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पवित्र आत्मा के विरूद्ध निंदा

BLASPHEMY AGAINST THE HOLY SPIRIT
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, १८ जनवरी, २०१५ को लॉस ऐंजीलिस दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, January 18, 2015

''इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि मनुष्य का सब प्रकार का पाप और निन्दा क्षमा की जाएगी, पर आत्मा की निन्दा क्षमा न की जाएगी। जो कोई मनुष्य के पुत्र के विरोध में कोई बात कहेगा, उसका यह अपराध क्षमा किया जाएगा, परन्तु जो कोई पवित्र आत्मा के विरोध में कुछ कहेगा, उसका अपराध न तो इस लोक में और न पर लोक में क्षमा किया जाएगा।'' (मत्ती १२:३१−३२)


मैंने आज सुबह इस विषय पर अत्यधिक जोर देते हुये प्रचार किया था ''अमेरिका का वर्णन बाईबल की भविष्यवाणी में क्यों नहीं है।'' मैंने इस संदर्भ में आमोस ८:२ का पद लिया था, ''मेरी प्रजा इजरायल का अंत आ गया है; मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' यह मेरा पद था। जब परमात्मा तुम पर अपना अनुग्रह बरसाना बंद कर दे, तो और कुछ नहीं केवल न्याय की आशा करना। यह एक व्यक्ति के साथ हो सकता है, यह एक राष्ट्र के साथ हो सकता है। ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' जब किसी राष्ट्र के साथ ऐसा होता है, तब वह राष्ट्र सत्य को पहचानना छोड देता है। जब यह किसी व्यक्ति के साथ घटित होता है, तब वह व्यक्ति अपने दिमाग से जडवत हो जाता है, उसका दिमाग परमात्मा के वचन को ग्रहण ही नहीं करता है, पवित्र आत्मा का स्पर्श उस व्यक्ति के मन को छूता ही नहीं है − बाईबल में कथन है, ''परमेश्वर ने भी उन्हें उनके निकम्में मन पर छोड दिया।'' (रोमियों १:२८), अदोकिमोस नाउस (एक अयोग्य, त्यागा हुआ, निकम्मा दिमाग!) यह पाप अक्षम्य है! यह पाप मृत्यु की सीढी है!

मैं लॉस ऐंजीलिस की फलॉवर स्ट्रीट, में ट्रिनिटी मैथोडिस्ट चर्च के पवित्र स्थान में खडा हुआ था। यह वह चर्च था जहां ''आत्मिक लडाकू बॉब'' शूलर ने पास्तरीय सेवायें दी थी, उन्होंने विश्वास रखना सिखाने के लिये ईमानदारी से मेहनत की, जहां सदियों से पुल्पिट पर से यीशु का सुसमाचार सुनाया गया, जहां रेडियो से भी प्रचार होता था। मैं उस विशाल महानतम कहलाये जाने वाले चर्च के प्रांगण में खडा था। उसकी दीवारें गिरायी जाने वाली थी, वह इमारत मेरे सामने ही धराशायी हो जाने वाली थी। पर किसी को चिंता नहीं थी। किसी की आंख से आंसू नहीं बहे। बॉब शूलर का बेटा जो कुछ मिनटों की दूरी पर ही रहता था। यह तो उसके बचपन का चर्च था। किंतु जिस दिन चर्च की इमारत जमींदोज की जाने वाली थी वह भी नहीं आया। उसने कोई परवाह नहीं की। न ही और किसी ने कोई ध्यान दिया! ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।''

