Print Sermon

इन संदेशों की पांडुलिपियां प्रति माह २१५ देशों के १,५००,००० कंम्प्यूटर्स पर इस वेबसाइट पते पर www.sermonsfortheworld.com जाती हैं। सैकड़ों लोग इन्हें यू टयूब विडियो पर देखते हैं। किंतु वे जल्द ही यू टयूब छोड़ देते हैं क्योंकि विडियों संदेश हमारी वेबसाईट पर पर पहुंचाता है। यू टयूब लोगों को हमारी वेबसाईट पर पहुंचाता है। प्रति माह ये संदेश ३५ भाषाओं में अनुवादित होकर १२०,००० प्रति माह हजारों लोगों के कंप्यूटर्स पर पहुंचते हैं। लिये उपलब्ध रहते हैं। पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। आप यहां क्लिक करके अपना मासिक दान हमें दे सकते हैं ताकि संपूर्ण संसार जिसमें मुस्लिम व हिंदु भी सम्मिलित है उनके मध्य सुसमाचार फैलाने के महान कार्य में सहायता मिल सके।

जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net.




सर्प और मसीहा

THE SERPENTS AND THE SAVIOUR
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, ८ मार्च, २०१५ लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, March 8, 2015

''यहोवा ने मूसा से कहा एक तेज विष वाले सांप की प्रतिमा बनवाकर खम्भे पर लटका; तब जो सांप से डसा हुआ उसको देख ले वह जीवित बचेगा। सो मूसा ने पीतल को एक सांप बनवाकर खम्भे पर लटकाया; तब सांप के डसे हुओं में से जिस जिसने उस पीतल के सांप को देखा वह जीवित बच गया।'' (गिनती २१:८−९)


इजरायल के लोग निर्जन में यात्रा के दौरान हताश हो चुके थे। वे परमेश्वर के विरूद्ध बोलने लगे और अपने नेता मूसा के विरूद् बडबडाने लगे। उनका कहना था, ''तुम् हमें मिस्र से निकालकर यहां मरने के लिये जंगल में क्यों ले आये? यहां न तो रोटी है, न पानी, और हमें तो यह हल्का भोजन मन्ना भी अच्छा नहीं लगता।'' परमेश्वर ने स्वर्ग से उन्हें पेट भरने के लिये मन्ना गिराया था पर उन्हें उससे भी नफरत थी। वे इसे ''हल्के प्रकार की रोटी'' कहते थे जो किसी काम की नहीं थी। भजनकार ने मन्ना को ''स्वर्गीय भोजन'' कहा था (भजन ७८:२५) किंतु इजरायल के लोगों ने परमेश्वर और मूसा के विरूद्ध बडबडाना और कोसना इत्यादि प्रारंभ कर दिया। उनका कहना था, ''हमारी आत्मायें इस मन्ना को खा खाकर उकता गई है'' − हमें तो इससे चिढ है।

यह मनुष्य के स्वभाव के उपर व्याख्या है। यह उसके मन के अंदर का भ्रष्ट स्वभाव व पाप को प्रदर्शित करती है,

''क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है'' (रोमियों ८:७)

बाईबल कहती है,

''सब के सब पाप के वश में हैं। जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।'' (रोमियों ३:९−१०)

मनुष्य का मन परमेश्वर के विरूद्ध लगा रहता है। तभी तो हम परमेश्वर के विरूद्ध शिकायत करते और बडबडाते हैं। जब मनुष्य का मन पापमय होता है, तब उसकी दशा भी, निर्जन में घूमने वाले इजरायलियों के समान ही होती है।

''सो यहोवा ने उन लोगों में तेज विष वाले सांप भेजे, जो उन को डसने लगे, और बहुत से इस्त्राएली मर गए।'' (गिनती २१:६)

बाईबल कहती है, ''पाप की मजदूरी मृत्यु है'' (रोमियों ६:२३) बाईबल कहती है, ''इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा'' (यिजकेल १८:४, २०)

जो लोग बच गये थे वे मूसा के पास लौट कर कहने लगे, ''हम ने पाप किया है.....यहोवा से प्रार्थना कर, कि वह सांपो को हम से दूर करे। तब मूसा ने उनके लिये प्रार्थना की'' (गिनती २१:७)

