Print Sermon

इन संदेशों की पांडुलिपियां प्रति माह २१५ देशों के १,५००,००० कंम्प्यूटर्स पर इस वेबसाइट पते पर www.sermonsfortheworld.com जाती हैं। सैकड़ों लोग इन्हें यू टयूब विडियो पर देखते हैं। किंतु वे जल्द ही यू टयूब छोड़ देते हैं क्योंकि विडियों संदेश हमारी वेबसाईट पर पर पहुंचाता है। यू टयूब लोगों को हमारी वेबसाईट पर पहुंचाता है। प्रति माह ये संदेश ३५ भाषाओं में अनुवादित होकर १२०,००० प्रति माह हजारों लोगों के कंप्यूटर्स पर पहुंचते हैं। लिये उपलब्ध रहते हैं। पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। आप यहां क्लिक करके अपना मासिक दान हमें दे सकते हैं ताकि संपूर्ण संसार जिसमें मुस्लिम व हिंदु भी सम्मिलित है उनके मध्य सुसमाचार फैलाने के महान कार्य में सहायता मिल सके।

जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net.




ये अंतिम दिन हैं!

(बाईबल भविष्यवाणी संख्या ४)

THESE ARE THE LAST DAYS!
(NUMBER 4 ON BIBLE PROPHECY)
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, ३१ अगस्त, २०१४ लॉस एंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में दिया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, August 31, 2014


निवेदन है कि अपनी बाईबल खोलकर, २ पतरस, ३रा अध्याय पद ३ निकालें। अब खड़े होकर २ पतरस ३:३को पढ़े।

''और यह पहिले जान लो, कि अन्तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप−दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था?'' (२ पतरस ३:३)

आज सुबह मैं इस विषय पर बोलूंगा, ''ये अंतिम दिन हैं!'' ऐसे बहुत से चिन्ह हैं जो यह प्रदर्शित करते हैं कि हम अंतिम समय में रह रहे हैं।

देखिये पतरस ३:३ में क्या लिखा है, ''अंतिम दिनों में ऐसा होगा।'' ध्यान दीजिये ''अंतिम दिनों'' शब्द पर। आपको बाईबल में ये कई बार देखने को मिलेगा। प्रेरित पौलुस ने कहा था, ''अंतिम दिनों में कठिन समय आऐंगे'' (२तिमुथयुस ३:१)। प्रेरित याकूब ने कहा था, ''तुम ने अंतिम युग में धन बटोरा है'' (याकूब ५:३)। प्रेरित यहूदा इसी काल के लिये लिखते हैं ''कि अंतिम दिनों में ऐसे......जो अपनी अभक्ति की अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे'' (यहूदा १८)। फिर से, प्रेरित पौलुस बढते हुये शैतानी आक्रमणों के लिये चेताते हैं कि ''आने वाले समयों में'' ऐसा होगा (१तिमुथयुस ४:१) । प्रभु यीशु मसीह ने अंतिम दिनों की तुलना महाप्रलय के पहले के दिनों से की है। मसीह ने कहा था, ''जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा'' (मत्ती २४:३७)।

बाईबल शिक्षा देती है कि इतिहास में एक समय ऐसा निर्धारित है जिसे अंतिम दिन कहते हैं। बाईबल के अनेक विद्वानों के अनुसार हम इसी काल में जी रहे हैं। मैं मानता हूं वे सही कह रहे हैं। बाईबल सही समय के लिये चेतावनी देती है कि इसे कोई नहीं जानता। किंतु तौभी एक समय काल अवश्य है जिसे ''अंतिम दिनों'' के नाम से जाना जाता है। ''अंतिम दिन'' का अर्थ कुछ दिन या सप्ताह नहीं है। ''अंतिम दिन'' अर्थात अंत आने के पहले का काल खंड। प्रत्येक चिंन्ह जो घट रहा है वह इस बात की ओर इशारा करता है कि हम उस अंतिम काल में ही जी रहे हैं। कुछ वर्ष पहले बिटिश इवंजलिस्ट लेनार्ड रेवनहिल ने कहा था, ''ये अंतिम दिन हैं। प्रश्न यह है, कि ये अंतिम दिन कब तक रहेंगे?'' (लेनार्ड रेवनहिल, अमेरिका इज टू यंग टू डाय, बैथेनी हाउस पब्लिशर्स, १९७९, पेज ५०)। डॉ. एम.आर.देहान, एम.डी., दि ज्यू एंड पेलेस्टाईन इन प्राफेसी, जोंडरवन पब्लिशिंग हाउस, १९७८, पेज १७)।

