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साथ साथ हम मजबूत है अकेले हम कमजोर!

TOGETHER WE ARE STRONG! ALONE WE ARE WEAK!
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २१ जून, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, June 21, 2015

“और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो” (इब्रानियों १०:२४−२५)


मेरे दूसरे संदेशों के समान यह संदेश भी, कुछ हल्की सी व्यग्रता के साथ प्रारंभ होता है। मैंने सुना है कि दो नई लड़कियां हमारे जवानो को पसंद करती है। उनका कथन है कि, “वे बहुत मिलनसार है!” किंतु वे मुझे पसंद नही करती। मैं इस बारे में सोच रहा था और मेरा दिमाग उलझन में पड़ा हुआ था। ऐसा नही कि मेरा संदेश उबाउ होता है क्योंकि मैं तो मेरे संदेश को रूचिकर बनाने के लिये बहुत मेहनत करता हूं। जब मैं प्रचार करता हूं तो जवान लोगो के मुंह थोड़े खुले और आंखे मुझ पर केंदित रहती है। यह मेरे व्यक्तित्व के कारण भी नहीं है। मैं जवान लोगो के साथ रहना पसंद करता हूं। और वे बता भी सकते हैं कि मैं उनके साथ रहता हूं। मै सोचता हूं कि उन दो लड़कियो को जो बात उदास कर देती है वह मेरे संदेश के अंत में बोली गई बात है। मैं एक छोटी प्रार्थना करता हूं। फिर मैं पास में टीवी कैमरे के सामने जाता हूं। मै दर्शको से यू टयूब और हमारी वेबसाईट पर बात करता हूं। मैं देख रहे लोगों से कुछ इस तरह से बोलता हूं − “कि आप जो भी करते हो, बाइबल के प्रचार वाले चर्च में आइये, विशेष कर जहां संध्या की आराधना होती है आपके लिये द्वार खुले है।” मैं ने कुछ अंतिम शब्द जेरी फाल्वेल से उठाये हैं जब वे अपना टीवी संदेश अंत करते है। “हर बार आइये आपके लिये द्वार खुले है” फिर मैं कई बार यह भी कह देता हूं कि, “एक चर्च से दूसरे चर्च मत भागिये”। मेरे संदेश के अंत में ये वे शब्द है जो उन नई लड़कियों को नहीं भाते थे। वास्तव में देखा जाये तो इसी बात पर उन्होंने चर्च छोड़ दिया।

तो क्या मैं ऐसा कहना छोड़ दूंगा? नहीं − मैं तो ऐसा कहता रहूंगा। क्यों? क्योंकि यहीं बात तो जवानों को करते रहने की जरूरत है − इसलिये! हमारे चर्च में संख्या किशोरावस्था में पहुंच गये और जवानी के प्रारंभिक सालों में परिवर्तित लोगों से बढ़ जाती है। ऐसा कहीं देखने नहीं मिलता है। अधिकतर जवान लोग लगभग 80 प्रतिशत चर्च छोड़ देते हैं। पर मैं यह दूसरे संदेश में बोलूंगा। हम उनकी जवानी के समय से ही उन्हें चर्च में जोडना आरंभ कर देते हैं और संख्या में बढते जाते हैं जबकि दूसरे चर्च उन्हें खो देते हैं। हम उन पर जोर जबरदस्ती करके − या फिर “मीठी मीठी बाते” करके ऐसा नहीं करते। आजकल के बच्चे इतने चतुर हो गये हैं कि वे इस प्रकार के बहलाने फुसलाने को भली भांति समझते हैं। मैं तो सीधे उनसे कहता हूं। मैं कहता हूं, “यही वह चीज है जिसकी तुमको जरूरत है − और इस कारण से तुमको यह जरूरी है।” कोई दुराव छिपाव नहीं! सीधी बात कह दी! या तो मान लो या फिर यहां आना छोड दो। अगर वे जाते भी हैं तो भी वे यह तो जानते हैं कि मैंने उनके साथ ईमानदारी बरती! मैं इस बात की कोशिश नहीं कर रहा हूं कि आप से प्रशंसा पाउं! मैं तो आपको परिवर्तित करना चाह रहा हूं। मेरा उददेश्य हैं कि आपको सच्चा मसीही बनने में मदद करूं और आप एक मजबूत चर्च सदस्य बने!

