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वर्तमान समय के युद् के लिये प्रार्थना योद्धा की आवश्यकता!

PRAYER WARRIORS FOR TODAY’S BATTLE!
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, ९ अगस्त, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, August 9, 2015


वह कौनसी खास बात है जो मैंने सीखी है? मैं तो कहूंगा कि यह वह बात होगी कि जब मैंने जाना कि मसीहत वास्तविक है! यह मैंने डॉ तिमोथी लिन से जाना कि फर्स्ट चाइनीज बैपटिस्ट चर्च में मसीहत बिल्कुल वास्तविक है! वह वास्तव में एक दुर्लभ प्रचारक थे, जो वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करते थे। जब एक मनुष्य वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करता है तो यह बात उसे बिल्कुल अलग प्रचारित करती है। यही बात उसे अन्य प्रचारकों से अलग, और उत्तम बनाती है।

डॉ तिमोथी लिन चीन के पास्टर थे। जब तक वह वयस्क नहीं हुये थे वह अमेरिका नहीं आये थे। जो वह विश्वास करते और प्रचार करते थे वह ''जीवित मसीहत'' थी। वह वैसे तो नहीं थे जिसे लोग करिश्माई या पेंटीकॉस्टल कहते थे − फिर भी वह विश्वास करते थे आत्मा से भरे होने पर, दुष्ट आत्माओं पर, स्वर्गदूतों पर, परमेश्वर की ओर से संदेश मिलने पर, सच्ची प्रार्थनाओं के सच्चे जवाब मिलने पर, आत्मिक जागरण में पवित्र आत्मा मिलने पर। कहने का तात्पर्य वह ''जीवित मसीहत'' में विश्वास करते थे। वह जब चीन में ही एक जवान युवक के रूप में थे यह उन्होंने तब सीखा था। उनके पिता ने अपना पूरा जीवन एक पास्टर के रूप में वहां बिताया।

कई लोगों ने मुझसे कहा कि, ''आप डॉ तिमोथी लिन से बहुत अधिक मिलते हैं उन चीनी प्रचारक की तुलना में जो उनके चर्च में से निकल कर आये।'' डॉ कैगन ने मुझसे फिर यह बात पिछले गुरूवार को कही। मैं इसे एक अभिनंदन मानता हूं क्योंकि तिमोथी लिन भी ''जीवित मसीहत'' में विश्वास करते थे।

इतने सालों मेरा वहां रूक पाना वास्तव में बहुत कठिन काम था क्योंकि अधिकतर समय मैं ही वहां एक श्वेत बालक था। परंतु मैं जानता था कि मुझे वहां ठहरना ही था क्योंकि मेरे लिये यह परमेश्वर की इच्छा थी कि मैं रूकूं। वहीं से मैंने अधिकांश बातें तिमोथी लिन से सीखी जो मैं आज जानता हूं। मैं उनसे हर बात में तो सहमत नहीं होता हूं लेकिन मैं उनके जैसा सोचता हूं। मैं जीवित मसीहत में विश्वास रखता हूं!

अगर आप इफिसियों के अध्याय छ: का दूसरा भाग समझना चाहते हैं, तो आपको वास्तव में डॉ तिमोथी लिन जैसा सोचना होगा। मैंने अनेक व्याख्याकारों को पढा है जो इस गद्यांश के प्रति भ्रांति में है। मैं अगले कुछ मिनटों में इसे समझाने का प्रयास करूंगा। निवेदन है कि इफिसियों ६:१० निकाल लेवें। यह स्कोफील्ड बाइबल में १२५५ पेज पर है। निवेदन है कि अपने स्थानों पर खडे हो जाये जब मैं अध्याय ६‚ पद १० से १२ पढूंगा।

इफिसुस के मसीहियों के लिये पौलुस का यह अंतिम कथन है। जो उन्होंने उन प्रारंभिक मसीहियों से कहा था वह आज हम सब के लिये अत्यधिक आवश्यक है।

१. प्रथमत: पौलुस आत्मिक युद् के लिये कहता है।

''निदान‚ प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनो। परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध‚ लोहू और मांस से नहीं‚ परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से‚ और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से‚ और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।'' (इफिसियों ६:१०−१२)

