारे बीच भोजन से पहले धन्यवाद देने के लिये आप जो प्रार्थना मांगते हैं उसमें भी कुछ शब्द उसकी उपस्थिति के लिये मांगे। जब आप मेरे लिये प्रार्थना मांगते हैं तो मेरे प्रचार के मध्य परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्थना मांगे। जब मैं अपने घर के आफिस में संदेश लिखता हूं तब भी मेरे लिये प्रार्थना कीजिये। जब आप कटनी के समय के लिये प्रार्थना करते हैं तो प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर की उपस्थिति हमारे मध्य में हो। बिना उसकी उपस्थिति के हमारा सुसमाचार प्रचार करना कोई फल उत्पन्न नहीं करेगा। जब आप दुनिया भर में फैले हमारे इंटरनेट मिशन के लिये प्रार्थना करते हैं तो उन लोगों के लिये प्रार्थना कीजिये जो इन संदेशों को पढ़ते हैं, इन्हें प्रचार करते हैं, इनके विडियोज देखते हैं। जब हम सुसमाचार प्रचार के लिये जाते हैं तो प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर की उपस्थिति हमारे साथ बनी रहे। जब आप मि ग्रिफिथ के एकल गान और मंडली के गान के लिये प्रार्थना करते हैं तो प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर उन गीतों में उपस्थित हो। परमेश्वर की उपस्थिति हमारी प्रार्थना सभाओं में हो। परमेश्वर की उपस्थिति हमारे चर्च के ''भटके बच्चों'' के हृदय तोड़ने में हो ताकि वे यीशु के पास लौट आयें। पर यही मत ठहरिये − बल्कि प्रार्थना करते रहिये कि जो नये लोग यहां चर्च में आ रहे हैं वे मन फिरा सकें। नये लोगों के नाम सीखिये − और परमेश्वर की उपस्थिति उनके साथ हो कि वे − मसीह को जानें और उन्हें मसीहा के पास खींच कर ला सकें। परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्थना कीजिये कि वह दुष्ट और शैतानों को बांध सके। आराधना के बाद पूछताछ कक्ष में होने वाली बात चीत के लिये प्रार्थना कीजिये। बीमारी को चंगा करने के लिये जैसे मिसिस रूप और मेरी बीमारी के लिये परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्थना कीजिये। चर्च में होने वाली हर गतिविधि के लिये परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्थना कीजिये। जब जौन कैगन और नोहा सांग फौल हार्वेस्ट के समय प्रचार करते हैं तब उनके साथ परमेश्वर की उपस्थिति रहे ऐसी विनती कीजिये। जब मैं बोलता हूं तब मेरे साथ परमेश्वर की उपस्थिति के लिये प्रार्थना कीजिये। जब डॉ चान बोलते हैं तब सदैव परमेश्वर की उपस्थिति उनके साथ बनी रहे ऐसी प्रार्थना कीजिये। हठी मित्र की कहानी में यीशु कहते हैं,

''सो जब तुम बुरे होकर अपने लड़के बालों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा'' (लूका ११:१३)

हमें निरंतर परमेश्वर और पवित्र आत्मा की उपस्थिति हमारे साथ बनी रहे ऐसा मांगना चाहिये। आत्मिक जाग्रति में परमेश्वर की महिमा प्रगट हो हमें ऐसी प्रार्थना मांगना चाहिये। हर समय जब आप प्रार्थना करें तो आत्मिक जाग्रति भेजने के लिये प्रार्थना करें! हां − हर समय! उसकी उपस्थिति हमारे मध्य में हो हमारे मन की ऐसी गहन इच्छा से आत्मिक जाग्रति आती है। हमें सदा हबक्कूक की प्रार्थना करनी चाहिये।

''हे यहोवा, मैं तेरी कीर्ति सुन कर डर गया। हे यहोवा, वर्तमान युग में अपने काम को पूरा कर; इसी युग में तू उसको प्रकट कर; क्रोध करते हुए भी दया करना स्मरण कर'' (हबक्कूक ३:२)

''हे प्रभु अपने कार्य को पुर्नजीवित कर'' मैं इस प्राचीन गीत को बहुत पसंद करता हूं इसके बोल इस प्रकार हैं।

आशीषों की बारिश
   होगी आशीषों की बारिश;
दया की बूंदे टपकती
   बारिश आशीषों की भेज
(''होगी आशीषों की बारिश'' डेनियल डब्ल्यू विटल, १८४०−१९०१)

''आशीषों की बूंदे'' वे १७ या १८ आत्मायें होंगी जो इस साल उद्वार प्राप्त करेंगी। ''आशीषों की बारिश'' तब होती है जब परमेश्वर पूरी सामर्थ के साथ आत्मिक जाग्रति को भेजता है।

