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शैतान द्वारा अंधा बनाया जाना

SATANIC BLINDING
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स जूनि
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २२ फरवरी, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में किया गया प्रचार
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, February 22, 2015

''परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।'' (२ कुरूंथियों ४:३−४)


मैं आज सुबह शैतान के बारे में बात करने जा रहा हूं। यह अभी तक का सबसे कठिन संदेश होगा जिसे मैंने तैयार किया है। मुझे यह भी निश्चित है कि आज शैतान नहीं चाहता कि वह इस संदेश को आप तक पहुंचने दे। मेरे पास डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल की पुस्तक है जिसमें स्त्रोत के रूप में उपयोग करने जा रहा हूं। मैंने उनके कुछ संदेश जो शैतान और दुष्ट आत्माओं के उपर है उनका अध्ययन किया है और सोचा कि मैं अपने संदेश के परिचय के समय उनका इस्तेमाल करूं। मैंने वह पुस्तक डेस्क पर रख दी। किंतु जब संदेश तैयार करने का समय आया तो मुझे वह नहीं मिली! ऐसा लगा कि वह गायब हो गई! मुझे अध्ययन के लिये बैठना था, किंतु मैंने तीन घंटे उसे खोजते हुये बिताये पर वह नहीं मिली। मुझे पक्का विचार है कि शैतान कुछ करना चाह रहा था।

तब इलियाना घर लौटी। मैं रूक कर परमेश्वर से प्रार्थना करने लगा कि मुझे उस किताब, को खोजने में सहायता करें। इलियाना ने मेरे डेस्क के पास नीचे फर्श पर भी सारी किताबें तलाशी। जब वह देख रही थी मैंने सोचा कि एक और बार मुझे किताब को खोजना चाहिये। मैं पहले ही तीन बार देख चुका था, फिर भी मैंने प्रयास किया। और किताब मुझे वहीं मिली! मेरा दिल खुशी से उछल पडा! परमेश्वर ने मेरी प्रार्थना का उत्तर दे दिया था और मुझे दिखा दिया कि किताब कहां थी!

कोई सोच सकता है कि यह तो मामूली सी बात थी − एक किताब को खोजना। किंतु अक्सर ''छोटी सी बातों में'' हम देखते हैं कि शैतान कितना सावधान और पूरा कार्य करता है। इब्रानी भाषा में उसका नाम ''शैतान'' है। ''साओतान'' − अर्थात ''विरोधी'' इसका अर्थ ''दुख,'' ''शत्रु'' और ''विरोधी।'' ''शैतान'' शब्द एक और इब्रानी शब्द से निकला है जिसका अर्थ है ''आक्रमण करना।'' शैतान परमेश्वर का विरोधी है। वह परमेश्वर का विरोध करता है। वह परमेश्वर के कार्य का विरोध करता है। और वह अत्यंत सामर्थशाली है। डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल लगभग साठ वर्षो तक फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च डलास, टैक्सास के पास्टर रहे वह यूनानी बाईबल और धर्मविज्ञान में पी एच डी हैं। वह बाईबल के अचूक होने के ज्ञाता है। वह बीसवीं शताब्दी के महानतम प्रचारकों में से एक महान दक्षिणी बैपटिस्ट प्रचारक हैं। डॉ क्रिसवेल का कथन था,