अब आप बैठ सकते हैं। शिष्य पौलुस हमें कहते हैं कि हम युद् भूमि में हैं। मसीही जीवन एक संग्राम है। हमारा युद् शैतान और उसकी सेनाओं से है। डॉ ए. डब्ल्यू टोजर ने एक निबंध लिखा था‚ दिस वल्र्ड प्लेग्राउंड ओर बैटलग्राउंड? (क्रिस्चन पब्लिकेशन‚ १९८८‚ पेज १−४) डॉ टोजर ने कहा,

     प्रारंभिक दिनों में....मनुष्य इस संसार को युद्भूभूमि समझते थे। हमारे पूर्वज यह मानते थे कि पाप शैतान और नरक मिलकर एक ताकत पैदा करते हैं वे परमेश्वर और उनकी धार्मिकता और स्वर्ग पर विश्वास रखते थे। अपने स्वभाव‚ में यह ताकतें गहराई में‚ जाकर गंभीर रूप‚ से परस्पर विरोधी थी। अपने स्वभाव में यह ताकतें गहराई में जाकर गंभीर रूप से परस्पर विरोधी थी। जैसा हमारे पूर्वज बताते हैं उनको किसी एक पक्ष का चुनाव करना होता है वह तटस्थ नहीं हो सकते थे। उसके लिये यह या तो जीवन का चयन होगा या मृत्यु का‚ स्वर्ग का या नरक का‚ और अगर उसने परमेश्वर की तरफ का चुनाव किया तो उसे खुलकर परमेश्वर के शत्रुओं का सामना करना पड सकता है। यह लडाई वास्तविक भी हो सकती है और तब तक चल सकती है जब तक इस (पृथ्वी पर) जीवन है। पूर्वोक्त‚ पेज २

डॉ टोजर ने जो कहा वह अब इस समय में परिवर्तित हो चुका है। उनका कथन था ''कि यह संसार जो युद् भूमि के स्थान के बजाए एक खेल के मैदान के समान है अब यह विचार अनेक रूढ़िवादी मसीहियों के द्वारा व्यवहार में प्रयुक्त किया जा चुका है।'' (पूर्वोक्त‚ पेज ४)

मैं सोचता हूं कि हमें यह मानना चाहिये कि डॉ टोजर सही थे। आज के इवेंजलीकल मसीही शैतान और दुष्ट आत्मा के लिये सुनना नहीं चाहते। वे यह नहीं सोचते कि वे इस लौकिक युद् में दुष्ट ताकतों के विरूद् सैनिक के सदृश हैं। मेरा मानना है कि इसका कारण यह है कि उनमें से कई परिवर्तित नहीं हुये हैं। उनकी आंखें इस आत्मिक द्वंद् के प्रति अंधी हो चुकी हैं। जब वे शिष्य पौलुस को यह कहते सुनती हैं, ''प्रभु में जड पकडते जाओ तो वे समझना ही नहीं चाहती कि वह क्या कह रहें हैं।'' लोग क्यों नहीं समझना चाहते? क्योंकि ''वे प्रभु में नही हैं'' − और चूंकि वे प्रभु ''में'' नहीं हैं इसलिये वे प्रभु से सामर्थ नहीं खींच सकते! डॉ एस डी एफ सालमंड ने कहा, ''कि ताकत तभी प्रभाव शाली हो सकती है जब वह मसीह के साथ संयुक्त हो।'' (''एपीसल्स टू दि इफिसियंस‚'' एक्सपोजिटर्स न्यू ग्रीक टेस्टामेंट, वाल्यूम ३, इयर्डमंस, एन. डी. पेज ३८२)

