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पवित्र जन्म के प्रमाण

PROOFS OF THE VIRGIN BIRTH
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, १३ दिसंबर, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में किया गया प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, December 13, 2015

''सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।'' (यशायाह ७:१४)


मसीह के पवित्र जन्म के संबंध में की गयी यह बिल्कुल स्पष्ट भविष्यवाणी है − यह पुराने नियम के धर्मशास्त्रों में दी गयी है। कुछ लोगों को इस महान मसीही शिक्षा से तकलीफ है। लेकिन उनकी वास्तविक समस्या यह है कि वे किसी भी प्रकार के आश्चर्यकर्म में विश्वास नहीं करते हैं। लौकिक मानवतावाद ने उनके भीतर से आश्चर्यकर्म घटने की संभावनाओं को खत्म कर दिया है - और उनके भीतर से परमेश्वर में विश्वास होने को भी खत्म कर दिया है!

हमने कुछ समय पूर्व हमारे चर्च में बेन स्टीन की पिक्चर ''एक्सपेल्ड'' दिखाई। उस फिल्म का सबसे रूचिकर मेरे लिये वह था जिसमें डॉ रिचर्ड डाउकिंग्स के साथ मि. बेन का इंटरव्यू बताया गया है। डॉ रिचर्ड डाउकिंग्स हमारे समय के सर्वश्रेष्ठ विकासवादी थे। वह विकासवादी प्रकिया के लिये बहुत लंबे समय के आधार पर परीक्षण करते थे। किंतु सभी विकासवादियों के समान वे भी इस द्वंद्व का सामना कर रहे थे कि जीवन का प्रारंभ कैसे समझाया जाये। मि. स्टेन इस प्रश्न के उपर अड़े रहे। एक क्लोज अप में आपने देखा होगा कि डाउकिंग्स के होठ कांपे थे। मि. स्टेन ने उन्हें इस प्रश्न पर फिर कुरेदा ''प्रथम बार जीवन का आरंभ कहां से हुआ?'' डाउकिंग्स के माथे पर पसीने की बूंदे छलछला आई। आखिरकार डाउकिंग्स ने उत्तर दिया कि किसी अन्य ग्रह से ऐलियंस ने आकर पृथ्वी पर जीवन के ''बीज'' बोये। यह सुनते ही मि. स्टेन उछल पड़े। ''आप का कहने का तात्पर्य यह है कि दूसरे ग्रह के एलियंस ने पृथ्वी पर आकर जीवन का प्रारंभ किया?'' मैं सोचता हूं कि डाउकिंग्स भूल गये कि उन पर यह फिल्माया जा रहा है जब उन्होंने कहा, ''हां'' आखिरकार उन्होंने मि. स्टेन से औपचारिक रूप से निवेदन किया कि वह फिल्म में से वह भाग निकाल दें। आखिरकार उन्होंने मि. स्टेन के उपर कानूनी रूप से दावा किया कि वह फिल्म में से वह भाग निकाल दें। पर अनुबन्ध पत्र पर उनके हस्ताक्षर होने के कारण वह केस नहीं जीत पाये।

कितना हास्यास्पद है! अंतरिक्ष के बौने हमारे ग्रह पर जीवन लेकर आये! यह बच्चों के लिये विज्ञान की कोई काल्पनिक कहानी लगती है! अगर डाउकिंग्स का यह बेतुका विचार सही भी हो तो यह फिर भी स्पष्ट नहीं करता है कि दूसरे ग्रहों पर जीवन कहां से आया! तो हम देख सकते हैं कि मि. स्टेन की फिल्म में लौकिक मानवतावादी हमारे ग्रह पर जीवन के निर्माण के आश्चर्यकर्म की उपेक्षा करते हुये कितने विचित्र और विकृत रूप तक जा सकते हैं।