आप कह सकते हैं कि, “आप को इस चर्च की इतनी आवश्यकता क्यों है?” मैं आपको बताउंगा कि क्यों? क्योंकि बिना चर्च के कुछ स्थायी नहीं इसलिये आपको चर्च की आवश्यकता है! एलविन टाफलर ने इसे फ्यूचर शॉक में लिखा है उन्होने “दि डैथ आफ परमनेंस” “दि कन्सैप्ट आफ टांजियंस” “फेंडशिप इन दि फ्यूचर “सीरियल मैरिजेस” ऐंड “हाउ टू लूज फ्रेंडस” के बारे में बोला है। बदलाव, बदलाव, बदलाव। ऐसे चलायमान और बदलते रहने से हमें स्थायी घर, स्थायी मित्र, और स्थायी मित्रता कदापि हासिल नहीं होती है! हर चीज और हर जन हम जानते है कि अस्थायी है! ये बात जवान लोगों को भविष्य मे धक्का पहुंचा सकती है! टाफलर ने इस पुस्तक को १९७० में लिखा है जब मैंने इसे फिर से पिछले गुरूवार को पढा तो ऐसा लगा कि यह पिछले महिने ही लिखी गई है! हर कोई इतनी शीघ्रता से बदल जाता है पलट जाता है कि ऐसा लगने लगता है कि जवान मानों सडको पर बसर करने वालो के समान हो गये हो जो अलग अलग कार्डबोर्ड बॉक्स में अपना घर बदलते है हर रात जगह बदलते है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि कितने ही बच्चे नशीली दवाओ के आदी हो चुके हैं! संसार इतनी तेजी से घूम रहा है कि इन बच्चो को जीवन को सहने योग्य बनाने के लिये नशीली दवाओं की आवश्यकता पडने लगी। मैं बच्चो की यह बात सुनकर चौंक उठता हूं जब वे एक या दो घंटे पहले मिले व्यक्ति को भी “मित्र” कहने लगते हैं। मैं दोष नहीं ढूंढ रहा हूं। मैं तो बस देखता रहता हूं। आज कल के बच्चे इतनी जल्दी मित्र बदल लेते हैं जितनी जल्दी हम अधोवस्त्र बदलते हैं!

पॉल मैककार्टनी ठीक मुझसे एक साल छोटे थे। वह जवानी में हिप्पी होने लायक थे। दूसरे हिप्पयों के समान, बीटल्स के पॉल मैककार्टनी, भी अकेलेपन की समस्या से संघर्ष कर रहे थे उन्होने वह अजीब गीत लिखा जिसे मि गिफिथ ने थोडी देर पहले गाया − जब उन्होने इसे जॉन लेनन के साथ गाया तो बीटल्स के साथ यह सबसे बडा हिट हो गया। यह दो लोगो की बात करता है एक (ऐलिनोर रिगबी जो मध्यावस्था की अविवाहित महिला) थी। और दूसरे फादर मैकेंजी, एक धर्मपुरोहित जो अकेले जीवन यापन करते थे।

फादर मैकेंजी ऐसे संदेश को लिख रहे हैं जिसे कोई नहीं सुनेगा
कोई पास नहीं आयेगा।
उन्हें काम करते हुये देखो अपने मोजो को ठीक कर रहे थे जब वहां कोई नहीं है।
वह किस बात की चिंता करते है?