     शैतान हमारी शैक्षिक बिरादरी और व्याख्यानों में बहुत विद्वान बनकर खडा रहता है। वह शैक्षिक प्रकिृयाओं की अध्यक्षता करता है, और वह चाहता है कि परमेश्वर की चर्चा उन गोष्ठियों में न हो। इस संसार का देवता है शैतान।
     शैतान को धर्म पसंद है.......प्राचीन संसार की संपूर्ण कथा बेबीलोनियंस, इजिप्शियन, यूनानी और रोमन देवताओं के इर्द गिर्द घूमती है। भारत में आज भी ३३५ करोड देवता पूजे जाते हैं। शैतान को यह पसंद आता है। जितने अधिक देवताओं की पूजा कर सकते हैं करो, किंतु सच्चे ईश्वर को बस छोड दो। (शैतान) संसार के धर्मो से प्रेम करता है। वह लाखों करोडों उन आराधकों को चाहता है जो बुद्ध या शिंतो के मंदिरों पर जाते हैं। वह हिंदुओं के देवताओं से प्रेम करता है वह मुस्लिमों के अल्लाह से प्रेम करता है। लाखों करोडो लोग उन देवताओं को पूज रहे हैं, और वह प्रसन्न है। बस सच्चे परमेश्वर इन में से छोड दो.....
      (शैतान) ज्योर्तिमय देवदूत है, जब वह धोखा देता है तो बडी सावधानी से उसके अंत परिणाम को छुपा लेता है.....वह एक अलग ही विशिष्ट व्यक्ति जान पडता है। आप उसकी तरफ देखते हो। वह एक योग्य अधिकारी है, ठेठ सजे वस्त्रों में, समाज और निगमों में वह उंचा स्थान रखता है। वह हाथ में (शराब) का गिलास थामे व्यक्ति है। किंतु (शैतान) शराब के दुष्परिणाम जैसे गटर में गिरना, पीने के बाद उल्टियां करना, टूटे परिवारों का दुख, टूटे परिवार और अनाथ बच्चे ये सब को छुपा लेता है। वह अति बुद्धिमान है! (वह तो इस संसार का देवता है।)
     वह किसी भी चौडे मार्ग या हालीवुड या लॉस वेगास की चकाचौध और उल्लास को महिमामंडित करता है, पोर्नोग्राफी को बढ चढ कर बताता है। किंतु इन से उपजी बीमारी सिफलिस और गोनोरिया हर्पीज और एडस एवं टूटे दिल उनके आंसू और दुखों को छिपा लेता है। यह शैतान है (इस संसार का देवता).....
     .....वह जीवित परमेश्वर के चर्च और प्रभु मसीह का सामना करता है। प्रेरित पौलुस ऐसे प्रतिद्वंदी चर्च का वर्णन करते हैं.....''वे भक्ति का भेष तो धरेंगे, पर उसकी शक्ति को न मानेंगे'' (२ तिमुथियुस३:५).....। प्रतिद्वंदी चर्च शैतान की गहरी बातों को जानता है और परमेश्वर की गहरी बातों को प्रगट करता है। शैतान को यह अच्छा लगता है। वह धर्म तो पसंद करता है पर उस धर्म का कोई छुटकारा देने वाला न हो.....कोई खोये हुओं से बोलने वाला न हो। जो बचाया नहीं गया है उसे परिवर्तित करने का प्रयास मत करो। सब चीजों को बहुत सुंदर, विधिपूर्ण और बुद्धिमतापूर्ण बनाओ बस बचाने वाले (मसीह) को इन सबसे बाहर रखो। यह शैतान है। (जो इस संसार का देवता है।)
     वह इतना बुद्धिमान है, ज्योतिर्मय देवदूत, जो शैतान किसी को धोखा देता है और सावधानीपूर्वक उसके अंत परिणाम छिपा लेता है (डब्ल्यू ए क्रिसवेल, पीएचडी, ''दि फॉल आफ लूसीफर'' ग्रेट डॉक्ट्रीन्स आफ दि बाईबल − ऐंजीयोलॉजी, वॉल्यूम ७, जोंडरवन पब्लिशिंग हाउस, १९८७, पेज ९३−९५)

वह बिना मसीह के जीवन नष्ट है यह परिणाम छिपा लेता है। वह जीवन का खालीपन और दुख छिपा लेता है। वह बिना मसीह के मृत्यु और उम्मीद रहित कब्र को छिपा लेता है। वह बिना उद्धार पाये लोगों का अंतिम न्याय छिपा लेता है। वह अनंत आग की झील में उसकी लपटों में मनुष्य की आत्मा का सदैव ताडना पाते रहने को छिपा लेता है! वह शैतान है। वह इस संसार का देवता है!