डॉ जे वर्नान मैगी ने कहा था, ''कि आप अपनी ताकत और सामर्थ में शैतान पर विजय हासिल नहीं कर सकते। पौलुस निसंदेह इन दो यूनानी शब्दों पर अत्यधिक जोर दे रहा है परमेश्वर के पेनोप्लायन (कवच) की नितांत आवश्यकता है ताकि मैथोडियोस शैतान की (युक्तियों, छल, और तरीकों से) निपटा जा सके। ‘परमेश्वर में सामर्थशाली बनो’ − यही वह एकमात्र स्थान है जहां से आप और मुझे ताकत मिलती है।'' (जे. वर्नान मैगी, टी.एच.डी., थू दि बाईबल, वाल्यूम ५, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, पेज २७८, २७९; इफिसियों ६:१०,१० पर व्याख्या)

पहले स्थान पर आप को परमेश्वर के पास मसीह में विश्वास रखते हुये आना आवश्यक है। आप को कूस के सिपाही के रूप में बारंबार प्रार्थना करते हुये ''उनके पराक्रम से सामर्थ'' प्राप्त करने के लिये आना चाहिये!

२. दूसरा, शिष्य पौलुस हमारे शत्रुओं के विषय में बोलते हैं।

कृपया अपने स्थानों पर खडे हो जाइये जब मैं इफिसियों ६:१२ पढता हूं।

''क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।'' (इफिसियों ६:१२)

अब आप बैठ सकते हैं।

पौलुस इस पद में जिन शैतान और दुष्ट आत्माओं के लिये कहता है उनके प्रति प्रथम और द्वितीय सदी के मसीही बडे जागरूक थे। डॉ माइकल ग्रीन ने अपनी पुस्तक इवेंजलिज्म इन दि अर्ली चर्च में बताया कि पूर्वी मसीही इस बात में विश्वास करते थे कि

यह संपूर्ण संसार और उसको घेरने वाला यह वातावरण शैतानों से भरा हुआ है; न केवल मूर्ति पूजा, बल्कि जीवन का हर चरण और शैली उनके द्वारा संचालित है। वे ही लोग सिंहासन पर बैठे थे, वे ही पालने के आसपास मंडराते रहते थे। यह पृथ्वी पूरी रीति से नर्क बन गयी थी यद्यपि यह परमेश्वर की रचना के रूप में भी चलायमान थी। इस नरक और इसकी दुष्ट आत्मा का सामना करने के लिये मसीहियों के पास अपराजित हथियार थे....मसीही इस संसार में आत्माओं को भगाने वाले के रूप में गये...जिसके पीछे यह मसीही दावा व्याप्त था कि यीशु ने कूस पर समस्त् शैतानी ताकतों को परास्त कर दिया है और वे हमारे लिये उद्वार लेकर आये (माइकल ग्रीन, पी एच डी, इवेंजलिज्म इन दि अर्ली चर्च, इयर्डमेंस, २००३, पेज २६३‚ २६४)

अपने समय में डॉ जे. वर्नान मैगी ने कहा था,

शत्रु आध्यात्मिक है। यह शैतान है जो अपनी शैतानी ताकतों को उठाता है। हमें यह पहचानने की आवश्यकता है कि युद् कहां चल रहा है। मेरे विचार से तो चर्च ने बडे स्तर पर आध्यात्मिक युद्व का विचार त्याग दिया है। आये (पूर्वोक्त‚ पेज २८०; इफिसियों ६:१२ पर व्याख्या)

डॉ मार्टिन ल्योड जोंस ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा, ''चर्च की बुरी (खराब) दशा के लिये उत्तरदायी कारणों में से एक कारण यह है कि शैतान को भुला दिया गया है .......चर्च को जैसे किसी ने मोहित कर दिया हो या नशे की दवा पिला दी हो; वह द्वंद् के प्रति बिल्कुल भी जागरूक नहीं है।'' (दि क्रिस्चन वारफेअर, दि बैनर आफ ट्रूथ ट्रस्ट, १९७६, पेज २९२, १०६)

इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि दक्षिणी बैपटिस्टों ने पिछले वर्ष २ लाख लोगों को खो दिया। और इससे भी अधिक प्रति वर्ष खो रहे हैं। ये तथाकथित इवेंजलीकल्स झुंड के झुंड चर्च से भाग रहे हैं। वे आइसिस से डर गये हैं, वे लैंगिक क्रांति से डर गये हैं, वे ईरान से डर गये हैं, वे ओबामा से डर गये हैं वे प्रत्येक चीजों से डर चुके हैं! पर अगर हम मसीह की सामर्थ में लिपटे हुये हैं तो हमें डरने की आवश्यकता नहीं है!

