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अविश्वास − आत्मिक जाग्रति में बाधक है!

(आत्मिक जागृति पर संदेश ११)
UNBELIEF – A HINDRANCE TO REVIVAL
(SERMON NUMBER 11 ON REVIVAL)
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या, १२ अक्टोबर, २०१४ को लॉस एंजिलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord's Day Evening, October 12, 2014

“वे अपनी भेड़−बकरियां और गाय−बैल लेकर यहोवा को ढूंढने चलेंगे‚ परन्तु वह उनको ना मिलेगा; क्योंकि वह उनसे दूर हो गया है।” (होशे ५:६)


इजरायलियों ने असीरियों की तरफ से खतरा महसूस किया। तब वे परमेश्वर की ओर मुड़े। तब वे परमेश्वर के कोप को शांत करने के लिये, वे भेड़ और बैलो का बलिदान चढाने को लाए। परन्तु परमेश्वर से उन्हैं क्षमा नही मिली। उनकी मूर्ति पूजा व पाप के कारण “वह उनसे दूर हो गया” जब तक वह मिल सकता था उन्होने उसे खोजने का प्रयास नहीं किया। अब बहुत देर हो चुकी थी। परमेश्वर ने अपनी उपस्थति उनके बीच से हटा ली।

''वे अपनी भेड़−बकरियां और गाय−बैल लेकर यहोवा को ढूंढने चलेंगे‚ परन्तु वह उनको ना मिलेगा; क्योंकि वह उनसे दूर हो गया है।'' (होशे ५:६)

पिछले बुधवार की रात मैंने जब बिली ग्राहम का एक विडियो देखा तो मुझे यह पद याद आया। सन १९८३ में वह केलिफोर्निया के सेक्रामेंटो में बोल रहे थे। उनका विषय “पवि़त्र आत्मा” था। जब वह प्रचार कर रहे थे तब मैं इस आयत पर मनन कर रहा था कि “वह उनसे दूर हो गया है।”

अब आपको समझ में आ गया होगा‚ कि मैं बिली ग्राहम को कितना चाहता हूं। मैं हमेशा चाहता हूं‚ व चाहता रहूंगा। मुझे याद है कि मैं उन्हें सुनने के लिये केलिफोर्निया के लॉस ऐंजिलिस कोलेसियम में अगस्त १९६३ में गया था। जब मैं अपनी कार से उतरा मैंने “महसूस किया” कि पवित्र आत्मा की मौजूदगी वहां है जैसे हवा में‚ बिजली का करंट‚ दौड़ रहा हो। मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी। पवित्र आत्मा की मौजूदगी का अनुभव इतना गहराई लिये हुए व चौंकाने वाला था। उस बड़े स्टेडियम में प्रत्येक जन इतना शांत था। जब विशाल भजन मंडली ''प्रभु महान'' गाने के लिये खड़ी हुई तो उस शांति का बखान नहीं किया जा सकता। उस दिन का बिली ग्राहम का संदेश इतना सामर्थशाली था जिसे मैं आज तक भूल नहीं पाया हूं!

