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क्रिसमस की छुटिटयों का पागलपन

CHRISTMAS HOLIDAY MADNESS!
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह ३० नवंबर, २०१४ को लॉस ऐंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में किया गया प्रचार
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Morning, November 30, 2014

“जो कुछ सूर्य के नीचे किया जाता है उस में यह एक दोष है कि सब लोगों की एक सी दशा होती है; और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)


राजा सॉलोमन ने सभोपदेशक लिखा था। उनको जीवन में मिलने वाले कई अनुभवों का वर्णन है ये पुस्तक। उसने अपनी आत्मा को संतुष्ट देने के लिये प्रत्येक बातों को आजमा कर देखा। उसने ज्ञान का अनुसरण किया। उसने आनंद का पीछा किया। उसने दौलत पाई। उसने धर्म का अनुसरण किया। उसने ख्याति का अनुसरण किया। उसने नैतिकता को आजमा कर देखा। अंत में वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा, ''मैं ने उन सब कामों को देखा जो सूर्य के नीचे किए जाते हैं; देखो वे सब व्यर्थ और मानो वायु को पकड़ना है।'' (सभोपदेशक १:१४; २:११, १७) उसने सब कुछ देखा और आजमाया फिर इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सब कुछ व्यर्थ हैं। जैसे प्रेरित यूहन्ना ने कहा सॉलोमन भी इस निष्कर्ष पर पहुंचा, ''और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं'' (१ यूहन्ना २:१७)

सभोपदेशक ९:३ निराशाजनक पद है। यह मनुष्य का बहुत निराशाजनक रूप प्रगट करता है। तौभी मैं सोचता हूं राजा सॉलोमन बिल्कुल सही था। उसने इस पद में तीन कथन दिये जो बिल्कुल सच है और संपूर्ण बाईबल से इसका मिलान होता है।

“और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)

१. पहला, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है।”

उसने दूसरे पद में इसे स्पष्ट किया, जब उसने लिखा,

“निसन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ हो” (सभोपदेशक ७:२०)

“मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है” आज बहुत से लोग यह मानना नहीं चाहते। बार बार हम लोगों को यह कहते हुए सुनते है, “कि मनुष्य तो मूलत: अच्छे स्वभाव का ही होता है।” पर यह नजरिया किसी तर्क द्वारा या धर्मशास्त्र द्वारा मान्य नहीं किया गया है! कारण यह है कि मनुष्यों के “मनों में बुराई भरी हुई है”! अखबार पढि़ये। टेलीविजन पर खबरें देखिये। समाचारों में बहुत बुराईयां देखने को मिलती है अच्छी खबरें तो कम ही देखने को मिलती है। और जो “अच्छा” अंतत: दिखाई देता है वह भी किसी स्वार्थ की भावना से प्रेरित होकर या घमंड के कारण किया गया होगा हो ऐसा माना जाता है, अत: यह भी नैतिक बुराई होगी! बार बार यह तर्क सॉलोमन के शब्दों की सच्चाई प्रगट करता है, “मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है।”

अब धर्मशास्त्र में बाईबल के एक सिरे से दूसरे सिरे यने अंत तक मनुष्य के पापी स्वभाव के बारे में, और उसकी भ्रष्टता के बारे में बताया गया है। बाढ़ के पूर्व,

“और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।” (उत्पत्ति ६:५)

अपने प्रसिद् संदेश “मूल पाप” में महान सुसमाचार प्रचारक जोन वेस्ली ने (१७०३−१७९१) में कहा कि मनुष्य बाढ़ वाली घटना के बाद भी ऐसा ही है। जोन वेस्ली ने कहा,

बाढ़ वाली घटना के बाद के हजार साल बाद भी परमेश्वर ने दाउद के द्वारा कहलवाया कि, “(वे सब के सब भटक गए: वे सब भ्रष्ट हो गए; कोई सुकर्मी नहीं एक भी नहीं,” भजन १४:३; रोमियों ३:१०) ऐसी गवाही सभी भविष्यवक्ता देते हैं........जैसे यशायाह ने (कहा), “तुम्हारा सिर घावों से भर गया, और तुम्हारा हृदय दु:ख से भरा है। नख से सिर तक कहीं भी कुछ आरोग्यता नहीं, केवल चोट और कोड़े की मार के चिन्ह और सड़े हुए घाव हैं बान्धे गए, न तेल '' (यशायाह १:५−६) यही वर्णन सभी भविष्यवक्ता देते हैं। मनुष्य से संबंधित उसकी प्राकतिक दशा के बारे में, हमें यह सीखने को मिलता है......कि “उसके मन के विचार की कल्पना” फिर भी बुरी होती है, “केवल बुरी,” होती है और “निरंतर” (जोन वेस्ली, एम ए, “ओरिजनल सिन,” दि वक्र्स ओफ जोन वेस्ली, बेकर बुक्स हाउस, १९७९ पुर्नमुद्रण, वॉल्यूम ६, पेज ५७, ५८)

