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आपकी संपूर्ण अनैतिकता

YOUR TOTAL DEPRAVITY
(Hindi)

द्वारा डॉ सी एल कैगन
by Dr. C. L. Cagan

रविवार की सुबह, १७ अक्टूबर, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Saturday Evening, October 17, 2015


मनुष्य जाति ''पाप के वश में'' है। बाइबल इसे अनेक बार कहती है। यह कहती है हम ''अपराधों के कारण मरे'' हुए थे (इफिसियों २:५) हम अपने ''अपराधों और पापों के कारण मरे हुए'' हैं (इफिसियों २:१) शिष्य पौलुस ने लिखा था, ''पाप...... जो मुझ में बसा हुआ है'' (रोमियों ७:२०) । हम सब एक भयानक दशा में है। आप भयानक दशा में है।

यह दशा पूर्णता अनैतिकता की दशा कहलाती है। प्रत्येक जन पूर्णत: भ्रष्ट है। आप पूर्णत: भ्रष्ट हैं। आज रात हम देंखेंगे कि भ्रष्टता क्या नहीं है, और इसके बाद देखेंगे कि यह क्या है।

१. पहला, भ्रष्टता क्या नहीं है

पूर्ण भ्रष्टता वह नही है जैसा आप अलग अलग किसी प्रकार के पाप करते हैं। किसी भ्रम में मत रहिये − आप ने कई पाप किये हैं और वे सब भयानक हैं बाइबल कहती है, ''जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का (विरोध) करता है'' (१यूहन्ना ३:४) जब आप परमेश्वर की आज्ञा तोडते हैं, आप पाप करते हैं।

जब परमेश्वर आप को जो करने के लिये मना करते हैं और आप अगर उसे करते हैं तो यह पाप है। बाइबल कहती है, ''तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना (तुम झूठ न बोलना)'' (निर्गमन २०:१६) । आप जानते हैं कि आप को झूठ नहीं बोलना चाहिये, तौभी आप बोलते हैं। आप परमेश्वर के विरूद्व पाप करते हैं। बाइबल कहती है, ''तू चोरी न करना'' (निर्गमन २०:१५) । जब आप चोरी करते हैं तो आप परमेश्वर के विरूद् पाप करते हैं।

जब परमेश्वर आप से कुछ करने को कहते हैं और आप उसे नहीं करते हैं, तो आप पाप करते हैं। यीशु ने कहा था, ''तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख'' (मत्ती २२:३७) । भले ही आप बहुत सालों तक ऐसे रहे जैसे परमेश्वर आप के लिये महत्वपूर्ण ही न हो। जब कभी आप रविवार को चर्च नहीं आये, तब आप ने आज्ञा तोडी है। आप ने पाप किया है।

बाइबल कहती है, ''तू व्यभिचार न करना'' (निर्गमन २०:१४) । यीशु का भी कथन था, ''परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि जो कोई किसी स्त्री पर कुदृष्टि डाले वह अपने मन में उस से व्यभिचार कर चुका'' (मत्ती ५:२८) । जब कभी आप अपने कंप्यूटर पर पोर्नोग्राफी देखते हैं, आप भयानक पाप करते हैं।

बाइबल कहती है, ''तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना'' (निर्गमन २०:१२) वहां ऐसा नहीं कहा गया है कि अगर वे मसीही हैं तो उनका आदर करना, या फिर वे हर बात में सही हो तो उनका आदर करना − केवल उनके आदर करने की बात कही गई है। तो हर बार जब आप यह आज्ञा तोडते हैं तो आप पाप करते हैं। आप में से कोई जन आज रात यहां ऐसे भी होंगे जो अपने पिता या माता से सच में नफरत करते होंगे। यह एक भयानक पाप है।

