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स्वधर्म त्याग के दिनों में उपवास और प्रार्थना

FASTING AND PRAYER IN A TIME OF APOSTASY
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २६ जुलाई, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, July 26, 2015


मैं चाहता हूं आप लूका अध्याय ४, और पद १८ से २१ निकालें। मि. प्रुद्योमे ने जो बाईबल पाठ पढा मैं उन्ही पदों को पढकर दोहरा रहा हूं। स्कोफील्ड स्टडी बाईबल में लूका ४:१८−२१ पेज १०७७ पर पाया जाता हैं।

''कि प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्धुओं को छुटकारे का और अन्धों को दृष्टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं। और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूं। तब उस ने पुस्तक बन्द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आंख उस पर लगी थीं। तब वह उन से कहने लगा, कि आज ही यह लेख तुम्हारे साम्हने पूरा हुआ है।'' (लूका ४:१८−२१)

अब आप बैठ सकते हैं।

यीशु ने यह पद यशायाह ६१:१‚२ में से पढा। जब वह ये पद पढ चुकें तो उन्होंने कहा कि इन पदों में लिखी बातें यीशु में पूर्ण होती हैं। वही एकमात्र जन थे जिनका अभिषेक सुसमाचार सुनाने के लिये हुआ था। वही एकमात्र जन थे जिनको परमेश्वर ने टूटे दिलो को जोडने के लिये भेजा था और अंधे लोगों को दृष्टि देने के लिये इस धरती पर भेजा। जिनको आघात लगे हैं और जो शोषित हैं उन्हें मुक्त करवाने के लिये मसीह को भेजा गया।

लोग यीशु से नफरत करते थे क्योंकि वह कहते थे कि वह ही एकमात्र जन हैं जिन्हें परमेश्वर ने भेजा है। नफरत करने वालों में उनके नगर नाजरथ के ही जानने वाले और मित्रगण थे। वे आश्चर्य से पूछते थे‚ ''क्या यही युसुफ का पुत्र नहीं है?'' (लूका ४:२२) ''ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए'' − आगबबूला हो गये। (लूका ४:२८) वे सब उस स्थान से उठे और उन्हें नगर से बाहर निकालने लगे। वह भीड उन्हें धक्का देकर एक चटटान की चोटी पर ले गई कि उन्हें नीचे गिराकर मार डाले। ''पर वह उन के बीच में से निकलकर चला गया।'' (लूका ४:३०) मैथ्यू हैनरी ने व्याख्या दी कि यीशु ने या तो उनकी आत्मिक आंखे चौंधिया दी थी या उनको संशय में डाल दिया, ''क्योंकि अभी उनका कार्य पूर्ण नहीं हुआ था बल्कि प्रारंभ ही हुआ था।''

यीशु ने नाजरथ छोड दिया और कफरनहूम चले गये। वहां के आराधनालय में एक दुष्टात्मा ग्रस्त आदमी था। मेरी पत्नी इलियाना और मैंने उस स्थल को देखा है। हमने उस प्राचीन आराधनालय के अवशेषों को देखा है। वह दुष्टात्मा ग्रस्त आदमी जोर से चिल्ला उठा‚

''हे यीशु नासरी‚ हमें तुझ से क्या काम? क्या तू हमें नाश करने आया है? मैं तुझे जानता हूं तू कौन है? तू परमेश्वर का पवित्र जन है।'' (लूका ४:३४)

यीशु ने उससे कहा ''चुप रह: और उस में से निकल जा!'' तब दुष्टात्मा उसे बीच में पटककर बिना हानि पहुंचाए उस में से निकल गई। लोग जो वहां जमा थे यह देखकर आश्चर्यचकित हुये। उन्होंने कहा‚ ''कि यह कैसा वचन है कि वह अधिकार और सामर्थ के साथ अशुद्ध आत्माओं को आज्ञा देता है, और वे निकल जाती हैं!'' ''सो चारों ओर हर जगह उस की धूम मच गई'' (लूका ४:३७)