आत्मिक जाग्रति तब होती है जब परमेश्वर इसे भेजता है। चर्च भली प्रकार से चल सकता है। हम आत्माओं को उद्वार पाता देख सकते हैं। हमारे मध्य परमेश्वर की उपस्थिति होती है। आत्मिक जागरण के समय बहुत गहनता विधमान होती है। प्रार्थनायें अचानक सामर्थशाली हो उठती हैं। संदेश बहुत अधिक सामर्थशाली हो उठते हैं। पाप का बहुत गहरा बोध उपस्थित होता है। हर आराधना एक सामर्थशाली पूछताछ कक्ष बन जाती है। पाप स्वीकारते समय लोगों के आंसू बह निकलते हैं। यहां तक कि जो पहले उद्वार पा चुके होते हैं − वे भी अपने पाप सबके सामने स्वीकारते हैं। भटके हुये लोगों ने जो सुसमाचार पहले सुन रखा था वह अब उन्हें नया संदेश लगता है वह जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं समझा था।

आत्मिक जाग्रति बहुधा तब आती है जब चर्च में कुछ लोगों को लगता है कि कुछ ओर चीजों की आवश्यकता है। वे चर्च के नित्य नियम से संतुष्ट नहीं होते हैं। वे परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वह आश्चर्यचकित रूप से उनके मध्य प्रगट होवे। मसीही जन यह महसूस करने लगते हैं कि वे जरूरत से अधिक ठंडे हैं। वे अपने सांसारिक होने को स्वीकार करते हैं। वे उनके मनों में अपने पाप को मानते हैं। वे अपने पाप लोगों के मध्य में स्वीकार करते हैं। वे परमेश्वर के सामने रोते हैं कि उन्हें पापों से क्षमा मिले और उन्हें फिर से नया बनाया जाये। परमेश्वर स्वयं उस चर्च को उभारता है जाकि वह चर्च प्रेरितों की पुस्तक में वर्णित चर्च के समान हो जाये।

यशायाह को एक सामर्थशाली प्रार्थना आत्मिक जागरण के लिये दी गयी। उसने प्रार्थना की,

''भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे।'' (यशायाह ६४:१)

आशा करता हूं कि आप यह प्रार्थना याद करेंगे और जब आप आत्मिक जाग्रति आने के लिये प्रार्थना करें तो वास्तव में आप इन्हीं शब्दों का प्रयोग करें।

मार्टिन ल्योड जोंस ने यशायाह ६४:१ को अंतत: आत्मिक जागरण के लिये प्रार्थना कहा था,

’''भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे − और मुझे यह (कहते) हुये झिझक नहीं है कि यही अंतत: आत्मिक जागरण के लिये प्रार्थना कहलाती है। बेशक यह सही है कि हम परमेश्वर से हमें आशीषित करने के लिये प्रार्थना करें........ और हम पर दयालू होवे, ऐसी नित्य प्रार्थना हमारी होना चाहिये। पर यह प्रार्थना तो चर्च में की जाने वाली प्रार्थना से भी बढ़कर है इसके शब्द बेहद ओजस्वी खास और विशिष्ट है जो परमेश्वर को आत्मिक जागरण भेजने के लिये आमंत्रित करते हैं........ ‘सचमुच’ वह कहता है, ‘भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए’ यह एक प्रचंड प्रक्रिया है परमेश्वर (हमारे) मध्य में उपस्थित होता है।'' (मार्टिन ल्योड जोंस, एम डी, रिवाइवल, क्रासवे बुक्स, १९९२, पेज ३०५−३०७)

अक्सर जो छोटी कोरस हम गाते हैं यशायाह उसमें वर्णन निहित है,

जीवित परमेश्वर का आत्मा नीचे उतर आइये।
   नीचे उतर आइये, हम प्रार्थना करते हैं।
नीचे उतर आइये, हम प्रार्थना करते हैं।
   हमें पिघलाइये, तोड़िये, मोड़िये, झुकाइये
जीवित परमेश्वर का आत्मा,
   नीचे उतर आइये, हम प्रार्थना करते हैं।
      (''जीवित परमेश्वर का आत्मा'' डेनियल ईवरसन, १८९९−१९७७;
         डॉ हिमर्स द्वारा रूपांतरित)

जब आप आत्मिक जाग्रति के लिये कोरस गाये तो वह प्रार्थना करें जो यशायाह ६४:१ में कही गयी है,

''भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए और पहाड़ तेरे साम्हने कांप उठे।'' (यशायाह ६४:१)

जब परमेश्वर हमारे मध्य आकाश को फाड़कर उतर आए उतर आयें तब अहंकार के पहाड़ पाप और विद्रोह के पहाड़ अविश्वास के पहाड़ − सब पिघल जायेंगे।