यिर्मयाह भविष्यवक्ता ने कहा था,

“मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उस में असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है?” (यिर्मयाह १७:९)

इस प्रकार, हम देखते है कि बाईबल, के एक छोर से दूसरे तक, सॉलोमन का कथन उभर कर आता है, “कि मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है।” और प्रत्येक दिन हम देखते है कि समाचार पत्र और टेलीविजन इन्हीं खबरों से भरे होते हैं और इस बात को पक्का करते हैं “कि मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है।”

२. दूसरा, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है।”

“और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)

इब्रानी शब्द “बावलापन” का अनुवाद जिस मूल शब्द से निकला है उसका अर्थ “मूर्ख” है (स्ट्रांग #१९८४) । मूल शब्द ''हाउलेलेह'' है जिसका अर्थ होता है ''पागलपन'' (स्ट्रांग #१९४७)। पागलपन, उन्माद, अन्यमनस्कता, तूफानी, उन्मुक्त − यह तस्वीर है! “और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है।” स्ट्रांग के शब्दानुक्रमणिका के अनुसार इब्रानी में पाये जाने वाले मूल शब्द का अर्थ होता है “आडम्बर करना, बावलापन करना धूमधाम मचाना, उत्पात मचाना।” मैथ्यू हैनरी ने कहा कि लोग “........अब पागल हो चले हैं जितना भी आनंद ऐसे लोग उठाते हैं और उससे भरपूर होते जाते हैं वह कुछ नहीं बल्कि ........एक अन्यमनस्क (पागल) व्यक्ति के सपने व कल्पना हैं” (मैथ्यू हैनरी कमेंटटरी आँन दि व्होल बाईबल, हैंडरिकसन पब्लिशर्स, १९९६ पुर्नमुद्रण, वॉल्यूम ३, पेज ८४९; सभोपदेशक ९:३ पर व्याख्या)

मानव मन का बावलापन इतना बढ़ गया है कि वह तरह तरह की प्रतिमा को पूजने लगा हैं। यिर्मयाह भविष्यवक्ता ने कहा, ''और वे अपनी भयानक प्रतिमाओं पर बावले हैं” (यिर्मयाह ५०:३८) − “और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है” (सभोपदेशक ९:३)। हमारे समय के लोग भी “अपनी भयानक प्रतिमाओं पर बावले हैं” − पोर्नोग्राफी, भौतिकतावाद, पाप में डालने वाले आकर्षण, और सबसे बड़ी मूरत “मजा” लेने की प्रव्रति को पूजना।

“छुट्टियाँ” साल का वह समय है जब मानव मन का बावलापन जब खुल कर सामने आता है। क्रिसमस और नये साल के समय मानव मन का बावलापन ज्वालामुखी के समान फूट पड़ता है! डॉ. ए. डबल्यू. टोजर ने (१८९७ −१९६३) में कहा,

एक प्रकार का पागलपन लोगों को जकड़ लेता है और तब एक ...पागलपन का दौर चालू होने लगता है कि हर कोई जैसा है वैसा नही रह जाता। कोई यह पूछने की जहमत नहीं करता कि यह चल क्या रहा है, पर प्रायोगिक रूप में देखा जाये तो अगर कोई नये साल के समय अस्पताल या जेल में नहीं हैं तो सब इस भगदड़ में कहीं से भी निकलकर शामिल होते हैं और लौट जाते हैं। एक सम्मोहक उमंग उठकर हमें बहती तेज हवा में से गेहूं के दाने के समान अलग करके चक्कर खिलाती हुई बारीक रूप से पीसकर भयानक दशा में ला देती है........(ए. डबल्यू. टोजर डी. डी. “मिडसमर मैडनेस,” इन गॉड टेल्स दि मैन हू केर्स, ईसाई पब्लिकेशंस, १९७० पुर्नमुद्रण, पेज १२७) डॉ. टोजर के बारे में पढ़ने के लिये यहां क्लिक कीजिये