सी एस लेविस ने कहा कि, ''आश्चर्यकर्म शब्द के प्रयोग से मेरा तात्पर्य लौकिक के साथ अलौकिक का मेल होना होता है।'' फिर से, सी एस लेविस ने कहा, ''अगर हम परमेश्वर को मानते हैं, तो हमें आश्चर्यकर्म को मानना चाहिये? सचमुच, सचमुच'' (मिरेकल्स, पेज १०५‚ ९)

सी एस लेविस का तात्पर्य था कि अगर परमेश्वर हैं तो आश्चर्यकर्म भी संभव हैं। आप को उन छोटे हरित बौनों की आवश्यकता नहीं कि वे आकर पृथ्वी पर जीवन को उत्पन्न् करें। अगर परमेश्वर है तो (वह कुछ नहीं में से) कुछ उत्पन्न् करने की क्षमता रखता है। यीशु ने कहा कि, ''परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है'' (मरकुस १०:२७) ।

मेरी मां का परिवर्तन ८० की उम्र में हुआ था। थोड़ा सा भी ऐसा कोई कारण नहीं लगता था कि वह परिवर्तित होंगी। बिल्कुल भी नहीं लगता था। मैं इस पूरी प्रकिया में जा सकता हूं और आपको बता सकता हूं कि क्यों उनका परिवर्तन एक आश्चर्यकर्म था पर आज रात मैं यह नहीं करूंगा। मैं उस समय के आश्चर्यकर्म की चर्चा करूंगा जो उसके पहले घटित हुआ। मैं अपने परिवार के साथ न्यूयार्क शहर में था। मैं प्रार्थना कर रहा था, और अचानक प्रार्थना के मध्य में, मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि मेरी मां का नया जन्म हो सकता है। मैंने डॉ कैगन को फोन किया और उनसे कहा कि वह जाकर प्रार्थना करें ताकि मां को मसीह के पास लाया जा सके। वह जाने में डर रहे थे क्योंकि मां पहले भी उन पर चीख चुकी थी जब वह उनके लिये प्रार्थना करने गये थे। परंतु मैंने उन पर जोर डाला कि परमेश्वर ने मुझसे कहा है कि अब मां बचायी जा सकती है। तो वह कार से उनके यहां पास पहुंचे, और बहुत आसानी से, उन्हें मसीह के पास ले आये − और मां का पूरा जीवन परिवर्तित हो गया। हां यह एक चमत्कार था। पर यह वह नहीं है जिस पर मैं जोर डालना चाहता हूं। मैंने अचानक कैसे जाना कि वह बचायी जा सकती है? मैं तो उनसे तीन हजार मील दूर था। मैं ने उनसे फोन पर भी बात नहीं की। पर मैं जानता था। कैसे? यही तो आश्चर्यकर्म था। यह सच में इतनी साधारण बात थी।

मेरी मां स्वयं आश्चर्यकर्म में विश्वास नहीं करती थी। वह एक लौकिक मानवतावादी और विकासवादी थी। यहीं से तीसरा चमत्कार आया। प्रथम तो परमेश्वर ने मुझसे कहा कि वह बचाई जायेगी। दूसरा वह बचाई गई। तीसरा जो कई रूपों में है, महान है − कि कम से कम यह मेरे लिये तो चमत्कार है।

उनके परिवर्तन के कुछ महिनो बाद, मैं उन्हें इलियाना और लड़कों को हमारे चचेरे भाई के यहां ले गया। उनमें से किसी की पत्नी ने भी कुछ शराब पी रखी थी। वह जानती थी कि मैं प्रचारक हूं, तो ठीक मेरे सामने बैठ गयी, और मुझसे प्रश्न पूछना आरंभ किया। ''ये सारे चमत्कार कैसे हुये? कैसे उन्होंने कुछ मछलियां लेकर ५००० लोगों को खिलाया? वह मर गये थे तो जीवित कैसे हुए? लाल समुद्र दो भाग कैसे हुआ? हा हा हा!''