अन्तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था? (२ पतरस ३:३−४)

पद में अगला शब्द है ''ठटटा करने वाले'' ये लोग मसीह के दूसरे आगमन और दुनियां के खत्म होने की बात की हंसी उडाते हैं। वे ठटटा करते हैं और हंसते हैं। वे असंतुलित दिमाग के और अविश्वासी लोग हैं। वे मसीह के दूसरे आगमन की हर बात का मखौल उडाते हैं। वे इस संसार के अंत की हर बात का इंकार करते हैं। वे इसे ''नकारात्मक सोच'' करार देते हैं - और इसे वे अपने ख्याल से भी बाहर निकाल देते हैं।

क्यों ये लोग ठटटा उड़ाते और हंसते हैं? पद में अगले शब्द ये बताते हैं कि, ''वे अपनी देह की अभिलाषाओं के पीछे भागते हैं।'' वे अपने स्वार्थ और पाप में ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसलिये वे चाहते हैं कि ये दुनियां चलती रहे और मसीहा का आगमन न हो। क्योंकि प्रभु यीशु मसीह उनकी पापमयी जीवन शैली में दखल देंगे। ये ठटटा करने वाले किन्हीं चिन्हों को पहचानना नहीं चाहते − बाईबल नहीं पढना चाहते। सच्चाई जानने से परे रहना चाहते हैं − क्योंकि ठटटा करना उनकी आदतों में शामिल है, और वे केवल दैहिक लालसाओं को पूर्ण करने में लगे हुये हैं।

कुछ समय पहले मैंने यू सी एल ए के स्नातक स्तर के समारोह में भाग लिया था। हजारों लोग वहां मौजूद थे। उस समारोह के वक्ता ने संसार में घटने वाली आतंकी घटनाओं की लंबी सूची बतलाई − ग्लोबल वार्मिंग, अतिरिक्त जनसंख्या, प्रदूषण,पर्यावरण असंतुलन, वर्षा करने वाले वनों का नष्ट होना, ईरान, नार्थ कोरिया और पाकिस्तान से धर्मो न्यूक्लियर युद्ध का खतरा, सैंकडो जातियों का विलुप्त होना, और वैश्विक आतंकवाद का खतरा। किंतु ये सब गिनाने के उपरांत उन्होंने यह भी कहा कि, ''अंत समय की भविष्यवाणी करने वाले लोगों पर भरोसा मत करना। इस संसार का अंत होने नहीं जा रहा है'' बिल्कुल यही शब्द थे उनके! मैंने उनके इन शब्दों को कागज के टुकडे पर लिखकर मेरी जेब में रख लिया! इतनी सारी भयानक दशाओं का वर्णन करने के उपरंत वह कहते हैं, ''यह संसार समाप्त नहीं होगा। इसकी भविष्यवाणी करने वाले भविष्यवक्ताओं पर भरोसा मत करो।'' मैं और कुछ नहीं बस यह पद याद करने लगा,

''अन्तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे .....कहेंगे उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई?'' (२पतरस ३:३−४)

उस स्नातक स्तर के समारोह के वक्ता ने कहा था, ''यह संसार समाप्त नहीं होगा।'' बैरी मेकगॉयर ने १९६५ में कहा था, ''आप मानेंगे नहीं किंतु यह सच है कि हम नष्ट होने की कगार पर खडे हैं।'' मैंने तब भी इस बात पर विश्वास किया था और आज भी करता हूं! हम वियतनाम युद्ध के समय भी ''अंतिम दिनों'' में थे। इजरायल राष्ट्र........का जन्म १९४८ में हुआ था। कम्यूनिस्टों ने १९४९ में चीन को अपने कब्जे में ले लिया। १९५० में थर्मोन्यूक्लियर नरसंहार को शीत युद्ध ने भड़काया। राष्ट्रपति कैनेडी को १९६३ में उनके सिर पर गोली मारी गई। उसके पश्चात माल्कम दसवें को गोली मारी गई। उसके पश्चात डॉ. मार्टिन लूथर किंग को। उसके बाद बॉबी कैनेडी को। रॉक संगीत और नशीली दवाओं ने पूरी पीढ़ी का दिमाग ही उड़ा कर रख दिया है। जमाना बहुत बदल चुका है। हमारी सभ्यता टुकड़े टुकड़े होकर बिखर रही है। जैसा कि लेनार्ड रेवनहिल ने कहा था, ''ये अंतिम दिन है। पर प्रश्न यह है कि, ये अंतिम दिन कब तक रहेंगे?''