आपके पापों का एक लंबा, भयानक रिकार्ड है। यह रिकार्ड आपको अंतिम न्याय के दिन दंडित करेगा। बाइबल कहती है हर वह चीज जो आप करते हो, कहते या सोचते हो वह सब परमेश्वर के रिकार्ड में दर्ज हो जाता है − जो परमश्वर की ''पुस्तकें'' कहलाती हैं अंतिम न्याय के दिन, ''जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया (होगा) गया'' (प्रकाशितवाक्य २०:१२) । आप के जीवन का लेखा सबके सामने पढा जायेगा। आप परमेश्वर के सामने खडे होंगे। बाइबल कहती है पर डरपोकों (जो इतना डरते हैं कि लोग क्या कहेंगे), और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों (यूनानी में उन्हें पोर्नोइस कहते हैं, जो पोर्नोग्राफी देखते हैं, या शादी के अलावा संबंध रखते हैं), और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों (हर वह जन जो झूठ बोलता है क्या आपने झूठ बोला है?) का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है (प्रकाशितवाक्य २१:८) । आपको अपने आप से लज्जा आयेगी। आप आग की झील में फेंक दिये जायेंगे।

ऐसा कहने से भी आप को कोई राहत नहीं मिलने वाली कि आप बहुत लोगों के समान अच्छे हैं। अगर आप स्वयं को ''अच्छा व्यक्ति'' कहते हैं तो इससे भी आप को कोई राहत नहीं मिलने वाली है। आप जानते हैं कि आप पापी हैं। परमेश्वर भी यह जानते हैं। यह कहने से भी कोई हल नहीं निकलेगा कि कोई जन तो आपसे अधिक बुरा है। आप में से दोनों प्रकार के लोग ही नरक की आग में डाले जायेंगे।

कुछ पाप छोडने और अच्छा व्यक्ति बनने का प्रयत्न करने के द्वारा भी काम नहीं चलने वाला है। आप के अतीत के पाप तो परमेश्वर की पुस्तक में दर्ज ही है। अगर आप पुन: पाप नहीं भी करते हैं तो भी आप उन पापों के लिये जो आप पहले कर चुके हैं आग की झील में डाल दिये जायेंगे। अगर आप कहेंगे कि मैं इससे अधिक भी बुरा हो सकता हूं तो इससे भी कोई हल नहीं निकलने वाला है। आप पहले से ही बहुत बुरे हैं। आप भयानक परेशानी में है और आप बचने के लिये कुछ भी नहीं कर सकते।

आपके पापों का लेखा भयानक है। लेकिन ''पूर्ण भ्रष्टता'' का अर्थ यह नहीं है। आपके पापों की प्रकृति व दुष्टता के आगे आप के पापों का लेखा कुछ भी नहीं है। पापपूर्ण प्रकृति से बुरी चीजें निकल कर आती हैं जो आप करते हैं। यीशु का कथन था, ''क्योंकि भीतर से अर्थात मनुष्य के मन से, बुरी बुरी चिन्ता, व्यभिचार, चोरी, हत्या, पर स्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं'' (मरकुस ७:२१−२३) ''भीतर'' से का अर्थ होता है ''अंदर से।'' यह पद बता रहा है कि आप अंदर से कैसे हैं। आप केवल बुरे काम ही नहीं करते हैं आप बुरे हैं। आप बुरे काम करते हैं क्योंकि आप बुरे हैं। आप केवल पाप ही नहीं करते हैं बल्कि आप पापी ही हैं। आप पाप करते हैं क्योंकि आप पापी हैं। आप जो भी हैं उसमें से वही चीजें निकल कर आती हैं जो आप करते हैं। और इसी से हम अगले बिंदु पर आते हैं।

२. दूसरा, पूर्ण भ्रष्टता क्या है।

पूर्ण भ्रष्टता बताती है कि आप क्या हैं। इसका अर्थ है कि आप भीतर से पापपूर्ण और भ्रष्ट हैं। इसलिये आप से वह चीजें हुई जो आप ने की थी। यह आप के स्वभाव से उपजी थी। बाइबल कहती है ''कि आप स्वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे'' (इफिसियों २:३) इसलिये आप ऐसे ही हैं। आप ने आपका यह स्वभाव अपने आदि पिता आदम से पाया है। उन्होंने पाप किया, और यह पाप संपूर्ण मानव जाति में आ गया, एवं आपके माता पिता तक पहुंचा और आपमें भी पाया गया। इसीलिये तो भजनकार ने लिखा था, ''देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा'' (भजन ५१:५) अब आप एक पापी है। आप का कुल व्यक्तित्व यही है। आप कुल मिला कर ऐसे ही रहेंगे। आप इसी प्रकार के हो सकते हैं।