मैंने एक भी शब्द नहीं कहा मैं मेरे भाई के घर में लडाई आरंभ करना नहीं चाहता था। मेरी मां मेरे पास बैठी हुई थीं। अचानक मैंने देखा मेरी मां की आंखों में चमक पैदा हुई। कोई भी मेरी मां से बात नहीं करता था जब उनकी आंखे इस तरह चमकती थी! उसने शराब पी हुई महिला की तरफ देखा, और तेज स्वर में बोल उठी, ''क्या तुम परमेश्वर में विश्वास करती हो, नहीं करती क्या?'' वह स्त्री एकदम पीछे हट गयी। उसके चेहरे से शर्म टपक रही थी। वह धीमे स्वर में बोलने लगी, ''हां करती हूं।'' मां उसे घूरती रही और पहले से भी अधिक तेज आवाज में बोली, ''तो तुम्हारी समस्या क्या है? '' घर में पूरी तरह खामोशी छा गई। आश्चर्यकर्म के उपर बहस का अंत इस तरह से हुआ!

देखिये, अगर आप परमेश्वर में विश्वास करते हैं − तो जैसा सी एस लेविस ने कहा − कि आश्चर्यकर्मो के विरोध में कोई तर्क नहीं चलता! जैसा यीशु ने कहा था, ''परमेश्वर के लिये कुछ असंभव नहीं है।'' और इसीलिये मसीह का जन्म पवित्र है। मैं आपको मसीह के पवित्र जन्म के दो ''प्रमाण'' देना चाहता हूं। पर अगर आप परमेश्वर में विश्वास रखते हैं तो ही इन ''प्रमाणों'' से आप सहमत होंगे। जो परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास करने से इंकार करते हैं वे इन प्रमाणों से सहमत नहीं हो सकेंगे।

१. मसीह का पवित्र जन्म पुराने नियम में प्रमाणित किया गया है।

मसीह के पवित्र जन्म की पहली भविष्यवाणी अदन के बगीचे में हुईं प्रथम आदि माता पिता के परमेश्वर के विरूद्व पाप करने के थोड़े ही देर बाद। उन्होंने शैतान की बात सुनी और पाप किया तब परमेश्वर ने शैतान से कहा,

''और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।'' (उत्पत्ति ३:१५)

यहां परमेश्वर ने मसीह के पवित्र जन्म की प्रथम भविष्यवाणी की। स्त्री का बीज सर्प का सिर कुचल देगा। डॉ क्लाउस वेस्टरमन (१९०९−२००२) ने कहा था, ''जो पुराने धर्मशास्त्र के लूथरन विद्वान थे कि इरिनियस के समय से ( १३०−२०२) मसीही परंपरा ने पाठ के इस हिस्से को मसीह (और मरियम) के उपर से भविष्यवाणी समझा है। ‘स्त्री का बीज’ एक व्यक्ति विशेष वंशज के लिये कहता है जो (मसीह) हैं और जिन्होंने सर्प का सिर (शैतान) को कुचला था.......यह वर्णन इरिनियस के समय से एक्सीजेसिस के कैथोलिक और इवेंजलीकल इतिहास में पाया जाता है। (क्लाउस वेस्टरमन, पी एच डी, उत्पत्ति १−११: ए कमेंटरी, आग्सबर्ग, १९८४, पेज २६०)