तब यीशु आराधनालय से निकलकर पतरस के घर की गली की ओर बढ गये। जब मैं और इलियाना वहां थे तो हम यह देखकर आश्चर्यचकित हो गये कि पतरस का घर आराधनालय के कितने पास था − कुछ ही कदम की दूरी पर गली के दूसरी छोर पर था। उन्होने पतरस के घर की नींव खोद डाली और अब आप वहां इसके अवशेष देख सकते हैं। पतरस की माता घर में थी और उन्हें तेज बुखार था। यीशु ने बुखार को डांटा और बुखार उतर गया। जब दोपहर बीत रही थी लोग यीशु के पास दुष्टात्मा ग्रस्त और बीमारी से पीडित लोगो को लाने लगे। उसने उन पर हाथ रखे। उनमें से हरेक जन चंगा हो गया। दुष्टात्मा यह चिल्लाते हुये बाहर निकले‚ ''आप मसीह हो‚ परमेश्वर के पुत्र हो!'' और यह अदभुत वर्णन चलता रहता है! मुझे इसे पढना बहुत अच्छा लगता है!

मुझे यीशु की कहानी बताओ‚
   मेरे दिल पर इसका एक एक शब्द लिखा है।
मुझे यीशु की कहानी बताओ‚
   इतना मधुर जो कभी सुना न हो।
(''मुझे यीशु की कहानी बताओ'' फैनी जे क्रासबी‚१८२०−१९१५)

और कहानी चलती रही जब मसीह वापस स्वर्ग पर चले गये। हम मसीह की उसी सामर्थ को देखते हैं जो परमेश्वर की सामर्थ के साथ उतर आता है। और यह सामर्थ प्रथम, दितीय और तीसरी शताब्दी के चर्च में उतरती चली गई - और यह ''तीसरी दुनिया'' के देशों में भी आज उतरती है। चीन और दुनिया के अन्य ''अपंजीकृत'' चर्चेस में हजारो हजार लोग आज भी चले आ रहे हैं।

पर अमेरिका यूरोप और पश्चिमी देशों के हमारे चर्चेस में कुछ हो चुका है। १९ वी शताब्दी के मध्य में पश्चिमी दुनिया में कुछ खतरनाक घटा है। १८३० से प्रारंभ होकर कई चीजें बदलना प्रारंभ हो चुकी है। डॉ मार्टिन ल्योड जोंस ने कहा कि आज के चर्चेस की लगभग सभी समस्याओं की जड १९ सदी के मध्य में आरंभ हुई थी − बाइबल की आलोचना, रहस्यवाद से प्रदुषित सिनेटीकस और वेटीकेनुस की हस्तलिपियों की खोज, फिने का निर्णयवाद, मार्मन्स, यहोवा विटनेस, कैंपबेलाइटस, सेवंथ डे एडवेंटिस्ट, त्वरित बपतिस्मा, डारविनीज्म − ये सब चीजें पिछले ५० सालों में ही तो उछली है! ये एक विशेष शैतानी युग रहा। और फिर तीसरा विश्व युद् हुआ जिसने यूरोप को दुखी कर दिया। इसके साथ चर्च भी दुखी हो गये। हम इससे कभी उभर नहीं पाये। उदारवादी लोग चर्चेस को कह रहे हैं कि मनुष्य मूलत: अच्छा होता है − मनुष्य आगे बढ रहा है और एक अदभुत संसार में प्रगति कर रहा है। लोग नहीं जानते थे कि बाईबल कहती है कि मनुष्य बुरा होता है। साधारण लोग नहीं जानते थे कि उदारवादियों ने उन्हें गुमराह किया है। उन्होने सोचा कि मसीहत हास्यापद है। यह केवल परियों की कहानी है। हम इससे उपर ही नहीं गये। फिर दूसरा विश्व युद्व हुआ। देखिये उसके बाद कितनी पीढियों ने परमेश्वर को अस्वीकार कर दिया। उन्होने कहा कि‚ ''हम आँस्कविटज के कारण परमेश्वर में विश्वास नहीं करते और हिरोशिमा के कारण विश्वास नहीं करते।'' उन्हे यह सिखाया ही नहीं गया जैसा बाईबल मनुष्य की भ्रष्टता के बारे में बताती है। हमारे परदादा और पडपरदादा चर्च की तरफ से विरक्त हो गये। वे अनीश्वरवादी और आस्तिको की पीढी कहलाये। और अब हम आप का सामना कर रहे हैं − जो उनके बच्चे हैं।