इसी गली से आगे बढकर एक और विशाल चर्च है जो ५५० साउथ होप स्ट्रीट पर स्थित है, ओपन डोअर चर्च। इसके संस्थापक पास्टर डॉ आर ए टोरी थे। जब मैं जवान था तब यह चर्च प्रसिद्ध रेडियो प्रचारक डॉ जे वर्नान मैगी (१९०४−१९८८) द्वारा लिया जाता था। इसमें पांच हजार लोग बैठते थे। उन्होंने इस चर्च को २७ मिलियन डॉलर में बेच दिया। उन्होंने सोचा यह तो बडी अच्छी रकम है। किंतु दस सालों पश्चात यह २२७ मिलियन डॉलर में बिका। इस चर्च के एल्डर्स छोटे दिमाग के लोग थे। उनके हाथ कंपकंपा रहे थे। उनके चेहरे भय से पीले पडे हुये थे। उन्होंने अपनी बुद्धि लगाई, ''हमारे हाथ कुछ नहीं आयेगा अगर अभी नहीं बेचा तो!'' इसलिये भय के कारण और परम प्रधान पर भरोसे की कमी के कारण उन्होंने २०० मिलियन डॉलर गंवा दिये। दूसरा कोई चर्च इसे खरीदना चाह रहा था। किंतु उसके डीकंस भी डरपोक और छोटे दिमाग वाले थे। इसलिये उन्होंने भी ऐसी इमारत को खो दिया जो उन्हें २७ मिलियन डॉलर में मिल सकती थी। उन्होंने भी देखा जाये तो २०० मिलियन डॉलर खो दिये। इस तरह लॉस ऐंजीलिस के भीतरी इलाके में अंधेरा व्याप्त हो गया, मसीह या परम प्रधान के लिये कोई गवाही नही! ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।''

इधर परमात्मा ने हमें होप स्ट्रीट पर स्थित इस इमारत में रखा − जो बॉब शूलर के चर्च से तीन ब्लॉक की दूरी पर है, और डॉ मैगी के चर्च से आठ ब्लॉक की दूरी पर − लॉस ऐंजीलिस के मध्य भाग में हमारा चर्च स्थित है। इस चर्च में भी, भ्रष्ट अगुवे थे जिनकी सोच छोटी और तुच्छ थी, वे मन से कायर थे। उन्होंने इस चर्च को छोडा और अपने साथ ३०० लोग ले गये। किंतु विशाल मन वाले निर्भीक पुरूष व महिलाओं ने इस इमारत को बचा लिया और इसका भुगतान किया। अब इस चर्च इमारत से यीशु का शुभ सुसमाचार सुनाया जाता है − संसार के चारों कोनों में, वह भी २९ भाषाओं में।

आज की रात मैं जवान लोगों से यह पूछना चाहता हूं, कि क्या आप लोग इतने सक्षम और मजबूत और आध्यात्मिक रूप से दृढ होंगे कि हमारे चले जाने के बाद इस इमारत को यथावत रख सकोगे? या परमात्मा इस चर्च के लोगों के लिये भी कहेगा, ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' अगर ऐसा होगा तो इसका यह अर्थ होगा कि इस चर्च ने भी मृत्यु लायक कोई पाप किये हैं और इसीलिये परम प्रधान उनके लिये भी कहेगा, ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' इस कथन को हल्का मत लीजिये। ऐसा मत सोचिये कि यह नहीं होगा! प्रकाशितवाक्य के प्रथम तीन अध्याय में वर्णित सभी सातों कलीसिया नष्ट हो चुकी है। उनका कोई नामों निशान, शिल्प कृति, चित्रकला कुछ भी शेष नहीं रहा। अगर उन कलीसियाओं के नाम प्रकाशितवाक्य के तीन अध्यायों में नहीं लिखे गये होते तो हम यह जान भी नहीं पाते कि ऐसी कोई कलीसियायें भी इस धरती पर कभी हुई थीं। क्या आज से पचास साल उपरांत हमारे चर्च का कोई चिन्ह, कोई निशान या शिल्पकृति जीवित रहेगी? या परम प्रधान वही बात दोहरायेगा जो युगों पहले कही गयी थी, ''मैं अब उसको और न छोडूंगा?'' इसलिये आपको अति गंभीर होकर आत्मिक जागृति के लिये प्रार्थना करना चाहिये! हमारे जिंदा रहने के लिये जागृति का आना बहुत जरूरी है, बिना जागृति आये हम चर्च के रूप में जीवित ही नहीं बचेंगे और न कोई गवाही जायेगी। क्यों और किसी दूसरी जगह स्थित चर्च में जाया जाये अगर एक ब्लॉक दूरी पर हमारा चर्च स्थित है? अगर यह चर्च अपनी जीवंतता खो देगा (बिना आत्मिक जागृति) के यही होगा तब इसके पास लोगों को आकर्षित करने के लिये कुछ नहीं बचेगा........और यह चर्च खत्म होना शुरू हो जायेगा।

