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किताबें और किताब

(अंतिम न्याय पर एक संदेश)
THE BOOKS AND THE BOOK
(A Sermon on the Last Judgment)
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, २५ जनवरी, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, January 25, 2015

''फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के साम्हने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया। और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उस में थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उन में थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया। और मृत्यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए; यह आग की झील तो दूसरी मृत्यु है। और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।'' (प्रकाशित वाक्य २०:१२−१४)


जब मैं और मेरी प्रत्नी का विवाह हुआ तब हम पहली बार एजरायल गये। लौटते समय हम कुछ दिन के लिये रोम रूके। दूसरे स्थानों को देखते हुये, हम वेटीकन भी गये, संत पतरस बेसीलिका, जहां पोप का शासन है और जहां सदियों से कई कलाकृतियों का खजाना जमा है। मैं हमेशा से ही सिस्टीन चैपल सीलिंग देखने की इच्छा रखता था। जहां माईकल ऐंजेलो ने (१४७५−१५६४) में संपूर्ण संसार की सबसे महानतम कृतियों में से एक का सृजन किया था। इसके अंदर बाईबल की महानतम घटनाओं का वर्णन है, सृष्टि का निर्माण, मनुष्य का पतन, हमारे मूल माता पिता का अदन की वाटिका से बाहर निकाला जाना और आगे भी बाईबल में वर्णित घटनाओं का चित्रण उन कलाकृतियों में मिलता है। उस छत को इन्ही चित्रण से भरा गया है। एक अन्य पोप ने माईकल ऐंजेलो को अंतिम न्याय के चित्रण से सामने की दीवार भरने को कहा। यह सांस स्तब्ध् कर देने वाला चित्रण उकेरा गया था जिसमें प्रभु यीशु मसीह नरक जाने वालों को दंडित कर रहे थे। एक व्यक्ति जो नरक की ज्वाला में जलते हुये अपने चेहरे पर आश्चर्य और खौफ के भाव लिये हुये था। मुझे आश्चर्य होता है कि कितनी बार पोप या किसी कार्डिनल ने वास्तव में उस तस्वीर के सामने पिछले सौ सालों में खडे होकर अंतिम न्याय पर प्रचार किया होगा। मैं नहीं सोचता किसी एक ने भी किया होगा!

और हमारे बैपटिस्ट और प्रोटेस्टेंट चर्च की हालत भी तो कोई अच्छी नहीं है। देखा जाये तो और भी बुरी है। कम से कम उन लोगों के पास लोगों को अंतिम न्याय स्मरण दिलाने के लिये वह कलाकृति तो है। अगर वह कोई बैपटिस्ट चर्च होता, तो हमारी महत्वपूर्ण महिलाओं में से एक, जैसे कि संडे स्कूल की सुप्रिंटेंडेन्ट या मसीही विद्यालय की प्राचार्य, ने सोच लिया होता कि, ऐसी कलाकृति ऐसा चित्र तो बडा भयानक है इससे तो बच्चे डर जायेंगे। एक दोपहर अगर पास्टर चलकर अंदर आये तो पायेंगे कि यह महिला ने किसी को बुलवाकर उस पेंटिग को सफेद रंग से पुतवा दिया। लगभग ४५० सालों से सिस्टीन चैपल की दीवारों पर माईकल ऐंजेलो द्वारा उकेरी अंतिम न्याय की तस्वीर उपलब्ध है। मैं तो मानता हूं कि हमारे संडे स्कूल की महिलायें बैपटिस्ट चर्च के अंदर चार सालों तक भी ऐसी तस्वीर को रहने देगी! कोई इवेंजलीकल चर्च भी ऐसा ही करेगा!

आप सोच रहे होंगे कि मैं हमारे बैपटिस्ट और इवेंजलीकल चर्चेस के प्रति कितना कठोर बोल रहा हूं? मैं शायद इतना कठोर कभी नहीं बोलता!!!

