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स्वधर्म त्याग के समय में रहना

LIVING IN A TIME OF APOSTASY
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २६ अप्रैल, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, April 26, 2015

“और (परमेश्वर ने) प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, वरन भक्तिहीन संसार पर महा जलप्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया। और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आने वाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्टान्त बनें। और धर्मी लूत को जो अधमिर्यों के अशुद्ध चालचलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया। (क्योंकि वह धर्मी उन के बीच में रहते हुए, और उन के अधर्म के कामों को देख देख कर, और सुन सुन कर, हर दिन अपने सच्चे मन को पीडित करता था) ।” (२ पतरस २:५−८)


इस अध्याय मे पौलुस प्रेरित भविष्यदर्शी जैसे बोलता है। पद १−३ में वह कहता है कि झूठे शिक्षक उठ खड़े होंगे जो बहकाने वाली घृणित झूठी शिक्षा प्रदान करेंगे। वह बताता है कि वे प्रभु यीशु का इंकार करेंगे। वह कहता है कि कई लोग उनका अनुसरण करेंगे। इसके परिणामस्वरूप लोग बाइबल की मसीहत को बुराई समझेंगे। वह कहता है कि झूठे शिक्षक पैसों के लिये काम करेंगे, परमेश्वर के लिये नहीं। कैसा चित्रण उसने हमारे समय का किया है! तो हम एक भयानक स्वधर्म त्याग, झूठी शिक्षा − एक नये मूर्तिपूजावाद के समय में रह रहे है।

मैं यह मानता हूं कि मैं कार्ल एफ एच हैनरी (१९१३−२००३) को अधिक पसंद नहीं करता। वह एक नव सुसमाचारिय धर्मविज्ञानी था। परंतु मुझे ऐसा लगता है कि वह स्वयं को बहुत अधिक “विदवान” बताने ही कोशिश कर रहा था। मेरे विचार से तो उसने सत्य को बहुत अधिक प्रचारित करने की कोशिश नही की। उसने जो कुछ भी लिखा उसमें स्वधर्म त्याग के विषय में तो एक भी स्पष्ट कथन नही किया। डॉ हैनरी ने कहा था,

         परमेश्वर की सच्चाई की ओर से हमारी पीढ़ी भटकी हुई है ........क्योंकि यह हानि हमें इस रूप में दिखाई दे रही है कि लोग तेजी से मूर्तिपूजा की ओर फिर रहे है। हिंसक लोग फिर से उठ खड़े को रहे हैं; उनकी सरसराहट और गड़गड़ाहट हमारे समय की रफ़्तार में सुनाई देती है (मध्य पूर्व में, उत्तरी अफ्रीका में, समूचे यूरोप में मुस्लिम चले आ रहे है। वाइट हाउस के अगुए उलझन में हैं निर्बल और ईश्वर विहीन हो गए हैं)........
         हिंसक लोग पतित सभ्यता की धूल झाड़ रहे है निःशक्त हो रहे चर्चेस के कारण खूंखारों का चोरी छिपे आगमन हो चुका है। (कार्ल एफ एच हैनरी पी एच डी टिव्हीलाईट आँफ ए ग्रेट सिव्हीलाइजेशन दि डिप्ट टूवर्ड नियो पैगेनिज्म, क्रासवे बुक्स, १९८८; मेरी टिप्पणी कोष्ठक में है।)

प्रसिद् मतदान सर्वेक्षक जार्ज बारना हमें बताते हैं, उनका सर्वेक्षण प्रभावशील भी है, कि हमारे चर्चेस का कोई भविष्य नहीं रह गया है। उनके अनुसार 80 प्रतिशत से उपर हमारे जवान बच्चे चर्च छोड़ चुके होंगे ताकि “कभी न लौटे”, − तीस की उम्र आते आते ऐसा हो रहा है। और हमारे चर्च के पास ऐसा कोई विचार नहीं है जो संसार में भटके इन जवान बच्चों को परिवर्तित कर सके! सब कोई इस प्रयास में लगे हुए हैं कि व्यक्ति को समझाकर उससे उसका चर्च छुड़वा दे और उन्हें उनके चर्च में आने के लिये प्रेरित करे। प्रचारकों ने अपनी टाई निकाल दी है और चर्च में रॉक संगीत बजाने लगते हैं ताकि ऐसा प्रतीत हो कि वे “जमाने के साथ” चलने वाले है और बहुत ही “उत्तम प्रकार” के चर्चेस में उनकी गिनती है। अब तक तो उन्हें जान जाना चाहिये कि यह सब उपयोगी सिद् नहीं होता है! पतित संसार उनकी ओर देखता है और हंसता है! कितनी त्रासदायक बात है! परमेश्वर जानता है कि मैं चर्चेस की इस दशा के लिये कितना रोता हूं!