हमें यह स्मरण रखना अवश्य है कि परमप्रधान ने उन पर दया दिखलाई। परमेश्वर ने उन्हें मिस्र की गुलामी से छुडवाया था। वही विराट परमेश्वर उन्हें लाल समुद्र में से निकाल लाता है − दोनों ओर समुद्र का पानी खडा होकर बीच में सूखी भूमि निर्मित कर देता है। शेष पुराने नियम में वे लोग अपने इस महान छुटकारे केलिये प्रशंसा के गीत गाते रहते हैं। और परमप्रधान उन्हें प्रतिदिन मन्ना खिलाया करता था। चटटान से फूटता पानी, उनके जानवरों और संपूर्ण राष्ट्र के लिये पर्याप्त था। परमात्मा ने अपनी परमशक्ति से उन्हें उनके शत्रुओं के हाथों से छुडवाया। वह स्वयं उनके लिये रात्रि में आग का खंबा बन रोशनी देता था, और दिन में बादल बन छाया देता था। परमात्मा का महिमामयी वैभव सदैव उन लोगों के बीच उपस्थित रहा।

बावजूद इसके उन्होंने परमप्रधान की सराहना नहीं की। वे तौभी अविश्वासी ही बने रहे। उन्होंने विद्रोह किया। वे कोसने लगे और मूसा और परमेश्वर के विरूद्ध बडबडाहट से भर गये। डॉ जॉन आर राईस ने इस प्रकार कहा था,

अचानक उनके तंबुओं में, रेंगनेवाले जंतु घास में से होकर, उनके बीच पहुंचे, वे विषवाले सर्प थे, अलग अलग रंगो की दुष्ट आत्मायें उनके बीच थी ''और इजरायल के अधिकाधिक लोग मारे गये।'' इस घटना में परमप्रधान का गुस्सा और अनुग्रह दोनों दिखाई देते हैं। इस निर्जन में पाप और मसीहा दोनों रूप प्रगट हो रहे हैं (जॉन आर राईस, डी डी ''स्नेक्स इन दि कैंप'' ब्लड एंड टियर्स आन दि स्टेयरवे, सोर्ड आफ दि लॉर्ड पब्लिकेशर्स, १९७०, पेज ३४, ३५)

हम इस घटना के बारे में अधिक नहीं सोचते होते अगर यीशु ने इसे यूहन्ना के तीसरे अध्याय में, दोहराया नहीं होता।

प्रभु यीशु के पास एक रात्रिकाल नीकुदेमुस नामक व्यक्ति आया। वह इजरायल का प्रमुख धार्मिक शिक्षक था। वह यहूदी बरबार सनहेद्रिन का सदस्य और एक फरीसी जन था। वह यह विश्वास करता था कि यीशु ''परमेश्वर की ओर से गुरू हो कर आया है, क्योंकि कोई इन चिंन्हों को जो तू दिखाता है, यदि परमेश्वर उसके साथ न हो तो नहीं दिखा सकता'' (यूहन्ना ३:२)

नीकुदेमुस नहीं जानता था कि नये सिरे से कैसे जन्म लेते हैं यीशु ने उससे कहा, ''तुझे नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है'' (यूहन्ना३:७) नीकुदेमुस ने पूछा, ''ये बातें कैसे हो सकती है?'' (यूहन्ना ३:९) वह तो बिल्कुल नहीं जानता था, कि कैसे नये सिरे से जन्म ले और बचाया जाये। तब यीशु ने उसे निर्जन में उंचा चढाये जाने वाले सर्प का स्मरण कराया, कि कैसे मनुष्य के पुत्र को उंचे पर चढाया जायेगा और उस पर जो विश्वास करेगा वह नया जन्म पायेगा।

धर्म विज्ञानियों ने ''पुनरुद्धार'' को नया जन्म कहा है। दि रिफार्मेशन स्टडी बाईबल कहती है,

यीशु ने नीकुदेमुस द्वारा नये जनम की बात पर अचंभा करने के कारण उसे उदाहरण देकर नया जन्म प्राप्त करने की शिक्षा दी। नीकुदेमुस पुराने नियम की इस घटना के वर्णन मात्र से समझ गया था कि वह स्वयं भी पापी हैं और उसे नये जीवन जीने की आवश्यकता है.....पुर्नजीवन नया जन्म परमप्रधान के अनुग्रह की देन है। यह तत्काल घटित होने वाला अलौकिक कार्य है जो पवित्र आत्मा हमारे भीतर कार्य करता है। इसका प्रभाव हमें आत्मिक मृत्यु से आत्मिक जीवन में जीवित करता है। हमारी आत्माओं में तेजी पैदा करता है........(दि रिफार्मेशन स्टडी बाईबल, लिगोनियर मिनिस्ट्रीज, २००५, पेज १५१४ यूहन्ना ३ पर व्याख्या)

