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यीशु मसीह का शुद्ध और मुक्तिप्रदायक लहू

THE INCORRUPTIBLE AND REDEEMING
BLOOD OF JESUS CHRIST
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, १३ सितंबर, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, September 13, 2015

''क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल−चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ। पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।'' (१ पतरस १:१८−१९)


विलियम कूपर (१७३१−१८००) ने इस प्रसिद्व गीत के सुदर शब्द लिखे:

मैं विश्वास से सदैव एक धारा देखता हूं
जो तेरे घावों से बह रही है‚
छुटकारा देने वाला प्रेम मेरा विषय है‚
और मेरे मरने तक यही रहेगा।

यह सी एच स्पर्जन (१८३४−१८९२) का पसंदीदा गीत था। उन महान प्रचारक ने कहा था‚

मेरे लिये इस सोच से बढकर कुछ नहीं और इस महान विषय पर प्रचार करने से बढकर कुछ नहीं है। यीशु मसीह का लहू सुसमाचार का जीवन है (सी.एच. स्पर्जन‚ ''दि ब्लड आँफ स्प्रिंगकलिंग'' फरवरी २८‚ १८८६‚ मेट्रपालिटन टेबरनेकल पुल्पिट‚ वाल्यूम ३२‚ पेज १२१‚ पुर्नमुद्रण डॉ बॉब रॉस पिल्ग्रिम पब्लिकेशंस‚ पी ओ बॉक्स ६६‚ पासादेना‚ टेक्सास ७७५०१)

स्पर्जन‚ जो प्रचारको के राजकुमार‚ कहलाते थे उन्होंने इतना सशक्त कथन क्यों दिया? उन्होंने क्यों कहा‚ ''मेरे लिये इस सोच से बढकर कुछ नहीं और इस महान विषय पर प्रचार करने से बढकर कुछ नहीं है'' सिवाय यीशु मसीह के लहू के? मेट्रपालिटन टेबरनेकल पुल्पिट‚ में छपे उनके सैकडों संदेशों को जब आप पढेंगे तो पायेंगे कि ये बात सही थी। अंग्रेजी भाषी संसार के सबसे महानतम प्रचारक ने मसीह के लहू को अपना मुख्य विषय क्यों बनाया? साधारण सी बात है कि बाइबल में इससे बढकर कोई महत्वपूर्ण बात है ही नही!

बाइबल सिखाती है कि बिना यीशु मसीह के लहू के मनुष्यों के लिये कोई उद्वार नहीं है। मैं यीशु मसीह के लहू के विषय में दो बातों पर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहता हूं दोनों बिंदु १ ला पतरस १:१८−१९ के इस पद में पाये जाते हैं।


१. मसीह का लहू शुद्ध है।

२. मसीह का लहू छुटकारे के लिये आवश्यक है।

१. पहला‚ मसीह का लहू शुद्ध है।

भजन संहिता‚ में परमेश्वर ने यह भविष्यवाणी की थी जो मसीह में पूरी हुई:

''क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा‚ न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा'' (भजन संहिता १६:१०)

इब्रानी शब्द ''विकार'' का अर्थ होता है ''ध्वंस'' अथवा ''विघटन'' (स्ट्रॉंग कनकार्डेंस)

नये नियम में यह पद भजन से लिया गया है:

''क्योंकि तू मेरे प्राणों को अधोलोक में न छोड़ेगा; और न अपने पवित्र जन को सड़ने ही देगा........उस ने (दाउद) होनहार को पहिले ही से देखकर मसीह के जी उठने के विषय में भविष्यद्वाणी की कि न तो उसका प्राण अधोलोक में छोड़ा गया, और न उस की देह सड़ने पाई।'' (प्रेरितों के कार्य २:२७‚ ३१)

वर्तमान में कुछ लोग कहते हैं कि मसीह की देह पुर्नजीवित हुई लेकिन उनका रक्त वहीं कूस के आसपास जमीन में सोख लिया गया और इस तरह व्यर्थ हो गया। परंतु बाईबल हमको एक अन्य पद देती है जिसमें कहा गया है कि मसीह का रक्त भ्रष्ट नहीं किया जा सकता था:

''क्योंकि तुम जानते हो‚ कि तुम्हारा निकम्मा चाल−चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ। पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।'' (१पतरस १:१८−१९)