इनमें से तो कितने प्रचारक उदारवादी विद्यालयों जैसे फुलर सेमनरी में शिक्षा प्राप्त है इन विद्यालयों में उनके रूढ़िवादी समुदाय में उन्हें और सामर्थविहीन बना दिया जाता है उन्हें केवल यूनानी शब्दों की व्याख्या करना सिखा दिया जाता है, पर प्रचार करने के लिये प्रेरित नहीं किया जाता है। डॉ माइकल हारटन ने इस त्रासदी के लिये लिखा है। उनकी यह पुस्तक (क्राइस्टलेस क्रिस्चीऐनिटी: दि अल्टरनेटिव गास्पल आफ दि अमेरिकन चर्च (बेकर बुक्स, २००८) कहलाती है। मूडी प्रेस ने एक पुस्तक छापी थी (१९९६) जिसका शीर्षक था दि कमिंग इवेंजलीकल क्राइसिस। यह पुस्तक उन्नीस वर्षो पूर्व लिखी गई थी। अब समस्या हमारे सामने है, ठीक सामने! हमारे चर्चेस मे झंझट है और हर कोई इस बारे में जानता है! हमारे लगभग हर चर्चेस में शाम की आराधनायें बंद हो चुकी हैं यह मृत्यु का चिंन्ह है! कई चर्चेस ने लंबे समय पूर्व ही प्रार्थना सभाओं को बंद कर दिया है। यह मृत्यु का चिंन्ह है! मुश्किल से किसी चर्च के पास आत्मा को जीतने वाला कोई सशक्त कार्यक्रम हैं। यह मृत्यु का चिंन्ह है! तथा कथित प्रचार केवल एक एक पद की व्याख्या करने वाला बाइबल अध्ययन बनके रह गया है। यह मृत्यु का चिंन्ह है! भले ही कोई शिकायत नहीं करे − मैं तो करूंगा! भले ही कोई ऐसा न कहे मै तो कहूंगा। इसे तो जोर से व स्पष्ट बोलने की आवश्यकता है! हम बहुत गहरे स्वधर्म त्याग वाले समय में रह रहे हैं! हम उस समय में रह रहे हैं जैसा २ पतरस २: १−३ में वर्णित है!

आप पूछ सकते हैं कि इस प्रकार की बात आप क्यों करते है? यह आप जवान लोगों को उलझन में डाल देगा! फिर से गलत बात! लोगो को सच बताना उलझन में नहीं डालता बल्कि, मैं उन्हें यह सच्चाई न बताउं तो वे वास्तव में उलझन में पड़ जायेंगे − वास्तव में वे नये सुसमाचार प्रचारकों द्वारा और बाइबल अध्ययन समूह द्वारा उलझन में डाल दिये जायेंगे! वे बहुत अधिक व्याकुल हो जायेंगे अगर वे यह नहीं जानते हैं कि हम अविश्वास और गहरे स्वधर्मत्याग के समय में रह रहे हैं − सबसे बेकार प्रकार का स्वधर्मत्याग सुधार जो सुधारवाद के युग से प्रारंभ है! सबसे गहरा स्वधर्मत्याग पिछले ५०० वर्षो में आया है! वह यह है! हम उस समय में रह रहे हैं जिस प्रकार के समय का वर्णन प्रेरित पौलुस ने २ पतरस २:१−३ में किया है। तो इसका उत्तर क्या है? निवेदन है कि खड़े होकर २ पतरस २:५−८ पढि़ये। यह स्कोफील्ड स्टडी बाइबल में १३१८ पेज पर है।

“और (परमेश्वर ने) प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, वरन भक्तिहीन संसार पर महा जलप्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया। और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आने वाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्टान्त बनें। और धर्मी लूत को जो अधमिर्यों के अशुद्ध चालचलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया। (क्योंकि वह धर्मी उन के बीच में रहते हुए, और उन के अधर्म के कामों को देख देख कर, और सुन सुन कर, हर दिन अपने सच्चे मन को पीडित करता था)।” (२ पतरस २:५−८)