अब यूहन्ना ३:१४, १५ को देखें। यह दि स्कोफील्ड स्टडी बाईबल के पेज १११७ पर मिलता है। यहां प्रभु यीशु नीकुदेमुस को नये जन्म के बारे में समझाते हैं। नीकुदेमुस को पेंटाटयूक भली भांति याद थी, जो बाईबल की प्रथम पांच पुस्तकें कहलाती थी। गिनती बाईबल की चौथी पुस्तक है। नीकुदेमुस इसे इतनी अच्छी तरह जानता था और यह पुस्तक उसे शायद, पूरी याद होगी। तभी तो यीशु ने खतरनाक विषधर सर्पो का वण्र उसे समझाने के लिये किया कि कैसे बचाये जाये। कैसे नया जीवन प्राप्त करें। निवेदन करता हूं कि आप खडे होकर यूहन्ना ३:१४ और १५ खोल कर पढें। यह दि स्कोफील्ड स्टडी बाईबल के पेज १११७ पर है। यीशु ने नीकुदेमुस से कहा,

''और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए। ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए'' (यूहन्ना ३ :१४−१५)

आप अब बैठ सकते हैं। मसीह के सुसमाचार की मुख्य शिक्षा यही है कि देखें और जीवित रहें, यीशु पर विश्वास करें और बचाये जाये। इस पद में तीन बातें ध्यान दीजिये।

१. प्रथम, पाप का डंक और मृत्यु ।

अगर एक व्यक्ति तंबू में जाता था, तो वहां उसे सर्प दिखाई देते थे। वह खाना खाने बैठता था, तौभी वे वहां थे। जब बिस्तर बिछाता तो उस पर सर्प होते थे जो पूरे समय उसे काटने को तैयार रहते थे। जब वे सर्प काटते थे तब उनका डंक आग की तरह जलता था। काटे गये व्यक्ति के शरीर में बुखार आ जाता था, तब वह ऐंठन आकर बेहोश होकर मर जाता था! प्रत्येक जन जिसको सर्प ने डसा वह भयानक मृत्यु मरा।

अब डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल, जो टेक्सास में फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च डलास के जाने माने पास्टर रहे, उनकी सुनिये। डॉ क्रिसवेल ने उन सर्पों के लिये कहा था,

इस प्रकार की घटना (उदाहरण) का प्रयोग मनुष्य के मन की भ्रष्टता दर्शाने के लिये, उसके जीवन में पाप की उपस्थिति बताने के लिये किया गया। यही भ्रष्टता हमारे दिलों में है, हमारे घरों में, हमारे निवासों में, हमारे उपर उठने में और हमारे नीचे गिरने में है.....पाप और मृत्यु की वैश्विक उपस्थिति से बचा नहीं जा सकता। मनुष्यता भ्रष्ट हो गई है और पतित जाति है; यद्यपि हम कुछ भी दार्शनिक बातें सामने रखे, किंतु मनुष्य इतिहास और मनुष्य जीवन का तीव्र सच है: कि वह भ्रष्ट है मनुष्य पाप और अपराध में खो गए है। हम हमारे पापों में मृतक है....ये जो सर्प हैं वे पाप की नष्ट करने वाली शक्ति के प्रतीक है ये!
         ये जहरीले, खतरनाक सर्प, आपको सब ओर मिलेंगे, और लोग शारीरिक मृत्यु, आत्मिक मृत्यु, नैतिक मृत्यु, दूसरी मृत्यु और अनंत काल की मृत्यु मर रहे हैं....
         मनुष्य जगत ने स्वयं को अज्ञानता, अंधविश्वास और ऐसी हजारों अंधकारपूर्ण बातों से छुडा लिया है; परन्तु हमारे दिलों में, हम वैसे की वैसे ही समान हैं....हम नैतिक, आत्मिक रूप में अभी आदम और हवा के समान है। हमने वैश्विक दुख से, नष्ट होने से, व्यर्थता से और पाप के न्याय से बाहर आने का कोई रास्ता कभी पाया ही नहीं। (डब्ल्यू ए क्रिसवेल, पी एच डी, ''दि ब्रेजन सर्पेंट,'' व्हॉट ए सेवियर! ब्राडमन प्रेस, १९७८, पेज ४९−५१)