वह अंतिम समय कब था जब आपने बैपटिस्ट चर्च के पास्टर को नरक पर प्रचार करते हुये सुना था? कब आपने किसी सुसमाचारीय या करिश्माई पास्टर को नरक पर प्रचार करते हुये सुना था? इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि हमने १५० वर्षों से राष्ट्र भर में कोई आत्मिक जागृति का अनुभव नहीं किया!

डॉ. मार्टिन ल्योड—जोंस आत्मिक जागृति विषय के महान विदयार्थी और उस विषय पर एकाधिकार रखने वाले व्यक्ति थे। उनका कथन था, ''....जब तक मसीही चर्च में पुरूष और स्त्रियां नम्र और दीन बनकर, पृथ्वी पर जीवन बिताते हुये इस पवित्र, धर्मी, हां, नाराज परमेश्वर के सामने मन को झुकायेंगे नहीं तब तक मैं आत्मिक जागृति की आशा नहीं रखता हूं'' (मार्टिन ल्योड—जोंस, एम.डी. रिवाईवल, क्रासवे बुक्स, १९८७, पेज ४२) इसलिये इस महान प्रचारक ने कहा था, ''मैं आपको चौंकन्ना करने के लिये कि नरक का दृश्य कितना भयानक होता है, पूर्ण रूप से प्रयास करूंगा। आंतरिक पाप बोध, अनंत काल की उलझनें, अनंत काल का निकम्मापन, कभी भी न बदलने वाली पीडा, यह उन लोगों का भाग होगा जो सिर्फ सुसमाचार सुनकर उस पर सिर हिलाते और इसी में संतुष्ट हो जाते हैं, किंतु जो....कभी भी सब कुछ त्याग कर इसे अपने संपूर्ण मन से अपनाते नहीं हैं'' (ल्योड—जोंस, इवेंजलिस्टिक सर्मन्स, दि बेनर आफ ट्रूथ ट्रस्ट, १९९०, पेज १६१)

निश्चित ही कोई भी व्यक्ति जो थोडा सा भी मसीही इतिहास जानता है उसने जॉन वेस्ली का नाम अवश्य सुना होगा। वेस्ली (१७०३—१७९१) को ''ऐपिस्कोपेलियन प्रिस्ट'' कहा जाता था। किंतु इतिहास को देखें तो हम पायेंगे कि परमेश्वर ने उन्हें एक महानतम आत्मिक जागरण लाने वाले प्रणेता के रूप में इस्तेमान किया, जिन्होंने मेथोडिस्टों में आत्मिक जागरण फैलाया। सुनिये कि जॉन वेस्ली नरक के विषय में क्या कहते हैं।

''दुष्ट जन....नरक में धकेले जायेंगे, यहां तक कि सब वे लोग जो ईश्वर को भूल जाते हैं उन सभी को अनंतकाल के लिये नष्ट होने का दंड मिलेगा। और वे प्रभु की उपस्थिति से उसकी महिमा की सामर्थ से सदैव के लिये वंचित कर दिये जायेंगे। वे 'आग की झील में फेंक दिये जायेंगे' जो मूलत: 'शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है;' जहां वे गुस्से और पीडा से अपनी जिव्हा से कोटेंगे, वे परमेश्वर को कोसेंगे और उपर निहारेंगे। नरक की उस सोचनीय दशा में − घमंड, द्धेष, बदला, गुस्सा, आतंक, दुख−लगातार उन लोगों को निगलते जायेंगे। वहां उनको 'कोई विश्राम नहीं मिलेगा, दिन और रात, उनके क्लेश और प्रताडित होने का पैमाना उपर ही उपर चढता जायेगा!' वहां 'उनके कीडे मरेंगे नहीं, और न वह ज्वाला कभी बुझेगी।''' (जॉन वेस्ली, एम ए, ''दि ग्रेट एसाइज्'' दि वक्र्स आँफ जॉन वेस्ली '' वॉल्यूम ५, बेकर बुक हाउस, १९७९ संस्करण, पेज १७९)