आत्मिक जागरण इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करता है कि आप जवान लोग निरंतर मृत्यु की ओर ढकेलने वाले पाप करते हैं अथवा नहीं। इस चर्च का भविष्य आपके हाथों में है। अगर आप में से अधिकतर जवान लोग अक्षम्य पाप करते जायेंगे, तो इस इमारत का कोई भविष्य नहीं होगा, इस काम का, इस विश्व प्रसिद्ध सेवकाई का कोई अर्थ नहीं होगा! सचमुच परम प्रधान हमारी सहायता करे!

मैं अब मानता हूं कि अक्षम्य पाप करना आसान है। आपको सिर्फ चर्च में बैठना और इंतजार करना है। अपने और अन्यों के बचाये जाने की चिंता मत कीजिये। केवल आये, बैठे और राह तकते रहे। यही वह अक्षम्य पाप है जो आप कर रहे हैं − आपकी सोच से कहीं पहले आप यह पाप कर चुके हैं! इतनी आसानी से कि आप सोच भी नहीं सकते! आपकी ऐसी सुस्त सोच के कारण मृत्यु के चिन्ह निश्चित आते प्रतीत हो रहे हैं। कुछ सफेद बाल उगने शुरू हो गये हैं। एक सफेद रेखा दिखने लगी है। तुम्हारे चेहरों पर वह रेखा दिखाई पड रही है जो पहले वहां नहीं थी। ये सब आने वाली मौत के संदेश वाहक है। वह ठंडी, धूमिल पीली भावना जो मौत की सूचक है आपके पीछे ही खडी है। बाईबल का कथन है, ''मनुष्यों के लिये एक बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त है'' (इब्रानियों ९:२७)

अरब की एक कहानी है, बसरा में एक नौकर रहता था। वह अपने स्वामी के पास आया और कहने लगा, ''मैंने बसरा की सडकों पर आज मौत को देखा है। मौत ने भी मेरी तरफ देखा। इसलिये स्वामी, निवेदन करता हूं अपना तेज वेग वाला घोडा मुझे दे दें तो मैं बसरा छोड़ बगदाद निकल जाउं।'' स्वामी ने उसे तेज वेग वाला घोडा किराये पर दिया − और वह नौकर जितना तेजी से संभव था बगदाद के लिये निकल गया। अगली सुबह जब स्वामी बसरा की गलियों में घूम रहा था मौत से उसकी मुलाकात हुई। वह उसके पास पहुंच कर बोला, ''हे मौत, तुम्हे मेरे नौकर को इतने दर्जे तक डराने की क्या जरूरत थी?'' मौत ने जवाब दिया, ''महाशय, मेरा आपके नौकर को डराने का ऐसा कोई आशय नहीं था। मैं तो केवल उसे बसरा की सडकों पर देखकर आश्चर्यचकित था। क्योकि, कल तो उसका समय बगदाद में तय है!'' तो हर एक मनुष्य के लिये मरने का समय निश्चित है। उस निश्चित समय पर, उस निर्धारित स्थल पर, आपको निश्चित मरना ही है। तब आपके लिये भी हो सकता है कि परमात्मा कहे, ''मैं अब उसको और न छोडूंगा।'' क्योंकि आपने वह अक्षम्य पाप किया है।

''इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि मनुष्य का सब प्रकार का पाप और निन्दा क्षमा की जाएगी, पर आत्मा की निन्दा क्षमा न की जाएगी।'' (मत्ती १२:३१)