और इस रूप के लिये, इस शैतान के लिये, प्रेरित पौलुस कहते है,

''परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।'' (२ कुरूंथियों ४:३,४)

१. प्रथम, जो खोये हुये लोग है उनसे क्या छिपा है

क्यों, यह सुसमाचार है, ''मसीह का महिमामयी सुसमाचार।'' तुम जो भटके हुये लोग हो यह तुम से छिपा हुआ है। मसीह का सुसमाचार सीखने के लिये बहुत आसान चीज है। आप पांस मिनिट से भी कम समय में सुसमाचार के मूल तथ्यों को सीख सकते हैं। प्रेरित पौलुस धर्मशास्त्र के दो छोटे पदों में सुसमाचार बता देते हैं। उनका कहना है,

''इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। ओर गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।'' (१ कुरूंथियों १५:३,४)

यह एक वाक्य का केवल अंश मात्र है। सुसमाचार तो केवल एक वाक्य में वर्णित हो जाता है!

प्रथम, ''मसीह हमारे पापों के लिये मरे।'' यह मसीह थे जो हमारे पापों के लिये मरे, नाकि कोई अन्य पुरूष। यह यीशु मसीह थे, जो कुंआरी मरियम से उत्पन्न हुये थे यह मसीह थे, जो पापरहित निष्कलंक पैदा हुये, जिन्होंने पाप रहित जीवन व्यतीत किया। यीशु मसीह थे, जिनके लिये रोमन गवर्नर पिलातुस ने कहा था, ''मैं तो इसमें कोई दोष नहीं पाता'' (यूहन्ना १८:३८) बिल्कुल कोई दोष नहीं! कितनी सच बात है। यीशु के शत्रु भी उसमें कोई दोष और पाप नहीं ढूंढ सके। उसके बारे में उन्होंने झूठ बोला, यह आरोपित किया कि वह कहता है वह यह मंदिर गिराकर तीन दिन में बना सकता है; जो उसने कभी नहीं कहा! यह लोगों द्वारा झूठा आरोप था! वे तर्कपूर्ण झूठ बोलकर उसे मरवाना चाहते थे। यह यीशु मसीह थे जिन्होंने कभी झूठ नहीं बोला और उन्होंने केवल लोगों की सहायता करने के अलावा कुछ नहीं किया। वह सिद्ध पापरहित परमेश्वर के पुत्र थे।

दूसरा, ''मसीह हमारे पापों के लिये मरे।'' मसीह क्रूस पर हमारे स्थान पर मरे, ताकि हमारे पापों का दंड चुका सके। प्रेरित पतरस ने कहा था,

''इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया'' (१ पतरस ३:१८)

यशायाह भविष्यवक्ता ने मसीह के लिये कहा,

''परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया'' ( यशायाह ५३:६)

यह मसीह है, जो हमारा स्थानापन्न बना। वह हमारे बदले मरे − परमेश्वर की दृष्टि में हमारे पाप का दंड चुकाने के लिये बलिदान देने की आवश्यकता थी जो यीशु ने दिया।

तीसरा, ''वह गाडे गये, और.....फिर तीसरे दिन जी उठे।'' वह वास्तव में क्रूस पर मरे। उनका शव कब्र में रखा गया। रोमन सरकार ने कब्र को सील किया और उनका शव वहां रखा रहा। किंतु तीसरे दिन वह जीवित हुये। वह शारीरिक रूप में मृत अवस्था से पुन: जीवित हुये − ताकि हम उन पर विश्वास लायें और जीवन पायें।

''ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए'' (यूहन्ना ३:१५)

यह सुसमाचार है! यह इतना ही साधारण है!

''कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे.....हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ, फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे'' (रोमियों ५:८−१०)

यह सुसमाचार है। एक बच्चा तक इन तथ्यों को पांच मिनिट में सीख सकता है! आप जो इस चर्च में केवल दो या तीन बार आये हो आप भी इन तथ्यों को पहले से जानते हो। आपने पहले से सुसमाचार के इन तथ्यों को सीखा है। और फिर भी.....और फिर भी.....और फिर भी, आप बचाये नहीं गये। आप सुसमाचार तो जानते हैं, पर बचाये नहीं गये हैं। ''परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पडा है, तो यह नष्ट होने वालों ही के लिये पडा है'' (२ कुरंथियों ४:३)

२. दूसरा, जो खोये हुये हैं उनसे सुसमाचार क्यों छिपा है।

इसका उत्तर हमारे पद में ही है, ''उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि इस संसार के ईश्वर ने अंधी कर दी है'' (२ कुरंथियों ४:४) शैतान को ''इस संसार का ईश्वर'' कहा जाता है। यूहन्ना १२:३१ में शैतान को ''संसार का सरदार'' कहा गया है। १ यूहन्ना ५:१९ में हमें बताया गया है,

''और सारा संसार उस दुष्ट के वश में पड़ा है'' (१ यूहन्ना ५:१९)

स्कोफील्ड सेंटर की व्याख्या इसे इस प्रकार कहती है,

''संपूर्ण संसार इस दुष्ट की पकड में है''

एन.ए.एस.वी.इसे इस प्रकार समझाता है,

''संपूर्ण संसार उस दुष्ट शक्ति के अधीन है''

ये पद स्पष्ट करते हैं कि इस संसार (ब्रम्हांड) का तंत्र ईश्वरविहीन शासक, कृत्रिम धर्म, दुष्ट लोग और विकृत विचारों से भरे पडे हैं जो शैतान द्वारा नियंत्रित होते हैं। इस युग में अधिकतर लोग विचारों, मतों, उददेश्यों और दृष्टिकोण से भरे होकर व्याप्त सांसारिक आत्मा के वश में हैं। एलिकॉट इसे ''नफरत, झूठ और स्वार्थपन की आत्मा (जो) प्रायोगिक रूप से शैतान के लिये उपयुक्त है'' कहते हैं (एलिकॉटस कमेंटरी आन दि व्होल बाईबल, वॉल्यूम ७, जोंडरवन, एन डी, पेज ३७५; २ कुरंथियों ४:४ पर व्याख्या)

एलिकॉट ने कहा कि ''इस संसार का देवता सीधे परमेश्वर के (कार्य के) विरोध में है'' (उक्त संदर्भित)। तो ''शैतान'' के नाम का अर्थ है − दुख, विरोध, शत्रुता, प्रतिद्वदी।

आपको इसका अहसास नहीं होगा किंतु प्रत्येक जो अपरिवर्तित जन है परमेश्वर का विरोध करता है। प्रत्येक जन! इसमें कोई अपवाद नहीं! जो हमारे यहां टेलीफोन इवेंजलिज्म का कार्य करते हैं इस अपने अनुभव से जानते हैं। वे कभी भी ऐसे जन को नहीं पाते जो चर्च आता हो और बिना संघर्ष के बचाया गया हो − बहुत बार तो इतना वृहद आकार का संघर्ष होता था! और यह उनके साथ होता था जो सचमुच में यीशु के पास आना चाहते थे। किंतु अधिकतर लोग तो नहीं आयेंगे! यह विशेषकर गोरे अमेरिकंस के लिये मैं कह रहा हूं − किंतु, किसी और रूप में यह प्रत्येक जाति या समूह के लिये सच है। यहां तक कि एक ''बहुत अच्छी'' चीनी मां भी कहेगी, ''ठीक है, वह आ सकती है परन्तु उसे बपतिस्मा मत देना!'' वे अक्सर ऐसी बातें कहते हैं जिससे आपको पता चलता है कि वे अपने मन में परमेश्वर के विरूद्ध है। उनके विचारों को इस संसार के देवता ने नियंत्रित कर रखा है, जैसा कि एलिकोट ने कहा, ''झूठ और स्वार्थ की आत्मा'' (उक्त संदर्भित)

