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“निर्गमन” नामक चलचित्र को मेरा जवाब
और बाईबल पर इसका प्रहार!

MY ANSWER TO THE NEW “EXODUS” MOVIE
AND ITS ATTACK ON THE BIBLE!
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, २८ दिसंबर, २०१४ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, December 28, 2014

“क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे?” (यूहन्ना ५:४६, ४७)


जब मैं सत्रह वर्ष का था तो मैं निश्चत यह महसूस करता था कि मैं सेवकाई के कार्य के लिये बुलाया गया हूं। तब मैं बचाया भी नहीं गया था, किंतु मैं यह बात जानता था कि परमेश्वर मुझे प्रचारक बनाना चाहते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास एक कॉलेज की डिग्री होना आवश्यक है। मैंने इस विषय पर बहुत लंबे समय तक सोचा। मैंने हाई स्कूल में पढाई छोड दी थी। मैं इतना बडा था कि मैं नियमित छात्र के रूप में स्कूल में दाखिला नहीं ले सकता था, इसलिये मैं एक विशेष विद्यालय जो ''बुरे लडकों'' के लिये स्थापित था उसमें गया। मैं बुरा लडका नहीं था किंतु यही एक हाई स्कूल था जो मुझे प्रवेश देता। एकाध या दो वर्ष पश्चात मैं स्नातक हुआ और मैं ने कॉलेज के विषय में सोचना प्रारंभ किया। इस दौरान मैंने एक पुस्तक पढी जो चीन के महान मिशनरी जेम्स हडसन टेलर से संबंधित थी। मैंने सोचा, ''मैं भी यही करने जा रहा हूं। मैं चीनी लोगों के लिये मिशनरी बन जाउंगा।''

जब मैंने लॉस ऐंजीलिस का प्रथम चीनी बैपटिस्ट चर्च जाना आरंभ किया उस समय मैं उन्नीस बरस का था। उस समय डॉ. तिमोथी लिन को वहां का पादरी बने एक साल से उपर हुआ था। उसी साल, ठंड में, मैंने बायोला कॉलेज (अब यूनिवर्सिटी) में विद्यार्थी के रूप में प्रवेश लिया। उस समय मेरे पास पैसा नहीं था और न ही परिवार से कोई सहायता थी, इसलिये मैं सुबह कॉलेज जाने के बाद दोपहर में पार्ट टाईम नौकरी करने लगा। मेरे पास कार नहीं थी, इसलिये मैं लॉस ऐंजीलिस से ला मिरेडा तक की बस पकडता था, मेरा कॉलेज ला मिरेडा में था। मैं तो यह भी ठीक से नहीं जानता था कि पढाई किस तरह अच्छे ढंग से करूं। सुबह बस से लंबी यात्रा करके कॉलेज पहुंचना फिर दोपहर को कार्य करना मेरे लिये भारी पड रहे थे। बॉयोला में मैं कई बार कक्षा में असफल रहा और एक सेमेस्टर बाद बॉयोला से निकाल दिया गया। परन्तु बॉयोला में कुछ ऐसा हुआ कि मेरा जीवन हमेशा हमेशा के लिये बदल गया।

प्रत्येक सेमेस्टर बॉयोला में चैपल में प्रत्येक सुबह की सप्ताह भर चलने वाले संदेश के लिये एक विशेष वक्ता को बुलवाया जाता था। उस सेमेस्टर के वक्ता डॉ. चाल्र्स जे. वुडबिज (१९०२−१९९५) थे। वह केलीफोर्निया, के पासादेना की फुलर थियोलॉजीकल सेमनरी के संस्थापक प्राध्यापक थे। किंतु कुछ महीनों पूर्व उन्होंने फुलर के प्राघ्यापक पद से त्यागपत्र दे दिया। जब उन्होंने देखा कि सेमनरी उदारवादिता की ओर बढ रही है।