एक बूढ़ा पुरोहित एक संदेश लिख रहा था जिस पर कोई ध्यान नहीं देगा। अपने मोजे के छेद को सुधारता हुआ “जब उन्हें कोई नहीं देख रहा हो”। “उन्हें किस बात की चिंता है?” वह तो एकाकी जीवन के इतने आदी हो गये कि वह उन्हें इतना परेशान भी नहीं करता।

ऐलिनोर रिगबी का देहांत चर्च में हुआ और उनका नाम दफन हो गया।
उस समय कोई भी नहीं पहुंचा।

बिना बच्चों के उनका देहांत हो गया। उनके अंतिम संस्कार में कोई भी नहीं पहुंचा।

फादर मैकेंजी कब्र में पहुंच कर मिटटी में विलीन हो गये।
उनके संदेश से कोई भी नहीं बचाया जा सका।

उनके अंतिम संस्कार में कोई भी नहीं पहुंचा। उनके संदेश को किसी ने नहीं सुना। कोई भी नहीं बचाया जा सका। यहां यह कोरस इस प्रकार कहती है,

सब एकाकी लोग,
वे सब आते कहां से है?
सब एकाकी लोग,
किस चीज से उनका संबंध होता है?

इस प्रकार के विचारो से हिप्पी चिंतित हो जाते हैं। वे हजारों की संख्या मे आते है -बर्कले नामक स्थान पर हैट ऐशबरी आफ सैन फ्रांसिस्को हालिवुड इमारतो पर पर वेनिस बीच पर। उनके किसी झुंड को एक पुराना घर मिल जाता है। वे सब वहां रहने लग जाते है। कुछ तो वहां नशे में “चूर चूर” होकर एक दो रात ऐसे ही गिरे पडे होते हैं। वे झुंड में रहना पसंद करते है उन्हें समूह की भावना अच्छी लगती है। आप आसानी से उन्हें चर्च ला सकते हो उन्हें मोटे कपडे पर या फर्श पर बैठाया जा सकता है। इन्हें “यीशु के प्रति सनक” रखने वाले या “यीशु के लोग” कहा जा सकता हैं।

बैपटिस्ट तो वास्तव में छूट गये। उनको तो ऐसे हजारो बच्चे मिल सकते है। पर वे तो इससे डरते थे। अब तो बहुत देर − हो चुकी है अनंत काल तक की देर। पेंटीकोस्टल और करिश्माई लोगो ने उन्हे ले लिया। आज बैपटिस्ट पूर्वी और हिस्पैनिक बच्चो से डरते है। उनको तो ऐसे हजारो बच्चे मिल सकते है। पर वे तो इनसे भी डरते है। जल्दी ही बहुत देर हो जायेगी − अनंत काल तक की देर − फिर से।

पर आपके बच्चों को तो ऐसे किसी कम्यूनल घर की आवश्यकता नहीं जहां उन्हें नशे में धुत्त रहना पड़े। आप तो समूह में रहने की भावना से भी कोसों दूर हो गये हैं। मैं कुछ समय पहले एक मित्र से बात कर रहा था जो “यीशु के इन दीवानो” के साथ काम करता था। मैंने उससे पूछा कि जवान लोगो को अब ऐसे समूह में रहने की आवश्यकता क्यों महसूस नही होती जैसे पहले हिप्पयों को होती थी। उसने कहा, “मैंने सोचा नहीं मैं नहीं जानता।” जैसे ही उसने यह कहा मेरे मन में उत्तर आया − “कि ऐसा इसलिये है क्योंकि अब उनके पास आई फोन और स्मार्ट फोन है।” वे उस पर लिख सकते है बात कर सकते है − और ऐसा मान सकते है कि उनके अनेको मित्र है। इन मशीनों ने सच्चे दोस्तो का स्थान ले लिया है। कौन सच्चे मित्र बनाने की परेशानी मोल ले − जब इतनी आसानी से इलेक्ट्रानिक मित्र उपलब्ध है? ऐलिनोर रिगबी और फादर मैकेंजी को कभी इतना अकेला महसूस नहीं होता अगर उनके पास ये गैजेटस होते। उनके पास भी “आभासी मित्र” होते पर इन “आभासी मित्रों” में सच्चे मित्रों की खासियत नहीं पायी जाती है! बिल्कुल भी नहीं! दक्षिणी कैरोलिना के उस जवान लडके के बारे में तो सुना ही होगा? उसने पिछले सप्ताह नौ लोगो को मार डाला। उसके साथ क्या दिक्कत थी। वह इंटरनेट प्राणी था! इसने उसके दिमाग को गड्डमड्ड कर डाला। कुछ समय के लिये तो मशीनों से बाहर निकलो! मशीनों से बाहर निकलो और वास्तविक जीवन जियो! और चर्च में आओ! यहां पर मुझे यह पद याद आता है,