इसमें ''नाशमान'' शब्द ''मिट जाना'' अथवा ''नष्ट हो जाना'' शब्दों से लिया गया है। यह पद दिखाता है कि मसीह का लहू मिट नहीं सकता या नष्ट नहीं हो सकता। इस पृथ्वी पर चांदी और सोना सबसे कम नष्ट होने वाले पदार्थ हैं लेकिन परमेश्वर के न्याय के दिन चांदी सोना जैसे पदार्थ भी नष्ट हो जायेंगे। हमें बताया गया है कि ''और तत्व बहुत ही तप्त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे.......तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं,'' (२ पतरस ३:१०−११) । सारे तत्व भी (यूनानी शब्द ''अणु'') भी जल कर नष्ट हो जायेंगे। परमेश्वर की भेजी हुई आग में इस संसार की सब वस्तुएं ''पिघल जायेंगी।'' (शाब्दिक रूप में ''नष्ट होना'' ) इसमें चांदी सोना भी सम्मिलित हैं; ''सब वस्तुएं पिघल जायेंगी।''

पर १ पतरस १:१८−१९ कहता है कि हमारा छुटकारा किंन्हीं अशुद्ध चीजों से नहीं हुआ है, ''परंतु मसीह के बहुमूल्य लहू से हुआ है।'' यह पद स्पष्ट बताता है मसीह का लहू शुद्ध, अमिट और खराब होने वाला नहीं है (स्ट्रॉंग) !

फ्रन्ट लाइन पत्रिका के एक लेख में लिखा था,

जब मसीह का लहू बहाया गया, तो वह जमा नहीं और न ही मैदान में गिरकर गायब हो गया। ऐसा हो ही नहीं सकता था, क्योंकि परमेश्वर का वचन कहता है कि वह शुद्ध लहू था। कलवरी पहाड की रेत परमेश्वर के मेम्ने के कीमती लहू को सोख नहीं सकती थी। जब ''शुद्ध'' शब्द प्रयुक्त किया है तो इसका तात्पर्य मसीह की पुनर्जीवित देह से है और शुद्ध लहू जो बहाया वह अलौकिक सामर्थ से उत्पन्न हुआ था (फ्रन्ट लाइन पत्रिका, मार्च/ अप्रैल २००१ पेज ५)

जब यीशु मृतक में से पुर्नजीवित हुये, उन्होंने कहा कि:

''मेरे हाथ और मेरे पांव को देखो, कि मैं वहीं हूं; मुझे छूकर देखो; क्योंकि आत्मा के हड्डी मांस नहीं होता जैसा मुझ में देखते हो।'' (लूका २४:३९)

जीवित हुये मसीह को देखकर शिष्य चकित हो गये। वे समझे कि ''हम किसी भूत को देखते हैं'' (लूका २४:३७) । कई लोग आज यीशु के लिये सोचते हैं कि वह आत्मा बनकर जीवित हुये। पर यह पद उनके केवल ''परछाई मात्र'' आत्मा होने वाली विचारधारा को सुधारता है। नहीं, मसीह देह और हडडी के साथ जीवित हुये थे। उन्होंने शिष्यों से कहा कि उनके कीलों से छिदें हाथ और पैरों को देखें।

''तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो।'' (यूहन्ना २०:२७)

मसीह ने थॉमस नामक शिष्य से उनकी पसली के उस स्थान में, जहां क्रूस पर उन्हें सैनिक ने भाले से छेदा था उस गडडे में हाथ डालने को कहा। मेरा कहने का उददेश्य यह है कि: मसीह ने चेलों को उनके हाथ, पैरों, और बाजु में हुये छेदों को देखने के लिये कहा था। अगर उनके पुर्नजीवित ''देह और हडडी'' में रक्त शेष होता तो उन घावों से बह निकलता। पर वह रक्त भी पहले से परमेश्वर की सामर्थ से पुर्नजीवित हो चुका था।

जब मरियम मगदलिनी यीशु से उनके जीवित होने के बाद मिलने गयी, उन्होंने उससे कहा,

''मुझे मत छू क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयों के पास जाकर उन से कह दे, कि मैं अपने पिता, और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूं।'' (यूहन्ना २०:१७)

तौभी, थोडा समय भी नहीं बीता था, और चेलों ने आकर उसके ''पाँव पकड़कर उस को दंडवत'' किया (मत्ती २८:९)। यीशु ने मरियम को स्वयं को छूने नहीं दिया लेकिन थोडे समय बाद ही चेले आये तो उन्हें पैरों को छू लेने दिया। स्कोफील्ड की व्याख्या हमें इसका उत्तर देती है, जो मुझे बाइबल के दृष्टिकोण से सही व्याख्या लगती है:

यीशु मरियम से बलिदान देने वाले महापुरोहित के रूप में बोलते हैं (लैव्यव्यवस्था १६) । अपना बलिदान देने के पश्चात, वह अपना पवित्र लहू स्वर्ग में चढाने जाने के रास्ते में हैं, जब वे मरियम से मिले और चेलों से मत्ती २८:९ के अनुसार उनकी भेंट हुई। वे उपर गये और वापस लौटे। इसलिये इन घटनाओं में थोडा अंतर दिखाई दिया। (यूहन्ना २०:१७ पर स्कोफील्ड की व्याख्या)

डॉ जॉन आर राइस ने भी इसी दृष्टिकोण पर विश्वास किया था,

पुराने नियम के अनुसार महापुरोहित पवित्रों में पवित्र अनुग्रह के सिंहासन के समकक्ष लहू अर्पण करता था। इसलिये, मसीह भी मरियम से मिलने के समय से लेकर चेलों से मिलने के समय के बीच अपना लहू लेकर पिता के सामने उपस्थित हुये:

''परन्तु जब मसीह आने वाली अच्छी अच्छी वस्तुओं का महायाजक होकर आया, तो उस ने और भी बड़े और सिद्ध तम्बू से होकर जो हाथ का बनाया हुआ नहीं, अर्थात इस सृष्टि का नहीं। और बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा नहीं, पर अपने ही लोहू के द्वारा एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया, और अनन्त छुटकारा प्राप्त किया।'' (इब्रानियों ९:११−१२)

ध्यान दीजिये यह गद्यांश क्या कहता है कि उन्होंने एक ही बार ''पवित्र स्थान में प्रवेश किया'' यह उनके स्वर्गारोहण के अतिरिक्त हुआ‚ क्योंकि बाईबल कहती है,

''निदान प्रभु यीशु उन से बातें करने के बाद स्वर्ग पर उठा लिया गया‚ और परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया।'' (मरकुस १६:१९)

हमें नये नियम में बार बार कहा गया है कि वह परम पिता के दाहिने हाथ विराजमान हो गये, और यह पद बताता है कि वह चेलों से बात करने के तुरंत बाद स्वर्ग में उठा लिये गये। यह कम से कम स्वीकार्य तो बनता है कि वह पहले स्वर्ग में उपस्थित होकर अपना रक्त स्वर्ग में ''पवित्र स्थान'' में (इब्रानियों ९:१२) चढा चुके थे।

''क्योंकि तुम जानते हो‚ कि तुम्हारा निकम्मा चाल − चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ पर.........मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।'' (१पतरस१:१८−१९)

अब मसीह का रक्त स्वर्ग में दया आसन के समक्ष रखा गया है। यह शुद्ध है। यह नष्ट या क्षय नहीं हो सकता है। यह सब कुछ अलौकिक है। बेशक! अलौकिक हटा लीजिये तो मसीहत नहीं बचेगी − केवल नैतिकता शेष रह जायेगी। पर यह जादू नहीं है। आप मसीह के रक्त के साथ चालाकी नहीं कर सकते। सचमुच यह जादू नहीं है! रक्त अलौकिक है‚ किंतु यह जादू जैसी प्रतिकिया नहीं देता है। ''निर्णयवाद'' जादू है! इसलिये हम इसको अस्वीकार करते हैं। यह परमेश्वर हैं जो तय करते हैं कि आप रक्त से शुद्व किये जायें।

मैं जानता हूं कि जॉन मैकआर्थर इस बिंदु पद विश्वास नहीं करते हैं। मैं जानता हूं यीशु के लहू पर उनके झूठे विचार एक अजनबी व्यक्ति कर्नल आर बी थीम की देन है। मैं १९६१ की शीत ऋतु में उस बाइबल अध्ययन की शृंखला में था जिसमें जवान मैकआर्थर ने भी हिस्सा लिया था जिसे थीम सिखा रहे थे उसके बाद के वर्षो से मैकआर्थर वही सिखा रहे हैं जो उन्होंने (थीम ने) सिखाया था। मुझे दृढ़ विश्वास है कि डॉ मैकआर्थर ने आर बी थीम के विचारों को ही ग्रहण किया था क्योंकि मैंने देखा था वह उनके अध्ययन के दौरान नोटस बना रहे थे। थीम ने यह सिखाया था कि ''रक्त'' का मतलब ''मृत्यु'' है − ''न कि रक्त किसी स्थान पर बहाया गया।'' डॉ मैकआर्थर के संदेशों में ये विचार समय समय पर निकल कर आते हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं कि उन्होंने यह विचार कर्नल आर बी थीम से लिये हैं। यह दुर्भाग्य ही है‚ क्योंकि अन्य विषयों पर डॉ मैकआर्थर अच्छी शिक्षा प्रदान करते हैं। हमारा चर्च प्रति सप्ताह डॉ मैकआर्थर के लिये प्रार्थना करता है कि वह आर बी थीम की मसीह के रक्त के उपर की अजीब शिक्षाओं से फिर जायें।