जो डॉ ए डबल्यू टोजर ने “मिडसमर मैडनेस” में पचास साल पूर्व कहा था, वह आज भी लागू होता है, बहुत नहीं, किंतु कम से कम शरद ॠतु और ठंड की छुट्टियाँ में होने वाले पागलपन पर तो लागू होता है! इस पागलपन “के उन्माद में” लोग “मजा“ लेने के लिये बावले हुए जाते हैं और थैंक्सगीविंग, न्यू ईयर और क्रिसमस पर “अपने स्थानों को छोड़कर किसी और जगह हो लेते हैं।“ थैंक्सगीविंग पर हजारों की संख्या में लोग, हवाई अडडे पर रूके रहते हैं, क्योंकि उन्हें पूर्वी देश जाने की जल्दी होती है, और वापस पश्चिमी देश लौटना भी है, केवल कुछ घंटो के “आनंद” के लिये वे यह सब करते हैं। किसी ने भी परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिये चर्च जाने की नहीं सोची!

“छुट्टियाँ का यह पागलपन” हैलोविन के समय से प्रारंभ होता है एक जवान युवती जो थोड़े समय के लिये ही चर्च आयी थी का कथन था कि उसे चर्च इसलिये छोड़ना होता है क्योंकि उसे हैलोविन के “कपड़े पहनकर” तैयार रहना पड़ता है। उसे रविवार की सुबह की आराधना १०:३० बजे इसीलिये छोड़ना पड़ती थी कि उसे हैलोविन के कपड़े पहनना आरंभ करना होता था। पार्टी दोपहर दो बजे आरंभ होती थी, और एक जादूगरनी, या परी - या पिशाचिनी जैसे सजने के लिये कई घंटे तैयार होने में लगते है! यह क्या पागलपन है − छुट्टियाँ का यह पागलपन? ''और वे अपनी भयानक प्रतिमाओं पर बावले हैं” (यिर्मयाह ५०:३८) − “और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है” (सभोपदेशक ९:३)।

और यह दशा और बुरी हो जाती है! “छुट्टियाँ,” के उन्माद में लोग ऐसे छूट भागते है जैसा डॉ ए डबल्यू टोजर ने कहा कि एक “साधारण भगदड़” मच जाती है......“क्योंकि (अपने) स्थानों को छोड़कर लोग किसी और जगह हो लेते हैं।” कोई अपने घर ठहरना ही नहीं चाहता। और क्रिसमस व न्यू ईयर पर चर्च आना ही नहीं चाहते! “एक सम्मोहक उमंग उठकर हमें बहती तेज हवा में से गेहूं के दाने के समान अलग कर देती है” − उन्हे पागलपन करने के लिये धकेलती है चक्कर खिलाती हुई अमेरिकन सपना − अर्थात “मजे” के अंधड़ में डूबो देती है ।

जब १९४० में मैं एक छोटा लड़का ही था तब लोग घर में ही रूका करते थे और “छुट्टियाँ” में चर्च जाया करते थे। किंतु, आज थैंक्सगीविंग, क्रिसमस और न्यू ईयर पर “पागल” हो जाया करते हैं यह “बावलापन...... उनके मन में रहता है” और उस “मजे” रूपी प्रतिमा को पूजने की दीवानगी उन्हें घर से बाहर धकेलती है। एक उन्मुक्त व मदमस्त आदमी से आप कैसे अपेक्षा कर सकते हैं कि वह क्रिसमस और न्यू ईयर पर चर्च में ठहरेगा, क्या आप ऐसी अपेक्षा कर सकते हैं? इस आधुनिक आदमी को चर्च जाने का ख्याल पागल बना देता है।

मुझे एक “वैधानिक” आततायी की उपाधि मिली हुई है − और इससे भी बढ़कर − जब मैं जवानों को “छुट्टियाँ” के दौरान चर्च आने की नसीहत देता हूं। किंतु मैं अपने इरादे से पीछे नहीं हटता हूं! मसीह ने कहा था,