अगले दशको में मैंने अलग अलग शहरों में बिली ग्राहम की छ: बड़ी बड़ी सभाओं में हिस्सा लिया हैं। किंतु जब मैं केलिफोर्निया के ओकलैंड में, ७० सन के प्रारंभ में गया मैंने पाया कि तब उनके प्रचार में बहुत कम सामर्थ थी सन १९८० के प्रारंभिक महिनों में, मैं डॉ तिमोथी लिन के साथ का प्रचार देख रहा था। आधा प्रचार होने के बाद बोले, ''कि ऐसा लगता है कि जैसे बिली ग्राहम के अेदर बिल्कुल सामर्थ नही है।'' मैं नही सोचता कि ऐसा इसलिये हुआ कि वह बूढ़े हो चले हों। वह तो अभी भी बलवान लगते हैं। किंतु कुछ बात की कमी अवश्य थी। ऐसा ही मुझे भी लगा जब पिछले बुधवार की रात मैं वीडियों पर मि ग्राहम का प्रसारण देख रहा था। मुझे लगा कि स्वयं पवित्र आत्मा की वहां भारी कमी थी। मुझे ऐसा लगा कि “वह उनसे दूर हो गया (चुका) है” (होशे ५:६)। ऐसा केवल मि ग्राहम के प्रचार के समय ही नही होता है। पश्चिमी दुनिया के जितने भी चर्चस हैं वहां सभी जगह यह दशा दिखाई देती हैं। मुझे बहुत बुरा लगता है - कि हमारे चर्चस से जब हम प्रचार करते हैं तब परमेश्वर की मौजूदगी हट गयी हैं! कितने दुख की बात हैं! जब कभी इस बारे में सोचता हूं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं! डॉ मार्टिन ल्योड-जोंस ने कहा था, “एक प्रचारक पवित्र आत्मा के बगैर प्रचार कर सकता है। वह अपनी बुद्वि से वचन की व्याख्या कर सकता है, किंतु यह पर्याप्त नहीं है। हमें पवित्र आत्मा की सामर्थ का प्रगटीकरण चाहिये।'' (डॉ मार्टिन ल्योड-जोंस‚ एम डी‚ रिवाईवल‚ क्रास वे बुक्स, १९८७‚ पेज१८५) सचमुच कितना अधिक मुझे मेरे लिये सामर्थ की जरूरत है! मैं आपसे निवेदन करता हूं कि मेरे लिये प्रार्थना कीजिये!

आप जानते होंगे कि‚ हमारे अंग्रेजी भाषी देशों में १८५९ के बाद से कोई बड़ी आत्मिक जाग्रति नहीं हुई। १५० सालो से अधिक समय हो गया। १८५९ के पहले‚ हमारे चर्चेस लगभग हर दशक में परमेश्वर द्वारा भेजी आत्मिक जाग्रति महसूस करते थे। किंतु डॉ मार्टिन ल्योड−जोंस ने कहा,

वर्ष १८५९ के बाद केवल एक विशाल जागृति आई। सचमुच हमने कितना अनउपजाउ समय बिताया....लोगों ने अपना विश्वास जीवित परमेश्वर में खो दिया उसके हमारे एवज में बलिदान देने पर से खो दिया और विद्वता, दर्शन शास्त्र और सीखने की ओर मुड गये। हम चर्च के एक लंबे समय तक के बांझ समय के गवाह रहे हैं.....हम अभी तक उसी निर्जन में चल रहे हैं। आप को कोई भी सलाह दे कि आप चर्च के इस बांझ समय से बाहर निकल आये हैं, तो विश्वास मत कीजिये हम अभी तक बाहर नहीं निकले हैं। (डी मार्टिन ल्योड−जोंस, एम डी, रिवाईवल, १९८७, क्रासवे बुक्स, पेज १२९)

यही कारण था कि मैंने आपको चीन की सामर्थकारी जाग्रति का विडियो दिखाया, दि क्रास - जीजस इन चाइना (चाइना सोल फॉर किश्चयन फाउंउेशन इसे जानने के लिये यहां क्लिक करें) । मैं चाहता हूं कि आप इसे जाने कि आज भी जाग्रति असंभव नहीं है। - यह संसार के अन्य भागों में हो रहा हैं। पर पश्चिमी दुनिया में कोई उत्तम प्रकार की जाग्रति नहीं होती, इसलिये मैं आपको इसे अपनी आंखों से देखने के लिये नहीं भेज सकता। मैं आपको सुदूर चीन में बने विडियो दिखाना चाहता हूं। चीन में सुदूर में बने इन विडियो को देखने के बाद आप भी जाग्रति पाने की इच्छा करेंगे। जैसे राजा सुलेमान ने कहा था,

“जैसा थके मान्दे के प्राणों के लिये ठण्डा पानी होता है, वैसा ही दूर देश से आया हुआ शुभ समाचार भी होता है।” (नीतिवचन २५:२५)

मैं आपको दिखाना चाहता हूं कि आज भी‚ परमेश्वर जाग्रति‚ देने के द्वारा चमत्कार कर सकता है। ब्रायन एच एडवर्ड ने कहा था,