बॉयोला की चैपल आराधना के समय, डॉ. वुडबिज २ पतरस का एक एक पद समझाते थे। वह चीन में पैदा हुये थे क्योंकि उनके माता पिता मिशनरी थे। मुझे इस वजह से वह बहुत महत्वपूर्ण लगते थे। मैंने अपने जीवन में किसी प्रचारक को इतना ध्यान से नहीं सुना जितना कि ध्यान लगाकर मैं उन्हें सुनता था। जब वह २ पतरस २:१−३ पर आये, वह फुलर में पाये जाने वाली उदारवादिता पर खूब बरसे; और ऐसा ही उन्होंने अनेक उदारवादी सेमनरीज में भी किया। वह कोई मूर्ख नहीं थे। वह पिंसटन यूनिवर्सिटी से चर्च इतिहास वाले विषय में पी.एच.डी. थे और आगे भी उन्होंने डयूक यूनिवर्सिटी से पढाई की थी। डॉ. जे. ग्रेशम माचेन ने उन्हें प्रेसबिटेरियन विदेशी मिशन की स्वतंत्र बोर्ड का प्रमुख नियुक्त किया था। उनको एक हफता सुनने के पश्चात मैं परिवर्तित हो गया। न केवल मैं बचाया गया, परन्तु मैं बाईबल के एक एक शब्द से मिलने वाली प्रेरणा पर भी विश्वास करता था; बाईबिल जो इब्रानी भाषा में पुराना नियम और यूनानी में नया नियम प्रयुक्त होती थी। मैंने केवल एक सेमेस्टर बॉयोला में अध्ययन किया। किंतु वहीं यीशु ने मुझे बचाया था, और यह वही जगह थी जहां मैंने पवित्र धर्मशास्त्र के वचन पर विश्वास करना सीखा था। प्रथम सदी में फरीसी कहते थे कि वे पुराने नियम पर विश्वास करते थे, किंतु वास्तव में वे मसीह से संबंधित भविष्यवाणयों का इंकार करते थे। उन्होंने उनसे कहा,

“क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे?” (यूहन्ना ५:४६, ४७)

डॉ. डब्ल्यू. ए. किसवेल ने संकेत दिया कि ''वह कम से कम का भी संकेत प्रभु यीशु’ में दिया है, (कथन) मूसा ने जो वास्तव में धर्मशास्त्र में लिखा और यहूदी सचमुच में जानते थे कि प्रभु के बारे में कहां लिखा हुआ है'' (दि किसवेल स्टडी बाईबल; यूहन्ना ५:४५−४७ पर व्याख्या) डॉ. आर. सी. एच. लेंस्की ने कहा, ''...जो मूसा ने कहा यहूदी उस पर भी विश्वास नहीं करते थे इसी प्रकार जो प्रभु कहते हैं उस पर भी विश्वास नहीं करते'' (दि इंटरप्रीटेशन आँफ सेंट जॉन गॉस्पल; यूहन्ना ५:४६ पर व्याख्या) डॉ.चाल्र्स जॉन एलिकोट कहते हैं, ''उन्होंने मूसा का विश्वास नहीं किया, और इसीलिये उसका भी विश्वास नहीं किया'' (एलिकोटस कमेंटरी आँन दि व्होल बाईबल; यूहन्ना ५:४६ पर व्याख्या) ।

“क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे?” (यूहन्ना ५:४६, ४७)

डॉ. लेंस्की ने कहा कि प्रभु यीशु के शब्द ''.........किसी 'खोज' कहलाये जाने से भी बढकर थे जो आज तक किसी ने नहीं ढूंढे थे और ये हमेशा ही उनकी आलोचना करने वालों के (विरूद्ध) रहे'' (लंस्की, उक्त संदर्भित) ''अगर तुमने मूसा का विश्वास किया होता तो, मेरा भी विश्वास करते: क्योंकि उसने मेरे लिये लिखा था'' (यूहन्ना ५:४६)