मैंने १९७५ अप्रेल में चर्च प्रारंभ किया था − और मै चालीस साल तक सांसारिक आत्मा में नियंत्रित लोगों द्वारा, जिनके दिल पर शैतान का नियंत्रण था, बडे रूप में अंतहीन, पीडादायक, दुख देने वाला संघर्ष करता रहा, ये सब परमेश्वर और उसके लोगों के विरोधी थे। इफिसियों २:२ में शैतान को कहा गया है, ''आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।'' यह शैतान है! यह इस संसार का देवता है! वह सच्चे परमेश्वर का शत्रु है! वह प्रत्येक मनुष्य के मन में कार्य करता है ताकि उन्हें सच्चे मसीही बनाने से रोके। यह केवल मेरा मत नहीं है। डॉ मार्टिन ल्योड जोंस, जो ब्रिटिश प्रचारक होकर, बीसवीं शताब्दी के महानतम प्रचारकों में से एक माने जाते थे। उन्होंने कहा था,

शैतान सदैव हमें उलझाने की राह देखता है। वह परमेश्वर के कार्य को नष्ट करना चाहता है.....हर संभव तरीकों से, वह अपनी विचारधारा को हमारे उपर लागू करना चाहता है (मार्टिन ल्योड जोंस, एम डी स्प्रिचुअल ब्लेसिंग, किग्सवे पब्लिकेशन, १९९९, पेज १५८)

एक और जगह पर डॉ ल्योड जोंस ने शैतान के लिये कहा था, ''उसका एक बडा प्रयास है कि वह पुरूषों और महिलाओं को परमेश्वर से अलग कर दे।'' ''(शैतान) तो परमेश्वर का महानतम प्रतिद्वंदी है वह अपने संपूर्ण अस्तित्व से परमेश्वर से नफरत करता है'' (आथेंटिक क्रिश्चियनिटी, वॉल्यूम ४, दि बैनर आफ ट्रूथ ट्रस्ट, १९६६, पेज ४२) शैतान − वह है जो आपके दिमाग को अंधा बना देता है और सुसमाचार को आपसे छिपा रखता है।

३. तीसरा, जो खोये हुए हैं सुसमाचार से वे कैसे वंचित है।

डॉ ल्योड जोंस का कथन है, ''शैतान सदैव हमें उलझन में डालने की राह देखता है।'' सुसमाचार महिमामयी है, अदभुत, हमें आजादी और उम्मीद देने वाला है। शैतान नहीं चाहता कि आपके पास ये सब हो! धर्मशास्त्र में लिखा है कि उसने, ''अविश्वासियों की बुद्धि अंधी कर दी है ताकि उन तक मसीह के महिमामयी सुसमाचार का प्रकाश न पहुंचे.....सदैव उन पर चमकता रहे।'' शैतान सदैव ''हमें उलझन में डालने के लिये राह देखता है।'' मैं आपको कुछ रास्ते समझा रहा हूं जिनके द्वारा शैतान लोगों को उलझन में डालता है, उन्हें यीशु पर विश्वास रखने से रोकता है। मुझे आपको उसके अधिकतर तरीके बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शैतान बहुत सारे तरीकों का प्रयोग करता भी नहीं है। उसे इसलिये अधिक तरीकों का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह जानता है कि वह तो कुछ एक चालाकियों से ही आपको गुलाम बना सकता है। यहां मैं उसकी तीन मुख्य चालाकियों को बता रहा हूं, जो आपको बचाये जाने से रोकती है।