ऐसा नहीं है कि जाग्रति बीमारी की तरह फैलती जाती है‚ किंतु इसका प्रभाव मनुष्य के भीतर इच्छा व प्यास उत्पन्न करता है जिन्हें इसके बारे में बताया या दिखाया गया है। जिन लोगो को परमेश्वर ने जाग्रति में उपयोग किया होगा वे भी यह विचार कर रहे होंगे कि ने पिछले समय में कैसे अदभुत काम किये हैं.....और हम मूर्ख रहे जो हम परमेश्वर द्वारा दी हुई संभावनाओं के प्रति प्रतिकियाशील नहीं रहे सीखा भी नहीं। हमारी आंखे परमेश्वर पर होनी चाहिये कि वह क्या कर सकता है‚ हमारे विचार खुल जाना चाहिये व हमें यह दर्शन होना चाहिये कि परमेश्वर अपने कार्य करने में कितना सामर्थकारी है। परमेश्वर द्वारा दी हुई संभावनाओं के प्रति आज भी हम कितने प्रतिकियाशील रहे है परमेश्वर इंतजार कर रहा है। (ब्रायन एच एडवर्ड‚ रिवाईवल! − ए पीपल सेचुरेटेड विथ गॉड, इवेंजलिकल प्रेस, १९९१, संस्करण, ९१, ९२) ।

पिछले समय में हुई‚ व अभी भी अन्य स्थानों में हो रही‚ जाग्रति हमारे विश्वास को बढाती है कि आज भी परमेश्वर ये चीजें कर सकता है, और हमारे चर्च में भी कर सकता है। अविश्वास आत्मिक जाग्रति में सबसे अधिक बाधक है!

यीशु अपने ग्रह नगर नाजरथ पहुंचे। लोगों ने जब उन्हें सिनेगॉग में प्रचार करते हुये सुना तो ''आश्चर्यचकित'' हो गये। किसी ने उन्हें मात्र एक ''बढ़ई'' का बेटा ठहराया। वे यीशु पर नाराज हो गये। तब बाईबल में लिखा है कि, ''और उस ने वहां उन के अविश्वास के कारण बहुत सामर्थ के काम नहीं किए” (मत्ती१३:५८) डॉ जॉन गिल ने कहा‚ “यह इसलिये नहीं कि उसमें सामर्थ की (कमी) हो गई थी‚ या उनका अविश्वास उसकी सामर्थ के आगे अधिक था; किंतु यीशु उन्हें उनके अविश्वास के कारण उन्हें इस योग्य नही समझता था।” (जॉन गिल, डी डी एन एक्सपोजिशन आँफ दि न्यू टेस्टामेंट, वॉल्यूम १, बैपटिस्ट स्टैंडर्ड बिअरर, १९८९ संस्करण, पेज १५९‚ मत्ती पर व्याख्या १३:५८)

मैं एक व्यक्ति को जानता हूं जिसने एक बड़ी जाग्रति में हिस्सा लिया किंतु उसने इस सभा का लाभ ही नहीं उठाया क्योंकि उसका कथन था कि उसकी नई नई शादी हुई हैं! एक अन्य व्यक्ति को जानता हूं जिसने वर्जीनिया में एक बड़ी जाग्रति में हिस्सा लिया किंतु उसने भी इस सभा का लाभ ही नहीं उठाया क्योंकि उसका कथन था कि ''यह बहुत लंबा आमंत्रण था।'' मुझे ऐसा महसूस होता है कि ये दोनो ही इस संसार में इतने खोये हुए थे कि जब जाग्रति आई तो उन्होंने इसे पसंद ही नही किया! वे दोनों प्रार्थना करने में भी अनिच्छुक थे! हमारी प्रार्थना है कि परमेश्वर हमारी मदद करे कि हम उससे प्रार्थना में और सामर्थ मांगे!