“और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो” (इब्रानियों १०:२४−२५)

इस पद पर मैंने दस से अधिक व्याख्यायें पढी हैं। सभी व्याख्यायें कहती हैं कि स्थानीय चर्च में संगति करता नितांत आवश्यक है। डा डब्ल्यू ए किसवेल ने कहा, “कि बाइबल में यह पद स्थानीय पद की व्याख्या को दर्शाते हुये सबसे मजबूत समर्थन प्रस्तुत करता है कि स्थानीय चर्च का बहुत महत्व है........और चर्च के (प्रति) विश्वसनीय रहना चाहिये।” (दि किसवेल स्टडी बाइबल, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, १९७९ संस्करण, पेज १४३८; इब्रानियों १०:२५ पर व्याख्या)

मै आपको एक आधुनिक अनुवाद देता हूं। मैं केवल केजेवी से ही प्रचार करता हूं। मैं और किसी दूसरे अनुवाद की अनुशंसा नहीं करता। पर कभी किसी दूसरे आधुनिक अनुवाद को पढने से उस पद का प्रभाव “महसूस” करने को मिलता है। यहां एनएएसवी और एनआयवी अनुवादों को साथ साथ रखकर जोडा है,

तो आओ एक दूसरे को प्रेम और भले कार्यो द्वारा प्रेरित करे। एकत्रित होना न छोडे जैसा कि कितने लोग करते है किंतु एक दूसरे को उत्साहित करें और जैसे जैसे दिन करीब आता है − उत्साहित करते रहना न छोडे। (इब्रानियों १०:२४ एनएएसवी; १०:२५ एनआयवी)

एक दूसरे को प्रेम और भले कार्यो में “उत्साहित” बने रहने के लिये हमें चर्च में रहना आवश्यक है। “एक दूसरे को प्रेरणा देने के लिये” चर्च में बने रहना आवश्यक है। जोन आर्थर जिसे “अंतिम समय की मांग कहते है” − जो यह बताता है कि अधिकाधिक समय चर्च में होना आवश्यक है “और जैसे जैसे दिन करीब आता है” वह “दिन” अर्थात मसीह के द्वितीय आगमन का दिन। यह एक बहुत महत्वपूर्ण भविष्यवाणी है। जैसे जैसे हम अंतिम दिनो में प्रवेश करते जाते हैं हमें और अधिक स्थानीय चर्च की निकटता में बने रहना है। क्यों? क्योंकि अंत के दिनों में हमारे उपर और अधिक सामाजिक तनाव आयेगा कि हम अपना विश्वास खो दें। पुराने दिनो में तो लोग सप्ताह में एक दिन आकर अपने विश्वास को मजबूत बनाते थे। पर अब सामाजिक परिवर्तन की तेज हवा ने ऐसा रूख बदला है कि लोग चर्च में मसीही मित्रों की संगति में रहने के बजाय कही और रहना पसंद करते है (फ्यूचर शॉक!) सुनिये थॉमस हेल उनकी कमेंटरी में क्या कहते हैं “अगर कोई (अपने विश्वास में) कांपता है तो उसे अति शीघ्र उत्साहित करो और मजबूत बनाओ। एक दूसरे को प्रेम व भले कार्यो के लिये प्रेरित (उत्साहित) करते रहो। ध्यान रखो कि कोई (पाप और संसारीपन) में फिर से न घिर जाये। साथ साथ हम मजबूत होते है पर अकेले हम कमजोर होते जाते है।” (थॉमस हेल, दि अप्लाईड न्यू टेस्टामेंट कमेंटरी, किंगसवे पब्लिकेशंस, १९९७, पेज ९१३, ९१४; इब्रानियों १०:२४ पर व्याख्या; कोष्ठक में डॉ हिमर्स की व्याख्या)