उनकी मृत्यु के समय होने तक उनकी निगरानी में चलने वाली मैथोडिस्ट संस्थाओं में लगभग अस्सी हजार लोग सदस्य थे (उक्त संदर्भित, पेज ४५) सन १८३४ तक ६१९, ७७१ सदस्य थे। यह महान प्रचारक नरक के विषय पर प्रचार करने से नहीं डरा, वैसे ही स्वर्ग में प्रवेश के लिये सच्चा परिवर्तन आवश्यक है उस आवश्यकता को भी बतलाने से नहीं डरा। आज युनाईटेड मैथोडिस्ट चर्च गर्त में जा रहा है क्योंकि उन्होंने वेस्ली के तरह का प्रचार लंबे समय पहले ही त्याग दिया था! उन्हे उन विषयों पर वापस लौट कर आना पडेगा। जिसे प्रचार करने के द्वारा वेस्ली ने उनके डिनॉमीनेशन को बचाकर रखा था। किंतु चौंकिये नहीं! इतिहास बताता है कि स्वधर्मत्यागी अक्सर स्वधर्मत्यागी ही बने रहते हैं!

अब स्पर्जन की सुनिये। डॉ जॉन ब्राउन ने १८९९ में येल युनिवर्सिटी में स्पर्जन के उपर अपने व्याख्यान में कहा। उन्होंने स्पर्जन की सेवकाई की प्रशंसा करते हुये उसे बताया कि यह ''ऐसी सफलता थी जो इंग्लैंड में वाईटफील्ड और वेस्ली के समय के पश्चात अतुलनीय थी।'' डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल, जो टेक्सास के फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च डलास के पास्टर थे, और दक्षिणी बैपटिस्ट सभा के दोबारा अध्यक्ष बने, उन्होंने कहा था, ''स्पर्जन सभी समय के महानतम प्रचारक कहलाये जाने वालों में से एक थे, और सभी पीढियों के लिये उनका संदेश सामयिक और उपयोगी है।'' अब सुनिये महान स्पर्जन ने नरक के विषय में क्या प्रचार किया।

''यह न्याय जो आयेगा वह आपकी देह और आत्मा दोनों को आग की झील में डाल देगा......नरक वह स्थान है जहां परमेश्वर की अनुपस्थिति है − जहां पाप का ही विकास होता है, जहां हर जुनुन पर से लगाम हट जाती है, जहां हर अभिलाषा स्वतंत्र हो जाती है − यह वह स्थान है जहां परमेश्वर रात और दिन पाप करने वालों को रात और दिन दंड देता है − यह वह स्थान है जहां न नींद है, न आराम, और न कोई आशा − यह वह स्थान है जहां एक बूंद पानी भी नहीं मिलता, यद्यपि जिव्हा प्यास के मारे जलती रहती है − यह वह स्थान है जहां प्रसन्नता कभी दम नहीं भरती − जहां रोशनी का सूरज नहीं उगता − जहां सांत्वना जैसा कोई शब्द नहीं सुना जाता, जहां दया अपने पंख गिरा देती है और समाप्त हो जाती है − यह वह स्थान है जहां गुस्से और आग में जलना शेष है − यह वह स्थान है, जिसके समान और किसी स्थान का चित्रण नहीं किया जा सकता। परमेश्वर हम को ऐसी आशीष दे कि हमें कभी ऐसे स्थान का मुंह न देखना पडे......अगर हम पापी के रूप में मरते हैं, और नरक से बाहर रहें तो यह तो असंभव है: तब तो, अब अनंत रूप से खो चुके होंगे......सोचिये! सोचिये! यह अंतिम चेतावनी हो सकती है जो आप सुनेंगे'' (सी एच स्पर्जन, ''दि फर्स्ट रेजेरेक्शन,'' दि मेट्रोपोलिटन टैबरनेकल पुलपिट, वॉल्यूम ७, पिलग्रिम पब्लिकेशंस, १९८६ पुर्नमुद्रण, पेज ३५२)