१. शैतान आपके दिमाग में स्वयं की बातें बैठा देता है और आपको सोचने पर विवश करता है ''कि मुझे बहुत सारी बातों का त्याग करना होगा। चर्च आने तक तो सब ठीक है, पर अगर मैं एक सच्चा मसीही बन जाउं, तो मुझे बहुत सारी बातों का त्याग करना होगा।'' यीशु ने शैतान की इस विचारधारा का उत्तर एक प्रश्न से दिया। यीशु अक्सर प्रश्न का उत्तर और प्रश्न पूछने से देते थे। अगर शैतान आपको कहता है ''तुमको बहुत कुछ त्यागना पडेगा, ''तो यीशु कहते हैं, ''एक मनुष्य अपनी आत्मा के बदले क्या दे सकता है?'' ''अगर एक मनुष्य संपूर्ण जगत को प्राप्त करे और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा?'' (मरकुस ८:३६, ३७) अगर यह संसार जो आपको सब कुछ दे सकता है और आपको अपनी आत्मा को खोना पडे, आप अनंत काल के लिये आशाहीन हो जायेंगे, जिसमें कोई आनंद, उम्मीद न होगी − पूर्णत: संपूर्ण अनंतकाल के लिये आशाहीनता के शिकार होंगे।

२. शैतान आपके मन में इन विचारों की गहरी पैठ कर देता है और आप सोचने लगते हैं, ''मैं तो प्रति रविवार चर्च आ रहा हूं। मैं तो हर आराधना में चर्च में उपस्थित रहता हूं। मेरे विचार से तो मैं ठीक हूं।'' स्पर्जन ने कहा था, ''वे मसीह की नहीं सुनेंगे जब वह कहता है, जो विश्वास करता है वह नाश नहीं होगा; उसका नैतिक चरित्र चाहे जो भी हो। नहीं; वे तो....नष्ट होने के मार्ग पर जायेंगे उनके मन में ऐसी लौ जलती रहेगी। निश्चित ही लोगों की आंखे इस संसार के शैतान ने अंधी कर दी है।''

३. शैतान आपके मन में इन विचारों की गहरी पैठ कर देता है और आप सोचने लगते हैं, ''मुझे तो एक निश्चित भावना आनी चाहिये। मैं जानता हूं पास्टर कहते हैं कि मुझे किसी भावना को नहीं खोजना चाहिये। किंतु अगर मुझे कोई भावना नहीं होगी तो मुझे डॉ कैगन को पूछताछ कमरे में बताने के लिये कुछ नहीं होगा। डॉ कैगन मुझसे पूछेंगे, ‘इस बारे में जरा बतायें।’ तो मैं उन्हें क्या बताउंगा अगर मेरे पास ऐसी भावना का अनुभव नहीं होगा।'' वृद्ध ब्रिटिश प्रचारक डॉ मार्टिन ल्योड जोंस की बात सुनिये। उन्होंने कहा था, ''उद्धार पाने की जानकारी लेने वालो को यह बताना आवश्यक है कि नया नियम कहीं भी कभी नहीं कहता, ‘कि जो महसूस करता है वह बचाया जायेगा,’ परन्तु ऐसा कहता है, ‘जो विश्वास करेगा वह बचेगा,’ तो यह पर्याप्त है कि अगर आप कहें, ‘मैं इसी के द्वारा जीवित हूं; भले ही मैं महसूस करता हूं या नहीं करता इससे फर्क नहीं पडता; हम भावनाओं से नहीं बचाये जाते परन्तु यीशु पर विश्वास करने से बचाये जाते हैं’'' (लाईफ इन गॉड, क्रास वे बुक्स, १९९५, पेज १०५)