प्रेरित पौलुस ने इजरायल के पाप को हमारा पाप भी गिनाया है, वह चेतावनी देते हैं;

''और न हम प्रभु को परखें, जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए। और न तुम कुड़कुड़ाएं, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए। परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्टान्त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।'' (कुरूंथियों १०:९−११)

पाप उनके उपर न्याय लाया − और पाप ही उनके उपर आज भी न्याय लायेगा। ''जो उन पर पड़ी, (दृष्टान्त) की रीति पर भी: और वे हमारी (चितावनी के लिये) जो जगत के अन्तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।'' (१ कुरंथियों १०:११) − और यही हमको दूसरे बिंदु पर ले चलती हैं।

२. दूसरा, पाप और मृत्यु से बचाव।

मूसा ने लोगों की पुकार सुनी। वे सर्पों द्वारा काटे जा रहे थे। वे चीख रहे थे और मर रहे थे। सर्प सब दूर थे।

''यहोवा ने मूसा से कहा एक तेज विष वाले सांप की प्रतिमा बनवाकर खम्भे पर लटका; तब जो सांप से डसा हुआ उसको देख ले वह जीवित बचेगा। सो मूसा ने पीतल को एक सांप बनवाकर खम्भे पर लटकाया; तब सांप के डसे हुओं में से जिस जिसने उस पीतल के सांप को देखा वह जीवित बच गया।'' (गिनती २१:८−९)

जब आप अस्पताल जाते हैं तो अक्सर वहां एक चिंन्ह दिखाई देता है। एक खंबे पर दो सर्प लिपटे हुयें। आप इस चिंन्ह को डॉक्टर के आफिस में या वहां के किसी दस्तावेज पर देख सकते हैं। यह चंगाई के व्यवसाय से जुडा हुआ चिन्ह है। कितनी अजीब बात है ये कि यह स्वास्थ्य, चंगाई ओर उद्धार पाने का चिंन्ह है कि एक सर्प खंबे पर लटका हुआ है! यह वास्तविक सर्प नहीं है। यह पीतल का बना हुआ सर्प है जो उंचे खंबे पर उठाया गया है।

स्कोफील्ड की व्याख्या सही कहती है कि, ''यह पीतल का सांप मसीह की ओर संकेत देता है, ‘जो हमारे लिये पाप बनाया गया है’ कि हमारा न्याय अपने उपर सह ले'' (गिनती २१:९ पर व्याख्या)।

''वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए क्रूस पर चढ़ गया ....उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए।'' (१ पतरस २:२४)

यीशु ने स्वयं नीकुदेमुस से कहा,

''और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए....'' (यूहन्ना ३:१४)

''मनुष्य का पुत्र'' यीशु का स्वयं के लिये प्रिय नाम है। उन्होंने कहा था, ''में उंचे पर चढाया जाउंगा (क्रूस पर) जैसे पीतल का सर्प मूसा द्वारा उंचे पर उपर चढाया गया था।'' हमारे मसीहा का कैसा चित्रण था!

हमारी शर्म ओर अहंकार को लिये,
   मेरे स्थान पर तिरस्कार झेला;
मेरी क्षमा को अपने लहू में छुपाकर;
   हल्लेलूयाह! कितना अदभुत मसीहा!

उंचा उठाया गया कि मरना है,
   ''पूरा हुआ,'' वह चिल्लाया;
अब स्वर्ग में उंचा उसका नाम है;
   हल्लेलूयाह! कितना अदभुत मसीहा!
(हल्लेलूयाह! कितना अदभुत मसीहा! फिलिप पी ब्लिस १८३८−१८७६)

''और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए....'' (यूहन्ना ३:१४)

यहीं पर तीसरा बिंदु शुरू होता है।

३. तीसरा, पाप और मृत्यु से बचाव का मार्ग।

''और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए। ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए'' (यूहन्ना ३:१४−१५)

यीशु पर विश्वास करना है तो उसकी ओर देखें। देखने से जीवन मिलता है, विश्वास करने से बचाये जाते हैं, शुद्ध होते हैं साफ होते हैं! इसमें कोई मुश्किल बात नहीं है! विश्वास से यीशु की ओर देखिये। हमारे चर्च के हर सदस्य ने यही किया है। यह इतना कठिन नहीं है अन्यथा मेरी पत्नि इसे नहीं कर पाती जब उसने मुझे बिल्कुल पहली बार सुसमाचार संदेश सुनाते हुये सुना था!