चेले भी जानना चाहते थे कि यह संसार कब खत्म होगा, और यह युग कब समाप्त होगा। उन्होंने मसीह से पूछा कि उन्हें कोई चिन्ह दिखलायें। मसीह ने उन्हें कई चिन्ह बतलाये, जो मत्ती २४ में दर्ज है, और उसी के समान लूका २१ में भी पढ़े जा सकते हैं। मत्ती २४ में मसीह का उत्तर भी दिया हुआ है; अंत के बहुत से चिन्ह दिये गये हैं। लूका २१ में भी और अधिक चिन्ह बतलाये गये हैं। आज सुबह मैं लूका २१ में दर्शाये चिन्हों पर ध्यान लगाउंगा। ''तेरे आने का, और जगत के अंत का क्या चिन्ह होगा?'' (मत्ती २४:३)। लूका के इक्कीसवें अध्याय में मसीह ने उसका उत्तर भी दिया।

१. प्रथम, पर्यावर्णीय चिन्ह दिखाई देंगे।

यीशु ने कहा कि

''और बड़ें बड़ें भूईडोल होंगे....... जगह जगह अकाल और मरियां पड़ेंगी.......आकाश में भयंकर बातें और बड़े बड़े चिन्ह प्रगट होंगे और सूरज और चान्द और तारों में चिन्ह दिखाई देंगें, और पृथ्वी पर, देश देश के लोगों को संकट होगा; क्योंकि वे समुद्र के गरजने और लहरों के कोलाहल से घबरा जाएंगे और भय के कारण और संसार पर आनेवाली घटनाओं की बाट देखते देखते लोगों के जी में जी न रहेगा।'' (लूका २१:११, २५−२६)

इस बारे में सोचिये! यीशु ने कहा था कि ''धरती पर होने वाली'' घटनाओं के कारण लोगों के दिल दहल जायेंगे। उसने कहा कि लोगों में निराशा , दुख, और बड़ा भय व्याप्त हो जायेगा। जब वे इन घटनाओं को होते देखेंगे,

''और संसार पर आनेवाली घटनाओं की बाट देखते देखते लोगों के जी में जी न रहेगा'' (लूका २१:२६)

जब आप उत्तरी ध्रुव को पिघलता हुआ देखते हैं और वातावरण पर उसके दुष्परिणाम भी देखते हैं तो डर जाते हैं। जब आप महसूस करते हैं कि अफ्रीका में एडस महामारी की तरह फैल रहा है जिसका कोई अंत समझ नहीं आता − तो यह डराने वाली बात है। जब आप टी.बी. बीमारी को एंटीबायोटिक लेने के बाद भी फिर से जीवित होते देखते हैं, या कोई ''नई भक्षक'' बीमारी, जैसे इबोला, और अन्य कोई महामारी जिस पर दवा भी असर नहीं करती − तो यह बहुत डराने वाली बात है।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि जवान लोग अपने भविष्य के प्रति चिंतित हैं। थोड़े समय पूर्व किये गये एक सर्वे में पाया गया कि आजकल के किशोर यह जानते हैं कि उनका भविष्य इतना अच्छा नहीं होगा। यह इस बात को भी दर्शाता है कि ये जवान लोग अक्सर पर्यावर्णीय समस्याओं से भी चिंतित हैं, जैसे उत्तरी धुव के पिघलने से संसार भर में कैसा विध्वंस फैल जायेगा!