३. तीसरा, शिष्य हमारे हथियार के बारे में बोलते हैं।

जैसे मैं पद १३ से १७ पढता हूं अपने स्थानों पर खडे हो जाइये,

''इसलिये परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो, कि तुम बुरे दिन में साम्हना कर सको, और सब कुछ पूरा करके स्थिर रह सको। सो सत्य से अपनी कमर कसकर, और धार्मीकता की झिलम पहिन कर। और पांवों में मेल के सुसमाचार की तैयारी के जूते पहिन कर। और उन सब के साथ विश्वास की ढाल लेकर स्थिर रहो जिस से तुम उस दुष्ट के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको। और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो।'' (इफिसियों ६:१३−१७)

अब आप बैठ सकते हैं।

ध्यान दीजिये कि शिष्य क्या कहते हैं, ''कि परमेश्वर के सारे हथियार ले लो'' − हथियार बनाना नहीं है बल्कि लेना है। लेने के लिये सारे हथियार नि:शुल्क हैं। डॉ मैगी ने कहा था, ''कि कवच का हर भाग मसीह के बारे में बोलता है'' (पद १४ अ)। वह धर्म के मार्गो में हमारे चरणों को चलने के लिये नेतृत्व करता है (पद १५)। वह हमारी ढाल है। वह हमारे उद्वार का टोप है (पद १६)। ये सब हमारे बचाव शस्त्र हैं। यह दर्शाता है कि मसीह हमारा बचाव है। जिस घडी हम उन पर विश्वास रखते हैं हम परिवर्तित हो जाते है, मसीह अपनी उपस्थिति में हमें बनाये रखकर इन सारे बचाव शस्त्रों से लैस कर देता है।

तत्पश्चात शिष्य कहते हैं कि, ''आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो'' (पद १७)। अत: आपका बाइबल पढना अति आवश्यक है और उसमें से जितना स्मरण रख सके उतना याद करिये। मेरे जीवन में ऐसा भी समय आया कि जब मैने कोई पद बहुत लंबे समय पहले याद किया और और बाद में किसी समय वह शैतान को पराजित करने में मेरे बहुत काम आया। मैं वह रात कभी नहीं भूलूंगा जब मुझे ये शब्द याद आये कि, ''जिसे उस ने हमें उस प्यार में सेंत मेंत दिया'' (इफिसियों १:६) और मुझे संपूर्ण निराशा में से बचा लिया। जितना अधिक आप बाइबल स्मरण करेंगे उतना अधिक आप जानेंगे कि परमेश्वर का वचन आत्मा की तलवार है। मेरे जीवन का पद फिलिप्पियों ४:१३ है,

''जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।''

सब प्रकार के भय और कमजोरी में यह पद पिछले पचास सालों से मेरी ढाल बना हुआ है। भजन सत्ताईस के विशेषकर अंतिम दो पद मेरे लिये अनेक निराशाजनक परिस्थितियों में ढाल बने रहें। आप को भी उनको याद करना चाहिये। वे आप को विश्वास की अच्छी लडाई लडने में सहायता देंगे।

४. चौथा, आखिरकार, शिष्य योद्वा की लडाई के विषय में बोलते हैं।

कृपया खडे हो जायें जब मैं पद १८ और १९ पढता हूं।

''और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। और मेरे लिये भी, कि मुझे बोलने के समय ऐसा प्रबल वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से सुसमाचार का भेद बता सकूं जिस के लिये मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हूं।'' (इफिसियों ६:१८−१९)

अब आप बैठ सकते हैं।

मुझे कुछ याद आता है जो लेनार्ड रेवनहिल ने कहा था। मुझे यह याद नहीं आ रहा कि उन्होंने यह बात कहां कहीं थी, किंतु यह मेरे दिमाग में रह गयी। रैवन ने कहा था, ''कि प्रार्थना युद् है।'' प्रार्थना हमें युद् के लिये तैयार नहीं करती है नहीं! बल्कि प्रार्थना स्वयं युद् है!