अब आप बैठ सकते हैं।

इस पद के वचन परमेश्वर ने दिये हैं ताकि हम यह जान सके कि हम कैसे पाप स्वधर्मत्याग और अव्यवस्था के युग में रह रहे है। हमारे पद का यही विषय है। प्रेरित पतरस हमें दो व्यक्तियों, जैसे नूह और लूत का उदाहरण देता है। प्रेरित पतरस हमें दो व्यक्तियों, जैसे नूह और लूत का उदाहरण देता है। इन व्यक्तियों के बारे में बताने से वह हमें बताना चाहता है कि हमें इस आध्यात्मिक गड़बड़ वाले युग में किस प्रकार मसीही जीवन बिताना चाहिये। नूह और लूत से बड़ा सबक सीखा जा सकता है।

इस संसार का आत्मा सदैव मसीहियों की परीक्षा लेता है, विशेषकर इस स्वधर्मत्याग वाले युग में। हमारी परीक्षा इस बात से होती है कि हम संख्या में थोड़े हैं। यह बड़ी कड़ी परीक्षा है। अगर हम १८ वीं सदी में रह रहे होते तो हम एक बड़े आत्मिक जागरण का हिस्सा बनते, जिस जागरण में बिटिश टापू और नार्थ अमेरिका सम्मिलित है। हमारे आसपास पर्याप्त संख्या में लोग हैं जो वास्तविक प्रचार वास्तविक मन परिवर्तन और सच्ची प्रार्थना पर विश्वास करते है। यह १९ वीं सदी के बारे में कुछ सच होता है − यह २० वीं सदी के ७० और ८० के प्रारंभिक वर्षो के बारे में सच है।

यह कितना आश्चर्य पैदा करने वाली बात है कि समय कितनी जल्द बीत जाता है। जब मेरी आयु ३५ वर्ष की थी। ३५ वर्षो पूर्व स्थिति बिल्कुल भिन्न थी। उस समय रोनाल्ड रीगन राष्ट्रपति थे। बिली ग्राहम ६० के हुये ही थे और अभी भी बड़े बड़े क्रूजेड कर रहे थे। और हर रविवार की रात जैरी फालवेल टीवी पर आते और हजारो मिलियन डालर बना लेते, ऐसा लगता कि नैतिकता वाले बहुमत को भूण हत्या रोकने के लिये प्रेरित कर रहे हो। बसंत ऋतु में डॉ जॉन आर राइस अभी भी प्रचार कर रहे थे। डॉ मार्टिन ल्योड जोंस अभी जिंदा ही थे। ऐसे ही डॉ फ्रांसिस शोफेर भी जिंदा थे। किसी भी तरह से यह सिद् समय नहीं था। पर २०१५ की तुलना में यह फिर भी मसीहियों के लिये अच्छा समय था। अब हम घृणा किये जाने वाले अल्पसंख्यक रह गये हैं! मेरा कहने का अर्थ है कि − लोग हमसे घृणा करते हैं! वे हमसे डरते हैं। हर बैपटिस्ट, इवेंजलीकल, हर पेंटीकॉस्टल, हर रोमन कैथोलिक − जो मसीहत से जुड़ा है इस बात को महसूस करता है। बाहर की दुनिया हमसे नफरत करती है। दूसरी शताब्दियों और समय की तुलना में।

निश्चित रूप से नूह ने इस परीक्षा का सामना किया होगा − अकेले खड़े होने की परीक्षा। हमारे पद में बताया गया है कि परमेश्वर ने नूह और आठ लोगों को बचाया। (२ पतरस २:५−८) महाप्रलय आने से पूर्व नूह भी घोर अनैतिकता और स्वधर्मत्याग के युग में रह रहा था। दुष्टता सिर चढ़कर बोल रही थी और सारी शैतानी गतिविधयां चल रही थी यह इतनी बुरी बात थी कि जो हो रहा था “वह निरन्तर बुरा ही होता है।” (उत्पत्ति ६:५)

और परमेश्वर ने कहा,

“मेरा आत्मा मनुष्य से सदा लों विवाद करता न रहेगा” (उत्पत्ति ६:३)