स्थानीय चर्च न केवल वह स्थान है जहां आप बाइबल अध्ययन के लिये आते हैं यद्यपि यह बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी संगति केवल भोजन पर ही नहीं टिकी है जो हम आराधना के बाद करते हैं यद्यपि यह बहुत महत्वपूर्ण है। पर हमारी संगति चर्च के उददेश्य के उपर टिकी है − जो दूसरे जवान लोगो को विश्वास में लाने के लिये बढ रही है जो मसीही नहीं है। थॉमस हेल की कमेंटरी कहती है, “चर्च का प्राथमिक उददेश्य सुसमाचार प्रचार है.........उसका प्राथमिक प्रयोजन पुरूष और महिला को यीशु और उद्वार के पास लेकर आना है।” (उक्त संदर्भित, पेज १२५)

तो हम नये लोगो को बताते हैं, “हमारे साथ आइये! हमारे साथ खाइये! हमारे साथ मित्र बनाइये! हमारे साथ आराधना कीजिये! हमारे साथ सुसमाचार प्रचार के लिये जाइये! पर चर्च अवश्य आइये! शाम की आराधना में आइये! प्रार्थना सभा में आइये! परमेश्वर के परिवार में आइये!” “साथ साथ हम मजबूत होते है पर अकेले हम कमजोर होते जाते है।”

हर कोई इसे अभी की अभी नहीं करेगा हम आपके लिये इंतजार करेंगे। हम इसे समझायेंगे कि यह आपके लिये क्यों जरूरी है? हम आपकी सहायता करने के लिये सब करेंगे जो कर सकते हैं। यही तो पूर्वी कलीसियाओं ने किया था। डॉ माइकल ग्रीन ने एक बहुत अच्छी पुस्तक लिखी है इवेंजलिज्म इन दि अर्ली चर्च (इर्डमंस पब्लिशिंग कंपनी २००३ संस्करण)। डॉ ग्रीन ने कहा था “.........संगति एक चर्च की प्रगति के लिये बहुत आवश्यक है मनुष्य को चर्च में जो संगति मिलती थी वह अन्य चीजों में भी धनी होती थी और वह (चर्च में) आकर्षित होते थे......... (उन्होने देखा) कि मसीही लोग किस तरह एक दूसरे से प्रेम रखते थे।” (पेज २५६) “जाति, वर्ग, रंग, भेद, और शिक्षा से उपर उठकर चर्च की संगति एक बहुत बडा आकर्षण हुआ करता थी।” (पेज २५३) डॉ ग्रीन ने संकेत दिया कि कुछ भी गुप्त में नहीं किया जाता था। अविश्वासी भी चर्च में आते थे और हर एक जन से अच्छा व्यवहार किया जाता था। प्राचीन मसीही लेखक टरटयूलियन (१६० – २२० ए डी) चर्च में मसीही प्रेम और संगति के बारे में बोला करते थे। हमारे विश्वास के प्रारंभिक वर्षो में यह अनेको अन्यजातियों को मसीही होने के लिये बहुत आकर्षित करने वाला तथ्य हुआ करता था (उक्त संदर्भित)। टरटयूलियन कहते थे उत्तरी अमेरिका के दस हजारो से अधिक अन्य जाति लोग मसीही प्रेम और संगति की वजह से चर्च में सम्मिलित हुये।

मैं एक अकेला लडका था। मेरे माता पिता का तलाक हो गया था। मुझे उन रिश्तेदारो के साथ रहना था जो मुझे नही रखना चाहते थे। मैं अकेला सडको पर भटकता रहता था। मेरी हालत ऐसी थी जैसे जोन लेनन ने अपने गीत में गाया।

सब एकाकी लोग,
वे सब किसके होते हैं?