रूढ़िवादी उदारवादियों के विरूद्व लड रहे थे। वे अच्छे लोग थे। मैं उन्हें पसंद करता हूं। पर उन्होनें यह कभी नहीं सोचा होगा कि निर्णयवाद के कारण चर्च में अनेकों अपरिवर्तित लोगों की भीड जमा हो गयी। जिसने बदले में छदम सुसमाचार प्रस्तुत कर दिया जिसके कारण फुलर सेमनरी के रॉब बेल जैसे लोग उत्पन्न हुये। (लव विंस - यूनिवर्सलिज्म) । लोग ऐसा व्यक्त करते हैं कि जैसे यह कोई नयी बात है। जबकि यह बिल्कुल भी नया नहीं है। बेल जैसे लोग एकेश्वर वादियों की नयी पौध है। वास्तव में बेल एकेश्वरवादी ही है − ऐसी ही संपूर्ण फुलर सेमनरी है सिर्फ नाम रह गया है। तो यह नये एकेश्वरवादी अविश्वासी इधर उधर दौडते हुए आप को मिल जायेंगे जो स्वयं को ''इवेंजलीकल्स'' कहलवाते हैं। सचमुच यह त्रासदी है! पिछले साल सदर्न बैपटिस्ट कनवेंशन ने बारह महिनों में ऐसे २००‚००० लोगों को खोया!

यह अविश्वसनीय है! वे आइसिस से डर गये थे। उन्होंने देखा कि समाचार में आ रहा हैं कि मसीही लोगो के गले काटे जा रहे हैं‚ और वे डर गये; वे सेक्सुअल क्रान्ति से डर गये; वे ओबामा से डर गये; वे हर घटना से डर गये − इसलिये वे चर्च से भाग गये ताकि स्वयं को छिपा सके!

यह दिमाग झकझोरने वाली बात थी। बारह महिनों में २००‚००० लोगों ने चर्च छोड दिया! तो हम अपनी बात पर आते हैं। हम हॉलीवुड से पंद्रह मिनिट दूर लॉस ऐंजीलिस के सिविक सेंटर में है। यह पश्चिमी दुनिया की बगल में है। एवं अविश्वासियों से भरा एक चर्च हम मान लेते है! क्या गैर मसीही परिवारों के कालेज जाने वाले जवान लोगों से मिलकर बने झुंड को हम चर्च मान सकते हैं? यह बिल्कुल असंभव है! पर इससे भी बढकर हम आत्मिक जाग्रति के लिये प्रार्थना कर रहे हैं? हा! हा! हा! कितना असंभव सपना है! नहीं है क्या? मानवीय रूप में सोचे तो यह संभव नहीं है। पर यही परमेश्वर की सत्ता की बात होती है। यीशु ने कहा था,

''मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।'' (मरकुस १०:२७)

पहली शताब्दी से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं बिगडा है। यीशु ने यशायाह से संदर्भ देते हुये कहा, ''कि आज ही यह लेख तुम्हारे साम्हने पूरा हुआ है।'' (लूका ४:२१) वे सोचते थे कि यीशु पागल व्यक्ति है। उन्होंने तब भी उन्हें मारने का प्रयास किया। पर वह उन के बीच में से निकलकर चला गया (लूका ४:३०)

वह उस आराधनालय से निकलकर एक के बाद एक आश्चर्यकर्म करता चला गया। कुछ ही समय में उसके अनुयायी पूरे रोमन साम्राज्य में फैल गये। जब वे थिस्सलुनीकियों शहर पहुंचे तो वहां के शासक चिल्ला उठे, ''कि ये लोग जिन्हों ने जगत को उलटा पुलटा कर दिया है, यहां भी (पहुंचे हैं) आए हैं।'' (प्रेरितो के काम १७:६)

कुछ भी अधिक नहीं बदला है। मनुष्य अभी भी समान है − अविश्वास और विद्रोह से भरा हुआ। परम पिता परमेश्वर आज भी समान है, आज भी सिंहासन पर है, आज भी ताकतवर है, आज भी नियंत्रण में है। मसीह आज भी समान है। वह मुरदों में से जी उठा और वही प्रभु है!

वह प्रभु है, वह प्रभु है,
   वह मुरदों में से जी उठा है,
और वह प्रभु है।
   हर घुटना झुकेगा,
हर जीभ अंगीकार करेगी
   कि यीशु मसीह प्रभु है!
(''वह प्रभु है'' मार्विन वी फ्रे, १९१८−१९९२)

''आप प्रभु हैं'' इसे गाइये!

आप प्रभु हैं, आप प्रभु हैं
   आप मुरदों में से जी उठे हैं,
और आप प्रभु हैं।
   हर घुटना झुकेगा,
हर जीभ अंगीकार करेगी
   कि यीशु मसीह प्रभु हैं!