मैं इसी प्रकार आपको लगातार नरक के उपर कितने ही उद्धरण दे सकता हूं जो लूथर, बुनयन, एडवर्ड, वाईटफील्ड, मूडी, डॉ जॉन आर राईस और ऐसे अनेक महान प्रचारक सदियों से देते आ रहे हैं। किंतु इतने ही पर्याप्त हैं। मैं तो साधारण रूप में इतना कहना चाहता हूं कि अगर कोई पास्टर नरक के विषय में कभी प्रचार नहीं करता हो वह एक विश्वसनीय व्यक्ति नहीं है, वह धर्मशास्त्र के लिये भी सच्चा व्यक्ति नहीं है, और न ही कोई ऐसा व्यक्ति है जिसको कोई सुनें। क्यों नहीं सुने? क्योंकि उसने ''परमेश्वर की संपूर्ण मनसा'' का प्रचार ही नहीं किया! (प्रेरितों के कार्य २०:२७) उसने तो स्वयं पौलुस, पतरस या स्वयं प्रभु यीशु मसीह के समान प्रचार ही नहीं किया − जो लोग न्याय और नरक पर इतना अधिक प्रचार करते थे जितना बाईबल में किसी के लिये दर्ज नहीं है। ऐसे व्यक्ति की मत सुनिये! अगर आप उस पर नरक और न्याय की बातों को लेकर विश्वास नहीं कर सकते, तो आप कैसे किसी बात को लेकर उस पर विश्वास कर सकते हैं?

अब पद निकाल लीजिये। निवेदन है जब मैं इसे पुन: पढता हूं तब आप खडे हो जाइये।

''फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के साम्हने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया। और समुद्र ने उन मरे हुओं को जो उस में थे दे दिया, और मृत्यु और अधोलोक ने उन मरे हुओं को जो उन में थे दे दिया; और उन में से हर एक के कामों के अनुसार उन का न्याय किया गया। और मृत्यु और अधोलोक भी आग की झील में डाले गए; यह आग की झील तो दूसरी मृत्यु है। और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया।'' (प्रकाशित वाक्य २०:१२−१४)

अब आप बैठ सकते हैं। निवेदन है कि इस स्थान पर अपनी बाईबल खुली रखिये।

यह ''अंतिम न्याय'' कहलाता है क्योंकि इसके बाद और कोई न्याय नहीं होंगे। यह अंतिम न्याय है। मसीह उस महान श्वेत सिंहासन पर विराजमान होगा। प्रेरितों के कार्य १७:३१ और अन्य स्थल दर्शाते हैं कि मसीह न्याय करेगा। मसीह उस समय मसीहा नहीं होगा। उद्धार पाने का समय पूरा हो चुका होगा। मसीह अब पापियों को नहीं बचायेगा। अब वह खोये हुये पापियों का न्याय करेगा। यह न्याय इसलिये नहीं होगा कि यह पता किया जाये कि कौन बचाया गया है और कौन खोया हुआ है। यह तो जीवन में तय है। अगर आप खोये हुये व्यकित जैसे मरते हैं, तो आप का न्याय इस समय होगा। पद १२ केवल वे मुरदे जो बिना उद्धार पाये मरे हैं उनके लिये कहता है। यह कहता है,

''फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के साम्हने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया।'' (प्रकाशित वाक्य २०:१२)

हमें यह बताया गया है कि ''पुस्तके'' होंगी और ''जीवन की पुस्तक'' भी होगी। ''पुस्तकें'' अर्थात हमारे किये गये ''कार्यों'' का एक दर्ज हिसाब होगा जो हमने जीवन काल में किये। ''छोटे बड़े सब मरे हुए परमेश्वर के साम्हने खड़े होंगे'' (२०:१२)। अमीर और प्रसिद्ध भी वहां होंगे। ''छोटे'' भी वहां होंगे। कोई भी उद्धार नहीं पाया व्यक्ति न्याय से बच नहीं पायेगा। जिन्होंने उद्धार नहीं पाया है वे सब मसीह के सामने न्याय दिवस पर खडे होंगे। जो डूब चुके हैं, समुद्र में गडे हैं वे सब पुनरूत्थित शरीर में होंगे। भले ही उनका शरीर समुद्र के पानी में धुल चुका हो। किंतु परमेश्वर उनके शरीर के अणुओं को पुन: एक बार मिलायेगा, उन्हें न्याय के लिये उनके शरीरों में खडा करेगा। पृथ्वी पर बनी कब्रें अपने मुरदे लौटा देंगी और नरक (दोजख) की आत्मायें, जहां भटकी हुई आत्मायें होंगी, नरक ''अपने मुरदे लौटा देगा।'' उनकी आत्मायें और शरीर पुन: निर्मित होकर, वे सब श्वेत महान सिंहासन के समक्ष खडे होंगे। परमेश्वर को ये सब करने में कोई समस्या नहीं होगी। वह तो सर्वशक्तिमान है। अब १२ वें पद को पुन: सुनिये,