डॉ हैनरी एम मौरिस ने कहा, ''स्त्री का बीज केवल भविष्य में हवा के वंशज के लिये संदर्भ हो सकता है वह वंशज जिसका कोई मानवीय पिता नहीं था। जैविक रूप से एक स्त्री कोई बीज उत्पन्न नहीं कर सकती.....बाइबल के उपयोग में हमेशा आदमी के बीज के विषय में कहा गया है। इसलिये प्रतीज्ञा किये गये बीज को आश्चर्यजनक रूप से (मरियम के) गर्भ में डाला जाना था। इस तरह वह (मसीह) पापी स्वभाव को नहीं ग्रहण करेगा जो मसीहा बनने के लिये आवश्यक था जबकि आदम के प्रत्येक पुत्र में वह पाप का स्वभाव होने से वह मसीहा बनने के योग्य नहीं होते। यह भविष्यवाणी इस तरह निश्चित रूप से भविष्य में होने वाले मसीह के पवित्र जन्म के लिये संकेत देती है।'' (हैनरी एम मोरिस, पी एच डी, दि डिफेंडर स्टडी बाइबल, वल्र्ड पब्लिशिंग, १९९५, पेज१३; उत्पत्ति ३:१५ पर व्याख्या)

हमारा प्रारंभ का पद पुराने नियम से लिया गया है। यशायाह भविष्यवक्ता ने कहा था,

''सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।'' (यशायाह ७:१४)

यहां अंग्रेजी शब्द ''वर्जिन'' का अनुवाद इब्रानी शब्द ''अलमाह'' से लिया गया है। यह पुराने नियम में सात बार कुंआरी कन्या के लिये प्रयुक्त किया गया है। एडवर्ड इ हिंस्टन ने कहा कि, ''इसका (प्रयोग) सदैव कुंआरी के लिये ही किया जाता है। बाइबल में अलमाह का प्रयोग कभी भी विवाहित स्त्री के लिये नहीं किया गया है, परंतु हमेशा अविवाहित के लिये ही किया जाता है।'' (एडवर्ड इ हिंस्टन, ''आयजाया इमानुएल,'' ग्रैस जर्नल १०, फॉल, १९६९, पेज ७) महान विद्वान जे ग्रेशम मेचन ने कहा, ''पुराने नियम में अलमाह शब्द के प्रयोग के सात बार प्रयोग का कोई संयोग नहीं है कि जहां यह शब्द कुंआरी कन्या के लिये प्रयुक्त किया गया हो।'' (जे ग्रेशम मेचन, पी एच डी, दि वर्जिन बर्थ आँफ क्राईस्ट, बेकर बुक हाउस, १९६५, पेज २८८)

सबसे बड़ा प्रमाण कि अलमाह का अर्थ वर्जिन है यह मसीह से २०० साल पूर्व के रब्बियों ने बताया था। पूरे विश्व के लगभग सत्तर महान रब्बियों ने पुराने नियम की इब्रानी बाइबल को यूनानी भाषा में अनुवादित किया। यह भाषा रोमी संसार में यहूदियों द्वारा बोली जाती थी। मसीह से २०० साल पूर्व ये रब्बी इब्री भाषा के महान विद्वान कहलाते थे। इन्हीं रब्बी विद्वानों ने यशायाह में इब्री शब्द अलमाह को यूनानी शब्द ''पार्थीनोज'' से अनुवादित किया − जिसका संकेत केवल कुंआरी की तरफ हो सकता है − जिसने कभी पुरूष के साथ सेक्स नहीं किया हो। ७० रब्बियों ने पुराने नियम को यूनानी में अनुवादित किया। इसे सप्तुआजिंट कहा जाता है डॉ बेन विथरींगटन ३ ने कहा था कि अगर ''अलमाह'' का अर्थ ''वर्जिन'' नहीं है ''तो यह जान पाना कठिन है कि अनुवादक (रब्बियों) ने (सप्तुआजिंट) में 'पार्थीनोज' का प्रयोग बराबरी के के शब्द के लिये क्यों किया'' (बेन विथरींगटन ३, पी एच डी, ''दि बर्थ आँफ जीजस,'' डिक्शनरी आँफ जीजस एंड दि गास्पल, इंटर वर्सिटी प्रेस, १९९२, पेज ६४)

ये सभी प्रमाण बताते हैं कि रब्बी सही थे जब उन्होंने यशायाह ७:१४ का अनुवाद इस तरह किया था

''सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।'' (यशायाह ७:१४)