प्रेरित पौलुस ने कहा, “आत्मा को न बुझाओ” (१ थिस्सलुनिकियों ५:१९) अविश्वास और संसारीपन आत्मा को बुझाते हैं! डॉ ल्योड जोंस ने कहा था कि बहुत से धर्मविज्ञानी ''आत्मा को बुझा रहे हैं'' है और जाग्रति में उनकी कोई रूचि नहीं रही। (दि प्यूरीटंस, बैनर आँफ र्टूथ, १९९६ संस्करण, पेज ९)

चेले अविश्वास रखने के कारण एक ताकतवर दुष्ट आत्मा नहीं निकाल पाये (मत्ती १७:२०) । यहूदी अविश्वास रखने के कारण ''प्रतिज्ञा किये देश में प्रवेश नहीं कर पाये'' (इब्रानियों ३:१९) अविश्वास रखने वाले पाप के कारण मुझे पक्का यकीन है कि जाग्रति की आग भी “बुझाई जा सकती” हैं।

बाईबल एक के बाद एक‚ परमेश्वर द्वारा किये जाने वाले सामर्थी कार्यो का वर्णन करती हैं‚ ताकि उसके द्वारा हमारे अंदर विश्वास पैदा किया जा सके। बाईबल में इब्रानियों ११ संपूर्ण अध्याय परमेश्वर में चिश्वास से पूर्ण किए जाने वाले कार्यो का विस्तारपूर्वक ब्यौरा देता है। एक मुख्य कारण कि हमारे यहां जाग्रति क्यों नहीं आती हमें आज भी यह विश्वास नही है कि परमेश्वर हमारे लिये आज भी‚ जाग्रति भेज सकता हैं। इसलिए हमें जाग्रतियों के वर्णन सुनने आवश्यक है चाहे वे बीते समय की ही हो‚ या दुनिया के दूसरे भागों में भी हो रही हो। ताकि हम भी दुष्ट आत्मा से ग्रस्त पुत्र के पिता के समान कह सकें, ''हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर” (मरकुस ९:२४)। जब परमेश्वर जाग्रति भेजने वाला होता है‚ तो वह हमारी प्रार्थना सुनकर अतिरेक प्रवाह से जाग्रति भेजता हैं ताकि और अधिक हमारा विश्वास बढ़ सकें। जब कभी जाग्रति की चर्चा सुनते हो, तो इस पर विशेष ध्यान दो। तब परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह हमारे चर्च में जाग्रति भेजे। मेरे विचार में आपके लिये यह प्रार्थना करना ठीक हैं कि, “''हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं, मेरे अविश्वास का उपाय कर।”

मेरे विचार में एक और बात जो आपको जानना चाहिये कि अधिकतर जाग्रति‚ स्थानीय चर्च मे‚ हमारे यहां के समान‚ या फिर छोटी सभाओं में अक्सर होती है। अधिकतर जाग्रति के उपर जो पुस्तकें हैं, वे भी जाग्रति को एक विशाल घटनाक्रम के रूप में प्रगट करती है जिसमे परमेश्वर − के लिये बहुत सारे जिले प्रदीप्त बताए जाते हैं‚ ऐसे वर्णन इतिहास की धारा ही मोड़ कर रख देते हैं। इन लेखको के लिखने का तरीका अच्छा है, किंतु वे यह भूल जाते हैं कि उनके द्वारा क्या हानि पाठको के साथ की जा रही है जब वे उन्हें इस बात से अवगत नहीं करवाते कि जाग्रति प्रारंभ किस तरह हुई थी। ऐसे विशाल घटनाक्रम, का वर्णन पढ़कर तो आपके भीतर अविश्वास ही पैदा होगा। इससे शैतान को मौका मिलता है यह कहने का कि, ''यहां कभी कुछ बड़ा नहीं घटने वाला!'' इसलिए यह अच्छा होता कि अगर इन लेखकों ने स्थानीय चर्च में होने वाली जाग्रति के बारे में लिखा होता और अतिरेक अभिषेक के बारे में वर्णन किया होता। डॉ ल्योड−जोंस ने इस पर ध्यान दिया था और लिखा था,

हम रविवार चर्च में उपस्थति बनाये रखने के लिये वैसी तैयारी नहीं करते......जैसा हम विशाल सभाओं व अभियानों के लिये करते हैं इसलिए इनकी संख्या भी बढ़ जाती है, यदि हमारे चचेस के लिये ही तैयारी की होती तो जाग्रति की संख्या बढ़ जाती‚ लेकिन ऐसा नहीं होने से इनकी संख्या घट गई हैं। (जाग्रति, उक्त संदर्भित, पेज ६१)