इसलिये चर्च में हम जो कुछ करते हैं सब में परमेश्वर की उपस्थिति होना चाहिये। पर हमको एक विशाल आत्मिक जाग्रति आवे और परमेश्वर के महान आत्मा के उड़ेले जाने के लिये प्रार्थना करना चाहिये। जब आत्मिक जाग्रति आती है तो यह अप्रत्याशित आती है। मैंने अपने जीवन में तीन आत्मिक जाग्रति देखी है। पहली और तीसरी आत्मिक जाग्रति में हमने एकाएक पचित्र आत्मा का अवतरण देखा और हम सब अचरज में भर गये और पवित्र आत्मा से भर गये! अगर आप ने आत्मिक जागरण का स्वाद चखा है तो फिर जीवन पर्यंत इसे याद रखेंगे। हमने बीस सालों मे जो कार्य अपने चर्च में नहीं देखा वह हम अब एक माह में देखेंगे। मैंने अपनी आंखों से देखा है कि जब परमेश्वर आसमान फाड़ कर उतर आता है तो कैसा कार्य होता है। इस संदेश को घर ले जाइये और प्रार्थना के साथ इसे पढ़िये। जो काम हम करते है उनमें परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्धना कीजिये। फिर आत्मिक जाग्रति के बड़े रूप में उड़ेले जाने के लिये प्रार्थना कीजिये।

जो कुछ करे सब बातों में परमेश्वर की उपस्थिति की प्रार्थना करें पर आत्मिक जाग्रति के बड़े रूप में उड़ेले जाने के लिये भी प्रार्थना कीजिये। यीशु ने कहा था,

''सो जब तुम बुरे होकर, अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों न देगा?'' (मत्ती ७:११)

''प्रभु आत्मिक जागरण भेजिये'' इसे गाइये!

''प्रभु आत्मिक जागरण भेजिये,
   प्रभु आत्मिक जागरण भेजिये,
प्रभु आत्मिक जागरण भेजिये,
   आपकी ओर ये यह उतर आये।
(''प्रभु आत्मिक जागरण भेजिये'' डॉ बी बी मैकिने, १८८६−१९५२;
   डॉ हिमर्स द्वारा रूपांतरित)

आज सभी उद्वार मिलने के लिये प्रार्थना करें (सभी प्रार्थना करें)

हे मेरी आत्मा, आ, तेरी प्रार्थना तैयार है,
   यीशु प्रार्थना का उत्तर देना पसंद करते हैं;
उन्होंने ही कहा है तुमसे कि प्रार्थना करो,
   इसलिये वह तुम्हारा इंकार नहीं करेंगे,
इसलिये वह तुम्हारा इंकार नहीं करेंगे।

तुम एक राजा के पास आ रहे हो;
   अपने साथ तुम बड़ी विनती लाये हो;
उसका अनुग्रह और सामर्थ इतनी है,
   कि कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता,
कि कोई भी ज्यादा मांग ही नहीं सकता!

आज संध्या आप पाप से मुक्ति पा सकते हैं। पवित्र आत्मा आप के पाप को जाग्रत करेगा। पवित्र आत्मा आप के पाप को बेशकीमती लहू से धोकर मसीह के पास लायेगा। अगर आप उद्वार मिलने के लिये बातें करना चाहते हैं तो आडिटोरियम के पिछले हिस्से में डॉ कैगन और जौन कैगन का अनुसरण कीजिये। वे आपको एक शांत कक्ष में ले जायेंगे और हम आप के साथ प्रार्थना करेंगे। आमीन।


अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स आप से सुनना चाहेंगे। जब आप डॉ हिमर्स को पत्र लिखें तो आप को यह बताना आवश्यक होगा कि आप किस देश से हैं अन्यथा वह आप की ई मेल का उत्तर नहीं दे पायेंगे। अगर इस संदेश ने आपको आशीषित किया है तो डॉ हिमर्स को इस पते पर ई मेल भेजिये उन्हे आप किस देश से हैं लिखना न भूलें।। डॉ हिमर्स को इस पते पर rlhymersjr@sbcglobal.net (यहां क्लिक कीजिये) ई मेल भेज सकते हैं। आप डॉ हिमर्स को किसी भी भाषा में ई मेल भेज सकते हैं पर अंगेजी भाषा में भेजना उत्तम होगा। अगर डॉ हिमर्स को डाक द्वारा पत्र भेजना चाहते हैं तो उनका पता इस प्रकार है पी ओ बाक्स १५३०८‚ लॉस ऐंजील्स‚ केलीफोर्निया ९००१५। आप उन्हें इस नंबर पर टेलीफोन भी कर सकते हैं (८१८) ३५२ − ०४५२।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा धर्मशास्त्र पढ़ा गया: मत्ती ७:७−११
संदेश के पूर्व बैंजमिन किंकेड ग्रिफिथ ने एकल गान गाया गया:
(''हे मेरी आत्मा, आ, तेरी प्रार्थना तैयार है'') जौन न्यूटन, १७२५−१८०७)