उस समय संसार की दशा बहुत खराब थी कि लगभग कोई भी बचाया नहीं जा सका। स्मरण रखिये परमेश्वर ने आठवें व्यक्ति नूह को बचाया। इसका अर्थ हुआ नूह उसकी पत्नी − तीन लड़के और उनकी पत्नियां। पूरे संसार में केवल आठ लोग बचाये जा सके! यह महत्वपूर्ण है कि हम जाने कि कैसे यह व्यक्ति नूह उस बिगड़े हुये संसार में रह रहा था जिसका अंतत यह परिणाम हुआ कि महाप्रलय से उसका अंत हुआ।

अब लूत की बारी आती है। जब हम उत्पत्ति की पुस्तक में लूत के बारे में पढ़ते हैं तो हम आश्चर्य कर सकते हैं कि क्यों पतरस उसे केवल धर्मी लूत कहकर बुलाता है(२ पतरस २:७) पतरस लूत की गलती नहीं बता रहा है कि उसने सदोम में प्रवेश के बाद क्या किया। प्रेरित पतरस यह बता रहा है कि लूत को कैसा लगा और उसने क्या किया जब उसने सदोम में प्रवेश किया। हमारा पद कहता है कि वह “अधमिर्यों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुखी था” (२:७ ब) अगर आप उत्पत्ति १९ पढ़ेगे तो पायेंगे कि वह किस प्रकार का शहर था पतित, अश्लील, शर्मनाक। और ऐसे पापी शहर मे लूत अपने परिवार के साथ रहता रहता था।

वह भी नूह और उसके परिवार के जैसी स्थिति में थे। उत्पत्ति १८ में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने सदोम शहर को इसलिये नाश किया क्योंकि वहां दस धर्मी जन भी नहीं मिले। पर वहां दस धर्मी लोग भी नही थे − केवल लूत और उसके बच्चों को छोड़कर। केवल ये ही लोग थे जो धर्मी जीवन बिताने का प्रयास कर रहे थे। उस बड़े से शहर में हर कोई ईश्वरविहीन था और पाप का दास था।

नूह और लूत के उदाहरणों से हम देखते हैं कि कितना कठिन है अल्पसंख्यक मसीहियों का एक छोटा सा भाग होना। एक परिवार में एक अकेले मसीही के रूप में रहना भी बड़ा मुश्किल है। मैं स्मरण करता हूं कि कैसे मेरे रिश्तेदार मेरा मजाक उड़ाते थे, मुझ पर हंसते थे, ताना मारते थे जब मैं एक मसीही के रूप में रहता था। अगर आप एकमात्र मसीही है अपने स्कूल, आफिस, कालेज और घर में तो आपका एकाएक मखौल उडाया जायेगा। अगर आप एक अच्छे मसीही हैं तो वे आप को मूर्ख समझेंगे। जितने अच्छे मसीही आप होंगे उतना ही यह भटका हुआ संसार आप के विरूद् होगा। सचमुच यह बड़ी कड़ी परीक्षा है। कई जवान लोग इसमें असफल हो जाते हैं। वे महसूस करने लगते हैं कि उन्हें अपने स्कूल या कार्य स्थल के “मित्रों” के आगे समर्पण कर देना चाहिये। जो भटके हुये संसार के आगे “समर्पण” कर देते हैं तो उनके साथ दो बातें होती हैं

१. अगर वे बचाये हुये हैं, तो वे अपना आनंद खो देते हैं ऐसा नहीं हो सकता कि आप संसार के मित्र हो और मसीह का आनंद प्राप्त करें, ऐसे लोग मसीह के आने वाले राज्य का आनंद खो देते हैं।

२. अगर इस भटके हुये संसार में उनके परम मित्र है, तो ऐसे लोगो का परिवर्तित हो पाना मुश्किल होता है। बाइबल कहती है, “सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है” (याकूब ४:४)


डॉ जॉन आर राइस कहा करते थे, “क्या तुम........एक मित्र के लिये परमेश्वर को खो दोगे? अगर मसीहत की कीमत........एक मित्र........को खोना भी नहीं है, तो क्या आप कह सकते हो कि आप परमेश्वर से अधिक प्रेम रखते हो? वास्तव में सच्चे मसीही होने के लिये आपको मित्रों की कीमत चुकानी होगी।” (जॉन आर राइस, डी डी, व्हाट इट कॉस्ट टू बी ए गुड किश्चयन, सोर्ड आँफ दि लार्ड पब्लिशर्स, १९५२, पेज२८) बाइबल कहती है,

“क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!” (भजन १:१)