इतिहास में एकमात्र महिला जो कुंआरी होकर, अलौकिक सामर्थ से गर्भवती हुई वह मसीह की मां, मरियम थी।

२. दूसरा, मसीह का पवित्र जन्म नये नियम के द्वारा प्रमाणित किया गया।

अपनी बाइबल में मत्ती १:२३ निकाल लीजिये।

''कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ है परमेश्वर हमारे साथ''। (मत्ती १:२३)

युसुफ की सगाई मरियम के साथ हो चुकी थी। उनके विवाह होने से पहले ''वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई।'' (मत्ती १:१८) स्वाभाविक था कि युसुफ ने सोचा होगा कि मरियम ने व्यभिचार किया होगा। वह उसे छोड़ने और उससे विवाह न करने के द्वारा उसे बदनाम नहीं करना चाहता था। वह इस समस्या के बारे मे सोचता हुआ सो गया। प्रभु का दूत उसे सपने में दिखाई दिया और उससे कहा ''तू अपनी पत्नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर (से) है।'' तब स्वर्गदूत ने युसुफ के सामने यशायाह ७:१४ दोहराया,

''कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ है परमेश्वर हमारे साथ''। (मत्ती १:२३)

यद्यपि, पवित्र आत्मा की सामर्थ से मत्ती १:२३ पर सप्तुआजिंट अनुवाद लागू हो गया। इसलिये ''पार्थीनोज'' परमेश्वर द्वारा प्रेरित वचन कहलाया।

मैंने सोचा कि मैं नया नियम पढ़कर जानूंगा कि जो लोग यीशु को अच्छी तरह से जानते थे वे यीशु के पवित्र जन्म के लिये क्या सोचते थे। मैंने एक कागज के उपर उनके विषय में लिखा जो साथ रहते थे और यीशु के लिये क्या सोचते थे।

मैं उनके सौतेले पिता से प्रारंभ हुआ। युसुफ उनके पवित्र जन्म में विश्वास करते थे।

''सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्नी को अपने यहां ले आया। और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उस ने उसका नाम यीशु रखा'' (मत्ती १:२४−२५)

फिर मरियम के बारे में सोचते हैं। युसुफ के समान, वह भी यीशु के पवित्र जन्म में पहले विश्वास नहीं करती थी। उसने कहा था, ''यह क्योंकर होगा मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं?'' (लूका १:३४)

''स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।'' (लूका १:३५)

''क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता।'' (लूका १:३७)

फिर मरियम ने स्वयं पवित्र जन्म के उपर विश्वास किया और बोली, '' देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।''

''इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।'' (लूका १:३५)

तब, स्वयं यीशु ने यह कहा। यीशु स्वयं बोले,

''क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।'' (यूहन्ना ३:१६)

यीशु ने कहा कि वह परमेश्वर के ''एकमात्र पुत्र'' थे। उसके बाद स्वयं परमेश्वर ने कहा। यूहन्ना बपतिस्मादाता ने यीशु को यर्दन नदी में पानी से बपतिस्मा दिया। तब परमेश्वर की वाणी आकाश से सुनाई दी कि, ''यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूं'' (मत्ती ३:१७) तब यूहन्ना बपतिस्मादाता ने कहा, ''मैं ने देखा, और गवाही दी है, कि यही परमेश्वर का पुत्र है (यूहन्ना १:३४) युसुफ, मरियम, यीशु स्वयं, यूहन्ना बपतिस्मादाता, परमेश्वर पिता − सबने गवाही दी कि वह परमेश्वर के पुत्र हैं − यह प्रगट करता है कि वह पवित्र कुंआरी से पैदा हुये।

''इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।'' (लूका १:३५)