मनुष्य का वह कौन सा पाप है ''जो अक्षम्य होगा?'' यह पवित्र आत्मा और यीशु के अनुग्रह के विरूद्ध गवाही देने का पाप है जो क्षमा नहीं किया जायेगा। जब एक व्यक्ति चाहे पुरूष हो या स्त्री बार बार पवित्र आत्मा की बुलाहट का इंकार करता है तब वह एकमात्र पाप है जो क्षमा नहीं किया जा सकता। यह इब्रानियों की पुस्तक के अध्याय छ: में कहा गया है। मि प्रुघोमे ने इसे थोडी देर पहले पढा था,

''क्योंकि जिन्हों ने एक बार ज्योति पाई है, जो स्वर्गीय वरदान का स्वाद चख चुके हैं और पवित्र आत्मा के भागी हो गए हैं। और परमेश्वर के उत्तम वचन का और आने वाले युग की सामर्थों का स्वाद चख चुके हैंयदि वे भटक जाएं; तो उन्हें मन फिराव के लिये फिर नया बनाना अन्होना है; क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र को अपने लिये फिर क्रूस पर चढ़ाते हैं और प्रगट में उस पर कलंक लगाते हैं'' (इब्रानियों ६:४−६)

यह तब आपके लिये होता है, ''यह असंभव है.......कि उन्हें (तुम्हें) मन फिराव के लिये अनहोना बनाये'' (इब्रानियों ६:४−६) असंभव? यही परम प्रधान ने कहा, ''कि असंभव है......कि उन्हें तुम्हे मन फिराव के लिये अन्होंना बनाये।'' हां असंभव? ठीक ही तो है! यही तो परमात्मा की वाणी है। असंभव। यह अक्षम्य पाप है। और परमेश्वर कहता है, ''मैं अब (उसको) और न छोडूंगा।'' ''वह न तो इस लोक में क्षमा पायेगा और न परलोक में क्षमा किया जावेगा'' (मत्ती १२:३२)

तो यह अक्षम्य पाप करना आसान है। मेरा चचेरा भाई अपने मित्रों को अपनी कार में बिठा कर तिजुएना में एक वेश्या के यहां गया। तौभी वह नर्क नहीं गया क्योंकि उसने तिजुएना में एक वेश्या को देखा था। वह अपने घर के पिछवाडे छ: बोतल शराब अपने मित्रों के साथ बैठकर पीता था तौभी वह नर्क नहीं गया। क्योंकि जिनके साथ शराब पीता था वे सब उसके शराबी मित्र थे। वह ऐसे ऐसे कार्य करता था जिसका वर्णन मैं यहां चर्च में नहीं कर सकता। परन्तु तौभी वह नर्क नहीं गया क्योंकि वह इन चीजों का आदी हो चुका था। हां, वह इसलिये नर्क गया क्योंकि उसने कभी न क्षमा किये जाने वाला पाप किया। यही तो यीशु ने कहा था, ''इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि मनुष्य का सब प्रकार का पाप और निन्दा क्षमा की जाएगी, पर आत्मा की निन्दा क्षमा न की जाएगी।'' (मत्ती १२:३१)

मेरे चचेरे भाई ने मुझसे कहा, जब उसका बेटा पैदा हुआ,कि उसने घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना की। हां, वह स्वयं को बैपटिस्ट कहता था, भले ही वह कभी चर्च नहीं गया। जब उसने मुझे बताया कि उसने प्रार्थना की, मैने उससे कहा कि वह यीशु पर विश्वास लाये तो वह बचाया जायेगा। मैं उसका उत्तर कभी नहीं भूलूंगा। उसने कहा था, ''रॉबर्ट, हर एक का अपना विश्वास होता है, हर एक का अपना विश्वास।'' उसके कहने का आशय था, ''जो तुम्हारे लिये अच्छा है, वह मेरे लिये अच्छा नहीं हो सकता।'' हर बार मैं जब उसे मसीह के लिये बताता उसका एक ही उत्तर होता। इसी समय के अंतराल मं वह यह अक्षम्य अपराध कर रहा था।