अब हमारे सामने वह चलचित्र है ''निर्गमन'' परमेश्वर और राजा'' − यह चलचित्र रिडले स्कॉट ने निर्देशत की और आंशिक रूप से इसका निर्माण भी किया। विकिपीडिया के अनुसार,'' २०१३ में रिडले ने बताया था कि वह एक नास्तिक था ''इसलिये जो डॉ. अलबर्ट मोलेर ने कहा हमें उस पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये, ''चलचित्र में जो हम देखते हैं उस में मूसा बिना स्वर्गिक सामर्थ के है'' (www.albertmohler.com). इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है! इस फिल्म के सह-निर्माता और निर्देशक नास्तिक हैं! जो व्यक्ति परमेश्वर पर विश्वास नहीं रखता हो वह किस प्रकार से निर्गमन जो धर्मशास्त्र के अनुरूप हुआ और जिसमें प्रभु यीशु मसीह की सच्ची गवाही है उसके अनुसार फिल्म बना सकता है? इसलिये इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि रिडले स्कॉट ने एक ग्यारह वर्ष के लडके के रूप में परमेश्वर का वर्णन किया था! इसमें भी कोई आश्चर्य नहीं कि वह ''महामारियों और चमत्कारों को स्वर्गीय घटनायें न मानते हुये उन्हें स्वाभाविक वर्णन के रूप में प्रस्तुत करता है'' (मोलेर, उक्त संदर्भित) किंतु डॉ. मोलेर का यह भी कथन था, ''कि बाईबल इतिहास को स्पष्ट रूप में इतिहास के जैसे पुस्तुत करती है, और मसीहत का इतिहास इसी ऐतिहासिक बुनियाद पर तैयार किया जाता है'' (उक्त संदर्भित) ।

किंतु रिडले स्कॉट ने ''.....यह स्पष्ट कर दिया कि वह मूसा में विश्वास नहीं करते थे कि वह कभी इस धरती पर हुआ भी − और निर्गमन का वर्णन ऐतिहासिक रूप से सत्य नहीं माना जाना चाहिये। उन्होंने रिलीजियस न्यूस सर्विस को कहा कि (वह) उनकी फिल्म को मात्र एक विज्ञान के उपन्यास जितना मानते हैं......'' (मोलेर, उक्त संदर्भित)। इसलिये मि. स्कॉट प्रभु यीशु मसीह के विरूद्ध अपने कथन को प्रस्तुत करते हैं,

“क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे?” (यूहन्ना ५:४६, ४७)

१३ अप्रेल, २००१ (पेज ए-1) के दिन लॉस ऐंजीलिस टाईम्स के प्रथम पेज पर एक लेख छपा था, ''निर्गमन एक संशय पूर्ण कहानी है'' यह टेरेसा वटांबे द्वारा लिखा गया था, जो टाईम्स की धार्मिक लेखिका थी। यह लेख निर्गमन के उपर एक प्रहार था, जो फिल्म में दिखाये उलटफेर के समान ही था, ''निर्गमन: देवताओं और राजाओं के विषय में।'' मैं टाईम्स में छपे लेख के मुख्य बिंदु पढंगा और उनका उत्तर दूंगा।

निर्गमन की कहानी के विषय में संशय

कई विद्वानों ने बडी शांतता से यह निष्कर्ष निकाला है कि मूसा की विशाल कहानी कभी घटी ही नहीं थी, और यहूदी रब्बी भी इस पर प्रश्न उठा रहे हैं ......