मैंने नया नियम पढ़ा। मैंने देखा ''कि दुष्टात्मा चिल्ला रही थी हे परमेश्वर के पुत्र हमारा तुझ से क्या काम? क्या तू समय से पहिले हमें दुख देने यहां आया है?'' हां यहां तक कि दुष्टात्मा भी जानती थी कि यीशु परम पिता परमेश्वर के पुत्र थे! जब यीशु ने अपने शिष्यों से पूछा कि, ''तुम मुझे क्या कहते हो?'' पतरस ने उत्तर दिया, ''तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।'' (मत्ती १६:१६) ऐसा ही शिष्य यूहन्ना के साथ भी हुआ जो सब लोगों में से उन्हें भली भांति जानते थे। शिष्य यूहन्ना ने कहा, ''ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।'' (यूहन्ना २०−३१) यूहन्ना ने फिर कहा, ''इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है।'' (१ यूहन्ना १−३) हां शिष्य यूहन्ना जो यीशु को सवार्धिक रूप से अच्छी तरह जानते थे उन्होंने कहा कि यीशु पवित्र परमात्मा के पुत्र थे। उन्होंने यीशु को ''परमेश्वर के एकमात्र पुत्र'' कहा (यूहन्ना १:१८) जब शिष्य पौलुस परिवर्तित हुये ''वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है।'' (प्रेरितों ९:२०) और ऐसा ही सब शिष्यों ने किया क्योंकि वे उस पवित्र को जानते थे जो पवित्र मरियम से उत्पन्न हुआ था और ''परमेश्वर का पुत्र'' कहलाता था। (लूका १:३५) यीशु के अंतिम शब्द जो क्रूस पर कहे थे वह भी इसे पक्का करते हैं ''यीशु ने (बड़े) शब्द से पुकार कर कहा हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं'' (लूका २३:४६) तब जिस सूबेदार ने उन्हें कीलें ठोकी थी घूटनों के बल गिर गया और कहा, ''सचमुच यह मनुष्य, परमेश्वर का पुत्र था।'' (मरकुस १५:३९)

सिर्फ वे लोग जिन्होंने प्रभु के परमेश्वर पुत्र होने का उपहास उडाया था वे दुष्ट लोग थे जिन्होंने यीशु को क्रूस पर चढाया था। वे वे दुष्ट लोग उसे मार डालने के लिये आतुर थे ''कि वह न केवल सब्त के दिन की विधि को तोड़ता, परन्तु परमेश्वर को अपना पिता कह कर, अपने आप को परमेश्वर के तुल्य ठहराता था'' (यूहन्ना ५:१८) वे उसके उपर चीख रहे थे जब वह क्रूस पर पीडा सह रहे थे, ''यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो क्रूस पर से उतर आ'' (मत्ती २७:४०) अगर वह क्रूस पर से नीचे उतर आते तो ठीक इसके विपरीत हो जाता। इससे यह सिद्व हो जाता कि वह परमेश्वर के पुत्र नहीं थे!

वह पवित्र जन पवित्र कुंआरी से जन्में। वह परमेश्वर के पुत्र स्वर्ग त्याग कर मरियम के गर्भ में आये कि हमारे पापों के लिये क्रूस पर बलिदान देकर दंड चुका सकें। वह हम दीन दशा वाले पापियों के मध्य में रहे और हमारे सारे पापों से हमें शुद्व करने के लिये अपना पवित्र लहू बहाया।

परंतु अभी तक मैंने अपने पद के अंतिम हिस्से पर टिप्पणी नहीं ही है। मैं यशायाह ७:१४ पर बोलूंगा क्योंकि यह सप्तुआजिंट से लिया हुआ अनुवाद है जो मत्ती १:२३ में प्रयुक्त हुआ है,

''कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ है परमेश्वर हमारे साथ''। (मत्ती १:२३)

यह इम्मानुएल का अर्थ है। इसका अर्थ है ''परमेश्वर हमारे साथ है।'' वह पवित्र बालक जो उत्पन्न हुआ है। वह ''परमेश्वर हमारे साथ है।''