अचानक चालीसवें साल में उसकी मृत्यु हो गई। उसके संबंधियों ने मुझसे अंतिम किृया संपन्न करने को कहा। एक भी बाल उसका सफेद नहीं था। चेहरे पर कोई झुर्री नहीं थी। वह अभी जवान ही था तौभी वह नर्क गया। वह नर्क गया क्योंकि उसने कभी न माफ किये जाने वाला पाप किया था। और परमात्मा की वाणी थी, ''मैं अब और उसे न छोडूंगा'' ''वह न तो इस लोक में क्षमा पायेगा और न परलोक में क्षमा किया जावेगा'' (मत्ती १२:३२)

वह एक अच्छा व्यक्ति था इसलिये बहुत से लोग उसके अंतिम संस्कार में आये। हर कोई उसे पसंद करता था। मैं भी उसे चाहता था। वह मेरा मित्र था। वह पाश्चात्य कलायें बहुत पसंद करता था। वह उन्हें लगातार देखता रहता था; हर रात टी वी पर। वह प्राचीन पश्चिम के सारे गनफाईटर्स के बारे में आपको बता सकता था। वह वाईल्ड बिल हिचकॉक, बिली द किड, डॉक हॉलीडे, जॉन वेस्ली हार्दिन − प्राचीन पश्चिम के सभी प्रसिद्ध गन फाईटर्स के लिये वह बता सकता था। जब मेरे बेटे पैदा हुये मैं उन्हें उससे मिलवाने लाया। उसने उनके नाम पूछे। मैंने कहा, ''उनमें से एक का नाम जॉन वेस्ली हिमर्स है।'' वह अगले कमरे में दौड कर गया और अपने एक मित्र को फोन किया। मैंने उसे बोलते हुये सुना, ''ईश्वर की कसम, राबर्ट ने अपने बेटे का नाम गनफाईटर के उपर रखा − जॉन वेस्ली हार्दिन!'' वह यह नहीं जानता था कि जॉन वेस्ली एक महान प्रचारक का नाम था! तो हर कोई मेरे चचेरे भाई को पसंद करता था, मैं भी करता था। वह सचमुच अच्छा आदमी था, पर नरक गया। जब मैं उसकी अंतिम किृया पर बोला, तब मैं उसके परिवार और मित्रों को एक शब्द उम्मीद का नहीं बंधा सकता! एक शब्द भी आशा का मैं नहीं बोल पाया! क्योंकि वह उस दुनियां में जा चुका था जहां कोई आशा नहीं थी। दांते एलिगियेरी (१२६५−१३२१) ने, अपनी प्रसिद्ध पुस्तक दि इनफर्नो में कहा था कि नरक के द्वार के बाहर एक संदेश लिखा है, ''तुम जो यहां आये हो, अब सारी आशा त्याग दो।'' मेरे चचेरे भाई ने अक्षम्य पाप किया था। जब पवित्र आत्मा ने उसके ह्रदय से यीशु के लिये बात चीत की, तब उसने कहा, ''नहीं।'' इसलिये परमेश्वर ने कहा था, ''मैं अब और (उसे) न छोडूंगा।'' ''उसे क्षमा न किया जायेगा, न इस लोक में, न परलोक में।'' (मत्ती १२:३१−३२)

नरक में ''दूसरा अवसर'' तो मिलना ही नहीं है। सभोपदेशक ११:३ कहता है, ''तौभी जिस स्थान पर वृक्ष गिरेगा, वही पडा रहेगा।'' हर मनुष्य का चरित्र सदैव एक स्थायीत्व की ओर आगे बढता है, उसकी तय आदतों के अनुसार निर्मित होता जाता है। इस वर्ष वह जैसा था, अगले वर्ष वह और वैसा ही होता जायेगा। जैसे जैसे साल बीतते हैं चरित्र पक्का होता जाता है। वह ठोस बन जाता है। अंतत: सीमेंट के जैसा कठोर बन जाता है।