डॉ मेरिल अंगर बहुत लंबे समय तक डलास थियोलोजिकल सेमनरी के प्राध्यापक रहे। उन्होंने एक किताब लिखी जिसका नाम था, बिबलीकल डेमनोलोजी (क्रेजल पब्लिकेशंस, पुन्र्मुद्रण १९९४) कुछ प्रचारक इसे खतरनाक पुस्तक मानते हैं। मेरा मानना है कि ये वे प्रचारक हैं जो स्वयं खतरनाक हैं! आप बिना शैतान और दुष्ट आत्मा के प्रति व प्रार्थना की सामर्थ के प्रति जागरूक हुये बगैर कैसे प्रचार कर सकते हैं? इसमें कोई विस्मय की बात नहीं कि पिछले साल २ लाख बैपटिस्ट उनके चर्चेस से भाग चुके हैं! इसमें कोई विस्मय की बात नहीं कि अनेक स्वतंत्र बैपटिस्ट चर्च अपनी संध्याकालीन आराधना बंद कर चुके हैं! इसमें कोई विस्मय की बात नहीं कि ८८ प्रतिशत बैपटिस्ट चर्च अपने जवान बच्चों को इस संसार में खो देते हैं! जो प्रचारक शैतान के विषय में नहीं सोचते, प्रार्थना की सामर्थ के विषय में नहीं सोचते वे चर्चेस में फैलती स्वधर्म त्याग की बीमारी को रोकने में असमर्थ हैं। परंतु प्रख्यात विद्वान डॉ विल्बर एम स्मिथ ने डैमनेलोजी पर अंगर की लिखी पुस्तक के बारे में बहुत सोचा। मैंने यह महसूस किया है, ''कि (यह) हर सुसमाचार प्रचारक के हाथों मे होना चाहिये।'' (इंर्टोडक्शन टू डॉ अंगर्स बुक, पेज ११) मैं सोचता हूं कि डॉ विल्बर एम स्मिथ बिल्कुल सही थे। अगर आप यह संदेश पढ रहे हैं, या इसको देख रहे हैं तो मैं आप को प्रेरित करूंगा कि आप इसकी एक प्रति खरीद कर उन प्रचारक को दे दीजिये जिनके पास नहीं है।

डॉ अंगर्स ने सही कहा था, ''प्रार्थना की व्यवस्था (इफिसियों ६:१९‚२० मे) किसी योद्वा को मिले हथियार के साधन के रूप में नहीं है....न यह कोई अन्य प्रकार का वाहन है.....इफिसियों में प्रार्थना वह वास्तविक संघर्ष है जिसमें शत्रु अर्थात (शैतान) नष्ट होता है (पराजित होता) है और विजय हासिल होती है, न केवल हमारे द्वारा, किंतु हमारे अन्य प्रार्थना योद्वा द्वारा भी जो प्रार्थनारत रहते है।'' (पूर्वोक्त, पेज २२३; इफिसियों ६:१९‚ २० पर व्याख्या; जोर मेरे द्वारा दिया गया)।

एक ब्रिटिश पास्टर जिनका नाम पॉल कुक था उन्होने एक पुस्तक लिखी थी फायर फ्राम हैवन (इवेंजलीकल प्रेस बुक्स‚ २००९) । हरेक जन को इसे पढना चाहिये। उन्होने कहा, ''कि हमें बार बार प्रार्थना करना चाहिये कि हमें नया नया पवित्र आत्मा का अभिषेक प्रतिदिन मिले...इसका अर्थ है कि हमे प्रार्थना करते रहना चाहिये और मांगते रहना चाहिये। पूर्व के चर्च यही करते थे, हमें भी यही करना चाहिये। परमेश्वर का सारा कार्य इसी पर निर्भर करता है...पवित्र आत्मा की नयी (सामर्थ) जोश हमें मिलता रहे..... (हमें) पवित्र आत्मा की सामर्थ का नया प्रवाह हमेशा ढूँढ़ते रहना चाहिये।'' (रेव्ह पॉल इ कुक‚ फायर फ्राम हैवन: टाइम्स आफ एक्स्ट्र ओर्डिनरी रिवाईवल‚ पूर्वोक्त, पेज १२०‚ १२१)