जब मैने चीन की जाग्रति के विडियोज आपको दिखाये, तब ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनको देखकर पता चलता हैं कि जाग्रति वास्तव में अपने विशाल रूप − में संपूर्ण देश में फैल गयी थी। शायद शैतान ने आपको कहा होगा कि, ''यहां कभी कुछ बड़ा नहीं घटने वाला!'' देखा जाये तो, यह सच भी है! यहां अमेरिका में तो शायद ही जाग्रति कभी आने वाली है। मैं यह नहीं कहता कि आप देश में के लिये प्रार्थना मत करो, किंतु मेरा निवेदन है कि स्थानीय चर्च के उपर ध्यान लगाइये! भविष्यदर्शी जर्कयाह ने कहा था, ''क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन को तुच्छ जाना है?” (जर्कयाह ४:१०) डॉ मैगी ने कहा, ''हम अमेरिका वाले छोटी बातों के दिन को तुच्छ समझते हैं हम अमेरिका वाले बड़ी और भड़कीली चीजों से आकर्षित होते हैं......हम सफलता को बड़ी इमारतों और बड़ी आने वाली भीड़ से नापते हैं (जे वर्नान मैगी‚ टी एच डी‚ थ्रू दि बाईबल‚ वाल्यूम ३, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, १९८३, पेज ९२४; जर्कयाह ४:१० पर व्याख्या)

हम कब सीखेंगे कि परमेश्वर इस रीति से काम नहीं करता है? उसने संपूर्ण मनुष्य जाति को नूह के दिनों में केवल ८ लोगों द्वारा बचाया। इब्रानियों के ११ अध्याय में, कोई “बड़ी” सभा का वर्णन नही हैं - केवल व्यक्तियों − का वर्णन हैं। परमेश्वर ने गिदोन को संपूर्ण भीड़ को वापस भेजने को कहा और केवल ३०० लोगों को मिद्यानियों से लड़ने को तैयार रखने को कहा। इतिहास में मुख्य जाग्रति मुटठी भर लोगों से ही आरंभ हुई।

दूसरी तरफ, विशाल जाग्रति ''सभाओ'' ने वास्तव में हमारे जीवन में कोई सच्ची जाग्रति नहीं पैदा की। मैंने पढ़ा था कि बिलि ग्राहम ने स्वीकार किया था कि उनके इवेंजलिकल क्रूसेड से जाग्रति नहीं हुई। अगर हम एक्सप्लो - ७२ को देखें जिसमें कैंपस क्रूसेड क्राईस्ट ने २०००‚००० लोगों को के लिये एकत्रित किया था ताकि डलास‚ टैक्सास में छ: दिन व रात की सभा सुन सके। उससे क्या हासिल हुआ? कुछ ज्यादा नहीं। एक साल पश्चात बिलि ग्राहम ने १ मिलियन के लगभग भीड़ को जून, १९७३ में सिओल, कोरिया में संबोधित किया। विश्व के इतिहास में यह बहुत बड़ी भीड़ थी जो एक प्रसिद् प्रचारक को सुनने आई थी। उससे क्या हासिल हुआ? कुछ ज्यादा नहीं । मुझे यह पक्का भरोसा है कि सिओल व डलास में कुछ लोग बचे होंगे − किंतु इन विशाल सभा से कुछ ज्यादा हासिल नहीं हुआ।