अखबारों में भी पर्यावरण बिगड़ने से उपजी समस्याओं के बारे में हम प्रतिदिन पढ़ते हैं तो यह बहुत डराने वाली बात है। ये वे चिन्ह हैं जब संसार का अंत नजदीक है, और मसीह का द्वितीय आगमन, भी बहुत नजदीक है।

२. तब, दूसरे स्थान पर, जातीय संघर्ष है।

कई लोग यहूदियों से नफरत करते हैं और इजरायल देश से भी। न्यू यार्क में मेट्रपोलिटिन ओपेरा शीत ॠतु में एक ओपेरा प्रस्तुत करने जा रहा है जिसका नाम है, ''दि डेथ आँफ क्लिंग हॉफर''। यह बताता है कि फिलिस्तीनी आतंकवादी एक ६९ साल बूढे यहूदी को जो व्हीलचेयर पर बैठा है उसकी हत्या कर देते हैं। यह दर्शाता है कि आतंकवादी जैसे स्वतंत्रता सेनानी है और वे असहाय बूढे यहूदी की हत्या करके एक उचित काम कर रहे हैं। इसमें प्रमुख आतंकवादी सरगना गाता है, ''जहां कहीं गरीब लोग जमा होते हैं; वे यहूदियों को तंदुरूस्त होता देखते हैं। तुम यहूदी जानते हो कि कैसे भोले भाले लोगों को धोखा देना (और) जिनको धोखा दिया उनकी प्रतिष्ठा को नीचे गिराना....अमेरिका भी एक बडा यहूदी है।'' मैं आप सभी लोगों से निवेदन करता हूं कि पीटर गेल्ब को ई मेल भेजकर इस नफरत फैलाने वाले किसी जाति विशेष के विरूद्ध खेले जाने वाले नाटक का विरोध करें इस ई मेल पते पर pgelb@metopera.org मि.गेल्ब न्यूयार्क शहर में मेट्रापोलिटन ओपेरा के मैनेजर हैं। उन्हें फोन करके ''दि डेथ आँफ क्लिंगहॉफर'' नाटक की प्रस्तुति को रदद करने के लिये कहिये (ज्यूईश स्टैंडर्ड से लिया गया समाचार, १९ अगस्त, २०१४) यहूदियों के विरूद्ध जातिगत शत्रुता अब समस्त विश्व की समस्या बन गई है। इसी संदर्भ में यीशु ने कहा था,

''जब तुम यरूशलेम को सेनाओं से घिरा हुआ देखो, तो जान लेना कि उसका उजड़ जाना (निकट है)'' (लूका २१:२०)

अंतिम दिनों में यहूदियों के विरूद्ध नफरत इतने दर्जे तक बढ़ जायेगी कि अन्यजातियों की सेना चढ़ाई करके इजरायल से यहूदी लोगों को नष्ट करेगी। हिटलर ने यहूदियों को जड़ से खत्म करने की कोशिश की थी किंतु नाकामयाब रहा क्योंकि इस जगत में यहूदी परमेश्वर के चुने हुये लोग कहलाते हैं।

''वे सुसमाचार के भाव से तो तुम्हारे बैरी हैं, परन्तु चुन लिये जाने के भाव से बाप दादों के प्यारे हैं।'' (रोमियों ११:२८)

बाईबल पर अथाह भरोसा रखने वाले बैपटिस्ट इजरायल के कटटर समर्थक हैं। हमें यहूदियों की तरफ खडे होना चाहिये और इजरायल देश के लिये भी किंतु बाईबल बताती है कि यह अविश्वासी जगत अंतिम दिनों में यहूदियों के विरूद्ध हो जायेगा। बाईबल में लिखा है,

''तब मैं उसको इतना भारी पत्थर बनाऊंगा, कि जो उसको उठाएंगे वे बहुत ही घायल होंगे।'' (जर्कयाह १२:३)

यह अभी भी हो रहा है। यह इस बात का चिन्ह है कि हम इस युग के अंतिम दिनों में रह रहे हैं। मसीही लोगों को इन ''अंतिम दिनों के'' गहराते अंधकार में भी इजरायल और यहूदियों के साथ खड़े रहना चाहिये।

३. और तब, कुछ धार्मिक चिन्ह भी घटित होंगे - झूठे धर्म खड़े होंगे।

यीशु ने कहा,

''उस ने कहा चौकस रहो कि भरमाए न जाओ: क्योंकि बहुतेरे मेरे नाम से आकर कहेंगे..... तुम उन के पीछे न चले जाना'' (लूका २१:८)