परमेश्वर मसीह और पवित्र आत्मा इस विश्व में बडी ताकत है! मैं पूर्ण रूप से सहमत हूं कि यीशु मसीह आज भी पवित्र आत्मा की सामर्थ भेज सकता है − जैसा उसने अतीत में किया! हम इसे नहीं कर सकते। हममें सामर्थ नहीं है! क्योंकि बाइबल कहती हैं ''सामर्थ्य परमेश्वर का है'' (भजन संहिता ६२:११) जब परमेश्वर अपना आत्मा उडेंलता है तो बडी और महान चीजें होती हैं। जॉन नॉक्स, स्काटिश रिफार्मर, ने कहा था कि स्कॉटलैंड खूनी मेरी की तलवार से बचा था क्योंकि ''परमेश्वर ने साधारण व्यक्तियों को पवित्र आत्मा बहुतायत से दिया।'' (दि वर्क्स आँफ जॉन नाक्र्स, वोल्यूम १, संस्करण १९४६, पेज १०१)

जब आप हमारे चर्च के लिये प्रार्थना करते हैं तो हमारे मध्य में परमेश्वर के आत्मा के प्रवाह के लिये दुआ करें। जब आप सुसमाचार प्रचार के लिये जाते हैं तो परमेश्वर के आत्मा के प्रवाह के लिये दुआ करें। जब आप अपनी कार में जा रहे हो तो तो अपने कार्य के उपर परमेश्वर के आत्मा के प्रवाह के लिये दुआ करें! महान प्रचारक चार्ल्ज़ साइमन ने कहा था, ''मन परिवर्तन का कार्य आप के भीतर बहुत धीमे धीमे होना चाहिये जब तक कि परमेश्वर अपना आत्मा आप पर बहुत अधिक परिमाण में न उडेल दें।'' (डब्ल्यू करूस, मेमोयर्स आफ चार्ल्ज़ साइमन, २ रा संस्करण, १८४७, पेज ३७३)

स्मरण रखिये, कि हम परमेश्वर आत्मा का उडेला जाना संभव नहीं कर सकते हैं। मैं चालीस सालों से प्रार्थना कर रहा हूं कि इस चर्च पर पवित्र आत्मा उडेला जायें। परमेश्वर ने अभी तक उत्तर नहीं दिया है। अब पीछे मुडकर मैं देख सकता हूं उन कारणों को सोचता हूं कि उसने क्यों उत्तर नहीं दिया। पर अब हमारे पास इससे भी बेहतर चर्च है। हमारा नेतृत्व परिवर्तित है। अब हमारे अधिकतर जवान परिवर्तित है। शायद परमेश्वर अब हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर देंगे कि − वह कम से कम अपनी आत्मा को उडेलेंगे कि दस बारह जवानों को इस गर्मी चर्च में भेजे कि वह परिवर्तित हो जाये। कृपया उपवास के उपर हमारा जो स्मरण करने वाला पद है उसे निकालेंगे। यह यशायाह ५८:६ है। यह स्कोफील्ड बाइबल के पेज ७६३ पर है। कृपया खडे होकर इसे जोर से पढिये।

''जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जुओं को टूकड़े टूकड़े कर देना?'' (यशायाह ५८:६)

अब आप बैठ सकते हैं। कृपया उस पद को याद कीजिये। जब आप अगले शनिवार उपवास करें तो इसे जोर से पढें और प्रार्थना करें। ध्यान दीजिये कि यशायाह ५८:६ यशायाह ६१:१−२ के कितने समान है।

''प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं; कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं; कि सब विलाप करने वालों को शान्ति दूं'' (यशायाह ६१:१−२)

हम इन दो गदयांशों की तुलना करें तो पाते हैं कि अगर हम परमेश्वर से प्रार्थना करते रहें व उपवास रखते रहें तो मसीह का कार्य इस धरती पर जारी रह सकता है।

डॉ जॉन आर राइस ने कहा (१८९५ − १९८०), ''मैं जानता हूं कि सच्चे उपवास और परमेश्वर की बांट जोहते हुये मन को नम्र बनाने से हम वह आशीषें पायेंगे जो परमेश्वर हमें देना चाहता है!........उपवास और प्रार्थना करते रहो जब तक वह आशीष न मिल जाये।'' (प्रेयर: आस्किंग एंड रिसीविंग, सोर्ड आफ दि लोर्ड, संस्करण १९९७, पेज २३०, २३१)