इन विद्वानों के नाम यद्यपि नहीं दे रखे हैं। केवल एक यहूदी ''रब्बी'' का कथन दिया हुआ है, वह जो लॉस ऐंजीलिस के पास वेस्ट वुड में रब्बी है। किंतु लेख यह नहीं कहता कि वह एक आर्थोडॉक्स सिनेगॉग नहीं था। लेख यह नहीं कहता कि वह रब्बी एक जिसने पुराना नियम की गंभीरता पूर्वक लिया हो, जैसा आर्थोडॉक्स रब्बी करते ही थे। और लेख यह भी नहीं कहता कि पुराने नियम के बहुत से विद्वान थे जैसे डॉ. ग्लीसन आर्चर जो टिनीटी इंवेजलीकल डिवीनिटी स्कूल के थे, तलबोट स्कूल आँफ थियोलॉजी के डॉ. चाल्र्स एल. फेनबर्ग और, ताईवान की चायना इवेंजलीकल सेमिनरी के राष्ट्रपति डॉ. तिमोथी लिन। इन विद्वानों ने यह शिक्षा दी कि बाईबल का निर्गमन शब्दश: सत्य था। किंतु टाईम्स का लेख कभी इन विद्वानों का जिक्र नहीं करता। केवल थियोलॉजी के उदारवादी विद्वानों का वर्णन किया गया है, यह आभास देते हुये कि कोई पुरातन पंथी विद्वान कभी हुये ही नहीं। यह लेख तो इतना तक लिखता है,

भूगर्भ शास्त्री कहते हैं कि ऐसा कोई निष्कर्षात्मक प्रमाण नहीं है कि इजरायली कभी मिस्र में गये थे, गुलाम बनाये गये थे, ४० सालों तक सीनै के जंगल में भटके थे या कभी उन्होंने कनान पर जीत भी हासिल की थी (उक्त संदर्भित) ।

मैंने यह लेख मेरे पुत्र लेस्ली को पढकर सुनाया। जब यह अखबार आया था, वह सत्रह वर्ष का था। उसके ठीक बाद मेरे पुत्र ने कहा, ''अगर संसार के बाकि हिस्सों में जैसे चीन या इंग्लैंड में (निर्गमन) वाली घटनायें घटी होती, तो उन्होंने इसके प्रभाव पहले ही खोज लिये होते। परन्तु मध्य पूर्व में इसे सामान्य रूप से नहीं लिया गया है। उनके यहां लगातार युद्ध और विवाद चलते रहे। जबसे निर्गमन की पुस्तक लिखी गई, यहूदी पूरे विश्व में दो बार बिखर गये। बाईबल में (निर्गमन) में हजारों वर्षों तक स्थान नष्ट किये गये। इसलिये हमें इसके ठीक ठीक सिद्ध प्रमाण मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिये।'' जब उसने यह कहा, तो मैंने स्वंय सोचा, ''कि इस सत्रह साल के बालक के अंदर उन उदारवादी बाईबल आलोचक के बजाय अधिक दिमाग है।''

रब्बी डेविड एलिजेरी, जो औरेंज काउंटी की रब्बिनीकल कौंसिल, के अध्यक्ष हैं उस लेख में उनका उद्धरण आया था, जिसमें यह लिखा था,

कुछ वर्ष पूर्व, उन्ही भूगर्भ शास्त्रियों ने जिन्होंने निर्गमन पर (संशय) किया था उनका कथन था कि राजा दाउद भी इस दुनिया में कभी नहीं हुआ। उनका यह सिद्धांत तब परास्त हो गया जब इजरायल में राजा दाउद के बारे में एक अभिलेख मिला (ज्यूईश जर्नल, ४@२०@०१ में उदधृत पेज ११)

मेरे एक मित्र ने मुझे पत्र में बताया कि, कुछ वर्षो पूर्व जब दि टाईम्स में लेख छपा था, भूगर्भ शास्त्रियों ने मिटटी का बना हुआ एक टुकडा निकाला, जो ठीक दाउद के काल का था, जिसके उपर सीधे शब्दों में ''राजा दाउद'' लिखा हुआ था।