मसीह ने फिर कहा:

''क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिन्ह और अद्भुत काम दिखाएंगे, कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें।'' (मत्ती २४:२४)

टी बी एन पर जो आप देखते हैं कई चीजों का प्रसारण एक छलावा है। कई इवेंजलीकल कार्यक्रम धोखा और उलझन पैदा करने वाले हैं। प्रेरित पौलुस ने कहा था,

''क्योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे।'' (२तीमुथियुस४:३)

४. चौथा, मसीहियों के विरूद्ध सताव पनपेगा।

मसीहियों के विरूद्ध पूरे संसार में तीव्र गति से अत्याचार बढ़ रहा है। मान लीजिये, चीन में सच्चे मसीहियों को भूमिगत ''घरेलू चर्च'' में आराधना छुप कर करनी पड़ती है। जब चीन में सांस्कृतिक क्रांति उपजी तब हजारों चीनी मसीहियों को उनके विश्वास के कारण, जेल में डाल दिया गया। हमारे अखबारों में छप रही खबरें जो बताती है कि मुस्लिम जिहादी किस तरह प्रतिदिन मसीहियों की हत्या कर रहे है। यीशु ने पहले ही बता दिया था कि मसीहियों के उपर भारी सताव आयेगा। प्रभु यीशु ने कहा था,

''वे मेरे नाम के कारण तुम्हें पकड़ेंगे, और सताएंगे, और पंचायतों में सौपेंगे, और बन्दीगृह मे डलवाएंगे, और राजाओं और हाकिमों के साम्हने ले जाएंगे।'' (लूका २१:१२)

तब उसने यह भी कहा था कि अविश्वासी माता पिता और संबंधी अपने स्वयं के बच्चों को सच्चे मसीही बनने के कारण सतायेंगे। ऐसा अक्सर होता है जब एक जवान मुस्लिम मसीही बन जाता है। हमने तो यहां अमेरिका में इसे बार बार होते देखा है। मसीह ने कहा था:

''और तुम्हारे माता पिता और भाई और कुटुम्ब, और मित्र भी तुम्हें पकड़वाएंगे...... और मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे।'' (लूका २१:१६−१७)

कीमत चुकानी होती है! अगर आप सच्चे मसीही हैं तो कोई आपके मसीही बनने को नापसंद कर सकता है! कोई आपके विरूद्ध हो सकता है! इन अंधकार वाले दिनों में सच्चे मसीही बनने की कीमत चुकानी होगी! अंतिम दिनों के चिन्हों में से एक चिन्ह यह भी है।

५. पांचवा, मसीह ने हमें मनोवैज्ञानिक चिन्ह भी दिये।

मसीह ने कहा था:

''इसलिये (सावधान रहो) , ऐसा न हो कि तुम्हारे मन खुमार और मतवालेपन, और इस ....जीवन (की) (चिन्ताओं) से (थक जाएं, सुस्त हो जाएं) और वह दिन तुम पर फन्दे की नाईं अचानक आ पड़े। क्योंकि वह सारी पृथ्वी के सब रहने वालों पर इसी प्रकार आ पड़ेगा।'' (लूका २१:३४−३५)

एक जवान लड़का जो यहां चर्च आया करता था कहने लगा, ''मैं अगले रविवार आ नहीं सकता। मुझे मेरी आंटी को घर बदलने में मदद करनी है।'' उसके पास यह काम करने के लिये छ: दिन थे, किंतु यह काम रविवार सुबह ही, ''करना'' था। वह जिंदगी की समस्या के आगे झुक गया। कई लोग हल्की फुल्की मूर्ख सी बातों के कारण चर्च छोड़ देते हैं। वे अपने जीवन की समस्याओं से थके थके जा रहे हैं। वे यह जानते भी नहीं हैं कि न्याय का दिन उन पर आ पड़ेगा। जब परमेश्वर का न्याय सामने आयेगा तब वे उसके लिये मानसिक रूप से तैयार भी नहीं होंगे!