मुझे डॉ डब्ल्यू ए क्रिसवेल को सुनना सदैव अच्छा लगा। वह पचास सालों तक टेक्सास के डलास में फर्स्ट बैपटिस्ट चर्च के पास्टर रहे। जब मैं लाल बाल वाला अधेड हो चला था मैं उन्हें प्रचार करते सुना करता था। जब वह बूढे हो गये थे, मैं उनका संदेश सुना करता था, आश्चर्य की बात उनके बाल पूरे सफेद हो गये थे। प्रचारकों में वह मेरे आदर्श थे। मैं डॉ क्रिसवेल की सुनाई एक कहानी आपको सुनाउंगा।

उन्होंने बताया था, वह जब एक जवान पास्टर थे, एक डीकन ने उन्हें एक सदस्य के घर मिलने जाने के लिये कहा जिसे लकवा मार गया था। डॉ क्रिसवेल ने बताया,

जब मैं उसके घर गया, उसकी पत्नी ने कहा, ''वह सोने के कमरे में है। मैं खडा था और उस सदस्य के बिस्तर की ओर देखकर मैंने उससे कहा, ''मैं नया पास्टर हूं......और मैं आपसे भेंट करने आया हूं।'' उसने कहा, ''गोल डेंग!'' मैंने कहा, ''मुझे दुख है कि आपको लकवा मार गया और आप इससे बाहर नहीं निकल पाये।'' उसने कहा, ''गोल डेंग!'' मैंने कहा, ''बाहर तो बहुत खूबसूरत दृश्य है मैं चाहता हूं कि आप बाहर जा सकें।'' उसने कहा, ''गोल डेंग!'' मेरी हर बात के बाद वह चिल्लाता, ''गोल डेंग!'' मैं इतना निराश हो गया कि अब क्या कहूं। मैं खडा हो गया और पूछने ही वाला था कि प्रार्थना करें, किंतु उसने सोचा कि मैं जाने के लिये खडा हो गया हूं। उसने संकेत दिया और कहा, ''गोल डेंग!'' उसकी पत्नी ने मुझसे कहा, ''पास्टर, वह चाहते हैं कि आप प्रार्थना करें'' मैंने उससे कहा मुझे बहुत खुशी होगी। मैं बिस्तर के पास घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करने लगा, ''हे परमप्रधान, जो स्वर्ग में है, इस रोगी जन के प्रति दया कीजिये।'' वह फिर चिल्लाने लगा, ''गोल डेंग!'' मैंने कहा, ''निवेदन है, प्यारे प्रभु, उसे उठाकर खडा कर दीजिये।'' वह फिर चिल्लाया, ''गोल डेंग!'' हर प्रार्थना की पंक्ति के पश्चात वह कहता, ''गोल डेंग!'' जब मैं मेरी प्रार्थना के आखिरी हिस्से में पहुंचा और कहा, ''आमीन'' तब भी उसने वही दोहराया ''गोल डेंग!'' जब मैं जाने के लिये खडा हुआ और कहा, ''परम पिता की आशीष आप पर होवे,'' उसने वही शब्द निकाले, ''गोल डेंग!'' जब मैं दरवाजे तक गया, मैं मुडा और कहा, ''गुड बॉय'' − उसने कहा ''गोल डेंग!''
         जब मैं वापस शहर लौटा और वह डीकन मुझे मिला, मैंने उसे बताया कि मैं लकवे के रोगी सदस्य को मिलने गया था। डीकन ने मुझसे कहा, ''अरे सचमुच, मैं तो आपको बताना ही भूल गया था। उस व्यक्ति को एक तकिया कलाम बोलने की आदत है। वह जीवन भर बार बार यही बोलता रहा था। जब उसे लकवा मार गया तो उसकी पूरी वाणी चली गयी और वह केवल एक ही वाक्यांश बोल रहा है।'' मैंने डीकन से कहा, ''मुझे वह तकिया कलाम बताने की जरूरत नहीं है। मुझे पता है, वह ''गोल डेंग!'' कहता है। तो जीवन का गुण जो मैं समझता हूं वह यह है कि जो आप करते हो और कहते हो अंत में वही बन जाते हो। वह आपके जीवन में उतर आता है, आपकी आत्मा में पैठ जाता है (''व्हॉट ए सेवियर,'' डब्ल्यू ए क्रिसवेल, पीएचडी ब्रॉडमेन प्रेस, १९७८, पेज ४१, ४२)