डॉ. डब्ल्यू. ए. किसवेल एक मेघावी विद्वान थे। उन्होंने दक्षिणी बैपटिस्ट थियोलॉजीकल सेमनरी, लूईसविले, केंटुकी से बाईबल की भाषाओं में पीएचडी की। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी, जिसमें बाईबल के उपर कई व्याख्यात्मक पुस्तकें शामिल हैं। वह ५० वर्षों से अधिक समय से फस्र्ट बैपटिस्ट चर्च, डलास, टैक्सास के पास्टर रहे हैं। अमेरिका के सबसे बडे ''प्राटेस्टैंट'' डिनोमिनेशन दक्षिणी बैपटिस्ट कन्वेंशन के अध्यक्ष पद के लिये वह दो बार चुने गये। वह आसानी से थियोलॉजीकल सेमिनरी के अध्यक्ष हो सकते थे। अपनी विशेष पुस्तक, व्हाय आय प्रीच दैट दि बाईबल इज लिटरेली, (ट्रू ब्राडमेन प्रेस १९६९) डॉ किसवेल ने कहा,

     पूर्व में ऐसा सोचा गया था कि मूसा ने पांच शास्त्र बाईबल की (प्रथम पांच पुस्तकें) लिखे होंगे चूंकि वह लिखाई की खोज होने के पहले से जीवित था। यह आधुनिक (उदारवादी) आलोचना का पक्का परिणाम था। हम अब जानते हैं, यद्यपि, कि समीपवर्ती पूर्व में मसीह के २००० वर्षों पहले लिखाई एक भली भांति स्थापित कला थी। इसके बजाय कि लिखाई मूसा के दिनों में अज्ञात थी, हम ने यह खोज की है कि मूसा के समय से सदियों सदियों पहले से लिखाई एक भली भांति विकसित कला थी, मूसा से बहुत समय (पहले) और सुदूर पूर्व समय से.....
     एक और अन्य भूगभशास्त्रिय प्रमाण जो बाईबल की सच्चाई को प्रदर्शित करता है कि मिस्र की कठोर दासता में रहते हुये इजरायलियों ने रामजे द्वितीय के लिये पिथोम नामक खजाने का शहर बसाया था। यह शहर अभी अभी खुदाई में मिला है, और घर की दीवारें सूरज में तपाई ईंटो से बनी थी कुछ भूसे से बनी थीं कुछ दीवालें बिना भूसे के बनी थी, बिल्कुल जैसे निर्गमन ५:७ में लिखा था....एक बार फिर बाईबल का इतिहास सही सिद्ध हुआ,जबकि (उदारवादी) आलोचकों द्वारा हंसी ठटटा बहुत ही हास्यास्प्रद और मूर्खतापूर्ण सिद्ध हुआ।

किंतु मैं इससे भी आगे जाउंगा। उदारवादी आलोचक, जो गोल्डन गेट बैपटिस्ट थियोलॉजी सेमीनरी के प्राध्यापक थे, जब मैंने वहां दाखिला लिया - और स्नातक डिग्री हासिल की, हमें अर्थात छात्रों को यह बताया गया कि ऐसा कोई अभिलेख दर्ज नहीं है कि मिस्र की अधीनता में कभी इब्रानी रहे होंगे। मैं उनके पास एक तस्वीर ले गया, जिसमें दाढी वाले लोग ईंट बनाते हुये दिख रहे थे, जैसा हमें निर्गमन के पांचवें अध्याय में पढने को मिलता है। मैंने पिरामिड की दीवारों से ली गई तस्वीरें, प्राध्यापकों को दिखाने ले गया। यद्यपि उन्होंने मजाक उडाया, और वे हंसने लगे, और कहने लगे कि मैं पागल हूं क्योंकि मैं धर्मशास्त्र में विश्वास करता हूं। इन दाढी वाले पुरूषों में से एक की तस्वीर हिस्टोरिकल एटलस आँफ दि जुईश पीपल (दि जूईश जर्नल, ४/२०/२००१ पेज ११) पर है। चूंकि मिस्री सभी बिना दाढी के होते थे, दाढी वाले पुरूष जो ईंट बना रहे थे, यह स्पष्ट बताता है कि निर्गमन के काल में मिस्र की भूमि पर इब्रानी लोग गुलाम के रूप में ईंटों का निर्माण कर रहे थे! आँर्थोडाक्स रब्बी डेविड एलिजेरी ने निर्गमन के उदारवादी आलोचकों के संबंध में टाईम्स के लेख के बारे में कहा,