अगर तुम मसीहत के इतिहास की ओर देखोगे आप पायेंगे कि सभी सच्चे मसीही वे पुरूष और महिलायें थे जो संसारी लोगों से बिल्कुल अलग थे। उदाहरण के लिये, उस महान व्यक्ति टरटयूलियन को देखिये। वह १६० से २२० ए डी तक रहा। उसने देखा मसीहियों को मूर्तिपूजक रोमी लोग बहुत सताते थे। उसने देखा कि मसीहियों को प्रताडि़त किया जाता था, और उनके सिर काट डाले जाते थे, उनके शव शेरों के सामने फाड़ डाले जाने के लिये अखाड़े में फेंक दिये जाते थे। वह मसीहियों के साहस से बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, “कि मसीहत में कुछ तो ऐसी बात होनी आवश्यक है, जिसके कारण लोग ऐसा व्यवहार करते हैं। मसीही लोग सब कुछ छोड़ने को तैयार रहते हैं, यहां तक कि जीवन भी। वह उनके एक दूसरे के प्रति प्रेम रखे जाने के गुण से भी बहुत प्रभावित था। जब वह ३५ वर्षो का था उसका अचानक, निर्णीत, उग्र परिवर्तन मसीह के प्रति हुआ। उसके पश्चात वह तिरस्कृत और उत्पीड़ित मसीहियों को बचाने के लिये लिये निकल पड़ा। उसने पूर्वी चर्च मे व्याप्त मतांतर वाली शिक्षाओं के विरूद् अनेक किताबें लिखी। अंतत: उसने कैथोलिक चर्च छोड़ दिया क्योंकि वह बहुत संसारी हो चला था। पहले वह मोंटानिस्ट के साथ गया जो आधुनिक पेंटीकॉस्टल के समान थे। आखिर में उसने उनका साथ छोड़ दिया और स्वयं के चर्च का पास्टर बन बैठा। इस तरह वह पहला प्राटेंस्टैंट कहलाया। मैं एक जवान कोरियन को जानता हूं जो टरटयूलियन के सामर्थशाली संदेशों का अध्ययन कर करके परिवर्तित हो गया। जवान लड़को टरटयूलियन जैसे बनो! जैसे वह नूह और लूत के समान था!

उसके पश्चात महान पीटर वाल्डो के बारे में सोचो। जो फ्रांस में ११४० से १२०५ एडी तक रहा। वह एक धनी व्यापारी था। पर एक रात उसका एक मित्र उसके घर खाने की मेज पर ही मर गया। इसने पीटर वाल्डो को भीतर से ही हिला दिया और वह सच्चा मसीही बन गया। उसने प्रचार आरंभ किया और उसके अनेक अनुयायी हो गये। वह बाइबल अध्ययन और आत्मा के जीतने पर जोर दिया करता था। जो लोग उसके पीछे चले वक वालडेशियंस कहलाये। कैथोलिक चर्च ने उसे बाहर कर दिया था, किंतु, एक चमत्कार के कारण, वह मरते दम तक सुसमाचार प्रचार करता रहा। ३०० सालों के पश्चात वाल्डो के अनुयायी जिनेवा, स्विटजरलैंड में वहां के प्रोटेस्टैंट के साथ मिल गये। जवान लड़को, पीटर वाल्डो जैसे बनो! जैसे वह नूह और लूत के समान था!

महान मिस लौटी मून के बारे में सोचो। वह १८४० से १९१२ तक रही। वह १८१३ में बैपटिस्ट मिशनरी बनकर चीन गई। उस समय चीन में हालात बहुत खराब थे। वह पुराने नियम के प्राध्यापक क्राफोर्ड टॉय के प्रेम में पड़ गई। उन्होंने मंगनी कर ली। किंतु लौटी मून ने पाया कि वह बहुत अधिक बाइबल में विश्वास नहीं रखते थे। उसका दिल टूट गया पर उसने मंगनी तोड़ दी क्योंकि वह व्यक्ति उदारवादी अविश्वासी था। लौटी मून चीन में ही रूकी रही। उन्होंने फिर विवाह नहीं किया। १९१२ में वह बीमार पड़ गई क्योंकि वह अपना भोजन मिशनरिज और अन्य चीनी लोगों को दे देती थी। उनका वजन घटकर ५० पौंड से भी कम रह गया। उन्हें वापस अमेरिका भेज दिया गया। किंतु रास्ते में ही उनका देहावसान हो गया। आज तक वह सदर्न बैपटिस्ट कन्वेंशन के तैयार मिशनरियों में से एक महान मिशनरी महिला मानी जाती हैं। प्रत्येक किसमस पर उनका स्मरण होता है – जब “लौटी मून के नाम से” विदेशों में सहायता भेजने के लिये चंदा लिया जाता है वे यह वर्णन नही करते कि लौटी मून ने अपने से विवाह होने वाले एक व्यक्ति को इसलिये त्याग दिया था क्योंकि वह अविश्वासी था। किंतु परमेश्वर तो स्मरण रखता है! जवान लोगो, लौटी मून जैसे बनो! जैसे वह नूह और लूत के समान थी!