जब मैंने अपने चचेरे भाई से यीशु पर विश्वास लाने को कहा तो उसका जवाब था, ''हरेक की अपनी आस्था होती है, रॉबर्ट।'' मैंने उससे कई दफे ऐसा कहा और हर बार उसका उत्तर था, ''हरेक की अपनी आस्था होती है, रॉबर्ट।'' यह उसका तकिया कलाम था उसका बहाना था। उसने यीशु पर विश्वास लाने में कोई दोष नहीं पाया। किंतु उसका कहना था यह आस्था उसके लिये नहीं थी। जब कभी मैंने उसे मसीह के बारे में बताया उसने हर बार ''नहीं'' कहा। आप किसी व्यक्ति से कह सकते हो, ''क्या आप यीशु पर विश्वास रखते हैं?'' वह कहेगा, ''नहीं।'' अंतत: यह ''नहीं'' शब्द उसके चरित्र में उतर आता है। उसका मन इंकार करते करते पक्का हो जाता है − नहीं, नहीं! ऐसा करते करते वह जीवन मं ऐसे मुकाम पर पहुंच जाता है जहां स्वत: उसके मुंह से निकलने लगता है नहीं। उसे सोचना भी नहीं पडता है। वह स्वयं में एक बडा ''नहीं'' बन जाता है। ''नहीं'' शब्द उसके दिमाग, दिल व स्वभाव का अंग बन जाता है। एक बहुत बडा इंकार ''नहीं।'' इतने में वह अक्षम्य पाप कर बैठा है और अब वह यीशु को ''नहीं'' बोलते नहीं रूकता। ''वृक्ष जहां गिरता है, वहीं पडा रहता है।'' ''मैं अब और उसे नहीं छोडूंगा'' ''मैं उसे क्षमा नहीं करूंगा, न तो इस लोक में, न परलोक में।'' यही अक्षम्य पाप है! यही वह पाप है जो कभी भी क्षमा नहीं किया जा सकेगा!

हमारी आत्माओं में लकवा नहीं लगा हुआ था इसलिये हमने अपने लिये कोई सा दिन और घंटा चुन लिया था जब हम बचाये गये। किंतु अगर ऐसा नहीं करते, तो दिन गुजरते जाते, हमारी इच्छा, मन, आत्मा सब सीमेंट की भांति कठोर होते जाते। अंतत: वे मनुष्य द्वारा भी परिवर्तित नहीं किये जा सकते और परमेश्वर द्वारा भी परिवर्तित नहीं। वह चरित्र, जीवन, अद्धैत नियति हमेशा के लिये पक्की होकर अपरिवर्तनीय हो जाती है! यही अक्षम्य पाप है! यही वह पाप है जो कभी क्षमा नहीं किया जा सकेगा!

ऐसा अनुभव उस व्यक्ति का भी है जो अपने अंदर उद्धार की किसी भावना को खोजता है, उसे उद्धार का आंतरिक प्रमाण चाहिये। आप उससे कहेंगे यीशु की ओर देखिये, बदले में वह आपसे दिलासा देने वाली भावना मांगेगा। वह इसी बात पर अडा होता है − आप जो बता रहे हैं उसे इससे कोई सरोकार नहीं। हर बार वह अपने भीतर ऐसी कोई दिलासा ढूंढता है, एक प्रमाण कि वह बचाया गया है। अंतत: ऐसी दिलासा पाना ही उसका स्वभाव और चरित्र बन जाता है। आप उससे कहते हैं मसीह पर विश्वास रखो — और वह आपकी ओर से आश्वासन मिलने की उम्मीद लगा बैठेगा। आप उससे कहेंगे क्या वह यीशु को मानता है, वह कहेगा, ''नहीं।'' मैंने तो लोगों को इसी तरह दोहराव करते हुये बार बार देखा है — अंत में यह उनकी आदत बन जाती है जिससे बाहर आना उनके लिये बहुत मुश्किल होता है फिर भले ही कितनी ही कोशिश क्यों न की जाये! यह उनका स्वभाव बन चुका है वे यीशु पर भरोसा नहीं करेंगे, चाहे आप उनसे कुछ भी क्यों न कह लें।