जोनाथन एडवर्ड (१७०३ − १७५८) ने अपने संदेश सिनर्स इन दि हैंडस आँफ एन एंग्री गॉड प्रचार करने से पूर्व तीन दिन तक प्रार्थना और उपवास किया......पहला आत्मिक जागरण भी इसी संदेश से शुरू हुआ (एल्मर टाउंस, डी मिन, दि बिगनर्स गाइड टू फैस्टिंग, रीगल पब्लिकेशंस, २००१, पेज १२३, १२४)

डॉ मार्टिन ल्योड जोंस ने कहा था, ''मुझे आश्चर्य होता है कि कभी हमें उपवास जैसे विषय पर भी विचार करने की जरूरत होगी। सत्य तो यह है कि, क्या ऐसा नहीं है, कि उपवास का यह विषय हमारे संपूर्ण मसीही जीवनों से ही ओझल हो गया है...... और तो और हमारी विचारधारा से ही गायब हो गया है।'' (स्टडीज इन दि सर्मन आँन दि माउंट, भाग २, अर्डमैंस, पेज ३४)

प्राचीन दूसरी शताब्दी के पास्टर पोलीकार्प (८०−१६७ सी) ने कहा था, ''चले हम उस शब्द की ओर लौटे जो हमको प्रारंभ से सौंपा गया है; अत: ‘प्रार्थना में लगे रहे’ और लगातार ‘जबरदस्त रूप में उपवास’ में लगे रहें।'' (फिलिप्पयों की पत्री)

स्पर्जन ने (१८३४ − १८९२) कहा था, ''हमने..... किश्चन चर्च ने उपवास त्यागकर एक बडी आशीष खो दी'' (सी. एच. स्पर्जन, ए डिस्परेट केस − हाउ टू मीट इट, '' जनवरी १०, १८६४)

डॉ आर ए टोरी (१८५६−१९२८) ने कहा था, ''अगर हमें सामर्थ से प्रार्थना करनी है तो हमें उपवास रखना चाहिये'' (हाउ टू प्रे, २००७ संस्करण, पेज ३७)

सम्मानित जॉन वेस्ली (१७०३−१७९१) ने कहा था, ''क्या आपने उपवास और प्रार्थना के कोई दिन निर्धारित कर रखे हैं? अनुग्रह के सिंहासन के सामने लगन से प्रार्थना करते रहिये और दया आपके लिये उतर आयेगी।'' (दि वर्क्स आफ जॉन वेस्ली, वोल्यूम १०, १८२७ संस्करण, पेज ३४०)

महान चायनीज इवेंजलिस्ट डॉ जॉन सुंग (१९०१−१९४४) ने कहा था, ''अनेक (जवानों ने) प्रार्थना और उपवास के सत्र रखे थे। विद्यार्थयों का परमेश्वर पिता के प्रति प्रेम देखने योग्य था।'' (दि डायरी आँफ जॉन सुंग, लैव्यव्यवस्था और उत्पत्ति की पुस्तकों से संकलित, २०१२, पेज २९८)

प्रवर्तक चीन के मिशनरी डॉ जेम्स हडसन टेलर ने कहा था, ''कि शांसी में मैंने पाया था कि चायनीज मसीही जन प्रार्थना और उपवास में समय बिताते थे......यह एक अलौकिक अनुग्रह से भरा तरीका होता है। सबसे बडी रूकावट जो हमारे कार्यो में आती है कि हम हमारी कल्पना शक्ति में स्वयं को बहुत महान समझते हैं जबकि उपवास में हम सीखते हैं कि हम कितने दीन और कमजोर प्राणी हैं। हम थोडी सी ताकत के लिये थोडे से मांसाहारी भोजन से ताकत पाते हैं और उस पर निर्भर होते हैं'' (दि न्यू एनसाइक्लोपीडिया आफ किश्चन कोटेशंस, बेकर बुक्स, २०००, पेज ३६०)

डॉ तिमोथी लिन (१९११ − २००९) ने कहा था, ''जैसे ही हम उपवास और प्रार्थना प्रारंभ करते हैं हमारा आत्मिक जागरूकता वाला पक्ष खुल जाता है......ये मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से यह कह रहा हूं। दि सीक्रेट आँफ चर्च ग्रोथ, फस्र्ट चाइनीज बैपटिस्ट चर्च, १९९२, पेज २३)