उनकी जीवन शैली व शिक्षा ऐसी विचारधारा उत्पन्न करती है जो निर्गमन के विरूद्ध बोले जाने वाले तथ्यों को पहले ही खारिज कर देती है। केवल तब जब उनके पास कोई विकल्प न हो कि वे तोराह में से कुछ (स्वीकार) मान ले कि (पुराना नियम) यह सत्य हो सकता है (दि जूईश जर्नल, ४/२०/२००१, पेज ११)

फिर से एक बार टाईम्स का लेख हास्यासप्रद, बिल्कुल ही, गलत साबित होता है जब यह कहता है, ''१३ वर्ष पहले से निर्गमन के विरूद्ध यह मामला तैयार हो रहा था....विद्वान जो एक दशक से पूर्व यह जानते थे।'' यह तो सरासर झूठ है। बाईबल के आलोचक ऐसी बातें लगभग २०० वर्षों से कह रहे हैं! जोनन सेमलर (१७२५-१७९१) ने बाईबल की आलोचना १८ वीं शताब्दी में जर्मनी मे आरंभ की थी। डॉ. हेराल्ड लिंडसेल ने कहा,

१७५७ में वह हैल की थियोलोजिकल फेकल्टी के (प्रमुख) हो गये। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बाईबल के पदों की आलोचना का सिद्धांत विकसित किया। वह अपने पिता के पुरातनपंथवाद से अलग हो गये जब उन्होंने बाईबल के मौखिक प्रेरणा से लिखे जाने के विचार को चुनौती दी (हैराल्ड लिंडसेल, पी.एच.डी., दि बाईबल इन दि बैलेंस, जोंडरवन पब्लिशिंग हाउस, १९७९, पेज २८०)

दि टाईम्स का लेख कहता है कि उदारवादी विद्वान निर्गमन की कुछ अनुमानित ''गलतियों'' को कुछ साल तक सामने लाने के लिये जाने जाते रहे २००१ में जब निर्गमन लेख लिखा गया था − १० से १३ साल तक यह बातें उछलती रही। इसका यह अर्थ हुआ कि आलोचकों ने १९८८ या १९९१ तक निर्गमन की गलती निकालना जारी रखा। तभी मैं १९७२ और १९७३ में गोल्डन गेट सेमनरी में − लगभग १५ वर्ष पूर्व यह सब सुनता आया था? इसलिये डॉ. हैनरी एम. मोरिस ने १९५१ में निम्नलिखत प्रश्न पूछे जिस टाईम्स लेख में वे ५० वर्ष पूर्व छपे थे? १९५१ में डॉ. मोरिस ने कहा,

यह कैसे संभव है कि, सदियों से कोई नहीं, किसी को थोडा सा भी संशय नहीं हुआ कि मूसा का लेखन सही नहीं है जब तक कि आधुनिक आलोचनाकारों ने उन पर कार्य करना प्रारंभ नहीं किया? (हैनरी एम. मोरिस पी.एच.डी. दि बाईबल एंड माडर्न साइंस, शिकागो: मूडी प्रेस, १९५१, पेज १०२)

अगर निर्गमन पर यह प्रहार कुछ वर्ष पूर्व प्रारंभ हुये तो १९३२ में क्यों विंस्टन चर्चिल ने इन्हें लिखा? लगभग ८२ वर्ष पहले चर्चिल ने मूसा और निर्गमन को उदारवादी आलोचकों के विरूद्ध जाकर उसके पक्ष में कथन किये। चर्चिल ने कहा,