पूर्ण भ्रष्टता का अर्थ है कि आप पाप की स्थायी दशा में हैं और उससे बाहर नहीं निकल सकते हैं। बाइबल कहती है कि आप ''पाप में मरे'' हुए हैं (इफिसियों २:५) । आप ''पाप और अपराध में'' मरे हुये हैं। हमारा पद कहता है कि आप पाप के वश में है (रोमियों ३:९) आप पाप के गुलाम हैं। यीशु का कथन था, ''जो कोई पाप करता है वह पाप का दास (यूनानी में दास के लिये, डाउलोज शब्द है)'' है (यूहन्ना ८:३४)। शिष्य पौलुस ने कहा था ''आप पाप के दास (गुलाम) हैं'' (रोमियों ६:२०) । आप परमेश्वर की संतान नहीं हैं। आप शैतान के संबंधी हैं। आप ''उस की इच्छा पूरी करने के लिये........सचेत होकर शैतान के फंदे में हैं'' (२ तीमुथियुस २:२६)

अपने मन में, अपने केंद्र में, आप परमेश्वर के शत्रु हैं। बाइबल ऐसा कहती है, ''क्योंकि शरीर पर (अपरिवर्तित रूप में) मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है'' (रोमियों ८:७) इसलिये आप स्वार्थी है। इसलिये परमेश्वर जो आपसे करवाना चाहते हैं आप वह करने का विरोध करते हैं और भीतर से आप कुछ ओर करना चाहते हैं। भले ही आप जोर से कुछ नहीं कहते, लेकिन मन ही मन में विरोध करते रहते है, क्योंकि मन में तो आप परमेश्वर के शत्रु हैं। आप परमेश्वर के विरोध में हैं।

आप प्रयत्न भी करते हैं तौभी आत्मिक बातों को समझ नहीं पाते हैं। बाइबल कहती है, ''परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है'' (१कुरूंथियों २:१४) । इसलिये यह पूछने का कोई औचित्य नहीं है कि ''मैं यीशु पर कैसे विश्वास ला सकता हूं?'' यह वह बात है जो आप सीख भी नहीं सकते!

आप के विचार और कल्पना गलत हैं। बाइबल कहती है, ''मनुष्य के मन में बचपन से जो कुछ उत्पन्न होता है सो बुरा ही होता है'' (उत्पत्ति ८:२१) आप के विचार दुष्ट भी है। आप भीतर से ऐसे ही हैं, और उसको बदलने के लिये आप कुछ नहीं कर सकते।

आप स्वयं को बदल नहीं सकते और स्वयं को अच्छा नहीं बना सकते। बाइबल कहती है आप नहीं कर सकते! यह कहती है कि भटका हुआ जन ''न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है'' (रोमियों ८:७) आप अच्छे नहीं कहला सकते। आप ने प्रयास तो किया लेकिन असफल रहे। आप बार बार असफल रहे। यह तय है कि आप असफल रहेंगे।

आप अपना स्वभाव नहीं बदल सकते − जैसे आप भीतर से हैं । बाइबल कहती है, ''क्या हबशी अपना चमड़ा, वा चीता अपने धब्बे बदल सकता है? यदि वे ऐसा कर सकें, तो तू भी, जो बुराई करना सीख गई है, भलाई कर सकेगी'' (यिर्मयाह १३:२३) आप अपनी चमडी का रंग नहीं बदल सकते। न चीता अपने शरीर के धब्बों को बदल सकता है। आप अपने स्वभाव की दुष्टता से छुटकारा नहीं पा सकते। अय्यूब का कथन था, ''अशुद्ध वस्तु से शुद्ध वस्तु को कौन निकाल सकता है? कोई नहीं।'' (अय्यूब १४:४) आप स्वयं को अशुद्व से शुद्व नहीं बना सकते। कोशिश करके देखिये! जल्द ही आप पायेंगे कि आखिरकार आप मलिन ही हैं।