“धन्य हो तुम, जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुम से बैर करेंगे, और तुम्हें निकाल देंगे, और तुम्हारी निन्दा करेंगे, और तुम्हारा नाम बुरा जानकर काट देंगे। उस दिन आनन्दित होकर उछलना, क्योंकि देखो, तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है: उन के बापदादे भविष्यद्वक्ताओं के साथ भी वैसा ही किया करते थे।” (लूका ६:२२−२३)

मैं चाहता हूं हर प्रचारक में “छुट्टियाँ के दौरान पागलपन” को रोकने के लिये बोलने का इतना साहस होना चाहिये जैसा कि डॉ ए डबल्यू टोजर ने कहा! क्या यह समय नही है कि जब प्रचारक “छुट्टियाँ” के दौरान पनपने वाला भौतिकतावाद, ऐयाशी और “नशे” की आदतों को रोकने के लिये अपने प्रचार में बोले? क्या यह समय नही है कि डॉ ए डबल्यू टोजर के समान प्रचार करें? हमें डॉ टोजर जैसी सामर्थशाली भविष्यवक्ता वाली आवाजें चाहिये जो लोगों को ऐसे पागलपन वाले “म्रत्यु के नाच” से बचा सके − जिससे हमारा आर्थिक तंत्र नष्ट हो रहा है और संस्क्रति समात्त हो रही है − क्योकि हमारे लोग सस्ते आभूषणो, यात्रायें, व मजा, खेलों के उत्सव और नशे के पीछे अधिकाधिक पागल हो रहे हैं इन सब कारणो से अमेरिका का पतन हो रहा है बिल्कुल जैसे प्राचीन रोम की सभ्यता का पतन हुआ!

लॉस वेगास की यात्रा करेंगे! सैन फ्रांसिस्को की यात्रा करेंगे − या सैन डिएगों! सदोम और अमोरा और “उन के आस पास के नगर” (यहूदा ७) ये कोई जगहें नही हैं जहां क्रिसमस और न्यू ईयर के समय भाग कर जाया जायें! इन छुट्टियाँ के दौरान होने वाले पागलपन को त्यागों! परमेश्वर के लोगों के साथ चर्च में रहो मसीह की आराधना करो बजाय उस मजे रूपी प्रतिमा को “पूजने के।” बाईबल कहती है,

“इसलिये प्रभु कहता है, कि उन के बीच में से निकलो और अलग रहो” (२ कुरूंथियों ६:१७)

“छुट्टियाँ” के दौरान होने वाले पागलपन मे से बाहर निकलो! बाहर निकलो! बाहर आओ! परमेश्वर के लोगों के साथ क्रिसमस और न्यू ईयर के समय चर्च में रहो! इस पद में एक अंतिम उप वाक्य भी है।

३. तीसरा, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।”

निवेदन करता हूं कि खड़े हो जाये और सभोपदेशक ९:३ जोर से पढ़े।

“और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)

आप बैठ सकते हैं। “और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।”

मौत! यह वह चीज है जो जीवन के इस पागलपन के बाद आती है। मौत! शैतानी “पागलपन” के इस दौर से गुजरने के पश्चात मौत एक नितांत भयभीत करने वाला सत्य है। निश्चत देखिये, कब्र में कोई “मजा” करने को नहीं मिलेगा! नरक में कोई “मजा” करने को नहीं मिलेगा! बाईबल कहती है,

“धनवान भी.......मरा, और गाड़ा गया और अधोलोक में उस ने पीड़ा में पड़े हुए अपनी आंखें उठाई” (लूका १६:२२−२३)

प्रभु यीशु ने कहा, “और यह अनन्त दण्ड भोगेंगे” (मत्ती २५:४६)

“और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है, और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)

डॉ जोन गिल ने इस पद के विषय में कहा,

जीवन के सारे पागलपन करने के बाद उनकी मौत हो जाती है, और वे मरे हुओ में मिल जाते हैं.......और नरक में पहुंच जाते हैं (जोन गिल, डीडी, एन एक्सपाजिशन आँफ दि ओल्ड टेस्टामेंट, दि बैपटिस्ट स्टैंडर्ड बीअरर, १९८९ पुर्नमुद्रण, वॉल्यूम ४, पेज ६०७; सभोपदेशक ९:३ पर टीका)