''फिर मैं ने छोटे बड़े सब मरे हुओं को सिंहासन के साम्हने खड़े हुए देखा, और पुस्तकें खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई; और फिर एक और पुस्तक खोली गई, अर्थात जीवन की पुस्तक; और जैसे उन पुस्तकों में लिखा हुआ था, उन के कामों के अनुसार मरे हुओं का न्याय किया गया।'' (प्रकाशित वाक्य २०:१२)

अगर अब भी आप इस जीवन में उद्धार पाने से वंचित रह गये हो तो ''उन बातों के आधार पर जो पुस्तकों में दर्ज है, (आपके) कार्यों के अनुसार'' प्रत्येक वह चीज जो आपने जीवन में की है आपका न्याय होगा।

डॉ जे वर्नान मैगी ने कहा था, ''एक व्यक्ति मृत्युशैया पर था और उसने मुझसे कहा, 'प्रचारक, आपको मुझसे मेरे भविष्य के लिये बात करने की आवश्यकता नहीं है। मैं खुद अपने लिये मौके तलाश लूंगा। मैं विश्वास करता हूं कि परमेश्वर प्रेमी और धर्मी है और मुझे मेरे कर्म उसके सामने प्रस्तुत करने दीजिये।''' डॉ मैगी ने कहा, ''आप बिल्कुल सही फरमा रहे हैं वह न्यायी और धर्मी है, और वह आपको मौका भी देगा कि आप अपने कार्यो को उसके सामने प्रस्तुत करें। किंतु सुनिये परमेश्वर क्या करने जा रहा है। मेरे पास आपके लिये कुछ खबर है; न्याय दिवस के दिन कोई भी बचाया नहीं जायेगा, क्योंकि आप अपने कर्मो के आधार पर नहीं बचेंगे........तुम्हारे क्षुद्र कार्य किसी भी लायक नहीं समझे जायेंगे'' (थ्रू दि बाईबल, वॉल्यूम ५, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, १९८३, पेज १०६०; प्रकाशित वाक्य २०:११ पर व्याख्या)

हां, आपका वहां ''पूर्ण'' न्याय होगा। जीवन में आपने जो कुछ किया वह सब उन ''पुस्तकों'' में दर्ज होगा। डॉ मैगी ने उन ''पुस्तकों'' को आपके जीवन का वीडियों टेप कहा है। उन्होंने कहा, ''आपका जीवन टेप में अंकित है, और मसीह के पास वह टेप होगा। जब वह यह टेप चलायेगा, तब आप इसे सुन पाओगे और (देख भी) पाओगे। ऐसी सत्यता निसंदेह आपको अच्छी नहीं लगेगी किसी भी रीति से अच्छी नहीं लगेगी। क्या आप परमेश्वर के सामने खडे होंगे और उसे अपने जीवन का टेप चलाने देंगे? मैं सोचता हूं वह इसे टेलीविजन की स्क्रीन पर चला देगा ताकि आप उसे देख भी सको। क्या आप सोच सकते हो कि आप इस परीक्षा को पार कर सकोगे? मैं आपके बारे में तो नहीं जानता, किंतु मैं तो सह नहीं (सकूंगा)........सेम्युएल जॉनसन जो (महान लेक्सिकोग्राफर) थे उन्होंने कहा था, ''हर व्यक्ति अपने खुद के बारे में जानता है जो वह अपने निकटस्थ मित्र को भी बताने का साहस नहीं कर सकता। आप अपने बारे में खुद जानते हो, क्या नहीं जानते? आप ऐसी बातें जानते हैं जो आपने दुनियां से छिपा रखी हो और जिसे ये संसार बिल्कुल नहीं जानता। (परमेश्वर) उन सब बातों को न्याय के दिन प्रगट करेगा; जब तुम अपने (भले कार्य) जो उसकी निगाह में तुच्छ है प्रगट कर रहे होंगे, तब वह तुम्हारी यह कैसेट जारी करके तुम्हे बतायेगा'' (मैगी, उक्त संदर्भित)। तब डॉ मैगी ने कहा, ''महान श्वेत सिंहासन का न्याय खोये और भटके हुये (लोगों) का न्याय होगा। यह उनका अवसर होगा। न्याय तो होके रहेगा, कोई भी (भले) कार्यों की दुहाई देकर बच नहीं सकता'' (उक्त संदर्भित)