मैं आपसे एक प्रश्न पूछता हूं। क्या आप मनुष्य बने रहने को रोक सकते हैं? क्या आप स्वयं से ऐसा कुछ बदलाव ला सकते हैं कि आप मनुष्य प्राणी नहीं रहें? बेशक आप बदलाव नहीं ला सकते! सारे मनुष्य प्राणी पापी हैं! बाइबल में लिखा है, ''सबने पाप किया है'' (रोमियों ३:२३) बाइबल यह भी कहती है, ''कोई भी धर्मी नहीं है एक भी नहीं'' (रोमियों ३:१०) जैसे आप मनुष्य बने रहने को रोक नहीं सकते, वैसे ही आप पापी बने रहने को भी नहीं रोक सकते। आप अपना पापमयी, दुष्ट स्वभाव बदल नहीं सकते। अपने आप से आपके लिये कोई आशा नहीं है।

आप परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिये कुछ नहीं कर सकते। बाइबल इस संदर्भ में बहुत स्पष्ट कहती है। यह कहती है, ''और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते'' (रोमियों ८:८)। ''शारीरिक दशा में है'' का तात्पर्य है कि जो भटके हुये लोग हैं। अगर आप खोये हुये जन हैं, तो आप किसी भी रीति से ऐसा कुछ नहीं कर सकते कि परमेश्वर को प्रसन्न कर सकें − कि वह आपसे आनंदित हो जाये। आप के भलाई के कार्य या धार्मिक कार्य भी परमेश्वर को खुश नहीं कर सकते। बाइबल कहती है, ''हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं।'' (यशायाह ६४:६) आप सोचते हैं कि आप परमेश्वर को प्रसन्न् कर लें और कहते हैं कि कर भी लेंगे − परंतु परमेश्वर कहते हैं कि आप उन्हें आनंदित नहीं कर सकते हैं! क्या परमेश्वर सही हैं या गलत हैं? जब आप अपने सीखने के प्रयासों द्वारा या भला बनने के द्वारा यह सिद्व करने में लगे रहते हैं कि आप परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं तो आप परमेश्वर को गलत ठहरा रहे हैं। इस तरह आप बार बार असफल होते जाते हैं। आप परमेश्वर को प्रसन्न् करने के लिये कुछ नहीं कर सकते हैं।

अपने आप ऐसा कुछ नहीं सीख सकते कि आप स्वयं ही उद्वार पा सकें। फिर से यह पूछने का कोई औचित्य नहीं रह जाता कि, ''मैं कैसे यीशु पर विश्वास लाउं?'' कुछ उपाय सीखना आपके कोई काम नहीं आयेगा। कुछ उपाय सीखना आपके स्वभाव को नहीं बदलेगा। आपके समान भटके लोगों से यीशु ने कहा था, ''तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते'' (यूहन्ना ८:४३) । फिर से मसीह का कथन है जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो'' (यूहन्ना ८:४७) ।

आप अपने प्रयास करके मसीह के उपर विश्वास करना नहीं सीख सकते। यीशु स्वयं बोले थे, ''कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले'' (यूहन्ना ६:४४) । यह मैं नहीं कहता − बल्कि यह यीशु मसीह ने कहा है! आप अपने प्रयासों से बचने का प्रयत्न कर सकते हैं − लेकिन आप असफल रहेंगे। आप सही शब्दों को कैसे बोले ऐसा सीखना आरंभ कर सकते हैं। आप के भीतर कुछ राहत देने वाली भावनायें पैदा हो सकती है − या कोई भी भावना पैदा न हो। पर इस तरह से आप किसी भी मंजिल पर नहीं पहुंचने वाले हैं। आप परिवर्तित नहीं होंगे − क्योंकि आप अपना मन परिवर्तित नहीं कर सकते! आप अंदर से निर्जीव हैं। आप अंदर से दुष्ट हैं। आप स्वयं को कैसे बदल सकते हैं? आप नहीं बदल सकते हैं।