जीवन मे सबसे महत्वपूर्ण चीज आमोद प्रमोद का पीछा करना नहीं है इस समय “आनंद लेने का” अनंतकाल में कोई अर्थ नहीं होगा, अगर आप अंतिम न्याय में परमेश्वर से मिलने की तैयारी के बगैर मर गये। आपके पापों का बोध आपको होना चाहिये। आपको पापों को त्याग कर मसीह की और मुड़ना चाहिये। आपको मसीह के अनुग्रह में लाया जाना आवश्यक है, और उसके सनातन बेशकीमती लहू से धोया जाना आवश्यक है! प्रभु यीशु ने कहा, “कि तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।” (यूहन्ना ३:७)

सालोमन ने जब सभोपदेशक लिखा वह बूढ़ा हो चला था। वह पिता के मानिंद अपने बच्चों को सिखा रहा था। मुझे स्वयं को इस संसार में रहते रहते ७४ वर्ष बीत गये।मैं आज आपको एक बूढ़े अंकल के समान समझा रहा हूं। मैं आपके मसीही जीवन को सफल बनाना चाहता हूं इस के लिये आपको मुझे सुनना आवश्यक हैं। सभोपदेशक के अंत में सालोमन ने कहा, “अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख” (सभोपदेशक १२:१) अनंतकाल के विषय में सोचने के लिये जवानी सबसे उपयुक्त समय है। मै आशा करता हूं आप जवान लोग मेरी सुनेंगे, क्योंकि सालोमन के समान, मैंने भी जीवन के ७४ वर्ष देखे हैं। मैं जानता हूं कि आपके लिये मसीह को ढूंढने के लिये यह समय कितना महत्वपूर्ण हैं, और जब आप जवान ही हैं तब, अनंतकाल के विषय में सोचना कितना जरूरी हैं। संदेश के पूर्व मि गिफिथ ने जो गीत गाया उसके शब्द सुनिये।

आप अनंतकाल कहां बितायेंगे? यह प्रश्न आपके और मेरे मन में आता है;
आपका अंतिम उत्तर क्या होगा? आप अनंतकाल कहां बितायेंगे?
अनंतकाल! अनंतकाल! आप अनंतकाल कहां बितायेंगे?
आप अनंतकाल कहां बितायेंगे?
   (“आप अनंतकाल कहां बितायेंगे?” एलिशा ए हाफमन १८३९−१९२९)

अनंतकाल के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार करने से बचा जा सकता है और यह “छुट्टियाँ के दौरान पागलपन” द्वारा आत्मा को उलझन में डालने से बचाता है। मसीह के बारे में आपको पाप से बचाता है यीशु मसीह के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार करना आपको पाप से जगाता है, और उद्वार प्राप्त् करने में सहायता करता है। वह क्रूस पर आपके पापों का दंड भुगतने के लिये मरा। आपको अनंत जीवन देने के लिये वह मरे हुओं में से जी उठा। मसीह के विषय में गंभीर हो जाइये! यहां चर्च में किसमस की दावत का लुत्फ उठाने की योजना बनाइये, और किसमस की संध्या, नये साल की संध्या में चर्च में सम्मिलित होइये! परमेश्वर आपको आशीष दे! आमीन। डॉ चान निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई करे।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया ऐबेल प्रुद्योमे द्वारा: लूका १६:१९−२६
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
“आप अनंतकाल कहां बितायेंगे?” (एलिशा ए हाफमन, १८३९−१९२९)


रूपरेखा

क्रिसमस की छुटिटयों का पागलपन

CHRISTMAS HOLIDAY MADNESS!

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

“और मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई है और जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन में बावलापन रहता है, और उसके बाद वे मरे हुओं में जा मिलते हैं।” (सभोपदेशक ९:३)

(सभोपदेशक १:१४; २:११, १७; १ यूहन्ना २:१७)

१. पहला, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “मनुष्यों के मनों में बुराई भरी हुई
है,” सभोपदेशक ७:२०; उत्पत्ति ६:५; भजन १४:३; रोमियों ३:१०;
यशायाह १:५−६; यिर्मयाह १७:९

२. दूसरा, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “जब तक वे जीवित रहते हैं उनके मन
में बावलापन रहता है,” यिर्मयाह ५०:३८; लूका ६:२२−२३; यहूदा ७;
२ कुरूंथियों ६:१७

३. तीसरा, राजा सॉलोमन ने लिखा था, “और उसके बाद वे मरे हुओं में जा
मिलते हैं,” लूका १६:२२−२३; मत्ती २५:४६; यूहन्ना ३:७;
सभोपदेशक १२:१