सब प्रमुख बातो में से एक बात यह भी है कि आपको हर बात के लिये प्रार्थना करना चाहिये − और विशेषकर शनिवार, के उपवास के दिन। डॉ जॉन आर राइस ने कहा, ''पवित्र आत्मा उपवास और प्रार्थना के उत्तर के फलस्वरूप मिलता है।'' (जॉन आर राइस, डी डी, प्रेयर: आस्किंग ऐंड रिसीविंग, सोर्ड आफ दि लोर्ड पब्लिशर्स, १९७०, पेज २२५) ।

''और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।'' (इफिसियों ६:१८)

आप पायेंगे कि प्रार्थना ही युद् है। मैं चाहता हूं कि आप विस्तार से खोये हुये लोगो के नाम लेकर (अगर संभव हो) तो प्रार्थना करें। अगर संभव हो तो मैं चाहता हूं कि आप परमेश्वर की आत्मा को मांगे ताकि उन लोगों को हमारे चर्च में लाया जा सके, उनकी आत्मा को सुसमाचार के सत्य का प्रकाश मिले, उन्हें अपने पाप का बोध हो, उन्हें उनके पापों को मसीह के बेशकीमती रक्त से शुद्व किये जाने के लिये लाया जा सके। प्रार्थना ही युद्व है। मैं चाहता हूं कि आप मेरे लिये भी प्रार्थना करे कि वह मुझे दिखाये कि क्या प्रार्थना करना है, और वह संदेश अविश्वासियों के मन में परिवर्तन लाने के लिये प्रयुक्त करे, और उस आराधना के समय को सामर्थ से भर देवें। सामूहिक प्रार्थना में, आश्वस्त रहिये कि आप भी अपनी ओर से जोर दे देकर प्रार्थना करें जब कोई ओर प्रार्थना कर रहा हो। अपना ध्यान इस बात पर लगाये रखिये कि प्रार्थना करने वाला किस बारे में प्रार्थना कर रहा है − आप भी उनकी हर विनती के पीछे ''आमीन'' कहिये। यह भी सुनिश्चित कीजिये कि शनिवार को, उपवास के दिन कई बार प्रार्थना करें। आमीन। आप शैतान के साथ युद् में प्रार्थना योद्वा हैं! आप महान लोग हैं! परमेश्वर आप को आशीष देवें!

जो अभी भी खोये हुये लोग हैं उनको मैं कुछ शब्द कहे बगैर अंत नहीं करूंगा। परमेश्वर के क्रोध से पापियों को बचाने के लिये यीशु क्रूस पर मरें। यीशु मृतकों में से जी उठे ताकि पापियों को नया जन्म और अनंत जीवन प्रदान कर सकें। परंतु आप के भीतर परमेश्वर के आत्मा के कार्य बिना ये बाते जीवंत नहीं हो सकती।

इसलिये, संपूर्ण सप्ताह, जब हम प्रार्थना करते हैं, प्रार्थना करते हैं तो पापियों के लिये रोटी मांगने के लिये प्रार्थना करिये। परमेश्वर से प्रार्थना करिये कि हमारी आराधनाओं में पवित्र आत्मा भेजे ताकि उनके अंधकारपूर्ण मनों को प्रज्जवलित करे, उन्हें उनके मनों में पापों के प्रति पश्चाताप से भर दें, और यह बतायें कि उन्हें जीवन में यीशु मसीह की बहुत आवश्यकता है प्रार्थना करिये! लूका ११:१३ को देखिये। यह स्कोफील्ड स्टडी बाइबल में पेज १०९० पर पाया जाता है। कृपया खडे हो जायें जब मैं पद पढता हूं।

''सो जब तुम बुरे होकर अपने लड़के−बालों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा'' (लूका ११:१३)

अब यहां वह सूची है जिसमें लिखी बातों के उपर आप को इस सप्ताह और विशेष कर शनिवार को प्रार्थना करना है।