हम हमारे चर्च में अगले शनिवार फिर से उपवास रखेंगे। मैं आप को कुछ बिंदु देना चाहता हूं कि इसे कैसे करना चाहिये।


१. अपने उपवास को गुप्त रखिये (जितना अधिक संभव हो) लोगो पर जाहिर मत करते रहिये (अपने रिश्तेदारों पर भी नहीं) कि आप उपवास कर रहे हैं।

२. बाईबल पढने में समय बिताइये। अगर प्रेरितो के काम को पढेंगे (अच्छा होगा उसके प्रारंभिक भागों को पढें)।

३. शनिवार के उपवास के दिन यशायाह ५८:६ को स्मरण कीजिये।

४. प्रार्थना कीजिये कि परमेश्वर हमारे चर्च में दस और नये लोग दें जो हमारे चर्च में ठहरे रहें।

५. उन जवानों के नाम लेकर परिवर्तन के लिये प्रार्थना कीजिये परमेश्वर से ५८:६ में कही बातों को उनके लिये करने के लिये मांगिये।

६. प्रार्थना कीजिये कि आज (रविवार) को जो आगंतुक पहली बार आये हैं वे अगले रविवार भी आयें। संभव हो तो उनके नाम लेकर प्रार्थना कीजिये।

७. परमेश्वर से प्रार्थना कीजिये कि मुझे मार्गदर्शन दें कि मैं अगले रविवार को क्या प्रचार करूं − सुबह और संध्या को।

८. निमंत्रण के लिये प्रार्थना करें − केवल जवानों के प्रार्थना समूह के लिये (हमारे यहां उनमें से तीन समूह है)। अगर आप चाहें तो जॉन सेम्यूएल कैगन के लिये प्रार्थना करें।

९. खूब मात्रा में पानी पीजिये। हर घंटे में एक एक गिलास पीजिये। अगर आपको रोज सुबह कॉफी पीने की आदत है तो प्रारंभ में ही एक बडा कप भरकर कॉफी पी लीजिये। शीतल पेय या स्फूर्ति देने वाले पेय पदार्थ मत पीजिये।

१०. अगर अपने स्वास्थ्य के लिये चिंतित हैं तो उपवास के पहले मेडिकल डॉक्टर से चर्चा कर लीजिये। (आप डॉ क्रेटन चान या डॉ जूडिथ कैगन को जो हमारे चर्च में हैं उन्हें दिखा सकते हैं) उपवास मत कीजिये अगर आप को कोई गंभीर विकार है तो जैसे डायबिटिज या उच्च रक्तचाप आदि। आप शनिवार का उपयोग इन निवेदनों के उपर प्रार्थना करने में भी बिता सकते हैं।

११. अगले दिन शनिवार की संध्या ५:३० तक चर्च में मिलने वाले भोजन के अतिरिक्त खाने में कुछ ग्रहण मत कीजिये।

१२. स्मरण रखिये कि सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हमारे चर्च में जवान भटके हुये लोगों के मन परिवर्तन के लिये प्रार्थना करना − एवं जो नये लोग इस दौरान चर्च में आ रहे हैं वे हमारे साथ स्थायी रहें।


अब मैं कुछ शब्द उन लोगों के लिये कहूंगा जो अभी तक परिवर्तित नहीं हुये हैं। यीशु मसीह आपके पापों का सवोच्च मोल चुकाने के लिये कूस पर मरे इसलिये आपके पापों का कोई न्याय नही होगा। वह शारिरिक देह में मांस और हडडी के रूप में पुर्नजीवित हुये। उन्होनें ऐसा इसलिये किया कि वह आप को अनंत जीवन प्रदान कर सकें। यीशु जीवित होने के पश्चात तीसरे स्वर्ग में परमेश्वर पिता के दाहिने हाथ विराजमान हैं। आप विश्वास रखकर उनके पास आ सकते हैं और वह आप को पाप और न्याय से बचायेंगें! परमेश्वर आप को आशीष देवें। आमीन! डॉ चान मैं निवेदन करता हूं कि आप प्रार्थना करें।

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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा बाइबल पाठ पढा गया: लूका ४:१६−२९
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''कम मायसोल दाय सूट पिपेर'' (जॉन न्यूटन १७२५−१८०७)