मैं आपको बताता हूं कि वे किसके होते हैं। वे हमारे जैसे चर्च की जिम्मेदारी होते हैं! आप भी इसी चर्च के हैं! कितनी उदास कर देने वाली बात है कि बेचारे जोन लेनन ने कभी भी यीशु पर विश्वास नही किया और कभी भी स्थानीय चर्च नहीं आये! अंत में वह नशीली दवाये लेने लगे और अधिकतर समय बिस्तर पर ही पडे रहते।

अगर मुझे एक मजबूत चर्च नहीं मिला होता तो मैं बिल्कुल कह सकता हूं कि मैं आज सुबह यहां नहीं होता। मुझे पक्का निश्चय है कि मैं भी जोन लेनन के समान कई साल पहले मर चुका होता। मेरे मित्र ने आत्महत्या कर ली। क्या मैंने ऐसा किया? पर मैं इतना जानता हूं कि मैं एक स्थानीय चर्च के प्रेम और संगति के कारण एक अंधेरे और सुनसान संसार से बचाया गया। जब मैं किशोर ही था तब चर्च मेरा दूसरा घर था।

मैं जानता हूं कि आप में से कई लोग मेरी नहीं सुनेंगे। मैं जानता हूं कि आप सब इस चर्च में नहीं आने वाले है। पर हमेशा याद रखिये कि हमने आपको निमंत्रण दिया है! हमेशा याद रखिये कि हम आपको अपने साथ चाहते हैं। निश्चत आपको इसकी कुछ कीमत चुकानी होगी! बेशक! किसी वचनबद्वता की कीमत तो चुकानी होती है। मैं आपके प्रति वचनबद् रहना चाहता हूं और आपसे भी यही अपेक्षा करता हूं कि आप भी मेरे प्रति वचनबद् रहे। जैसे थॉमस हेल की कमेंटरी कहती है, “साथ साथ हम मजबूत होते है पर अकेले हम कमजोर होते जाते है।” (उक्त संदर्भित, पेज ९१४) कुछ कहेंगे, “कि मैं इसे नहीं कर पाउंगा।” पर अपने प्रति ईमानदार रहिये। आप इसे कर सकते थे लेकिन आप इसे करना नहीं चाहते। आप “स्वतंत्र” रहना चाहते है। कितनी बुरी बात है। साथ साथ हम मजबूत होते है पर अकेले हम कमजोर होते जाते है!

साथ साथ हम मजबूत होते है! पर अकेले हम कमजोर होते जाते है! आज सुबह मेरा यह संदेश आपके प्रति है प्रभु यीशु आपके लिये उपलब्ध है। उनके पास आइये! उन्होने आपको देड से बचाने के लिये अपने प्राणों का बलिदान कूस पर दिया। वह मरे हुओं में से जीवित हुये कि आपको नया जीवन प्रदान करे। वह अभी भी जीवित है और स्वर्ग में है तीसरे स्वर्ग में है। उडाउ पुत्र के बडे भाई के समान बाहर मत खडे रहिये। बाइबल कहती है कि “वह भीतर नहीं गया था” (लूका १५:२८) अंदर सब बहुत प्रसन्न थे और पार्टी कर रहे थे। पर बडे भाई ने कहा कि मैं “भीतर नहीं जाउंगा।” आप में से कई आज भी यही कर रहे है। हम कहते है कि “यीशु के पास आइये। आइये और पार्टी में सम्मिलित होइये।” पर आप कहते है, “कि मैं अंदर नहीं जाउंगा।” हम तो फिर भी आपके आने का इंतजार कर रहे हैं! यीशु के पास आइये और पार्टी में शामिल होइये!

घर आइये, घर आइये,
   आप थके हुये है, घर आइये,
बहुत चाव, और दया से, प्रभु बुला रहे है,
   बुला रहे है, हे पापी, घर आइये।
(“कोमलता और बहुत चाव से, प्रभु बुला रहे है” विल एल थॉमसन १८४७−१९०९)

पिता, मै प्रार्थना करता हूं कि कोई वास्तव में आप के पास आये − और हमारे चर्च परिवार में सम्मिलित होवे। उसके नाम में मांगतें है, आमीन। “साथ साथ हम मजबूत होते है! पर अकेले हम कमजोर होते जाते है!” अगर आज सुबह कही गयी मेरी बाते आप भूल जाये तो इतना अवश्य स्मरण रखे! साथ साथ हम मजबूत होते है। पर अकेले हम कमजोर होते जाते है! आमीन

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(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे ने बाइबल पाठ पढ़ा: इब्रानियों १०:१९−२५
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
“ऐलिनोर रिगबी” (पॉल मैककार्टनी १९४२−)