२. दूसरा‚ मसीह का रक्त आप के छुटकारे के लिये आवश्यक है।

यह पद बताता है कि हमारा छुटकारा नाशमान चीजों से नहीं हुआ है बल्कि हम मसीह के रक्त से छुटकारा पा सकते हैं। १ पतरस १:१८ में प्रयुक्त ''छुटकारा'' शब्द यूनानी शब्द का अनुवाद है जिसका अर्थ है ''ढीला करना'' या ''छोड देना'' (स्ट्रॉंग‚ वाइन) ''छुटकारे का महत्व'' बताता है (वाइन)

जब तक आप के बंधन मसीह के रक्त से ''मुक्त नहीं किये जायेंगे'' ''छुटकारा'' नहीं मिलेगा आप के साथ सदैव यह होता रहेगा कि जैसा

१. गलतियों में दर्शाया गया है कि ''आप व्यवस्था के शाप'' में रहेंगे (गलतियों ३:१३)। आप व्यवस्था से शापित हैं क्योंकि आप इसका पालन नहीं कर सके। आप पूरी रीति से परमेश्वर की दस आज्ञाओं का पालन नहीं कर पाये। इसलिये व्यवस्था आप को शापित ठहराती है। यह आप को दोषी ठहराती है और न्याय से बचने का कोई रास्ता नहीं देती। केवल प्रभु यीशु का रक्त आप के बुरे कर्मो को धो सकता है ताकि आप व्यवस्था के शाप से ''मुक्त'' किये जायें ''छुटकारा'' पायें।

२. जब तक आप प्रभु यीशु के रक्त से ''मुक्त'' न किये जायें ''छुटकारा'' न पायें आप सदैव शैतान के आधिपत्य में ही बने रहेंगे शैतान के फंदे से छूट जाएं (२ तीमुथियुस २:२६) शैतान की पकड से आप को कोई नहीं ''छुडा'' सकता‚ या ''मुक्त'' कर सकता है सिवाय यीशु के रक्त के!

३. जब तक आप प्रभु यीशु के रक्त से ''मुक्त'' न किये जायें ''छुटकारा'' न पायें आप सदैव पवित्र परमेश्वर के क्रोध और न्याय के अधीन बने रहेंगे। परमेश्वर के न्याय से आप को कोई नहीं ''छुडा'' सकता‚ या ''मुक्त'' कर सकता है सिवाय यीशु के रक्त के!


सचमुच‚ मेरे मित्र‚ आप के पास प्रभु यीशु का रक्त होना आवश्यक है! आप के पास प्रभु यीशु का रक्त होने से वह आप को व्यवस्था के शाप से छुडायेगा‚ शैतान की गुलामी से मुक्त करवायेगा‚ और प्रभु परमेश्वर के क्रोध से मुक्ति दिलवायेगा! सचमुच‚ आप के लिये आवश्यक है − आप के लिये आवश्यक है − कि आप के पास यीशु मसीह का कीमती रक्त हो जो आप को शाप‚ बंधन‚ और क्रोध से मुक्त करे। मैं दोहराता हूं‚ कि आप के पास मसीह का रक्त होना आवश्यक है! मेरी प्रार्थना है कि आप शीघ्र ही यीशु पर विश्वास लायें!


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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा प्रार्थना
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गान:
''यीशु आपका लहू और धार्मिकता''
(काउंट निकोलस वॉन जिनजेनडॉर्फ द्वारा‚ १७००−१७६०; जॉन वेस्ली द्वारा अनुवादित‚ १७०३−१७९१)


रूपरेखा

यीशु मसीह का शुद्ध और मुक्तिप्रदायक लहू

THE INCORRUPTIBLE AND REDEEMING
BLOOD OF JESUS CHRIST

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

''क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल−चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ। पर निर्दोष और निष्कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ।'' (१ पतरस १:१८−१९)

१. पहला‚ मसीह का लहू शुद्ध है, भजन १६:१०;
प्रेरितों के कार्य २:२७, ३१; १पतरस १:१८−१९; २पतरस ३:१०−११;
लूका २४:३९‚३७; यूहन्ना २०:२७, १७; मत्ती २८:९; इब्रानियों
९:११−१२; मरकुस १६:१९

२. दूसरा‚ मसीह का रक्त आप के छुटकारे के लिये आवश्यक है‚
गलातियों ३:१३; २ तीमुथियुस२:२६; भजन ७:११