अब मैं जानता हूं कि जो कुछ मैंने कहा उसमें तो कुछ भी आपके काम नहीं आयेगा जब तक परमेश्वर आपको यह बोध नहीं होने देगा कि आप स्वयं के प्रयासों से शैतान से मुक्त नहीं हो सकते। आप अवश्य देखोगे कि आप मसीह को नहीं चुन सकते। डॉ ल्योड जोंस ने कहा था, ''इस संसार का सरदार आपके लिये ऐसा कर पाना ब्लिकुल असंभव बना देता है'' (अश्योरेंस, बेनर आफ ट्रुथ, १९७१, पेज ३१०) अगर आपके दिल की दशा के प्रति बिल्कुल ईमानदार हो जाते हैं; परमेश्वर के साथ ईमानदारी हो जाते हैं, तो आपका मन स्वयं जोर से चिल्ला उठेगा, ''हे पिता मैं भटक गया हूं! हे यीशु, मुझे बचा।'' ऐसे ही एक क्षण में, यीशु आपको लेने आयेगा, और वह आपको बचायेगा।

कुछ दिन पहले हमने मरकुस का वह वृतांत पढा जब एक कोढी यीशु के पास आया और वास्तव में यह कितना साधारण है। वह मनुष्य यीशु के पास आया, और घुटनों के बल बैठ गया। उसने यीशु से कहा ''अगर तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।''

''उस ने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया..... और (कहा) मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा। और तुरन्त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।'' (मरकुस १:४१,४२)

क्या, इसी प्रकार आज सुबह कोई यीशु के पास यह कहते आ सकता है। ''अगर तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।'' ''मैं करूंगा; तुम शुद्ध हो जाओ'' − और वह शुद्ध हो गया। यह सुसमाचार है! यह उद्धार का शुभ संदेश है! यही आपकी एकमात्र आशा है! शैतान से दूर हो जाओ वह झूठ बोलता है! ''यीशु, अगर तू चाहे, तो मुझे शुद्ध कर सकता है।'' ''मैं करूंगा; तुम शुद्ध हो जाओ।'' अगर आप स्पर्जन की इस छोटी कविता के शब्दों पर विश्वास करते हैं, तो आप एकदम ही यीशु द्वारा बचा लिये जायेंगे।

एक दोषी, दुर्बल और असहाय कीडा,
   मसीह की दयालू भुजाओं में मैं गिरता हूं;
वह मेरी ताकत और धार्मिकता है,
   मेरा यीशु जो मेरा सब कुछ है।

अब आप मसीह में आनंद मनाते हुये जा सकते हैं! स्वर्गीय पिता, मैं प्रार्थना करता हूं कि कोई आज सुबह यीशु की बांहो में गिरकर बचाया जाये। आमीन।

हां में जानता हूं, हां, मैं जानता हूं,
   यीशु का लहू मुझ जैसे घोर पापी को बचा सकता है,
हां में जानता हूं, हां, मैं जानता हूं,
   यीशु का लहू मुझ जैसे घोर पापी को बचा सकता है,
(''हां, मैं जानता हूं!'' आना डब्ल्यू वॉटरमैन, १९२०)

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा प्रार्थना की गई: २ कुरूंथियों४:३−६
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''हां, मैं जानता हूं!'' (आना डब्ल्यू वॉटरमैन, १९२०)


रूपरेखा

शैतान द्वारा अंधा बनाया जाना

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स जूनि

''परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।'' (२ कुरूंथियों ४:३−४)

(२ तीमुथियुस ३:५)

१. प्रथम, जो खोये हुये लोग है उनसे क्या छिपाहै, १कुरूंथियों १५:३, ४;
यूहन्ना १८:३८; १पतरस ३:१८; यशायाह ५३:५, ६; यूहन्ना ३:१५;
रोमियों ५:८−१०

२. दूसरा, जो खोये हुये हैं उनसे सुसमाचार क्यों छिपा है, यूहन्ना १२:३१;
१यूहन्ना ५:१९; इफिसियों २:२

३. तीसरा, जो खोये हुए हैं सुसमाचार से वे कैसे वंचित है, मरकुस
८:३६,३७; मरकुस १:४१,४२