हम, बडे तिरस्कार, से उन सब विद्वतापूर्ण और परिश्रम से तैयार की गई कहानियों को अस्वीकार करते हैं जबकि मूसा एक विशाल व्यक्तित्व था जिसकी पुरोहिताई के उपर लोगों ने अपने आवश्यक सामाजिक, नैतिक और धार्मिक संस्कार ठहराये थे। हम विश्वास करते हैं कि सर्वाधिक वैज्ञानिक दृष्टकोण भी, जो बिल्कुल ताजा व तर्क अनुसार धारणा रखने वाला है, वह अपनी संपूर्ण संतुष्ट बाईबल की शब्दश: कहानी जो (निर्गमन में) है, प्राप्त करेगा और सब महान मनुष्यों में से एक (मूसा) को पहचानेगा जो उसका निर्णय लेने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कदम मानव इतिहास में माना जायेगा। हम प्राध्यापक ग्रेडग्राइंड और डॉ. ड्रायसडस्ट जो (बाईबल के उदारवादी आलोचक) है उनके (लेखन) से अप्रभावित हैं। हम इस बात में पक्का विश्वास रखते हैं कि वे सब बातें जो (निर्गमन में) हुई जैसी वे वर्णित हैं, वह सब पवित्र लेखन अनुसार है....हम पवित्र शास्त्र की उस ठोस और ‘न हिलाये जाने वाली वचन रूपी चटटान' पर अपना विश्वास रखते हैं (विंस्टन एस. चर्चिल, ''मूसा,” एमिड दीज स्टोर्मस, न्यूयार्क, स्क्रीबनर्स, १९३२, पेज २९३)

चर्चिल बाईबल का विद्वान नहीं था। किंतु वह इतिहासकार के रूप में नोबेल पुरूस्कार विजेता था (१९५३) इतिहासकार के रूप में वह जानता था कि निर्गमन की पुस्तक किन्हीं पुराणिक बातों पर नहीं अपितु सच्ची घटनाओं पर आधारित है। उसका इतिहासकार के रूप में जो निरीक्षण है वह बाईबल के अन्य आलोचक या ''डॉ. ड्रायडस्ट'' की विचारधारा से कहीं अधिक गहरी समझ देता है। उसी प्रकार की समरूप समझ और गहरी परख उसे हिटलर को एक खतरनाक पागल आदमी के रूप में दिखाती है; जबकि शेष इंग्लैंड और अमेरिका के प्रमुख नेता, जिनमें जॉन एफ.केनेडी के पिता सम्मिलित थे, इन लोगों ने हिटलर को वर्ष १९३० में एक महान ''राजनीतिज्ञ'' के रूप में देखा था।

जितने भी आलोचक हैं, अथवा निर्गमन फिल्म बनाने वाला रिडले स्कॉट, क्यों न हो, ये लोग बाईबल पर इसलिये विश्वास नहीं रखते हैं क्योंकि ये आत्मिक रूप से अंधे हैं। बाईबल कहती है,

''परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है।'' (१कुरूंथियों २:१४)

परमेश्वर की बातें ''साधारण आदमी'' के सामने छिपी रहती है। जब तक एक मनुष्य स्वयं को नम्र न बनाये, मसीह पर भरोसा न रखे, तब तक धर्मशास्त्र की सच्चाई देखने के लिये उसकी आत्मिक आंखे खुल नहीं सकती।

“क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है। परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे?” (यूहन्ना ५:४६, ४७)

प्रभु यीशु ने क्रूस पर आपके पापों का दंड भरने के लिये अपना बलिदान दिया। वह शारिरिक रूप से मरे हुओं में से जीवित हुये ताकि हमें जीवन मिले। मसीह ने कहा, ''आपका नये सिरे से जन्म लेना आवश्यक है'' (यूहन्ना ३:७) केवल जब तक तुम नये सिरे से न जन्मों, परमेश्वर की सामर्थ द्वारा, तब तक आप निर्गमन के महान सत्यों को समझने में असफल रहोगे, और इसी तरह संपूर्ण बाईबल को भी नहीं समझ पाओगे। आमीन। डॉ.चान, निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिये।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा: यूहन्ना ५:३९−४७
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
“ मैं जानता हूं बाईबल सत्य हैं।” (डॉ बी बी मैंकिनी, १८८६−१९५२)