मैं जानता हूं कि एक परमेश्वर सदा विद्यमान रहे जब मैं छोटा बालक था, और अपनी दादी के यहां फूलों के बगीचे में छिप जाया करता था। मैं उनसे बाते करता था पर उन्हें जानता नहीं था। मैं सिर्फ इतना जानता था कि एक परमेश्वर है जिसने इन सुंदर फूलों को बनाया! मैं इतना जानता था कि एक परमेश्वर है जब मैं चाहे एरीजोना के रेगिस्तान में खड़ा हूं − जब सूखी मरूभूमि पर पानी की बूंदे गिरती हो − और जब ये बूंदे मिटटी में समाती हो तब सौंधी सुगंध, उठने लगती हो। एक परमेश्वर होना चाहिये जिसने इतना अदभुत संसार बनाया। पर मैं उसे नहीं जानता था। पर मैं जानता था एक परमेश्वर है जब मैं घास पर लेटा हुआ, रो रहा था, पसीने पसीने हो रहा था, उस दिन जब मेरी दादी को दफनाया जा रहा था। मुझे लगा परमेश्वर मेरे पास आये। एक परमेश्वर होना चाहिये। पर मैं उन्हें जानता नहीं था।

पर एक सुबह यीशु मेरे पास आये और मेरी आत्मा को बचा लिया! यही अंतर है! उनका नाम इम्मानुएल है − परमेश्वर हमारे साथ! उनका लहू हमें शुद्व करता है। उनके वचन हमें आराम देते हैं। उनकी उपस्थति हमारे भयों को शांत करती है। यीशु – हमारे इम्मानुएल है − परमेश्वर हमारे साथ है! मुझे चाल्र्स वैस्ली (१७०७−१७८८) का मधुर किसमस कैरोल बहुत अच्छा लगता है!

मसीह, स्वर्ग से अवतरित हुये;
   मसीह, जो सनातन परमेश्वर हैं!
देखो उसे अवतरित होने दो,
   पवित्र मरियम के गर्भ से;
देह धारण की परम प्रधान परमेश्वर ने;
   अवतरित हुआ देवत्व अब,
मनुष्य संग मनुष्य बन रहने में प्रसन्न,
   यीशु, हमारा इम्मानुएल है।
सुनो! दूतगण गाते हैं,
   ''बालक राजा ख्रीस्त की जय''
(''सुनो, दूतगण गाते हैं'' चाल्र्स वैस्ली १७०७−१७८८)

मैं प्रार्थना करता हूं कि आप यीशु पर विश्वास लायें और पाप व दंड से बचें। आप उनके पवित्र लहू से अपने सारे अधर्मो से शुद्व हो जाये। स्वर्गिक पिता, मैं प्रार्थना करता हूं कि कोई आप के पुत्र के पास आये और उनके द्वारा आज रात्रि बचाया जाये। आमीन!


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा धर्मशास्त्र से पढा गया: मत्ती १:१८−२५
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गान गाया गया:
''सुनो, दूतगण गाते हैं'' (चाल्र्स वैस्ली १७०७−१७८८)


रूपरेखा

पवित्र जन्म के प्रमाण

PROOFS OF THE VIRGIN BIRTH

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

''सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानूएल रखेगी।'' (यशायाह ७:१४)

(मरकुस १०:२७)

१. मसीह का पवित्र जन्म पुराने नियम में प्रमाणित किया गया है,
उत्पत्ति ३:१५

२. दूसरा, मसीह का पवित्र जन्म नये नियम के द्वारा प्रमाणित किया गया,
मत्ती १:२३,१८; २४−२५; लूका १:३४‚३५‚३७; यूहन्ना ३:१६;
मत्ती ३:१७; यूहन्ना १:३४; मत्ती १६:१६; यूहन्ना २०:३१;
१ यूहन्ना १:३; यूहन्ना १:१८; प्रेरितों ९:२०; लूका २३:४६;
मरकुस १५:३९; यूहन्ना ५:१८; मत्ती २७:४०