माना कि आप नशीली दवायें और सेक्स नहीं करते हैं, किंतु काम और नौकरी के बोझ से दब जाते हैं, तब ''इस जीवन की चिंता'' आपको खाने लगती है। मैंने कई जवान लोगों को इस बुराई का शिकार होते देखा है।

तब यीशु ने कहा ;

''इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो'' (लूका २१:३६)

अंतिम युग में होने वाली घटनाओं के लिये और न्याय के लिये हमें तैयार रहने की आवश्यकता है और इन दो बातों को करने की आवश्यकता है:

१. पुन: चर्च में आईये। अगर आप चर्च नहीं आते हैं तो हम आपकी कोई मदद नहीं कर पायेंगे।

२. मसीह के पास आइये। वह आपके पापों का दंड चुकाने के लिये मरा। वह मरे हुओं में से जी उठा। वह परमेश्वर के दाहिने हाथ बैठा हुआ है। वह आपके लिये सदैव उपस्थत है। उसके पास आईये और वह आपके पापों को धो देगा।

६. छटवें स्थान पर, चर्चेस में मसीहियों का प्रेम दिखाई नहीं देगा।

चेलों ने उससे पूछा,

''ये बातें कब होंगी और तेरे आने का, और जगत के अन्त का क्या चिन्ह होगा?'' (मत्ती २४:३)

मत्ती २४ में मसीह ने जो चिन्ह बताये उनमें से एक चिन्ह यह भी था - चर्चेस में खोये हुये जन के प्रति कोई प्रेम बाकि नहीं रहेगा। मसीहत अब बिना तरस, बिना मित्रता और बिना प्रेम के खोखली हो चली है। जब चेलों ने उसके आने का और जगत के अंत का समय पूछा, तो उसने कहा,

''और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्डा हो (पड़) जाएगा।'' (मत्ती २४:१२)

कई चर्चेस आज ठंडे पडे हुये हैं। उनकी कोई प्रतिकिृया ही नहीं है। आज चर्चेस में जब आप प्रवेश करते हैं तो मुश्किल से कोई एक सच्चा मित्र मिलेगा। सचमुच, ईश्वर हमारी सहायता करे! जब चर्चेस में परमेश्वर का आत्मा वास नहीं करता है तो हमारे चर्चेस में लोगों के मन से मित्रता और प्रेम का भाव उठ जाता है!

''बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा।'' (मत्ती २४:१२)

जिस चर्च में परमपिता की उपस्थति नहीं उस चर्च को खोये हुये लोगों की चिंता कैसे होगी। ऐसा चर्च निर्जीव चर्च ही तो कहलायेगा, भले ही वे कितने ही लोगों की भीड़ अपने यहां जमा कर लें, चाहे जितने आने जाने के साधन उपलब्ध करवा दें, चाहे जितना सुसमाचार प्रचार वे कर लें! वे तो निर्जीव चर्च हैं क्योंकि मुश्किल से उनके अंदर मसीही प्रेम दिखाई देगा।

''अंतिम दिनों'' के इस युग में परमेश्वर बिना प्रेम वाली मसीहत से हमारे चर्च को बचाये। इसमें आने वाले प्रत्येक जन के साथ राजकुमार के समान व्यवहार किया जाना चाहिये, और प्रत्येक जो कुछ महिनों के लिये आते हैं उन्हें राजा के समान सम्मान देना चाहिये, और प्रत्येक जन को प्रार्थना में परमेश्वर से मांगना चाहिये कि उनका चर्च पापी जन के प्रति प्रेम से भरा रहे। नहीं तो चर्च के लिये एक दिन ऐसा कहा जायेगा,

''तू जीवता तो कहलाता है, पर है मरा हुआ।'' (प्रकाशितवाक्य ३:१)

इस सप्ताह खोये हुओं के लिये प्रेम व उत्साह से भरकर जाइये। बुधवार और गुरूवार की रात लोगों से व्यक्तिगत जाकर मिलिये और सुसमाचार प्रचार कीजिये ताकि हम उन्हें फोन करके चर्च आने के लिये आमंत्रित कर सकें। उसके बाद जब भी सुसमाचार सुनाने के लिये आप निकलते हैं तो अधिक से अधिक नाम लेकर आइये। अधिक नाम लाइये और फोन नंबर्स ताकि − हम बाद में उन लोगों से मिल सकें, और उन्हे मसीह का सुसमाचार सुनाने के लिये चर्च में ला सकें।