ध्यान दीजिये परमेश्वर ''किताबों'' के विषय में बोलता है, और उसके बाद वह ''जीवन की पुस्तक'' के विषय में बोलता है। ''जीवन की पुस्तक'' में प्रत्येक के नाम लिखे गये हैं जिन्हें प्रभु यीशु ने बचाया है, हर वह जन जो परमेश्वर द्वारा (मसीह के) बेशकीमती लहू से शुद्ध किया गया है (प्रकाशितवाक्य ५:९) प्रभु यीशु मसीह के लहू ने उन्हें पाप से शुद्ध कर दिया है जब उन्होंने जीवन में यीशु पर विश्वास किया। बस उन्हीं लोगों के नाम ''जीवन की पुस्तक'' में होंगे। ये ही वे लोग होंगे जो गीत गा सकते हैं प्रशंसा कर सकते हैं ''उसकी जिसने हमसे प्रेम किया और अपने स्वयं के लहू से हमारे पापों को धो दिया'' (प्रकाशितवाक्य १:५) केवल वे जो इस जीवन में यीशु के द्वारा बचाये गये हैं, और इस जीवन में यीशु के लहू से शुद्ध किये गये हैं, केवल उनके नाम ही ''जीवन की पुस्तक'' में लिखे गये हैं।

ध्यान दीजिये कि ''जीवन की पुस्तक'' एक ही है − किंतु ''पुस्तकें'' अनेक हैं जिनमें उनके पापों का हिसाब है जो कभी बचाये नहीं गये! मैंने एक प्रचारक को यह कहते सुना था, ''अनेक 'पुस्तकें' हैं क्योंकि अधिकतम लोग खोये हुये हैं। किंतु 'जीवन की पुस्तक' एक है क्योंकि बचाये गये थोडे हैं।'' और, अब, पंद्रहवी आयत को देखिये,

''और जिस किसी का नाम जीवन की पुस्तक में लिखा हुआ न मिला, वह आग की झील में डाला गया'' (प्रकाशितवाक्य २०:१५)

''नरक की झील'' अनंत नरक है, अनंत क्लेश है, अनंत दुख भोग है। प्रभु यीशु मसीह ने कहा था दो रास्ते हैं, और प्रत्येक जन इन दोनों में से एक का चुनाव करता है। प्रभु ने कहा,

''सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं। क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं'' (मत्ती ७:१३−१४)