एक खोये हुये पापी के समान आप ''परमेश्वर के लिये पूर्णत: मरे हुये'' हैं − पूर्णत: पापमयी और निराशाजन्य। आप उद्वार के योग्य नहीं हैं। आप अपने मन परिवर्तन होने को स्वयं संभव नहीं कर सकते। आप परमेश्वर के लिये मरे हुये हैं। आप ''पापों में मरे'' हुये हैं। आप अपने पाप के लिये सोचने से बच सकते हैं, परंतु तौभी वह विधमान तो है। परमेश्वर उन्हें देखता तो है, भले ही आप चाहो या न चाहो। परमेश्वर आपके पाप से अप्रसन्न होता है। परमेश्वर आपके पाप से विरुचित होता है। एक लडकी ने लिखा था ''मुझे स्वयं से निराशा हो गई'' थी। आप को भी निराशा होना चाहिये। अगर आप को निराशा नहीं होती है तो इसका अर्थ हैं कि आप अभी सत्य के प्रति जाग्रत नहीं हुये हैं।

उत्तर क्या है? आप के अंदर कोई उत्तर नहीं मिल सकता और न कभी मिलेगा! ''उद्धार यहोवा ही से होता है'' (योना २:९) । आप के पास मसीह का होना आवश्यक है! केवल मसीह का लहू ''सब पापों से (आप को शुद्ध) करता है'' (१यूहन्ना १:७) । आपका हिचकिचाना और विलंब करना आपको कहीं नहीं ले जायेंगे − सिवाय नर्क के। आप के पास कोई आशा नहीं होगी। आप के पास मसीह का होना आवश्यक है! आप के पास मसीह का लहू होना आवश्यक है! आप के पास परमेश्वर की दया होना आवश्यक है जो आप को मसीह के पास खींच सके। आप स्वयं का उद्वार नहीं कर सकते। आप के पास मसीह का होना आवश्यक है! यीशु ने कहा था, ''मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता'' (यूहन्ना १४:६) क्या यह सच है या नहीं? क्या आप इस पर विश्वास करते हैं या नहीं? यीशु ने कहा था कि आप परमेश्वर के पास बिना मसीह के नहीं पहुंच सकते − स्वयं मसीह का होना आवश्यक है! दूसरा कोई रास्ता नहीं है, कोई सच्चाई नहीं है, कोई जीवन नहीं है! आपने दूसरे प्रयास करके देख लिये और असफल रहे। उन प्रयासों में कुछ नहीं रखा है। आप के पास मसीह का होना आवश्यक है! केवल मसीह! स्वयं यीशु मसीह का होना आवश्यक है! केवल मसीह! आप को आप के पापों की क्षमा मसीह के लहू में प्राप्त करनी चाहिये! लहू! लहू! लहू! आप के पास मसीह का होना आवश्यक है! केवल मसीह! केवल मसीह! आमीन!


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(संदेश का अंत)
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रूपरेखा

आपकी संपूर्ण अनैतिकता

YOUR TOTAL DEPRAVITY

द्वारा डॉ सी एल कैगन
by Dr. C. L. Cagan

''वे सब के सब पाप के वश में हैं'' (रोमियों ३:९)

(इफिसियों २:५‚ १; रोमियों ३:९)

१.       पहला, भ्रष्टता क्या नहीं है‚ १यूहन्ना ३:४; निर्गमन २०:१६‚१५;
मत्ती २२:३७; निर्गमन २०:१४; मत्ती ५:२८; निर्गमन २०:१२;
प्रकाशितवाक्य २०:१२; २१:८; मरकुस ७:२१−२३

२.      दूसरा, पूर्ण भ्रष्टता क्या है‚ इफिसियों २:३; भजन ५१:५;
इफिसियों २:५; रोमियों ३:९; यूहन्ना ८:३४; रोमियों ६:२०;
२तीमुथियुस २:२६; रोमियों ८:७; १कुरूंथियों २:१४; उत्पत्ति ८:२१;
रोमियों ८:७; यिर्मयाह १३:२३; अय्यूब १४:४; रोमियों ३:२३‚१०; ८:८;
यिर्मयाह ६४:६; यूहन्ना ८:४३‚ ४७; ६:४४; योना २:९; १यूहन्ना ५:७;
यूहन्ना १४:६