किंतु यह तो सच्चे सुसमाचार सुनाने का प्रारंभ ही है। जब वे अंतत:, यहां चर्च में आने लगेंगे, तब हमें उनकी सहायता करना अवश्य है ताकि वे चर्च की संगति में निरंतर बने रहें। चर्च छूटने के बाद कोई भी केंपस में अकेले खड़ा न रहे। अपनी आंखें खुली रखिये कि चर्च के बाद आप सब लोगों से बराबर मिलें और कोई अकेलापन महसूस न करने पाये। खूब प्रार्थना कीजिये पूरे सप्ताह भर कि आप रविवार को चर्च आने वालों के प्रति बड़ा प्रेम दिखा सकें।

जिनके पास कोई आशा नहीं है उनके लिये ये बड़े मुश्किल और डरावने दिन हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि आप यीशु के पास आयेंगे और उसके हमारे बदले दिये गये बलिदान से क्षमा प्राप्त करेंगे। हम प्रार्थना करते हैं कि आपको परमेश्वर पिता में प्रभु यीशु मसीह के द्वारा शांति मिले! हम दुआ करते हैं कि आप अगले सप्ताहांत में पुन चर्च आयेंगे ताकि प्रभु यीशु द्वारा उद्धार संभव है यह सीख सकें! क्योंकि वही परमेश्वर का पुत्र है! डॉ.चॉन, निवेदन है कि प्रार्थना में हमारी अगुवाई कीजिये, आमीन।

(संदेश का अंत)
आप डॉ0हिमर्स के संदेश प्रत्येक सप्ताह इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं क्लिक करें
www.realconversion.com अथवा www.rlhsermons.com
क्लिक करें ‘‘हस्तलिखित संदेश पर।

आप डॉ0हिमर्स को अंग्रेजी में ई-मेल भी भेज सकते हैं - rlhymersjr@sbcglobal.net
अथवा आप उन्हें इस पते पर पत्र डाल सकते हैं पी. ओ.बॉक्स 15308,लॉस ऐंजेल्स,केलीफोर्निया 90015
या उन्हें दूरभाष कर सकते हैं (818)352-0452

ये संदेश कॉपी राईट नहीं है। आप उन्हें िबना डॉ0हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते
 हैं। यद्यपि, डॉ0हिमर्स के समस्त वीडियो संदेश कॉपीराइट हैं एवं केवल अनुमति लेकर
ही उपयोग में लाये जा सकते हैं।

संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया ऐबेल प्रुधोमे द्वारा: २ पतरस ३:३−९
संदेश के पूर्व बैंजामिन किन्केड गिफिथ द्वारा एकल गीत गाया गया:
''नष्ट होने की शाम'' (बैरी मेकगायर, १९६५ संस्करण)/
''इन समयो के समान'' (रूथ के जोंस, १९०२−१९७२)


रूपरेखा

ये अंतिम दिन हैं!

(बाईबल भविष्यवाणी संख्या ४)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स

''और यह पहिले जान लो, कि अन्तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप−दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्टि के आरम्भ से था?'' (२ पतरस ३:३)

(२तीमुथियुस ३:१; याकूब ५:३; यहूदा १८; १तीमुथियुस
४:१; मत्ती २४:३७,३)

वे गलत हैं क्योंकि कई चिंन्ह बताते हैं कि अंत काल निकट है।

१. प्रथम, पर्यावर्णीय चिन्ह दिखाई देंगे, लूका २१:११,२५−२६

२. तब, दूसरे स्थान पर, जातीय संघर्ष है, लूका २१:२०; रोमियों ११:२८;
जर्कयाह १२:३

३. और तब, कुछ धार्मिक चिन्ह घटित होंगे - झूठे धर्म खड़े होंगे, लूका २१:८;
मत्ती २४:२४; २ तीमुथियुस ४:३

४. चौथा, मसीहियों के विरूद्ध सताव पनपेगा, लूका २१:१२; १६−१७

५. पांचवा, मसीह ने हमें मनोवैज्ञानिक चिन्ह भी दिये, लूका २१:३४−३५,३६

६. छटवें स्थान पर, चर्चेस में मसीहियों का प्रेम दिखाई नहीं देगा; मत्ती
२४:३,१२; प्रकाशितवाक्य ३:१