यद्यपि प्रत्येक जाग्रति थोड़े लोगों से प्रारंभ होती है। नार्थन हैंपटन में, मैसाचुसेटस, जोनाथन एडवर्डस चर्च, में पहली विशाल जाग्रति के समय बहुत थोड़े ही लोग हुआ करते थे उसके पश्चात उनकी संख्या बढ़ती चली गई, जिसने समस्त अंग्रेजी भाषी लोगो का संसार ही बदल कर रख दिया। सन १७३८ में, लंदन के एक कमरे में सात आँक्सफोर्ड स्नातक और सत्तर लोग प्रार्थना करने के लिये मिले। पहली विश्व व्यापी विशाल जाग्रति इसी प्रार्थना का परिणाम हैं। १८०६ में कालेज के पांच विदयार्थी मिले और एक टॉल के नीचे प्रार्थना की, इसका परिणाम सामने आया कि मिशनरी अभियान अमेरिका से प्रारंभ हुआ, जो अपने समय की एक विशाल जाग्रति कहलाई। १७२७ मे ४०० लोग काउंट निकोलस वॉन जिनजेंडार्फ जो अब चेक गणराज्य कहलाता है में प्रार्थना करने के लिये मिले। इस तरह जाग्रति प्रारंभ हुई जिसने जगत के छोर तक मिशनरी भेजे। इसी तरह मोरेवियन प्रार्थना सभा से‚ जॉन और चाल्र्स वेस्ली बचाये गये। चेकोस्लोवाकिया में ४०० लोगों की विशाल मेथोडिस्ट जाग्रति आरंभ हुई, इसके अलावा साल्वेशन आर्मी का जन्म हुआ! २३ सितंबर, १८५७ को छ: लोगों ने एक घंटे के लिये मिलकर न्यूयार्क की फुल्टन स्र्टीट के नार्थ डच चर्च में, प्रार्थना की। वे प्रति बुधवार एक घंटे के लिये प्रार्थना करने के लिये सहमत हुए। तीसरी विशाल जाग्रति प्रारंभ हुई और हजारों हजार लोग विश्व में बचाये गए। न्यूयार्क की फुल्टन स्र्टीट की जाग्रति ने तीन हजार मील दूर इंग्लैंड‚ लंदन में‚ सी एच स्र्पजन की सेवकाई को भी प्रेरित किया!

मैं कई सालों से जाग्रतियों के विषय में अध्ययन कर रहा हूं। प्रथम जागरण के बाद मैं एक भी ऐसी बड़ी विशाल सुसमाचारीय सभा को नही जानता जिसने अन्य जाग्रति को जन्म दिया हो। एक भी नही! स्मरण कीजिए उपरी कमरे में पेंतुकुस्त के दिन जहां परमेश्वर का आत्मा उड़ेला गया वहां मात्र १२० लोग प्रार्थना कर रहे थे! उस छोटी सी सभा से संपूर्ण जगत में मसीहत का प्रचार फैल गया!

हम यहां प्रति रविवार सुसमाचार का प्रचार करते है। हम भटके हुए लोगों को यह प्रचार करते हैं कि मसीह आपके पापों का मोल चुकाने के लिये क्रूस पर बलिदान हुआ। हम यह प्रचार करते हैं कि मसीह आपको अनंत जीवन देने के लिये मरे हुओं में से जीवित हुआ। किंतु ये सत्य वास्तविक रूप में पवित्र आत्मा द्वारा प्रगट किये जाते हैं। वह लोगों के भीतर पापों का बोध उत्पन्न करता हैं। पवित्र आत्मा द्वारा उन्हें मसीह के पास खींचा जाना आवश्यक हैं ताकि उसके लहू से उनके पाप शुध्द हो जायें। मै आशा करता हूं कि आप प्रार्थना करेंगे कि पवित्र आत्मा का अतिरेक अभिषेक हमारे चर्च को भी मिले! मैं आशा करता हूं कि जब भी आप प्रार्थना करें तो जाग्रति आने देने के लिये भी प्रार्थना करें। आप प्रार्थना करेंगे कि पवित्र आत्मा का अतिरेक अभिषेक पापियों के मन में भी काम करें। सचमुच परमेश्वर, हम पवित्र आत्मा के अतिरेक अभिषेक के लिये प्रार्थना करते हैं ताकि भटके लोगों के भीतर पापों का बोध उत्पन्न करें‚ उन्हें मसीह के पास खींच कर लायें। हम यीशु के नाम में मांगते हैं। आमीन।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''मुझ पर सांस फूकिंये'' (एडविन हेच, १८३५−१८८९;
बदला गया बी बी मैकिने‚ १८८६−१९५२)