१. अपने उपवास को गुप्त रखिये (जितना अधिक संभव हो) लोगो पर जाहिर मत करते रहिये (अपने रिश्तेदारों पर भी नहीं) कि आप उपवास कर रहे हैं।

२.  बाईबल पढने में समय बिताइये। अगर प्रेरितो के काम को पढेंगे (अच्छा होगा उसके प्रारंभिक भागों को पढें)।

३.  शनिवार के उपवास के दिन यशायाह ५८:६ को स्मरण कीजिये।

४.  प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर हमारे चर्च में दस और नये लोग दें जो हमारे चर्च में ठहरे रहें।

५.  उन जवानों के नाम लेकर परिवर्तन के लिये प्रार्थना कीजिये परमेश्वर से ५८:६ में कही बातों को उनके लिये करने के लिये मांगिये।

६.  प्रार्थना कीजिये कि आज (रविवार) को जो आगंतुक पहली बार आये हैं वे अगले रविवार भी आयें। संभव हो तो उनके नाम लेकर प्रार्थना कीजिये।

७.  परमेश्वर से प्रार्थना कीजिये कि मुझे मार्गदर्शन दें कि मैं अगले रविवार को क्या प्रचार करूं − सुबह और संध्या को।

८.  निमंत्रण के लिये प्रार्थना करें − केवल जवानों के प्रार्थना समूह के लिये (हमारे यहां उनमें से तीन समूह है)। अगर आप चाहें तो जॉन सेम्यूएल कैगन के लिये प्रार्थना करें।

९.  खूब मात्रा में पानी पीजिये। हर घंटे में एक एक गिलास पीजिये। अगर आपको रोज सुबह कॉफी पीने की आदत है तो प्रारंभ में ही एक बडा कप भरकर कॉफी पी लीजिये। शीतल पेय या स्फूर्ति देने वाले पेय पदार्थ मत पीजिये।

१०. अगर अपने स्वास्थ्य के लिये चिंतित हैं तो उपवास के पहले मेडिकल डॉक्टर से चर्चा कर लीजिये। (आप डॉ क्रेटन चान या डॉ जूडिथ कैगन को जो हमारे चर्च में हैं उन्हें दिखा सकते हैं) उपवास मत कीजिये अगर आप को कोई गंभीर विकार है तो जैसे डायबिटिज या उच्च रक्तचाप आदि। आप शनिवार का उपयोग इन निवेदनों के उपर प्रार्थना करने में भी बिता सकते हैं।

११. अगले दिन शनिवार की संध्या ५:३० तक चर्च में मिलने वाले भोजन के अतिरिक्त खाने में कुछ ग्रहण मत कीजिये।

१२. स्मरण रखिये कि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हमारे चर्च में जवान भटके हुये लोगों के मन परिवर्तन के लिये प्रार्थना करना − एवं जो नये लोग इस दौरान चर्च में आ रहे हैं वे हमारे साथ स्थायी रहें।

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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा बाइबल पाठ पढा गया: इफिसियों ६:१०−१९
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''आय एम प्रेयिंग फॉर यू'' (एस औ मेली क्लौ, १८३७−१९१०)


रूपरेखा

वर्तमान समय के युद् के लिये प्रार्थना योद्धा की आवश्यकता!

PRAYER WARRIORS FOR TODAY’S BATTLE!

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स

''निदान‚ प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनो। परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध‚ लोहू और मांस से नहीं‚ परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से‚ और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से‚ और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।'' (इफिसियों ६:१०−१२)

१. प्रथमत:‚ पौलुस आत्मिक युद् के लिये कहता है‚ इफिसियों ६:१०

२. दूसरा‚ शिष्य पौलुस हमारे शत्रुओं के विषय में बोलते हैं‚ इफिसियों ६:१२

३. तीसरा‚ शिष्य हमारे हथियार के बारे में बोलते हैं‚ इफिसियों ६:१३−१७
इफिसियों १:६; फिलिप्पियों ४:१३

४. चौथा, आखिरकार, शिष्य, योद्वा की लडाई के विषय में बोलते हैं‚
इफिसियों ६: १८‚१९; लूका ११:१३