मुझे याद आता है, १९४० के उत्तरार्ध में, हमारे पास पुराना रिकार्ड प्लेयर था और कुछ रिकार्डस भी। उनमें से एक रिकार्ड में वुडी वुडपेकर का गीत था, ''हा, हा, हा, हा, हा। हा, हा, हा, हा, हा। यह वुडी वुडपेकर का गाना है।'' हम उसे इतनी बार सुनते थे कि उस रिकार्ड में एक तरफ खांचा हो गया। जब सुई उस खांचे पर अटक जाती तो वह गीत इस तरह बजता रहता − ''हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा!'' अनगिनत बार यह सुनना आपको पागल बना देता है! यही तो मैं आपसे बार बार पूछताछ कक्ष में सुनता हूं। मैं कहता हूं, ''आप यीशु पर भरोसा करेंगे?'' आप कहेंगे, ''हां।'' मैं कहता हूं, ''घुटनों के बल बैठ जाइये और उस पर भरोसा लाइये।'' मैं रूकता हूं। कुछ मिनटों बाद मैं आपको कुर्सी पर बैठने को कहता हूं। मैं आपसे पूछता हूं, ''आपने यीशु पर भरोसा किया?'' आप का उत्तर होता है, ''नहीं'' तो इसी तरह कितने लोगों के साथ मेरा अनुभव चलता रहता है। ''हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा! हा, हा, हा, हा, हा!'' आपका दिमाग किसी छेद में जाकर जडवत हो गया है। मेरे मित्रों, आप अक्षम्य पाप करने के खतरे को आमंत्रण दे रहे हो। तब आपको परमात्मा यह कहते हुये निकल जायेगा, ''मैं अब और (उसे) नहीं छोडूंगा'' ''मैं उसे क्षमा नहीं करूंगा, न तो इस लोक में, न परलोक में।'' यही अक्षम्य पाप है! यही वह पाप है जो कभी क्षमा नहीं किया जा सकेगा!

एक व्यक्ति को यीशु को ''नहीं'' कहने की जरूरत क्यों पडती है? क्या उसे दूसरा संदेश सुनने की जरूरत है? नहीं। क्या उसे दूसरा जवाब चाहिये? नहीं। तो उसे आखिर क्या चाहिये? उसे जो एक चीज चाहिये वह है − उसका दिल विचलित हो, प्रतिकिृया दे, मसीहा पर विश्वास करे, और इस बात को वहीं छोड दे − मसीह के साथ! यीशु ने कहा था, ''जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा'' (यूहन्ना ६:३७) आमीन। उसके पास आइये। उस पर विश्वास लाइये। इस दशा को वहीं बने रहने दें। यीशु के पास इसे बने रहने दीजिये। वह आपको अपने पास से नहीं निकालेगा! वह आपके लिये सब कुछ करेगा। वह आपको पाप से शुद्ध करेगा। वह आपको धर्मी ठहरायेगा। वह आपको पवित्र करेगा। आपको ऐसा ''महसूस'' करने की जरूरत नहीं है, वह तो वास्तव में आपके लिये ऐसा कर रहा है। यीशु पर भरोसा लाइये और क्रूस पर बहाये उसके कीमती लहू से अपने पापों को शुद्ध हो जाने दीजिये! डॉ चान निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिये।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा प्रार्थना की गई: इब्रानियों ६:४−६
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''इफ यू लिंगर टू लांग'' (डॉ जोन आर राइस, १८९५−१९८०)