''सो मूसा ने पीतल को एक सांप बनवाकर खम्भे पर लटकाया; तब सांप के डसे हुओं में से जिस जिसने उस पीतल के सांप को देखा वह जीवित बच गया।'' (गिनती २१:८−९)

जब उस मनुष्य ने पीतल के सर्प को देखा, वह जीवित रहा! जो सर्प द्वारा काटा गया वह भी देख सकता था! जो बिल्कुल मृतप्राय है वह भी देख सकता था! केवल पीतल के सर्प को देखने भर से वे बच गये थे! और हम यीशु की ओर देखने से बचते हैं!

''और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।'' (इब्रानियों १२:२)

यह इतना भी मुश्किल नहीं है! लाखों लोगों ने यीशु को देखा! यीशु की ओर निहारना! यीशु की ओर निहारना! यीशु की ओर निहारना! यही रास्ता है नया जन्म प्राप्त करने का! यीशु की ओर निहारना! यह रास्ता है पुर्नजीवन पाने का! यीशु की ओर निहारना! यही रास्ता है क्षमा किये जाने और सभी पापों से शुद्ध होने का! यही रास्ता है बचाये जाने का − पूर्ण काल और शाश्वत काल के लिये!

यीशु की ओर निहारे जब तक महिमा दिखाई देती है;
क्षण प्रतिक्षण, ओ प्रभु, मैं आपका हूं!
   (''मोमेंट बॉय मोमेंट'' डेनियल डब्ल्यू विटल, १८४०−१९०१)

अगर पाप से छूटने की तीव्र चाह है,
   परमात्मा के मेम्ने की ओर देखो;
वह, आपको मुक्त करने के लिये, क्रूस पर मरा,
   परमात्मा के मेम्ने की ओर देखो!
वह एकमात्र आपको बचाने के लिये सक्षम है,
   परमात्मा के मेम्ने की ओर देखो।
(''परमात्मा के मेम्ने की ओर देखो'' हैनरी जी जैकसन,१८३८−१९१४)

देखो और जीवित रहो, मेरे भाई, जीवित रहो!
   यीशु को देखो अब और जीवित रहो,
यह उनके वचन में कहा गया है, हल्लेलूयाह!
   केवल आपको देखना है और जीवन जीना है!
('' देखो अब और जीवित रहो'' विलियम ए आगडेन १८४१−१८९७)

''तब सांप के डसे हुओं में से जिस जिसने उस पीतल के सांप को देखा वह जीवित बच गया।'' (गिनती २१:९)

देखो और जीवित रहो, मेरे भाई, जीवित रहो!
   यीशु को देखो अब और जीवित रहो,
यह उनके वचन में कहा गया है, हल्लेलूयाह!
   केवल आपको देखना है और जीवन जीना है!

जब स्पर्जन केवल पंद्रह साल के थे वह प्रारंभिक मेथोडिस्ट चैपल में आये। वहां कोई पादरी नहीं था। वह उस जगह पर आत्मा में ''जम गये थे।'' वहां केवल पंद्रह सदस्य थे। एक दुबला पतला व्यक्ति प्रचार करने खडा हुआ। कांपती आवाज से उसने धर्मशास्त्र का पद पढा,

''हे पृथ्वी के दूर दूर के देश के रहने वालो, तुम मेरी ओर फिरो, और उद्धार पाओ'' (यशायाह ४५:२२)

उसने सीधे स्पर्जन पर दृष्टि की और कहा, ''हे जवान, तुम परेशान दिखते हो। अगर तुम धर्मशास्त्र के इस पद को नहीं मानोगे, तो तुम सदैव परेशान ही रहोगे। देखो! देखो! यीशु की ओर देखो।'' स्पर्जन ने कहा, ''मैंने देखा था, और यीशु ने मुझे बचा लिया जब मैंने विश्वास से उसकी ओर देखा।''

देखो और जीवित रहो, मेरे भाई, जीवित रहो!
   यीशु को देखो अब और जीवित रहो,
यह उनके वचन में कहा गया है, हल्लेलूयाह!
   केवल आपको देखना है और जीवन जीना है!