मसीह ने कहा, ''थोडे ही होंगे जो सही रास्ता ढूंढ लेंगे जो जीवन को ले चलता है।'' ''थोडे होंगे जो रास्ता खोज लेंगे।'' क्या उन थोडे लोगों में आपका नाम होगा जो ''जीवन की पुस्तक'' में लिखा होगा? न्याय और नरक से बचने का एक ही रास्ता है − केवल एक ही रास्ता − यीशु पर अभी विश्वास लायें, इसी जीवन में यह काम करें। पाप से मुख मोड लीजिये और यीशु की ओर मुडिये! बाईबल कहती है, ''बुरे रास्तों से फिरो; नहीं तो तुम मर जाओगे?'' (यहेजकेल ३३:११) प्रेरितों की पुस्तक में ''अधिकतर लोगों ने विश्वास किया और प्रभु यीशु की ओर फिरे?'' (प्रेरितों के कार्य ११:२१) अपने स्वार्थ से फिरो, पापी मार्गो से फिरो − प्रभु यीशु की ओर फिरो,

''हम को उस में उसके लोहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है।'' (इफिसियों १:७)

मसीह का लहू तुम्हारे समस्त पापों को ढांप लेगा, इसलिये परमेश्वर उनको नहीं देखेगा! रोमियों की पुस्तक कहती है,

''कि धन्य वे हैं....जिन के अधर्म क्षमा हुए, और जिन के पाप ढांपे गए।'' (रोमियों ४:७)

मसीह का लहू तुम्हारे समस्त पापों को ''ढांप'' लेगा इसलिये परमेश्वर उनको नहीं देखेगा! यीशु का लहू आपके सारे पापों को धो डालेगा इसलिये परमेश्वर उनकी ओर कभी भी नहीं देखेगा! फिर से रोमियों की पुस्तक कहती है,

''सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?'' (रोमियों ५:९)

प्रकाशितवाक्य १:५ कहता है कि जो बचाये गये हैं वे उद्धार पाये हुये हैं क्योंकि यीशु हमको प्यार करता है और ''उसने स्वयं के लहू से हमारे पापों को धो दिया।'' आमीन! यीशु के नाम की जय हो! डॉ मार्टिन ल्योड−जोंस, जो महान वेल्श प्रचारक थे, उन्होंने कहा,

मेरे पापों के कारण लगे धब्बों से छुटकारा पाने के लिये ये दुनियां द्वारादिये गये जितने भी हल हैं वे सब अपर्याप्त है, किंतु परमेश्वर के पुत्र यीशु का लहू हमारे लिये है, जो निष्कलंक है, शुद्ध है, और मैं महसूस करता हूं कि यह शक्तिशाली है।

सामर्थ है, सामर्थ है, अदभुत कार्य करने वाली सामर्थ मेमने के बेशकीमती लहू में।

उसका लहू अशुद्धतम को भी शुद्ध बना सकता है,
उसका लहू जो मेरे लिये उपलब्ध है।
   (चार्ल्स वेस्ली)

इसमें हमारे लिये विश्राम और सांत्वना है (मार्टिन ल्योड−जोंस, एम डी, फैलोशिप विथ गॉड, क्रासवे बुक्स, १९९४, पेज १४४)

प्रभु, मेरे पाप अनेक हैं, जैसे कि समुद्र में असंख्य रेत,
किंतु तेरा लहू, ओ मेरे मसीहा, मेरे लिये पर्याप्त है;
क्योंकि तेरा वायदा लिखित है, उन सुनहले शब्दों में जो चमकते हैं,
''तुम्हारे पाप लाल रंग के भी हो, मैं उन्हें बर्फ सा श्वेत बना दूंगा।''
हां, मेरा नाम वहां लिखा है, उस सफेद और धवल पन्ने पर,
तेरे राज्य की पुस्तक में, हां, मेरा नाम वहां लिखा है!
(''इज माय नेम रिटन देअर?'' मेरी ए किडर, १८२०−१९०५)

क्या आप ऐसा कह सकते हैं? क्या आज सुबह आप यह कह सकते हैं? क्या आपके पाप यीशु द्वारा क्रूस पर बहे लहू से धुल गये हैं? उसके पास विश्वास से आइये और वह आपको परमेश्वर की दृष्टि में शुद्ध बनायेगा! डॉ चान, निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिये, आमीन!

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा प्रार्थना की गई: प्रकाशितवाक्य २०:११−१५
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''इज माय नेम रिटन देअर?'' (मेरी ए किडर, १८२०−१९०५)