“और (परमेश्वर ने) प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, वरन भक्तिहीन संसार पर महा जलप्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया। और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आने वाले भक्तिहीन लोगों की शिक्षा के लिये एक दृष्टान्त बनें। और धर्मी लूत को जो अधमिर्यों के अशुद्ध चालचलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया।” (२ पतरस २:५−७)

डॉ मार्टिन ल्योड जोंस, जो बींसवी शताब्दी के महान प्रचारक थे, उन्होंने २ पतरस के इसी पद पर संदेश दिया था। डॉ ल्योड जोंस ने इस प्रकार अपना संदेश समाप्त किया,

मैं एक प्रश्न पूछकर समाप्त करता हूं। क्या हम नूह और लूत के समान है? आज का संसार भी उन (लोगों) के संसार के समान है। क्या लोगों को यह बताना आसान है कि हम मसीही हैं? क्या हम अलग हैं, क्या हम अलग खड़े दिखाई देते हैं? क्या हम उन आत्माओं के लिये दुखी हैं क्या हम उन आत्माओ के लिये दुख मनाते हैं जो नष्ट होने जा रही हैं?.......क्या हम प्रार्थना कर रहे हैं कि वास्तव में सच्ची आत्मिक जाग्रति आये और भरसक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द आत्मिक जागरण आये? यही नूह और लूत के लिये आधुनिक मसीहियों के प्रति चुनौती है। (मार्टिन ल्योड जोंस, एम डी, “दि एक्जाम्पल आफ नोह एंड लूट” एक्सपोजिटरी सर्मन्स आँन २ पीटर, दि बैनर आँफ ट्रूथ ट्रस्ट, १९८३, पेज १५४)

निवेदन है कि खड़े होकर गीत नंबर ६ जो गीत के पेज पर हैं उसे गाइये!

मेरा जीवन, प्रेम मै देता हूं परमेश्वर के मेमने जो तू मेरे लिये मरा;
   मैं हमेशा विश्वसनीय बना रहूं, मेरे मसीहा मेरे परमेश्वर!
मै उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा, मेरा जीवन कितना संतोषप्रद रहेगा!
   मै उसके लिये जीउंगा मेरे लिये मरा, मसीहा मेरे परमेश्वर!

मैं अब स्वीकार करता हूं कि तू हमे ग्रहण करता है, तू हमारे लिये मरा कि हम जीये;
   और मैं तुझ में विश्वास करता हूं, मेरे मसीहा मेरे परमेश्वर!
मैं उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा, मेरा जीवन कितना संतोषप्रद रहेगा!
   मै उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा, मेरे मसीहा मेरे परमेश्वर!

ओह प्रभु तू जो कलवरी पर मरा, मेरी आत्मा को स्वतंत्र करने के लिये,
   मैं अपना जीवन तुझ पर समर्पित करूंगा, मेरे मसीहा मेरे परमेश्वर!
मै उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा, मेरा जीवन कितना संतोषप्रद रहेगा!
   मै उसके लिये जीउंगा जो मेरे लिये मरा, मेरे मसीहा मेरे परमेश्वर!
(“मै उसके लिये जीउंगा रॉल्फ ई हडसन,१८४३−१९०१; पास्टर द्वारा बदला)

स्वर्गीय पिता, हम प्रार्थना करते हैं कि आज शाम कोई यहां यीशु तेरे पुत्र − पर विश्वास लायें और उसके कूस पर बहाये कीमती लहू से अपने सारे पापों को धो ले। यीशु के नाम में, आमीन!

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व डॉ क्रेटन एल चान ने बाइबल पाठ पढ़ा: २ पतरस २:४−९
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
“ऐसे ही समय में'' (रूथ केय जोंस, १९०२–१९७२)