मैं परवाह नहीं करता कि पॉल वॉशर क्या कहते हैं! ''आपको तो केवल यीशु की ओर निहारना है और नया जन्म पाना है!'' मैं परवाह नहीं करता डॉ मैकआर्थर क्या कहते हैं! ये सब अच्छे लोग हैं, किंतु ''आपको तो केवल यीशु की ओर निहारना है ओर नया जन्म पाना है!''

यीशु के पास क्रूस पर टंगे चोर के पास इतना समय नहीं था कि वह मसीह को अपने जीवन के हर हिस्से का स्वामी बनाये! वह मर रहा था! उसके पास इतना समय नहीं था कि मसीह को अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र का प्रभु बनाये! वह मर रहा था। उसके पास समय नहीं था! समय नहीं था! समय नहीं था! समय नहीं था! उसके पास केवल एक बात के लिये समय था। उसने विश्वास से यीशु की ओर देखा! ''आपको केवल यीशु की ओर निहारना है ओर नया जन्म पाना है!'' यही स्पर्जन ने भी किया! यही आप को भी करने की आवश्यकता है!

हल्लेलूयाह! क्रूस पर वह चोर बचाया गया! यीशु ने उससे कहा, ''तू आज ही मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा'' (लूका २३:४३)

देखो और जीवित रहो, मेरे भाई, जीवित रहो!
   यीशु को देखो अब और जीवित रहो,
यह उनके वचन में कहा गया है, हल्लेलूयाह!
   केवल आपको देखना है और जीवन जीना है!

(संदेश का अंत)
आप डॉ0हिमर्स के संदेश प्रत्येक सप्ताह इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं क्लिक करें
www.realconversion.com अथवा www.rlhsermons.com
क्लिक करें ‘‘हस्तलिखित संदेश पर।

आप डॉ0हिमर्स को अंग्रेजी में ई-मेल भी भेज सकते हैं - rlhymersjr@sbcglobal.net
अथवा आप उन्हें इस पते पर पत्र डाल सकते हैं पी. ओ.बॉक्स 15308,लॉस ऐंजेल्स,केलीफोर्निया 90015
या उन्हें दूरभाष कर सकते हैं (818)352-0452

ये संदेश कॉपी राईट नहीं है। आप उन्हें िबना डॉ0हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते
 हैं। यद्यपि, डॉ0हिमर्स के समस्त वीडियो संदेश कॉपीराइट हैं एवं केवल अनुमति लेकर
ही उपयोग में लाये जा सकते हैं।

संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा प्रार्थना की गई: गिनती २१:५−९
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
(''देखो और जीवित रहो'' विलियम ए आगडेन १८४१−१८९७)


रूपरेखा

सर्प और मसीहा

THE SERPENTS AND THE SAVIOUR

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

''यहोवा ने मूसा से कहा एक तेज विष वाले सांप की प्रतिमा बनवाकर खम्भे पर लटका; तब जो सांप से डसा हुआ उसको देख ले वह जीवित बचेगा। सो मूसा ने पीतल को एक सांप बनवाकर खम्भे पर लटकाया; तब सांप के डसे हुओं में से जिस जिसने उस पीतल के सांप को देखा वह जीवित बच गया।'' (गिनती २१:८−९)

(भजन ७८:२५; रोमियों ८:७; ३:९−१०; गिनती २१:६;
रोमियों ६:२३; यिजकेल १८:४, २०; गिनती २१:७;
यूहन्ना ३:२, ७, ९; १४−१५)

१. प्रथम, पाप का डंक और मृत्यु, १कुरूंथियों १०: ९−११

२. दूसरा, पाप और मृत्यु से बचाव, १पतरस २:२४; यूहन्ना ३:१४

३. तीसरा, पाप और मृत्यु से बचाव का मार्ग,
यूहन्ना ३:१४,१५; इब्रानियों १२:२; यशायाह ४५:२२; लूका २३:४३